प्रार्थना
ओम स्थापकाय यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः
How to teach spiritual values to the students
यहां पे हमारा कंप्यूटर क्लासेस और लाइब्रेरी वगैरह है स्टूडेंट्स के लिए तो उन लोगों के लिए मैं क्लास लेता हूं प्रतिदिन एवरीडे 15 मिनट्स। तो बहुत बार मैं सोचता हूं कि उनको एक्चुअली ऐसा क्या सिखाया जाए इस 15 मिनट में जो कि उन लोगों को सही-सही काम में लग पाए। हम उनको फिलॉसोफी सिखा सकते हैं और भी बहुत कुछ सिखा सकते हैं यदि चाहे तो। किंतु क्या है कि दो चीज है अ कि इन लोगों का हमारे साथ में एसोसिएशन है वह बड़ा शॉर्ट टाइम के लिए है। हमारे जितने भी क्लासेस है वह 2 महीने का ड्यूरेशन होता है। उसमें भी फिर संडे को छुट्टी होता है और फिर बीच में कुछ-कुछ हो जाता है। अभी जैसे यह मेरा समर कैंप चालू हो गया था तो प्रतिदिन शायद क्लास ना भी हो पाए। तो 2 महीना तो क्लास लेना है। ऊपर में से सिर्फ 15 मिनट है। तो विद इन दैट वेरी शॉर्ट पीरियड ऑफ टाइम बच्चों को स्टूडेंट्स को ऐसा तो क्या सिखा सकते हैं व्हिच विल बी वेरी यूज़फुल टू देम इन देयर फ्यूचर। तो शुरू-शुर में मैंने बहुत सारे एक्सपेरिमेंट किए। ठाकुर मास्वामी जी की जो छोटी-छोटी कहानियां हैं। फिर यह वेदांत के कुछ कांसेप्ट है। अपने सनातन धर्म के जो कुछ कांसेप्ट होते हैं जैसे कि चार पुरुषार्थ चार आश्रम यह वगैरह क्या-क्या है यह वेद फिर यह जो हमारे जो मूलभूत ग्रंथ जो है फाउंडेशनल स्पिरिचुअल टेक्स्ट ऑफ हिंदूइज्म तो श्रुति स्मृति न्याय वगैरह-वगैरह कितने तरह के उपनिषद है कठोपनिषद की कहानी ऐसे बहुत सारे मैंने एक्सपेरिमेंट किए देखा कि उन लोगों को इंटरेस्ट भी आता है किंतु अल्टीमेटली मैंने देखा कि यदि ऐसा ऐसा कुछ मुझे करना है वि इफ इट विल बी वेरी यूज़फुल टू देम इन द फ्यूचर तो ऐसा कुछ सिखाए जैसे कि ध्यान है। किंतु अगेन सेम क्वेश्चन हमारे सामने आता है कि 15 मिनट में आप ध्यान किस तरह से सिखाएंगे? क्योंकि जो लोग हमारी परंपरा के साथ में जुड़े हुए हैं रामकृष्ण विवेकानंद भावधारा के साथ में हम लोगों को पता है कि ध्यान का अर्थ क्या है? दो तरह के ध्यान है। एक तो है कि अद्वैत का महावाक्य विचार। दूसरा है द्वैत का शरणागति प्रार्थना और भाव ईश्वर के साथ में कोई भी एक रिलेशन एस्टैब्लिश करना। अभी यह जो दोनों तरह की साधनाएं हैं वो इटसेल्फ आर वेरी आपको क्या है कि बहुत डीप अंडरस्टैंडिंग चाहिए। लंबे समय तक आपको इसका थ्यरी भी समझना होगा। इसको प्रैक्टिकल भी करना होगा। तब कहीं जा और फिर इन सब चीजों में सीरियस इंटरेस्ट भी चाहिए। यदि हमारे हमारे हम में इतना सीरियस इंटरेस्ट नहीं है या तो फिर हम इतना टाइम नहीं दे पाएंगे तो फिर यह सब साधनाएं डिफिकल्ट हो जाती है। ऐसा लगेगा कि हमको बिना मतलब कोई हमारा टाइम वेस्ट कर रहा है। यदि हम 15 मिनट में यह सब सिखाने को जाएंगे। तो मैं यह सब सोच रहा था कि किस तरह से उनके सामने यह जो अपने वेदांत के मॉडल है थोड़ा सा सिंपलीफाई करके रखा जाए और सिंपल मेथड्स ऑफ साधना इनको बताई जाए मेडिटेशन। तो जिस तरह से मैंने कुछ प्लान किया है जस्ट आई वांट टू शेयर विद यू कि देखिए कि सबसे पहली बात तो है कि मेडिटेशन के स्पिरिचुअल बेनिफिट तो है ही है। तो यह तो हम लोगों को बताते ही है। जनरली ज्यादातर लोग अवेयर भी होते हैं। किंतु स्टूडेंट्स के लिए इन लोगों का माइंडसेट देखिए कि प्रोग्रेसिव माइंडसेट है। उन्होंने एंथूजियास्टिक उनका नेचर है और फ्यूचर इन लोगों के लिए बड़ा ब्राइट होता है। यह जो एज ग्रुप जो है कि हम लोग एक बार 45 50 क्रॉस कर जाते हैं तो फिर क्या है कि हम लोग हमेशा हमेशा तो नहीं किंतु कई बार ऐसा होता है हम पीछे की ओर देखते हैं कि हां मैंने यह चॉइस किया होता तो अच्छा होता वह चॉइस किया होता तो अच्छा होता। एक रिग्रेट का एलिमेंट हमारे जीवन में ऐड हो जाता है। किंतु यह जो यंग लड़के लड़कियां हैं उन्होंने तो अभी तक रिग्रेट देखा ही नहीं है। देखा होगा ऐसा तो यह संसार किसी को छोड़ता नहीं है। माया किसी को छोड़ती नहीं है। तो जीवन में दुख कष्ट ना आया हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। छोटे बच्चों को भी यह सब कुछ लगता है। माने वो लोग सहन समझ सकते हैं कि हां मेरे जीवन में कष्ट है। ये मां ने कहा था मोस्ट प्रोबेबबली मां ने ही कहा था कि उस समय में वो जो जिस तरह से अकाल वगैरह पड़ रहा था तो मां कहती है कि अभी छोटा बच्चा भी समझता है कि दुख क्या है। वो वो भी कहता है कि मेरे पास में पहनने के लिए कपड़े नहीं है। तो खैर वह तो उस समय के भारत की बात थी कि जब भारत बहुत ही अह एक क्या कहेंगे कि जो सिविलाइजेशनल जो सिचुएशन होती है हमारी जो सिविलाइजेशनल डेवलपमेंट होता है उसमें कहां पे पीछे पड़ा हुआ था। दूसरे देश आकर के हमारा एक्सप्लइटेशन कर जा रहे थे। हम कुछ कर नहीं पा रहे थे। तो खैर किंतु देखिए कि इवन छोटा बच्चा भी जैसे मां ने कहा कि उसके सामने कष्ट आता है तो वह समझता है कि यह कष्ट क्या है। किंतु फिर भी एक बार आप उस समय क्या है कि माइंड बड़ा रेिलिएंट होता है। एक स्पिरिट की शक्ति होती है। एक माइंड का एक स्ट्रेंथ विल पावर का एक स्ट्रेंथ होता है। फिर धीरे-धीरे करके जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे यह स्पिरिट है, विल पावर है, एंथूजियाज्म है, वह सब कम होता जाएगा। किंतु यह लड़कों में तो जो यंग लड़के हैं, उनके भीतर में तो यह बड़ा स्ट्रांग स्पिरिट होता है। तो, फिर इन लोगों को फॉरवर्ड लुकिंग मेथड्स बतानी होगी। फॉरवर्ड लुकिंग आइडियाज के अनुसार इनको सिखाना होगा। तो सबसे पहली बात तो यह है कि स्पिरिचुअल बेनिफिट है ही है मेडिटेशन का। किंतु साथ में देखिए कि
Benefits of regular meditation for students
ध्यान करने से रेगुलर मेडिटेशन करने से मेमोरी इंप्रूव होता है। जैसे कि स्वामी जी के जो फेमस उदाहरण है वह कुछ बताना है। फिर यह उसके साथ में इंटेलेक्ट इंप्रूव होता है। साथ-साथ में ही यह क्या कहेंगे? इमोशनल बैलेंस जिसको कि कहते हैं कि स्ट्रेस मैनेजमेंट आजकल जिसको कहा जाता है कि जीवन में यदि स्ट्रेस आता है तो उसको कैसे लिया जाए उसको किस तरह से संभाला जाए। बहुत बार होता है ना लोगों के जीवन में छोटा-मोटा स्ट्रेस भी आता है तो यह लोग सहन नहीं कर पाते। वे लोगों का बिहेवियर एकदम एबनॉर्मल हो जाता है। या तो बहुत ज्यादा गुस्सा करेंगे या तो फिर एडिक्शन में चले जाएंगे ना कि ऐसा किसी को हानि पहुंचाएंगे। क्राइम के रास्ते पर चले जाएंगे। तो यह स्ट्रेस हैंडल नहीं कर पाने की वजह से यह एबनॉर्मलिटीज खड़ी होती है। तो मेडिटेशन करने का यह एक मेजर बेनिफिट है स्ट्रेस मैनेजमेंट या तो फिर इमोशनल बैलेंस। और इससे सबसे ज़्यादा आज के युग के
Creativity: Benefits of regular meditation for students
लिए जो सबसे ज़्यादा उपयोगी है वह है क्रिएटिविटी। क्योंकि देखिए कि ये सब स्टूडेंट्स है वह सब जॉब मार्केट में एंटर होंगे। तो अभी आजकल देखते हैं कि एआई जिस तरह से पहले तो एक था कि मशीन जैसे आना शुरू हुए तो यह जो ब्लू को कॉलर जॉब्स थी यह जो लेबर वर्क जितना भी था बहुत सारा अभी लेबर वर्क देखेंगे कि आप आदमी नहीं करके वो जो मशीन कर रहे हैं यह जो बड़ी-बड़ी कार मेकिंग फैक्ट्री होती है वहां पर देखेंगे कि मशीन ही एक के बाद एक कंपोनेंट्स को इधर-उधर घुमाते हैं। मशीन के द्वारा ही वेल्डिंग होता है। मशीन के द्वारा ही असेंबलिंग होता है। तो यह मैन्युफैक्चरिंग एक बहुत बड़ा फील्ड था कि लोगों को जॉब दिलवाने का। अभी मैन्युफैक्चरिंग के फील्ड में ऑटोमेशन प्रवेश कर गया है। काफी सालों से यह चल रहा है। तो यह तो एक प्रश्न है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग जॉब वैसे ही नहीं है। ऊपर में से हम लोग यह जितने भी इंडस्ट्रियल स्टेजेस है उसको लिप फ्रॉग करके उसको जंप लगा के सीधा ऑटोमेशन एआई के एज में प्रवेश किया है। यानी कि चाइना है या तो फिर यूरोप है या तो अमेरिका है। उन लोगों ने ये मैन्युफैक्चरिंग एंप्लॉयमेंट स्टेज से ये लोग पसार हुए हैं। ये लोग पास हुए हैं। तो उन लोगों की जनरेशन को मैन्युफैक्चरिंग जॉब की वजह से वे लोग अपना एक अच्छा हेल्दी फैमिली और इकोनॉमिक लाइफ गढ़तर कर पाए थे। बच्चों का परवरिश कर पाए थे। आजकल ऐसा है कि भारत में खास करके कि मेन्यू मैन्युफैक्चरिंग जॉब ईजीली नहीं मिलती है। तो फिर इसलिए एक तो फिर क्या है कि यह बेकारी का जो प्रमाण है अनइंप्लॉयमेंट का वैसे ही बहुत ज्यादा है। तो यह तो एक प्रॉब्लम है। दूसरा यदि हम यह सोचेंगे कि हम यह उसमें जाएंगे वाइट कॉलर जॉब में जाएंगे। सर्विस जॉब में जाएंगे। तो यह सर्विस सेक्टर में भी देखिए अभी मैं रिसेंटली एक स्टडी पढ़ रहा था। हावर्ड यूनिवर्सिटी का स्टडी है। तो उसमें इस तरह से है कि यह इमरजेंसी रूम है। इमरजेंसी रूम में यह डॉक्टर्स जिस तरह से डायग्नोस और ये डिसीजन लेते हैं तो यह डॉक्टर का डिसीजन बेटर रहता है कि एआई का डिसीजन बेटर रहता है। तो दो म ये जो सेकंड ओपिनियन देना है तो यह सेकंड ओपिनियन किसका बेटर रहता है? तो देखा कि डॉक्टर जो ह्यूमन डॉक्टर है वो जिस तरह से सेकंड ओपिनियन देता है कि नहीं ये डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट इस तरह से होना चाहिए तो वही आप यदि डाटा आप एआई में फीड करेंगे किसी पर्टिकुलर पेशेंट का कि इसकी यह परिस्थिति है अभी इसके बारे में क्या किया जाए तो एआई विल गिव अ कंसिस्टेंटली इट विल गिव अ बेटर आंसर एआई का आंसर एक ह्यूमन डॉक्टर से अच्छा ज्यादा बेटर रहेगा व्हिच इज वेरी सरप्राइजिंग क्योंकि मेडिकल साइंस फ्रेंड्स आज हम सबको पता है कि यदि ये 12th की एग्जाम के बाद में आपको यदि एडमिशन लेना है तो कौन सी स्ट्रीम में आप जाएंगे? तो सबसे ज्यादा रश रहता है। यह इंजीनियरिंग है। यह मेडिकल है। ये दोनों स्ट्रीम में सबसे ज्यादा रश रहता है। सबसे ज्यादा कट ऑफ परसेंटेज भी इसी में रहते हैं। अभी एआई आकर के यह जो कटिंग एज ह्यूमन इंटेलेक्ट की जो जॉब है उसके ऊपर में हाथ डाल रहा है। तो यदि और इंजीनियरिंग का तो पूछिए ही मत। अभी यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इतना फेमस था, इतना पॉपुलर था। स्टूडेंट्स सभी लोग सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते थे। अभी ये जितनी भी एआई कंपनीज़ हैं जो बड़ी-बड़ी जो मल्टीीनेशनल कंपनी वे लोग कहते हैं कि अभी हमारा 30% ऑफ कोड इज रिटन बाय एआई। यह व्हिच इज़ वेरी सरप्राइजिंग। ये जो Microsoft है, Google है इन लोगों का जो कोड होता है, प्रोग्राम होता है, वह तो कितना कॉम्प्लेक्स होता है, कितना पावरफुल होता है। यदि 30% कोड एआई लिखता है, तो फिर यह ह्यूमन प्रोग्रामर्स की क्या आवश्यकता रह गई आपको? ऑलरेडी यह सब मल्टीीनेशनल कंपनीज़ में वह प्रोग्रामर्स को अभी वह जॉब में से निकाल दे रहे हैं। हर आए दिन समाचार आता है कि Google में से इतने हजार को निकाल दिया, Microsoft में से इतने को निकाल दिया। क्यों? क्योंकि यह जो लोअर लेवल प्रोग्रामिंग है, वह ईजीली अभी तो एआई कर देता है। इवन हायर लेवल प्रोग्रामिंग भी करेगा। आपको सिर्फ वेरीफाई करना है। तो देखिए कि और अभी ये जितना रिसेंट डेवलपमेंट अभी मैं रिसेंटली यह Google आईo है या तो फिर Microsoft बिल्ड है। यह सब मैं थोड़ा देखता रहता हूं। ये मैं टच टच में रहता हूं कि ये क्या-क्या लेटेस्ट डेवलपमेंट हो रहा है। तो जिस तरह से ये लोग नए-नए फीचर्स नई-नई प्रोडक्ट नई-नई ये एआई वर्जनंस अनाउंस करते जाते हैं वो उतना ही मतलब इट इज़ सो सरप्राइजिंग कि आज से 510 साल पहले लोग हंसते थे यदि ऐसा कहते कि हां एआई आएगा तो फिर यह इतने सारे डेवलपमेंट होगा। अभी आप देखिए विदिन अ वेरी शॉर्ट स्पान ऑफ फाइव सिक्स इयर्स ना कि 10 इयर्स कितना एडवांसमेंट हो गया है। यह अल्फा फोल्ड बोल के यह जो डेमिस हसाबिस है उसको तो नोबेल प्राइज मिल गया। अभी नोबेल प्राइज स्किल्स को मिलता है कि जो माने एक ह्यूमैनिटी जो है उसमें जो हाईएस्ट यदि क्या कहा जाएगा कि इंटेलेक्चुअली ऐसा कौन सा काम है जो कि हाईएस्ट है तो मेरे ख्याल से दो काम है। एक तो है कि स्पिरिचुअल एनलाइटनमेंट दूसरा है कि साइंटिफिक डिस्कवरी। यह दो है कि मनुष्य सभ्यता की सर्वोच्च शिखर है। उस शिखर पे यदि आप जाएंगे तो आपने सही-सही जगत में कुछ कंट्रीब्यूशन किया है। सही-सही अपना मनुष्य जीवन धन्य किया है। तो अभी देखिए कि यह जो हाईएस्ट लेवल का यह जो एटलीस्ट एक्सटर्नल वर्ल्ड का जो हाईएस्ट है कि न्यू साइंटिफिक डिस्कवरी तो अभी तक ऐसा सोचते थे कि एआई कैसे साइंटिफिक डिस्कवरी कर सकता है। एआई को कैसे नोबेल प्राइ मिल सकता है? किंतु यह अल्फा फोल्ड डेमिस हसाबिस उसने क्या किया? इस तरह का एआई डेवलप किया जो कि प्रोटीन स्ट्रक्चर प्रिडिक्ट करता है। यानी कि किस तरह से प्रोटीन फोल्ड होगा। इसके बेस पे ही सब तरह का मेडिसिन अवेलेबल आप डिजाइन कर सकते हैं। तो इस एआई ने जो कि मिलियंस ऑफ स्टूडेंट पीएचडी इयर्स एक स्टूडेंट एक बार पीएचडी करता है तो हो सकता है कि चारप प्रोटीन किस तरह से फोल्ड हो वह खोज निकालेगा। दूसरा स्टूडेंट पीएचडी करता है तो पीएचडी करने में जितने भी साल लगे 5 6 10 12 15 जितना भी उसमें वो प्रेडिक्ट करेगा कि इतने चारप प्रोटीन इस तरह से फोल्ड होते हैं। किंतु यह अल्फा फोल्ड एआई ने 200 मिलियन ना कि जितने भी प्रोटीन है ह्यूमन बॉडी में सभी को विदिन फोर फाइव इयर्स प्रिडिक्ट करके रख दिया कि किस तरह से यह फोल्ड होते हैं। और फिर इसका यह जो फाउंडर इसका यह जो है डेमिस हसाबिस उसका डेवलपर उसने यह पूरा प्रोटीन डेटाबेस को ओपन सोर्स कर दिया। इसके बेस के ऊपर में आप अभी मेडिसिन डिजाइन कर सकते हैं। तो यह कितना बड़ा कंट्रीब्यूशन है ह्यूमन सिविलाइजेशन में। इसके बेस पे कितनी एडवांस मेडिसिन आप डिजाइन कर सकते हैं। टारगेटेड मेडिकल ट्रीटमेंट कर सकते हैं। कैंसर है, एड्स है, जो हार्ट डिसीज है, डायबिटीज है, ब्लड प्रेशर है, हाइपर हाइपरटेंशन वगैरह-वगैरह उसको आप टारगेटेड आप उसको सॉल्व कर सकते हैं, ट्रीट कर सकते हैं। सच ए ग्रेट कंट्रीब्यूशन फॉर द ह्यूमन काइंड। और इसके लिए इसको पूरा नोबेल प्राइज मिल गया। देखिए कि बायोलॉजी इन मेडिसिन उसमें उसको जो केमिस्ट्री मोस्ट प्रोबेबबली उसमें जो नोबेल प्राइज मिला है एक्चुअली उसको बाय प्रोफेशन वो तो कंप्यूटर इंजीनियर है तो माने एआई ने आकर के सिर्फ यह ब्लू कॉलर जॉब यानी कि यह जो लेबररर है सिर्फ उसकी जॉब नहीं ले ली। यह जो डिज़र प्रोग्रामर्स है, यह पोएट्स है, राइटर्स है, इन लोगों की सिर्फ जॉब नहीं ले ली। इवन जो कटिंग एज रिसर्च करते हैं साइंटिस्ट उनका भी जॉब जैसे कि ले लिया है सीधा नोबेल प्राइज पा लिया है उन्होंने दे हैव वॉन द नोबेल प्राइज तो देखिए कि इस युग में आपके पास में कटिंग एज क्रिएटिविटी नहीं रहेगी तो फिर आप एआई के सामने हारते ही जाएंगे हारते ही जाएंगे भारत की इकोनमी की जो परिस्थिति है अपना पर कैपिटा जीडीपी इज लेस देन 3000 3000 से कम पर कैपिटा जीडीपी है अपना। चाइना का 15,000 है। अमेरिका का 89,000 89,000 है। तो सोच लीजिए कि अमेरिका और चाइना और भारत में अभी कितना बड़ा गैप है। तो यदि हमको रियलिस्टिकली यह गैप कंप्लीट करना है, फिल करना है तो मैन्युफैक्चरिंग जॉब तो अभी हाथ से ही गई, गवर्नमेंट चाहे कितना ही मेहनत करती हो कि मैन्युफैक्चरिंग जॉब भारत में आए। ऐसा होने नहीं वाला है क्योंकि यह ऑटोमेशन और यह रोबोटिक्स और यह एआई यह सब ने मिलकर के लोअर लेवल जितनी भी जॉब है ऑलरेडी यह लोग खा चुके हैं। तो वह तो गया हाथ से। अभी यह जो सर्विस इंडस्ट्री यह जो सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट भारत में इतना चल रहा है भारत का यह जो बिलियंस ऑफ डॉलर्स का सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट है वह भी जैसे कि हाथ से जाएगा क्योंकि एआई आकर के अपने से कोड बना दे रहा है तो फिर देखिए कि ये इकोनॉमी और यह सिविलाइजेशन की रेस में वैसे ही तो 3000 से कम पर कैपिटा जीडीपी हम लोग कहीं नहीं है। यह जो सबसहारण अफ्रीका कंट्रीज है केन्या, तंजानिया और वगैरह-वगैरह उन लोगों के साथ में वैसे ही हम अभी ही बैठे हुए हैं। उसमें भी यदि यह रेस हार जाएंगे। देखिए हमने ये सबसे पहले तो यह साइंटिफिक रेवोल्यूशन उसमें हार गए। उसके बाद में यह इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन उसमें भी हम पीछे पड़ गए। ब्रिटेन और वगैरह यूरोप आगे निकल गए। उसके बाद में यह जो मैन्युफैक्चरिंग बूम आई है 60ज और 70ज में आज से 30 साल 30-40 साल पहले उसमें भी हम हार गए उसमें ये चाइना कोरिया जापान ये लोग सब जीत गए और अभी आखिर में यह एआई रेस है तो यदि हम इसमें भी हारेंगे तो देखिए कि हमारी परिस्थिति क्या होगी जो 1000 साल की गुलामी पहले की थी क्यों की थी क्योंकि ये जो डिस्पेरिटी है इकोनॉमिकल डिस्पेरिटी उसकी वजह से कोई भी आकर के हमारी पिटाई कर देगा हम कुछ नहीं कर पाएंगे। तो देखिए कि इसके लिए हमको यह क्रिएटिविटी है बड़ी शार्प रखनी पड़ेगी और क्रिएटिविटी को शार्प करने का सबसे इजीिएस्ट तरीका है। सबसे लेजिटमेट रास्ता है वो है मेडिटेशन। तो ये ये तो हो गया कि किस तरह से स्टूडेंट्स को कन्विंस करना कि रेगुलर मेडिटेशन करें। दूसरा फैक्टर आता
How to teach science of mind to students: Battle of light and darkness inside us
है कि किस तरह से हम उनको मेडिटेशन सिखाएं। किस थरी पर सिखाएंगे? द्वैत और अद्वैत के बारे में बता सकते हैं। ठाकुर मां स्वामी जी के शरणागत होना या तो फिर यह भाव साधना है। ईश्वर के प्रति एक तरह का संबंध बनाना है। मातृ भाव हो, संतान भाव हो, भ्रातु भाव हो ना कि दास्य भाव, शांत भाव वगैरह-वगैरह तो वह थोड़ा सा कॉम्प्लिकेटेड हो जाएगा। मुझे एक ईजी मॉडल चाहिए व्हिच इज़ करेक्ट एज वेल ऐज़ ईजी टू अंडरस्टैंड। तो मैंने इस तरह से सोचा कि देखिए कि वििन आवर माइंड देयर इज़ ऑलवेज अ बैटल बिटवीन डिसऑर्डर एंड ऑर्डर बिटवीन डार्कनेस एंड लाइट बिटवीन ऑर्डर एंड केओस। यह जो बैटल है अपने माइंड के भीतर में अंधकार और उजाले की जो लड़ाई है युद्ध है सतत हमारे मन में चल रहा है। एक जो अंध अंधेरा जो है या तो फिर यह केओस है यह केओस हमेशा हमको इस तरह का कार्य करने में प्रवृत्त करता है जो कि हमको हमारे लिए किसी भी काम का नहीं है। हमेशा यह जो केओटिक एस्पेक्ट है हमारी पर्सनालिटी का वो यह कहता रहेगा कि वेस्ट टाइम टाइम वेस्ट करो। ये लाइब्रेरी में स्टूडेंट लोग बैठे हैं। तो कभी-कभी मैं देखता हूं कि कोई-कोई स्टूडेंट बैठा अभी ये तो ज्यादातर लोग तो कंपटीशन एग्जाम की प्रिपरेशन कर रहे हैं। तो कुछ-कुछ स्टूडेंट्स को देखता हूं कि कंटीन्यूसली आवर्स आफ्टर आवर्स घंटों के बाद घंटों वे लोग एक ध्यान होकर के तन्मय होकर के स्टडी करते हैं। जो कि वि इज वेरी गुड। और कुछ-कुछ स्टूडेंट्स को मैं कभी-कभी देखता हूं कि इधर-उधर नजर डालेंगे। फिर थोड़े से खड़े होकर के इधर-उधर चक्कर लगाएंगे। लाइब्रेरी के बार में ही बाहर में ही आएंगे तो पूरा सी शोर है। तो यह समुंदर का किनारा तो फिर वो देखेंगे थोड़ा सा दो-तीन लोगों को इकट्ठा करके वो गप लगाएंगे या तो फिर आजकल तो सबके पास में लैपटॉप या टैब है जिसमें वह स्टडी करते हैं। तो उसमें और कुछ खोल करके देखते रहेंगे स्टडी के अलावा। अब तो देखिए कि माइंड किस तरह से भटकता है। तो यह जो केओटिक डारकर एस्पेक्ट ऑफ आवर पर्सनालिटी है इट ऑलवेज प्र्प्स अस टू डू समथिंग व्हिच वी रियली लाइक श्रेय और प्रेय। किंतु इस तरह से श्रेय और प्रेय वर्ड्स नहीं यूज़ करके यह डार्कनेस एंड लाइट, केओस एंड ऑर्डर यह जो कि यह लोग ईजीली समझ पाएंगे। तो यह केओटिक एस्पेक्ट सब समय उनको इस तरह की कार्य करने में प्रवृत्त करेगा जो कि टाइम वेस्ट के अलावा कुछ नहीं है। उनकी करियर के लिए किसी भी तरह का फायदा यह नहीं लाता है। टीवी देखेंगे मोबाइल पर सोशल मीडिया में जा जाते रहेंगे। एक लड़का आया था मुझसे मिलने के लिए राजकोट में। वह मुझे कहता है कि मुझे Instagram का यह एडिक्शन हो गया है। पहले तो मुझे समझ में नहीं आ रहा यह क्या कहता है? मैंने कहा Instagram में तो लोग वो पिक्चर वगैरह पोस्ट करते हैं। उसका एडिक्शन कैसे हो सकता है तुमको? तो बोला नहीं मैं दिन रात उसी को लेकर के ब्राउज़ करता रहता हूं और कुछ करने की इच्छा नहीं होती। मैंने कहा तो तो यह तो एडिक्शन है। यह मैंने सुना भी नहीं था इस तरह का। वो पहली बार तो ऐसा सुना कि Instagram का एडिक्शन हो गया है मुझे। तो ये सोशल मीडिया ये जो फीड होती है ना और भारत में तो अच्छा है बहुत अच्छा है कि ये TikTok वगैरह को निकाल दिया अपनी गवर्नमेंट ने वो तो विदेश में आप जाएंगे जहां पे यह चलता है वहां इतना लोग एडिक्ट हो के रहते हैं घंटों आपके बाद घंटों वही वो शॉर्ट वीडियोस देखते रहते हैं वो भारत में भी है यह सब दूसरे ब्रांड नेम्स है किंतु खैर ये ये सब चीजों का आजकल एडिक्शन लग गया है तो यह आपका केओटिक एस्पेक्ट है, डारकर एस्पेक्ट है। और आपको लगता है कि अच्छा मैं इससे बाहर कैसे निकलूं? क्योंकि आपको यह बेसिक थ्यरी है। वही नहीं पता है कि आफ्टर द डारकर एस्पेक्ट आपका पर्सनालिटी का एक ब्राइटर एस्पेक्ट भी है। एक लाइटर एस्पेक्ट भी है। एक ऑर्डर भी है आपके जीवन में। लाइट एंड ऑर्डर। यह कहां पे है? दिस इज योर आत्मन। यह आत्मन और माइंड मन और आत्मन इन दोनों के बीच में सतत युद्ध चलता रहता है। यदि यह मन बुद्धि चित्त अहंकार मिलकर के मुझे गलत रास्ते पर ले जाना चाहते हैं तो मेरा जो आत्मन है सत चित आनंद वो मुझे उजाले के रास्ते की ओर ले जाना चाहता है। वह मुझे श्रेय के पथ पर ले जाना चाहता है। वो मुझे सक्सेस के रास्ते पे, सफलता के रास्ते पे ले जाना चाहता है। तो पहले तो यह रिकॉग्नाइज करना होगा। बहुत सारे लोगों को यह पता ही नहीं है कि विदिन आवरसेल्फ इज़ दिस लाइट रिसाइड्स एंड वी कैन लिवरेज दिस लाइट। वी कैन अंडरस्टैंड द डायनेमिक्स ऑफ़ दिस लाइट एंड वी कैन यूज़ इट टु ब्रेक थ्रू एनी ट्रबल्स एंड चैलेंजेस दैट स्टैंड इन आवर वे। जैसे कि यह जनरल लाइट होती है तो हमारे पे गिरती है तो हमको तो कोई उससे नुकसान नहीं होता है। अच्छा ही लगता है। मॉर्निंग लाइट हो या वगैरह किंतु आप उसका लेजर बना दीजिए। यह लेजर बड़ी सी बड़ी दीवार के साथ में भी जाकर के टकराएगा तो उस दीवार को भी तोड़ देगा। अभी यह जो चल रहा है ना यह मिसाइल डिफेंस शील्ड तो मिसाइल आता है तो उसके सामने दूसरी मिसाइल फेंकनी है उसको तोड़ने के लिए। वो जो पुराना महाभारत वगैरह जिसने देखा होगा टेलीविजन के ऊपर में टीवी सीरीज मैंने देखा था रामायण में भी, महाभारत में भी। वह दोनों सामने-सामने से दो तीर आते हैं इस तरह से। फिर दोनों तीर टकराते हैं। फिर उसमें से वह जो भगवान राम का ना कि अर्जुन का जो तीर होगा वह जीत जाता है। सामने वाला हार जाता है। वो टूट जाता है। तो वैसे ही एक तो मिसाइल डिफेंस शील्ड के लिए आप एक सामने में दूसरी मिसाइल भी फेंक सकते हैं। किंतु साथ में आप लेजर भी शूट कर सकते हैं। व्हिच इज इज़ियर एंड मोर पावरफुल मोर इफेक्टिव मेथड। तो यह लेजर में वो शक्ति है। आपकी लाइट वैसे बिखरी हुई है। किंतु यदि आप यह साइंस को समझ लें लाइट में से लेजर कैसे प्रोड्यूस करना है तो लेजर किसी भी तरह की चैलेंज जो भी ड्रोन आता है जो भी यह मिसाइल आती है सामने से शत्रुओं की उसको यह तोड़ दे सकता है। तो सिमिलरली दैट सोर्स ऑफ लाइट इज विदिन अस। दिस आत्मन स्वयं प्रकाशित आत्मन हम सबके भीतर में है। इस प्रकाश किंतु जो कि बिकॉज़ कि हमको पता नहीं है कि यह मेरा सही स्वरूप है। बिकॉज़ कि मुझे उसका साइंस नहीं समझ में आता है। यह प्रकाश बिखरा हुआ है। किंतु जैसे ही आत्मन का विज्ञान साइंस ऑफ कॉन्शियसनेस स्टडी कर ले तो साथ में ही यह जो डिफ्यूज लाइट है उसको हम वन पॉइंटेड लेजर लाइट में कन्वर्ट कर सकते हैं। एंड देन एनीथिंग दैट दिस केओस थ्रोज़ एट अस एनी डिमांड एनी डिज़ायर एनी पैशन एनी टेंट्रम जो कि हमारे सामने फेंकता है उसको हम इजीली लेजर के साथ में कट कर दे सकते हैं। तो यह शक्ति आत्मन के भीतर में है। तो यह पहले तो जानना है। दिस इज़ द मॉडल ऑफ द कॉन्शियसनेस। अ वेरी सिंपलीफाइड वेरी इजी टू अंडरस्टैंड मॉडल कि देयर इज़ अ लाइट विद इन अस एंड देयर इज़ आल्सो डार्कनेस विद इन अस। यह लाइट और डार्कनेस का सनातन युद्ध चलता ही रहता है। और कभी-कभी डार्कनेस है। वह जीत जाती है। कभी-कभी यह लाइट का विजय होता है। प्रकाश की विजय होती है। यह दीपावली आखिर में क्या है? अंधेरे पर प्रकाश की विजय का तो यह गुणगान गाती है। महिमा गाता हुआ यह एक फेस्टिवल है। किंतु देखिए इसको आप दो तरीके से देख सकते हैं। एक तो है कि भगवान राम रावण के ऊपर में भगवान राम की विजय। दूसरा है कि हमारे ही भीतर में यह जो डारकर एस्पेक्ट है अपना यह जो मन है मन सब समय चंचल होता हुआ हमको गलत रास्ते पर अंधेरे के रास्ते पर खींचता हुआ सा यह जो ले जा रहा है उससे यह अपनी आत्मन को समझे आत्मन को प्रकाशित करें आत्मन को मैनिफेस्ट करें और इस रास्ते से अंधेरे के रास्ते से अंधेरे के दलदल से अपने को निकाल करके प्रकाश की ओर हम यात्रा करें। दिस इज द फेस्टिवल ऑफ दीपावली। यह जो मां शारदा देवी की जो जीवनी हमने पढ़ी गंभीरानंद जी उसमें प्रारंभ में ही क्या कहते हैं? प्रीफेस में ही अवतरणिका में क्या कहते हैं कि यह एक समय था कि शुंभ निशुंभ जैसे राक्षसों का दमन करने के लिए मां दुर्गा को ना कि मां काली को मां जगदंबा को आध्या शक्ति को पृथ्वी पर अवतरण होना पड़ा था। अवतरित होना पड़ा था। किंतु आज का युग है संदेह संशय का। यह संशय राक्षस नाश। यह जो संशय राक्षस है हमारे भीतर में उसका नाश करने के लिए इस बार ठाकुर मां स्वामी जी का आगमन हुआ है। तो यह एक सिंपलर मॉडल उनको मैंने बताया बता रहा हूं। धीरे-धीरे मैं इस थ्यरी को डेवलप कर रहा हूं। और फिर इसी के साथ-साथ में फिर मुझे उनको यह बताना है कि सिंपलर मेथड्स ऑफ मेडिटेशन। पहले तो यह बताया कि मेडिटेशन का बेनिफिट क्या है? सेकंड है कि यह जो मेडिटेशन का थरी क्या है? व्हाट इज द मॉडल ऑफ माइंड? व्हाट इज द साइंस ऑफ कॉन्शियसनेस इन अ वेरी इजी मैनर टू अंडरस्टैंड। तो इट इज द साइंस ऑफ दिस बैटल बिटवीन लाइट एंड डार्कनेस। और तीसरा है कि
Smart Meditation: Using Different Techniques Based on Your Physical & Mental Fitness
किस तरह से कुछ सिंपलर मेथड्स ऑफ मेडिटेशन डेवलप की जाए जिससे कि यह लोग इजीली डे आफ्टर डे प्रैक्टिस कर पाए। तो फिर उसमें एक तो है कि ओमकार मेडिटेशन स्टेज बाय स्टेज कॉम्प्लेक्सिटी के स्टेजेस के साथ में मैं इसको मेथड्स को डेवलप करता रहता हूं और उनको कहता हूं कि जो क्या है कि देयर इज एंटायर मेनू ऑफ मेडिटेशन। बहुत बार हम लोग ध्यान करते हैं तो हमको ऐसा लगता है कि अरे ध्यान चल नहीं रहा है। ध्यान जम नहीं रहा है। दो-ती मिनट 5 मिनट बैठकर के ही मेरा मन चंचल हो जा रहा है। कितना ही चाहे मैं प्रयास करूं मेरा मन ध्यान में एकाग्र ही नहीं हो रहा है। क्या करूं? तो यह प्रश्न आता है तो प्रश्न आता है तो उसका सॉल्यूशन भी है। देखिए कि हमारे मन की परिस्थिति विभिन्न समय विभिन्न तरह की होती है। सुबह को यदि यदि हमको रात में अच्छा रेस्ट मिला होगा तो सुबह को हम फिजिकली फिट एंड मेंटली रिफ्रेश होकर के उठेंगे। उस समय हमको थोड़ा सा डिफिकल्ट मेथड ऑफ मेडिटेशन करना है प्रैक्टिस। और फिर जैसे-जैसे दिन चल चलता जाएगा यदि दिन में बहुत सारा काम किया है, बहुत ज्यादा स्ट्रेस फेस करना पड़ा है तो हो सकता है कि शाम होते-होते फिजिकली और मेंटली एग्जॉस्ट हो जाए। तो फिर शाम को यदि मेडिटेशन करते हैं तो फिर इजी मेथड यूज करना है। यानी कि अपने माइंड की फ्रेशनेस और यह जो फिजिकल फिटनेस उसके अनुसार हमको यह मेडिटेशन मेथड यूज करनी है। कुछ-कुछ मेडिटेशन मेथड बड़ी सहज है। कुछ-कुछ डिफिकल्ट है। तो जब हम फिजिकली और मेंटली फिट होते हैं, तो यह डिफिकल्ट मेथड्स को यूज़ करना है और उसका रिवार्ड भी ज्यादा है। जो सिंपलर मेथड आप बोलेंगे कि यदि सिंपलर मेथड है ही है तो फिर सब समय उसको क्यों ना यूज़ करें? तो डिफ़िकल्ट मेथड्स का रिवार्ड ज़्यादा है। इसलिए यदि इफ यू आर एबल टू डू दैट देन यूज़ दिस डिफिकल्ट मेथड्स। एंड सपोज़ इफ यू आर नॉट एबल टू डू दैट देन यू कैन यूज़ सिंपलर मेथड्स। तो इस तरह से पूरा मेनू ऑफ मेथड्स ये उनके सामने रखना है। उसमें जो सबसे
Omkar meditation
सिंपल मेथड से स्टार्ट करें यदि तो वो है ओमकार मेडिटेशन। ओमकार मेडिटेशन बड़ा ही सहज है और उसमें बहुत सारे यह जो पतंजलि योग सूत्र है उसके बहुत सारे स्टेप्स भी इसमें कवर हो जाते हैं। जो पतंजलि के जो आठ स्टेप्स हैं योग सूत्र में कि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। तो उसमें से ओमकार मेडिटेशन में आप ऐसा सीधा होकर के बैठेंगे और और सीधा होकर के तो वह जो आसन की डेफिनेशन है स्थिर सुखम आसनम वह भी एक आ जाता है। फिर आपको ब्रीथ इन करना है और ब्रीथ आउट के साथ में चटिंग करना है। ओम जितना डीप हो सके उतना ब्रीथ इन करना है। पूरे बॉडी को प्राण से भर देना है। फिर ब्रीथ आउट के साथ में ओंकार चेंटिंग। तो जिस समय ब्रीथ इन कर रहे हैं उसी के ऊपर में अपना मन केंद्रित होना तो प्राणायाम वाला भी हो गया एस्पेक्ट कवर और फिर मेडिटेशन तो है ही है देश बंद चित्तस्य धारणा तत प्रत्यय एकतानता ध्यानम किसी एक ऑब्जेक्ट के ऊपर में मन को एकाग्र करने से धारणा होती है और उस ऑब्जेक्ट के प्रति अपना मन एक तान में प्रवाहित होता है। एक लय में प्रवाहित होता है। एक धारा में प्रवाहित होता है तो वह हो गया ध्यान। तो पहले तो हम ब्रीथ इन के ऊपर में कंसंट्रेट करते हैं। फिर ओमकार चटिंग के ऊपर में कंसंट्रेट करते हैं। तो वो मेडिटेशन वाला भी हो गया। तो विदिन दिस ओमकार मेडिटेशन आसन, प्राणायाम और ध्यान तीन जो स्टेप्स हैं यह हम लोग कवर कर सकते हैं। और यह वेरी इजी टू डू दैट। और बड़ा अच्छा यदि आप बाहर में खड़े रह के देखेंगे पीछे में खड़े रह के कि सभी स्टूडेंट्स एक साथ में ओमकार चटिंग कर रहे हैं और किसी भी तरह का और कोई आवाज नहीं है। सभी लोग ऐसा स्थिर होकर के बैठे हैं। इट विल बी अ वेरी नाइस सीन टू वॉच। यह जो हम लोगों का समर कैंप था उसमें भी हम लोग यह ओमकार मेडिटेशन इनको सिखाते थे। तो पूरे 100 बच्चे हैं। वो छोटे-मोटे बच्चों से लेकर के सेवंथ, ए्थ, नाइंथ स्टैंडर्ड तक के सब स्थिर होकर के बैठकर के एक साथ में मृदु स्वर में ओमकार करते हैं। चिल्लाना नहीं है। ओमकार में ओ ऐसा करके नहीं ओ एकदम सहज मृदु स्वर से ओमकार करना है। तो इस तरह सभी लोग एक साथ में करेंगे। वो और फिर क्या है कि देखिए वाइब्रेशन खड़े होते हैं तो मंदिर वगैरह जगह का प्रभाव क्यों है? इतना कि बहुत सारे साधु संतों ने महात्माओं ने साधकों ने भक्तों ने वहां पर साधना की है। ईश्वर का नाम गुणगान कीर्तन किया है। इसलिए मंदिर में पॉजिटिव वाइब्रेशन होते हैं। तो यह बात भी मैंने इन बच्चों को सिखाते सिखाते देखी कि यदि आप ग्रुप में मेडिटेशन करते हैं, तो वह बड़ा इजीली हो जाता है। इवन मैंने भी इसका पॉजिटिव इफेक्ट वो महसूस किया है। यहां पे 100 बच्चे वो समर कैंप के सामने बैठते हैं। या तो फिर यह हमारे कंप्यूटर क्लास में एनी टाइम 30 टू 40 स्टूडेंट्स हो जाते हैं। तो यह सब सामने बैठे हुए हैं। तो उनके साथ में अब ग्रुप में ओमकार मेडिटेशन करेंगे या तो फिर और जो मेथड्स है तो बड़ा ही हमको भी अच्छा लगता है। आई डू नॉट नो कि उनका कैसा होता है अनुभव। वे लोग तो बोलते हैं कि अच्छा पॉजिटिव अनुभव है। आई डू नॉट नो बट एटलीस्ट माय एक्सपीरियंस इज वेरी पॉजिटिव। तो यह तो हो गया कि सबसे सिंपलर मेथड। इसके बाद में जैसे मैंने
Happiness meditation
ऑलरेडी डिस्कस किया था इज़ अ हैप्पीनेस मेडिटेशन। अभी यह हैप्पीनेस मेडिटेशन थोड़ा सा कॉम्प्लेक्स है। अपनी जो हैप्पीएस्ट मेमोरी है उसको हमको याद करना है और अपने माइंड को उसी में उसी पर्टिकुलर मोमेंट पे फ्रीज़ कर देना है। उसी पर्टिकुलर मोमेंट पे लॉक कर देना है अपने माइंड को। अब जैसे कि मेरी एक मेरी इज अ वेरी हैप्पी मेमोरी कि मैं जब दीपावली की छुट्टियों में गांव में जाता था हमारे गांव में तो बहुत सारे हमारे कजिंस है ब्रदर्स सिस्टर्स वहां पे इकट्ठा होते थे। बहुत बड़ा यह जॉइंट फैमिली था। तो वहां पर रात में वह धनतेरस को चोपड़ा पूजन वगैरह होता है। लक्ष्मी की पूजा होती है। हमारी दवाई की दुकान थी तो उसमें और उसके बाद में बाहर में सब लोग इकट्ठा हो के पटाखे फोड़ते हैं। यह फायर वक्स, फायर क्रैकर्स वगैरह इट्स अ वेरी पॉजिटिव मेमोरी ऑफ माय लाइफ। तो फिर मैं वहां पे जाकर के जैसे कि मैं फिर से चला जाऊंगा वह बचपन में मेरे गांव में दीपावली की छुट्टियों में और वहां पर बैठा हुआ हूं। और एक बड़ी बात याद रखनी है कि इधर-उधर घूमना फिरना नहीं है और पटाखे वगैरह नहीं फोड़ना है। रजस जो है रजस से दूर रहना है। उस हैप्पी मेमोरी में जाकर के एक कॉर्नर में बैठ जाना है। एंड लेट दिस हैप्पीनेस वाश ओवर अस। तो यह हैप्पीनेस जो है यदि हमारे हृदय में फैलेगी चारों ओर हमारे मन के भीतर में शरीर के भीतर में फैलेगी तो इट विल वर्क लाइक अ नरिशमेंट। यह जो जमीन में पौधों को यह जो खाद देते हैं, यह जो आजकल ये जो ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर आते हैं तो यह ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर देते हैं तो पौधा कैसे वो फूल वगैरह फूल फल कितना सुंदर रूप से खिलते हैं। तो और यह जो वो कहते हैं ना चिकन सूप फॉर द सोल वो किताब है सीरीज पूरी। सो दिस इज आल्सो ए चिकन सूप फॉर द सोल। यह जो हैप्पीनेस है वह पूरी हमको भीतर से नरिश करेगी। यह जितने भी अंकट बंकट है, जितने भी हमारी दुविधाएं हैं, जितने भी स्ट्रेस है, वह सबको यह भगा देगी। यह मुझे याद है कि हम लोग गिरनार पर्वत है गुजरात में स्वामी जी भी गए थे गिरनार के ऊपर में। वो चढ़े थे ऊपर में तो वहां पे टॉप पे जाएंगे तो जैन देरासर वगैरह है तो और वो बड़ा ही मतलब फेमस तीर्थ स्थान है। लोग गिरनार की परिक्रमा भी करते हैं और ऊपर में भी जाते हैं वगैरह। तो हम लोग गए थे ऊपर में चढ़ने के लिए और फिर जब वापस आए तो नीचे में देखा लोग मसाज करने के लिए लोग बैठे हुए हैं। क्योंकि आपका शरीर तो पूरा स्टिफ हो जाएगा तो फिर वह मसाज करेंगे तो एकदम आपके मसल्स फिर से लूज हो जाएंगे। तो अभी मैंने तो मसाज करवाया नहीं। मुझे ऐसा अच्छा नहीं लगता कि कोई मुझे टच करे। किंतु मेरे साथ में जो और दो-तीन लोग थे उन्होंने मसाज करवाया तो बोलते हैं कि महाराज एकदम स्टिफनेस जो था शरीर में वो पूरा एकदम लूज़ हो गया। तो देखिए कि यह जो मेंटल स्टिफनेस है तो दिस दिस हैप्पीनेस विल वर्क एज अ मेंटल मसाज। यह जो मेंटल जो स्टिफनेस है हमारी यह जो मेंटल जितने भी डार्कनेस है वह सब हैप्पीनेस विल एज इफ लूजन इट हैप्पीनेस विल ईट इट अप। उसको खा जाएगी खुशी जो है हमारी। सो दिस इज वन टाइप ऑफ मेडिटेशन। और फिर देखिए कि यह भी बताना पड़ेगा कि हैप्पीनेस बहुत टाइप की होती है। वर्ल्डली हैप्पीनेस भी होती है। स्पिरिचुअल हैप्पीनेस भी होती है। तो धीरे-धीरे करके कौन सी हैप्पीनेस पे मेडिटेशन किया जाए। कौन सी हैप्पीनेस पे मेडिटेशन ना किया जाए यह भी थोड़ा सा समझाना होगा। इसके बाद में
Chanting meditation
है चटिंग मेडिटेशन। देखिए कि यह निर्वाण शटकम है या तो फिर यह गीता के श्लोक है तो इसको आप चेंटिंग के लिए चेंट करते हैं। वो एक आप एक तरह से चेंट करते हैं। किंतु फिर आप यदि मेडिटेशन के लिए उसको चेंट करेंगे तो दूसरी तरह से एकदम मृदु स्वर से एकदम सूक्ष्म रूप से उसको चेंट करना होगा और अपना माइंड जो है एग्जजेक्टली उसी के ऊपर में लगा देना चाहिए जो कि इधरउधर कहीं पर भी ना जाए। अहम निर्विकल्पो निराकार रूपो ऐसा करके वो जो एकदम सूक्ष्म रूप से एकदम लयबद्ध होकर के ये सभी जितने भी है ये जो स्टूडेंट्स वगैरह एक साथ में चेंट करते हैं तो इतना सुंदर वातावरण खड़ा होता है। आप इन जनरल चेंटिंग करते हैं और ध्यान करने के लिए चेंटिंग करते हैं। पूरा एटमॉस्फियर चेंज हो जाता है। यह मैंने एकदम देखा है। तो यह एक चटिंग मेडिटेशन है वि इज इजी टू डू और उसके बाद में एक है कि
Japa meditation
जप है। जब अपना स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है तो उनको थोड़ा सा सीखने में समय लगता है। अपने जो ओमकार का जप करते हैं जैसे कि तो ये अंगूठी के जितने भी ये उंगलियों पे जहां पे अंगू ये जो अपना थंब है और फिंगर को टच होता है उसके बीच में हमको ओमकार को विजुअलाइज करना है और फिर उसको अपना माइंड जो है उसी ओमकार पे फोकस रहना चाहिए। तो जैसे कि मैं इस तरह से करता हूं कि ओम ओम ओम ओम ओम ओम तो यह जो थंब और यह फिंगर जहां पे टच होते हैं वहीं पे एग्जैक्टली ओमकार को विजुअलाइज करके एग्जैक्टली उसी जगह पे अपने मन को स्थिर करना है। तो यह
Heart meditaion
हो गया ओमकार जप। फिर यह ओमकार को इसी ओमकार को हार्ट में विजुअलाइज करना है। तो वह हो गया कि ओमकार इन हार्ट। वह एक मेथड हो गया और फिर तो बहुत सारी दूसरी भी मेथड
Imagination meditation
से हम जनरल इमेजिनेशन कर सकते हैं। जैसे कि आप यहां पर बैठे हैं समुंदर के किनारे और आपका मन जो है वो पंखी बनकर के वह हवा में उड़ रहा है। चारों ओर वहां पर सूर्योदय हो रहा है। चारों ओर इतने सुंदर बादल फैले हुए हैं। और आपका मन अतिव शांति से अनंत शांति से भर गया है। तो, यह एक इमेजिनेशन करना है। यह एक मेथड है। तो, इस तरह से एन एंटायर मेनू ऑफ मेथड्स कि इज़ियर मेडिटेशन है। जैसे कि ओमकार चेंटिंग है। जैसे कि यह वैदिक चेंटिंग है। जैसे कि गीता चेंटिंग है। यह सब इज़ियर मेथड से और थोड़ा सा डिफिकल्ट जाएंगे। तो, यह जप है। यानी कि ओमकार जप या तो ओमकार को हार्ट में विजुअलाइज करना। इससे भी यदि थोड़ी सी डिफिकल्ट मेथड देखेंगे तो यह हैप्पीनेस मेडिटेशन है या तो यह विजुअलाइजेशन है। तो दिस इज एन एंटायर स्पेक्ट्रम ऑफ मेथड्स। और भी मैं एक के बाद एक मेथड सोच रहा हूं कि जितनी हो सके इतनी मेथड्स इनको सिखाई जाए जिससे कि क्या हो कि इवन मैं जब प्रैक्टिस करवाता हूं तो मैं मेथड्स को कंटीन्यूअसली स्टेप बाय स्टेप चेंज करता रहता हूं। पहली 5 मिनट ओमकार या तो फिर यह ओमकार और यह साथ में जप और उसके बाद में यह हैप्पीनेस मेडिटेशन 5 मिनट फिर ये 5 मिनट ये ऐसा करके करके जिससे कि क्या है कि इनका माइंड जो है बोर ना हो जाए उनको यह ये ना लगने लगे मोनोटोोनस ना लगने लगे इंटरेस्ट बना रहे और सभी तरह की मेथड्स उनकी कंटीन्यूअस प्रैक्टिस होती रहे सो और साथ-साथ में ही और कुछ-कुछ मेथड्स अभी है मेरे माइंड में थोड़ा सा मुझे मुझे वर्कआउट करना होगा। वर्कआउट करने के बाद में एक क्लास लेंगे हम जितनी अभी तो मैंने ये मेथड्स के बारे में इतना ज्यादा डिटेल डिस्कशन नहीं किया क्योंकि क्या है कि मुझे इन लोगों के ऊपर में थोड़ा सा एक्सपेरिमेंट करके देखना होगा कि यह लोग कितना रिसोंड करते हैं। क्योंकि इस तरह का सिचुएशन मेरी लाइफ में पहले तो नहीं आया कभी। हम लोग ध्यान करते हैं, जप करते हैं तो अपने लिए करते हैं। और अपना जप ध्यान
Kathamrita and Japa: meditation method for devotees of Sri Ramakrishna
का तरीका तो मैंने बताया ही है। एकदम सरल सहज है। एक हाथ में कथामृत रखना है। एक हाथ में जप माला रखनी है। जब तक जप चलता है तब तक जप करना है। फिर मन भटक जाए जप करने से तो ठाकुर की वाणी पढ़ना शुरू कर देना है। जैसे ही कथामृत पढ़ते-पढ़ते मन फिर से एकाग्र हो जाए तो फिर से जप करना शुरू कर देना है। तो यह मेथड हम लोगों के लिए बड़ी सहज है। जो कि ठाकुर के भक्त हैं। किंतु जो ठाकुर के भक्त नहीं है या तो फिर अभी चलिए कि वह और किसी संप्रदाय से जुड़े हुए हैं या और किसी इष्ट में विश्वास करते हैं तो चलो उनके संप्रदाय का धर्म ग्रंथ साथ में रखकर के जप करें। यदि वैष्णव है या तो भगवान कृष्ण के साथ भगवान कृष्ण पे आस्था है तो भागवत खोल करके बैठे या भगवान कृष्ण की कोई सुंदर कहानी वाली पुस्तक खोल के बैठे जप करते रहे मन भटकने लगता है तो वह थोड़ा सा उनकी वाणी उनके चरित्र का पाठ कर ले तो किंतु यह फिर भी आपको स्पिरिचुअलिटी में विश्वास है किसी एक ईश्वर के ऊपर में आपका एकदम गहरा प्रेम है तो यह सक्सेसफुल होगा आज का यह जो
teaching benefits of meditation to students in this age of scepticism and rationality
संदेह का संशय का युग क्या कहता है कि हम लोग मंदिर में जाते तो हैं किंतु यह जो भीतर से कनेक्शन बनना चाहिए ईश्वर के साथ में वो कनेक्शन नहीं बनता है। सब समय अपना मन नेगेटिव ही देखता रहता है। यह एक रैशनलिस्टिक एटीट्यूड हमने स्वामी जी में भी देखा। वो कल परसों ही हमने देखा कि ठाकुर की महासमाधि के बाद में काशीपुर में नरेंद्र वो हरीश वहां पर खड़े-खड़े बात कर रहे हैं। काशीपुर में वो गार्डन में एकाएक वो फटक की ओर से वो गेट की ओर से एक शुभ्र मूर्ति एक ठाकुर की तरह ही कोई एक प्रवेश किया और उनकी ओर आ रहा है। तो नरेंद्र का जो रैशनलिस्टिक माइंड है तर्कवादी आधुनिक मन तो पहले तो स्वीकार ही नहीं कर पाया कि इस तरह से ठाकुर का दर्शन होगा। फिर जब हरीश को पूछा तो हरीश ने कहा हां मुझे भी तो दिख रहा है। तब स्वामी जी ने जोर से चिल्ला के कहा कि कौन है? कौन वहां से जा रहा है? उस समय भी ऐसा तो नहीं कहा कि ठाकुर आ गए तो चलो साष्टांग दंडवत हो जाए। ऐसा नहीं यह भी देखना है। कौन है? ऐसा करके पूछा। फड़ाक करके विश्वास नहीं कर लिया कि यह ठाकुर ही है। फिर वो ठाकुर या तो जो भी है वो प्रकाशमान मूर्ति वो जो जुई फूल थी उसकी झाड़ियों में मिल गई। तो फिर भी विश्वास नहीं वो लटन लेकर के चारों ओर खोजते हैं कि कहां गया यह व्यक्ति या कहां गई वह अशरीरी मूर्ति तो देखिए कि रैशनलिस्टिक माइंड हम सबका होता है आज के युग में तो सहज करके किसी ईश्वर या तो देवी के ऊपर में विश्वास होना सहज रूप से एक संबंध उनके साथ में बनना भाव साधना मातृभाव संतान भाव वगैरह-वगैरह वह सहज नहीं होता है बहुत सारे लोग और क्या है कि उन लोगों को यह डर लगता है कि हम बहुत ज्यादा इसमें जाएंगे ना तो यह एक दिन यह लोग हमको ठग लेंगे क्योंकि फिर यह न्यूज़ पेपर में भी आता है। एक गॉड मैन बनकर के बैठा हुआ है। सब धनी लोग उसके चरण के सामने बैठे हुए हैं। अपनी सभी संपत्ति धन वगैरह सब उसको देते जा रहे हैं। देते जा रहे हैं। एक दिन पता चला इस गॉडमैन ने इतना बड़ा स्कैंडल कर दिया कि उसके साथ में जो डूबे एसोसिएटेड थे सभी लोग बदनाम हो गए। तो यह तो न्यूज़ पेपर भरे हुए हैं इस तरह की स्टोरीज से तो सबको थोड़ा सा डर लगता है कि इस तरह के धर्म है या तो भगवान है या तो यह साधु लोग हैं बाबा जी है उनके साथ में बहुत ज्यादा एसोसिएट होने को जाएंगे तो एक दिन हमको ठग लेंगे यह लोग और बदनामी भी भुगतनी पड़ेगी शायद किनको पता इनका चरित्र कैसा है तो यह एक एक अविश्वास की जो दीवाल है यह आज का यह स्टूडेंट और ईश्वर के बीच में खड़ी हुई इस दीवाल को तोड़ना इजी नहीं है। यह दीवार तो तभी टूटेगी कोई भी आकर के हजार बात भी कर दे कोई उनको सुनने वाला नहीं है। आप दक्षिणेश्वर में देखिए कि इतने सारे लोग रहते थे। वहीं के पुजारी वहीं के भंडारी वहीं के दक्षिणेश्वर गांव के कितने लोग कितने हजार लोग उसी एक लोकालिटी में रहते थे। कोलकाता में देखेंगे तो कोलकाता की पपुलेशन मिनिमम 1 लाख से ज्यादा होगी। उससे भी ज्यादा होगी कम नहीं होगी उस समय की। तो उसी कोलकाता में से किंतु चंद मुट्ठी भर लोग हैं जिन्होंने ठाकुर को स्वीकार किया था। यह 16 त्यागी संतान थे और दूसरा मान लीजिए 50 जितने गृहस्थ संतान होंगे उनके। कुल मिलाकर के मुझे नहीं लगता कि 200 500 से ज्यादा लोगों ने ठाकुर के जीवन काल के दौरान ठाकुर को अपना इष्ट या तो अपना गुरु या तो एक साधु पुरुष के रूप में स्वीकार किया हो। तो देखिए कि इवन ठाकुर भी इन लोगों का हृदय इतना फटाक करके परिवर्तन नहीं कर दे पा नहीं करवा पाते हैं। यह भीतर से ही आना चाहिए। तो भीतर से कब आएगा? स्पिरिचुअलिटी को किसी ईश्वर या किसी गॉड मैन इसके साथ में नहीं एसोसिएट करके चलो इफ यू आर रैशन इफ यू आर स्केप्टिक इफ यू आर डाउटफुल संदेह है मन में तो बाकी सब चीजों को छोड़ो। यह जो तुमको जो बेनिफिट होता है क्रिएटिविटी आज के एआई और ऑटोमेशन के युग में यदि क्रिएटिविटी नहीं होगी तो यह जो अनइंप्लॉयमेंट की लंबी लाइन जो है उसमें जाकर के खड़े हो जाना पड़ेगा। तो दैट इज वन बेनिफिट यू हैव गॉट। फिर यह स्ट्रेस है। आज कोई भी डॉक्टर, कोई भी वेलनेस कोच उसको जाकर के पूछिए व्हिच इज द ग्रेटेस्ट किलर ऑफ पीपल टुडे। लोगों को सबसे ज्यादा मारने वाला क्या है आज के युग में? तो वो है स्ट्रेस। तो यह स्ट्रेस मैनेजमेंट दो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट चीज। एक तो आपकी जॉब यानी कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी। दूसरा कि आपका फिजिकल हेल्थ, आपकी फिटनेस और वेलनेस। यह दोनों जो है आपके जो फंडामेंटल है आपके जीवन में इसको यह मैनेज करती है, हेल्प करती है। तीसरा यदि फंडामेंटल किसी भी एक व्यक्ति में होगा, तो वह है हेल्दी फैमिली लाइफ। तो, यह हेल्दी फैमिली लाइफ कब होगा? जबकि आपका एक इमोशनल बैलेंस होगा। आपको आपके भीतर में एंपैथी होगी। कोई भी एक हैप्पी फैमिली है और अनहै फैमिली है। इन दोनों को आप कंपेयर कंट्रास्ट करके देखिए। हैप्पीनेस क्यों है? क्योंकि फादर, मदर और चिल्ड्रन इन सबके भीतर में एक एंपैथी एक प्रेम का संबंध है। अनहै फैमिली क्या है? इनके भीतर में एंपैथी नहीं है। प्रेम नहीं है। प्रेम बोलना सहज है किंतु मोर टेक्निकल टर्म कहेंगे तो एंपैथी है। दूसरों का दुख, दूसरों का आनंद इसको समझने की कैपेसिटी। यह जो सेल्फिश लोग जो होते हैं उनमें यह एमथ ही नहीं होती है। वे लोग समझ नहीं पाते कि मैं जो बोलता हूं मैं जो करता हूं उससे दूसरों के मन पर कितना आघात पहुंचता है। वे लोग आंख हमने देखा होगा हमारे ऐसे रिलेटिव्स को मैंने भी किसी किसी को देखा है। आंख बंद करके जो मुंह में आएंगे वो बोलते रहेंगे। सिर्फ अपना ही स्वार्थ देखेंगे। सिर्फ अपनी ही सुख सुविधा देखेंगे। दूसरों को क्या कष्ट हो रहा है वो समझ ही नहीं पाएंगे। एक छोटा सा एग्जांपल कि हम एक बार कार में कहीं जा रहे थे तो अभी क्या है कि फैमिली ट्रिप है तो एक कार में सबको बैठना है तो वो सीट जो है वह तो तीन लोग जनरली बैठ सकते हैं तो आपको थोड़ा सा अकोमोडेट कर करके और एक एक्स्ट्रा किसी को बिठाना है चार लोगों को बैठना है ऐसा करके जाना है छोटी सी कार में तो अभी जो लोग अकोमोडेट करने की कैपेसिटी है वह थोड़ा सा संकुचित होकर के बैठेंगे तो सिकुड़ करके जिससे कि दूसरों को बैठने में सुविधा हो और जो सिर्फ अपना देखेंगे वह सीधा अपने हाथ पैर फैला करके अपना कंफर्ट खो खोज करके बैठ जाएंगे। फिर दूसरों को जो असुविधा होनी है वह होनी है। तो ऐसे कितने ही एग्जांपल हमने अपने जीवन में देखे होंगे कि हमको लगता है कि यह सामने वाला समझ नहीं पा रहा है क्या कि उसकी एक्शन की क्या रिएक्शन होती है दूसरों के मन में? सो दैट इज अ लैक ऑफ एंपैथी। ऐसे लोगों का दूसरों का मन समझने की कैपेसिटी नहीं होती। और जिन लोगों के भीतर में एंपैथी होती है आपने ऐसे लोगों को भी देखा होगा। मैंने भी देखा है। मेरी मां के जो नाना थे ग्रैंडफादर उनको मैंने बचपन में देखा था। बहुत छोटा था उस समय। किंतु अभी भी मुझे याद है कि उनके भीतर में जो एक एंपैथी था कितना सहज रूप से वो बड़ों के साथ में, बूढ़ों के साथ में, बच्चों के साथ में सहज रूप से मिल जाते थे। मुझे अभी भी याद है। मैं बहुत छोटा था उस समय। मेरे मां के ग्रैंडफादर यानी कि उनकी उम्र तो कितनी होगी? फिर तो मैं आई थिंक 7 आठ साल का था। वो चल बसे थे। बट मुझे अभी भी याद है कि उनका चेहरा जैसे कि प्रकाशित दिखता था मुझे वो जब गांव जाते थे तब। तो इस तरह के लोगों को दोनों तरह के लोगों को हम मिले हैं। सो द सीक्रेट ऑफ हैप्पी फैमिली लाइफ ऑफ हैप्पी फ्रेंडशिप इज दैट यू नीड टू कल्टीिवेट एंड यू नीड टू डेवलप एमैथी। तो यह एंपैथी है या तो स्ट्रेस मैनेजमेंट है ना कि यह क्रिएटिविटी है। दीज़ आर द फंडामेंटल बेनिफिट्स वी कैन डिराइव फ्रॉम मेडिटेशन एंड दैट इज व्हाई वी शुड डू मेडिटेशन। तो यह सब कुछ मैं तैयार कर रहा हूं अपने माइंड में। लेट मी सी कि यह बच्चों के साथ में कितना सक्सेसफुल होता है। तो आज यही तक कल फिर से आगे बात करते हैं। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु।
प्रश्न: बहुत कम लोग उन लोगों को ध्यान सिखाते हैं जो आध्यात्मिक नहीं हैं। आध्यात्मिकता के अलावा भी ध्यान के बहुत सारे लाभ हैं। हमें इस दिशा में और अधिक काम करने की आवश्यकता है।
देखिए कि यह जो ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन मूवमेंट है अमेरिका में उन लोगों ने इस तरह का काफी रिसर्च किया है और वो भी अमेरिका की आईवी लीग यूनिवर्सिटीज के साथ में मिलकर के वो कंट्रोल ग्रुप वगैरह जो एक्सपेरिमेंट के जो स्टैंडर्ड मेथोडोलॉजीस होती है उसको फॉलो करके। सो अमेरिका में एटलीस्ट ये अवेयरनेस काफी आजकल फैला है और मेडिटेशन का एक जनरल स्वरूप योगा यदि कहें तो योगा का बेनिफिट तो टुडे इज वर्ल्ड वाइड माने सिर्फ इंडिया अमेरिका यूरोप तो छोड़ ही दीजिए जिन लोगों का इंडिया के साथ में ऐसा कोई नहीं है पाकिस्तान ना सऊदी अरेबिया ना चाइना ना कि नॉर्थ कोरिया वहां पे भी आज योगा आप देखेंगे कि बहुत पॉपुलर हो रहा है। योगा इज मोस्ट पॉपुलर एक्टिविटी ना अवर डेज। उन्हें यहां तक कि मैंने ये काफी स्टैटिस्टिक्स पढ़े थे। अभी मैं भूल गया कि योगा इंडस्ट्री टुडे इज़ मने लार्जर देन द सॉफ्ट ड्रिंक इंडस्ट्री ना कि ऐसा-सा सब काफी स्टडी पढ़ा था मैंने। समय हो गया। मैंने योगा विशेषांक पब्लिश किया था राजकोट से। उस समय ये सब स्टडी किया था। तो देखिए कि दैट अवेयरनेस इज़ स्प्रेडिंग। मेडिटेशन एस सच नहीं करके यदि योगा शब्द आप यूज़ करेंगे। सो दैट अवेयरनेस इज़ स्प्रेडिंग। ओनली थिंग इज़ के फिर योगा का फिजिकल एस्पेक्ट है। उसके साथ-साथ में यह जो कॉन्शियसनेस एस्पेक्ट है उसको भी थोड़ा सा प्रमोट करना चाहिए। यह दिस इज देखिए हमारा भारत का यह जो हमेशा से यह रहा है ना कि अपने हाथ में यह जो जेम्स है रत्न है जब विदेशी लोग उसको सराहना करेंगे तो हम लोग अच्छा अरे वाह ये तो हमारा हो गया तो हमारा चारों जगत में प्रशंसा है हम लोग खुद उसको भूल जा रहे हैं ये स्वामी जी योगा और वेदांत अमेरिका में फेमस करके आए बोल कर के हमने इस योगा वेदांत को स्वीकार किया है यदि वो स्वामी जी को कहने वाले लोग बैठ बैठे थे राजा महाराजा कि स्वामी जी आप अमेरिका जाइए आपकी जो टैलेंट है वहीं वहीं पे वो ये होगी एप्रिशिएट होगी। इंडिया में एप्रिशिएशन आपको नहीं मिलने वाला है। ये लोग मुंह पे दो बातें कर देंगे किंतु आपके काम में फाइनेंशियली मैन पावर सहाय कहीं नहीं मिलने वाली। तो स्वामी जी को अमेरिका जाना पड़ा। वहां से मैन पावर आया। बेलूरमठ है तो अमेरिका के पैसों से बना है। शुरुआत का बेलूरम रामकृष्ण मिशन एसोसिएशन मिस मूलर के पैसों से बाद में वो जो निखिल आनंद जी वो दो लेडी डिवोटी को लेके आए थे अमेरिका से तो ये मंदिर वगैरह का पैसा उन्होंने दिया था। सो ये इनिशियल तो पूरा अमेरिका यूरोप के पैसों से चला है। सो दिस इज आवर वीकनेस हमेशा से रही है कि अपना ये जो ट्रेजर है उसको प्रॉपर्ली किस तरह से रिप्रेजेंट करना जगत के सामने। बीच-बीच में अभी आजकल तो नहीं आता। खास करके ये जो नई गवर्नमेंट आई है। वरना पहले तो कैसा सब न्यूज़ आता था। मुझे याद है तुलसी पेटेंट कर दी है किसी ने। तो अभी हम लोग बिना पेटेंट का पैसा दिए तुलसी नहीं व्यवहार कर पाएंगे। मैंने कहा ये क्या पागलपन है? उन लोगों ने तुलसी पेटेंट कर दी। तब हमको नहीं याद आया कि तुलसी के इतने गुण
प्रश्न: क्या विद्यार्थी ध्यान सीखना पसंद करते हैं?
हैं। मोर देन एकेडमिक सक्सेस उनका फाइनेंशियल सिक्योरिटी चाहिए। आजकल तो देखिए ऐसा स्टडी फॉर द सेक ऑफ स्टडी। माने लव फॉर स्टडी। ऐसा कहां है? वो सबको तो एक करियर ही बनानी है ना। सो करियर इज़ द मोस्ट पावरफुल अट्रैक्शन। के इट विल हेल्प यू इन योर करियर। प्रमोशन में हेल्प करेगा। आपका बेटर जॉब अपॉर्चुनिटी ले आएगा। देन दैट विल अट्रैक्ट मोस्ट स्टूडेंट्स। और खास करके ये लड़के क्या है कि जो यहां पे आते हैं वो कंपटीशन एग्जाम वगैरह की तैयारी करते हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल के हैं। माने आइदर ग्रेजुएशन कर रहे हैं या तो पोस्ट ग्रेजुएशन के हैं। तो उन लोगों के लिए नाउ द नेक्स्ट स्टेप इज़ कैरियर। माने एकदम उनका ये है कि अभी जाकर के स्टीव जॉब्स ना ये हो जाएंगे। मस अनदर थिंग मैं जब ये सब एग्जांपल देता हूं ना कि यार स्टीव जॉब्स इंडिया आया था। मेडिटेशन सीखा था। फिर मैं पूछता हूं हु इज स्टीव जॉब्स? तो फिर आधे बच्चों को पता ही नहीं है वह कौन है। तो मैंने कहा देखो भाई तुम लोग कंप्यूटर के फील्ड में हो। स्टीव जॉब्स कौन है नहीं पता है। सो आई मीन ये जो लव फॉर द स्टडी है मैंने जो सब्जेक्ट मैं पढ़ाई करता हूं फिर मैं नेट पे जाकर कितना रिसर्च करता हूं। कितना इधर-उधर क्या है बैकग्राउंड? क्या है इंटरेस्टिंग इंसिडेंट सब खोज निकालते हैं हम लोग। बिकॉज़ वी लव द सब्जेक्ट। इनका ऐसा है सब्जेक्ट इज़ जस्ट ए मींस टू अटेन मनी। दिस सच एन एक नैरो माइंडेड मेंटालिटी बन गया है। तो फिर आप क्योंकि क्या है ना कि देखिए अल्टीमेटली एनी स्पिरिचुअल साधना इट इज अ साधना फॉर हायर आइडियल्स। आपका आइडियल्स एकदम जैसे ठाकुर ने कहा ना कोलकाता के रास्ते से जा रहा था। देखा सबकी निम्न दृष्टि सबकी पेट की ओर दृष्टि है। तो फिर इतनी नैरो माइंडेड दृष्टि होने से फिर यह सब हेल्प भी नहीं करेगा। अगेन मैंने दोनों तरह के स्टूडेंट्स देखे हैं। मैंने कहा ना कि एक एक स्टूडेंट थी शुरू-शुर के क्लास में आती थी। हमारा दो महीने का ये है ना साइकिल तो वो तो उस समय शुरू शुरू में थी। तो मैं जैसे ही क्लास स्टार्ट करूंगा म कोई भी जैसे कि ये चार पुरुषार्थ है धर्म अर्थ काम मोक्ष तो जैसे ही मैं स्टार्ट करूंगा ना वैसे ही वो प्रश्न करना शुरू कर देगी। अच्छा अच्छा इसके बारे में क्या फिर ये कर्म योग का इसके साथ में कैसे एसोसिएशन होता है? मैं कभी-कभी मैं एकदम थोड़ा सा ये हो जाता था कि हाउ टू एक्सप्लेन दैट इतना शार्प क्वेश्चन करती थी। सो ऐसे भी स्टूडेंट है एक स्टूडेंट थी कि वो संस्कृत में ग्रेजुएशन किया है उसने। पहले तो मुझे पता नहीं था इतना प्रश्न इतना एक्यूरेट प्रश्न करेगी टू इतना प्रॉपर क्वेश्चन करेगी। फिर आखिर में मैंने पूछा इस तरह का प्रश्न कर पा रही हो किस तरह से? व्हाट इज योर ग्रेजुएशन? तो उसने कहा मैंने संस्कृत में एमए किया है। मैंने कहा अच्छा तो सो समटाइ्स वी फील वेरी गुड कि हम लोग जो कर रहे हैं वो कुछ दिख रहा है। फल रहा है नजर के सामने और कभी-कभी डिप्रेस हो जाते हैं कि अरे भाई इतना बोलते हैं तो कोई फर्क ही नहीं दिख रहा है। मुझे क्या करेंगे? आई मीन आपको क्या है ना कि ये सहीसही में कर्मणीयवा ही अधिकारस्त है। वो भाव लेकर के आपको चलना है कि यदि यह नहीं रहेगा बड़ी एक्सपेक्टेशन रहेगी तो हम बहुत ही निराश हो जाएंगे। ना एक्चुअली देखिए एग्जांपल बहुत
प्रश्न: क्या ऐसे लोगों के उदाहरण हैं जिन्होंने ध्यान से अपना जीवन परिवर्तित किया ?
सारे हैं। मैंने बीच में कहा था ना कि मैं एक किताब पढ़ रहा हूं अमेरिकन वेदा बाय फिलिप्स गोल्डबर्ड गोल्ड गोल्डबर्ग। तो किस तरह से यह योगा वेदांत मूवमेंट अमेरिका में फैला और किस तरह से उसने एक अपने पैर पसारे हैं। तो काफी एक अच्छा डिटेल डिस्कशन है। शुरू-शुर में तो सब इंडियन स्वामी ही गए हैं भारत से वो स्वामी जी हो ना कि फिर ये प्रभवानंद जी हो ना कि फिर ये जो वो वो जो दूसरे इस वाले हैं वगैरह-वगैरह डिवाइन बहुत सारे गए हैं। सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप वाला योगानंद परमहंस वगैरह। किंतु बाद बात बाद में वह कहता है कि देखिए कि एक समय ऐसा है कि अपने जो अमेरिकन टीचर्स थे वे लोग भी इस फील्ड में काफी नाम करना शुरू किए हैं। अभी मैं सब नाम वगैरह भूल गया। मैं वो किताब आपके साथ में शेयर करूंगा तो आप पढ़ सकते हैं। वो काफी एक के बाद एक टीचर्स खास करके आज के युग में ये जो आप कह रहे हैं ना कि सेकुलर एस्पेक्ट ऑफ योगा और मेडिटेशन ये अमेरिका में खास करके इंडिया का मुझे इतना नहीं पता। अगेन इंडिया का प्रॉब्लम क्या है कि ये सब डॉक्यूमेंटेशन होना किताबें लिखना थोड़ा मुश्किल मतलब कोई नहीं लिखता है या तो होगी तो आई डू नॉट नो बट अमेरिका का एटलीस्ट ये है कि वहां पे इजीली बुक्स अवेलेबल है वेल रिसर्च बुक अवेलेबल है वेल रिटन बुक्स अवेलेबल है तो ये खास करके अमेरिका और भी है काफी है माने योगा वेदास जर्नी टू द वेस्ट वगैरह-वगैरह वेदांता उपनिषद जर्नी टू द वेस्ट तो है ऐसी मैंने मेरे पास में काफी कलेक्शन है तो मैं एक समय था बड़ा पढ़ता रहता था इसको तो मैं आपके साथ में शेयर करूंगा देखेंगे और खास करके आप लेटर चैप्टर्स पढ़ेंगे क्योंकि शुरू के चैप्टर में वही स्वामी जी वाली ही बात है व्हिच इज गुड एक्चुअली कि ये लोग एक्सेप्ट करते हैं माने एक स्टैंडर्ड ऑथर है वो अमेरिका में योगा वेलनेस मूवमेंट किस तरह से स्टार्ट हुआ तो रूट उसके जो है स्वामी जी को क्रेडिट करता है व्हिच इज गुड एक्चुअली बट आफ्टरवर्ड्स खास करके लेटर चैप्टर से जो अमेरिकन जो टीचर्स है वे लोग किस तरह से इसको आगे बढ़ा रहे हैं और फिर दूसरा कि एक-एक टीचर का नाम लेके फिर आप थोड़ा नेट सर्च कर लीजिए तो और भी बहुत सारा मटेरियल हमको देखने को मिलेगा। वी शुड डू दिस सॉर्ट ऑफ़ रिसर्च। वी शुड एक्चुअली राइट बेटर आर्टिकल्स बुक्स वगैरह लोगों में थोड़ा सा प्रचार हो कि देखिए कि जिसको आप नॉन स्पिरिचुअल एस्पेक्ट कहते हैं सेकुलर नहीं कहूंगा व्हिच इज़ वेरी बैड वर्ड। मैं कहूंगा कि नॉन स्पिरिचुअल। तो ये नॉन स्पिरिचुअल जो एस्पेक्ट है इवन देन योगा वेदांत शब्द यदि नहीं यूज करते हैं इवन योगा नहीं यूज़ करते हैं इवन बोथ ये दोनों है फिर भी हिंदूइज़्म के साथ में एसोसिएटेड है वो मोर नॉन स्पिरिचुअल वर्ल्ड या तो मोर नॉन डिनोमिनेशनल वर्ल्ड इज़ मेडिटेशन सो मेडिटेशन हाउ द टीचर्स ऑफ़ मेडिटेशन आर स्प्रेडिंग दिस आइडिया एंड हाउ सक्सेसफुल दे आर माने नेवी सिल्स को सिखाना द वन ऑफ़ द डेडलीस्ट वॉरियर यूनिट इन अमेरिकन नेवी सेस उनको मेडिटेशन सिखाना राइट वो यानी कि आप किस लेवल पर चले गए हैं कि पेनिट्रेशन कितना है अमेरिकन कल्चर के भीतर में तो दीज़ आर मेनी गुड स्टोरीज देयर मैं आपके साथ में शेयर करूंगा मुझे मैं अभी मैं बहुत कुछ भूल गया उसका याद होता तो मैं बताता एक दो आई विल शेयर विद यू देखिए नॉन स्पिरिचुअल यदि जो अपना थीम
प्रश्न: स्वामीजी कहते हैं कि उपनिषद महान शक्ति का भंडार हैं। उपनिषद में शक्ति कैसे आती है? दिव्यता की अभिव्यक्ति क्या है?
चल रहा है उसमें यदि मैं बताऊं तो व्हाट गिव्स अ स्ट्रेंथ? सबसे पहली बात तो मैंने यह जो मॉडल बनाया इन लोगों के लिए देयर इज अ परपेचुअल बैटल बिटवीन डार्कनेस एंड लाइट बिटवीन ऑर्डर एंड केओस बिटवीन गुड एंड इविल विद इन आवर हार्ट। अभी क्या है कि बचपन से ही कॉन्शियसनेस को समझ ही नहीं पाए। माइंड का स्टडी ही नहीं किया। ये जो इंद्रियां है सब समय यह एक्सटर्नल वर्ल्ड में यह रहती है। तो क्या है कि हमने माइंड को समझा ही नहीं। तो यदि कोई हमको यह कहता है कि द सॉल्यूशन ऑफ आवर प्रॉब्लम्स इज विदिन यू। यह सतित आनंद यह हमारा सही स्वभाव है। यदि यह नॉलेज कोई हमको दे देन दैट्स इटसेल्फ इज द ग्रेटेस्ट स्ट्रेंथ ना। क्योंकि देखिए मेरे पास में पैसा कहां से आएगा? कोई मुझे पैसा देता है 1 करोड़ तो मेरे पास में 1 करोड़ आएंगे। गुड वेरी गुड। दूसरा है कि मुझे पता नहीं कि मेरे पास में ऑलरेडी एक करोड़ है। किसी ने आकर के मुझे बता दिया अरे तुम तो ऑलरेडी एक करोड़पति हो। तो मैं तो खुश हो गया। अरे यह पता ही नहीं था मेरे पास में तो दिस इज़ अनदर वे ऑफ़ गेनिंग मनी राइट जो पहला तो है कि मुझे एक करोड़ मिलता है। दूसरा कि मुझे मेरे पास में एक करोड़ है वो ज्ञान होता है। सो उपनिषद डजंट गिव अस ₹1 करोड़ उपनिषद टेल्स अस दैट मेरे पास में ऑलरेडी एक करोड़ पड़े हुए हैं। सो दैट इज़ हाउ इट इज़ अ माइन ऑफ़ स्ट्रेंथ। यदि वह कोई ऐसा कहेगा कि मैं एक बैंक में जाता हूं। बैंक में एक भी रुपया नहीं है। किंतु फिर भी उस बैंक में जाकर के मुझे मैं करोड़पति हो गया हूं। हाउ इज दैट पॉसिबल? वो बैंक में एक मैनेजर बैठा है। वो कहता है कि हम आपका वो जो डिपॉजिट लेके फिर पैसा देना, लोन देना यह सब नहीं करते। हम सिर्फ बता देते हैं आपको कि आपके पास में ऑलरेडी ये वेल्थ पड़ी हुई है। सो दैट वे उपनिषद इज अ माइन ऑफ स्ट्रेंथ। जितना ही देखिए जैसा आपने कहा ना ये ये जो सृष्टि प्रकरण है। फिर यह महावाक्य विचार है। फिर यह जो आपका जितना भी वेदांत को लेकर के तर्क-वितर्क वगैरह है। एक्चुअली दिस इज़ नॉट अ हार्ट ऑफ द वेदांत। यह जो हार्ट ऑफ वेदांता इज द आत्मन का यह जो गुणगान गाना यह हार्ट ऑफ वेदांत है। यह महावाक्य जो है वह हार्ट ऑफ द वेदांत है कि अहम ब्रह्मास्मि बाकी अहम ब्रह्मास्म को मैं जैसे सर्वप्रियनंद जी हमारे वेदांत सार के क्लास लेते थे। तो शुरू शुरू में वेदांत सार में तो आत्मन वगैरह के बारे में थोड़ा सा आता है। फिर वो सीधा माया का चालू होता है कि माया क्या है? सृष्टि प्रकरण क्या है? यह पंजीकरण क्या है वगैरह वगैरह। तो फिर महाराज कहते हैं कि देखिए आश्चर्य की बात है कि जो आत्मन जो कि वेदांत का सब्जेक्ट मैटर है वो उतने ही कुछ शुरू शुरू में खत्म हो जाता है। बाद में पूरा माया माया ही चलता है। तो ये मायावाद ने पूरा हमारे वेदांत को जैसे कि खा गया कि सूरज के ऊपर में बादल कैसे आया? इतना बड़ा सूरज है तो इतना छोटा सा बादल सूरज को कैसे ढक दे सकता है? इस बात को लेकर के ही पूरा हमने जन्म जन्मांतर बिता दिए। सूरज है उसको तो देखो पहले। बाद में तो सूरज पे अंधेरा कैसे हुआ? बादल आया वगैरह-वगैरह। सो द हार्ट ऑफ उपनिषद इज़ दैट ग्रेट डिक्लेरेशन कि यस माने मेरा जो सही स्वरूप है वो सच्चिदानंद है। दैट इज़ व्हाई इट इज़ अ स्ट्रेंथ ऑफ़ माइन ऑफ़ स्ट्रेंथ। दूसरा कि मैनिफ़ेस्टेशन। सो व्हाट इज़ एक्चुअली मैनिफ़ेस्टेशन? तो यही तो मैनिफ़ेस्टेशन है। क्रिएटिविटी इज़ अ मैनिफ़ेस्टेशन। देखिए स्पिरिचुअलिटी ब्लिसफुलनेस इज़ अ मैनिफ़ेस्टेशन। यह स्ट्रेस मैनेजमेंट इज अ मैनिफेस्टेशन। जैसे मैंने कहा मेरे वो मां के नाना के बारे में, दादा के बारे में कि मुझे अभी भी याद है कि उतना उतना उनका शीतल एक उनका म एक स्वभाव था। सब समय उनके पास में जाकर के बैठने की इच्छा करती थी। सब समय उनके पास में बात करने की इच्छा होती थी। आई डू नॉट नो टुडे कि उनका स्पिरिचुअल ओरिएंटेशन कैसा था। मैंने किसी को पूछा भी नहीं है। बट विथ माय नॉलेज टुडे आई कैन इज़ली अंडरस्टैंड ही मस्ट बी अ वेरी स्पिरिचुअल पर्सन। अदरवाइज तो ये मोहिनी शक्ति जो है लोगों को आकर्षित करने की वो आती ही नहीं। सो दिस दीज़ आर द मेनिफेस्टेशंस नॉन स्पिरिचुअल मैनिफेस्टेशंस।