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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

Sri Ramakrishna Kathamrita 25 July 2023 नरेंद्र आदि के साथ कीर्तनानंद - नरेंद्र से प्रेमालिंगन

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ओम स्थापा कौच धर्म नायते नमः कल हमने देखा की किस तरह से एक भक्ति ने एक आश्चर्य वध स्वप्न देखा था की वह पूरा प्रलय की वजह से अभिप्राय इंटरप्रिटेशन तो मेरा है यहां पर सिर्फ इतना लिखा है की यह पूरा पृथ्वी पानी से भर गया है जहां भी नजर जाए वहां पानी है फिर पानी में एक ब्राह्मण जा रहा है और यह ब्राह्मण को देखकर के भक्ति ने पूछा की आप पानी के ऊपर में से यह अनंत समुद्र के ऊपर में से चलकर के कैसे जा रहा है तो ब्राह्मण ने कहा की इसके नीचे में पानी के नीचे में रास्ता है तो अभी उन्होंने भक्ति ने कहा की मैं भी आपके साथ में आना चाहता हूं और साथ में पूछा भी आप कहां जा रहा है तो ब्राह्मण ने कहा मैं जा रहा हूं भवानीपुर हमको पता है भवानीपुर में है काली मंदिर यानी और हमने इंटरप्रिटेशन को ठाकुर की आध्यात्मिक चीन और आध्यात्मिक शिक्षा के आधार पर इंटरप्रेट कर सकते हैं की प्रलय है वह हमारे अहंकार के विनाश का प्रतीक है यह जो रास्ता जो है समुद्र के नीचे से जा रहा है वो है अखंड जब और भवानीपुर जो डेस्टिनेशन है हमारा जहां पर हम जा रहे हैं ये ब्राह्मण जा रहा है वो है मां जगदंबा का दम अर्थात की अनंत जाप करने से अखंड जाप करने से मां जगदंबा के पास हम पहुंच सकते हैं ये इस तरह से हमने कल इंटरप्रिटेशन दिया अच्छा अभी आगे पढ़ने हैं और साथ में यह भी देखा की रात में ये सब ठाकुर के साथ रहे थे किंतु मास्टर महाशय ने ठाकुर रात का कोई वर्णन नहीं दिया है यदि हमारे पास हम दूसरे वर्णों के आधार पर यदि अनुमान लगाना चाहे की रात में क्या हुआ हुआ होगा तो हम अनुमान करके का सकते हैं की ठाकुर ने किसी को सोनी नहीं दिया होगा क्यों क्योंकि थोड़ी ही डर के बाद में ठाकुर जा के बोलेंगे अरे यहां पर सोनी के लिए आए हो ना की जब ध्यान करने के लिए आए हो मां का नाम लेने के लिए आए हो ऐसा बोलकर के उठा दिया होगा और किसको कहानी पर किसको चांदनी के घाट पर किसको पंचवटी में किस को कहां पर ऐसा करके जब ध्यान करने के लिए भेज दिया होगा यह हम अनुमान करके का सकते हैं तो जो भी है सुबह का वर्णन अभी मास्टर महाशय कर रहे हैं मास्टर महाशय लिखने हैं निद्रा भांगड़ा पर क्यों अच्छी ते छे नीचे प्रभात होए छे नींद में से उठने के बाद कोई कोई भक्ति देख रहे हैं की सुबह हुई है 70 अक्टूबर 1882 मंगलवार कोयला कार्तिक शुक्ला पंचमी श्री राम कृष्णा बालक के न्याय दिगंबर कल हमने श्री राम कृष्णा बच्चे की तरह दिगंबर अवस्था में है वस्त्र सब कहां चले गए हैं पता नहीं और कल हमने यह भी देखा था की किस तरह से योगेन महाराज जब आए थे तब ठाकुर ऐसे ही दिगंबर हो करके बार-बार रात को उनको नींद में से उठा करके नरेंद्र के बड़े में पूछ रहे थे तो भाव का जब आवेश आता है ठाकुर के ऊपर में तो जैसे ठाकुर कहते हैं ना की बालक वत जड़ वी पिशाच वध इस तरह से वह हो जाता है सड़क तो वैसे ही ठाकुर के ऊपर में झप्पी ये मां जगदंबा का मां काली का आवेश होता था बिल्कुल बच्चे जैसे हो जाते थे फिर उन्होंने वस्त्र पहने हैं नहीं पहने हैं क्या किया है वह सब कुछ हो ठीक नहीं राहत था जैसे छोटा बच्चा कैसे निर्वस्त्र होकर के मां के चारों और दौड़ता राहत है खेलते राहत है मां जड़ी उसको कुछ कपड़े पहनती है तो वह पहना है नहीं पहनती है तो उसको उसका भी कोई फिक्र नहीं है तो वैसे ही ठाकुर दिगंबर बालक के न्याय दिगंबर ठाकुर डर नाम करेट करेट घर भगवान का नाम लेते लेते अपने कमरे में चारों और टहल रहे हैं कोकन गंगा दर्शन को खून ठाकुर नाम कीर्तन कभी गंगा दर्शन कर रहे हैं कभी यह जो भगवान की फोटो छवि जो सब वहां पर तंगी हुई है दीवाल के ऊपर में उनके पास में जाकर के प्रणाम कर रहे हैं या तो फिर कभी मधुर स्वर से नाम कीर्तन कर रहे हैं अभी सोच करके देखिए की हम जब उठाते हैं तो क्या होता है हम तो खासकर के हम साधु लोग तो अपने कमरे में अकेले ही होते हैं कोई-कोई साधु हो सकता है की उठकर के पहले ही माला हाथ में लेकर के जाप करें या तो फिर कोई साधु जैसे मैं क्या करता हूं मेरे पास में ही दो-तीन किताबें रखें राहत हूं तो सुबह को उठकर के ही हम रोटी हैं या ऐसी कोई किताब वह पढ़ लेट हूं उसके दो-तीन पेज यानी की ओरियंटेशन हो जाता है सुबह को ही उठकर के अपने मां का की हां उद्योग गति की और ले जाए सुबह ही हमारा मां तो इस तरह से किंतु ये लोग कितने भाग्यवान है नींद में से उठे देखा की ठाकुर ठाकुर सुमधुर स्वर से ईश्वर का नाम ले रहे हैं समाध वो कभी भक्ति पूर्वक गंगा का दर्शन कर रहे हैं या तो ये सब ईश्वर की सब छबियां राखी हुई है अवतार की छबियां कहां वो हमको पता है कहानी एक जगह पे मशरूम हस है वो लिखने हैं की जैसे वो पीटर नदी में समुद्र में डब रहा है पानी में जिससे सके उसको निकलते हैं उसको बचते हैं वो एक छवि है फिर चैतन्य घर और निताई की छवि है इस तरह से वो कितनी छबियां वहां पे है उसका वर्णन भी मास्टर वहां से एक जगह पर किया है तो ठाकुर उनको दर्शन कर रहे हैं श्रद्धा भक्ति पूर्वक कभी गंगा का दर्शन कर रहे हैं कभी सुमधुर स्वर से नाम गन कीर्तन कर रहे हैं कोकन बोलते सेन कभी बोलते हैं वेद पुराण तंत्र गीता गायत्री भागवत भक्ति भगवान कभी बोलेंगे वेद पुराण तंत्र गीता गायत्री भागवत भक्ति भगवान ये भागवत भक्ति और भगवान वाली जो बात है वह मास्टर ठाकुर ने उसको बोलने को बोला था मास्टर केशव सेन को केशव सेन को कहा की बोलो भागवत भक्ति भगवान तो केशव हुसैन क्या कहता है की महाशय हम इतने दूर तक गुरु कृष्णा वैष्णव एन की ऐसा कुछ बोला था मैं एग्जिट भूल गया मेरे ख्याल से ये भागवत भक्ति भगवान ही बोला था तो जो भी है वो भागवत भक्ति भगवान तो केशव सिंह कहता है की महाशय ये तो दौरे नाही महले लॉकर आमदर गोंडा बॉल्व अभी क्या है की बंगाल में ऐसा है की यह वैष्णव भावधारा जो है उसके बड़े में लोगों का थोड़ा सा एक और थोडॉक्स कंजरवेटिव एक एटीट्यूड है तो यदि ये केशव सेन ऐसा बोलने लगेगा की भागवत अर्थात की धर्म पुस्तक भगवान अर्थात की जो ईश्वर जो इस धर्म पुस्तक के नियंता है इसके अधिष्ठात्री देवता है और भक्ति अर्थात की ये भागवत का जो पाठ करता है उसके उपदेशों को अपने जीवन में उतरता है तो यह जैसे ठाकुर ने कहा था ना की भक्ति के लिए ही भगवान का अवतरण होता है एक दिन नरेंद्र को दिखा करके बताया था नरेंद्र की और उंगली करके कहा और चेन्नई फिर अपने और और ठाकुर का तो ऐसा वह शॉर्ट फॉर्म में होता है ना सब मंत्र फॉर्म में और चेन्नई एक खकनार सब की छुआ अर्थात नरेंद्र के लिए ही ठाकुर का अवतरण हुआ है नरेंद्र पुकार बोलकर के ही ठाकुर आए हैं तो ये भक्ति के लिए ही भगवान का अवतरण है यदि भक्ति नहीं रहेगा तो भगवान आकर क्या करेंगे कभी आ हम में कभी-कभी सोचता था जैसे वो हम स्टूडेंट होते हैं तो कैसा वो सब नास्तिक भाव कभी कभी ए जाता है मां में तो मैं भी सोचता था की जैसे ये सब पढ़ने हैं ना वो ऑथर आजकल के मॉडर्न ऑथर होते हैं क्या लिखने हैं की भारत में धर्म इतना सर चला है की लोगों का जैसे मार्क्स कहता है ना की रिलिजन इस अफीम ऑफ पीपल धर्म क्या है लोगों के लिए अफीम है धर्म की वजह से लोग राशन थिंकिंग नहीं करते हैं लॉजिकल थिंकिंग नहीं करते हैं इकोनामिक डेवलपमेंट नहीं होता है सोसाइटी अंधश्रद्धा में डब बन रही है और यह सब उल्टा-पुल्टा हमारे सर में बचपन में यह सब घुसा दिया जाता है तो मैं भी सोचता था या भारत ने ही इतने सारे अवतारों को जन्म लेने की क्या जरूर पद गई जो दूसरे देश उन लोगों का कल्याण करो किंतु जब से ठाकुरमार स्वामी जी को पड़ा है तब से पहले बात तो की एक घर की बात है की मैं भारतीय हूं मैं हिंदू हूं और हमारे धर्म में भगवान बार-बार जन्म लेते हैं ये तो बड़े ही घर की बात है एक और दूसरा की इसके पीछे का जो लॉजिक है इसके पीछे का जो साइंस है वो यही है की भक्ति पुकारता है तो भगवान आता है भगवान को क्या कोई और कोई कम धाम नहीं है ना की आकर के वैसे ही आपका कल्याण करते रहे ना की आपका हाथ पकड़ कर के भाव सागर पर करवाते रहे ये सब थोड़ी ना भगवान के पास समय है हम पुकारेंगे तो वह आएंगे हमारा भी मुंह सूतक होना चाहिए यदि मुमुक्ष उत्पन्न नहीं रहेगा तो भगवान की यह जो दया करुणा यह जो आशीर्वाद है वो प्राप्त वो फिर कैसा है पता है ना जैसे ठाकुर कहते हैं की कृपा सिंधु बहे रहा है कृपा बनतश कृपा का जो पवन है कृपा की ये जो हवा है वो बा ही रही है आपको आपकी नौका का ये जो पाल है जो सेल है शर्ट गुजराती में कहते हैं उसको खोल देना है और जैसे ही आप अपना सेल अपना पाल खोलेंगे वैसे ही उसमें हवा आएगी और आपकी नौका चलने लगेगी तो ये भगवान को पुकारने से ही हमारा मां भगवान के आशीर्वाद को ग्रहण करने योग्य होता है अभी भगवान मां लीजिए अफ्रीका में बार-बार नहीं गए हैं या तो फिर मां लीजिए की यूरोप में आने के बाद में दूसरी बार अवतरण नहीं लिया है इसका अर्थ यह नहीं है की यूरोप या अफ्रीका या तो अमेरिका या चीन में जो एक भक्ति भगवान को पुकारेगा तो भगवान का दर्शन नहीं होगा ऐसा नहीं है वो पुकारेगा तो अवश्य दर्शन होगा क्योंकि जैसे भगवान का आशीर्वाद भारत के ऊपर में है वैसे ही वहां पे भी है वही बात है की हमको पुकारा है तो भारत में बार-बार जन्म क्यों ग्रहण करते हैं वो लीला करने के लिए भक्तों को लीला का आश्चदन चाहिए भक्तों को सिर्फ आशीर्वाद नहीं चाहिए की मुझे मुक्ति दे दो मुझे जन्म मृत्यु जरा व्याधि के इस कालचक्र से मेरा कालचक्र कैट दो इस कालचक्र से मुझे छुड़ा दो मेरा यह आखिरी जन्म हो भक्ति यह नहीं कहता सही सही वक्त है वो रहेगा की भगवान के साथ में मैं बार-बार आऊं बार-बार भगवान की लियाओ का दर्शन करूं यह महावीर हनुमान क्यों पृथ्वी पर डे धरण करके र रहे हैं जहां जहां भगवान राम का नाम गुणगान होगा वहां उपस्थित रहकर के नाम गुणगान का रस ग्रहण करेंगे इसके लिए इस मृत्यु लोक में उन्होंने जीवन धरण करके अभी भी वो उपस्थित है तो वैसे ही यदि एक कोई सड़क है उसको मुक्ति चाहिए तो वो पूरे विश्व में कहानी पे भी होगा आखिरी अफ्रीका में हो ना की साउथ अमेरिका में हो ना की जापान में हो एन की अमेरिका में कनाडा में हो यदि वो ठीक-ठीक वो साधना करेगा कर्म ज्ञान भक्ति ज्ञान ये कर साधना है साइंस है साइंस ऑफ स्पिरिचुअलिटी साइंस ऑफ इनलाइटनमेंट साइंस ऑफ मुक्ति साइंस विज्ञान निर्वाण का विज्ञान तो ये जो निर्वाण का विज्ञान है उसका ठीक ठीक अनुष्ठान करेगा उसको निर्वाण प्राप्त होगा ही होगा तब भारत के भक्तों की बात अलग है हमको सिर्फ निर्वाण नहीं चाहिए निर्वाण तो छोटी चीज है हमारे लिए भगवान की लीला का आश्चदन करने से निर्वाण निर्वाण तो कहां पड़े रहते हैं किसको पता रंगनाथन जी महाराज कहते हैं की मैं मुझे मुक्ति नहीं चाहिए मैं चाहता हूं किट बार-बार रैंप में जन्म ग्रहण करूं बार-बार रामकृष्ण मिशन में साधु के रूप में जॉइन करूं और मिशन का कम करूं ठाकुर का कम करो रंगनाथन आनंद जी महाराज ऐसा कहते थे तो ये हमारी भक्तों की बात अलग है सड़क की बात अलग है तो इसीलिए ठाकुर बार-बार भारत में जन्म ग्रहण करते हैं ईश्वर जन्म ग्रहण करते हैं किंतु यह जो मॉडर्न थिंकिंग वाले लोग कहेंगे की यह सब और थोड़े इतिहास यह सब सुपरस्टिशस इतिहास अंदर श्रद्धा यह सबसे मुक्त होकर के ब्रह्म समाज की रचना की गई है अभी जो अभी हम यह भागवत भक्ति भगवान इस तरह से पुकारा शुरू कर देंगे तो लोग हमको भी इस तरह से और थोड़े अंदर श्रद्धालु माने लगेंगे इसलिए मैं सब कुछ बोलना हूं किंतु यहां तक नहीं जाऊंगा इसके बाद में मास्टर महाशय लिखने हैं ठाकुर गीता उपदेश कोरिया अनेक बार बोलते 6 त्यागी त्यागी त्यागी ठाकुर गीता को उद्देश्य करके बार-बार बोल रहे हैं त्यागी त्यागी त्यागी ये वो जो पंडित के साथ में वो ठाकुर की बात हुई थी उसने कहा की गीता का क्या अर्थ है गीता को 10 बार जो बोलोगे वो गीता का अर्थ हो गया गीता गीता ठाकुर कहते हैं गीता का अर्थ ही हो गया त्याग महात्मा गांधी ने गीता के ऊपर में एक छोटी सी किताब लिखी है किताब की त्याग का त्याग की साधना तुमि शक्ति तुमि पुरुष तुमि प्रकृति कभी-कभी काली मंदिर काली मंदिर है और आधा कांतीर मंदिर है मंगल आरती हुई ते छे ओ शंकर घंटा बजीते छे यहां पे काली मंदिर में और राधाकांत के मंदिर में मंगल आरती अर्थात की सुबह की आरती हो रही है और शंकर और घंटा बाज रहे हैं भक्ति तेरा भक्ति लोग उठ करके नींद में से उठकर के देख रहे हैं कालीबाड़ी पुष्प उद्यान ठाकुर डर पुजार था पुष्पा चौहान आरंभ हुई है कालीबाड़ी का यह जो पुष्प उद्यान है वहां पे मां काली और ये विष्णु द्वादश शिवा मंदिर जो है वहां पर ऑफर करने के लिए डरने के लिए पुष्पों का चयन आरंभ हो गया है ओ प्रभाती राघव लहरी उठाया नौबत बजीते छान और सुबह का जो राज होता है उसकी रागिनी बजती हुई नौबत में शहनाई बाज रही है अभी बेलूर मठ में खासकर के यह सुबह की शहनाई मैंने सनी है दुर्गा पूजा के दोनों के समय में और हमें एकदम पहले अनुभव होता है ना जी जगह का वो हमारे लिए हृदय में सब समय के लिए अंकित हो जाता है तो मैंने बेलूर मठ में दुर्गा पूजा कई बार अटेंड की है ट्रेनिंग सेंटर में भी और बाद में मेरा पोस्टिंग था तब भी किंतु जो सर्वप्रथम दुर्गा पूजा मैंने जो बेलूर मठ में अच्छी वो उसकी जो याद है उसकी जो मेमोरी है जैसे की पूरा मेरे ब्रेन के ऊपर में वो हार्ड वायर यदि कंप्यूटर की लैंग्वेज में कहे एकदम गहन रूप से गति ते हो गई है हमारा नए आए हुए ब्रह्मचारियों का जो ट्रेनिंग सेंटर था वो में टेंपल के बिल्कुल सामने था है तो वहां से जैसे दुर्गा पूजा के दोनों में वहां पे और स्पीकर लगा देते हैं नौबत जैसा बनाते हैं अभी एक्चुअल मोहब्बत तो नहीं बनेगा वो बस और कपड़े का एक टावर जैसा बनाते हैं उसके ऊपर में स्पीकर लगाते हैं और सुबह को अर्ली मॉर्निंग मेरे ख्याल से 5:00 बजे जो मंगल आरती आरंभ होती है तो मंगल आरती के बाद में ही शायद मैं एग्जैक्ट टाइम खुला गया की तो मंगल आरती के बाद में ही वो शहनाई बचाना शुरू हो जाता है अभी देखिए की जो शहनाई की जो मधुरता है यदि वो कोई आर्टिस्ट कोई गायक या तो कोई सिंगर या तो जो भी शहनाई बजाने वाला होता है वो यदि अपने शहनाई बचता है तो वो सुनने का आनंद अलग ही है किंतु यदि वह नहीं सुन पे जैसे काली मंदिर में तो शहनाई बजाने वाले वहां पे उपस्थित रहते थे और शहनाई बजाते थे उसे समय तो यह लाउडस्पीकर मैं के रिकॉर्डर वगैरा नहीं था तो उनका यह गुड गुड पर चिंता की जो भी मंदिर में शहनाई बजती है तो शहनाई बजाने वाले उपस्थित रहकर के वो शहनाई बजाते हैं किंतु आजकल क्या हुआ है की ये मॉडर्नाइजेशन की वजह से बहुत सारे लोगों की नौकरी भी चली जाति है तो ऐसे शहनाई वालों का पता नहीं की कितने मंदिर में बुलेट होंगे बेलूर मठ में किंतु वो रिकॉर्ड हुई शहनाई वो वहां पे लाउडस्पीकर पर बजती है किंतु उसका भी जो आनंद है बेलूर मठ की पवित्रता सुबह से ही शहनाई बाज रही है हम सबका ड्यूटी है सुबह से ही दुर्धम कर रहे हैं कोई फूल चुन रहा है कोई कहां पे क्या वो किचन में जाकर के हमारा जो डाइनिंग हाल है वहां पे सब्जी कैट रहा है क्योंकि इतने सारे लोग खाएंगे तो सबके लिए वो सब्जी काटने की भी जरूर है कोई आलू कटेगा कोई यह पाताल कटेगा ये सब हम लोगों का ड्यूटी है फिर चंदन घिसना है चंदन घिसना खैर हम पीटीसी के ब्रह्मचारियों के हाथ में नहीं था किंतु फिर भी ये जो एक सुंदर जो माहौल बंता था सुबह नहीं लेकर के दुर्गा पूजा के समय में तो अभी भी मैं जब दुर्गा पूजा याद करता हूं तो वो पहले दुर्गा पूजा जो मैंने बेलूर मठ में अच्छी थी वही मुझे याद ए रही है तो जब भी ये वर्णन में सुनता हूं की सुबह में काली मंदिर में दक्षिणी शोर में शहनाई बाज रही है तो इम्मीडिएटली वो दुर्गा पूजा के दोनों की याद वो ताजी हो जाति है और वहां पे तो हमने रिकॉर्ड की कोई शहनाई सनी थी यहां पे तो सही सही अप लाइव शहनाई सुन रहे हैं तो इसका तो आनंद ही कुछ अलग होगा जैसे की काली मंदिर में प्रतिदिन दुर्गा पूजा काली पूजा मां जगतद्री की पूजा हो रही है ऐसा एक वातावरण वहां पे बंता होगा नरेंद्र आदि भक्तगण प्रातः कृत्य समापन करिया ठाकुर प्रातः कृत्य समाप्त करके ठाकुर के पास में आकर के उपस्थित हुए उत्तर पूर्व बरअंदर पश्चिम क्षेत्र के चेहरे पर दिव्या हंसी चल रही है और वह उत्तर पूर्व के वरांडा के दरवाजे के पास में खड़े हैं अच्छा उत्तर पूर्व बरांडा के पश्चिम के अंश में खड़े हैं नरेंद्र पंचवटी ते कोई जान नानक पंथी बोसे एक देख लो नरेंद्र ने कहा पंचवटी में नानक पंथी कुछ साधु बैठे हैं मैं देख के आया मैंने देखा ठाकुर कहते हैं हां तारा कल एसेंशियल हां वे लोग कल आए थे और उसके बाद में क्या कहते हैं तुम सब लोग एक साथ में चटाई पर बैठो मैं देखा हूं सब भक्ति एक साथ में चटाई पर बैठे और ठाकुर आनंद करके आनंदपूर्वक सबको देख रहे हैं और महादेव ठाकुर का मैन जैसे की हमको पता है की एक ब्रह्मा समाज वाले कहता था की परमहंस मसाई का सेंस ऑफ ऑर्गेनाइजेशन नहीं है अभी ये बात सुनकर के आज हंसी आई है की ठाकुर को क्या लोगों को ऑर्गेनाइजर करना नहीं आता था ठाकुर के पास में जो लोग आते थे उन लोगों को किस तरह से ऑर्गेनाइजेशन का अर्थ क्या है की आप एक महत्व कार्य के लिए लोगों को एकजुट करते हैं और उनको एक के बाद एक रोल देते हैं एक उनको एक स्पेसिफिक कार्य देते हैं जैसे की नरेंद्र को ठाकुर ने लीडरशिप नेता होने का सिखाया किस तरह से एक लीडर जो है एक ग्रुप का एक संघ का उसको कार्य करना चाहिए राजा महाराज के बड़े में अपुर ने कहा था की राजा एक्टर रज्जू चलते पारें रखा राजू चला दे का रहे हैं अर्थात राखल एक राज्य चला सकता है ये बात सुनकर के नरेंद्र ने कहा था की हम आज से राखल को राजा अंक पुकारेंगे उसके बाद में शरद महाराज को शरद महाराज की गॉड में बैठकर के देखा फिर कहा की मैं टेस्ट कर रहा हूं की क्या तुम बाहर वहां कर सकते हो की नहीं तो ठाकुर ने सबको टेस्ट करके किसका क्या रोल होगा इस संघ में ठाकुर ने फिक्स किया था महाद कार्य दिया था मत उद्देश्य दिया था आत्मनानुक्षार्थम जगत हटा याच वो जो एक बात ठाकुर ने जब कहानी की तुम दया करने वाले इस जगत पे दया करने वाले गरीबों के ऊपर में तुम कौन होते हो तुम तुम्हें तो शिवा ज्ञान से जीव की सेवा करनी है तब स्वामी जी ने कहा था की यदि यह शरीर साथ देगा यदि ठाकुर यह अपॉर्चुनिटी देंगे तो ठाकुर का यह संदेश में पूरे विश्व में फैलाऊंगा तो एक महत्व उद्देश्य दे दिया सबको ट्रेन किया किस तरह से लोगों को ट्रेन करना है ठाकुर ने सबको आध्यात्मिक साध और एक साथ मिलकर के रहने की शिक्षा दी बाबूराम महाराज का एक उदाहरण है एक बार बड़े ही नाराज हो गए वहां मठ में किसी बात से वो किसी साधु से राजा महाराज से ये मुझे याद नहीं ए रहा है की कौन सी घटना थी किंतु वो नाराज होकर के बोल रहे हैं मैं जा रहा हूं बेलूर मठ से नहीं रहना मुझे यहां पे साधु को क्या है तो दो रोटी रहने की जगह कपड़ा कहानी पे भी मिल जाएगा बोलकर के सीधा वो बेलूर मठ का गेट था फाटक वहां से बाहर निकाल रहा है देखा की ठाकुर प्रगति हुए और उनका ये जो अटरिया था पकड़ करके बोले चाबी को था चंद बेटा कहां जाओगे तो अब जैसे ठाकुर ने इस तरह से उनको दर्शन दिया तो बाबूराम महाराज समझ गए की अरे नहीं छोड़ने का समय नहीं है या तो फिर ब्लू में छोड़ने का ठाकुर की आजा नहीं है तो वहां से ही वो वापस है देखिए साथ में रहना है तो अपने अहंकार को कितना कंट्रोल में रखना पड़ता है मैच मुझे ऐसा को लगता है की मैं इतना टैलेंटेड हूं मैं एडिटर हूं तो यहां पर आश्रम में राजपूत आश्रम में सब कुछ मेरी इच्छा के अनुसार होना चाहिए सभी चीजों में मेरा मत ग्रहण करना चाहिए सभी चीजों में बड़े महाराजा करके मुझे कुछ अच्छा तुम बताओ तुम्हारा इस बड़े में क्या ओपिनियन है और कभी और कभी प्रॉब्लम क्या है की मेरा तो एक डिपार्मेंट है इस डिपार्मेंट के बाहर में जो कुछ हो रहा है ना ही कोई मुझे पूछता है नहीं कोई मुझे बताता है तो कभी कभी लगता है की अरे मैं इतना सीनरी हो गया हूं अभी इतना इंपॉर्टेंट परसों हो गया और क्यों मुझे कोई कुछ नहीं पूछता या तो मेरा ओपिनियन नहीं मेरा डिसीजन मेकिंग में मुझे साथ में रखते हैं किंतु देखिए की सभी का यहां पे एक रोल है मैं जितना चाहे इंपॉर्टेंट हो मेरा रोल पब्लिकेशन डिपार्मेंट में सीमित है इससे बाहर दूसरे साधुओं का अधिकार शुरू हो जाता है ऑफिस में जो महाराज बैठे हैं वो ऑफिस के बड़े में डिसाइड करेंगे मंदिर में जो पुजारी महाराज है मंदिर के बड़े में सोचेंगे डिस्पेंसरी में जो डॉक्टर महाराजा है वो डिस्पेंसरी चलाएंगे जो कल्चरल एक्टिविटी जो महाराज जी देखते हैं वह वह देखेंगे और यह जो पब्लिकेशन है मैं देख रहा हूं सबका यहां पे डिपार्मेंट है सबका एक ड्यूटी है सबको अपने इस सीमा में रहना है यह मेरा डिपार्मेंट मेरी ड्यूटी को छोड़ करके अच्छे दिन कोई मुझे इनवाइट करता है हां भाई तुम आओ तुम बताओ इस बड़े में क्या ओपिनियन है जैसे मैं कभी कभी दूसरे साधुओं को पूछता हूं महाराज यह टाइटल डिजाइन कैसा हुआ है की आर्टिकल कैसा हुआ है पढ़कर के फीडबैक दीजिए तो वो पढ़कर के मेरी रिक्वेस्ट के अनुसार फीडबैक दे तो ठीक है बिना मतलब आकर के पब्लिकेशन में बोलना शुरू कर देंगे अरे तुम ऐसा करो तुम वैसा करो तुम मैं नाराज हो जाऊंगा आप अपना कम कीजिए मुझे अपना कम करने दीजिए मैं जो कुछ करता हूं तुम्हें सोच समझ के ही तो करता हूं तो वैसे ही दूसरे डिपार्मेंट वाले यह पसंद नहीं करेंगे की मैं वहां पर जाकर के कुछ करूं या कुछ बोलो तो यह ऑर्गेनाइजेशन का सबसे बड़ा यह नियम है सबसे पहले तो लोगों को आकर्षित करो फिर उनको जो आपके कुर्मी है या जिनको आप ट्रेन करो और उसके बाद में उनको एक महत्वपूर्ण उद्देश्य देकर के एक संघ की स्थापना करके सबको अपना अपना एक रोल दो तो यह सब कुछ ठाकुर ने किया था किस तरह से ठाकुर के प्रेम और आदर्श से वॉश हो करके इतने सारे भक्ति गृहस्थ और त्यागी लड़के ठाकुर के पास आते थे किस तरह से ठाकुर ने इन सबको साधना करने के बड़े में सिखाया था जो जहां पे है जिसका जो रुझान है जिसका जो अभिरुचि है उसके अनुसार उसको मंत्र देकर के उसके अनुसार उसके पास में साधना करवाई है साधना में सिद्धि प्राप्त करवाई है उसके बाद में सबको एक महत्व उद्देश्य दिया था और फिर संघ की स्थापना ठाकुर ने 11 गेरुआ वस्त्र जब वो लेकर आए वो बोल दिया नंद जी महाराज वो गंगा सागर की यात्रा करने के लिए जो सब ए रहे हैं यात्रा लो उनको दान देने के लिए उसने क्या किया 11 गेरुआ वस्त्र और जपमाला लेक आया सोचा की मैं जो गंगासागर के जो यात्री है उनको में दान में दूंगा तो ठाकुर बोल रहे हैं अरे मूर्ख ये जो मेरे सामने हमारे सामने ये जो त्यागी संतान खड़े हैं उनको इसे ज्यादा बड़ा शुद्ध पवित्र सड़क आधार कौन हो सकता है इन्हीं को यह वस्त्र दान करो बोल करके ठाकुर ने अपने हाथ से सभी को एक एक वस्त्र गेरुआ वस्त्र और जाप माला अपने हाथ से प्रधान की थी तो ये ठाकुर के संघ की वहीं पे स्थापना हो गई स्वामी जी जब ठाकुर की महासमाधि के बाद में यह वाराणसी काशी वगैरा जो वाराणसी काशिफ जो भ्रमण कर रहे थे उसे समय समाचार आया की बलराम बाबू का देहांत हो गया है अभी वहां पर वह प्रमाण दास मित्र के साथ में बैठकर के वो शास्त्र चर्चा अमृत चर्चा वगैरा कर रहे थे समाचार आया की बलराम बाबू का देहांत हो गया है तो स्वामी जी ने कहा की मुझे कोलकाता जाना पड़ेगा मुझे उनकी अंतिम यात्रा के समय तो शायद नहीं उपस्थित हो पाएंगे किंतु उनके परिवार को हमारे जो संघ है उसको सत्यारा देने के लिए मुझे जाना पड़ेगा तो ये बात सुनकर के प्रमाण दास मित्र क्या कहते हैं की ये आप किस तरह के साधु है साधु ने तो पूरा संसार जितनी भी माया है जितने भी संबंध है माता-पिता भाई-बहन सब को त्याग कर देता है उसका खुद का कामिनी कंचन के ऊपर में आकर्षण है उसको भी त्याग कर देता है तो आप इतने बड़े त्यागी ईश्वर है मैं तो आपके साथ में रहकर के इतना प्रभावित हो गया हूं इसके बाद में भी आपका एक गुरु भाई का देहांत होने से आप वहां पर दौड़ करके चले जाते हैं यह माया आपको शोभा नहीं देती क्या कहेंगे स्वामी जी ने सिर्फ इतना कहा की हमारे पुण्य हमको ऐसे ही प्रेम के भालोबासा के बंधन में बंद के गए हैं इसके बड़े में इसके ऊपर में अभी आपका सन्यासी का आदर्श जो भी हो ठाकुर के आदेश के ऊपर में सन्यास का आदर्श नहीं हो सकता और देखिए की ठाकुर ने खुद कहा था जब वो ये आया था वो ठाकुर के पास में स्वामी जी ने कहा की इसने 5 त्याग किया है अर्थात पान खाना बैंड कर दिया है मछली खाना बैंड कर दिया है तो ठाकुर ने क्या कहा था की अरे पनामा कामिनी कंचन त्यागी त्याग और अर्थात की कामिनी और कंचन का त्याग ही सही त्याग है पंखा ना मछली खाना या तो फिर इस तरह से खाना छोड़ना ये तो कोई त्याग नहीं है यह तो हां चलो आपके स्वास्थ्य के लिए शायद ठीक होगा की अभ्यास के लिए शायद चलो की मैं अपने मां को संयम करना शुरू करूंगा यह सब चीजों के लिए ठीक है किंतु आप यदि वो ठाकुर की कहानी है ना की एक औरत अपने पति को किसान है उसको का रही है की अरे जी सुनते हो यह दूसरा आपका वह जो बंधु है उसे उसकी 11 बीबी है 10 एन की 11 सब का एक के बाद एक को त्याग कर रहा है तो यह यह आदमी क्या कहता है एक किसान की अरे खेती अभी क्या है पुराने जमाने में इस तरह से औरतें को बुलेट 16 अच्छा तो वो बोलना है की उसे समय क्या है की औरतें को इस तरह से अपमानजनक शब्द उसे करते थे आज तो नहीं करते तो जो भी है उसने कहा की अरे देखो इस तरह से कोई त्याग नहीं होता त्याग किस तरह से होता है मैं बताता हूं ऐसा कांड अपने कंधे पे वो गमछा डाला और सीधा घर से निकाल गया तो जो निकाला सो वापस नहीं आया तो इसको कहते हैं त्याग वो जो दिखाने का त्याग की फिर प्रैक्टिस करने का त्याग जब साइकिल चलाना सीखने हैं तो कैसे वो छोटे-छोटे दो व्हील उसको ट्रेनिंग व्हील बोलते हैं दो छोटे-छोटे व्हील लगा के रखते हैं बच्चों की साइकिल में छोटी साइकिल में जैसे की बच्चा साइकिल चलाना सीखें फिर वो साइकिल चलाना सिख जाएगा तो फिर वो ट्रेनिंग बिल निकाल देंगे तो यह सब जो बाकी सब चीजों का त्याग है वो तो ट्रेनिंग व्हील जैसा है की आप साइकिल ठीक ठीक चले उसके लिए उसको लगाते हैं किंतु यदि आप ठीक-ठाक साइकिल चलाना एन सीखे पूरा जीवन भर ट्रेनिंग बिल ही लगा के रहे तो अब साधना सड़क जीवन में अब बच्चे ही हैं कभी आप परिपक्व नहीं होंगे आपका प्रोग्रेस जो है वो कभी आगे नहीं बढ़ेगा तो इसलिए यह जो पूरा त्याग जैसे वो ठाकुर ने इन लोगों को गेरुआ वस्त्र दिया और संघ की स्थापना की तो ये जब ये ये जो कहते थे की ब्रह्मा समझी वाले की परमहंस महाशय को सेंस ऑफ फैकेल्टी ऑफ ऑर्गेनाइजेशन नहीं है सेंस ऑफ ऑर्गेनाइजेशन नहीं है और 30 लोगों को कैसे ऑर्गेनाइजर करना नहीं आता है वो बस लोगों के साथ में हंसी मजाक करते हैं नृत्य कीर्तन करते हैं और फिर सब लोग प्रसाद लेकर के वो खाना तो सबको खिलाने थे मां को बोल के रखा था नरेन आएगा तो मोटा रोटी और घड़ी वो दाल का उसे गाड़ी दाल बना देना तो यह लोग जाकर के आनंद करते हैं हंसी मजाक करते हैं नृत्य कीर्तन करते हैं और फिर वो प्रसाद ग्रहण करके वापस ए जाते हैं वह हजरत को लिखा कर प्यार वे लोग तो हो करें बेड आए मैंने हल्ला गला करके इधर-उधर घूमते रहते हैं मुझे देखो मैं कैसे एक जगह पे बैठ के जाप करता हूं तो बहुत सारे लोगों के मां में इस तरह का एक हो गया था की ठाकुर जो एक आनंद की हार्ट बीट आए हैं ये आनंद का जो बाजार बिताया है उसमें लोग आते हैं भक्ति लोग कहो ना किया त्यागी लड़के कहो बस वो हंसी मजाक करने के लिए आते हैं उनको यह नहीं दिखता है की ठाकुर इस तरह से उनको लुभाते हैं जैसे मछली पकाने के लिए हक के ऊपर में एक कीड़ा डालते हैं तो फिर वो मछली उसको खाने के लिए आई है तो जैसे ही खाती है तो वो हक उसको पकड़ लेट है ठाकुर भी बड़े ही प्रैक्टिकल थी यह सब चीजों में ठाकुर बोलते हैं अमी सुधु नरम मिस दी ना मां छे दी मैंने उन लोगों को मैं सिर्फ नॉनवेज नहीं देता हूं सॉरी इन लोगों को सिर्फ वेज नहीं देता हूं थोड़ा थोड़ा नॉनवेज भी देता हूं जिससे की यह लोग प्रश्न तो यह भी थोड़ा थोड़ा देता हूं जिससे की यह लोग आकर्षित होकर के मेरे पास में आए तो ठाकुर को सब प्रैक्टिकल सब कुछ पता है हम लोग कभी-कभी सोचते हैं की ठाकुर धोती भी नहीं धरण कर सकते हैं भाव का आवेश होता है और वो दिगंबर होकर घूमते रहते हैं किसी ने मां को एक बार पूछा था की मां ठाकुर कहां पर है तो मां शायद ठाकुर के ऊपर उसे समय किसी चीज को लेकर के नाराज होगी तो मैन कहा था बेटा गंगा किनारे बोसे एक भाव में आकर के वो गंगा के किनारे बैट हो गए जो देखो वहां जाकर के मुझे परेशान मत करो इस तरह से दिखते हैं बच्चे जैसे व्यवहार बच्चों जैसा करता है मां के ऊपर में संपूर्ण निर्भर है किंतु फिर भी उनका प्रैक्टिकल सेंस इतना ही स्ट्रांग था लोगों को आकर्षित किया प्रेम और भालोबासा देकर के सब को ट्रेन किया आध्यात्मिक साधना में एक महत्वपूर्ण उद्देश्य वैज्ञानिक युवा सेवा एक संघवाद किया गेरुआ वस्त्र और माला देकर के जाप माला देकर के सबको एक साथ में प्रेम के बंधन में बांध और फिर उन्होंने बात और नरेंद्र को लीडरशिप दिखाए सिखाया क्योंकि यदि एक लीडर नहीं राहत है तो संघ की चल ना परी चलना मुश्किल हो जाति है ये ठाकुर ने सब कुछ किया और उसके बाद में उन्होंने महासमाधि ग्रहण की थी वो कैंसर के बड़े में भी बहुत सारे लोग सोचते थे की हम सब लोग ठाकुर के पास आकर के रहे इसलिए ठाकुर ने कैंसर को निमंत्रण दिया है अदर वाइस क्या होता है की हम लोग अपने अपने समय से दक्षिणेश्वर मंदिर में जाते थे एक साथ मिलकर के तो हम चाहते नहीं थे तो एक साथ मिलकर के जाए ठाकुर के पास में ठाकुर के साथ रहे तभी तो यह संघर्ष होंगे तभी तो हम साथ में रहना सीखेंगे तो यह साथ में रहना सीखने के लिए ठाकुर ने कैंसर को आमंत्रण दिया था अपने शरीर में तो और उसकी अभी यह थ्योरी है इसमें हम मैन ना मैन किंतु वह साथ में सबको मिलकर के बिठाने की मिलकर के रखना की उनकी ये जो इच्छा थी वो इस छोटे से एक प्रसंग में हमारे सामने प्रकट होती है ठाकुर ने सबको बोला नरेंद्र वगैरा भक्तों को की तुम सब मिलकर के इस चटाई पर बैठो मैं देखा हूं की किस तरह से दिखता है तो सब नरेंद्र वगैरा सब एक साथ में मिलकर के चटाई पर बैठे हैं और ठाकुर ने अपने भविष्य के संघ को देखा होगा लाती महाराज ठाकुर को बोलते हैं की वहां पर तो उनके ब्राह्मण समाज में ये जो सम्मेलन वगैरा होता है तो इतनी साड़ी घोड़े गाड़ियां वहां पे खड़ी रहती है यहां पे तो कहां कितनी घोड़ा गाड़ी ज्यादा तो है नहीं तो ठाकुर बोलते हैं की लाखों खाता तो काउंट करता था अभी वो मैं भूल गया कितना कम था किंतु ठाकुर बोलते हैं की इस तरह से काउंट करता है की इतनी घोड़ा गाड़ी यहां पे जो की बहुत कम है अपने यहां पर लोग आते हैं भक्ति लोग और वहां पर देखेंगे ब्राह्मण समाज के वहां इतनी उनके वो उनके उत्सव होते थे ब्रह्मोत्सव इतने सारे लोग इतने सारे घोड़ा गाड़ियां वहां पे पड़ी रहती है तो हम लोगों के यहां पे ज्यादा लोग नहीं है तो ये उसे समय की बात थी आज की बात देखेंगे की हमारे बेलूर मठ की तो बात छोड़ी दीजिए यहां पे राजकोट जैसा एक छोटा सा ब्रांच सेंटर कहा जाएगा इतने बड़े विराट अपने संघ का यहां पे यदि उत्सव होता है तो यहां का पार्किंग स्पेस पूरा भर जाता है कितनी 50 साइड 100 जितनी गाड़ियां यहां पे होगी और अभी तो वहां पे हमारा डिस्पेंसरी है उसके बगल में एक दूसरा पार्किंग स्पेस मिला है क्योंकि अपने कैंपस में तो अभी पार्किंग करने की शक्तियता ही नहीं है संभावना ही नहीं है तो यहां के दो पार्किंग स्पेस ने हमको लेने पड़े हैं एक तो आश्रम के सामने और दूसरा की डिस्पेंसरी के सामने इतनी साड़ी गाड़ियां ये छोटे से अपने सॉन्ग इतने विराट संघ के छोटे ब्रांच सेंटर में हो जाति तब संघ के सभी ब्रांच की गाड़ियां इकट्ठी करेंगे तो कितनी हो जाएगी तो ये ठाकुरपी में फैकेल्टी ऑफ ऑर्गेनाइजेशन बड़ा ही स्ट्रांग था मैन जो भी इस प्रैक्टिकल जीवन में करना है सांसारिक जीवन में जो कुछ भी करना है ठाकुर को सब पता था यही बात है की ईश्वरी आवेश इतना प्रचंड था उनके शरीर और मां के ऊपर में की उनकी प्रैक्टिकल हमको कभी-कभी दिखती नहीं है मैं खुद ऐसा सोचता था ठाकुर दिगंबर हो करके घूमते हैं उनको क्या यह सब चीज समझ में आएगी ये सब तो स्वामी जी ने खड़ा किया है किंतु जितना जितना मैं रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में गहराई में जाता जाता हूं जितना मैं स्वामी जी को खुद को पढ़ना हूं स्वामी जी की इतनी साड़ी बातें ठाकुर के कथामृत में से ही एन प्रथम रूट तो चलो हमारे सामने लिखित रूप में है बहुत साड़ी बातें ठाकुर ने स्वामी जी को सीधे-सीधी बताई थी हमको पता है की जब कोई नहीं राहत था तब नरेंद्र को अकेले बुलाकर के ठाकुर शिक्षा देते थे तो स्वामी जी को जितना पढ़ने हैं उतना मुझे लगता है की उनकी बहुत साड़ी बातें सीधी ठाकुर की बटन में से उठाई है नए जमाने के अनुसार उसको एडेप्ट कर दिया है मॉडिफाई कर दिया है अमेरिका के लिए यूरोप के लिए वगैरा और वो खुद स्वीकार करते हैं की ठाकुर के वो कितने संपूर्ण रूप से शरणागत है और ठाकुर का जीवन साधना तपस्या उपलब्धि यह सब पढ़ना हूं इतना ही लगता है की संघ का सही आधार तो ठाकुर है और यदि कहा जाए की जैसे यदि स्वामी जी की बात यदि मनी जाए तो कोरा मा स्वामी जी कहते हैं राम कौन है रामायण का पूरा आधार तो सीता ही है मां सीता ही है तो यदि हम ठीक ठीक अभ्यास करें अपने संघ का अपने संघ के साहित्य का और अपने संगत की भावधार आता तो लगेगा की स्वामी जी तो कुछ नहीं स्वामी जी ने जो कुछ भी किया है सब ठाकुर ने ही करवाया है और यदि स्वामी जी और ठाकुर दोनों की बात स्वीकार कर ले ठाकुर ने हृदय को कहा था की तुम यदि मैं यदि तुम्हारे पर नाराज हो जाऊं तो फिर भी तुम्हारी रक्षा है किंतु जो मोहब्बत में रहती है वो तुम्हारे पे नाराज हो जाए तो तीन लोक में तुमको बचाने वाला कोई नहीं रहेगा तो ठाकुर और स्वामी जी दोनों की बात है यदि स्वीकार करें तो ठाकुर ने भी जो कुछ किया मां जगदंबा ने मां काली ने मां शारदा देवी के थ्रू ठाकुर के पास करवाया था इस तरह से यदि देखा जाए तो मां को भी ठाकुर को बोलना चाहिए था की आप भी जाकर के वहां पर बैठी है सब भक्तों के साथ में मैं देखते हूं की कैसा दिखता है और शायद बोला भी होगा लिखित रूप में नहीं है किसको पता है ओम शांति शांति