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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

Sri Ramakrishna Kathamrita 29 Aug 2023 श्रीरामकृष्ण विजया के दिन दक्षिणेश्वर मन्दिर में

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ओम स्थापा का धर्म स्वरूप ने अवतार वरिष्ठय रामकृष्ण यत नमः घर के भीतर में रतन है तो रतन है सिर्फ बोलकर के नहीं होगा घर के सामने जो दरवाजा है उसका ताला तोड़ करके जी बक्से में रतन रखें हैं उसका भी ताला खोल करके रतन को बाहर करना पड़ेगा अर्थात जब तक हम परिश्रम नहीं करेंगे जब तक हम मेहनत नहीं करेंगे तब तक हमको ईश्वर प्रताप नहीं होगी सिर्फ इमेजिन करने से वह ईश्वर का आत्मा साक्षात्कार नहीं होने वाला है यह कल हमने देखा अभी आज आखिर क्या कहते हैं ठाकुर कहते हैं अर्थात ज्ञानी जो है वो निराकार की चिंता करता है ज्ञानी अर्थात की जैसे हमको पता है की एक भक्ति का रास्ता है भक्ति मार्ग है एक ज्ञान मार्ग है तो जो ज्ञान मार्ग पर चलते हैं वो वेदांत नाम की फिलासफी का अध्ययन करते हैं और वेदांत में दी गई जो साधन पद्धति है जो महाभारत के चिंतन है स्मरण मनन निदित्यासन ये वेदांत की ज्ञान मार्ग की साधना है उसमें जो महाभारत किया है की मैं ही ब्राह्मण हूं मैं अर्थात किया शरीर नहीं ये मां नहीं ये बुद्धि नहीं चित नहीं अहंकार नहीं इन सबके पैर जो अतिथिए अनंत अचार अमरत्यमन मेरा सही स्वरूप है तो यह चिंतन करना यह स्मरण करना माना करना यह ज्ञानियों का कम है तो ठाकुर कहते हैं वह निराकार चिंतन करते हैं वह ऐसा नहीं सोचेंगे की मैं भक्ति हूं और पर मैं एक स्वर्ग में बैकुंठ में एक भगवान है रहते हैं और मैं भगवान को शरणागत हो रहा हूं वह लोग ऐसा नहीं सोच करके कहेंगे की इंद्रिय जानिए जितने भी भाव पदार्थ है उन सबके साथ में मेरा कोई वास्ता नहीं है ना ही मुझे यह सुंदर दृश्य देखने की इच्छा है ना ही मुझे सुंदर ध्वनि श्रवण करने की कोई वासना है ना ही सुंदर स्वाद ग्रहण करना चाहता हूं मैं ना ही अन्य कोई भी तरह का भोग इंद्रियों का करना चाहता हूं क्यों क्योंकि मैंने इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली है मैं इंद्रिय जय हूं मैं अपनी इच्छाओं पर अपनी वासनाओं पर मैंने विजय प्राप्त कर ली है ऐसा करके वह धीरे-धीरे करके चिंतन करने की शुरुआत करेगा और आखिर में बोलना जाएगा की यह मेरा जो असली स्वरूप है वह ब्रह्मा तरबोतर मैन ना जो ज्ञानी है वे लोग अवतार पे विश्वास नहीं करते अर्जुन से रामकृष्ण के अर्जुन से श्री कृष्णा के अर्जुन श्री कृष्णा के स्टार कर रहा है तुम्ही पूर्ण ब्रह्म स्टोव करते-करते कहा की आप पूर्ण ब्रह्म है तो कृष्णा अर्जुन के बालाचे बोलने कृष्णा ने अर्जुन को कहा आर्मी पूर्ण ब्रह्म की ना देख बी शो में पूर्ण ब्रह्म हूं की नहीं यदि तुम सही में देखना चाहते हो तो आओ मैं तुमको दिखता हूं तुम ही देखो ऐसा करके एक जगह पर ले गए और पूछा की तुम क्या देख रहे हो अर्जुन बोल ले अर्जुन ने कहा आमीन गच अच्छी मैं एक बहुत ही विराट वृक्ष देख रहा हूं कल जामुन हिंदी में शायद जामुन भी कहते हैं तो कल जामुन जो है उसके तरह से उसके जैसा हजारों हजारों फल इस वृक्ष के ऊपर में लगे हुए हैं ज हुए हैं कृष्णा बोलने आरो का छे ऐसे देखो देखिए कृष्णा ने कहा की और पास में जो और देखो वो कल जामुन जैसा जो फल है वह एक्चुअली फल नहीं है कृष्णा हजारों कृष्णा इस वृक्ष के ऊपर में वो फल रहे अमर मोटो मेरी तरह पूर्ण ब्रह्म स्वरूप होते हैं अर्थात की वो पूर्ण ब्रह्म वृक्ष के ऊपर में असंख्य अवतार ए रहे हैं देखिए कितनी बड़ी बात का दी यह अपने भारतीय परंपरा में कभी-कभी इस तरह से एक थोड़ा सा एक आर्गुमेंट जैसा होता था कभी-कभी की निराकारवादी कहेंगे की जो निराकार चिंतन है आत्मा चिंतन है ब्रह्म चिंतन है वही सर्वश्रेष्ठ है और किसी भी एक भगवान की पूजा करना आराधना करना उनको शरणागत होना इससे ये कोई मतलब कमजोरी का दिस इस साइन ऑफ फिटनेस और तोता पुरी जो की ठाकुर ने ठाकुर के वेदांत गुरु ठाकुर को जी जिन्होंने वेदांत सिखाया वह तो बड़ा फैमली यह ठाकुर जब भी ताली बजा करके माता नाम लेते थे मां जगदंबा का नाम लेते थे मां काली का नाम लेते थे तो वह बड़ा कटाक्ष करके बोलते थे क्या रे क्या रोटी बेल आ तोक रहे हो क्या अर्थ भी नॉर्थ इंडिया में जब रोटी बनाते हैं तो ऐसा ऐसा करके वो रोटी को बनाते हैं वो जो रोटी को शॉप देने के लिए हम लोग वो किसी चाकी के ऊपर में वो बेलन बेल करके करेंगे तो नॉर्थ इंडिया में इस तरह से मोटा-मोटा रोटी बंता है तो क्या रोटी बना रहे हो क्या ऐसा करके तोता पुरी कभी इस तरह से कटाक्ष करते थे तो किंतु देखिए की वही तोता पुरी उनको जब पेट में दर्द होने लगा उनका अस्क बाढ़ गया तो उन्होंने सोचा की ये शरीर ही जो है वही सभी तरह की मुसीबत का घर है शरीर को त्याग कर देते हैं त्याग करने को गए गंगा में डुबकी देने के लिए गंगा में रितेश करने के लिए आदि आदि गंगा पर कर ली किंतु कमर के ऊपर में पानी जा ही नहीं कहां है तब उनको पता चला तब वह क्या बोलूं यह क्या देवी माया वो तो हिंदी में बात करते थे तो बोल उठे अरे ये किस तरह की देवी माया है तो अभी जैसे की ठाकुर एक जगह पे कहते हैं की एक वैष्णव और शिवा भक्ति या तो फिर इन दोनों के बीच में जब झगड़ा होता है काली का भक्ति तो काली का भक्ति कहता है की मां काली तो किसी को ये समुद्र पर नहीं करवाएगी तो इसलिए उन्होंने ही जैसा की कृष्णा भक्ति कहता है की समुद्र पर करवाने के लिए जो एक कंडारी अर्थात की जो नाविक है वो कृष्णा ही है तो कृष्णा की नौका पे बैठ के अब भरोसा अगर पर कर सकते हैं तो काली का भक्ति क्या कहता है की मां तो राज राजेश्वरी है वो खुद क्यों भक्तों को लेकर के वो नाविक की तरह कम करके वो का इधर से उधर वो बहुत सागर पर करवाएगी कृष्णा को महाकाली ने रख दिया है नाविक के रूप में खलासी के रूप में भक्तों को एक चोर से भवसागर के दूसरे चोर की और ले जाए तो ऐसा एक आर्गुमेंट चला राहत था हिंदू धर्म में उसमें ये भी था की भक्ति और ये त्यागी इन दोनों के बीच में कभी कभी आर्गुमेंट होगा तो ये एक उसे तरह की एक आर्गुमेंट है की अर्जुन ने भगवान कृष्णा को कहा की आप ही पूर्ण ब्रह्म है अर्थात की अवतार ही पूर्ण ब्रह्म है अभी जो वेदांत में जो विश्वास करता है वह तो बड़ा ही नाराज हो जाएगा अरे अवतार को ब्राह्मण कैसे का दिया जी ब्राह्मण में से हजारों हजारों अवतार आते हैं उनको अब ब्राह्मण के रूप में थोड़ी ना सुचित्र कर सकते हैं वो तो ब्राह्मण की तो बात ही अलग है पूरा जगत जिसने जिनकी का शक्ति अग्नि की दही का शक्ति की तरह ब्राह्मण की शक्ति या तो फिर ब्राह्मण की माया ये थे जीव जगत ईश्वर सब कुछ है अवतार सब कुछ है यह सब चैलेंज चला जाएगा अवतार भी चले जाएंगे ईश्वर भी चला जाएगा तब कहानी जाकर के हमको ब्रह्मदर्शन ब्रह्मा साक्षात्कार होगा तो भगवान कृष्णा एक अवतार है उनको ब्राह्मण के साथ में किस तरह से वो इक्वेट कर दिया किस तरह से वो का दिया की कृष्णा ही पूर्ण ब्रह्मा है तो कृष्णा भगवान है उनको एक बड़ा वृक्ष की और ले जाते हैं और बोलते हैं देखो ये कितना बड़ा वृक्ष है और इसमें कल कल जामुन की तरह कितने सारे फल निकले हुए हैं तो किंतु पेस्ट में जाकर के देखो की प्रत्येक फल एक एक कृष्णा है अर्थात की पूर्ण ब्रह्म रूप ये जो वृक्ष है इसमें हजारों लाखों करोड़ कृष्णा की तरह अवतार आते हैं और जाते हैं यह स्टोरी निश्चय किसी यह निराकार वादी ने कहीं होगी सकरवादी इस तरह की स्टोरी कभी नहीं बनाएगी और यह जैसे तो जी तरह जब भी एक नया भगवान आते हैं नए भगवान आते हैं नई कहानी लिखी जाति है तो पुराने जितने भी भगवान है वो उनको इस तरह से दिखाए जाता है की वो नए भगवान की कंपैरिजन में निम्नक कक्षा में है एक समय था की जब भगवान इंद्र की पूजा की जाति थी वो अच्छे से बारिश आए खुशी प्रधान डिप्टा भारत तो बारिश ठीक से नहीं आने से तो सब बर्बाद हो जाएगा किसने का तो इंद्र की पूजा होती थी किंतु फिर जब भगवान कृष्णा ए गए तो फिर ठीक किया गया की इंदिरा को भगवान कृष्णा के सामने उनको निशा दिखाना है तो फिर वो गोवर्धन वाली बात ए गई की वो वृंदावन के ऊपर में इंद्र ने बहुत ही किया और बारिश के बाद बारिश चला ही रहा है किंतु यहां पर भगवान कृष्णा ने क्या किया अपनी आखिरी उंगली के ऊपर में गोवर्धन पर्वत धरण किया और उसके नीचे में सभी ने वो शेल्टर प्राप्त किया और सब लोग बैक गए हमको हमारे शास्त्रों में हमारे पुराने में भगवानों की लड़ाई होती है और जो शास्त्र लिखना है जैसे की मैं वैष्णव हूं तो मैं अपने शास्त्र में भगवान कृष्णा का भगवान कृष्णा की महिमा बड़ो आऊंगा जो मैं शास्त्र हूं अर्थात की देवी भक्ति हूं तो फिर मैं जो भगवान विष्णु है या तो भगवान शिवा है उनके सामने उनके ऊपर में देवी की महिमा ज्यादा है इस तरह से वर्णन करूंगा तो जिसने जिसने अपने अपने शास्त्र लिखे हैं उन्होंने अपने अपने भगवान या तो अवतारों की बधाई की है तो यहां पे जी तरह से ये कहानी जाति है की भगवान कृष्णा कहते हैं की एक पूर्ण ब्रह्म रूप विराट वटवृक्ष है उसमें से करोड़ करोड़ अवतार आते हैं और जाते हैं तो ऐसा लिखा है यह कहानी लिखी है निश्चय किसी निराकारवादी ने और अदर वाइस वो ऐसा कभी नहीं जो भगवान कृष्णा का जो भक्ति है या तो वैष्णव है वह इस तरह की कहानी कभी नहीं रहेगा वो तो रहेगा कृष्णा स्तूप भगवान स्वयं कृष्णा ही ये पूरे जगत संसार को धरण किया हुए हैं कृष्णा ही एक सर्वश्रेष्ठ अंतिम अवतार है बाकी सब अवतार कृष्णा के ही अंश है ऐसा करके वे लोग वरना ना करेंगे तो इसीलिए क्योंकि मास्टर महाशय ने यह मेरा कर और सरकार यह सब प्रश्न निकाला है तो ठाकुर एक के बाद एक ये उदाहरण देकर के कुछ समझा रहा है हालांकि हमको प्रश्न होगा की रामकृष्ण मिशन में क्या है हम लोग किस तरह की फिलासफी को एन किस तरह की फिलासफी का अनुसरण करते हैं अभी देखिए रामकृष्ण मिशन में जी तरह से हमारी भावधारा हमारी किताबें ठाकुरमार स्वामी जी को मैंने जी तरह से समझा है तो मेरा खुद का अंडरस्टैंडिंग यह है की हम लोग यहां पे फिलासफी को इतना प्रावधान या नहीं देते जितना हम साधना को देते हैं अभी देखिए की कर तरह की साधना है ज्ञान कर्म भक्ति उद्यान तो चारों साधनाएं अपने पुरी भारत भारतीय संस्कृति को पहले से लेकर के आखिर तक देख लीजिए जो सबसे बड़ी बड़ी साधनाएं हैं मुख्य साधनाएं यदि कहा जाएगा तो ये कर है तो इन चारों साधनाओं का समन्वय रामकृष्ण मिशन में किया गया है और इन चारों साधनाओं की जो फिलासफी है जैसे की ज्ञान साधना की फिलासफी है वेदांत भक्ति साधना की फिलासफी है भक्ति योग की फिलासफी है ये वैष्णव शास्त्र फिर राजयोग की फिलासफी है ये आ पतंजलि योग सूत्र और कर्मयोग की फिलासफी आई है मेली गीता में से तो गीता की फिलासफी पतंजलि योग सूत्र पतंजलि योग सूत्र तो खैर योग का ही भाग है उसकी फिलासफी है योगसूत्र अर्थात की राज्यों रोज वो योग है उसकी फिलासफी है संख्या तो वेद ज्ञान योग की फिलासफी है वेदांत भक्ति योग की फिलासफी यह वैष्णव शास्त्र राज्यों की फिलासफी है संख्या और कर्मयोग की फिलासफी है गीता गीता में से कर्मयोग हम लोग लेते हैं तो कर फिलासफी आप उसमें जो मानना है जो उसको स्वीकार कीजिए जिसको नहीं स्वीकार करना है वो ना स्वीकार कीजिए किंतु कर योग जो है कर साधना है उसका समन्वय हम अवश्य करते हैं फिर कभी कभी कहा जाता है हम लोग कहते हैं की वेदांत दर्शन जो है वो सर्वश्रेष्ठ है हम लोग वेदांत में से अधिक वेदांत सर्वश्रेष्ठ है शंकर एम शंकराचार्य का जो अद्वैत विद आ जो शंकर भया है प्रस्थानित के ऊपर में वो सर्वश्रेष्ठ फिलासफी है तो फिलासफी के रूप में हम लोग शंकराचार्य के शंकर बादशाह कोई स्वीकार करते हैं किंतु योग जो है हम सभी तरह की योग ले लेते हैं अभी यह कांट्रडिक्शन लगेगा खासकर के जो यह सब चिंतन करते हैं उनको की यदि आप शंकरभाष्य का ही ये जो अतिरिक्त वेदांत स्वीकार करेंगे तो आपको सिर्फ ज्ञान योग की ही साधना करनी होगी आप भक्ति योग की या तो राज कर दिया तो कर्म योग की साधना नहीं कर सकते किंतु हमारे ऑर्डर में इस तरह के कांट्रडिक्शंस आपको दिखे जाएंगे की कोई रहेगा की सिर्फ अद्वैत वेदांत को लेना है अद्वैत वेदांत में भी शिवा शंकराचार्य का जो बादशाह है वो जो प्रतिपादित करता है इस को लेना है कोई कोई रहेगा की ये अद्वैतवाद है विशिष्ट अद्वैतवाद है द्वैत द्वैतवाद है वेदांत की ये सब बहुत साड़ी स्कूल है सभी स्कूल को लेना है और सभी अधिकारितातील में यदि साधना की शुरुआत कर रहा हूं तो मुझे भक्ति से शुरुआत करनी चाहिए शुरुआत में भक्ति योग के साधना आसन है फिर जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ता जाऊंगा वैसे-वैसे कर्मयोग राजयोग और आखिर में ज्ञान योग की साधना जैसे-जैसे मेरी स्पिरिचुअल मेच्योरिटी बढ़नी जाएगी वैसे-वैसे वो समझ होती जाएगी तो यह इस लैडर लैडर्स ऑफ प्रोग्रेस इस तरह से हम इसको देखना है अधिकारी बात तो यह भी एक मत है की आप है वहां पर है अपनी आध्यात्मिक जर्नी में उसके अनुसार आप फिलासफी और योग शास्त्र या तो और साधना को लीजिए या तो फिर फिलासफी फिक्स कर दीजिए की अद्वित वेदांत में ही मानते हैं किंतु साधना सब तरह के लिए अब जी तरह से भी उसको देखना चाहे देख सकते हैं रामकृष्ण मिशन में विभिन्न सीनरी सातों का विभिन्न मत है और मैं पर्सनली ऐसा मानता हूं की जो कर फिलासफी है उसमें से मुझे पर्सनली अद्वैत वेदांत के ऊपर में सबसे ज्यादा अट्रैक्शंस है तो फिलासफी के रूप में मैं अद्वित वेदांत को स्वीकार करता हूं किंतु साधना जो है वो चारों हमको करनी है डिफरेंट डिफरेंट ट्रक है मैं अभी सुबह को जल्दी बैठता हूं तुम मां एकदम फ्रेश और स्ट्रांग होता है उसे समय ध्यान कर लेते हैं किंतु दोपहर को जाकर के खाने के बाद में मेरा क्लास होता है ब्रह्मचारियों का उसके बाद में रूम में जाकर के इस तरह से थोड़ा सा चिंतन मनन करने का पयत मैं करता हूं किंतु उसे समय भजन भी किया है दोपहर है सुबह को जल्दी उठे तो दोपहर को थोड़ा सा एक 15 का भाव भी होता है नींद का भाव भी होता है तो उसे समय ध्यान नहीं हो सकता तो बैठ करके थोड़ा सा पुस्तक का पाठ कर लिया यात्रा कथामृत्य ऐसा कोई भक्ति शास्त्र पढ़ लिया उसे समय भक्ति आसन होती है तो दिन में जी तरह की हमारी मानसिक कंडी स्थिति है कंडीशन है मेरा बिल पावर कितना स्ट्रांग है उसके अनुसार हम लोग अपने साधना को चेंज कर सकते हैं दिस इस डी ग्रेटनेस ऑफ रामकृष्ण मिशन की आप जी तरह से डॉक्टर विभिन्न तरह के अवसर देते हैं आ मेडिसिन देते हैं विभिन्न तरह के रोग में वैसे ही डिफरेंट डिफरेंट मेंटल स्टेट के अनुसार डिफरेंट डिफरेंट टाइप के साधना आप यहां पे कर सकते हैं किंतु मैं जो पर्सनली फिलासफी है वो अद्भुत वेदांत को सबसे ज्यादा प्रेफर करता हूं तो यह जो सरकार गिरा जहां तक फिलासफी का प्रश्न है कोई कोई साधु सिर्फ अद्वैत वेदांत यानी की सिर्फ ज्ञान मार्ग को ही प्रेफर करेगा कोई कोई साधु रहेगा की सब तरह की फिलासफी हमको लेनी चाहिए और जो भी है किंतु यह डिफरेंट डिफरेंट सदों का डिफरेंट डिफरेंट अभीगम हो सकता है किंतु हम सभी लोग एक बात में सहमत है की जो योग विभिन्न तरह के हैं वो सबको लेना है अर्थात की ज्ञान योग की वेदांत की दवाई वेदांत के साधना जो ज्ञान योग है भक्ति शास्त्र की साधना जो भक्ति योग है संक्षे की साधना राजयोग है गीता के साधना कर्मयोग है तो योग चारों लेना है फिर भले चाहे हम लोग संख्या या तो फिर भक्ति शास्त्र विशिष्ट अद्वैत या तो द्वारिका अद्वैत यह इसको या तो फिर हम गीता को ना ले किंतु योग को सभी को लेना है इस बात में हम लोग सभी सहमत हैं तो यहां पर ठाकुर निराकार और सरकार के बड़े में बात करते हुए ऐसा बता रहे हैं फिर और एक उदाहरण देते हैं कबीर दास से निराकार ऊपर खूब छीलो अर्थात की कबीर का निराकार के ऊपर में बड़ी ही आस्था थी कृष्णा और कथाएं कबीर दास बोल तो ओके की मजबूर जब कोई कृष्णा की बात कर देता तो कबीर कहते हैं की उनका उनकी भजन उनका आराधना करने से उनकी पूजा करने से मुझे क्या मिलने वाला है उनको उनकी पूजा में क्यों करूं गोपी राहत काली बजा करके वो कोई भजन कीर्तन करती और भगवान कृष्णा बंदर की तरह नाचते रहस्य ठाकुर हंसने लगे कहते हैं आमीन सकरवादिर कच्चे सरकार आभार निराकार बैर का छे निराकार जो सकरवादी है उनके पास में मैं सकरवादी हो जाता हूं जो निराकारवादी है उनके पास में निराकारवादी हो जाता हूं ठाकुर के भीतर में 17 के भाव थे और इस तरह की बात कोई निराकारवादी है जो अद्वैत वेदांत के ऊपर में जिनकी निष्ठा है ज्ञान योग का प्रतीक है ज्ञान योग की साधना कर रहा है वो आकर के इस तरह की कहानी ठाकुर को बताएंगे की जी तरह से एक बहुत बड़ा ब्रह्मा ग्रुप से उसमें से करोड़ करोड़ कृष्णा आते हैं फल के स्वरूप में और जाते हैं ये वृंदावन में गोपिया ताली बजा रही है और भगवान कृष्णा बंदर की तरह नाच रहे हैं इस तरह से यह जो भक्ति मार्ग की जो फिलासफी है उसको निशा दिखाने के लिए उसकी निंदा करने के लिए यह सब कहानी कहेंगे तो ठाकुर कहते हैं मैं जब सकरवादी आते हैं यानी की कृष्णा भक्ति आते हैं तो मैं उनके साथ में उनके जैसा हो जाता हूं जब मिरार्करवादी आते हैं अद्वैत वेदांत पे जिनकी निष्ठा है ज्ञान योग की साधना कर रहे हैं मैं उनके पास में उनके जैसा हो जाता हूं ठाकुर कभी भी किसी की निष्ठा के ऊपर में आघात नहीं पहुंचने थे कभी ऐसा नीर कारवादी को ऐसा नहीं कहते थे की भाई तुम्हारे भीतर में तुम निराकार के साधना के साथ में सरकार भी साधना करो ऐसा नहीं कहते थे कहते थे हां की फैंटसीज्म नहीं होना चाहिए मही एक सही बाकी सब गलत ऐसा कभी नहीं होना चाहिए की तुम यह कहो की मेरा भी एक रास्ता है और इनका भी एक रास्ता है मेरी इस रास्ते पर निष्ठा है तो मैं इसका निष्ठापूर्वक अनुष्ठान कर रहा हूं किंतु यह मतलब सोचो की बाकी लोग सब गलत है और मैं ही एक सही उससे एक अहंकार ए जाएगा और ये अहंकार हमारी साधना में बहुत बड़ा विद्रोह हो सकता है मेरे खुद के मां में कभी कभी ऐसा आता था मैं जब दूसरों में आया था बहुत बड़े किताबें पढ़ना था और सोचता था की यह लोग क्या हल्ला गला मचाते हैं बाकी ब्रह्मचारी लोग पढ़ने नहीं हैं चिंतन नहीं करते हैं साधु होने को आए हैं और इतना एक्स्ट्रा शब्द लाइफ उनके लिए होना क्या ये ठीक है ऐसा एक मेरे मां में ए गया था फिर बैलून मठ में ट्रेनिंग सेंटर में एक सीनरी महाराज जी हमारे हम सबके साथ में हमको बुला करके एक-एक सभी ब्रह्मचारियों को एक-एक दिन बुलाएंगे और हमारे साथ में बात करेंगे तो मुझे भी एक दिन बुलाया फिर मुझे कुछ है की सब मेरा हेल्थ कैसा है साधना कैसे चल रही है क्या मेरे कोई प्रश्न है की नहीं पढ़ाई लिखी कैसी चलती है ट्रेनिंग सेंटर में तो रूटीन बहुत ही डिफिकल्ट होता है तो क्या कोई तुमको प्रॉब्लम तो नहीं है ऐसा करके पूछ रहे थे तो मैंने ऐसा बात-बात में उनको ऐसा लगा की मेरे भीतर में थोड़ा सा अहंकार जैसा ए गया है की हां मैं पढ़ाई लिखी करता हूं मैं एक साधन भजन करता हूं बाकी लोग क्या करते हैं कुछ ठीक नहीं है तो उन्होंने कहा था की देखो ऐसा जब करोगे तो तुम्हारे भीतर में हुंकार ए जाएगा और तुम्हारी साधना यह ऑन वन हैंड तुम जितनी निष्ठा के साथ साधना करते हो वही निष्ठा यहां पे अहंकार के रूप में प्रेरित हो करके उसे इस साधना में वाइन पहुंचाएगी तो तुम अलर्ट हो जो तो उसे समय मुझे आश्चर्य हुआ की मैंने मतलब महाराज जी ऐसी बात क्यों कर रहा है किंतु फिर मैं जब ट्रेनिंग सेंटर में वापस आया उसे दिन सोचा फिर उसे दिन से आज तक बहुत सोचा है मैंने इस बात के बड़े में एक छोटी सी बात है महाराज ने कहीं है मैंने बहुत सोचा और मैंने सही सही देखा की भले ही चाहे मैं कॉन्शियसली इस बात को एक्सेप्ट ना करूं सब कॉन्शियसली मेरे मां में कभी-कभी ए गया है की मैं दूसरे लोगों से ज्यादा श्रेष्ठ हूं मैं दूसरे लोगों से ज्यादा सिंचाई होगा की सब साधुओं से तुम मुझे स्पेसिफिकली अलर्ट रहना होगा की मैं जो साधना करता हूं वही एकमात्र मार्ग नहीं है बाकी सब ब्रह्मचारी भी जो करते हैं वह भी एक एक रास्ते हैं तो इसीलिए ठाकुर कभी भी किसी की निष्ठा पर आघात नहीं करते थे सरकार वीडियो के साथ में खुद सकरवादी हो जाएंगे निराकार वीडियो के साथ में खूब नीर करवा दी हो जाएंगे किंतु साथ-साथ में यह कहेंगे की गोंडा में बंगाली में जो शब्द है इंग्लिश शब्द है फेनेटिसिजम इनफीनिटीजिम नहीं होना चाहिए मैं ही सही बाकी गलत इस तरह का भाव हमारे में नहीं होना चाहिए तो आज यही तक अभी कल तो राखी का दिन है कल छुट्टी रखते हैं परसों दिन मिलेंगे