Transcript
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः हमारे सामने जिसको कहा जाएगा कि वर्ल्ड मॉडल वर्ल्ड मॉडल क्या है कि पूरी मानव सभ्यता को क्या क्या कौन सा फिलोसोफी संचालित करती है मनुष्य का जो जीवन है मनुष्य के जीवन को क्या नियमन करती है उस फिलोसोफी को हम लोग यदि वर्ल्ड मॉडल नाम दे तो हम देखेंगे कि कल हमने तीन वर्ल्ड मॉडल्स के बारे में डिस्कशन किया एक तो है वैसे वर्ल्ड मॉडल्स या तो फिर कहेंगे कि मनुष्य जीवन को संचालित करने वाली फिलोसोफी वैसे तो बहुत सारी होगी किंतु यदि हम तीन खास करके फिलोसोफी को देखें तीन मॉडल्स को खास करके हम थोड़ा स्टडी करें तो हमको पहला वाला मॉडल है कि एक तो है कि मटेरियल आउटलुक है जिस व्यक्ति का मटेरियल आउटलुक का अर्थ क्या हुआ कि यह जो जीवन है यह जो हमने एक जीवन पाया है जन्म से लेकर के यह रा व्याधि और मृत्यु तक की यात्रा है तो हमारा जीवन जन्म के साथ में ही प्रारंभ होता है और मृत्यु के साथ में ही इसका अंत आता है ना ही हमारे जन्म के पहले कुछ था ना ही जन्म के बाद मृत्यु के बाद कुछ होने वाला है ना ही इस पृथ्वी के अलावा और कोई लोक है इसको हम यदि मटेरियल आउटलुक ऐसा नाम देंगे कि ना ही ईश्वर है ना ही पुनर्जन्म है ना ही कर्म का फल है ना ही ईश्वर की आराधना से कोई एक हायर लेवल ऑफ कॉन्शसनेस प्राप्त हो सकता है पृथ्वी के अलावा यदि आत्मज्ञान या तो आत्म ब्रह्मलोक वगैरह कुछ है वैकुंठ लोक द्वैत अद्वैत यह सब किसी में जिसको विश्वास नहीं है इस तरह का व्यक्ति यदि चाहेगा कि मुझे एक अच्छा लाइफ लीड करना है मुझे सिर्फ मेरे खुद के लिए नहीं किंतु एक बेटर लाइफ लीड करना है तो इस तरह का व्यक्ति क्या करेगा वह फिलांथस बनेगा फिलांथस का अर्थ क्या है उसके पास में जितना भी धन है उसका एक अंश वह दूसरों को सहाय करने में लगाएगा क्योंकि दूसरों की पीड़ा या कष्ट देख कर के उसके मन में दया का आविर्भाव होता है और जनरली जगत में जो लोगों देखते हैं कि जिसके भीतर में या है दूसरों को हेल्प कर रहा है उसको बड़े सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है तो यह इस तरह का व्यक्ति अपने को सोचेगा कि मैं एक बड़ा ही आइडियल आइडियलिस्टिक लाइफ लीड कर रहा हूं क्योंकि मेरा जीवन सिर्फ मेरी खुद की इंद्रियों के भोग के पीछे नहीं व्यतीत होता मैं इससे ऊपर जाकर के कुछ नोबल आइडिया सोच रहा हूं यह जो नोबिलिटी ऑफ हार्ट या तो फिर जिसको कहेंगे कि एथिक्स एंड लिटी यह आजकल की जो वेस्टर्न सेकुलर सिविलाइजेशन है उसके कॉर्नर स्टोन है उस सोसाइटी में जैसे कि यह बिल गेट्स से वगैरह लोग क्या करते हैं और यह आईडिया भी तो वैसे स्वामी जी ने ही दिया है वो रोके फेलर को तो रॉकफेलर बड़ा धनी व्यक्ति था मोनोपोली करके ऑयल का जितना बिजनेस है उसके ऊपर में अपना शिकंजा जमा लिया था बहुत सारे लोगों को बिजनेस में से बाहर कर दिया था बहुत सारे लोगों के घर भी उसने बर्बाद कर दिए थे किंतु बूढ़ी उम्र में उसको ऐसा लगा कि नहीं जीवन का एक हायर पर्पस होना चाहिए तो फिर उसने क्या किया स्वामी जी के साथ में मुलाकात हो गई स्वामी जी ने कहा कि अपना धन है दूसरों की सहायता के लिए उसको यूज कीजिए तो अभी यह जो मुलाकात है उसका कोई ऑफिशियल कंफर्मेशन हमारे पास में नहीं है किंतु फिर भी हमारे भक्तों में खास करके विदेशी भक्तों में यह बड़ा ही दृढ़ रूप से मानना है है कि यह मुलाकात हुई थी जो भी है फिर उसके बाद में रके फेलर ने अपना एक फाउंडेशन बनाया रके फेलर फाउंडेशन नकी रोके फेलर ट्रस्ट ऐसा कुछ और फिर उसके माध्यम से उसने अपनी जो पूंजी जो अर्न की थी उसको फिर व फिलांथस काम में डिस्ट्रीब्यूटर शुरू कर दिया आजकल का यह जो बिल बिल गेट्स का जो फाउंडेशन है या तो फिर यह फोर्ड फाउंडेशन इस तरह का एक ट्रेंड चला है वेस्टर्न सिविलाइजेशन में जो लोग धन के ढग के ऊपर में बैठे हुए हैं उनको ऐसा लगता है कि धन इकट्ठा करना तो कोई मने एक जब धन इकट्ठा कर रहे थे तब लगता था कि पैसा ही जीवन का सर्वोच्च मानदंड है सर्वोच्च सब कुछ है किंतु जिस दिन इतना सारा पैसा हो गया कि फिर पैसों की भी फिक्र नहीं रही तो उनको लगा कि एक हायर लाइफ लीड किया जाए एक नोबिलिटी अपने कैरेक्टर में होनी चाहिए एथिक्स एंड मोरालिटी होना चाहिए तो फिर यह लोग फिलांथस बन गए और फाउंडेशन या ट्रस्ट बना कर के या एनजीओस को प्रमोट करके वर्ल्ड वाइड वह अपनी संपत्ति का यूज करते हैं फिर इसमें भी बहुत सारे दूसरे एलिगेशंस लोग लगाते हैं किंतु खैर उसमें नहीं जाकर के एक ओवरऑल एक वर्ल्ड सिस्टम के बारे में हम सोचते हैं तो यह एक वर्ल्ड सिस्टम है किंतु जब ठाकुर ने कलकत्ता में पदार्पण किया कोलकाता की यह हाई सोसाइटी में तो ठाकुर ने क्या देखा कि इस तरह के मानने वाले लोगों की कमी नहीं है कि अब जैसे कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर का ही उदाहरण लेते हैं उस समय उनका बहुत बड़ा नाम था बहुत बड़े दानवीर के नाम पर उनको गिना जाता था और कहा जाता था कि यदि सद गृहस्थ होना है तो ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसा होना है तो ठाकुर जब उनको मिलने के लिए गए तो ठाकुर ने उनको यह जो एक टाइप ऑफ पीपल होते हैं फिलांथस नोबल हार्टेड एथिक्स और मोरालिटी में मानने वाले धनपति या तो फिर जिसमें टैलेंट है विद्यासागर के पास में इतना धन शायद नहीं होगा प्रारंभ में किंतु टैलेंट था तो टैलेंट के हिसाब से उसने एक बड़ा पूरा अपना एक कॉर्पोरेट सिस्टम खड़ा किया था तो ठाकुर ऐसे लोगों को क्या उपदेश देते हैं कहते हैं कि देखो यह जो सबसे पहले जो मटेरियल आउटलुक है उसके परे जाओ यह स्वीकार करो कि इस जगत के परे एक डिवाइन पावर है जिसको ज य आप ईश्वर कहना चाहते हैं भगवान कृष्ण का नाम देना चाहते हैं काली मां काली का नाम देना चाहते हैं डिपेंड्स अपॉन योर फेथ सिस्टम किंतु एक्सेप्ट इट कि देयर इज अ हायर ऑर्डर ऑफ थिंग्स या तो फिर यदि आप अद्वैत में विश्वास करते हैं तो आत्मन या तो ब्रह्मण देयर इज अ डिवाइन लेयर डिवाइन सिस्टम अबाउ अबाउ अवर अर्थ यह जो अपनी डे टू डे लाइफ है जन्म मृत्यु जरा व्याधि का यह अपनी यात्रा है इस संसार में इससे परे भी एक उच्चतर जीवन है एक दिव्य जीवन है ईश्वर है आत्मन है उसमें विश्वास करो और उसको प्राप्त करने के लिए अपने जीवन की गति को परिवर्तित करो यह फिलैंथरोपी लोगों पर उपकार करना यह एथिक्स एंड मोरालिटी यह सब हो गया बहुत आपके जीवन में अभी आप एक लेवल पर तो चले आए जो लोगों का अपने पेट के ऊपर में से नजर ऊपर ही नहीं उठती है जैसे ठाकुर ने कहा कि कलकाता में जा जा रहा था देखा सभी निम्न दृष्टि है तो इस तरह के निम्न दृष्टि वाले लोग जो कि अपने खुद के स्वार्थ से आगे कुछ नहीं सोचते हैं उससे तो तुम लोग बहुत ऊपर आ चुके हो जो लोग अपने स्वार्थ से आगे कुछ नहीं सोचते यह लोग यदि भगवान और ईश्वर की भी बातें करें तो वह किसी काम की नहीं क्योंकि निस्वार्थ जब तक नहीं आती तब तक आप धर्म में प्रथम पैर भी नहीं रखे हुए होते हैं वह सब बातों की बातें हैं जब तक स्वार्थ और अपने मन को पकड़ कर के रखा हुआ है स्वार्थ ने अपने शिकंजे में अपनी जाल में हमको फंसा के जब तक रखा है तब तक हमने कुछ किया ही नहीं निस्वार्थ एक सर्वप्रथम स्टेप है विच टेक्स अस टू द हायर ऑर्डर ऑफ थिंग्स टुवर्ड्स अ नोबल लाइफ यह पशु से मनुष्य मनुष्य से ईश्वर की ओर की देवत्व की और की यह जो हमारी यात्रा है अपनी स्टोरी ऑफ इवोल्यूशन इसमें यह पशुव्रूला करने के ऊपर में भी एक महत् उद्देश्य जीवन में है और वह उद्देश्य है ईश्वर साक्षात्कार या तो आत्म ज्ञान की प्राप्ति आत्मन में स्थित होना तो यह उन्होंने ईश्वरचंद्र विद्यासागर को कहा अभी देखिए कि इन दोनों वर्ल्ड मॉडल्स को कंपेयर करते हैं एक तीसरा वर्ल्ड मॉडल ले लेते हैं सर्वप्रथम सबसे बेसिक होगा कि मेरी इंद्रियों की आवश्यकता को चरितार्थ करना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है यह एक सबसे पहले ग्राउंड लेवल वर्ल्ड मॉडल रेडी हो गया इसमें हम देखेंगे कि मैं भग हजार भगवान का नाम लूं किंतु मेरी दृष्टि तो मेरी इंद्रियों के सुख के ऊपर में ही निबद्ध है ठाकुर ने जैसे कहा कि कोई भी एक गीध है वह हवा में चाहे जितना ही ऊपर उड़ेगा उसकी नजर हमेशा वह जमीन पर पड़े हुए कूड़े कचर की ओर रहेगी तो यह जो है जो लोग निम्न दृष्टि है हमेशा इंद्रियों की लोलुपता को चरितार्थ करने के पीछे में ही दौड़ रहे हैं वह एक वर्ल्ड मॉडल हो गया वो भगवान की हजार बातें करें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला फिर उससे एक स्टेप ऊपर का वर्ल्ड मॉडल है कि निस्वार्थ आई है एक फिलांथस का भाव मन में प्रकट हुआ है दूसरों का दुख देख कर के मन में दर्द होता है आंखों में आंसू आते हैं जब यह परिस्थिति प्रारंभ होती है तब एक हायर लेवल वर्ल्ड मॉडल में आप प्रवेश करते हैं या तो फिर इस वर्ल्ड मॉडल रूपी फिलोसोफी को आप स्वीकार करते हैं तो यह करुणा का प्रगट होना व्हिच इज फार बेटर देन जो लोग हजार भगवान की बातें करें किंतु जिनकी दृष्टि सिर्फ अपनी इंद्रियों के भोग के चरित भोग को पूर्ण करने में ही लगी हुई है उससे तो यह लोग बहुत ही बेटर है तो यह सेकंड लेवल वर्ड सेकंड स्टेज का वर्ल्ड मॉडल हो गया इससे ऊपर यदि ठाकुर का हमने देखा ठाकुर कहते हैं कि चलो उदारता आ गई है अपने स्वार्थ की यह जो एक छोटी सी यह कोटरी है या तो जेल रूपी यह जो पिंजरा रूपी अपना स्वार्थ है उसको तोड़ कर के इस काल कोटरी को इस पिंजरे को तोड़ कर के तुम लोग बाहर आ गए हो बहुत अच्छी बात है अभी अपनी दृष्टि को और भी उर्ध्व गति पर ले जाओ और भी ऊपर देखो कि वहां पर ईश्वर है या तो फिर आत्मन है आत्मन का साक्षात्कार या तो ईश्वर दर्शन करना है उसके बाद में कैसे भी करके त्याग करके नेती नेती करके ईश्वर को प्राप्त कर लो फिर ईश्वर ही बता देंगे कि यह जीव जगत सब कुछ उसी ईश्वर या उसी ब्रह्मण का बना हुआ है फिर इती इति करके जगत में जब वापस आओगे तब पता चलेगा पहले आपकी जो करुणा थी वोह एक लेवल पे थी और अभी सभी के प्रति जो एक निर्मल प्रेम इनफाइनों पहले की दया कहीं फीकी पड़ जाएगी उसके बाद में जितना दान दक्षिणा करना है करो आप ज जैसे कि स्वामी जी हरि महाराज को कहते हैं जस्ट लीड अ होली लाइफ एक जीवन जी जाओ उसी से लोग धन्य हो जाएंगे समाज कल्याण हो जाएगा सात पीढ़ियां तर जाएगी उसके बाद में आपको स्कूल हॉस्पिटल ना भी चलाए कोई फर्क नहीं पड़ता आपका जीवन ही स्कूल हॉस्पिटल बन जाएगा आपके सानिध्य में आकर के ही लोगों का भवगीत वो वो एक हायर आइडियल ठाकुर बताते हैं यह हो गया ठाकुर का वर्ल्ड मॉडल तीसरा वर्ल्ड मॉडल इससे भी बाद में जब स्वामी जी भारत का भ्रमण कर रहे थे तब उन्होंने भारत की परिस्थिति का जो चितार देखा जो आकलन किया उससे स्वामी जी को दो बातें समझ में आई एक तो है कि भारत महा भयानक दारिद्र्य में डूबा हुआ है एक चीज दूसरा कि भारत के कुछ-कुछ साधक गण ऐसे हैं कि साधना के नाम पर महा भयानक तमस में डूबे हुए हैं अर्थात कि व जेनुइनली विश्वास तो करते हैं कि हां ईश्वर है किंतु ईश्वर को प्राप्त करने के लिए जो ट्रेडिशनल साधनाएं हैं जब ध्यान साधन भजन स्वाध्याय तीर्थ भ्रमण साधु संग यह जो सब करने का प्रयास करते हैं तो प्रयास करते-करते बीच-बीच में वह महा भयानक तमस में डूब जाते हैं तो यह ट्विन प्रॉब्लम्स दो समस्या स्वामी जी ने भारत का भ्रमण करके उन्होंने देखी देखा कि हिमालय से जा रहे थे एक कोई एक साधक था कंबल अपने पूरे शरीर पर लगा कर के वह खर्राटे पुकार रहा था माने वह सो रहा था सोते-सोते खर्राटे बुला रहा था तो स्वामी जी ने नाराज होकर बोला इसके कंधे पर हल जोत दो अभी वह हल इसके कंधे पर हल डाल दो अभी ये हल जोते का खेत में तब कहीं जाकर के वो ठीक होगा वो फेमस कहानी के फिर स्वामी जी के के पास में एक लड़का आके बोलता है मैं त्याग करना चाहता हूं स्वामी जी ने कहा भगवान बुद्ध के पास में त्याग करने के लिए एक साम्राज्य था तुम्हारे पास है क्या तुम त्याग करोगे मैं तमस में डूबे हुए हो बात करते हो त्याग की तो यह तमस जो है वह भारत के कुछ-कुछ सभी तो नहीं कुछ साधक गणों को कुछ साधन प्रणालियों को खा जा रहा है तो यह जो ट्विन प्रॉब्लम है भारत के उसका क्या सलूशन लिया जाए तो स्वामी जी ने क्या किया कि जो ठाकुर का जो एक पथ है नेती नेती करने के समय जितनी भी कामनाएं हैं जितनी भी वासना हैं जितना ईगो है अहंकार है उसको तिलांजलि दे देना है कैसे भी करके ईश्वर को प्राप्त कर लेना है फिर जब इति इति करके वापस आएंगे तो जगत जैसे कि मेरा ही एक एक्सटेंशन है मेरे भीतर में जो आत्मन है उसी आत्मन का यह जगत बना हुआ है बोलकर के वह जो कुछ भी करेगा जगत के कल्याण के लिए ही करेगा तो यह दोनों स्टेज के बेस्ट एलिमेंट को स्वामी जी ने ले लिए एक तो है कि एक स्पिरिचुअल आउटलुक ले लिया जो कि नेति नेति मार्ग का एक सबसे बड़ा इंडिकेटर है स्पिरिचुअल आउटलुक यानी कि ईश्वर है ईश्वर प्राप्ति ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है यह दूसरा की कामिनी कांचन त्याग इसको करना ही पड़ेगा दृढ़ रूप से हमको त्याग में स्थापित होना ही पड़ेगा और फिर यह जो इति इति मार्ग का लोगों की ईश्वर के ईश्वर समकक्ष गिन करके उनकी सेवा करना यह सिर्फ मनुष्य नहीं है यह दरिद्र नहीं है यह दरिद्र नारायण है यह चंडाल नहीं है यह चंडाल नारायण है यह रोगी नहीं है यह रोगी नारायण है तुम उनको हेल्प नहीं करते तुम उनकी पूजा करते हो यह आउटलुक स्वामी जी ने बेस्ट एलिमेंट ऑफ बोथ पाथ ले लिए और आत्मनों मोक्षार्थम जगत हिताय च रूपी फोर्थ व वल्ड मॉडल है वह हमारे लिए तैयार किया अभी देखिए कि हम लोग चारों वर्ल्ड मॉडल को आपस में कंपेयर करके देखते हैं कि किसका क्या प्लस है किसका क्या माइनस है देखिए कि जो प्रथम वर्ल्ड मॉडल है मनुष्य अपनी इंद्रियों की कामना पूर्ति से ऊपर ही नहीं देखता मुंह पर वह जो भी बातें कर ले उसमें सब कुछ नेगेटिव है वो यदि चाहे तो बहुत बड़ा राजनेता बन सकता है बहुत बड़ा क्रिकेटर बन सकता है बहुत बड़ा फिल्म का कलाकार बन सकता है बहुत बड़ा सीईओ हो सकता है किंतु रहेगा तो वह एक पशु के लेवल पे ही यह सामाजिक सक्सेस उसके आध्यात्मिक जर्नी में कि इवोल्यूशनरी यह जो जर्नी है उसमें उसको वन स्टेप भी ऊपर नहीं लेकर जाएगी तो यह हो गया तामसिक घोर तामसिक वर्ल्ड मॉडल इसके बाद में दया और करुणा का उदय होने के बाद में लोग देखते हैं कि नहीं दूसरों को सहाय करनी चाहिए जितना बन पड़े कोई-कोई लोग तो बहुत ज्यादा सहाय करते हैं सो वेरी गुड किंतु इन लोगों का मटेरियल िक आउटलुक रहता है ईश्वर यदि है ऐसा मुंह से बोलेंगे भी जैसे कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर का स्वयं वो ओम नमो नारायण ने ऐसा कुछ लिख कर के वह अपने पत्रों की शुरुआत करते थे ब्राह्मण है वेदा अभ्यास तो किया ही है किंतु जब मास्टर महाशय ने उनको पूछा कि आपको यह वेद पुराण उपनिषद के बारे में आपकी क्या धारणा है तो ईश्वर चंद्र ने क्या उत्तर दिया था कि यह ऋषि मुनि जो समझाना चाहते थे वह बेचारे समझा नहीं पाए हैं ऐसा मुझे लग रहा है यानी कि बात ऐसी नहीं है कि वह समझा नहीं पाए हैं बात यह है कि वह खुद समझ नहीं पाए हैं किंतु एक तो ईगो रहता है ना तो ऐसा कैसे बोलेंगे मैं समझ नहीं पाया हूं आजकल के यह जो फिलांथस या तो फिर यह ट्रस्ट या फाउंडेशन या एनजीओ वालों को देखेंगे वोह अपने को बहुत बड़ा बना कर के अपना खुद का प्रचार करेंगे सेवा तो कर ही रहे हैं किंतु साथ-साथ में प्रचार भी बहुत करेंगे ऐसे लगेगा कि सेवा ही जैसे कि उनकी यह जो फिलांथस एक्टिविटी है वही उनके जीवन का सर्वोच्च है तो एक करुणा और दया तो आ गई किंतु उनका जो आउटलुक है वह मटेरियल िक आउटलुक है यानी कि इस जीवन से परे और कुछ है ऐसा वह स्वीकार नहीं करते हैं तो पहला हो गया तामसिक वर्ल्ड मॉडल दूसरा हो गया कि मटेरियल िक वर्ल्ड मॉडल अभ ये आप पूछेंगे यह बड़ा एक इंटरेस्टिंग प्रश्न है कि जो लोग तामसिक है वे लोग ईश्वर में विश्वास करते हैं तो वह बड़े न किय जिसका मटेरियल िक आउटलुक है किंतु मने दूसरे लोग जो कि उनका हृदय उदार है किंतु आउटलुक मटेरियल िक है हु इज बेटर देन दोनों में से बेटर कौन है तो बेटर वही होगा कि जो निस्वार्थ है ईश्वर पर विश्वास करता है किंतु स्वार्थी है उससे बेटर व्यक्ति है कि ईश्वर पर विश्वास नहीं करता किंतु निस्वार्थ है सो वी हैव टू अंडरस्टैंड दिस तो वो एक तामसिक वर्ल्ड मॉडल हो गया जो हजार ईश्वर की बातें करें किंतु है बड़ा ही स्वार्थी दूसरा कि यह मटेरियल िक वर्ल्ड मॉडल हो गया जो कि ईश्वर पर विश्वास तो नहीं करते किंतु कंपेज और करुणा इन लोगों के भीतर में है तीसरा है कि स्पिरिचुअल वर्ल्ड मॉडल श्री रामकृष्ण देव का कहते हैं कि यह जो दया है करुणा है बहुत अच्छी बात है किंतु इसका जो साइड इफेक्ट है कि घमंड का आना यह घमंड को त्याग कर के सर्वप्रथम तो संपूर्ण रूप से शरणागत होकर के ईश्वर के या तो संपूर्ण रूप से उदार होकर के पहले तो ईश्वर को प्राप्त कर लो अपने मन को एकाग्र करो त्याग और तपस्या करो यह तपस्या इज वेरी एसेंशियल पार्ट ऑफ ठाकुर्स टीचिंग ये त्याग जिसको कहते हैं तो त्याग करने के बाद में ईश्वर प्राप्ति जब होगी उसके बाद में जो कुछ भी करना है करते रहना तो यह जो ठाकुर का वर्ल्ड मॉडल है उसको को हम नाम देंगे त्याग रूपी वर्ल्ड मॉडल तो एक तमस है दूसरा है उदारता है या तो फिर मटेरियल िक और तीसरा है त्याग रूपी वर्ल्ड मॉडल ठाकुर का और अभी देखिए कि ये जो मटेरियल िक वर्ल्ड मॉडल है उसका बेनिफिट यह है कि उदार आप जदी होंगे तो आपको पुण्य तो प्राप्त होगा ही किंतु साइड इफेक्ट क्या है साइड इफेक्ट ये है कि आपका घमंड बढ़ जाएगा आपको ऐसा लगने लगेगा कि मैं ही यह सब कुछ कर रहा हूं अभी यह जो ठाकुर का वर्ल्ड मॉडल है त्याग रूपी वर्ल्ड मॉडल इसका बेनिफिट तो है कि ईश्वर प्राप्ति कोई प्रश्न ही नहीं है प्लस है उसका ईश्वर प्राप्ति तो उसका माइनस क्या है माइनस यह है कि बहुत बार ट्रेडिशनल साधना करते-करते साधक तमस में डूब जाते हैं यह तमस ही हमारी आखिरी 400 500 साल की कहानी है बहुत सारे साधक साधना करते-करते ऐसे तमस में डूब गए कि जब बाहर से आक्रमण होना शुरू हुआ भारत की रक्षा करने वाला कोई नहीं रहा तो यह ठाकुर का जो त्याग रूपी वर्ल्ड मॉडल है उसका यह एक माइनस आप कह सकते हैं अभी स्वामी जी का जो वर्ल्ड मॉडल है देखिए कि उसमें आत्मनों मोक्षार्थम अर्थात कि ईश्वर प्राप्ति करना जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है यह स्वीकार कर लेने से घमंड रूपी जो साइड इफेक्ट है जो कि मटेरियल िक वर्ल्ड मॉडल की है वो नहीं आएगी और साथ में ही लोगों की सेवा करने के लिए आपको कर्म तत्पर बनना पड़ेगा आपको आत्म श्रद्धा प्रकट करनी पड़ेगी आपको एकदम एक्टिव होना होगा तो वो करने से यह त्याग रूपी जो वर्ल्ड मॉडल है जिसमें हम ट्रेडिशनल साधना करते हैं उसका जो माइनस है तमस वो भी यहां पर नहीं आएगा यानी कि ये जो मटेरियल वर्ल्ड मॉडल का साइड इफेक्ट जिसको हम कहेंगे घमंड वो भी इसमें नहीं है और ट्रेडिशनल साधना का साइड इफेक्ट तमस यह भी इसमें नहीं है दोनों वर्ल्ड मॉडल का बेस्ट जो है वह स्वामी जी ने अपने आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च रूपी वर्ल्ड मॉडल में ले लिया है सो वी हैव गॉट दिस फोर वर्ल्ड मॉडल्स जो कि हमारी मानव सभ्यता को संचालित करते हैं और यह सिर्फ अपने हिंदुइज्म तक ही लिमिटेड नहीं है क्रिश्चियनिटी में भी देखिए कि यह जो सिस्टर्स ऑफ मर्सी ना कि ये जो बहुत सारे ऑर्डर से फ्रायर्स के जो कि बहुत अच्छा सेवा कार्य करते हैं आप लोग कहेंगे मैंने अपनी साधना भी करते हैं साथ में सेवा कार्य भी करते हैं ऑर्गेनाइजेशन बना कर के स्कूल्स हॉस्पिटल वगैरह चलाते हैं यह कॉन्वेंट है वगैरह आपने तो देखा ही होगा फिर हम लोग आक्षेप करेंगे कि यह लोग कन्वर्जन के लिए यह सब करते हैं वह जो भी है आप 100% प्योर उद्देश्य उनका शायद नहीं होगा किंतु जो इंडिविजुअल उस सिस्टम में रह कर के साधना कर रहा है सुबह शाम वह ईश्वर का नाम ले रहा है दिन के दौरान वह हॉस्पिटल स्कूल में कार्यरत है जिसके भीतर में करुणा है उसको तो सही में उसका खुद का जीवन तो धन्य हो गया ना वह जिस सिस्टम को रिप्रेजेंट कर रहा है वह परफेक्ट नहीं है तो भी क्या है 99 पर ऑफ ह्यूमैनिटी से तो वह बेटर है तो देखिए कि यह जो करुणा एक और और दूसरी ओर ईश्वर आराधना यह वर्ल्ड मॉडल सिर्फ हमारे लिए यूनिक नहीं है जितने भी मेजर रिलीजस है सभी लोग फेथ होप चैरिटी यह बातें सभी लोग करते हैं भले ही चाहे वह आइडियो जिकल प्योरिटी हमारे लेवल तक नाना पहुंच पाए किंतु उस सिस्टम में रहकर के जो लोग कार्यरत है जो लोग आराधना करते रहते हैं वे लोगों ने अपना जीवन धन्य बना दिया जैसे कि मैंने पहले भी कहा था कि मैं जब एक दिन मैंने ठीक किया उस समय में रांची में था ट्राइबल डेवलपमेंट का काम देख रहा था एक दिन मैंने ठीक किया कि आज एक काम करते हैं मैं कुछ समय से अपने वॉलंटस और सब गांव वालों के साथ में डिस्कस कर रहा था मैं पूछ रहा था कि अच्छा ऐसा कौन सा गांव है कौन सा ब्लॉक है कौन सा एरिया है जो कि सबसे ज्यादा इंटीरियर है जहां पे कोई नहीं जाता वहां पे एक बार हमको जाना चाहिए तो अभी वह हमारे वॉलेट्स वगैरह ने डिस्कस करके वह ठीक कर दिया कि अच्छा वहां पे एक है वहां पे हमारा काम ऑलरेडी कुछ-कुछ हद तक चल रहा था हमारे कुछ-कुछ वॉलंटिली वहां पर पहुंच चुके थे तो इसलिए उन्होंने कहा कि महाराज हम लोग वहां पर गए थे देखा कि वहां पर कोई नहीं आता कोई फैसिलिटी अ कुछ नहीं है व हम लोग जो कुछ करते हैं वही सब कुछ है तो मैं तो बड़ा खुश हो गया कि देखो अपना ऐसा आउटरीच है मैंने कहा कि एक बार वहां पे जाया जाए बोला कि तो वॉलेटर ने बोला आपको बड़ा तकलीफ होगा पैदल बहुत सारा चलना पड़ेगा खाने पीने का कुछ ठीक नहीं है सब साथ में लेकर जाना पड़ेगा मैंने कहा जो भी है एक बार तो एडवेंचर कर लेते हैं वहां पर चले जाते हैं तो ठीक है सुबह से एकदम अर्ली मॉर्निंग को गाड़ी लेके निकले फिर आधे रास्ते पे गाड़ी छोड़ देना पड़ा क्योंकि वह ऐसा रास्ता है कि अपनी जीप जा ही नहीं पाएगी वैसे आश्रम की जो जीप थी बड़ी स्टर्डी थी वह आजकल की वह जो लग्जरी गाड़ी ऐसा नहीं था बड़ा ही स्टर्डी आपको वह पूरा यह बॉडी मसाज कर देना है तो उसके लिए वह आप वो यूज़फुल थी जितने भी गड्ढे आएंगे जितने भी पत्थर आएंगे ऊपर उसको ऐसा उछले गी जीभ कि आपका पूरा बॉडी का मसाज हो जाएगा होल बॉडी मसाज तो ऐसी जीप में हम जाते थे इतना स्टर्डी कि उसको कुछ भी उसको रोक नहीं सकता है तो ऐसी जीप को भी हमको आधे रास्ते प छोड़ के पैदल जाना पड़ा गांव में जैसे ही मैं एंटर हुआ सबसे बड़ा आश्चर्य देखा पहली ही जो कुटिया देखी उसके ऊपर में एटलीस्ट छ से सात फुट लंबा क्रॉस लगाया हुआ था तो मैंने कहा अरे ये लोग क्या हमारे से भी पहले यहां पे पहुंच गए हैं यह कब लगा है क्रॉस मैं पूछ रहा हूं बोला ये तो बहुत पुराना है मैंने इन लोगों को पता भी नहीं है आज आजकल जो लोग जी रहे हैं इनकी वह पहले की जनरेशन के समय से लगा है और वे लोग आते भी है इधर यहां पर ये क्रिश्चियन लोग तो मैंने कहा कि देखो यह जो गांव की परिस्थिति है ज्यादातर कन्वर्ट हो गए थे ना ऐसा सब कुछ था तो इसके पीछे गलती किसकी है गलती तो हमारी ही है हम लोग कभी यहां पर आए नहीं है और वे लोग जो है पूरे तीन-चार जनरेशन से यहां पर कार्य कर रहे हैं अभी उनको गाली देने से थोड़ी ना होगा हमारा ही तमस इसके लिए कारण भूत है तो तो मैं जो कहना चाहता हूं कि इस सिस्टम में जो कि हमको लगता है कि हमारे लेवल की नहीं है या तो हमारे विरोधी है उसमें भी रह कर के जो लोग उस इंटीरियर गांव में जाते होंगे रेगुलर जाते होंगे उन्होंने तो अपना जीवन तो धन्य बना दिया ना मैं रांची में रहते रहते उस गांव में सिर्फ एक ही बार गया हूं इन स्पाइट ऑफ कि मेरा इतना इंटेंस था कि बस सभी गांव में ठाकुर का नाम पहुंचाना है सभी गांव में सेवा कार्य करना है इवन मेरे में भी एक से ज्यादा बार वहां पर जाने का साहस नहीं था इतना वो डिफिकल्ट टेरेन था तो वहां पर वे लोग नियमित जाएंगे तो अपना तो जीवन उनका तो हो गया ना धन्य तो यह बात याद रखनी है दिस टाइप ऑफ सिस्टम्स आर नॉट यूनिक टू हिंदुइज्म नॉट यूनिक टू राम कृष्ण विवेकानंद सिस्टम राम कृष्ण विवेकानंद भावधारानी आइडियो कल प्योरिटी जैसे कि अद्वैत वेदांत सर्वोच्च सिस्टम है जहां तक आध्यात्मिकता जाती है वैसे ही आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च एक पूरे जगत को आवरण करने वाली जो यह सिस्टम आइडियो जिकली पोरेट है ऐसा हम क्लेम कर सकते हैं किंतु इस तरह की अन्य सिस्टम में रहकर के दूसरे लोग अपना जीवन धन्य बना दे रहे हैं एट द एंड ऑफ द डे बात क्या है कि आप क्या प्रोफेस करते हैं वो बात नहीं है आप क्या एक्शन करते हैं दैट इज वट मैटर्स मैं ऐसी हाईएस्ट फिलोसोफी की बात करूंगा जैसे स्वामी जी ने ही भारत के बारे में कहा है ऐसा कोई भी देश नहीं है जहां पर वेदांत से ज्यादा उच्च फिलोसोफी का प्रचार ना हुआ हो और ऐसा कोई देश नहीं है जहां पे नात जात अस्पृष्यता जैसी घिनौनी सामाजिक सिस्टम और किसी देश में लगी हो हाईएस्ट ऑफ द फिलोसोफी बट द लिस्ट ऑफ द सोशल सिस्टम ये दोनों का एक किम भूत किमा का अद्भुत मिश्रण हमको भारत में देखने को मिलता है सो बात सिर्फ यह नहीं है कि हम क्या प्रोफेस करते हैं या यह मेरी फिलोसोफी है बोलने से नहीं चलेगा वह फिलोसोफी कितनी अपनी लाइफ में अप्लाई करते हैं दैट इज व्हाट मैटर्स किंतु जहां तक ये प्योर फिलोसोफी का प्रश्न है वर्ल्ड सिस्टम का जो प्रश्न है सो देयर आर फोर वर्ल्ड सिस्टम्स एस फार एज वी अंडरस्टैंड बाय रीडिंग अवर लिटरेचर अच्छा अभी कल का जो हमारा था उस टॉपिक को यह पूरा टॉपिक यहीं पे है इसलिए मैं पूरा टॉपिक एक बार पढ़ लेता हूं श्री रामकृष्ण देव कथामृत में क्या कहते हैं ठाकुर क्या कहते हैं कल जो पढ़ा था वह भी पढ़ लेता हूं और आज का जो एक्स्ट्रा है वह भी पढ़ लेता हूं ठाकुर कहते हैं अच्छा कॉन्टेक्स्ट क्या है गिरीश अ केशव सेन ब्राह्मण समाज में यह सब रिफॉर्म चला रहा है भारत में कि विधवा विवाह होना चाहिए बाल्य विवाह रोक देना चाहिए फिर यह कन्या की मिनिमम एज ऑफ मैरिज मिनिमम एज ऑफ कंसेंट यह सब होना चाहिए किंतु ऐसा करते-करते खुद की लड़की का मिनिमम एज के नीचे में विवाह करवा दिया क्योंकि बड़ा अच्छा पात्र मिल रहा था बोलकर के वह यह विजय कृष्ण गोस्वामी और यह शिवनाथ शास्त्री अलग हो गए दोनों में झगड़ा भी हो गया और ठाकुर अभी दोनों में सुलह करवा दे रहे हैं सुलह करवाने के बाद में केशव को क्या कहते हैं गुरु एक सच्चिदानंद आप लोग गुरु नहीं है रिफॉर्म सोसाइटी वालों को कहते हैं गुरु है एक सच्चिदानंद तीनी शिक्षा देवेन वही शिक्षा देंगे अमार संतान भाव मेरा संतान भाव है मा मनुष गुरु मेले लाख लाख सकली गुरु होते चाहे शिष्य के होते चाहे मनुष्य गुरु आपको लाख लाख मिल जाएंगे सब लोग गुरु होना चाहते हैं शिष्य कौन होना चाहता है लो को शिक्षा देवा बड़ो कठिन लोक शिक्षा देना बड़ा मुश्किल है जदी तीनी साक्षात्कार होन आर आदेश देन ता होले होते पारे जद ईश्वर का खुद का साक्षात्कार होकर के ईश्वर खुद हमको आदेश देते हैं तब आप लोग शिक्षा दे सकते हैं ये पहले तो ईश्वर प्राप्ति कर लो फिर इति करके जगत में आओ पहले नेती नेती करना नारद सुख देवा दीर आदेश होए छेलो नारद और सुखदेव निर्विकल्प समाधि या ईश्वर दर्शन हुआ था फिर आदेश प्राप्त करके जगत में आए थे लोक कल्याण का कार्य किया था शंकरे आदेश होए छलो भगवान शंकराचार्य को आदेश हुआ था आदेश ना होले के तोमर कथा सुन बे यदि आदेश प्राप्त नहीं है तो तुम्हारी बात कौन सुनेगा कोलकाता और हुजू तो जानो कोलकाता के लोगों का यह फेडिक मेंटालिटी है जो चीज वायरस हो रही है जो चीज का ट्रेंड चल रहा है उसके पीछे दौड़ेंगे जो वायरल होना खत्म हो गया उसको छोड़ देंगे ज तो खण काठे ज्वाल दूध फोंस करे फोले जब तक आप आगु अग्नि जलता रहेगा लकड़ी का उसके तब तक य उसके ऊपर में रखा हुआ दूध उबलता रहेगा काठ टेने नीले कोथा व की छु नाई किंतु वो जो जलता हुआ लकड़ी हटा दिया तो दूध वैसे ही ठंडा हो जाएगा कोलकता लोग हुजू ग कोलकाता के लोग य फेडिक है जो ट्रेंड चल रहा है उसके पीछे दौड़ेंगे ही एंटाई कुआ खड़ से बोले लछ यहां पर गड्डा खोद रहे कहते हैं पानी चाहिए शेखा ने पाथर हलो तो छेड़ दिले वहां पर पत्थर मिल गया तो छोड़ दिया आबार एक जगह खते आरंभ करले और एक जगह पर खोदना शुरू किया शेखाने बाली मिले गलो छेड़े दिले वहां पर रेती मिल गई तो छोड़ दिया आर एक जायगा खते आरंभ होलो रकम और एक जगह पर खोजना शुरू किया यानी यल में जितने भी बाबा जी गुरु जी आते हैं सब लोग उसके पीछे दौड़ेंगे जैसे उसका टाइम हो गया पूरा वे लोग उसको छोड़ देंगे जैसे स्वामी जी को अमेरिका में काफी अनुभव हो चुके थे ऐसे अभी हाई सोसाइटी उनको लायनाइटिस कर रही है कल जाकर उनको छोड़ दिया और फिर उनकी बात सुन कर के हृदय परिवर्तन करना जीवन परिवर्तन करना यह तो भूल ही जाइए तो आबार मोने मने आदेश होले होए ना फिर ऐसा सोचेंगे मुझे मन में आदेश हुआ है मुझे मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे ईश्वर ने कहा है तो ऐसा नहीं होगा ऐसा नहीं चलेगा तीनी सत शत साक्षात्कार होन आर कथा कौन ईश्वर सही सही आपके सामने प्रकट होते हैं आपके साथ में बात करते हैं तो खन आदेश होते पारे तब आदेश हुआ यह समझना शे कथ जोर कतो उस बात का जोर कितना है पर्वत टले जाए अपने सामने पर्वत भी झुक जाएंगे जैसे स्वामी जी को साक्षात्कार आदेश प्राप्त हुआ था वो बात यह सिर्फ नहीं है कि उनको निर्विकल्प समाधि प्राप्त हुई थी ठाकुर ने चिट्ठी पर लिख के दिया था नरेण शिखे देवे जोखन घरे बायरे ड हाक देवे ऐसा करके ठाकुर ने एक चिट्ठी पर लिख के दिया था वो मास्टर महाशय ने चिट्ठी प्रिजर्व की है और फिर वह कथामृत में उसको पब्लिश भी प्रिंट भी की है नरेंद शिखे देवे नरेंद शिक्षा देगा ऐसा चपरा चा ठाकुर कहते हैं ना कि बड़े मालिक का इसके बाद में वह आएगा वो इसका बाद का जो प्रसंग है बाद में इसको बात करते हैं ओ देश हालदार पुकुर बले एकटा पुकुर कामर पुकुर में हालदार पुकुर बोलकर के हालदार बोलकर के एक तालाब है पाड़ रोज सकाल बेला बाजे करे राख तो जो लोग वहां पर सुबह को स्नान करने को जाएंगे ना तो तालाब के किनारे वह शौच कर देंगे अपनी विष्ठा वहां पर पड़ी रहेगी अभी आप दूसरे लोग जब स्नान करने के लिए कपड़े धोने के लिए जाते हैं विष्ठा पड़ी है तो कैसा उनको बुरा लगेगा जारा सकाल बेला आश खूब गाला गाल दे जो लोग सुबह को स्नान करने को कपड़े धोने को आते हैं विष्ठा पड़ी देख कर के वह सबको गाली देते हैं कि इसको अकल नहीं है कि तालाब के किनारे यहां पर शोच करते हैं जाओ थोड़ा सा दूर जंगल में जाकर शोच करके आओ आबार तार परदन शेरू सुबह को गाली देने से भी लोग वहां के किनारे पर शौच करना बंद नहीं करते थे दूसरे दिन वैसे का वैसा बाजे आर थामे ना ऐसा सोच करना खत्म नहीं हो रहा है स्टॉप नहीं हो रहा है शकल हस्य लोके कंपनी के जान ले तो किसी ने जाकर के ईस्ट इंडिया कंपनी की ऑफिस थी वहां पर जाकर कंप्लेन की तारा एकरा तारा एकटा चपरासी पाठिए दले तो कंपनी की ओर से एक कारकून आकर के चपरासी आकर के उसने क्या किया शे जोखन एकटा कागज मेरे दिले बाचे करियो ना तखन सब बंद सकलर हस्य और चपरासी ने आकर के एक नोटिस लगा दिया कि यहां पर शौच जाना मना है जैसा ही नोटिस लग गया सबने काम वो शौच जाना बंद कर लिया तो ठाकुर क्या कहते हैं लो को शिक्षा देवे तार चपरा चाय लो को शिक्षा जब देना है तो इस तरह से आपके पास में एक अथॉरिटी पेपर ये जो क्या बोलते हैं उसको आजकल की लैंग्वेज में कि पावर ऑफ एटर्नी और व्हाट एवर चपरा चाई अर्थात कि आपके पास में ईश्वर के आदेश का मानपत्र चाहिए ना होले हाशिर कथा होए पड़े ऐसा कुछ नहीं होगा बातें करना शुरू कर दिया तो लोग हंसना शुरू कर देंगे आपना रही होई ना आबार लोग उसका कुछ हो नहीं रहा है दूसरे लोगों को उपदेश दोगे काना काना के पथ देखिए जाचे अंधे नहीं व नियमा ना यथा अंधा जैसे कहा जाता है अंधा अंधे को दोर रहा है अंधा अंधे को रास्ता दिखा रहा है हशो ते विपरी तो इससे क्या होगा कि सबको नुकसान होगा भगवान लाभ होले अंतर दृष्टि होए कार की रोग बोझा जाए भगवान लाभ होने से अंतर दृष्टि होती है किसको क्या रोग है सम में आता है उपदेश देवा जाए तब ठीक ठीक उपदेश आप दे सकते हैं आदेश ना थाक ले आमी लो को शिखा दी अहंकार होए जब आदेश नहीं मिलता है और आप लोक कल्याण कर रहे हैं तो अहंकार खड़ा होगा कि मैं लोक शिक्षा दे रहा हूं अहंकार होए अज्ञान अहंकार का कारण है अज्ञान अज्ञान बोध होय आमी करता अज्ञान से ऐसा लगता है कि मैं ही करने वाला हूं किंतु ईश्वर करता ईश्वर सब करछ आमी किछु करछ ना ई बोध होले तो से जीवन मुक्त किंतु ईश्वर ही करता है ईश्वर ही सब कुछ कर रहे हैं यह ज्ञान होने से हम लोग जीवन मुक्त हो जाएंगे आमी करता आमी करता ई बो थके ज तो दुखो अशांति मैं करता हूं मैं करता हूं यह बोलने से ही जितना दुख और अशांति देखिए यह जो हमने पूरा डिस्कस किया ठाकुर ने वही बात कही है सबसे पहले तो ये चपरा की बात पेपर ऑफ अथॉरिटी यह जो कंपनी के कारकुन ने आकर के क्लर्क ने आकर के वोह नोटिस लगा दिया तो यहां पर भी ठाकुर ने सही सही में स्वामी जी को कागज पर लिख के दिया था स्वामी जी को दिया था कि नहीं पता नहीं किस कंडीशन में किस कांटेक्ट में वह लिखा है वह भी मुझे पता नहीं किंतु लिखा है सही कि नरेंद सिखे देवे और यह पेपर कथामृत में तो यह नरेण के पास में सही सही चाप था सही सही पावर ऑफ एटर्नी या तो फिर लेटर ऑफ अथॉरिटी था जिसके बेस पर नरेंद्र ने विदेश में और बाद में भारत में भी योग और वेदांत का प्रचार किया अच्छा यह एक पॉइंट है दूसरी बात है कि यहां पर ठाकुर बार-बार जो कह रहे हैं कि ईश्वर दर्शन होने के बाद में ही साक्षात ईश्वर अपनी नजर के सामने आकर के जब आदेश दे कि लोक कल्याण करो तभी लो को कल्याण करना है वरना तो फिर घमंड बढ़ जाएगा काम कांचन में लिप्त हो जाएंगे फस जाएंगे तो यह हमने दो मॉडल डिस्कस किए एक तो मटेरियल मॉडल है वहां पर सही सही ऐसा होगा जितने भी फिलांथस है बहुत सारे एनजीओ वाले हैं ऐसा ही आपको महसूस होगा उनके साथ में बात करके कि जैसे वही लोग अपना घमंड इतना बड़क गया है इन लोगों का लगता है कि वही लोग जगत के करता है तो इसको काटने के लिए संपूर्ण शरणागति ईश्वर प्राप्ति यह रास्ता है किंतु हमने स्वामी जी का ऑब्जर्वेशन भी बाद में देखा है यह ट्रेडिशनल पाथ ऑफ स्पिरिचुअलिटी पर चलके बहुत सारे लोग तमस के शिकार हो गए हैं तो फिर यह जो मॉडल है ठाकुर का कि कैसे भी करके धक्का मुखी करके ईश्वर प्राप्त कर लो क्या हमारी वह ठाकुर के जैसी कैपेसिटी है कि सब कुछ छोड़ कर के झड़ की तरह सुबह शाम ईश्वर के लिए पागल होकर रोते रहते हैं और जब तक ईश्वर प्राप्ति नहीं होगी तब तक चैन से नहीं बैठूंगा ऐसा तो अपना कैपेसिटी ही नहीं है सुबह को आधा घंटा शाम को आधा घंटा यदि किया तो हो हो हो ऐसा हो जाता है अरे दो बार वो जब करने के लिए बैठता है इवन हमारे साथ में भी ऐसा ही होता है तो हम कौन खेत की मूली है कि कैसे भी करके सब छोड़ कर के ईश्वर दर्शन कर ले हमको तो अपना एक सेडेंटरी लाइफ स्टाइल है इसके भीतर में सब कुछ एडजस्ट करना है एक रेडिकल लाइफ स्टाइल कहां हम लोग लाके पाते हैं तो फिर इस लाइफ स्टाइल के लिए सेडेंटरी एक तामसिक लाइफस्टाइल के लिए यह स्वामी जी का सोल्यूशन है ईश्वर प्राप्ति के लिए भी प्रयत्न करते जाइए साथ-साथ में उसका बाय प्रोडक्ट तमस को काटने के लिए एक्टिव ड्यूटी भी करते जाइए तो यह जो फिलांथस का जो बाय प्रोडक्ट है घमंड वो काटने के लिए ईश्वर प्राप्ति की साधना है और ईश्वर प्राप्ति की जो बाय प्रोडक्ट कभी-कभी तमस रूपी जो हो जाती है उसको काटने के लिए फिलांथस रूपी यह रजस की गोली है यह जो अ बहुत कोई एकदम डेंजरस वो जो टेबलेट डॉक्टर प्रिसक्राइब करता है वो हाई पावर टेबलेट तो फिर क्या होता है कि वह साथ में वो एसिडिटी की भी गोली देगा बोलेगा कि इससे एसिडिटी होगा उसको काटने के लिए आप ये एसिडिटी की टेबलेट साथ-साथ में ले लीजिए तो इसकी बाय प्रोडक्ट काटने के लिए यह और इसकी बाय प्रोडक्ट काटने के लिए यह ऐसा करके स्वामी जी ने अपना खुद का मॉडल तैयार किया है यह कंफ्यूजन लोग जब भी ठाकुर और स्वामी जी दोनों को पढ़ते हैं उनके मन में यह सब कंफ्यूजन या तो लेजिटिमेसी कहा है और स्वामी जी ऐसा कह रहे हैं क्या भाई माजरा क्या है क्यों कंफ्लेक्स कुछ गुरु भाइयों के मन में भी शुरू शुरू में यह संदेह प्रकट हो गया था इसके लिए इस तरह का एनालिसिस आवश्यक है अभी ऐसा नहीं है कि एनालिसिस परफेक्ट है या कंप्लीट है अपनी सामान्य बुद्धि से जो हम करते हैं अभी जैसे जैसे अपना स्टडी भी बढ़ता जाएगा एक अंडरस्टैंडिंग भी बढ़ता जाएगा हो सकता है कि वी विल बी एबल टू डू दिस इवन बेटर और और भी कुछ अच्छे से कर पाए बट एज ऑफ टुडे दिस इज माय अंडरस्टैंडिंग तो आज यहीं तक अभी कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु यहां पर देखिए जब तक आप यह सोचते हैं ना कि मैं अपना कर लूंगा तब यह वही वो फर्स्ट मॉडल वाला तमस वाला प्रॉब्लम आ जाएगा मैंने स्वार्थ जो है ना स्वार्थ इवन आध्यात्मिक जीवन में स्वार्थ घुस जाता है आश्चर्य की बात है कि तमस और सत्व सपोसेडली आध्यात्मिक जीवन इज बेस्ड ऑन सत्व तो सात्विक जीवन जी रहे तमस कहां से आ गया किंतु स्वार्थ कहां से भी घुस जाएगा माने इतना सूक्ष्म है और मैं सोचूंगा कि मेरा कुछ हो जाए बाकी का होता रहे तो फिर वह स्वार्थ घुस गया और तमस आ गया इन दैट केस कंपैशन इज वेरी नेसेसरी अपने ऑर्डर में ना कोई कोई लोग कंपैशन को एक निम्न तरह की चीज मानते बोला अपना ईश्वर प्राप्ति कर लो अपना कैरेक्टर गठन कर लो लोग तो क्या है लोक ना पोक ऐसा कुछ किंतु उससे स्वार्थ जद जद देखिए इफ यू आर प्योर तब तक प्रॉब्लम नहीं है किंतु स्वार्थ जो घुस गया सेल्फिश जो घुस गई तो अपनी साधना को बर्बाद कर देगी जो कि भारत के साथ में हजार साल से होता आ रहा है मैं अपनी ईश्वर प्राप्ति करूंगा अपनी चरित्र का गठन करूंगा फिर आखिर में क्या हुआ हजार साल की गुलामी क्यों क्योंकि वो खड़े होकर के सामना करना वो अपना डिफेंस करना वो भी कैपेसिटी चली गई है तो स्वार्थ ना घुस जाए ट वी हैव टू बी एक्सट्रीमली केयरफुल ठाकुर के जीवन में देखिए ठाकुर इज द आइडियल ऑफ यह जो बात कही कि मैं अपना जीवन चरित्र गठन करके ईश्वर प्राप्ति करूंगा उसका हाईएस्ट आइडियल है ठाकुर किंतु ठाकुर जैसे और कितने हैं यह साधना करते करते इस रास्ते से कितने निकले हैं करोड़ में से एक निकला है तो हमको तो एक ऐसा मॉडल चाहिए ना चच इज जनरली सक्सेसफुल माने सिर्फ एक दो लोगों के लिए सक्सेसफुल ना हो ससुल फॉर मेजोरिटी ऑफ पीपल सत्य और ब्रह्मचार्य कैरेक्टर बिल्डिंग को आपको यदि एकदम स्पेसिफिक डिफाइन करना है तो राजा महाराज ने कहा है सत्य और ब्रह्मचर्य और ऐसा तो 100% संभव नहीं है किसी से 100% सत्य 100% ब्रह्मचर्य बट दिस आर द मानदंड कि इस दोनों रास्ते पर आप जितना आगे बढ़े हैं उतना आपका चरित्र अच्छा है साधना की साइड इफेक्ट तमस है इस बात को हमको बड़ा जननली एक्सेप्ट करना होगा जब तक हम नहीं एक्सेप्ट करेंगे ना तब तक हम ना वो प्रॉपर अपने को डेवलप नहीं कर पाएंगे हम लोग सोचते हैं हम सब लोग ठाकुर जैसे हैं ठाकुर की तरह 100% अपना मन साधना में लगा देंगे ऐसा कभी नहीं होने वाला है 1 पर 2 पर 10 पर एट द मोस्ट आप अपना जीवन साधना में लगाएंगे बाकी का 80 90 पर के साथ में आप क्या करेंगे अपना कहां अधिकारत्ती हैं आप आम आदमी के लिए तो फिर 90 पर के साथ में आप ऐसा कुछ कार्य कीजिए जिससे कि आप धन्य हो जाए वरना तो फिर वह 90 पर के साथ में पूरे जगत की निंदा करना फिर यह परनिंदा पर चर्चा उसके पीछे लगना उसका मतलब जो कचरा साधक किसी किसी साधक के मन में हो जाता हैना इकट्ठा आप आश्चर्य चकित हो जाएंगे देख कर के सो अपनी कैपेसिटी समझ कर के स्वामी जी ने तो देखा ना कि क्या परिस्थिति है उसके अनुसार वह स्वामी जी का मॉडल है जननली सोच कर के देखिए कि आप को नर्मदा किनारे कुटिया बना लेते हैं और फिर अब मैं अपना खुद का अनुभव बताता हूं सन्यास से पहले मैं दो महीना नर्मदा किनारे रहा था सोचा था दिन भर जब ध्यान करूंगा ऐसा प्लान था कि एक महीना सफेद कुटिया में रहूंगा एक महीना भ्रमण करूंगा नर्मदा किनारे वो मैंने दोनों किया भी सही एक महीना सफेद कुटिया में रहा जो अपनी ओमकारेश्वर में अपनी कुटिया है वहां पे और एक महीना नर्मदा के किनारे भ्रमण भी किया दोनों किया किंतु फिर मुझे पता चला कि देखिए ये जो लाइफ स्टाइल है ना 100% ईश्वर को डेडिकेटेड करना वो मेरे लिए नहीं है आई एम नॉट फिट फॉर दैट हमको कर्म करना ही होगा वरना तो माथा खराब हो जाएगा जहां-जहां पर मैं जाकर के रुकता हूं ना लोग धुम्रपान कर रहे हैं बैठे हैं धूप में गप लगा रहे हैं क्या से क्या नहीं कर रहा है मुझे ऐसा साधु नहीं होना है आई वांट टू बिकम यू नो आई वांट अ बेटर लाइफ फॉर माय सेल्फ सो ये स्वार्थ मुझे वापस लेकर आया वरना तो सोचा था कि सन्यास के बाद में निकल पड़ेंगे दो चार साल वहीं पर और फिर अच्छा लगा तो वहीं पर कुटिया बना के रह जाएंगे लेकि तो लगा कि ट टाइप ऑफ लाइफ इज नॉट फॉर मी आई डोंट वांट टू थ्रो अवे ऑ माय लाइफ यह जो देखिए जो चार ट्रेडिशनल साधनाएं हैं कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग और राज योग यहां पर कर्म योग का अर्थ वह स्वामी जी वाला नहीं किंतु जननली निष्काम कर्मा माने वोह जो भी करते हैं निष्काम भाव से करना है दैट इज फॉर ट्रेडिशनल साधना ए इन गीता जैसे भगवत गीता में कहा गया है यह चार ट्रेडिशनल साधनाएं आप 10 पर 15 पर ऑफ आपका टाइम कर सकते हैं बाकी का जो टाइम है 70 टू 80 पर स्वामी जी का जो सेवा योग है वह हमको करना चाहिए जब इस तरह से अपना लाइफ एक तरह से चलेगा ऑटोमेटिक देखेंगे कि यह निष्कर्ष कि मैं करता नहीं हूं ईश्वर करता है वह भाव धीरे-धीरे आ कर के बैठ जाएगा क्योंकि इसके अलावा इसके बाहर और कोई साधना नहीं है देखिए ऐसा होगा नहीं कि जब हम कर्म कर रहे हैं सेवा कर रहे हैं अपने मन को ठीक रखें वह अहम भाव आएगा ही इसीलिए जो चार योग है ट्रेडिशनल चार योग उसको करते-करते हमारे में सत्व आता है वो साइड इफेक्ट है तमस तो तमस को काटने के लिए सेवा योग है तो सेवा योग करते-करते साइड इफेक्ट होती है रजस तो रजस को काटने के लिए अपने पास में यह ट्रेडिशनल योग है जो कि हमको सत्व देते हैं म दोनों एक दूसरे के कॉम्प्लिट है यदि चार ट्रेडिशनल योग ही करते रहेंगे सत्व तो आएगा शायद कहीं पर तमस भी घुस जाएगा और सिर्फ सेवा योग करते रहेंगे तो रजस या तो फिर यह कताप ऐसा घुस जाएगा कि फिर उससे मुक्ति पाना असंभव हो जाएगा यूज बोथ एज कंप्लीमेंट कि तमस को काटने के लिए सेवा योग और सेवा योग से प्रकट होने वाले रजस को काटने के लिए ट्रेडिशनल योग ऐसा नहीं होगा कि मैं सेवा कर रहा हूं और यह अहं भाव करता भाव ना आए वह आएगा बट उससे डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि फिर तो हम सुबह शाम ट्रेडिशनल साधनाएं कर ही रहे हैं तो जब वो करेंगे तब वो एक रिवाइज कर देना है अपने जीवन को कि अच्छा मेरे मन में यह भाव क्यों आया जब तक मैं स्टेज पर खड़ा हूं बोल रहा हूं एक घमंड तो आएगा ही यू कैन नॉट टेक टेक इट अवे फ्रॉम यू मनुष्य है हम तो देवता नहीं है तो एक अन अनरियलिस्टिक एक्सपेक्टेशन नहीं रखना है वो जो रियलिस्टिक है वो होना ही होना है किंतु सोल्यूशन इज कि सुबह शाम बैठ कर के आत्म निरीक्षण आत्म चिंतन करके मने ब्रूटल सेल्फ एनालिसिस करना है उस समय कुछ भी पीछे नहीं छोड़ना है एकदम ब्रूटल सेल्फ एनालिसिस करना है ये क्यों हुआ यह क्यों हुआ क्या मेरे मन में यह था क्या मुझे यह था ऐसा एक ऐसा करके पूरा डिसेक्ट कर देना है पूरा यह कर देना है तब कहीं जाकर के वो जो एक निकलता है कि हां यह भाव मेरे मन में आया था कल भी आ सकता है परसों भी आ सकता है किंतु बड़े ही विनम्र हो कर के ठाकुर को प्रार्थना करनी है ठाकुर आप ही का कार्य कर रहा हूं आप ही की कृपा से कर रहा हूं तो आप ही मेरी रक्षा कीजिएगा ऐसा करके उनको प्रार्थना करनी है फिर दूसरे दिन फिर जब आप यह कंबल डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जाएंगे एस ए टीचर आप उपदेश देंगे यदि कोई प्रशंसा करेगा फिर से होगा अरे वाह मैं कितना अच्छा कर रहा हूं अगेन उस दिन शाम को बड़ा ही ब्रूटल सेफ एनालिसिस करना है भाई क्यों आया ऐसा विचार य दिस गिव एंड टेक चलता रहे फिर एक समय ऐसा आएगा कि सही सही में भीतर से एक स्पिरिचुअल मैच्योरिटी वह प्रकट होगी उस समय कोई प्रशंसा भी करे तो आपको टच नहीं करेगी कोई निंदा भी करे निंदा स्तुति दोनों आपको टच नहीं करेगी वह समय आएगा ठाकुर की कृपा से आएगा