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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत || 27 Oct 1882 - केशव सेन के साथ ठाकुर का नौका विहार || 24 Dec 2024

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री राम कृष्ण देव उनका कथामृत चैप्टर का नाम है केशव सेन के साथ में नौका विहार श्री राम कृष्ण देव का नौका विहार आनंद और कथ उप कथा अर्थात की वार्तालाप षष्ठ परिच्छेद चल रहा है डेट है 182 27 अक्टूबर सो कल हमने देखा कि किस तरह से ठाकुर एक के बाद एक अपने जितने भी यूजुअली ऐसा होता है कि हम जब धर्म करने को जाते हैं या तो फिर आध्यात्मिक होने का प्रारंभ करते हैं तो हम लोग फिर बड़ा ही एक चौकन हो जाते हैं कि क्या खाना है क्या नहीं खाना है क्या स्पर्श करना है क्या नहीं क्या आचार होना चाहिए क्या विचार होना चाहिए किस तरह से साधना करनी है यह जो अपने शास्त्र में जितने भी नियम प्रदर्शित किए हुए हैं उन सबको फॉलो करने का प्रयास करते हैं और फिर यह जो जैसे कि यम है और नियम है सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह ब्रह्मचर्य तप शोच संतोष स्वाध्याय ईश्वर प्रधान यह जो 10 यम नियम है या तो फिर यह अधिकारी के जो लक्षण है वेदांत में जो बताए गए हैं तो साधन चतुष्टय जिसको कहते हैं तो यह सब हम कॉन्शियसली करने का प्रयास करते हैं जिससे कि क्या होगा कि आध्यात्मिक जीवन अपना सरल हो हजारों हजारों सालों से अपने ऋषि मुनि जो त्याग तपस्या और साधना करते आ रहे हैं उन्होंने जो ट्रायल एंड एरर ऐसा करके जो भी आध्यात्मिक सत्य खोज निकाले हैं उन्होंने ब ब ही सुंदर रूप से सुचारू रूप से हमारे लिए उपनिषद और उसके बाद के जो धार्मिक ग्रंथ है अपने हिंदू धर्म के जैसे कि पुराण है जैसे कि प्रकरण ग्रंथ है जैसे कि सूत्र साहित्य है उन सब में यह लिपिबद्ध करके गए हैं जिसका पाठ करके हमको अपने आध्यात्मिक जीवन को गठित करने का एक सुंदर मौका मिले एक सहज सरल रास्ता अपना हो जाए पहले से ही यदि हमको कह दिया जाए कि हां एथिक्स और मोरालिटी के रास्ते पर चलना है अदर वाइज आप जितना भी जप करें रात रात भर जग करके आप स्मशान में जाकर के जप करें किंतु फिर भी जब तक आपका यह सत्य निष्ठा है या तो फिर ब्रह्मचर्य पालन है या तो फिर ईश्वर के प्रति एक शरणागति है शरणागति का अर्थ है कि अपना जो अहंकार है अहंकार को निर्मूल करके ईश्वर को उसको समर्पित कर देना यह यदि हमें नहीं होगा तो पूरी रात भर जप ध्यान करने का हमको ज्यादा कोई फल नहीं मिलेगा जैसे कि ठाकुर ने वह उदाहरण दिया था एक घटी है एक घट है उसमें एक छेद है अभी आप उसमें आप पानी डालते ही जाइए डालते ही जाइए देखेंगे कि वह छेद में से पानी निकल कर के बह जाएगा ऊपर में से पानी डालने का कोई अर्थ नहीं तो वैसे ही ये एथिक्स और मोरालिटी आध्यात्मिक जीवन के वो फाउंडेशन है आध्यात्मिक जीवन के स्ट्रांग होल्ड है यह एथिक्स और मोरालिटी यम और नियम ये साधन चतुष्टय इसी किले में रह कर के ही आध्यात्मिकता जीवित रहती है इसके बाद में यदि किंतु आप यह कहे कि नहीं मैं साधु हूं या मैं साधक हूं या मैं एक बहुत बड़ा भक्त हूं तो फिर मुझे सत्य निष्ठा आवश्यक नहीं है मैं जो चाहे वो कहूं सत्य कहूं कि असत्य कहूं उससे फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं ईश्वर का शरणागत हो तो ऐसा करके नहीं चलेगा ईश्वर के शरणागत हो ना कि नहीं हो सत्य पालन तो आपको करना ही पड़ेगा किंतु देखिए ठाकुर किस तरह का एक उदाहरण देते हैं जब एक पौधा छोटा होता है अपने गार्डन में एक छोटा सा पौधा आप लगाएंगे जैसे कि मान लीजिए आम का पेड़ लगाते हैं तो आप नर्सरी में से वो छोटा सा एक पौधा आता है आम का वो लेके आए एक फुट ना दो फुट इस तरह की साइज का नर्सरी में मिल जाता है आप उसको गार्डनर को जाकर पूछेंगे कि अच्छी किस्म की आम वो हाफूस है ना कि वो डिफरेंट डिफरेंट वैरायटी है ना तो उसमें से अच्छी किस्म की आम का पौधा कौन सा है तो वो छोटा सा पौधा आपको वो प्लास्टिक का वो जो ये होता है ना प्लास्टिक का बैग उसमें वो मिट्टी डाली है और उसमें ये वो पौधा उगाया है इसको तो वो लेके आएंगे प्लास्टिक का बैग फाड़ के फिर वो जो पौधा है मिट्टी सहित आप जमीन में गाड़ देंगे किंतु साथ-साथ में ही क्या यह फिक्र करनी होगी आसपास के जितने पशु पक्षी है वह उसमें आकर के उसमें मुंह ना मारे उसके लिए आपको एक उसके आसपास में एक बैरियर बना देना होगा लकड़ी का हो ना कि मेटल का हो उसको एक प्रोटेक्शन में रखना होगा किंतु ठाकुर कहते हैं जब यही आम का पेड़ बड़ा हो जाए तो आप इस पेड़ के साथ में चैन से एक हाथी को भी बांध दे तो वो हाथी भी पौधे को ये आम के पेड़ को गिरा नहीं पाएगा हालांकि किसी-किसी हाथी में वो ताकत होती है कि वो जोर से वो मारेंगे तो पेड़ गिर भी जा सकता है किंतु यह एक मेटाफोर है एक उपमा है छोटे पौधे को आपको रक्षण में रखना होगा पौधा जब किंतु परिपक्व हो जाता है उसका फूल साइज पे आ जाता है उसके बाद में उसको किसी तरह के प्रोटेक्शन की जरूरत नहीं है तो यहां पे भी देखिए कि ठाकुर आध्यात्मिक मैच्योरिटी के उस लेवल पर पहुंच गए थे कि उन्होंने मां के सामने ने जाकर के कहा ये लो तुम्हारा धर्म और यह लो तुम्हारा अधर्म मुझे शुद्ध भक्ति दाओ अभी यह कहीं ने ठाकुर ये कह क्यों सके क्योंकि वो आध्यात्मिक साधना में परिपूर्ण हो गए थे आध्यात्मिक जीवन में जो प्राप्त व्य है वो उन्होंने प्राप्त कर लिया था वो प्राप्त करने के बाद में अभी ठाकुर संपूर्ण रूप से मां के ऊपर में निर्भर शल हो गए थे मां है वो विश्वास इतना दृढ़ है कि मां कभी भी उनके पैरों को गलत दिशा में नहीं ले जाएगी उनको खुद को सोच कर के अभी ये ये मैं सही कर रहा हूं कि गलत कर रहा हूं इसका भविष्य का परिणाम क्या आएगा और आजकल तो हम ये कर्म के लेखा जोखा इतना सोचते नहीं है पहले के जमाने में सिर्फ साधक ही नहीं आम आदमी भी इतना सोचता था कि यह जो मैं कर्म कर रहा हूं इसका क्या फल मिलेगा पॉजिटिव बैलेंस वो बढ़ाएगा ना कि नेगेटिव बैलेंस बढ़ाएगा वो क्या करेगा तो ठाकुर को किंतु पूर्ण ज्ञान प्राप्त होने के बाद में यह सोचने की विचारने की जरूरत नहीं है कि मैं यह सही कर रहा हूं कि गलत कर रहा हूं संपूर्ण रूप से वो ईश्वर के निर्भर शल है ठाकुर जैसे उदाहरण देते हैं कि एक बच्चा छोटा बच्चा जब अपने पिताजी की उंगली पकड़ कर के वो चल रहा है तो हो सकता है कि उसकी तो ग्रीप जो है छोटे बच्चे की इतनी स्ट्रांग नहीं है वो हो सकता है कि फिसल भी जाए ही रास्ते में किंतु पिताजी स्वयं बच्चे का हाथ पकड़ कर के चल रहे हैं तो पिताजी की ग्रिप तो बड़ी स्ट्रांग होगी तो कैसे भी किसी भी कीमत में वोह अपने बच्चे को गिरने नहीं देंगे तो यहां पे भी वो हम खुद पिताजी की उंगली पकड़ के चले अर्थात कि हम यह कॉन्शियसली मैं सही कर रहा हूं कि गलत कर रहा हूं धर्म के रास्ते प जा रहा हूं कि अधर्म के रास्ते पर जा रहा हूं मेरे प्रत्येक कर्म का क्या फल होगा वो सोच कर के हम चलते हैं जब तक हम पिताजी की उंगली पकड़ के चलते हैं तब किंतु जब पिताजी ही अपनी उंगली पकड़ ले उसका अर्थ है कि धर्म न अधर्म सूची न असू च पाप ना पुण्य ज्ञान ना अज्ञान ये सब हमको अपनी कॉन्शियस लेवल पे सोचने की जरूरत नहीं है यदि हम निराकार वाद को फॉलो करते हैं अद्वैतवाद को फॉलो करते हैं तो हम कहेंगे कि आत्मन के भीतर में प्रकाश ही है अंधकार नहीं है अर्थात कि यदि आपने आत्मज्ञान प्राप्त किया है या तो फिर आप आत्मज्ञान में स्थित हो गए हैं तो फिर यह किसी भी कीमत पे मने गलती से भी आप गलती नहीं करेंगे और यदि हमारी साकार पे श्रद्धा है हमको ध् वैत मार्ग में अपनी निष्ठा है तो हम कहेंगे कि कुछ भी हो जाए मां अपने बेटे का पैर जो है वो गलत दिशा में नहीं जाने देगी किंतु यह क्या है पता है जब आप नेति नेती करके आप आध्यात्मिक साधना करते हैं उस समय किंतु आपको बड़े चौकन में रहना पड़ता है उस समय आपको बड़ा ही अलर्ट रहना पड़ता है कि मैं जो कार्य कर रहा हूं वह सही है कि गलत है जैसे कि ठाकुर ने खुद ने नित्य गोपाल बोलकर के उनका जो भक्त था उसको चेतावनी दी थी कि साधु सावधान अभी यदि कोई भक्त है या फिर अभी उसकी कितनी ही भक्ति है वह यदि आपको कुछ कहे या कुछ करने को बोले और आप बिना सोचे समझे कर लेंगे कि यह सोच करके कि अरे वो तो वोह भी भक्त है मैं भी भक्त हूं और भक्ति के लिए ही यह सब कर रहे हैं तो यह तो चलेगा नहीं उस समय आपको किंतु यह जो बड़े ही अलर्ट रहना पड़ेगा जिसको कहते हैं विवेक विवेक का अर्थ क्या है प्रत्येक एक्शन जो है मेरी जो अपने जैसे उपनिषद में कहते हैं कि श्रेय और प्रेय ये दोनों मनुष्य के सामने आते हैं और प्रत्येक क्षण हमको यह ठीक करना होता है कि मैं श्रेय को सिलेक्ट करूं ना कि प्रेय को करूं प्रेय अर्थात कि जो मेरे मन को भाता है मेरी इंद्रियों को सुख और आनंद देता है और श्रेय यह है जो कि जन्म जन्मांतर के लिए मेरा जो भविष्य है वो सुगठित करेगा जोक मेरे लिए श्रेष्ठ है वो है श्रेय आध्यात्मिक पथ पे मुझे वो आगे ले जाएगा तो ये श्रेय और प्रेय सब समय हमारे सामने आते रहते हैं और यह विवेक एक ऐसा शस्त्र है विवेक एक ऐसा टूल है आज की लैंग्वेज में कि वो हमको बताता है कि ये श्रेय क्या है प्रेय क्या है और विल पावर एक ऐसी चीज है जो कि हमको श्रेय सिलेक्ट करने के लिए दृढ़ संकल्प प्रदान करती है तो यह श्रेय यह है प्रेय ये है ऐसा करके विवेक मार्ग का वो अनुष्ठान करना विवेक उसको हमारे में जागृत रखना फिर ये स्ट्रांग विल पावर होना कि हां मुझे यही अच्छा श्रेय ही पसंद करना है प्रेय नहीं तो ये हम जब तक कॉन्शियस लेवल पर करते रहेंगे तो ये कब तक हमको करते रहना है जब तक हमको निर्विकल्प समाधि या तो फिर साधना में एक सिद्धि ना प्राप्त हो जाए हम कई बार कहते हैं कि नेति नेती करके हमको साधना करनी है फिर हम सिद्धि प्राप्त करेंगे अर्थात कि निर्विकल्प समाधि और फिर इती करके इस जगत में वापस आना है किंतु जब जगत में वापस आएंगे तो अपना अहंकार और अपनी वासना एं दोनों 100% विलुप्त हो गए होंगे उनका विनाश हो गया होगा और अपना मन जो है करुणा और एंपैथी से भर गया होगा इनफाइनों वन में भी जाकर के बैठे तो वो जैसे महावीर और बुद्ध भगवान की जो जैसे फोटोग्राफ जैसे वो पेंटिंग्स होते हैं ना कि वोह बैठे हैं ध्यान मुद्रा में और यहां सामने शेर और गाय या बकरी यह दोनों तीनों बैठे हुए हैं शेर उनका वध नहीं कर रहा है उनकी हत्या नहीं कर रहा है क्यों गाय या बकरी की क्योंकि भगवान बुद्ध या भगवान महावीर की जो करुणा है कंपेज है उससे वो इतना प्रभावित हो गया है कि वो अपना हिंसक स्वभाव भूल जाता है तो वो हो गया किंतु जब आप इती इती करके इस जगत में वापस आते हैं इससे यह एक प्रश्न हो सकता है कि क्या सभी साधकों को अपना हृदय उसमें मनुष्य के लिए प्रेम वो प्रकट करना वो क्या तभी संभव है जबक हम निर्विकल्प समाधि में जाए तो देखिए इसके दो उत्तर है एक उत्तर है कि आप ठाकुर की तरह प्रचंड तपस्या करना एक एक मने कंपलीटली जगत विस्मृत हो जाना और उसके बाद में मां का दर्शन करना और फिर दर्शन करके वापस आना यह सब हम लोगों के लिए तो संभव नहीं तो जैसे ये परमहंस के जो गुण है वो गुण हम साधना के समय ही अपने में कल्ट वेट करें एक एक और यदि हमारे मन में विवेक और वैराग्य का भाव चल रहा है तो दूसरों के प्रति करुणा और दया का भाव होना चाहिए यह दोनों भाव साधक अवस्था में भी हम अपने में कटि वेट कर सकते हैं वही है कि उसको हमको कॉन्शियसली कल्टटर होगा बहुत बार दूसरों की कोई भी एक्शन देख कर के हमको क्रोध आ जाता है गुस्सा आ जाता है और इमीडिएट हमारा टेंपर जो है हाई हो जाता है अरे यह क्या कर रहा है किंतु यदि आप उस समय यह विवेक और वैराग्य को लाएंगे कहेंगे कि अरे वह भी तो एक मनुष्य है मानव मात्र भूलने पात्र मनुष्य मात्र भूलने पात्र ऐसा एक गुजराती कहावत है कोई भी मनुष्य है वो गलती कर ही सकता है व गलती करेगा ही करेगा तो क्या है कि उसके साथ में एक अच्छे से उसको ट्रीट करें समझाए कि भाई ऐसा नहीं ऐसा करो क्योंकि गुस्सा करके आपको कोई ए सच कुछ मिलने वाला नहीं है आप अनपोल हो जाएंगे दूसरों को आप एलियने कर देंगे बेटर है कि समझावन लेना है समझा बुझा करके काम लेना है तो वो जो गुण है कंपेज एंड एंपैथी जो कि परमहंस के है विवेक और वैराग्य ये सब हमको यहां पे कॉन्शियसली कल्ट वेट करने हैं और फिर जब एक तरह की सिद्धि प्राप्त हो जाए निर्विकल्प समाधि या और कुछ उसके बाद में यह सब गुण सहज हो जाते हैं कि हां वो बाय डिफॉल्ट जैसे वो कंप्यूटर में डिफॉल्ट सेटिंग आते हैं तो यहां पे भी वो परमहंस जो होता है वो बाय डिफॉल्ट उसमें करुणा होती है बाय डिफॉल्ट उसके भीतर में विवेक और वैराग्य होता है उसको यह सब सेटिंग फिर मैनुअली चेंज करने की जरूरत नहीं नहीं पड़ती जब नया मोबाइल लेते हैं तो उसका वो जो फैक्ट्री उसका जो सेटिंग होता है उसके ऊपर में हम 10 एप नहीं बिठाते हैं फिर उसके सेटिंग्स चेंज करते रहते हैं तो किंतु फिर जब मोबाइल में कुछ गड़बड़ हो जाए तो हम उसको फैक्ट्री रिसेट बोल कर के ऑप्शन आता है एंड्र मोबाइल में तो उसको क्लिक करेंगे तो वो जो जिस मैन्युफैक्चरर जिस तरह के सेटिंग करके लाया था उसी सेटिंग में वापस आ जाएगा तो अभी जब हम साधक अवस्था में है तो अपने डिफॉल्ट सेटिंग एक तरह के है कि अपने भीतर में काम है क्रोध है मद लोभ मोह मत्सर यह ड़ रिपु हमारे मन के भीतर में डिफॉल्ट सेटिंग के रूप में बैठे हुए हैं इसके ऊपर में आप अपने मैनुअल सेटिंग मैनुअल ऐप इंस्टॉल कीजिए एक तो ऐप है कंपैशन दूसरा ऐप है विवेक तीसरा है वैराग्य चौथा है साधन भजन के प्रति निष्ठा फिर एक है विल पावर तो ये सब आपने ऐप इंस्टॉल किया डिफॉल्ट सेटिंग के ऊपर में किंतु जब सिद्धि प्राप्त हो जाती है तब यह आप फिर से अपना जो मोबाइल है यह शरीर है वो फिर से फैक्ट्री रिसेट हो जाता है किंतु इस बार जो अपग्रेड हो जाएगा अपना ओएस ये अपग्रेडेड ओएस जो है उसके डिफॉल्ट सेटिंग है व्हिच आर वेरी डिफरेंट जो पुरानी ओएस थी ऑपरेटिंग सिस्टम उसके जो डिफॉल्ट सेटिंग थे उससे अभी यह जो अपग्रेडेड ओएस है उसके डिफॉल्ट सेटिंग बड़े डिफरेंट होते हैं सिद्धि प्राप्त होने के बाद में कंपेज वैराग्य विवेक त्याग करुणा यह सब डिफॉल्ट हो जाता है उसके ऊपर में आपको मैनुअली कोई ऐप बिठाने की जरूरत नहीं पड़ती हां यदि आपको जैसे ठाकुर की तरह है कि अभी जगत में धर्मचक्र प्रवर्तन करना है नरेण है केशव सेन है यह जो विदेशी शिक्षा प्राप्त किए हुए डिवटी को उनको समझाना है तो एक थोड़ा सा एक वेस्टर्न मॉडर्न एजुकेशन क्या है बोलकर के वो एक ऐप इंस्टॉल कर दिया तो डिफॉल्ट सेटिंग के ऊपर में यह मॉडर्न एजुकेशन का एक ऐप बैठा हुआ है जिसके माध्यम से ठाकुर ये आधुनिक शिक्षा प्राप्त किए हुए कोलकात्ता के जो यूनिवर्सिटी और कॉलेज के स्टूडेंट हैं उनके साथ में अच्छे से इंटरेक्ट कर पाए तो किंतु वो लोक शिक्षा के लिए आध्यात्मिक जीवन की परि समाप्ति तो आपको सिद्धि प्राप्त करके ही आ गई तो यहां पर जब ठाकुर ये कहते हैं मां को कि ये लो तुम्हारा पाप ये लो तुम्हारा पुण्य ये लो तुम्हारा ज्ञान ये लो तुम्हारा अज्ञान ये लो तुम्हारा धर्म ये लो तुम्हारा अधर्म ये लो तुम्हारी शची ये लो तुम्हारी असच मुझे शुद्ध भक्ति दो अर्थात कि ठाकुर क्या करते हैं कि वो जो जितने भी वो मैनुअल सेटिंग किए हुए थे वो जो मेहनत करके या कॉन्शियसली वो धर्म के मार्ग पर चलना अधर्म के मार्ग पर नहीं चलना व जो सोच रहे थे वह सब उन्होंने मां के श्री चरणों में अर्पित कर दिया सिद्धि जब प्राप्त हो गई है तो मां का आशीर्वाद ही अभी डिफॉल्ट सेटिंग की तरह अभी धर्म ही उनका डिफॉल्ट सेटिंग है सूची ही डिफॉल्ट सेटिंग है ज्ञान ही डिफॉल्ट सेटिंग है अज्ञान अधर्म असच पाप यह सब वहां से चला गया तो यह शुद्ध भक्ति प्राप्त होने से यह सब जो नेगेटिव भाव नेगेटिव इमोशन है वह अपने से चले जाएंगे तो यह था इस पार्टिकुलर बात का तात्पर्य इसके भी और भी बहुत सारे आयाम हम सोच सकते हैं किंतु आज हम यहीं तक इसके बारे में सोचेंगे अच्छा इसके बाद में आगे ठाकुर क्या कहते हैं ब्रह्म भक्तो देर प्रति एकटी राम प्रसाद गान सुनो अच्छा इसको तो हमने पढ़ दिया था इसके बाद में फिर ठाकुर कहते हैं संसार में ईश्वर लाभ क्यों नहीं होगा जनक का हुआ था और फिर जब आप यहां पर भी अगेन यहां पर दो बात करते हैं ठाकुर ही संसारी मजार कुटी पहले तो ठाकुर कहते हैं राम प्रसाद ने कहा है यह संसार है धोका टाटी अर्थात कि यह जो जगत है दुख और कष्ट का बना हुआ किंतु ठाकुर कहते हैं क्या कहते हैं तार पादो पद्य भक्ति लाभ कर ले मां के पाद पद्म में एक बार जब भक्ति लाभ हो जाएगी तो यह जो धोखा का जो यह संसार है वही संसार जैसे कि अमृत के सागर में परिणत हो जाएगा य संसार मजार कुटी यह संसार ही है आनंद की कुटिया आमी खाई दाई आर मजा लूटी ये आनंद की कुटिया में रह कर के आनंद नगर में रह कर के मैं खाऊंगा पिऊंगा और आनंद लूटू जनक राजा महा तेजा तार कि छलो त्रुटी जनक राजा थे महा तेज वाली तेजवान थे और उनको किस बात की त्रुटि थी शज िक ओदक दुई दिक रेखे खे छलो दूधेर बाटी नक राजा ने राज्य भी किया था साधना में सिद्धि भी प्राप्त की थी इसीलिए इस र और उस ओर यह दोनों को संभाल करके उन्होंने पी थी दूध की बाटी तो श कोलेर हस्य सभी लोग हसने लगे ठाकुर इतना सुंदर रूप से उदा देकर के आध्यात्मिक गभीर तत्व को आज के गृहस्थ के सामने इतना सहज रूप से समझाते हैं किंतु फश करे जनक राजा हुआ जाए ना किंतु फटाक करके जनक राजा आप नहीं हो सकते मुंह से बोला कि मैं जनक राजा हूं संसार भी कर रहा हूं साधना भी कर रहा हूं सिद्धि भी प्राप्त करूंगा ऐसा नहीं पहले तो आपको तपस्या करनी होगी जनक राजा निर्जन अनेक तपस्या कोरे छिले जनक राजा ने निर्जन में वास करके बहुत तपस्या की थी संसार थे किव एक एक बार निर्जन बास करते हुए यदि हम संसार में भी रहते हैं आप संसार में रहते हैं हम लोग इस आश्रम में रहते हैं आश्रम के भी बहुत सारे कर्म है आश्रम में भी बहुत सारा ये कुछ ना कुछ चलता ही रहता है तो संसार में हो ना कि आश्रम में बीच-बीच में निर्जन में जाकर के वास निवास करना होगा संसार बाहर एकला गए जद भगवान जन् तीन दिनो कादा जाए शव भालो यदि संसार के बाहर जाकर के वन में अरण्य में रिट्रीट में जाकर के ईश्वर के लिए यदि तीन दिन भी रो सकते हो तो वो भी बहुत अच्छा है यह नर्मदा किनारा है या तो फिर ये उत्तरांचल है ये उत्तराखंड उत्तराखंड में बहुत सारी ऐसी निर्जन कुटियां हैं तो वहां पर जाकर के यदि एकांत में ईश्वर के लिए रोए कि हे भगवान तुमको मैंने अपना सर्वस्व अर्पण कि मुझे दर्शन दो आशीर्वाद दो आध्यात्मिक सिद्धि दो तो ऐसा करके जद हम रोएंगे तो व तीन दिन का रोना भी अपने हृदय के अंतः स्थल से की हुई प्रार्थना भी सफल होती है अर्थात यह नहीं कि सिद्धि प्राप्त हो जाएगी निर्विकल्प समाधि या ऐसा कुछ प्राप्त हो जाएगा किंतु यह जो नेगेटिव अपने जो कर्म के फल है बहुत सारे धुल जाएंगे उससे बहुत सारे वो कट जाएंगे एमन की अवसर पर एक दिनो जद निर्जन तार चिंता जद करा जाए शयो भालो मने तीन दिन जद नहीं मिला संसार त्याग तो छोड़ ही दीजिए वो कैसे संभव है हम लोग भी आश्रम का कर्म काम ड्यूटी जो दिया है उसको छोड़ कर के तो हम भी नहीं रह सकते तो चलो तीन दिन के लिए रिट्रीट में चले जाए तीन दिन भी ना हो सके ठाकुर देखिए कितने हमको कितना वो कहते है ना कि टू गिव अ लॉन्ग रोप इंग्लिश में कहावत है तो किसी को इतना सारा मौका देते रहना तो तीन दिन भी जद ना पाए तो एक दिन के लिए तो फिर भी भगवान के लिए रो तो वो भी बहुत है यदि भगवान जन तीन दिन कादा जाए शिव भलो एमन की अवसर पे एक दिन निर्जन ता चिंता जद करा जाए शव भलो मने तीन दिन ना मिले तो अवसर प्राप्त होने से मौका मिलने से एक दिन भी जद निर्जन में जाकर के उनकी चिंता जद करें तो वो भी अच्छा है अभी यहां पर एक प्रश्न होगा कि आजकल इस तरह की जगह मिलना कि जहां पर जाकर के आप निर्जन वास करें अकेले में रहे जहां पर कोई देख ना रहा हो हमको और हम ईश्वर के संपूर्ण रूप से एक तरह से अपना मन जो है बाकी सब चीजों से लेकर के ईश्वर में लगा दे इस तरह का मौका इस तरह की जगह इस तरह की अपॉर्चुनिटी कैसे मिलने वाला है ये एक बात सही है आज की जो व्यस्तता है आजकल के जीवन की यहां पर जो क्राउडिंग इतना है इवन धार्मिक स्थल प भी जाएंगे इतना भीड़ भाड़ लगा रहता है मैं जब पहली पहली बार दक्षिणेश्वर गया था जब मैंने पीपीटीसी जवाइन किया था वो कितना एक मतलब सुंदर जगह थी मैं वो जैसे ही ये लोग हम लोग गए तो इधर-उधर दिखा रहे हैं वो कोई पंचवटी दिखाया फिर बेलतला दिखाया उसके बाद में जब मुझे थोड़ा सा अकेला टाइम मिला तो मैं ठाकुर के कमरे में आकर के बैठ गया मुश्किल से दो-तीन लोग होंगे वहां पे कुछ 15-20 मिनट के लिए तो मैं पूरा अकेला बैठा था वो एक समय था और आज का एक समय है अभी आपको ठाकुर के कमरे में प्रवेश ही नहीं करने देंगे मैं लास्ट टाइम जब गया था तो एटलीस्ट वहां पे एंट्रेंस अलाव था तो मैं जा कर के बैठा दो ही मिनट बैठा हंगा कि किसी ने आक बोला चलो चलो निकलो यहां से फिर अभी दूसरे लोग आ रहे हैं अभी मतलब जहां पे भी जाएंगे इतना भीड़ भाड़ अपने धार्मिक स्थानों में यह काशी है ना कि वृंदावन है आपको कैसे एक समय मिलेगा अ कि हम अके मतलब एकांत में रहे और साधन भजन करें तो खैर यह भी देखना होगा हम सबके लिए एक है एक चैलेंज है आज के समय में यहां पे विशाखापटनम आश्रम में एक बात अच्छी है कि बहुत कम लोग यहां पर आते हैं पहले मैं बेलूरमठ में के राजकोट में था तो वहां पर दिन रात भीड़ लगी रहती थी सब सब और उत्सव भी इतने हर सप्ताह एक ना एक उत्सव यानी कि वैसे ही तो वहां पर वो इतने सारे डिवोटा आते हैं और ऊपर से उत्सव का आयोजन यहां पर ना ही इतने उत्सव है ना ही इतने डिवटी आता है तो यहां पर कंपेरटिवली इट इज वेरी पीसफुल मैं जब अपने कमरे में आकर के बैठता हूं तो फिर वह ऐसा लगता है कि जगत जैसे कि भूल गए जब तक मैं कमरे में हूं तब तक तो यह हम सबको इस तरह से कुछ ना कुछ रास्ता निकालना होगा नहीं होगा नहीं होता है इस तरह का एक्सक्यूज इट विल नॉट वर्क क्योंकि जैसे ठाकुर बाद में ही कहते हैं ना कि लोके माग छले जनो एक घटी का दे लोग अपने पत्नी और पुत्र के लिए घड़ा भर भर करके रोते हैं ईश्वर जनन के कां छ बोलो ईश्वर के लिए कौन रोता है बोलो यहां पर देखिए कि यह जो ठाकुर ने कहा है ना यहां पर सिर्फ इसको थोड़े दूसरे तरीके से भी लेना होगा बात सिर्फ यह नहीं है कि आपकी उत्कंठा इतनी है अपने परिवार जनों के प्रति कि उनके वेल बीइंग के लिए आप रोते हैं और अप ईश्वर के लिए नहीं रोते यहां प इसका दूसरा भी एक अर्थ यदि इस तरह से करें कि यह संसार में देखिए कि ये एकांत पाना वो थोड़ा सा मुश्किल है आपको थोड़ा सा मेहनत करना पड़ेगा आयोजन करना पड़ेगा प्लानिंग करना पड़ेगा हो सकता है पैसा भी खर्च करना पड़े तो इस बात का यह एक दूसरा भी अर्थ ले सकते हैं कि परिवार जनों के लिए हम इतनी मेहनत करते हैं इतना आयोजन करते हैं इतने उनके लिए पैसे व्यय करते हैं किंतु ईश्वर प्राप्ति के लिए एकांत को खोजना उसको मेंटेन करना ईयर आफ्टर ईयर कि हां मैंने ठीक करके रखा है कि तीन महीने में कि चार महीने में एक बार मैं इस एकांत जगह पर जाऊंगा वहां पर रुकूंगा ईश्वर का नाम लूंगा तो वो जो समय देना पड़ता है एक तरह से आपको प्लानिंग करना पड़ता है पैसा भी व्यय करना पड़ेगा अपने बिजनेस जॉब से भी आपको हो सकता है छुट्टी वगैरह लेना पड़ेगा और वहां पर भी आपको हो सकता है थोड़ा सा नुकसान हो किंतु यह सब करना पड़ेगा इसीलिए जो उसकी ऊपर की बात के साथ में इसको कनेक्ट करें कि हमको एकांत में ना मुश्किल है ऐसा यदि एक्सक्यूज दे तो बाद में ही ठाकुर ने पहले ही कह दिया कि क्या कहा कि प पत्नी और पुत्र के लिए मा छले जन अर्थात की परिवार जनों के लिए हम इतना रोते हैं किंतु ईश्वर के लिए कौन रोता है अर्थात की परिवार जनों के लिए इतनी मेहनत कर सकते हैं तो ईश्वर प्राप्ति के लिए जो निर्जन में जाना उसके लिए हम क्या कुछ नहीं कर सकते निर्जन थे के माझे माझे भगवान जन् करते हुए निर्जन में रहके बीच-बीच में ईश्वर के लिए साधन भजन करना होगा मैं जिस एक समय सन्यास से पहले उस समय में राजकोट में था मैं जब ब्रह्मचारी था उस समय और वहां पर स्वामी जी की 10050 एनिवर्सरी ी तो उसके उपलक्ष में वह रथ यात्रा पूरे राज्य में इन्होंने की थी पूरे गुजरात में तो मेरा उसमें रोल था कि किताबें छापना क्योंकि इन लोगों का ऐसा था कि कि सात आ करोड़ की किताबें बिक जाएगी तो अभी क्या है कि मेरा तो पब्लिकेशन में रिसेंटली ही पोस्टिंग हुआ था और इतनी सारी किताबें छापना हजारों हजारों लाखों कॉपीज कंटीन्यूअस पेपर परचेस करना है प्रूफ रीडिंग करना है किताब डिजिटल कॉपीज तैयार करनी है प्रेस में जाकर के उनके साथ में डीलिंग करना है और उस समय क्या था कि राजकोट में इतना वो एडवांस नहीं था प्रिंटिंग फील्ड कि इतना अच्छा प्रिंटर इतने कम समय में सस्ते में इतनी सारी किताब प्रिंट कर दे तो मुझे बार-बार अहमदाबाद जाना पड़ता था तो व एक जो सन्यास के पहले वाला जो मेरा साल था मेरा संन्यास हुआ 2015 में तो 2013 और 14 ये दोनों साल मेरे इतने हेक्टिक गए कि संन्यास के पहले मैंने सोचा कि दो-तीन महीने की छुट्टी ली जाए अभी यह जो राजसिक माइंड सेट है उसको लेकर के मैं सन्यास के लिए जाऊंगा बेलूरमठ तो उससे मजा नहीं आएगा माने वो मेरा मन जो जो है उस सेरिमनी में इतना ठीक से बैठेगा नहीं तो फिर मैं दो-तीन महीने की छुट्टी लेकर के ओमकारेश्वर गया था वो उस समय में बहुत अकेले अकेले बहुत घुमा था इस तरह से तो मैंने देखा अभी क्या है कि मैं इस तरह से आध्यात्मिक साधना करने के लिए मैं किसी एक जगह पर जाके वैरान में या तो साधन क्षेत्र में जाकर के रहा हूं ऐसा मेरे लिए पहली बार था मेरा टेंडेंसी इस तरह से स्पिरिट ल या रिलीजियस नहीं था मेरा ऐसा था कि गरीब लोगों की सेवा करनी है तो रांची में मैं था इसलिए कि मैं यह ट्राइबल लोगों की सेवा करो तो ट्राइबल एरिया में मैं बहुत घूमता था किंतु वहां पर मेरी नजर हमेशा यह रहती थी कि यह खेत है तो किस तरह का धान उसमें उग रहा है या तो फिर यह लाइव स्टॉक एक किसान के पास में है तो उसकी क्या कंडीशन है तो इस तरह से मेरा एक पूरा सर्विस ओरिएंटेड माइंड सेट था तो वहां पर भी बहुत घूमा उसके अलावा भी मैं बहुत घुमा किंतु हमेशा मेरा एक माइंड सेट रहता था हाउ कैन आई सर्व पुअर पीपल बेटर गरीब लोगों को कितने अच्छे से मैं सर्व कर सकता हूं किंतु यह पहली बार ऐसा हुआ कि ये अभी य मेरी ये सब इच्छाएं पूरी खत्म हो गई थी कि सेवा करनी है गरीब लोगों की ऐसा नहीं है कि वो चला गया है इट सब्स्यूम विदन अ हायर पर्पस ऑफ स्पिरिचुअल इनलाइटनमेंट तो यह गरीब लोगों की सेवा से भी एक उच्च आदर्श है आध्यात्मिक जीवन में सफलता प्राप्त कर और उसके बाद में ईश्वर ही बता देंगे कि तुमको क्या करना है संघ के शरणागत हो जाने से संघ ही बताएगा कि आपको किस जगह पर पोस्टिंग करेंगे और कहां पर आपकी टैलेंट का बेस्ट यूटिलाइजेशन होगा तो फिर ये संघ में आ गया और फिर एक आध्यात्मिक प्राप्ति के लिए एकांत में विचरण करना या तो फिर इस तरह से बाहर में घूमना यह मेरे लिए पहली बार था ओमकारेश्वर में तो मैंने डिस्कवर किया कि मेरे जो ओल्ड कुछ कुछ ये थे इंटरेस्ट कि एडन जगह है माने वो पुरानी जगह जहां पर कोई नहीं रहता खंडहर की तरह है जहां पर वो पेड़ पौधे चारों ओर निकले हुए हैं धूल मिट्टी लगी है जहां पर कोई नहीं जाता तो ये जो खंडहर है मने पुराने पुराने मंदिर जहां पर कोई वरशिप के लिए नित्य पूजा के लिए नहीं जाता इस तरह के मंदिर जो है वो ओमकारेश्वर उसके आसपास में है कहीं-कहीं पे कुछ-कुछ फेमस टेंपल है फेमस मंदिर है फेमस आश्रम है वहां पर सब समय लोग रहते हैं और कुछ-कुछ होते हैं ऐसा जंगल में थोड़ा सा जाएंगे रास्ते से निकल कर के और कहीं पे जाएंगे तो आपको इस तरह के एडन जिसको कि तेज दिया गया है ऐसे मंदिर भी मिल जाएंगे ऐसे वह जगह भी मिल जाएगी तो वहां पर बैठे रहना इतना पीसफुल लगता है मन को कि हां ऐसा लगता है कि जैसे यहां पे यदि और तीन-चार दिन बैठे रहे तो अभी हमको निर्वाण प्राप्त हो जाएगा तो इस तरह की जगहों पर में उस समय बहुत घुमा था इसके इस तरह से मैं फिर से और कभी नहीं घुमा किंतु वो एक है कि यहां पर जब ठाकुर कहते हैं कि निर्जन में जाकर के ईश्वर के लिए रोना चाहिए तो यह मैंने अनुभव किया है कि ऐसी जगह जहां पर मनुष्य का वास नहीं है जो कि एडन है जो कि खंडहर हो गया है जहां पर कोई मेंटेनेंस नहीं है पता है वहां जाकर के एक ऐसे एक मन में आता है कि देखिए ये जगत तो कर्म का बना हुआ है जहां पे भी जाए कर्म कर्म कर्म रजस रजस रजस यही आपको दिखेगा किंतु इस तरह के खंडहर में जाकर के पता चलेगा कि अरे ये मनुष्य जीवन का भी एक दिन अंत आने वाला है यह कर्म यह रजस ये एक दिन समाप्त हो जाएंगे और फिर रहेगा क्या अपने पास में या तो फिर अनंत अशांति रहेगी क्या कि हमको कभी कोई भी किसी भी तरह का ये सेटिस्फेक्शन या कंटेंटमेंट संतोष जिसको कहते हैं वो नहीं मिला कर्म से तो हमेशा के लिए बुढ़ापे में या मृत्यु के समय एक तरह का रिग्रेट रह जाएगा अरे मुझे यह मिल प्राप्त करना था मैं नहीं कर पाया मेरा यह गोल था ये नहीं अचीव हुआ यह प्रमोशन चाहिए था यह पर्क चाहिए था यह नहीं मिले तो ये एक रिग्रेट ही हमारे हाथ में आखिरी समय में रह जाएगा और यदि आपने ईश्वर के ऊपर में भरोसा करके ईश्वर साधना की है तो आखिरी समय में देखिए जब यह मृत्यु का समय वापस आता है तब अपने मन में बिल्कुल शांति हो तो यह जब एडन खंडहर वगैरह देखते हैं ना तो वो देख कर के आपको यह कर्म का अंत या तो रजस का अंत इस तरह से आपको एक उद्दीपन होता है ठाकुर कहते है ना कि मैं यह दो तीन लड़कों को शुद्ध मती जो लड़के हैं अपने पास में रखे रहता हूं स्वभाव आरोपण जन् अर्थात कि ये जो शुद्ध लड़का है अभी लड़का जब होता है छोटा उसके मन में तो काम कांचन जैसे विकार नहीं होते हैं तो परमहंस जैसी उसकी अवस्था बचपन में होती ही है तो इस तरह का स्वभाव जिसका है वो पास में रहेगा तो उसका स्वभाव अपने पर आरोपण करके हम उस तरह की साधना कर सकते हैं कि हां मैं भी इस बच्चे की तरह नादान हूं निर्दोष हूं ठाकुर के बचपन का एक मित्र श्री हरि ऐसा ही कुछ नाम था वो ठाकुर को मिलने के लिए आया कामर कुकुर से दक्षिणेश्वर ठाकुर को देख के कहता है अरे तुमको बचपन में जैसा देखा था तुम अभी आज भी वैसे ही हो क्यों क्योंकि बचपन में भी वो नादान थे इनोसेंट थे वो ईश्वर पे अपनी मां पे भरोसा करने वाले थे बड़े होकर के भी ऐसे ही नादान इनोसेंट है मां के ऊपर में भरोसा करने वाले हैं चेहरे का जो हावभाव है एक्सप्रेशन है अभी भी परमहंस भी बच्चे जैसा है जबकि ठाकुर कहते हैं इस मित्र के बारे में कि मैं उसका चेहरा भी नहीं देख पाया जब छोटे थे तो कितना हंसी मजाक करते थे कितनी मित्रता करते थे कितना खेल करते थे साथ में किंतु बड़ा होने के बाद में ये संसार के चक्र में पिस करके उसके चेहरे की जो अवस्था हुई है मैं उसके चेहरे के सामने देख भी नहीं पाया तो देखिए कि ये कर्म के चक्र में फस करके हमारी यह अवस्था हो जाए उससे पहले बेटर है कि ऐसी सब जगहों पर जाकर के भाव आरोपण के लिए जैसे ठाकुर इस तरह से शुद्ध मती बच्चों को रख देते थे हम भी इस तरह की खंडहर है या अबोन टेंपल है जहां पर निर् जनता है जहां पर कोई नहीं जाता वहां पर जाकर के यह कर्म शय या कर्म के अंतर रूपी जो भाव है अपने पर आरोपण करें कि हां इस मंदिर में भी एक समय था बहुत चहल पहल रही होगी नहीं होती तो मंदिर बनता ही नहीं धार्मिक क्षेत्र होगा लोग आते होंगे तभी तो मंदिर बना है किंतु आज देखिए कि सब जैसे कि शांत हो गया है तो यह जगह की तरह ही अभी मेरे मन में भी सब कर्म जो है शांत हो गए हैं मेरा रजस जो है पूरा वर्कआउट हो गया है अभी मेरे मन में अनंत शांति शैली है ये जो भाव आरोपण हमको अपने पर करना है भाव आरोपण करके हम देखेंगे कि हमको इमीडिएट अभी जैसे कहा ना यदि सिद्धि प्राप्त हो जाती है तो यह शांति से बाय डिफॉल्ट हो जाएगी फिर आपको शांति को खोजने के लिए शरणागति को खोजने के लिए मारे मारे घूमना नहीं पड़ेगा किंतु जब तक सिद्धि नहीं प्राप्त होती है तब तक हमको यह सब भाव आरोपण करने पड़ेंगे हमको परमहंस के गुण जो है उसको मिमिक करने पड़ेंगे अपने जीवन में कॉन्शियसली उसको हमको प्रैक्टिस करना पड़ेगा विवेक वैराग्य या तो फिर यह त्याग या तो फिर यह विल पावर या तो फिर ये अनंत शांति या फिर यह अनंत करुणा इन सबको हमको कॉन्शियसली कल्ट वेट करने पड़ेंगे एक इस तरह से है जैसे कि ये अभी इजराइल में देखेंगे कि मरुभूमि है किंतु फिर भी वे लोग कितनी मेहनत करके वहां पर विभिन्न तरह के धन धान्य और यह विभिन्न तरह के क्रॉप्स से वो लेते हैं होट कल्चर वगैरह बहुत अच्छा होता है मरुभूमि में भी वे लोग करते हैं टेक्नोलॉजी की मदद से किंतु यह जो अपना गंगा का पट है बिहार है यूपी है या तो फिर यह वेस्ट बंगाल है वो धरती सोना उगलती है वहां पे आप बीज जमीन में डाल दीजिए वैसे ही कुछ दिनों में वह धन धान्य से परिपूर्ण हो जाएंगे आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं क्योंकि वो गंजे िक वैली है वो जो प्लेन इतना फर्टाइल है तो अभी यहां पे भी सिद्धि प्राप्त करने के बाद में वो ऑटोमेटिक धान जो है सोने की फस निकलनी शुरू हो जाएगी किंतु जब तक हम सिद्ध नहीं है तब तक हमको यह मरुभूमि में कल्ट वेशन करने की तरह ही बड़ी ही मेहनत करके यह सब गुणों को कल्ट वेट करना होगा संसार भीतर कर्मे मध्य थे के प्रथमा वस्था मन स्थिर करते अनेक व्याघात होए संसार में रहके कर्म में रह कर के शुरू शुरू में जब मन को स्थिर करने का प्रयास करेंगे बहुत सारी बाधाओं का सामना करना पड़ेगा बहुत सारे गगनों का सामना करना पड़ेगा फुटपाथ गाज जखन चारा थाके बेड़ा ना दिले छागल गरु ते खे फेले ये फुटपाथ के ऊपर में स्वामी जीी ठाकुर जो है इंग्लिश शब्द यूज करते हैं फुटपाथ मैं जब राजकोट में था ज्योत का ज्योत में आर्टिकल लिख रहा था उस दिन में एक बार आर्टिकल लिखा था ठाकुर के द्वारा व्यवहारिक किए गए अंग्रेजी शब्द तो वो जितने भी प्रसंग है कथामृत में जहां पर ठाकुर ये इंग्लिश वर्ड यूज करते हैं वो सभी प्रसंगों का कंपाइलेशन किया था अभी था ऐसा कि मैं दो-तीन हफ्ता चलाया किंतु इसके बाद में भी मतलब दो-तीन ज्योत के इशू में इस तरह से आर्टिकल दिए किंतु मैंने देखा कि इस तरह के इतने सारे इंसिडेंट है कथामृत में इंग्लिश वर्ड खोजने को जाएंगे तो फिर यह पूरा आठ 10 वो इशू में भी खत्म नहीं होगा तो इसके बाद में दो-तीन इशू में दे कर के फिर मैंने छोड़ दिया था तो उने सरप्राइजिंगली कि फॉर अनपढ अपने को कहलाते हैं ठाकुर किंतु यह जो वेस्टर्न एजुकेशन का प इंस्टॉल किया था ना उन्होंने तो इतने इतने सारे इंग्लिश शब्द है कथामृत में कि आप यदि उसको कॉन्शियसली सर्च करने का प्रयास करेंगे यू विल बी सरप्राइज तो यहां पर भी फुटपाथ के ऊपर में एक पौधा उगता है छोटा सा किंतु जब वह छोटा होता है उसको आप बैरियर नहीं देंगे तो यह गाय है ना कि बेल है ना कि बकरी है वह खा जाएगी उसमें मुंह मारेगी वह नष्ट हो जाएगा प्रथमा बस्ता है बेड़ा गुण होले आर बेड़ा दरकार था केना पहला जब छोटा होता है तब उसके आसपास में बैरियर बना देना पड़ता है फिर जब पौधा बड़ा हो जाएगा फिर यह प्रोटेक्शन की आवश्यकता नहीं रहेगी गुणित हाथी ब किछ हो ना बड़ा हो जाने से पौदा उसके आपको चैन से शिकल से यदि हाथी को भी बांध दे तो भी कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला रोटी हो बकार रोग है विकार अबार जी घोरे विकार रोगी से रे लेर जाला और आचार तेतुल एक तो है रोग विकार फिर विकार का रोगी जिस घर में रह रहा है उसी घर में ये आचार वगैरह रखा हुआ है विकार का रोग कौन सा है मुझे पता नहीं किंतु एविडेंस उसमें ये आचार वगैरह नहीं खा सकते अर्थात ऐसा हो गया यदि थोड़ा मॉडर्न लैंग्वेज में कहे तो डायबिटीज हो गया है फिर कमरे के भीतर में चारों ओर बड़ी ही उत्कृष्ट मिठाइयां सजा करके रखी हुई है तो अभी ये मिठाइयां खाने के लिए प्रलोभन भी हो रहा है ऊपर से यह रोग भी है तो ऐसा करना तो उचित नहीं है यदि डायबिटीज है तो मिठाई वगैरह सब दूर कर देनी चाहिए जिससे कि बिना मतलब का प्रलोभन अपने मन में ना आए अच्छा ये कमरे में मिठाई रखने से एक प्रसंग याद आता है ठाकुर को उस समय बड़ी ही सुधार अभी ये जो विभिन्न समय के जो स्टेजेस होते हैं ना ठाकुर की साधना के सभी स्टेजेस में विभिन्न विभिन्न गुण जो है या उसके सिम्मम जो है वो प्रकट होते है तो एक ऐसा सिम्मम उनके शरीर में प्रकट हुआ विपरीत शुद्ध उसको कहते हैं अर्थात कि इस तरह की भूख कि आप खाते ही जाइए खाते ही जाइए आपको कभी भी संतोष नहीं होगा ऐसा लगेगा कि मैं हमेशा भूखा हूं तो ये अभी देखिए ठाकुर का खाने की क्षमता तो कैसी थी हमने वो मां की कहानी में देखा वो एक कटोरी दूध को जला के आधा कटोरी भी मां करके देगी तो उसी में उनको अजीर्ण हो जाता था इनडाइजेशन हो जाता था तो अभी ये आंख बंद करके खाते ही जाएंगे ठाकुर तो अभी उनके पेट का क्या होगा तो उस समय तो मां नहीं थी किंतु ये मथुर बाबू ये हृदय वगैरह थे और वे लोग बड़े चिंता में पड़ गए कि अरे ठाकुर इतना खा ही रहे हैं खा ही रहे हैं उनको तो सामान्य अवस्था में थोड़ा सा ज्यादा खाने से प्रॉब्लम होता है तो अभी इसके साथ क्या होगा बाद में तो उस समय भैरवी ब्राह्मणी आई हुई थी और भैरवी ब्राह्मणी ने कहा कि देखिए शास्त्र में इसका विधान है इसको कहते हैं विपरीत शुदा और इसका जो विधान है एक कमरे में खाने की जितनी भी सुंदर चीजें हैं मिठाई है संदेश है वगैरह सब सजा करके रख दो और फिर उस कमरे में ठाकुर को रहने को कहो तो ठाकुर उस कमरे में गए सब चीजें पड़ी हुई है तो अभी क्या है वो देख रहे हैं तो हां ये बड़ी सुंदर मिठाई है ये जलेबी है ये है वो है तो क्या खाए क्या ना खाए क्या करें क्या ना करे वो कसम कस में थोड़ा सा ठाकुर इस मिठाई को उठा के देखते हैं फिर उस मिठाई को उठा के देखते हैं इसको देखते हैं उसको देखते हैं इसको स्पर्श करते हैं तो इस तरह से दो तीन दिन वहां पर रहे और विपरीत शुधा का अंत आ गया क्यों ऐसा नहीं है कि उन्होंने सब कुछ खा लिया किंतु पता नहीं अभी मन के भीतर में ऐसा हो गया होगा कि खाना नहीं मिला तो क्या है व्हाट एवर अभी इसका तो एनालिसिस ना ही किसी किताब में है ना ही ठाकुर ने हमको कहा है वो भैरवी ब्राह्मणी है नहीं कि अभी जिसको हम पूछ सके तो मैं अपना एनालिसिस करके कहता हूं कि ऐसा हो सकता है कि मन के भीतर में एक ऐसा हो गया हो कि जितना खाना आए नजर के सामने सब खा ले किंतु जब इतना सब खाना नजर के सामने आ गया तो किसको ले किसको ना ले उस असमंजस में पढ़ कर के हो सकता है इस शुधा का निवारण हो गया होगा किंतु देखिए कि यह उदाहरण अभी इस परिप्रेक्ष्य में वो लेना नहीं है ज ठाकुर कहते हैं कि विकार का रोग है और आचार तेतुल जिस कमरे में रखे हैं उसको रखना इस रोगी को इसके बराबर है कि आप कर्म के मध्य में रह रहे हैं संसार में और आप ईश्वर प्राप्ति करना चाहते हैं नहीं होगा संसार के बाहर जाइए तो ये दोनों उदाहरण वेरी अपोजिट ऑफ इच अदर एक्चुअली वो विपरीत अ शुदा होने से आपको आहार के आहार्य पदार्थ है उसके साथ में रहना है किंतु जो नॉर्मल अ शुदा होती है तब आहार का त्याग करना है यह भी ना एक कैसा एक पैराडॉक्स है य सोच के देखिए मुझे सामान्य भूख लगती है तो फिर मुझे जो मन के प्रिय आहार है उसको त्याग करना है किंतु प्रचंड भूख लगती है विपरीत शुधा उदय होती है तो आहार के जितने भी सुंदर सुंदर अच्छी-अच्छी मिठाइयां है सब सामने रख दो देख कर के ही हो सकता है कि ये प्रचंड जो है मेरी मिट जाए ये किस तरह का लॉजिक है इसके पीछे पता नहीं किंतु है इस तरह से ये भैरवी ब्राह्मणी के जो सब कुछ कुछ विधान थे ना ठाकुर के बारे में ठाकुर को गात दह होता था अर्थात कि साधन भजन करके शरीर में इतनी गर्मी प्रकट होती थी कि जिस पेड़ के नीचे में पंचवटी में जिस पेड़ के नीचे में बैठ के साधन भजन करते थे उस पेड़ के पत्ते झुलस गए थे गर्मी के मारे ठाकुर के शरीर में इतनी गर्मी पैदा होती थी तो अभी ये गर्मी का क्या उपाय है गात दह का क्या एक सोल्यूशन है ऐसा हो जाता था ठाकुर कहते हैं कि गंगा के पानी में मैं बैठा रहता था अपने सर के ऊपर में भिजा गमछा रख कर के एक गीला गमछा रख कर के तो अभी फिर ये टेंशन है कि पानी में बैठे रहेंगे तो बुखार हो जाएगा तो फिर क्या करते थे कुछ क्षण पानी में बैठ कर के फिर इच्छा नहीं होने पर भी पानी में से बाहर गंगा में से बाहर आएंगे और फिर ये जो मथुर बाबू का जो वहां पर कुठी है ना वो बड़ा सा मकान इन लोगों का तो वहां पर वही मार्बल की यह थी फर्श थी मार्बल की थी अभी मार्बल ठंडा होता है तो कमरे वगैरह दरवाजा बंद करके मार्बल के ऊपर में भिजा ये गमछा स्प्रेड करेंगे फिर उसके ऊपर में पूरे आलोट रहेंगे पूरे उसके ऊपर में लेट जाएंगे तो इस तरह से उनका चलता था अभी उस समय भैरवी ब्राह्मणी आई उसने देखा कि शास्त्र में इसका विधान है कि ठाकुर को एक सुंदर पुष्पों की माला पहनाई जाए और फिर यह न का लेप किया जाए तो ये मथुर बाबू वगैरा ये उपाय सुन कर के बड़ा हंसना शुरू कर दिए कहे कि हमने उत्तम कविराज को बुलाया है उत्तम से उत्तम औषध ठाकुर के लिए हमने लाए हैं मध्यम नारायण तेल वगैरह कितना ठाकुर को लेपन किया है उनके श्री अंग के ऊपर में फिर भी ठाकुर का त्र दाह जो है देह का यह जो जलना यह मिट नहीं रहा है उसका उपशम नहीं हो रहा है तो आप क्या कहती है कि चंदन से वो लगाने से उनके देह के ऊपर में मिट जाएगा तो भैरवी कहती है हां शास्त्र में तो ऐसा विधान है तो फिर उन्होंने सोचा कि जब इतना खर्च कर ही रहे हैं वैद्य कविराज की दवाओं के पीछे में यह मध्यम नारायण तेल वगैरह के पीछे में तो जबी भैरवी ब्राह्मणी कहती है वो तो बिना किसी खर्च का उपाय है चंदन तो काली मंदिर में बिल्कुल मिलता है पुष्प उद्यान तो पूरे भरे हुए हैं दक्षिणेश्वर में तो उन्होंने सुंदर पुष्पों की माला बनाई और ठाकुर को माला पहनाई पूरे देह के ऊपर में चंदन गिसा ऐसा तीन दिन रखा इस तरह से ठाकुर को तीन दिन ऐसा किया चौथे दिन से कत्र दह संपूर्ण रूप से अदृश्य हो गया तो ये सब भैरवी ब्राह्मणी के सब उपाय थे तो यहां पर ठाकुर किंतु एक दूसरे कांटेक्ट में कहते हैं यह बात कि जिसको विकार का रोग है उस रोगी को ऐसे कमरे में रखना कि जहां पर ऐसी चीजें पड़ी हो जिससे कि विकार का रोग और भी बिगड़ सकता है तो उससे तो कोई काम हो होने वाला नहीं है जदी विकारे रोगी आराम करते जाओ घर थके ठाई नाड़ा करते होवे जद विकार का रोगी अपने को ठीक करना चाहता है तो जिस घर में यह आचार तेतुल वगैरह है उस घर में से उसको निकल जाना पड़ेगा संसारी जीव विकारे रोगी ये हम संसारी जीव है हम लोग है विकार के रोगी और विषय है लेर जाला और यह जो सांसारिक जितने भी विषय है वो है जो विकार को बढ़ा देते हैं ऐसी सब भयानक विष विषय भोग तृष्णा जल तृष्णा यह विषय की भोग की तृष्णा है जैसे कि जल तृष्णा है विकार के रोग में जल है पानी है नहीं पीना है ऐसा कुछ होगा इसलिए यहां प ऐसा कहते होंगे आचार तेतुल मने करले मुखे जोल शरे काछ आंते ई ना रूप जिनीश घरे रहे छ जोश और ये आचार और तेतुल जिस को याद करके ही मुंह में पानी आ जाएगा डायबिटीज का उदाहरण दे तो जिस घर में वो फ्रिज है फ्रिज के भीतर में दुनिया भर की मिठाई पड़ी हुई है अभी यह उत्सव गया है तो मिठाई से भरा हुआ है अब जितनी भी बार फ्रिज के सामने देखेंगे मन में वो मिठाई याद आएगी वो रसगुल्ला है ना कि गुलाब जाबु है जो भी है तो फिर ये मिठाई जैसे ही मन में याद आएगी मुंह में से पानी निकलने लगेगा अभी इस तरह से आकर्षण प्रचंड खड़ा हो मन में और कितना देर तक आप मिठाई नहीं खाए हुए र सकते हैं वो तो आप कल्पना करके देखिए और फिर ठाकुर कहते हैं रूप जिनिश घरे रहे जोतो अर्थात की यह जो कामना और वासना यह जो है इसका भी इस अपनी पत्नी के साथ में या पति के साथ में रह रहे हैं और फिर वह काम प्रवृत्ति में वह संलग्न ना हो वह तो बड़ा ही मुश्किल है इसीलिए ठाकुर कहते हैं यो शित संग ताई निर्जन चिकित्सा दरकार इसीलिए बीच-बीच में निर्जन में जाकर के चिकि करनी चाहिए विवेक वैराग्य लाभ करे संसार करते हुए विवेक और वैराग्य को प्राप्त करके ही संसार करना पड़ेगा संसार समुद्रे काम क्रोधा आदि कुमर आछ संसार समुद्र है उसमें काम और क्रोध रूपी मगरमच्छ है हलद गाय मेखे जोले नामले कुमरे भय थाके ना किंतु आप हल्दी है अपने शरीर पर लगा दे और फिर जल में जाए पानी में जाए तो हो सकता है कि यह मगरमच्छ आपको मारने के लिए ना आए अभी यह हल्दी का कौन सा गुण है कि जिससे मगरमच्छ दूर रहते हैं वह तो मुझे पता नहीं किंतु ठाकुर को तो यह सब गांव की यह सब बातें पता थी तो इसलिए ठाकुर यह सब उदाहरण देते हैं विवेक वैराग्य हलू विवेक और वैराग्य है वह हल्दी जिसको लगाने से यह काम क्रोध रूपी मगरमच्छ पास में नहीं आएगा संसार करने के बावजूद सद सत विचारे नाम विवेक क्या सत है क्या असत क्या धर्म है क्या अधर्म है क्या पाप है क्या पुण्य है वह हमको बताए वो हमको ठीक कराए उसका नाम है विवेक ईश्वर सत नित्य वस्तु आर शब असत अनित्य दु दिनर जनन जद विवेक जागृत होगा तो हमको समझ में आएगा कि ईश्वर ही सत है वही नित्य है बाकी सब असत वही दो तीन दिन के लिए 8 बोध अभी ये दो तीन दिन के लिए वो जो शिव और पार्वती वहां पर वो बैठे हुए थे कैलाश पे एकाएक जोर से आवाज हुआ भूम करके तो वो पार्वती ने शिव को पूछा कि यह क्या हुआ तो भगवान शिव ने कहा यह रावण का जन्म हुआ तो अच्छा रावण का जन्म महारास है जगत में पता नहीं कितने अत्याचार होंगे क्या होंगे क्या सब भगवान राम को विष्णु को राम के रूप में आना पड़ा और उसका वध करने के लिए पूरा रामायण लिखा गया कितना बड़ा एक पूरा युग सतयुग पूरा भारत में वो सत तो नहीं किंतु ये त्रेता युग भारत में पूरा त्रेता युग ही जैसे कि राम और रावण के आसपास में बना है किंतु यहां पर देखिए ठाकुर कहानी कहते हैं पहले जोर से आवाज हुई पूछा कि क्या हुआ रावण का जन्म हुआ फिर से जोर से धमाका हुआ तो अभी पूछा अभी क्या हुआ रावण का मृत्यु हो गया तो यही है ये जीवन अभी रावण का जन्म होगा अभी रावण का वध होगा तो अभी ये क्षण भंगूर य जीवन है महा राक्षस या तो इवन भगवान अभी शिव भगवान शिव यह भी कह सकते थे कि हां यह भगवान राम का जन्म हुआ और हां अभी उन्होंने वो जल आ ग्रहण की ऐसा भी तो कह सकते हैं माने अवतार का भी आना और अवतार का भी जाना यह सब भी तो क्षण भर के लिए ही तो है अब पलक झपक के ही जिसको आप कॉस्मिक टाइम कहते हैं ब्रह्मा का एक दिन कितने कोटि कोटि सालों का है उसमें ठाकुर का जीवन 50 साल का अभी 50 कोटि साल के सामने 50 साल क्या है पलक झक पलक झपकाए उसी में ठाकुर आए ठाकुर गए तो देखिए कि इवन जो हमको ऐसा लगता है कि जिसकी बहुत बड़ी सत्ता है जिसका बहुत बड़ा आधार है वह भी क्षण भंगुर है ईश्वर ही एक सत्य है आत्मन ही नित्य है तो यह जो हमको बोध करा यह जो हमको समझाए वह है विवेक तार ऊपर टान ईश्वर के ऊपर में आकर्षण भालो भाषा अर्थात की प्रेम ईश्वर के ऊपर में आकर्षण हो ईश्वर के ऊपर में प्रेम हो गोपी देर कृष्णर ऊपर ज रूप टान छलो एकटा गान सोन जिस तरह से गोपियों का कृष्ण के पर में आकर्षण था उसके बाद में ठाकुर एक पूरा गाना गाते हैं जिसको कि अभी हम कल देखते हैं आज जी ओम शांति शांति शांति हरि ओम सत श्री राम कृष्ण

शुद्धा-भक्ति चाहने से बाकि सब ठीक हो जाएगा. हमको महेनत करके पाप से दूर रहने की जरुरत नहीं रहेगी।

पर यह जो आप जो कह रहे हैं ना वो उस लॉजिक जैसा है कि चलो सूरज की ओर जाते हैं तो पृथ्वी से ऑटोमेटिक दूर हो जाएंगे यह उदाहरण ठाकुर ने दिया है किंतु ठाकुर यह जो उदाहरण दे ना कि छोटा पौधा होने से आपको वो बैरियर लगाना है यहां पर दोनों चीजें है एक तो जो अनकहा जो है कि पौधा बड़ा होने वाला है राइट यानी कि हम भक्ति मार्ग में आगे बढ़ने वाले हैं किंतु सामने बैरियर भी है यानी अलर्ट भी है अधर्म के सामने तो जब शुरुआत करते हैं उस समय अभी जैसे ये ठाकुर को क्यों बोलना पड़ा कि साधु सावधान इतने सारे भक्तिमार्ग पाल उनको इतना भाव होता था तो किंतु फिर भी ठाकुर को उनको को कहना पड़ा कि भाई एक जगह पर तो तुमको बड़ा सावधान रहना होगा तो पॉजिटिव डायरेक्शन में जा रहे हैं जा रहे हैं और नेगेटिव क्या है ना पता हो गलती से पैर पड़ गया तो क्या सो वी हैव टू बी अलर्ट एट दैट टाइम बाद में जब शरणागति हो जाए फिर गलती से भी गलती नहीं होगी दैट इज अनदर मैटर इन द बिगिनिंग वी हैव टू बी अलर्ट हां एडवांस साधक की कह सकते

शुद्धा-भक्ति चाहना बड़े एडवांस साधको के लिए है क्या?

हैं हां अभी जैसे ये ठाकुर की महासमाधि के बाद में ये रामचंद्र दत्त वगैरह कहते कि हमने तो पाप पुण्य सूची असू च ठाकुर को दे दी कल्पतरु दीन को ठाकुर ने हमको स्पर्श कर दिया अभी आगे क्या है जबकि ये नरेंद था कहता था नहीं साधन भजन करना पड़ेगा सो यू आर राइट इन दैट वे कि वो थोड़ी सी एडवांस है किंतु क्या है देखिए अगेन ठाकुर कहते हैं ना स्वभाव आरोपण जन् स्वभाव को आरोपण करने के लिए वो एक बच्चे को पास में रखते हैं तो यहां पर भी हम यह सब गुण जो है ना पूर्ण भक्ति के शुद्ध भक्ति के संपूर्ण शरणागति के उसको हम अपने में आरोपित कर सकते हैं ट इज नथिंग रंग विद ट किंतु वही है कि अलर्ट तो हमको रहना ही पड़ेगा हमेशा के लिए एस लोंग एस वी आर साधक ना इसमें अभी जैसे देखिए मैंने अपने

जैसे स्वामी विवेकानन्द कहते है, गरीबो की सेवा करके भी ईश्वर प्राप्त होंगे। अलग से साधना करने की जरुरत नहीं है.

लाइफ में इसको किस तरह से रिकन साइल किया मैंने खुद तो घर छोड़ा था इसलिए क्योंकि मैं गरीब लोगों की सेवा कर पाऊ ट वास द वन रीजन आध्यात्मिक में ऐसा कभी नहीं था सत विचार थे एथिक्स मोरालिटी है किंतु धार्मिक होना ईश्वर को ईश्वर पर विश्वास होना कट टूगेदर डिफरेंट थिंग तो एथिक्स है मोरालिटी है सेवा करनी है यह था मेरा बिगिनिंग अभी धीरे-धीरे करके मैंने देखा मतलब उसी सेवा कार्य में ही कि देर आर सो मेनी शॉर्ट कमिंग्स ऑफ माय ओन सेल्फ मेरे खुद के मने जो यह है कि लिमिटेशन से इसकी वजह से मैं जितनी सेवा करना चाहता हूं वो नहीं कर पा रहा हूं जिस लेवल पर जाकर के सेवा करना चाहता हूं वो नहीं कर पा रहा हूं और ट्राइबल एरिया रांची का आप देखेंगे कितने सारे गांव के सकड़ सैकड़ों गांव है जहां पर कि इंटरवेंशन चाहिए पॉजिटिव इंटरवेंशन और मेरा आउटरीच था हम लोगों ने 75 विलेजेस अडॉप्ट किए थे उसके अलावा 400 गांव में अपना सर्व शिक्षा का कार्य चल रहा था तो एट द मोस्ट 400 गांव में मेरा आउटरीच था जहां पर अपने वॉलंटिली पॉपुलेशन है 150 करोड़ ये 400 गांव की पॉपुलेशन होगी मुश्किल से 34 लाख तो मेरी एक एंबिशन बड़ी स्ट्रांग थी कि यह 400 गांव तक मुझे अपने को नहीं रखना पूरा देश पूरा विश्व इसमें आना चाहिए तो हाउ टू इंक्रीस दिस आउटरीच हाउ टू इंक्रीज माय कैपेसिटी टू गिव सो ट इन अ वे टूक मी टू स्पिरिचुअलिटी क्योंकि भीतर में से अभी देखिए कि उस समय में गांव में जाकर के इस तरह से उन लोगों को उच्च किस्म के यह जो पशुपालन है वह दिखाता था टुडे मैं ठाकुर म स्वामी जी को उनके जीवन और उपदेश के बारे में बताता हूं आई थिंक दिस इ सॉर्ट ऑफ एन अपग्रेडेशन क्योंकि स्वामी जी खुद कहते हैं ना कि शिक्षा मतलब जो दान है उसके वो लेवल्स है पहले तो है अन्नदान है फिर यह है आपका स्वास्थ्य दान है उसके बाद में विद्यादान है फिर ज्ञान दान है सो टू गिव समथिंग इन रिम ऑफ स्पिरिचुअल स्पिरिचुअलिटी इ इवन ग्रेटर सर्विस हालाकि सी इट इज नॉट दैट आई एम सेटिस्फाइड विथ व्हाट आई एम डूइंग टुडे बट थिंग इज दैट आई हैव ऑलवेज हैव टू रिकन साइल विद माय लिमिटेशंस कि मैं कितना दे सकता दूसरा लिमिटेशन ऑर्गेनाइजेशन मेरे पर रखता है आज मैं चाहूं भी कि गांव गांव घर घर जाकर के ठाकुर मां स्वामी जी का मैसेज पहुंचाओ तो यह आश्रम के बाहर जाने का तो परमिशन नहीं है मेरे पास में ल दिस आई हैव टू रिकन साइल एंड देन इट्स नॉट ट आई एम सेटिस्फाइड विथ व्ट आई एम डूइंग बट ऐसा भी नहीं है कि आध्यात्मिक जीवन मैंने इसलिए किया क्योंकि मुझे भीतर में से कुछ चाहिए था ऑलवेज माय थॉट वास आई वांट टू गिव समथिंग टू बी सेल्फलेस दैट वाज माय ऑलवेज फर्स्ट इंटेंशन बट इवन दिस इंटेंशन टूक मी टू स्पिरिचुअलिटी जो मेरी पर्सनल एक क्वेस्ट होती और वो ठाकुर महा स्वामी जी के पास ले आती इट वाज अ सेपरेट स्टोरी ऑल टूगेदर दिस क्वेस्ट टू गिव ट ब्रिंग मी टू ठाकुर महा स्वामी जी सो नाउ यू कैन मेक व्हाट एवर यू वांट ऑफ दिस किंतु देखिए आप जो कहते हैं ना वो

मैंने कई NGO वालों को देखा है जो अहंकार और घमंड से भरे हुए हैं। सेवा से हृदय परिवर्तन भी तो होना चाहिए।

पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन के बारे में फिलहाल यदि उसको हम छोड़ दे वी थिंक पोरली ऑफ सर्विस इट सेल्फ कि आउटरीच अपना कितना ज्यादा है अभी जैसे देखिए कि यह सलमान खान बोलकर के एक अमेरिकन एंटरप्रेन्योर है उसका नाम सुना होगा खान एकेडमी तो उसने बड़ा ही सुंदर वीडियो सीरीज वीडियो लेक्चर का सीरीज उसने बनाया है उसका जो पूरा जो सॉफ्टवेयर है इट्स अ वेरी पावरफुल सॉफ्टवेयर वो जब शुरू कर किया था उसने तो बिल्कुल शुरू शुरू में उसको पता नहीं था कि इतना बड़ा हो जाएगा फिर वन डे सडन एक किसी ने उसको कॉल किया तो उसने कहा कि मैं बिल गेट्स का सेक्रेटरी बोल रहा हूं वो आपसे मिलना चाहते हैं अभी बिल गेट्स एट दैट टाइम वाज द रिचेस्ट पर्सन मोस्ट पॉपुलर पर्सन इन टेक इंडस्ट्री तो सलमान खान बड़ा ही आश्चर्य है बिल गेट्स मुझे मिलना चाहता है फिर उसके साथ मुलाकात हुआ बिल गेट्स ने कहा कि आई एम वेरी इंप्रेस्ड बाय द सिस्टम दैट यू हैव डेवलप और फिर मिलियंस ऑफ डॉलर्स उसमें इन्वेस्ट किए तो यह है अभी सलमान खान का पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन क्या है वी डू नॉट नो बट द आउटरीच दैट ही हैज क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर लीजिए या तो फिर ये एआई चैट बोट को देख लीजिए सेम ओल्डमैन या तो फिर यह व जितने भी लोग है एआई टेक एंटरप्रेन्योर उनका कैरेक्टर क्या है वी डू नॉट नो बट द ईज ऑफ इंफॉर्मेशन फ्लो उन्होंने जो क्रिएट किया है भारत के गांव-गांव में लोग मोबाइल लेकर के बैठ करके अभी वह किसी मिडल मैन प ये करने का जरूरत नहीं है कि प्रोड्यूस का क्या रेट है व सीधा ग पर सर्च करके ना एप के माध्यम से वे लोग डायरेक्ट सेल कर सकते हैं सो पोरली फ्रॉम द स्पीकिंग ऑफ द ब्रिंगिंग ईज टू पीपल ब्रिंगिंग पीस टू पीपल थट इट सेल्फ वो मुझे ऐसा लगा कि मैं जिस तरह से कर रहा था देयर आर सम लिमिटेशंस अभी ऐसा नहीं कि आज वो लिमिटेशन दूर हो गया है किंतु मेरी जो अंडरस्टैंडिंग है पूरे मामले में भारत का प्रॉब्लम क्या है आप आदर्श के बारे में हजार बात करते रहेंगे ठाकुर आए और गए भारत में करोड़ों लोग वैसे ही रहे भूखे के भूखे नंगे के नंगे ब्रिटिश लोगों ने जब भी लात मारी हम लोगों ने लात खा ली तो ये जीवन का क्या इस आध्यात्मिक का क्या अर्थ है एक और आपको ईश्वर दर्शन हो रहे है यहां पर करोड़ों भाई बहन लोग भूखे नंगे पड़े हैं तो एज ए सिविलाइजेशन स्वामी जी खुद कहते हैं कि एक परमहंस को पैदा करने के लिए करोड़ों लोगों को भूखा रहना पड़ा नंगा रहना पड़ा किस तरह की अध्यात्मिकता है ये स्वामी जी खुद यह बात कहते हैं तो पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन इज वन टॉपिक बट हाउ फार कैन यू ब्रिंग दिस जस्टिस दिस पीस दिस इकोनॉमिकल अपॉर्चुनिटी दिस क्वालिटी ऑफ दिस कोप एंड एंटरप्रेन्योरशिप अभी आपके पास में आईडिया है तो आपको आईडिया को फुल ये करने के लिए अप्लाई करने के लिए यू नीड कैपिटल सिलिकन सिलिकॉन वैली में जाइए आपको दुनिया भर का कैपिटल मिल जाएगा इंडिया में लाखों लोग टैलेंटेड है उनको कोई भी किसी भी तरह का स्कोप नहीं है आइडियाज को इंप्लीमेंट करने का यह सुंदर पीछ मैं बहुत बार कहता हूं ये सुंदर पिचाई यदि इंडिया में होता वो बजज स्कूटर लेकर घूमता रहता वहां पे वो का सीईओ है टू ज द लाइफ ऑफ पीपल ट इट सेल्फ इ टॉपिक वी नीड टू थिंक वेरी डीप ऐसा नहीं है कि मुझे सोल्यूशन मिला है बट यह जो दिस वेर द थॉट्स इन माय माइंड मैं जब राची में था उस समय पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन इ देर देर इ नो डाउट अबाउट इट यह हिंदू इजम वेदांत पूरा पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन के ऊपर में ही बना है बट यह जो एक्सटर्नल ट्रांसफॉर्मेशन है ट इट सेल्फ इ मैटर ऑफ ग्रेव कंसर्न फॉर अवर सिविलाइजेशन येय जो आइडियल क्या होगा पता है बुद्धा इ सीईओ ऑफ ओपन एआई ट आडिया आप अभी आई एम नॉट सेइंग ट ओपन एई ल गुड एंड एवरीथिंग बट ज टू यूज टेक टू ज पीपल लाइफ अभी मेडिकल साइंस है ननो टेक्नोलॉजी है क्वांटम डायनेमिक्स है या माइक्रो प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी है फब ये जो फब उसको बोलते हैं फैब्रिकेशन फैसिलिटी तो व्ट एवर यू डू यू इज द लाइव्स ऑफ पीपल आज अभी जैसे जन धन यह जो सब योजनाएं भारत में है य करोड़ों लोगों के बैंक अकाउंट खोल दिए गए पहले 40 करोड़ के थे अभी 80 करोड़ के है सो अभी करप्शन होता था कि गवर्नमेंट स्कीम का रुपया वो जाने से पहले मिडल मैन वो जो राजीव गांधी कहता था ना एक रुपया गवर्मेंट सेंट्रल गवर्नमेंट देती है तो गरीब आदमी के पास में 10 पैसा आता है अभी है कि एक रुपया देते तो एक रुपया ऑलमोस्ट जला जाता है सो आपने यू हैव यूज टेक्नोलॉजी टू ब्रिंग जज ऑफ लाइफ टू पीपल राइट सो दिस इट सेल्फ कैन बी कंसीडर्ड अ सॉर्ट ऑफ स्पिरिचुअल साधना दैट इज द ट्रू इनोवेशन ऑफ स्वामी जी वरना जैसे ट्रेडिशनल कहते हैं कि हां मैं सेवा कार्य कर रहा हूं किंतु सेवा कार्य का फल क्या है ऐसा नहीं है कि 10000 लोगों को मैंने कुछ ना कुछ राहत दी है कि मेरा ट्रांसफॉर्मेशन हुआ दैट इज अ ट्रेडिशनल वे ऑफ थिंकिंग अभी 10000 को मैं रिलीफ पहुंचाओ कि 10 को पहुंचाओ दैट डज नॉट मैटर मेरा ट्रांसफॉर्मेशन होना चाहिए स्वामी जी रेडिकल आइडिया इज दैट 10000 लोगों को रिलीफ पहुंची दैट इट सेल्फ इज अवर स्पिरिचुअल प्रोग्रेशन डजन मैटर सोच छोड़ दो यह सोचना कि कैरेक्टर ट्रांसफॉर्मेशन होता है कि नहीं 10 से 100 हज तक जाओ दैट इज योर फर्स्ट गोल कैरेक्टर ट्रांसफॉर्मेशन इ सेकेंडरी कंसीडरेशन ट इज रेडिकल आइडिया येय ये जो स्केल है ना इस स्केल के बारे में हिंदू धर्म नहीं सोचता जो कि स्वामी जी ने पहली बार सोचा है पहली बार नहीं कह के कहेंगे कि ही इज द वन पर्सन वी नो कि इन्होंने सोचा है और किसी शास्त्र में मुझे तो नहीं दिखा अभी जैसे आपका यह परिवार है एनजीओ अपना विनायक लोहानी है अभी कितने उसके है वो रामकृष्ण विवेकानंद पुटीर एमपी में कितने हजार स्टूडेंट को जा रहा है 10 15 हज ज्यादा है ओ देखिए दैट इज अ स्किल अभी विनायक लोहानी खुद कितना ही बेचारा परेशान हो 500 बच्चों को वो अच्छा खाना खिला ला रहा है उनको वो ईज ऑफ लाइफ वहां तक पहुंचा रहा है दैट इट सेल्फ इ स्पिरिचुअल बेनिफिट अभी मैं यहां पर बैठ कर के हजार साधना कर लू और विनायक लोहानी वहां प 5 हज बच्चों को खिलाता है आई डोंट थिंक दैट आई एम बेटर देन ही ही कुड बी बेटर देन मी अकॉर्डिंग टू स्वामी जीी इवन इट इज पॉसिबल दैट ही कुड बी बेटर देन आई एम तो ये स्केल का जो थिंकिंग है वो स्केल में इसके बारे में बहुत सोचता था राची में कि हाउ कैन आई इंप्रूव इंक्रीज माय स्केल सो ट जर्नी इवेंचर मी हियर नहीं कि पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन चाहिए पर्सनल पीस चाहिए वो मुझे लेके आया सो एट द एंड ऑफ द डे इफ यू आर सिंसियर इनफ टू सर्व यू आर बाउंड टू कम टू ठाकुर