Transcript
ठाकुर कथा ठाकुर की कथा अमृत में से हम पाठ करके थोड़ा सा उसके ऊपर में डिस्कशन कर रहे थे बेला प्राय नोएडा सुबह के 9:00 बजे ठाकुर अपने कमरे में बैठे हैं मानो मोहन नगर होते जग है वहां से मा मोहन नाम का एक भक्ति अपने परिवार के साथ में ठाकुर के पास आया है इन सबको लेकर के अर्थात उनके परिवार को लेकर के वो कोलकाता जा रहा है ठाकुर कुशल प्रश्न कोरिया बोलियां ठाकुर थोड़ा सा हंसकर के दूसरी एक बात पे चले गए अभी ये छोटे सा इंटरेक्शन है उसमें बहुत कुछ है समझना के लिए अभी कोयला अगस्त इसको जो उसे समय की जो धरना थी ठाकुर की भी और अपनी हम आ उसे समय के समाज की की उसे दिन को यात्रा नहीं करनी चाहिए और यात्रा करने से कुछ अशुभ होता है तो ठाकुरनगर से यह आए भक्ति अपने परिवार को लेकर के और कहा की हम लोग जा रहे हैं कोलकाता तो ठाकुर ने कहा की अरे आज इस तिथि को तुम जा रहे हो तो पता नहीं क्या होगा किंतु उसके बाद में ठाकुर ने ऐसा नहीं कहा की तुम मत जाना सिर्फ इतना कहा उसको रिमाइंड करवा दिया की हां यह उसे अशुभ दिन कहा जाता है है जी दिन तुम अपने परिवार के साथ में यात्रा करोगे ऐसा बोलकर के ठाकुर ने हंसकर के अन्य कथा पे और कोई बात पे चले गए अभी यह पढ़कर के हमको आश्चर्य होगा की आज का जो मॉडर्न आगे है आज का जो आधुनिक युग इसमें तिथि वार नक्षत्र यह ग्रह इन सब की हमारे जीवन के ऊपर में क्या असर होती है इन सबकी हमारा क्या इन सब का ऐसा कोई पावर है की हमारे हम कोई शुभ कार्य करने को जा रहे हो उसमें कोई बड़ा दाल दें अभी दो तरह से हम लोग इसको देख सकते हैं यदि हम सिर्फ कर्म के सिद्धांत की और से भी देखें तो मेरे साथ में जो शूट भैया अशुभ होने वाला है वह तो मेरे कर्मों पर डिपेंड है यदि मैं शुभ कर्म करता हूं तो मुझे उसका शुभ फल मिलेगा अशुभ कर्म करता हूं तो अशुभ फल मिलेगा क्या कभी ऐसा होता है की शुभ कर्म करने बाद में मेरे साथ में अशुभ हो जाए मैं प्रतिदिन ठाकुर के मंदिर में जाकर के भक्ति भाव पूर्वक प्रार्थना में भाग लेट हूं फिर ठाकुर को प्रार्थना करता हूं संध्या आरती में मैं आता हूं नियमित रूप से फिर ठाकुर मां स्वामी जी की किताबें पढ़ना हूं सत्संग वगैरा में मैं नियमित राहत हूं उपस्थित तो क्या मेरे यह जो शुभ कर्म है वो क्या यदि मेरे साथ में मैंने इस तरह से पहले अगस्त या बोलकर के इस दिन यात्रा कर ली या तो फिर ठाकुर एक दिन बोलते हैं की मैं सुबह को देखा की राखल ए रहा है बोलकर के किसी का चेहरा देख लिया तो अभी ये दिन पूरा अभी क्या गड़बड़ गड़बड़ चल रहा है तो मैं यदि शुभ कर्म करता हूं तो उसका यदि मैं ऐसा कोई कम करूंगा जिसको की अशुभ माना जाता है या तो फिर जिसको की कहा जाता है की यह अनुच्छेद है ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से वगैरा तो मेरे शुभ कर्म कर जाएंगे और सब मेरे साथ में अशुभ ही होने लगेगा क्या ऐसा होता है यह तो हमको कर्म के सिद्धांत के अनुसार ही यह बात ठीक नहीं लगती फिर दूसरा आज मॉडर्न साइंस और टेक्नोलॉजी के हिसाब से हमको पता है की जिसके ग्रह नक्षत्र वगैरा जो है वो तो सब प्लेनेटरी बॉडीज है स्टार से नेबुला है गैलेक्सी और यह सब न्यूटन के लॉस ऑफ डायनामिक या तो फिर आइंस्टीन के रिलेटिविटी के आ अनुसार यह सब चलते हैं तो उसमें क्या इस सबकी ऐसी कौन सी ताकत है की हमारे जीवन को नियंत्रित कर पे हमारे जीवन को हमारे कर्मों के ऊपर जाकर के हमको पनिश कर सकते हैं या तो फिर यदि ऐसा कोई शुभ यदि कुछ कर दिया हो शास्त्र ज्योतिष की दृष्टि से तो फिर हमको अशुभ करना करने के बावजूद भी शांति स्वस्तियां करने से मेरे साथ में अच्छा हो जाए तो यह तो मॉडर्न साइंस और टेक्नोलॉजी की दृष्टि से भी ठीक नहीं लगता और यह हमारा हिंदू धर्म का जो कर्म का सिद्धांत है उसके अनुसार भी ठीक नहीं द्वारा किसी आदमी ने दुनिया में जीवन भर पाप कर्म किया हैं अभी उसने क्या सोचा की जीवन का अंतिम क्षण वी ए रहा है तो चलो मैं शांति है स्वस्थ यह है फिर पूजा है होम है ये सब करवा देता हूं ब्राह्मण लोगों को धन वगैरा बांट देता हूं कोई मंदिर की स्थापना कर देता हूं तो इससे क्या होगा की मैंने जो बुरे कर्म किया हैं वो कट जाएंगे तो क्या ऐसा होने से इस तरह का पासपोर्ट अपने हाथ में आने से क्रिश्चियनिटी में ऐसा होता था जब कैथोलिक चर्च का पाटन होने की शुरुआत हुई थी तो पॉप क्या करता था सब राजाओं से अपना सब कम करवाता था कोई राजा या तो कोई छोटा सा शहर है वह पॉप की अथॉरिटी को स्वीकार नहीं करता तो यह पॉप जाकर के कोई बड़े राजा को बोलना था तुम जाकर के उन लोगों को मार दो उसके सामने तुम जितने भी पाप कर्म किया हो मैं तुमको स्वर्ग का पासपोर्ट दे दूंगा तो यह स्वर्ग का पासपोर्ट लेने के लिए इतने ही राजा लोग इस तरह से पॉप के खाने पे लोगों की हत्या करते रहते थे युद्ध करते रहते थे तो क्या स्वर्ग में जान का ऐसा पासपोर्ट यदि मिल जाए की मैं जितना भी दुराचार है करता रहूं फिर आखिर में मुझे इस तरह से किसी साधु के पास जाकर के कोई अच्छा सा वह विधि वगैरा करवा देना है जिससे की मैं बैक जाऊं ये गिरीश घोष एक बार कहता था की मुझे यदि यह पता होता की ठाकुर जैसा कोई मुझे मिलने वाला है तो मैं जो की मेरे सब पाप हर लगा तो मैं और कितना ही ज्यादा पाप कर्म कर लेट हालांकि गिरीश की बात अलग है कर्म के सिद्धांत के अनुसार ठाकुर ने गिरीश को बोला था की तुम बक्कल मी दो पावर ऑफ अटॉर्नी तो इसके बाद में गिरीश के यहां पर उसके किसी आदमी की मृत्यु हो गई तो गिरीश कहता है उनकी खुद की लड़की की या ऐसा ही कुछ है नेट से भूल गया तो गिरीश कहता है की मेरे पास रन के लिए भी वो ऑप्शन नहीं है मैं रो भी नहीं सकता क्यों क्योंकि मैंने पावर ऑफ अटॉर्नी ठाकुर को दे दिया है फिर एक बार गिरीश ठाकुर को पूछता है ठाकुर बार-बार कहते हैं की जी बाटी में लहसुन रखा है उसे बाटी को आप कितना ही दो लेने उसमें से गढ़ नहीं जाएगी तो गिरीश थोड़ा सा परेशान होकर के वहां पे बैठा रहा फिर सब बाकी सब भक्ति चले गए तो गिरीश ने ठाकुर को पूछा की महाशय क्या बाटी में से लहसुन की गंद कभी नहीं जाएगी तो ठाकुर समझ गए की गिरीश क्या कहना चाहता है इतने सारे दुष्कर्म दुष्कर्म तो नहीं कहेंगे किंतु इस तरह के कर्म किया हैं जिससे की वह चिंतित है अपने भविष्य के लिए तो ठाकुर ने कहा की इस पार्टी को यदि तुम अग्नि में फेंका अग्नि में जल दो तो बाटी में से गढ़ चली जाएगी तो अग्नि में तो अपने को जालना ही है तपस्या करना ही है यदि मेरे साथ में शुभ होना है तो तपस्या करनी ही होगी तो फिर यह इस तरह के यह जो सब ज्योतिष विज्ञान का हो की यह की जैसे की ठाकुर कहते हैं की आज इस तरह की तिथि है की इस तिथि को आपको यात्रा नहीं करनी चाहिए तो यह सुनकर के क्या हमको आश्चर्य नहीं होता है की ठाकुर यह सब क्या का रहे हैं लोगों को क्या उल्टा क्यों शिखा रहे हैं अभी चलो की आज से 10000 साल पहले आते हैं और जब ज्योतिष एक जीवंत विज्ञान था हमने यह बात डिस्कस की थी कुछ दिन पहले की जब नलिनी और मां को जहां पर क्वालपाड़ा में मां के साथ में र रहे थे तब एक ज्योतिषी वहां पे आया था यंग था लड़का और उसने देख करके कहा वो वैसे ही एकदम बोल दिया की मां को दीदी का उसे समय उसका संतान हुआ था छोटा सा तो उन्होंने का दिया की ये लड़का जीवित नहीं रहेगा बहुत जल्दी वह मा जाएगा तो यह बात सुनकर के वह मां को नलिनी एकदम रोना धोना शुरू मिलती है मैन फिर इस ज्योतिषी को बुलाकर के कहा की अरे भाई यदि तुम्हारे यहां पर ऐसा कोई विधान है की जिससे की ऐसा कोई अमल घटना होने वाली है तो तुमको तो आकर के मुझे कहना चाहिए तो इन लड़कियों को क्यों बेचारियों को तुमने इस तरह से दारा दिया अभी तुम्हारे यहां पर जो भी है करवाओ और क्या करेंगे किंतु जो विधि का विधान है जितनी ही विधियां करवाई सब निष्फल रही और मां को दीदी का लड़का वह मृत्यु तुम मा ही गया वैसे ही अब अब शरद महाराज को पता चला की ऐसा एक ज्योतिषी है ज्योतिष जो की जिसकी गणना जो है वो बहुत अच्छी है तो जब मां की अंतिम बीमारी चल रही थी तो शरद महाराज ने इसको बुलाया और कहा की मां के बड़े में तुम अपना कैलकुलेशन करके देखो की क्या होने वाला है तो ज्योतिषी ने यह मां का कैलकुलेशन करके देखा और कहा की मां का शरीर अब रहेगा नहीं तो उन्होंने जाकर के शरद महाराज को कहा की मां अभी इस पृथ्वी लोक पे मृत्यु लोक पे ज्यादा दिन नहीं है तो शरद महाराज ने कहा की अभी इसके लिए तुमको जो भी विधि करनी है इस कल को काटने के लिए तो तुम करो तो विधि करने के लिए वो एक घाट में पानी भरकर के वहां पे रखना था तो मिट्टी के घाट में पानी भरकर के रखा किंतु जैसे पानी भर के रखा वो घाट में छेद हो गया वो फुट गया और उसमें से पानी निकालने लगा तो ये देख करके सभी लोग बड़े ही डर गए की अरे मां को बचाने के लिए जो विधि करनी है इस में इस तरह से यह छेद हो गया है घाट में और पानी बा जा रहा है अभी क्या होगा फिर दूसरा मिट्टी का घटनाया गया उसमें पानी भारत गया और वह फिर से उसको लेकर के वो विधि करने की शुरुआत हुई देखा की उसमें भी छेद हो गया इसमें से भी पानी निकाल रहा है अभी तो पूरे उद्बोधन में बड़ा ही दर्ज का माहौल हो गया तीसरा घाट लाया गया तीसरी रूप में भी छेद हो गया अभी शरद महाराज ने ठीक किया की वह पीतल का घाट जो है बरस मेटल का उसका घाट रखेंगे और उसमें पानी भरेंगे उससे विधि होगी तो वो पीतल का जो घाट था उसको रखा उसमें भी छेद हो गया तब सबको पता चल गया की अभी मां सही सही इस पृथ्वी पर नहीं रहने वाली तो देखिए की इस तरह की घटनाएं है ज्योतिष शास्त्र कहो की ये ग्रह कहो ना की ये जिसको की हम अलौकिक घटनाएं या तो फिर अलौकिक संदेश या तो फिर ये अलौकिक मान्यता जो की ना ही हमारे कर्मों के सिद्धांत में फिट बैठी है ना यह आज के मॉडर्न साइंस और टेक्नोलॉजी के युग में इसका कोई व्याख्या है इस तरह का एक पूरा विज्ञान इस तरह का पूरा एक जगत है किंतु बात यह है की हम यदि इस सब चीजों में माने की शुरुआत कर दे तो प्रॉब्लम क्या होगा की दुराचार अनाचार इतना बाढ़ जाएगा लोग बोलेंगे मैं जीवन भर पाप करूंगा फिर मुझे कुछ भी अच्छा कार्य करने की जरूर नहीं जब मृत्यु समय आएगा तब नरक में यदि जान की बड़ी आएगी इस समय में ये सब किसी पंडित या ब्राह्मण या ज्योतिषी को पकड़ करके उसको हजारों लाखों रुपया देकर के ऐसी कोई विधि करवा लूंगा जिससे की मैं बैक जाऊंगा तो ये तो फिर पूरा पृथ्वी पे बड़ा ही वो प्रलय ए जाएगा पृथ्वी पर आकर मैच जाएगा लोग कैसे जिएंगे किंतु हमको यह समझना है की यह दोनों सत्ता अपने आप में सही है अर्थात ऐसा कभी नहीं होगा की मेरे जो दुष्कर्म है वो मैं किसी विधि करके कैट दूंगा सकर्मक करके ही दुष्कर्म काटना है और यदि मैं सत्कर्म करता राहत हूं और ऐसी कोई अशुभ या तो फिर अमल कोई घटना मेरे साथ में घटती है तो ऐसा कभी नहीं होने वाला है की मेरे साथ में अशुभ होगा यदि होता है तो मेरे पूर्व जन्म का कुछ कर्म रहा होगा जो की इस चीज से कट जाएगा तो अभी ये मानो मोहन बाबू आए हैं परिवार को लेकर के पहले अगस्त को कोलकाता यात्रा कर रहे हैं यदि उनके साथ में इस तरह के अमल समय में यात्रा करने से कोई अमल घटना होती है तो इसलिए नहीं की उन्होंने शुभ कर्म किया किंतु ठाकुर के पास आते हैं ठाकुर की भक्ति करते हैं ठाकुर के बड़े ही अच्छे भक्ति हैं साधन भजन नियमित करते हैं उसे सब का कोई फल नहीं हुआ बस एक मंगल और घड़ी में यात्रा करने से उनके साथ में सब कुछ अमल हो गया ऐसा नहीं होने वाला है उनके जो पूर्वज जन्म के कर्मठ है उसकी वजह से मंगल होगा और यदि पूर्व जन्म के कर्म काटने की जरूर नहीं रहेगी तो अमल घड़ी में भी यात्रा करने से अमल उनके साथ में नहीं होने वाला है तो ये हमको ये चीज को ख्याल में रखना है की कर्म का सिद्धांत को कोई आगे पीछे नहीं कर सकता अजामिल की घटना बड़ी फेमस है ठाकुर ने हमको कहा है की पूरा जीवन ओम नारायण को गली देने के बाद में आखिर में अपने पुत्रों का नारायण नाम लेकर के पुकार लिया तो इस में उसको मुक्ति मिल गई फिर किंतु ठाकुर कहते हैं की उसने बाद में भी कितनी तपस्या की थी तो इसी जैसे जनक राजा के बड़े में वो ब्राह्मण समाज वाले ठाकुर को आकर के बोलते हैं की हम लोगों का जनक राजा जैसा मत है एक हद से संसार की तलवार चलाएंगे दूसरे हाथ से साधन भजन की तो ठाकुर कहते हैं ऐसा मुंह से बोलने से कोई जनक राजा नहीं होता जनक राजा ने सर ऊपर करके सर नीचे करके कितनी तपस्या की है तब कहानी जाकर के वह जनक राजा हुए हैं तो वैसे ही बिना तपस्या किया हम जल्दी करते हैं हमारे जीवन में यदि साधन भजन का प्रवाह सतत नहीं चला राहत है तो यह अमल यदि कोई घटना हमारे साथ में या अमल सूचक कोई कार्य हम करते हैं तो उसका अमल उसका कोई ये उसका रिजल्ट आएगा वरना जो साधन भजन शुभ कार्य अच्छे कर्म नियमित रूप से करते हैं उनको यह सब चीजों से बहुत ज्यादा डरने की जरूर नहीं है किंतु हमको यह बात याद रखती है की ठाकुर ये सब चीजों में बहुत मानते थे मैं भी जब यहां पे पहले बार आया और अपने मिशन में भी मैं देखा हूं की हमारे सीनरी साधु ये सब चीजों में मानते थे मानते भी है कुछ कुछ सभी नहीं कोई कोई ठाकुर के कथामृत में हम इस तरह से हम देखते हैं फिर तो हमको लगता है की क्यों यह लोग हमारी अंडरस्टैंडिंग के विरुद्ध में आज का जो आधुनिक युग की जो पुरी एक धारा है एक है उससे विरोध में क्यों जा रहा है यह जो अंधश्रदों की वजह से ही तो हमारा भारत देश 1000 साल तक गुलाम रहा था अभी यह सब अंधश्रद्धा है ये सती प्रथम बाल्य विवाह प्रथम फिर रास्ते में बिल्ली ए गई तो फिर आपको आगे यात्रा नहीं करनी है ऐसा कितना कुछ उसे समय था जब हम अंधकार युग में डार्क ए जिसमें जी रहे थे वो सब कुछ संपूर्ण रूप से तिलांजलि दे देनी चाहिए और ये जो प्रकाश का योग है आगे ऑफ इनलाइटनमेंट इसको कहते हैं यूरोप में अर्थात की विद्या का योग अर्थात की ज्ञान का योग विज्ञान का योग तो इस विज्ञान के युग में विद्या के युग में ये सब जितने भी ऐसी बातें हैं जो की हमारे कर्मिक के विरोध में जाता है मैं कर्म करूंगा उसका जो फल है वह मुझे मिलेगा वह सब ठीक है जैसे मैंने एक बार कहा था की पहले बार लोग अपने मंदिर में नियमित रूप से जाना शुरू किया देखा की वहां पे हॉस्टल है विद्यार्थी लोग नियमित रूप से कभी नहीं आते आते हैं वो तो आरती में तो आना ही पड़ेगा किंतु वो तो नियम है बोलकर के आते हैं अपने से कभी नहीं आएंगे फिर वहां सरस्वती पूजा हुई तो सभी स्टूडेंट एक साथ में लाइन लगा करके अपनी वो नोटबुक है पेन है वो मां के सामने रखना के लिए वो बेसब्रो हो रहा है तो मैंने कहा भाई ऐसा क्यों तो एक साथ उन्हें समझा दिया की मां सरस्वती की मैं आपको प्रार्थना करेंगे तो परीक्षा में तो आपका अच्छा नंबर आएगा ही तो फिर हमको प्रश्न होगा की ऐसा करने से की आपको पढ़ाई लिखी नहीं करने की जरूर है क्या पढ़ाई लिखी नहीं करूंगा मां सरस्वती को जाकर के सरस्वती पूजा के दिन जाकर के अपनी नोटबुक रख दूंगा और बोलूंगा मां तुम जल्दी पास करवा डॉगी तो इतने रुपए का नारियल ये वो फिर वो बतासा यह वगैरा तुमको मैं ऑफर करूंगा ठाकुर ने कहा था ना की ये केशव ठीक हो जाए इसके लिए मां सिद्धेश्वरी के पास में वो डब की डब और चीनी मैंने ये नारियल और ये शक्कर इसकी महानता मनी है तो यदि इस तरह से मानता माने से फिर ये वटसावित्री वो जो व्रत वगैरा है ये सब करने से ही यदि ठीक हो जाता सब कुछ शेर हमारे यहां पे बहाने कितने सारे व्रत करती है तो ये व्रत करने से यदि सब कुछ ठीक हो जाता तो क्या हमको यह शुभ कर्म अच्छे कर्म करने की क्या जरूर र जाति यह सब अंधश्रद्धाओं को हमको संपूर्ण रूप से छोड़ देना चाहिए और विद्या विज्ञान और सतर्कता साधन भजन श्रद्धा भक्ति इसी को लेकर के रहना चाहिए ऐसा एक हमारा एक मानना होता है मेरा भी था अभी भी है किंतु मैं यह देखा हूं की ठाकुर सब चीजों में मानते हैं छिपकली है उसमें भी ठाकुर वो विश्वास करते थे है तो यह सब कुछ देखकर के हमको प्रश्न होता है की क्या हमको इस आधुनिक युग में यह सब चीजों पे विश्वास करना चाहिए की नहीं करना चाहिए तो अभी ये आपका पर्सनल प्रेफरेंस है मैं पर्सनली ऐसा मानता हूं की यह सब चीज हैं हम इसको समझ नहीं पाते हमारी बुद्धि शक्ति आज के कलयुग से मालिन होकर के हां ऑफ कोर्स ठाकुर के आने से तो सतयुग ए गया है किंतु फिर भी हम लोग की बुद्धि शक्ति हमारी साधन भजन की क्षमता इतनी नहीं है की हम जिसको हायर डाइमेंशन कहते हैं ना मैथमेटिक्स में होता है की स्पेस और टाइम यह दो कर डाइमेंशन का यह जगत बना है स्पेस की तीन डाइमेंशन लेंथ ब्रेड और विथ यह तीन डाइमेंशन और फोर्थ डाइमेंशन है टाइम किंतु आप क्वांटम डायनामिक का अभ्यास करेंगे तो पता चलेगा की और भी कितनी 10 11 दूसरा डाइमेंशन बिल लुक बताते हैं तो वैसे ही एक स्पिरिचुअल डाइमेंशन है एक कॉन्शसनेस एक हायर डाइमेंशन है जिसमें कॉन्शसनेस वर्कआउट होती है और इस हायर डाइमेंशन में जिसको की आप स्वर्ग कहे की आप कुछ भी इसको का ले इस हार्ड डाइमेंशन में हायर डाइमेंशनल लॉस हाईडीशनल फिजिक्स जैसे की मैथमेटिक्स में होता है हायर डाइमेंशनल मैथमेटिक्स इस तरह के मैथमेटिक्स के इक्वेशन को सॉल्व करने के लिए ऐसे इक्वेशन है जो की 11 डाइमेंशन में सॉल्व होंगे और स्पेस और टाइम की फोर डाइमेंशन में सॉल्व नहीं होंगे तो ये पढ़ करके हमको लगता है साइंस फिक्शन जैसा कुछ इंफिनिटी इस रियल की सही सही में वो हर्ड डाइमेंशन में ये सब इक्वेशन क आउट करते हैं तो वैसे ही ये हायर डाइमेंशन में हायर स्पिरिचुअल डाइमेंशन में ये हायर लॉस ऑफ नेचर हायर फिजिक्स स्पिरिचुअल फिजिक्स अप्लाई होता है जिसके रूल्स को अभी घूम नहीं समझ पाते उसे समय पुराने 10000 साल पहले यह सब ऋषि मनी थे जो की इस स्पिरिचुअल फिजिक्स समझते थे आज हम हमारा अंडरस्टैंडिंग यह मटेरियल फिजिक्स तक सीमित र गया है हमको यह पता है की यदि ये किताब है या तो यह बुकमार्क है इसको मैं यदि इस तरह से छोडूंगा तो ये सीधा मेरी किताब के ऊपर में आकर के गिरेगी यह पेन है पैंको में उठा करके छोड़ दूंगा तो जमीन पर आकर गिरेगी अर्थात की ये ग्रेविटी का नियम है किंतु मुझे यह नहीं पता है की यदि पहले अगस्त को रात यात्रा करेंगे तो कौन सा इक्वेशन है की कौन सा नियम है इसके वजह जिसके अनुसार यदि कुछ अमल या शुभ होगा वह नियम मुझे नहीं पता है नियम होने ही चाहिए अदर वाइस ठाकुर यह सब चीजों में विश्वास नहीं करते तो यह तो एक अंडरस्टैंडिंग है की हां ऐसा एक हाइब्रीड़ाइजेशन वर्ल्ड है स्पिरिचुअल वर्ल्ड जहां पर स्पिरिचुअल फिजिक्स कम करता है तो वह तो एक बात हो गई फिर हम यदि ऐसा भी मां सकते हैं की ठाकुर तो ठाकुर कहते है ना आर्मी में घुड़ते हैं शशि भी भागते नहीं मैं कुछ कंस्ट्रक्ट करने के लिए आया हूं पुराना तोड़ देने के लिए नहीं यानी की पुरानी मान्यताएं भले ही वो चाहे गलत भी हो उनको चलने दो मैं लोगों को ऐसा का के कष्ट नहीं देना चाहता की ये सब गलत है इसको छोड़ दो उसकी बजे नहीं ये कहना चाहता हूं की यह सही है इसको पकड़ो सही पकाने से गलत ऑलरेडी चला जाएगा तो ये भी इसको देखने की एक पॉइंट ऑफ व्यू है अभी कितने पॉइंट ऑफ व्यू हुए की एक तो हम कर्म के सिद्धांत के अनुसार साइंस टेक्नोलॉजी के अनुसार ये सब चीजों में संपूर्ण रूप से विश्वास करें और यह मां लेने की ठाकुर ने ये सब इसीलिए कहा की उसे समय के लोगों को कष्ट एन हो गलत गलत मान्यता भी उन्होंने स्वीकार कर ली यह एक पॉइंट ऑफ व्यू है और दूसरा पॉइंट ऑफ व्यू है की डेरी से हायर डाइमेंशनल वर्ल्ड स्पिरिचुअल वर्ल्ड के जहां पे यह सब लॉस अप्लाई होते हैं वही है की जैसे-जैसे धीरे-धीरे करके पहले वो कॉपरनिकस आया उसके बाद में न्यूटन आया उसके बाद में आइंस्टीन आया तो नए-नए वो वैज्ञानिकों ने आकर के वैज्ञानिकों ने आकर के नए-नए नियमों का आविष्कार किया वैसे ही लॉस ऑफ दिस स्पिरिचुअल वर्ल्ड स्पिरिचुअल फिजिक्स वो पहले वैदिक युग में खोजें गए थे उसके बाद में लुप्त हो गए और उसको फिर से खोज करके समझना की जरूर है दिस इस अंदर पॉइंट ऑफ यू तो मेरा पर्सनल पॉइंट ऑफ व्यू यह है की यह सेकंड जिसको की हम समझ नहीं पाते जिसके अनुसार यह सब कुछ सही है ओनली थिंक यह नहीं जरूर है की यदि मैं कोई विधि कर दूंगा तो मेरे और शुभ कर्म कट करके वो ले जाएंगे मेरे साथ में सब अच्छा मंगल होने लगे ऐसा कभी नहीं होने वाला है कर्म का सिद्धांत भी है और यह हायर लेवल ये सब जिसको कृपा कहते हैं कृपा कहते हैं या तो फिर ये सब आप का लीजिए कुछ भी का लीजिए मैं कहता हूं कृपा ग्रेस तो जैसे की वो मथुरा बाबू और ठाकुर के बीच में संवाद हुआ था मथुरा बाबू ने कहा की भगवान को भी नीति नियम में रहकर के जीने की जरूर है तो ठाकुर ने इस दिन देखा की जसवंत के ऊपर में दो फूल है एक लीला एक लाल और एक सफेद मोस्ट प्रोबेबली यही दो कलर थे तो ठाकुर ने जाकर के वो मथुरा बाबू को दिखाए हालांकि आज हमको पता है की इवोल्यूशन या तो फिर जेनेटिक्स के अनुसार यह सब चीज विभिन्न डॉ ऑफ नेचर ही आई है तो जो भी है ये एक एंडलेस डिबेट है की सब कुछ नियम के अनुसार चलना चाहिए की कृपा बोलकर के नियम से भी पर कुछ है तो यह डिबेट इतना इंटरेस्टिंग भी है और दोनों साइड में आपको बहुत सारे आपको यह मिलने वाले हैं पॉइंट की यह पॉइंट सही है या वो पॉइंट गलत है दोनों और से आपको मिलने वाला है तो जो भी है हमारा एक पर्सनल एक अंडरस्टैंडिंग होना चाहिए की क्या सही है या मेक इसको मानता हूं मेरा पूरा 30080 डिग्री पूरा कन्वर्जन हुआ है मैं पूर्व श्रम में यह सब चीजों पे विश्वास तो नहीं करता था साथ-साथ में यह सब चीजों पे जो विश्वास करता था मैं उसके प्रति बड़े ही निर्ण दृष्टि से देखा था सोचता था की यह लोग महामूर्ख है मा पागल है क्या यह सब पगले की तरह सोचते हैं क्या यह पगले की तरह कम करते हैं इस तरह से इन लोगों के प्रति मेरी बहुत ही एक कहे की नेगेटिव एक मेरी दृष्टि थी फिर जैसे हुआ की यह सब चीजों में जो विश्वास करते हैं इस तरह के ठाकुर के श्री चरणों में शरण लेनी पड़ी तो अभी यह सब चीज तो माननी ही होगी ठाकुर मानते हैं हमको भी मानना होगा क्या करेंगे कहां जाएंगे ठाकुर ने कान पड़कर के यहां पे लेक आए हैं तो किंतु मानना है तो फिर इसके बड़े में सोचना भी है मैं किसी चीज को बिना सोच बिना समझे बिना कोई अंडरस्टैंडिंग पे आए ग्रहण नहीं कर सकता ठाकुर के पास में इसीलिए आया हूं की ठाकुर जो कुछ भी कहते हैं 100% मैंने ठाकुर को स्वीकार किया है और समझकर के स्वीकार किया है बिना समझे मैंने स्वीकार नहीं किया मेरे साथ में ऐसा नहीं हुआ की मेरे घर में ऑलरेडी ठाकुरमार स्वामी जी का एक था वातावरण मेरे पिताजी वगैरा ऑलरेडी ठाकुर के भक्ति थे तो चलो फिर अभी घर में इस तरह से है माता जी पिताजी भगत है तो मैं भी यहां पर ए जाता हूं मेरे साथ में ऐसा नहीं था मैं तो जैन परिवार से हूं तो हम लोगों के यहां पर वातावरण पूरा इसमें से निकाल करके ठाकुर को मैंने इंटेलेक्चुअल समझ करके फिर उनकी शरण में में आया हूं तो यह सब अपना एक पर्सनल एक हमको एक भाव हमको डेवलप करना होगा की ठाकुर की वाणी को ठाकुर के उपदेश को हम किस तरह से ग्रहण करते हैं क्या हम आंख बैंड करके सब कुछ ले ले या तो फिर आंख खली रख करके ठाकुर का कुछ ले और कुछ छोड़ दे या तो फिर एक गहन चिंतन करके एक इंटेलेक्चुअल चर्निंग करके ठाकुर को समझना का पर्यटन करें और 100% कन्वेंस होने के बाद में ही ठाकुर को अपना मां प्राण तन मां धन समर्पित करें यह 24 अपना है सबका अपना अपना रास्ता है तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति