Transcript
तो हमने ऑलरेडी इसका एक पार्ट जो है की हमने ऑलरेडी कर किया है ठाकुर कहते हैं की विद्यासागर के हृदय में सोना पड़ा हुआ है किंतु उसको पता नहीं है की इसका क्या अर्थ है क्योंकि जैसे मैंने बताया था की कई बार हम लोग यह सोचते हैं की मैं जो है की सर्विस एक्टिविटी है या वगेरा यह सब करके मैं अपना जीवन व्यतीत करूंगा किंतु हमको कभी कभी ये पता नहीं चला की जब हम सेवा करने के लिए जाते हैं तो वैसे तो आप जो लोग संसारी होते हैं उनको क्या है की यह जो उनका जो हम है फिर उनका वह जो नाम यश फिर धन वगैरा जो उनको मटेरियल चीज जो उनको मिलती है जो सेंशुअल डिजायर है उनके जो सेंट्रल प्लेजर से इंद्रियों के सुख उससे वो खुश रहते हैं क्योंकि जो आदमी सेवा करता है वो किस चीज से उसको संतोष मिलेगा उसको तो मैन सेवा करने से आपको कोई इतना धन लाभ नहीं होने वाला है ना ही कोई बहुत सारे लोग हो सकता है बनाकर के आपकी प्रशंसा करें ऐसा भी शायद ना हो ऐसा हो सकता है जैसे की हम लोगों ने बार-बार देखा है यदि आप सही-सही किसी की सेवा करने को जाते हैं तो क्रिटिसिजम बहुत बार सुना पड़ता है की आप लोग क्या किस वजह से ये सब कर रहे हैं की आपको कोई सेक्रेटली कोई क्या बेनिफिट हो रहा है की नहीं जैसे मैंने कहा था की मैं जब वो मैदान में वो जो बच्चे घूम रहे थे बेचारे तो उनको मैं पढ़ाई लिखी करवाने के बड़े में मैंने सोचा तो उन्होंने पहले यही सोच लिया की मैं शायद हो सकता है की बच्चों को उठा ले जान के लिए आया हूं तो जब आप सेवा करते हैं तो आपको इतना क्रिटिसिजम है कितना ही आपको जो है आपके खुद के मां में सही होगा की अरे जो मेरे जो मित्र है मेरे जो कलीग है मेरे जो रिलेटिव्स है वे लोग तो बढ़िया सा वह नौकरी करके ना बिजनेस करके पैसा काम रहे अच्छा सा फैमिली करके बैठे हैं और मैं ही हूं जो मारा मारा घूम रहा हूं ना ही मतलब इतना कोई धन दौलत है ना ही आदमी से कोई यश नाम यश मिलता है ना ही ऐसा कोई मैं फैमिली ठीक से कर का रहा हूं तो मैं क्या करूं ऐसा जो संशय जब मां में उत्पन्न होता है सेवा करते-करते उसे समय ये बात रखती है याद की अध्यात्म ही जो है धर्म ही जो है एकमात्र हमारा सहारा है अभी जैसे देखिए विद्यासागर के साथ में क्या हुआ वैसे तो विद्यासागर वह दया के सागर है मैन करुणा के सागर है वो बहुत सारे लोगों के ऊपर में वो निष्काम उन लोगों को वो मदद करने के लिए वो पैसा भी देते हैं जैसे कोई टीचर है उसकी बहन विधवा हो गई तो अभी उसे बहन का जो वो जो है जम्मा उसे टीचर पे ए गया तो टीचर ने विद्यासागर को बताया की अभी मेरी बहन का भी उसका मेरी बहन और उसका बच्चे उसका भी मेरे सर पर है और मेरा सैलरी तो इतना नहीं है तो आप मेरा सैलरी बड़ा दीजिए तो विद्यासागर ने उनका सैलरी बड़ा दिया यह सब अच्छा कम करते थे किंतु आखिर में क्या हुआ था हमने वह एक बार डिस्कस किया था की स्वामी जी के पिताजी का जब देहांत हो गया बेहद त्याग हो गया तब स्वामी जी ने एक बार जो है विद्यासागर के स्कूल में आगे ए टीचर जब करना शुरू किया था अभी स्वामी जी नरेंद्र जो कुछ भी करेगा वो तो परफेक्शन से ही करेगा और नरेन को तो मतलब ये जो टीचिंग है एजुकेशन है लर्निंग है यह सब में बड़ा ही इंटरेस्ट था तो फिर अब स्वामी जी जब कम कर रहे हैं विद्यासागर की स्कूल में तो इतना मतलब वो मेहनत करके इतना वो जो है की वो अटेंशन देकर के कम करते इतना एफिशिएंट कम करते हैं की बच्चों का जो वो लर्निंग कैपेसिटी है फटाफट करके बाढ़ जा रहा है बच्चों का जो परीक्षा में मार्क जो पाते हैं वो अच्छे मार्ग उनका अच्छे नंबर उनको वो पन शुरू हो जाते हैं तो यह सब देख करके विद्यासागर का जो झम ही था सनी लियोन उसने सोचा की अभी नरेंद्र मेरी जगह ले लगा तो फिर मैं तो विद्यासागर का वायरस हूं विद्यासागर यदि यह मेरी जगह नरेंद्र को दे बोलेंगे तो मेरा सब कुछ लूट जाएगा तो फिर उसने जाकर के विद्यासागर को कंप्लेंट किया अभी देखिए की विद्यासागर में ठाकुर की तरह एक अंतर्दृष्टि होती तो नरेन का क्या वैल्यू है नरेंद्र का क्या वर्थ है नरेंद्र की क्या कीमत है वो समझ पाते इतना हीरे जैसा लड़का उसके बड़े में ये दो कोटी का एक आदमी दो टेक का एक आदमी उसके बाद नरेंद्र के बड़े में कंप्लेंट करें और वो सुन भी ले और सुन करके फिर नरेंद्र को वहां से निकाल भी दे तो ये कितना बड़ा अन्य हो गया तो जो अध्यात्म है धर्म है साधना है वो हमको एक डेप्थ प्रधान करता है हमको वो एक अंतर्दृष्टि प्रधान करता है जिससे की हम सेवा मार्ग में विद्युत एन हो जाए सेवा करते कहीं-कहीं हम लोग जो है अपना खुद का नाम यश बढ़ाने का पर्यटन शुरू ना कर दे या तो फिर जी धन या तो जो रिसोर्सेस के लिए आए हैं उसमें से हम अपना हिस्सा पटना शुरू कर दे इसके लिए ब्रह्मा अध्यात्म आवश्यक है किंतु जो लोग यह सोचते हैं की हां मुझे सेवा करनी है उसके लिए तो बहुत ही ज्यादा आवश्यक है देखिए हमने देखा की इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ में क्या हुआ एक समय था की चलो ब्रिटिश राज्य से मुक्ति पानी है हां ये गुलामी से छुटकारा पन है तो जितने भी लड़के हैं यंग लड़के लड़कियां सब निस्वार्थ भाव से आकर के राष्ट्र प्रेम से अपना जीवन जो है उन्होंने कांग्रेस को समर्पित किया था महात्मा गांधी की लीडरशिप के अंदर में उन्होंने ये जो एक के बाद एक जो सत्याग्रह की जो ये जो मूवमेंट से सत्याग्रह जो ये जो ये जो फाइट है अपना फ्रीडम मूवमेंट वो उन्होंने वो चलाया किंतु फिर आखिर में क्या हुआ जैसे ही हमको स्वराज मिल गया गांधी जी ने कहा है की कांग्रेस को अभी डिसबैंड कर देना चाहिए कांग्रेस को अभी जो है वो मैंने ऐसे ऑर्गेनाइजेशन उसको खत्म कर देना चाहिए क्यों उसका जो प्राइमरी हेतु था की ब्रिटिश राज्य से मुक्ति पनप वो उसने का लिया कांग्रेस बनी रहेगी तो बिना रडरलेस जो जहाज होता है ना जहाज को चलने के लिए वो ये रडर चाहिए इंग्लिश में रडर बोलते हैं वो भी हिंदी नाम में भूल गया तो वो जिसकी वजह से वो जहाज जो है उसको आप डायरेक्शन दे सकते हैं जहाज को आप नेविगेट कर सकते हैं जैसे अपनी कामेश टियरिंग व्हील होता है तो जब इस स्टेरिंग व्हील नहीं रहेगा और एक्सीलेटर पे पैर दाल दिया तो कर क्या होगी डायरेक्शन में जाएगी दीवार से टकराएगी एक्सीडेंट खड़ा कर देगी तो गांधीजी को पता था की बिना फ्रीडम मूवमेंट का जो एक है एक सर्वोच्च है यह जो है वो एक बार चला जाएगा तो कांग्रेस जो है करप्शन में डब जाएगी यह गांधीजी को पता था इसीलिए उन्होंने कहा की कांग्रेस को डिपेंड कर देना चाहिए कांग्रेस को जो है ऐसे ऑर्गेनाइजेशन उसको रिलीज कर देना चाहिए किंतु यह लोग नहीं मैन बोला की जैसे हम लोग उसे समय देश की सेवा करते अभी भी करेंगे तो देश की सेवा तो क्या हुई कांग्रेस वाले बाद में जितना करप्शन किया शायद ही शायद मतलब वो ब्रिटिश ने भी शायद इतना ना किया हो तो देखिए इस स्पिरिचुअलिटी है अध्यात्म है धर्म है साधना है ईश्वर के प्रति अपनी निष्ठा है शरणाघाटी है यह सब जड़ी नहीं राहत है तो ठीक ठीक सेवा भी नहीं होती है ये जितना भी पॉलिटिक्स है यह उसका प्रमाण है कहां जाकर के यह यंग लड़के लड़कियां अपने जीवन का बलिदान दे अपने जीवन को समर्पित करें की हां हम देश सेवा के लिए देश का भला हो देश की उन्नति हो भारतवर्ष जिसे ऋषि मुनियों के जमाने में वैदिक युग में सत्य युग में जितना सर्वोच्च अपने शिखर पर वो बैठा हुआ था इस सर्वोच्च शिखर पर वापस ले स्वामी जी ने कहा है की इंडिया बिल कंकर थे वर्ल्ड की इट्स स्पिरिचुअलिटी तो हमारे जो धर्म अध्यात्म संस्कृति कलर अपना यह जो अपना जो यह हेरिटेज है इन्हेरिटेंस जो है अपना वारसा है उसको कहा वो जगत में पूरे विश्व में फैलाएंगे तो ये सब नहीं करके पब्लिक लाइफ में आते ही है इसलिए की जिससे की चलो तो करप्शन करके स्कैन करके गवर्नमेंट का पैसा अपनी जब में डालकर के वो 10-15 बेंगल बना देते हैं वह गाड़ी है वो खरीद लेते हैं बीच में अभी वो वेस्ट बंगाल का वो मैंने देखा था वो एजुकेशन मिनिस्टर वो टीचर लोगों की वो भारती करने के लिए उसे सभी टीचरों से पैसा लेट था तो कितने रुपए उसके वो मतलब कैसे उसके अपार्टमेंट में से मिला तो कहां वह मतलब इनिशियली तो उसने बेचारे ने एक दिन सोचा होगा की चलो सेवा का कार्य करते हैं उसने देखा होगा की आसपास चलो इतना गरीबी है या इतना यह है तो मैं थोड़ा सा हेल्प करता हूं कभी एक जमाने में उसने बेचारे इनोसेंटली सोचा भी होगा किसको पता किंतु आज देखिए उसकी क्या परी जा के र गई इसलिए ठाकुर यहां पर कहते हैं की विद्यासागर को पता नहीं है की उसके भीतर में आत्मन है उसके भीतर में ईश्वर है और जब तक इस ईश्वर को इन्वोक नहीं करेंगे जब तक इस ईश्वर की आराधना नहीं करेंगे जब तक की इस ईश्वर के हम अपने अहंकार को इस ईश्वर के श्री चरणों में समर्पित नहीं करेंगे तब तक जो है हम कुछ भी करते रहेंगे उसमें से स्वार्थ है घमंड है आरोगंज है कामिनी कंचन है यह सब अपनी ये जो तामसिक इच्छाएं हैं तामसिक एंबीशन है हमारे सभी कार्य को घर के रहेगी और हमारा कोई भी कार्य ग्रेट नहीं हो पाएगा अब इतने अब धार्मिक महापुरुषों को तो छोड़ ही दीजिए मैन जैसे महात्मा गांधी है या तो फिर सरदार पटेल है या तो फिर सुभाष चंद्र बस है इन लोगों को अब देखिए उन्होंने जो देश सेवा के लिए जब कुछ करने को निकले और जब सक्सेसफुल हुए उनके पीछे अध्यात्म का कितना पावरफुल सोर्स है अध्यात्म का कितना पावरफुल उनके पीछे में एक बैकअप है सुभाष चंद्र बस तो देखिए की वो स्वामी जी के कितने बड़े भक्ति थे उन्होंने जय में जब उनको दाल दिया गया था तब उन्होंने जय में ही कंप्लीट वर्ष पढ़ के वो लेक्चर फ्रॉम कोलंबो तू अल्मोड़ा पढ़कर के स्वामी जी के वो देवोते हो गए थे तो यदि आपको यह क्षेत्र में भी इस जगत संसार उन्हें अध्यात्म के क्षेत्र में कुछ करना है ईश्वर प्रताप करनी है साधना करनी है तो उसके लिए तो आपको ठाकुर को पुकारा ही पड़ेगा या तो फिर जो भी आपके इस्ट देवता है किंतु बाकी है जगत में भी यह मटेरियल वर्ल्ड में भी यदि कुछ सक्सेस प्राप्त करनी होगी तो उसके लिए आपको जो है अपना स्वार्थ थोड़ा सा तो छोड़ना पड़ेगा आपके जो करीब से हार्ड वर्किंग कलीग से उनको तो आपको प्रमोट करना पड़ेगा बहुत बार ऐसा होगा की 10 लोग मिलकर के आपका जो प्लेन है उसके सामने वह बोलते हैं की आप भले ही चाहे कंपनी के फाउंडर हो ना कुछ भी हो आपका जो प्लेन जो है वह बड़ा ही डेंजरस है उससे कंपनी डब जाएगी आपको यदि पता होगा किस टीम जॉब्स स्टीव जॉब्स ने एप्पल की कंपनी की शुरुआत की एप्पल कंपनी की स्थापना की आज एप्पल इतनी वर्ल्डवाइड कंपनी है इतनी बड़ी कंपनी है अभी वो दिल डेली और बॉम्बे में एप्पल के स्टोर स्टार्ट हुए थे उसका सीईओ आया था तो वन ऑफ डी मोस्ट यू कैन से प्रॉफिट मेकिंग कंपनी इन डी वर्ल्ड तो ये स्टीव जॉब्स ने जब शुरू किया तो बढ़िया चल रहा था फिर वो स्टीव जॉब्स का क्या था उसका मां थोड़ा विचित्र था वो उल्टे-पुल्टे उलट-पुलट आइडिया कभी कहानी से वो ले आता था तो उनके जो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर हैं उन्होंने ठीक किया की उसको यहां से निकाल दिया जाए और हम लोग कंपनी चलते ऐसा करके स्टीव जॉब्स को निकाल दिया अभी उसको बेचारे के मां में कष्ट तो हुआ होगा किंतु क्या है की देखिए वो स्टीव जॉब्स पता होगा की वो इंडिया आया था वो जो फिर वो महर्षि मा ऋषि करके वो एक परिश्रम है वह एक थे उसे समय मैं तो उनका आश्रम भी है ऋषिकेश वगैरा में तो वहां पर गया था उनके साथ में रहा था इससे चलकर उसने भारत में वो भ्रमण भी किया था बहुत साड़ी जगह पे और उसे भारत की हाक्यात्मकता वगैरा समझना का पर्यटन किया था उससे कहानी से उसको ये ज्ञान हुआ होगा की ये झगड़ा बड़ा करने की बजे बटर है की हम जो है अपना एक दूसरा एक कंपनी एस्टेब्लिश करें तो उसने पिकसर बोल करके एक कंपनी स्टार्ट की अभी पिक्सर्त क्या है वो एनीमेशन बनती थी अभी भी बनती थी तो इतना सुंदर एनीमेशन बनती है पिक्सर्त ने जो मूवी बनाना शुरू किया एक के बाद हिट एक के बाद एक हिट होने लगी उम्मीदें क्या है की एप्पल में पता चला की स्टीव जॉब्स के जान के बाद उसके जो जैसे पगले जैसे विचार थे वो तो ठीक है उसको निकाला किंतु आपका जो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर है उसके पास में ये सब कोई बड़ा क्रिएटिव इतिहास नहीं है तो कंपनी थोड़ा सा तो डेवलप की उसको निकालना के बाद नहीं किंतु फिर से उसका वो जो है डेवलपमेंट वह जो है स्टॉल हो गया डेवलपमेंट अट गया तो फिर लोगों ने फिर उन्होंने देखा नहीं है वो कैसे वो पागल की तरफ बात नहीं करके उसका मन जो है थोड़ा सा मैच्योर हुआ है और ये जो पिक्सर्त जो कंपनी है उसकी वो कितनी प्रॉफिट में किंग है तो उन्होंने सोचा की चलो भी उसमें थोड़ा बहुत अकल आई है तो उसको वापस ले लेते हैं तो उसको वापस लिया तो फिर उसने जो क्रिएटिव इतिहास के बाद एक डेवलप करना शुरू किया तो उससे देखिए एप्पल इस वन ऑफ डी लार्जेस्ट कॉरपोरेशन मल्टीनेशनल कॉरपोरेशन इन डी वर्ल्ड अभी स्टीव जॉब्स को यदि निकाल दिया होता तो जैसे बहुत सारे अमेरिकन ऐसा करते हैं वो तो शराब पीने के वैसा ही माहिर है वो कॉलेज में ही उनका वो तो वो जो है ड्रिंकिंग कलर होता है मैं जो विदेश से कोई-कोई आता है तो उनके साथ में बात करता हूं तो कभी पता चला है ये जो व्हाइट जो स्टूडेंट होते हैं कॉलेज के या फिर एवं हाय स्कूल के उन लोगों में यह ड्रिंकिंग कलर जो है वह इतना मतलब घुस गया है की सुबह शाम वो जो है वो शराब पीते रहेंगे वो दारू पीते रहेंगे और फिर पता नहीं पढ़ाई लिखी में कोई ध्यान नहीं देंगे इसलिए ठीक है की जो की जो टॉप इंस्टीट्यूशन है लर्निंग कॉलेज जिसको कहते हैं कार्लटेक है या स्टैनफोर्ड है ना की हार्वर्ड है तो वहां पर मोर दें 50% स्टूडेंट क्योंकि एशियन स्टूडेंट सी है जिम ये फॉक्स करने की अटेंशन करने की कैपेसिटी है तो अपने लाइफ को जो है स्टीव जॉब्स खत्म कर सकता था वैसे वो मिलियन तो था ही अभी वो शराब पिएगा वो भोग विलास करेगा इधर-उधर घूमेगी अपना लाइफ बड़ा आसानी से वो खत्म कर दे सकता था एक इगनोमेट्री जिसको कहते हैं ना उसमें वह डब जा सकता था किंतु उसकी वजह उसने अपने मन को डिसिप्लिन किया फिर से वह जी रास्ते अधोगति जा रहा था वहां से अपने को डिसिप्लिन करके उद्योग गति में जान की उसने शुरुआत की तो देखिए की एवं बाकी जगत जो है यह मैटेरियलिस्टिक वर्ल्ड भी है वहां पर भी आप स्पिरिचुअल डिसिप्लिन को अपना करके अपना जीवन परिवर्तित कर सकते हैं यह वॉटरसन करके एक पत्थर है जिसने बहुत अच्छे-अच्छे बायोग्राफी लिखे आइंस्टीन की बायोग्राफी लिखी है उसने फिर यह जो किसिंग जर था वो वहां का वह स्टेट्समैन सेक्रेटरी ऑफ स्टेट उसके बायोग्राफी लिखिए तो उसने ये स्टीव जॉब्स की भी बायोग्राफी लिखी है आखिर आखिर में स्टीव जॉब्स को कैंसर हो गया था तो पता है की अभी वो जान वाला है तो वाल्टर इस ये जो ऑथर है उसे स्टीव जॉब्स के पास में रेगुलर जाता था उसकी सब जो बायोग्राफी कल नोट्स जो स्टीव जोश बोलना था वो नोट कर देता था किंतु फिर उसके विरोधियों का जो कहना था उसको भी वह नोट कर देता था तो फिर उसने बहुत ही बैलेंस बहुत ही मतलब एक फिलोसॉफिकल यदि पढ़ने में सही-सही उड़ देखो पढ़ने लायक किताब है की किस तरह से देखिए की डिसिप्लिन आदमी के स्टीव जॉब्स हो रहे हैं वेरी क्रिएटिव परसों बहुत ही क्रिएटिव परसों था वो जी चीज में हाथ डालता है वो अपने को डिसिप्लिन करेगा तो सक्सेसफुल होगा ही होगा किंतु उसका सबसे बड़ा प्रॉब्लम ही यही था की क्रिएटिव था और इन डिसिप्लिन था तो यह दोनों ट्रेड जब इकट्ठा होती है तो उसके जो कलीग है उसका फैमिली है उसके जो वर्कर्स हैं उसके जो फ्रेंड्स हैं उसमें बड़ा ही डेंजरस इफेक्ट होता था उसकी जो वाइफ है उसको उसने छोड़ दिया उसकी जो पहले लड़की थी उसको भी उसने छोड़ दिया उसे लड़की को पता ही नहीं की स्टीव जॉब्स उसका फादर है बहुत सालों के बाद में जब स्टीव जॉब्स का उसका दिमाग ठिकाने आया तो फिर उसने अपनी लड़की के पास जाकर के उसने एक्सेप्ट किया की हां वो तुम जो हो की वो मेरी डॉटर हो तो ऐसा वो मतलब इन डिसिप्लिन में और एक क्रिएटिव फैंसी में रहकर के उसने एप्पल की स्थापना तो कर दी किंतु एप्पल कंपनी जी ग्रेटनेस पे है उसे ग्रेटनेस पे जान के लिए उसको अपने मन को डिसिप्लिन करना पड़ा था की अनडिसीप्लिनड लाइफस्टाइल जिसको कहते हैं दिस बिल नोट डू दिस बिल दिस मेक गिव यू सम इनिशियल क्रिएटिव इतिहास बट आईएफ यू वांट तू बी कम ट्रॉली ग्रेट आईएफ यू वांट तू क्रिएट समथिंग ट्रॉली यूनिक लॉन्ग लास्टिंग एवर्लास्टिंग इफेक्ट दें यू बिल हैव तू डिसिप्लिन योर मन यह अध्यात्म के क्षेत्र में जितना सही है इतना ही सही ये बाहर के क्षेत्र में भी है और ये बायोग्राफी यदि आप पढ़ सकते हैं तो आई बिल ट्रॉली रिकमेंड की किस तरह से वो एक क्रिएटिव जीनियस ऊपर में जा रहा था फिर इन डिसिप्लिन की वजह से वो गद्दे में गिरा फिर अपने खुद डिसिप्लिन करके फिर से उसने ही अचीव्ड इम्मोर्टालिटी इन डी वर्ल्ड ऑफ बिजनेस और क्रिएटिविटी तो मैंने सही सही एक बहुत ही सुंदर वो एग्जांपल है तो यहां पे भी वो ठाकुर कहते हैं विद्यासागर के बड़े में हालांकि विद्यासागर का स्टीव जॉब्स की तरह इंडिसीप्लिन नहीं था वो ब्राह्मण थे और ब्राह्मण लोगों का क्या होता है जन्मगत कुछ डिसिप्लिन तो होता ही है थ्रिल संध्या करना है फिर जो है की वो जो खाने-पीने में संयम रखना है यह सब तो ब्राह्मण लोगों में जनरली होता ही है बोलकर के विद्यासागर के सामने इतना बड़ा अगर कोई क्राइसिस नहीं था जैसे की उसके सामने आया था टीवी के सामने आया था तो बोल करके विद्यासागर का लाइफ में से बहुत ही सुंदर और अच्छा था किंतु यदि आप उसे लाइफ से आपको संतोष है मैंने आप सेटिस्फाइड की इस जन्म में जितना पन था मैंने का लिया तब तो कोई दिक्कत ही नहीं है तो नेक्स्ट जन्म में जो है आपने जो इस बार इतना जो सत्कर्म करके जो बैंक बैलेंस बनाया है उसको लेकर के आप नेक्स्ट जन्म में जो है अवतरित होंगे और फिर इस संपत के आधार पर इस संपत के फाउंडेशन पर आप अपनी साधना शुरू करेंगे किंतु यदि किसी के मां में है की मैं यही पे आकर के क्यों अट जो ठाकुर स्वयं जो है वह मेरे घर आए हैं मुझे तो पता ही नहीं की ठाकुर जैसे कोई है परमहंस जैसे कोई दक्षिणेश्वर बोलकर के वहां पर काली मंदिर है वहां पर गरीब पुजारी काली की पूजा भी करता है और उनको ईश्वर ज्ञान प्राप्त भी हुआ है आत्म दर्शन भी हुआ मुझे कुछ विद्यासागर को कुछ नहीं पता तथा ठाकुर स्वयं उनके घर पर चलकर आए तो विद्यासागर को उचित था की ठाकुर की बात ग्रहण करते ठाकुर को तीन-चार बार मिलने के लिए जाते अपना जीवन जो है वो अभी आजकल विद्यासागर को हम ग्रेट मां के रूप में पहचानते हैं ज्यादातर लोगों ने उसे शायद जो हिस्ट्री पढ़ने हैं उन्होंने विद्यासागर का नाम सुना होगा किंतु जो ट्रॉली ग्रेट है जो लोग के सही सही महान है जैसे सम्राट अशोक है या तो फिर सम्राट चंद्रगुप्त जो है या तो फिर जो कृष्णा चैतन्य गौरांग महाप्रभु है ये लोग जो ट्रॉली ग्रेट मैन एक इतने सर्वोच्च लेवल पे बैठे हुए हैं की जिन्होंने भारत की धरती को अपने कंट्रीब्यूशन से उन्होंने और भी समृद्ध बनाया है तो उसे लेवल पर विद्यासागर जा सकते थे किंतु हो सकता है की भीतर में एक घमंड र गया होगा की ये गरीब ब्राह्मण है काली का पुजारी है तो मैं ग्रेट हूं तो मेरे पास आएगा मुझे उसके पास जान की क्या जरूर है तो ऐसा सोच करके उसने वह अपॉर्चुनिटी गवां दी हमको किंतु याद रखना है की हमने चाहे ठाकुर सामने से हमारे पास आए हो की हमने फिर हम सोचते हम हम लोग सर्च करते थे की हां मुझे इस तरह से अध्यात्म या तो फिर धर्म क्या है वो समझना है तो हमने हमारा जो सर्च जो है हमारी ये जो मैन जो मोक्ष थे जो है वो हमको ठाकुर के पास ले आया हो कैसे भी करके हम ठाकुर के पास आए हो किंतु यह बात याद रखना है की ये जो आध्यात्मिक डिसिप्लिन जो है स्पिरिचुअल डिसिप्लिन उसके बिना जो है हम किसी भी क्षेत्र में एक लेवल के से ऊपर नहीं उठ पाएंगे कोई एक लेवल हम शायद अटेंड कर लेने की हमारा बैकग्राउंड है हमारा एजुकेशन है हमारे कांटेक्ट से हमारा फैमिली है वह हमको एक लेवल तक शायद पहले लेकर जाएगा बट आईएफ यू वांट तू ब्रीच जो दिस बाउंड्रीज क्रिकेट में होता है ना वो चौक का और मारते हैं वैसे आप एक-दो एक-दो रन लेते रहते हैं किंतु फिर बीच-बीच में वो बैट्समैन चौक का और भी मारता है तब लोग सही सही तालिया बजाना शुरू करते हैं तो वैसे ही एक दो एक दो रन लेना वो हो सकता है हमारे से हम जी तरह से र रहे हैं किंतु चौक मारना है तो हमको जो है ठाकुर के कहे अनुसार अपने जीवन को परिवर्तित करना होगा अभी ठाकुर आगे कहते हैं हृदय में क्या है इसका ज्ञान प्राप्त करने के लिए कुछ साधना आवश्यक पूछते हैं साधना क्या बराबर करते ही जाना चाहिए श्री रामकृष्ण कहते हैं नहीं पहले कुछ कमर करनी चाहिए फिर ज्यादा मेहनत नहीं उठानी पड़ती जब तक तरंग आंधी तूफान और नदी की मोड से नौका जाति है तब तक मल्ला को मजबूती से पटवार पकड़ी पड़ती है उससे पर हो जान पर फिर नहीं जब वह मोड से बाहर हो गया और अनुकूल हवा चली तब वह आराम से बैठा राहत है पटवार में हाथ पर लगाएं राहत है फिर तो पाल टांगने का बंदोबस्त करके आराम से चिलम भरत है कामिनी और कंचन की आंधी तूफान से निकाल जान पर शांति मिलती है देखिए यहां पर ठाकुर ने कितनी बड़ी बात का दी की पूछते हैं यह जो साधना है यह जो संघर्ष है आध्यात्मिक क्या हमको वो प्रतिदिन करते जाना पड़ेगा क्या पूरा जीवन भर यही चलेगा ऐसा नहीं होगा किसी दिन के आदमी तक करके बैठ जाए फिर सोने लगे अरे भाई अभी मेरे से कुछ होगा की नहीं होगा मैं क्या करूं क्या मैं हर समय मुझे ये करते रहना पड़ेगा तो मार्केट कहते हैं की सब प्रत्येक दिन हर दिन ऐसा नहीं होगा जी समय झाड़ और वृष्टि होती है उसे समय जैसे वो जो ये नोखा चलने वाला है वो अपना वो जो है वो सेल पकड़ करके वो जो है थोड़ा बहुत उसको मौका को पकड़ के रखना है उसके बाद में झाड़ और वृष्टि चली जाति है तब वो बैठ करके आराम से तंबाकू खाता है तो देखिए हम जब यंग होते हैं खासकर के यह 30 और 40 में यह जो मिड लाइफ क्राइसिस जिसको बोलते हैं वह सभी के लाइफ में जनरली आता ही है जब हम यंग होते हैं तब एक ऐंठूसियाज्म होता है एक फिजिकल फिटनेस होती है एक हमारे पास में हम एक्सप्लोर टेरिटरी है चलो आज मैं ग्रेजुएट हूं क्या पता मुझे कितनी अच्छी जब मिल जाए क्या मेरा डेवलपमेंट हो जाए कहा मुझे प्रमोशन मिल जाए कहां मुझे वो जो है यहां पे बूस्ट मिल जाए मैं क्या कुछ कर दूंगा और मतलब जब हम अपने 20 में होते हैं 30 में होते हैं तब ये बहुत साड़ी आशाएं होती है किंतु फोर्टेज और 50 आते-आते जो भी हमारी आशाएं है जितना भी अपना कैपेसिटी है उसे लेवल तक अभी हम ए गए हैं हमको लगता है की अभी इससे आगे डेवलपमेंट होगा की भी नहीं होगा क्या पता मैंने जो जितने बड़े-बड़े वो जो सपना देखें थे उसमें से तो कुछ हुआ नहीं बहुत सारे लोग जब वो पढ़ाई-लिखाई करते हैं तो वो ये सब स्टीव जॉब्स और वो जो ये जो अभी आजकल क्या अलोन मास्क है इन लोगों की बातें सुनकर के वो भी सोचता है की मैं कोई कंपनी स्टार्ट करूंगा एक एंटरप्राइज स्टार्ट करूंगा और फिर जो है मैं भी बिलेनियर हो जाऊंगा किंतु बेचारे को अभी जो है 10-12000 का जब भी मिल रहा है तो मुश्किल से मिला है उसमें भी वो सुबह को 10:00 बजे निकाल जाता है चाहे तो रात को 10:00 बजे घर वापस लौटता है यह सब 12 घंटे का जब और वो भी 10 12 15 20000 सैलरी तो उसके जितने भी सपना है वो सब वो 30 और 40 आते-आते वो ठंडा हो जाते हैं हमारे यहां पर भी ऐसा होता है हम लोग जॉइन करते हैं तो आपको पता होगा की 9 साल तक हम लोग ब्रह्मचारी रहते हैं उसके बाद में जो है दसवें साल में हमको जो है सन्यास मिलता है तो सन्यास के बाद में हो सकता है की कोई अच्छी सी पोस्ट मिली ना मिली या तो फिर कोई सीरियस रिस्पांसिबिलिटी मिली हमको तो हमको लगता है कभी-कभी की हां चलो मुझे अभी मैं कोई अच्छी जैसा की पब्लिकेशन में पब्लिकेशन इस समथिंग वेरी फूल फीलिंग पोस्ट यहां पे बैठ करके मैं सही-सही मुझे लगता है की मैं अपने ऑर्डर को कुछ कंट्रीब्यूट कर रहा हूं किंतु यदि मां लीजिए की मुझे पब्लिकेशन में ड्यूटी नहीं मिलता और कहानी पर ड्यूटी मिलता है जैसे की भंडार है या तो फिर मंदिर में ऐसे पुजारी तो हो सकता है की मेरे मां में ऐसा विचार आए करें मेरे में इतना टैलेंट है मिनट ठाकुरमार स्वामी जी को इतना पढ़ा है और आखिर में कुछ नहीं करके मुझे खाना बनाना है यहां पे यहां पे हॉस्टल है तो हॉस्टल के वो गरीब लड़के रहते हैं तो उन लोगों के लिए खाना ही बनाना मेरे पास में कितना टैलेंट है मैं चाहे कितना कर सकता हूं मैं स्कूल चला सकता हूं मैं हॉस्पिटल चला सकता हूं मैं एक बड़ा सेंटर चला सकता हूं उसकी वजह ना की एक कोनी में बैठकर के किचन में बैठ करके वो जो कुक क्या कर रहा है रसोई उसके ऊपर नजर रखना क्या यही मेरा वर्थ है यही मेरी आखिर में गति है तो ये सोच कर के कभी-कभी फ्रस्ट्रेशन ए जाता है तो मैं जब ब्लू मठ में था तुम्हें वहां पर आरोग्य भवन है जहां पे रिटायर साधु रहा करते थे तो रिटायर साधुओं को मिलने के लिए मैं रेगुलरली जाता था क्योंकि क्या है की इन लोगों का वह तुझे 80 प्लस 90 प्लस होते थे तो उन्होंने पूरा जीवन जो है सन्यास जीवन के अच्छे बुरे जो भी एक्सपीरियंस से उन्होंने का लिए उनका वह जो उनका जो लर्निंग जो है की साधु जीवन सही क्या होना चाहिए हम लोग वैसे कथामृत में कंप्लीट वर्ष में पढ़ने हैं किंतु वह तो थ्योरी हो गया इसका प्रैक्टिकल करने से क्या होता है क्या परिणाम होता है वो देखना है तो रिटायर साधुओं को देखना है आरोग्य भवन में तुम्हें बीच-बीच में जय करता था और कुछ-कुछ सदों के साथ में मेरा बड़ा ही अच्छा उन्होंने हमारा रिलेशन हो गया था अभी जैसे काली कृष्णा महाराज थे वो वहां पे आरोग्य भवन में अभी तो उनका देहांत हो गया किंतु बड़े ही सीनरी थे हमारा ट्रेनिंग सेंटर जब से पहले बेस्ट आ आई थिंक 1956 में 1958 में ट्रेनिंग सेंटर जो स्टार्ट हुआ था उसकी पहले बैच में वह महाराष्ट्र है और जब मैं बैलूनमेंट में था ऑलरेडी हीरोज 90 प्लस किंतु फिजिकल इतने फिट थे की शाम को एक बार वो वॉकिंग करने के लिए वो वहां पे बाहर में निकलते थे वो मेरा भी वो वॉकिंग करने का समय था तो एक दो बार उनके साथ बात हुआ तो फिर हमने ठीक कर ली मैंने ठीक कर लिया जब भी महाराज वर्किंग के लिए जाते हैं मैं भी उनके साथ साथ में जुड़ जाऊंगा अभी 90 एयर का आगे है कितने ही जो भी प्रभु महाराज है फिर गंभीर महाराज है भूतेष आनंद जी महाराज है सबको रंगनाथन जी महाराज सबको उन्होंने देखा है सबके बड़े में वो जानते हैं मैं तो आया था तब तो ये रंगनाथन जी महाराज प्रेसिडेंट है तो वो भी उनका तो शरीर जान वाला था बाद में जो है बहनानंद जी महाराज प्रेसिडेंट हुए तो अभी उनके साथ में तो अभी दो दिन का ब्रह्मचारी मेरा कितना बात होगा तो यह महाराज किंतु काली कृष्णा महाराज का बड़ा अच्छा कंटेंट और वो सब उनके साथ में उनकी पुराने पुराने दोनों की बातें बताया करते थे मुझे इतना अच्छा लगता था सुनकर क्या तो कभी-कभी डेली तुम्हें उनके साथ वॉकिंग करता ही था फिर बीच-बीच में मैं क्या करता था की आरोग्य भवन में चला जाता था तो महत्व सीनरी साधु है तो अब ये क्या है की उनके लिए जो फ्रूट वगैरा जो है वो उनके लिए उनके रूम में रहेगा रहा करता था अभी बेलूर मठ जो है वो पूरा दूसरा नगर मठ है जैसे आप अपने दूसरे सेंटर में देखेंगे खाने-पीने की कितनी सुविधा है बेलूर मठ में किंतु कुछ नहीं है सीनरी साधु है तो उनको वह जो पाठ्य के रूप में डायट के रूप में वह जो हेल्दी फूड जो मिलन है फ्रूट वगैरा वह उनको मिलेंगे किंतु हम जो यंग साधु हैं वो वहां पर वह मुड़ी रहती है और फिर वो चाय रहती है पानी वाली और थोड़ा वो बिस्कुट राहत है तो हमारे लिए वही राहत है तो मैं वो महाराज के रूम में चला जय करता था महाराज भी वो इतना सर वो सब और आलू और माल एप्पल बनाना वगैरा ऑरेंज वो पढ़ा राहत था तो मुझे मिला देते थे अभी तुम खाओ मैं तो इसमें से कितना खाऊंगा तो उनको भी वो जो है की किसी के साथ बात करके अच्छा लगता है और मुझे भी चलो ये खाने पीने को मिल जाता है तो मैं उनके रूम में रेगुलर जय कर रहा है तो उसे समय क्या था मैं पहले भी जाता था आरोग्य भवन में तो बहुत सारे साधुओं के साथ पहचान हो गया मैंने देखा की साधु जो है रिटायर साधु दो तरह के होते हैं एक तो जो है की सब समय कंप्लेंट करते रहते हैं की हां मैं वहां उसे सेंटर में था फिर उसे सेंटर में से मुझे निकाल दिया गया और मेरी तो वहां पर रहने की कितनी इच्छा थी मैंने इतना कम किया किंतु कोई रिकॉग्निशन मुझे नहीं मिला मुझे वहां से निकाल दिया ऐसा वो शत कंप्लेंट करते रहेंगे और यह जो काली कृष्णा महाराज जैसा है वह 90 प्लस आगे है किंतु इशोपनिषद एक थोपनिषद है गीता है वो सब उनको मुक्त है और बीच-बीच में वो श्लोक वगैरा डालते जाएंगे बटन में बटन में श्लोक बोलते जाएंगे और उसकी व्याख्या करते जाएंगे मुझे इतना आनंद आता था अभी देखिए ऐसा नहीं है की काली कृष्णा महाराज के जीवन में कोई फ्रस्ट्रेशन नहीं था या उनको कोई फेलियर का सामना नहीं करना पड़ा था या तो फिर उनको उनकी जो इच्छा होगी की मुझे इस तरह का कम मिले या इस तरह का सेंटर में मेरा पोस्टिंग हो या इस तरह की पोस्ट मुझे मूल्य ऐसा वो एंबीशन ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता किंतु जो फुलफिल हुआ की ना हुआ उसका फ्रस्ट्रेशन उनके जीवन में नहीं है ही ट्रांसकेंडेड जो ठोस फ्रस्ट्रेशन और ऑफर फूली तू डी फिट ऑफ ठाकुर तो यह करण है वैसे जनरली 90 प्लस जो लोग होते हैं तो कैसे वह बेचारे चुपचाप बैठे रहते हैं या तो फिर शांत भाव में रहते हैं जैसे ही मैं उनको मैं मिलता हूं तो वैसे वह गीता उपनिषद की बातें शुरू कर देते हैं कितना उनके चेहरे पर हास्य है और कितना मतलब आनंद उनके चेहरे पे ए रहा है उन्हें ट्रॉली एक अपने ट्रेडिशनल साधु जो है वो इज्जत है और कुछ-कुछ साधु को मैं देखा था उनको देखकर के मैं दूर भगत था वो पकड़ लेंगे तो अभी कंप्लेंट करना शुरू कर देंगे अरे तुम्हारा वो ये ऐसा है वो साधु ऐसा है यहां पे नहीं हो रहा है मेरे जमाने में इतना अच्छा कम होता था अभी आजकल के साथ वो कम ही नहीं करते दुनिया भर की कंप्लेन रहेगी तो एक कंप्लेनिंग साधु और ये प्रश्न मुख्य साधु देखिए की वो उसे समय मुझे समझ में आया की हमारे ये जो ठाकुर कहते हैं ना की शुरू शुरू के जीवन में झाड़ वृष्टि सभी के लाइफ में होते हैं किंतु एक बार संघर्ष करके वो समय अपने पर कर लिया तो फिर आप आराम से बैठ करके तंबाकू खाएंगे हुक्का पियेंगे तब आपका जो है जीवन जो है शांत दूर हो जाएगा और आपको मिलने के लिए लोग सामने से आएंगे आपको लोगों को बुलाने की जरूर नहीं पड़ेगी है और यदि झाड़ दृष्टि में अपने गफलत कर दी उसे समय जल्दी है की आप समय के अनुसार कार्य एन कर पे तो फिर पूरा जीवन जो है बैठ करके कंप्लेंट करना है दूसरे लोग भी आपसे दूर जाना शुरू हो जाएंगे अरे वह नेगेटिव है उसका मन उससे दूर ही रहो वो उसके साथ बात करके ही मैं डिप्रैस हो जाता हूं ऐसा करके लोग आपसे दूर होना शुरू करेंगे तो देखिए की इतनी छोटी सी चीज में ठाकुर ने हमको पूरा जीवन को किस तरह से जिसको खासकर के मिड लाइफ क्राइसिस कहते हैं उससे पर होने का क्या तरीका है ठाकुर ने हमको बता दिया है अच्छा तो आज यही तो कल फिर से मिलता है ओम शांति शांति