Transcript
आपका यह धर्म स्वरूप अवतार कल हमने देखा की किस तरह से ठाकुर नरेन के साथ में वह गाना बोले रीति रत्नाकर चले हृदय रूपी जो रत्नाकर अर्थात की समुद्र है उसके देने से हमको अवश्य रखना प्रताप हो तो अभी यह गीत समाप्त होने के बाद में मास्टर महाशय लिखने हैं नरेंद्र और आहार बंधु गण पंचवटी चटाल हुई थे और ठाकुर ने उनको पंचवटी के तले में वह ध्यान करने के लिए जाप करने के लिए भेजो था उसके बाद में ठाकुर स्वयं वहां पर गए थे फिर ठाकुर ने गीत गया गीत समाप्त होने के बाद में अभी नरेन और उनके बंधु वहां जो पंचवटी के नीचे में वो जो सीमेंट का वो जो गुजराती में बोलते हैं चबूतरा तो वो जो बनाया हुआ है प्लेटफॉर्म जैसा जहां पर बैठकर पेड़ की चारों और एक राउंड प्लेटफॉर्म जैसा बंता है जी पर बैठकर लोग पहले गांव के लोगों वहां पर बैठकर के गैप लगाते थे ठाकुर ध्यान करते थे तो वैसे ही वे लोग वहां पर बैठे थे अभी वहां से नीचे उतारे और ठाकुर के पास में आकर के खड़े र गए ठाकुर दक्षिण दिशा की और हो करके उनके साथ में बात करते करते अपने घर की और अपने कमरे की और वापस जा रहे हैं ठाकुर बाल इथेन डब दिल कमीर धरते पैर ठाकुर कहते हैं यदि हम अगाध समुद्र में यदि डुबकी लगाते हैं तो मगरमच्छ हमको पकड़ सकते हैं हमको करने को ए सकते हैं किंतु हलुड मखले कमीर छुए ना परंतु हल्दी शरीर पर लगा देने से वो मगरमच्छ पकड़ेगा नहीं रतन करें हृदय रुपीजे रत्नाकर है उसके गहन जल के भीतर में कम आदि छोटी कमीर अच्छे कम क्रोध मैड रोग मो मच्छर रूपी मगरमच्छ वहां पर रहते हैं किंतु विवेक वैराग्य रूप हॉलीवुड हल्दी लगाने से वे लोग हमको ऊ नहीं पाएंगे तो उनकी मां बड़ी ही परेशान रहती थी की अरे मेरा लाडला बच्चा उनका पति तो उन बच्चे का बच्चे के पिताजी तो जन्म के बाद में ही स्वर्ग सीधा गए थे तो मां का एक लोटा तथा और विधवा मां थी वे दोनों एक साथ में रहते थे अकेले तो अभी बच्चा भी यदि चला जाएगा तो क्या होगा इस समय जब वह नौका में जा रहे थे तो एकाएक एक मगरमच्छ ने आकर के वो शंकराचार्य को पकड़ लिया तो अभी मां बेचारी बड़ी ही परेशान होकर के रो रही है बच्चे को बचाने का प्रयास कर रही है उसे समय शंकराचार्य की इच्छा थी की वो सन्यास ग्रहण करें किंतु उनकी मां किसी हिसाब से उनको परमिशन नहीं देती थी सन्यास ग्रहण करना यानी की बच्चे का तो मृत्यु हुई हो गया बच्चा श्रद्धा करेगा घर छोड़कर चला जाएगा घर कभी वापस नहीं आएगा इस तरह से वह कौन सी मां अपने बच्चे को सन्यास देने के लिए हां कर देगी तो अभी वह तो एक चल रहा था इस समय यह घटना हो गई मगर मचाने आकर के शंकराचार्य को पड़ा है छोटे से थे वह उसे समय उम्र में तो शंकराचार्य कहते हैं की मां मेरा तो वैसे ही मृत्यु होने वाला है तुम मृत्यु से पहले सन्यास लेने की मुझे परमिशन दे दो तो मैन कहा अरे वो भी बेचारी क्या करेगी वो मगरमच्छ के सामने थोड़ी ना हुआ बच्चे को बच्चा पाएगी एक हाथ पकड़ के रखा है किंतु वो तो बड़ा ही जोरदार रक्षा जैसा था तो खींच के ले ही जा रहा है तो फिर उन्होंने कहा हां बेटा चलो तुम्हारा मैं तुमको सन्यास देने की परमिशन देती हो अनुमति देती हूं जैसे ही मैन ऐसा कहा वो मगर ने शंकराचार्य को छोड़ दिया और चला गया वो जैसे कोई देवी स्वरूप ही था जो की इस तरह से रक्षा का रूप लेकर आया था जो भी है शंकराचार्य बैक गए और फिर वो किनारे पे आए फिर अभी मां तो क्या करेगी अनुमति दे दी है सन्यास ग्रहण करने की तो वह रो रही है और शंकराचार्य तो सन्यास के जो मंत्र है एक के बाद एक वीर जहां वगैरा करके मुंडन करके गेरुआ वस्त्र धरण करके फिर मां के पास भिक्षा देने के लिए आते हैं लेने के लिए तो मां कहती है उसकी बेटा तो ठीक है तू अभी तो जा रहे हो मैंने तो अनुमति भी दे दी मैं तुमको कुछ बोलने ही पाऊंगी अभी किंतु मुझे एक वचन दो की मेरे मृत्यु के समय तुम अवश्य मुझे दर्शन देना अवश्य मुझे मिलने के लिए वापस आना तो सही में शंकराचार्य उसे समय तो चले गए किंतु मां का जब अंतिम समय था तो शंकराचार्य ने आकर के मां को फिर से दर्शन दिए थे मां के साथ में रहे थे उसे समय तो ये इस तरह से वो मतलब मगर की ऐसी और एक भी एक कहानी है तो यहां पर ठाकुर कहते हैं की नदी में यदि जंप लगाने से हमको मगरमच्छ 6 मगरमच्छ हमारे अभी क्या होता है की जब हम जब ध्यान साधना करने की शुरुआत करते हैं हम अपना मां को अंतर्मुख बनाने का प्रयास करते हैं उसे समय एक भयानक स्थिति हमारे सामने खड़ी होती है जब तक हमारा मां बहिर्मुख है तब तक हम संसार के विषयों को लेकर के व्यस्त रहते हैं किंतु क्षण हमने संसार के विषयों से अपने मां को अलग किया जी समय हमने संसार की यह बाकी है कार्यकालब घटनावली बाह्य कर्म वगैरा से लेकर के अपने मां को सिकुड़ते गए विथ द्रो करते गए तो जैसे जैसे हम अपने मां को बाकी स्थिति से विद्रोह करेंगे वैसे-वैसे ही हम देखेंगे की भीतर में जान से ऐसा नहीं है की रास्ता बड़ा आसन है लोग सोचते हैं की अच्छा चलो मैं तो इतने दिन तक संसार संसार कर रहा था मैं इतने दोनों तक सोच रहा था की कैसे ज्यादा पैसे कमों कैसे मैं अपने परिवार का खुशियों में बढ़ोतरी करूं किस तरह से यह सब मैं मैटेरियलिज्म जो है यह मटेरियल चीज में ज्यादा से ज्यादा बटर हूं यह जो मैं सोच रहा था तो अभी मैं नहीं सोचता हूं चलो मैं वेट करके जब ध्यान करता हूं तो ऐसा बोलने से ही वह हो जाएगा ऐसा कभी होने वाला नहीं है जैसे ही हम भीतर में प्रवेश करते हैं हृदय में प्रवेश करते हैं ना करने के लिए एकांत में बैठने हैं तभी देखेंगे की भयानक तूफान खड़ा होता है अपना मां जो है जब तक आप अपने मित्रों के साथ बात कर रहे हैं तब तक बढ़िया मजे से वो अपना मां कम करता है जब तक आप अपनी मां लीजिए की मेरी एक नौकरी है नौकरी पे जाकर के मैं कम करता हूं कोई शिक्षक है ना की कोई मां लीजिए पुलिस ऑफिसर है ना की मां लीजिए कोई पॉलीटिशियन है ना की कोई बिजनेसमैन है जो अपना कम जब तक करते रहते हैं लगता है की मैं मेरा मन बड़ा ही हेल्दी बड़ा ही क्या कहेंगे की मैच्योर और इंटेलिजेंट वगैरा है किंतु जैसे ही हमने कर्म बैंड करके थोड़ी रानो तक कुछ समय तक आंख बैंड करके बैठने का प्रेस प्रयास किया पर्यटन किया अपने हृदय में भगवान का दर्शन करने का अपने हृदय में जैसे की मैंने ठाकुर का मंत्र लिया है तो अपने हृदय में मैं विजुलाइज करूंगा की ठाकुर हृदय कमल में बैठे हुए हैं और उनके श्री चरणों में मैं अपना ध्यान पैरों करके अपनी उंगली से या तो माला से जाप कर रहा हूं जैसे ही मैं यह करने का पर्यटन करूंगा देखेगा की एक बयान तूफान अपने मां में खड़ा होता है किस तरह की पागल जैसी बातें अपने मां में लाकर के रखना है कल की ही बात है कल मुझे पुरी रात नींद नहीं आई थी मैं जनरली 9:00 बजे के आसपास में लेट जाता हूं और थोड़ा सा पढ़ना हूं 9:10 बजे तक और 10:30 बजे तक और बाद में सो जाता हूं कभी-कभी नींद ए जाति है कभी-कभी नींद नहीं आई और नहीं नींद आई तो मैं पुरी रात भर जगत राहत हूं फिर कभी सुबह को मंगल आरती के बाद रूम में लौटता हूं तो शायद आधा एक घंटा नींद आएगी तो मैं कल पूरा रात भर जग था तो मैं जागते नींद नहीं आई है तो मैं क्या करता हूं वो चाहे तो वो एक लड़का लेकर आता है तो चाय पड़ी रहती है मैं एक्स्ट्रा चाहे मंगवा लेट हूं तो मुझे पता है की ऐसा पराई ऐसा होता है की रात को मुझे चाय पीनी पड़ेगी और नींद नहीं आएगी तो बटर है चाय पी के कुछ पढ़ने हैं तुम्हें पढ़ने पढ़ने फिर बीच-बीच में सोचता हूं की वातावरण इतना शांत हो जाता है इतना शांत जो मंदिर है पास में ही मंदिर है ठाकुर वहां पर ठाकुर कुत्तों का भी सहन करते नहीं है ठाकुर को हमने चयन करवाया पुजारी महाराज ठाकुर को चयन करवाने के लिए सेन ग्रुप में ले गए किंतु हमको पता है की ठाकुर तो रात भर जग करके ध्यान करने वाले हैं ठाकुर है मां है स्वामी जी है मंदिर पास में ही है और यहां पर सब साधु लोगों के साधु निवास में तो इतना सुंदर वातावरण बंता है तो मैं सोचता हूं की चलो जब करते हैं तो आप सोचिए की इडली स्पीकिंग जब करते-करते इस तरह के पवित्र सुंदर वातावरण में क्या होना चाहिए मां इस तरह से निश जैसे जहां पे थोड़ा सा भी हवा नहीं आता उसे तरह की जगह पे हम यदि प्रदीप को प्रज्वलित करते हैं तो उसकी शिखा जो है अग्नि शिखा कैसे ही निष्कांब हो जाति है जो शब्द उसे किया गए हैं ध्यान शास्त्र में उसे तरह की शिखा और जी थोड़ी सी भी हेल्दी डोलती नहीं है बिल्कुल स्थिर अग्नि की शिखा हो जाति है तो वैसे ही अपना मां हो जाना चाहिए आइडियल स्पीकिंग किंतु यह नहीं होता वो दुनिया वहां भर के कहां-कहां से सब विचार आकर के अपने मां में ए जाते हैं की अरे वो मतलब जिसका की कोई और नहीं है और यदि हम किसी को कहेंगे की मैं इस तरह का विचार कर रहा हूं तो आपको हास्य हंसी आएगी ये किस तरह के बचकानी विचार है मैन छोटे बच्चे इस तरह से वो विचार करेंगे क्या अरे इसने मुझे ऐसा बोल दिया कल जाकर के मैं उसको और ज्यादा सामने कुछ बोल दूंगा आज उसके साथ में झगड़ा हो गया मैं कल जाकर के उसके साथ फाइट करूंगा ऐसे जैसे बच्चों के जैसे विचार होते हैं ना बच्चे को यह कोई मॉडरेशन उसके जीवन में नहीं होता वो यदि बोलना है की मैं खाऊंगा तो वो बोलेगा सोचेगा की मैं 10 कैंडी 10 चॉकलेट का जाऊंगा अभी दो चॉकलेट खाने के बाद में तो हो रहा है मैंने वो कैपेसिटी वो खत्म हो जाति है वह खाने की मां है वो कितना का पाएगा वो सोचता है 10 का लूंगा सो का लूंगा उसको यह पता नहीं है की उसकी कैपेसिटी कितनी है सामने वह कितना ग्रहण कर सकता है या क्या कर सकता है वह सोच की घूमने के लिए जाना है तो पूरा जगत में घूम लूंगा माता-पिता के साथ में झगड़ा होता है तो पूरा चिल्ला चिल्ला करके झगड़ा करेगा मैन वो सब कुछ बच्चा जो करेगा बिकॉज़ ऑफ इस लॉक ऑफ मेच्योरिटी सब कुछ एक्सट्रीम में जाकर के करने का पर्यटन करेगा तो वैसे ही जब हम इस तरह के संपूर्ण शांत परिवेश में मां को ठंडा रखना का पर्यटन करते हैं मां को यह जो सब विचारों की दुकान बैंड करके वहां पे मंदिर को शुरू करने का पर्यटन करते हैं तभी देखेंगे की क्या-क्या से क्या विचार ए जाएंगे कुछ दोनों पहले एक ऐसी घटना हुई थी यहां पे आश्रम में कुछ गेस्ट साधु आए थे तो मैं वहां पर बैठा हुआ था नाश्ता करने के लिए शाम को 5:00 बजे का टाइम होगा तो हमारे यहां आश्रम के ही एक दूसरे साधु उसे समय वहां आए तो अभी होता क्या है की आश्रम में जो चाय बंटी है वह चाय बंटी है कर बजे के आसपास तो हम लोग तो उसे समय 6:00 के 6:30 के आसपास बैठे थे तो यह जो गेस्ट साधु आए तो वे लोग 4:00 बजे की चाय लेकर के पी रहे थे तो हमारे आश्रम के ही दूसरे महाराज आकर के बोलने लगे अरे आप लोग 4:00 बजे की चाय क्यों पीते हैं चलो मैं अभी आपके लिए दूसरी चाय फ्रेश बनाता हूं ऐसा करके उन्होंने चाय बनाई और सभी जो चार-पांच गेस्ट महाराष्ट्र थे उनको दी वो खुद लिए और मेरे सामने ही वेट करके सब लोग पी रहे हैं मेरे साथ में गंभीर लगा रहा है और मुझे चाय नहीं दिया तो अभी मैं भी तो 4:00 बजे वाला पी रहा हूं मैं भी तो वहां सामने बैठा था मुझे तो पूछना चाहिए की महाराज आप लेंगे की नहीं तुम मुझे पूछा भी नहीं और मेरे ही सामने वो फ्रेश चाय बना के पी रहा है और देख कर के मुझे इतना गुस्सा आया था मैंने कहा अच्छा ठीक है मैं भी अभी उन लोगों को इस तरह से इग्नोर करूंगा तो ठीक है अभी कल रात को बैठा हूं अभी ये कहां कितने साल पहले की बात है मुझे तो याद भी नहीं ए रही कल रात को बैठा था वो फैट करके यह हो गई मेरे मां में अच्छा वह साधु ने मेरे चाय बनाई सबको दिया मुझे नहीं दिया ऐसा कर दिया मेरे साथ में अब मैं कितना ही प्रयास करूं ये विचार जा ही नहीं रहा है मेरे मां में से मैं कहां ठाकुर के कथामृत खोलकर के मैं पढ़ने लीला प्रसंग खोल करके पढ़ने की शुरुआत की चलो लीला प्रसंग के कुछ प्रसंग पढ़ लेंगे तो मां एकाग्र हो जाएगा फिर से जाप करते फिर से जाप करता हूं तो फिर से ये गोल घूमती ही बात ए जाति है अब मैंने कहा की इसका कुछ तो उपाय करना पड़ेगा वरना तो इतना सुंदर रहा एक मेरी एक रात पुरी वेस्ट जाएगी नींद भी नहीं हुई जब भी नहीं हुआ फिर मैं आंख बैंड करके सोने लगा की एक्चुअली मुझे क्या करना चाहिए किस तरह से बदला लेना चाहिए मां को छोड़ दो उसको जितना भी उसको मैंने बचपन करना है करने दो तो मैंने क्या मैं उसके अगेंस्ट में कंप्लेंट करूंगा किसी को ना की महाराज को साथ जाकर के झगड़ा करूंगा मैं क्या करूंगा आखिर में किंतु मुझे एक बात समझ में आई मुझे लगा की देखिए गेस्ट महाराज आए हुए थे तो मुझे ही उनको नई इच्छा बनाने का ऑफर करना चाहिए था मुझे इस आश्रम के सन्यासी में तो इस आश्रम में राहत हूं तो महाराज है अतिथि है तो अतिथियों की संभल रखना तो मेरा कर्तव्य है तो दूसरे महाराज ने अपना कर्तव्य समझ करके जो चाय बनाई तो वो तो उनकी महानता है मैं वहां पर बैठकर के बढ़िया मजे से चाय भी पी रहा हूं उनको कुछ ऑफर भी नहीं कर रहा हूं यह भी नहीं कर रहा हूं महाराज आई बैठिए वे लोग सब अपने से सब कर रहे हैं मैं देख रहा हूं कुछ नहीं बोल रहा हूं यह तो मेरी गलती हुई है मुझे ऐसे हो ऐसे यजमान मुझे उनको तो आमंत्रण देना चाहिए कहना चाहिए महाराज जी बैठिए मैं आपके लिए नई चाय बनाता हूं आपके पूरा नीचे क्योंकि ऐसा करके मुझे तो यह सब करना चाहिए था मैंने नहीं करके दूसरे महाराज ने किया तो यह तो मेरे लिए बड़ी शर्म की बात है मैंने दूसरों के ऊपर में गुस्सा नहीं उसे करना है मुझे तो अपने पर शर्म आनी चाहिए तो जैसे ही यह विचार आया की मेरी गलती है मुझे ही अपने हृदय को खोल करके दूसरों के प्रति सहानुभूति दया अनुकंपा ये सब रखना है नहीं की दूसरों के प्रति द्वेष पावर रखना तो जैसे ही ये विचार आया की वो बदला लेने की बात वहीं की वहीं चलेगी अभी ऐसा नहीं है की पूरा एक उन्होंने एक शांत होकर के मां फिर पुरी रात भर जगायन हुआ फिर दूसरे दूसरे इसी तरह के विचार आते रहते हैं किंतु देखिए यह ठाकुर जब कहते हैं की शाद रूपी शाद रिपु रूपी ये मगर हमको जब हमको खाने के लिए आते हैं हमको हनी पहचाने के लिए आते हैं तो ये विवेक वैराग्य रूपी हाइलोध हल्दी अपने शरीर पे लगा करके उसका प्रतिकार करना चाहिए तो यह विवेक यह अपने मां को इस तरह से इमोशनली स्पिरिचुअल मैच्योर करो की यह जो पूछ नमस्कार कहो ना कीकू विचार कहो यह दुष्ट विचार कहो शैतानियत वाले विचार को इंग्लिश में कहावत है की एम्टी मन इस डेविल्स वर्कशॉप मैन यह जो खाली दिमाग राहत है ना वो शैतान का घर है शैतान वहां पर प्रवेश करके वर्कशॉप अर्थात की उसकी यह मैन उसकी लैबोरेट्री है वहां पे बैठ करके वो एक्सपेरिमेंट करता रहेगा कुछ ना कुछ बनाता रहेगा कुछ ना कुछ तोड़ता रहेगा तो मां को खाली मत रखो मां को सब समय इंगेज रखो अभी ऐसा वे लोग कहते हैं किंतु अपने यहां पर तो ऐसा करने को जाएंगे तो बड़ी मुसीबत में फैंस जाएंगे ध्यान करने का अर्थ ही है मां को खाली करना फिर तो वह डेविल आकर के अपना वो लैबोरेट्री खोलेगा और फिर एक्सपेरिमेंट करेगा क्या सब धड़का धड़का करेगा है तो उसका सॉल्यूशन क्या है तो सॉल्यूशन है यह विवेक और वैराग्य अपने मां को इस तरह से गठन करो इस तरह से अपने हृदय के दरवाजे खोलो की हम इस समाज के लिए अपने मित्रों के लिए परिवार जनों के लिए आशीर्वाद स्वरूप बने नहीं की सब समय हमारी वजह से एक कहीं थोड़ा बहुत झगड़ा होता रहे हमारी वजह से टेंशन चला रहे लोग हमारे आने से ही सोचेंगे अरे यह ए गए और फिर से कुछ क्या कुछ लेकर के झगड़ा करेगा पता नहीं क्या करेगा उसके मां में क्या-क्या सब भारत है वो सब समय ऐसा सोचता राहत है की उसने मेरे साथ ऐसा किया ऐसा नहीं हम यदि किसी जगह पे जाते हैं तो लोगों का मां फूल हो जाना चाहिए प्रश्न हो जाना चाहिए की अरे हां यह भाई क्या यह बहन आए हैं चलो उनके साथ में बैठकर के बातें करते हैं अपना मां ऐसा शांत स्वच्छ निर्मल हो जाए कैसा की जब पानी स्वच्छ होता है तो हम पानी के नीचे तले तक कर सकते हैं मैं वहां पर गया था कनखल हरिद्वार में अपना आश्रम है तो वहां पास में ही नीलगंगा है अब जहां पे वो जो संगम है वहां पर तो क्या है की गंगा आरती वो गंगा आरती जहां पर होती है वहां पे तो इतनी भीड़ रहती है की आप रे आप पूछे मत किंतु यह नीलगंगा जो है जो आश्रम के पास में है वो एकदम शांत जगह है और पानी एकदम स्वच्छ निर्मल है वहां पे पूरा एकांत है बहुत ही कम लोग वहां पर जाते हैं तो वहां पर जाकर के मुझे बैठना इतना अच्छा लगता था मैं एक महीना रुक था तो प्रतिदिन में सुबह को शाम को जाकर के वहां पे उसके दंगा के किनारे बैठा राहत था और बस पानी को देखा राहत था पानी की कल कल आवाज सुनकर के मां वैसे ही शांत हो जाता था तो वहां पर देखा था की पानी इतना स्वच्छ निर्मल है की पानी के नीचे कंकर पत्थर रेट जो है विभिन्न विभिन्न कलर के जो पत्थर रहते हैं वह जो स्मूथ पत्थर जो होते हैं एकदम तलवे के पत्थर आपको दिखाई देते हैं और कभी-कभी ब्रह्म हो जाता है की अरे पत्थर दिखते हैं उसका वह तालिया दिखता है ताला वो पानी का तो मैंने पानी ज्यादा गहरा नहीं होगा चलो भीतर में थोड़ा जाके खड़े रहते हैं तो जैसे ही बेहतर में जाएंगे फैट करके आप भीतर में एकदम डब जब लोग गले तक पानी ए जाएगा एक दो स्टेप में ही क्योंकि वो तो बहुत गहरा है वो तो पानी स्वच्छ बोल के पता नहीं चला है लगता है ऐसे ही वो सपना सटक के ऊपर में ही है इस तरह का ब्रह्म होता है तो हमारा मां भी यह हृदय रूपी रत्नाकर यह हृदय रूपी सागर भी इतना स्वच्छ निर्मल होना चाहिए की सागर की गहराई में जो ठाकुर स्वयं निवास कर रहे हैं यह जो बैकुंठ लोग हैं बैकुंठ लोक जो है मां पार्वती भगवान शिवा का जहां पर निवास है वो एकदम स्पष्ट रूप से हमको दिखाना चाहिए फिर वहां जाते-जाते यह मगर वगैरा यह जो रक्षा देव द्वितीय डैन आए तो यह विवेक वैराग्य रूपी 80 ये जो ठाकुर ने ठीक किया था ना है की आज यदि मां का दर्शन नहीं होगा तो मां के हाथ से दक्षिणेश्वर में मां काली के हाथ से खड़क उठा लिया बोला की मां दर्शन नहीं डॉगी तो गला कैट दूंगा तो इमीडीएटली मैन आकर के दर्शन दिया फिर वो अद्वैत साधना की बात निर्विकल्प समाधि में जान का पर्यटन कर रहे हैं ठाकुर पर्यटन किया ही जा रहे हैं किया ही जा रहे हैं उनके गुरुत्व पुरी एक के बाद एक उनको समझा रहे हैं साधना पद्धति ज्ञान योग की फिर भी निर्विकल्प समाधि प्राप्त नहीं होती क्या हुआ आखिर में तोता पुरी ने दीक्षणों का आज का टुकड़ा लेकर के उनके कल के ऊपर में मार दिया अभी वो तो कांच यहां पे कल पे मारेंगे तो कैसा दर्द होगा फिर तोता पुरी ने कहा की अभी इस दर्द के ऊपर में अपने मां को केंद्रित करो जैसे ही ठाकुर ने उसके ऊपर मां को केंद्रित किया वैसे ही देखा की उनका मां हूं हूं करके अद्भुत लेवल पर अधिक वेदांत ने ऊपर उठ रहा है तो साधना में अतीत उपलब्धि में ऊपर में उठ रहा है अभी उसे समय एकाएक फिर से मां काली प्रकट हो गई ढित लोक में ध्ववित भूमि में वापस खींचना के लिए उसे समय ठाकुर ने क्या किया ज्ञान रूपी एसी ज्ञान रूपी तलवार निकाल और मां के दो टुकड़े कर दिए और मां जैसे ही दो टुकड़ों में बाढ़ गई वैसे ही अथवाहित भूमि में ठाकुर स्थापित हो गए उनका मां बुद्धि चित अहंकार संपूर्ण रूप से हमेशा के लिए नष्ट हो गया और वो खुद पूरे विश्व ब्रह्मांड के नियंत्रण या तो फिर विश्व ब्रह्मांड जिसमें से प्रकट हुआ है ब्राह्मण या तो आत्मन उसके साथ में एकाकार हो गए एक ही भूत हो गए फिर जब वो वापस आते हैं तो वो तो फिर जैसे उसे समय जो मां बुद्धि अहंकार होते हैं वो पूर्ण रूप से सात्विक होते हैं उसमें थोड़ा सा भी तनिक भी तमस और रजिस्टर नहीं राहत ऐसे पूरे संपूर्ण रूप से शुद्ध मां को लेकर के वापस आते हैं तो इस तरह से हम जब साधना करते हैं तो मां को समझा बुझा कर के या तो फिर ज्ञान और रूपी 80 को धरण करके यह सब मगरमच्छ को यह सब दैतियों को दोनों को या तो एवं मां काली भी जड़ी सामने ए जाए तो उनको इस तरह से साइड में करके हमको अद्वैत साधना में निराकार साधना में आगे बढ़ाना है धूप में भी हम आगे बाढ़ सकते हैं अद्वैत भी एक रास्ता है अल्टीमेटली रामकृष्ण मिशन में जैसे सोचते हैं की द्वत और अद्वैत अल्टीमेटली तो एक ही एक ही सत्ता है उसके पास में हमको ले जाते हैं पंडित की लेक्चर की विवेक वैराग्य ना आश्रय ईश्वर सत्य आर शब्द विवेक पांडित्य और लेक्चर देने से क्या होगा यदि विवेक वैराग्य नहीं आएगा ईश्वर सत्य है बाकी सब सत्य है या तो फिर अनीता है ये ज्ञान होना ये अंडरस्टैंडिंग होना इसी का नाम है विवेक अर्थात हम लोग जितना ही अभी जैसे मैं इतना कितने ही क्लास करता रहूं किंतु जब मैं रात को जब करने के लिए बैठता हूं उसे समय यह जो वाइन की परंपरा ये घटना चक्र पूरे डेविल्स वर्कशॉप डेविल की लैबोरेट्री में यह सब घटना चक्र जो प्रगठित होते हैं तो जल्दी में उसका मुकाबला एन कर सको तो ये सब मेरा यहां पर बैठकर यह क्लास लेने का यह सब सत्संग करने का क्या अर्थ है ऐसा नहीं है की मैं कर सकता हूं यह तो अंडरस्टैंडिंग ए गई है की चलो इसका किस तरह से आरंभ किया जाए फिर आरंभ करने के बाद हम उसमें सक्सेस होते हैं की नहीं वो दूसरी चीज है टैंक हृदय मंदिर है आगे प्रतिष्ठा करो वकृत लेक्चर तार पर इच्छा हुई तो करो पहले ईश्वर को हृदय मंदिर में प्रतिष्ठा कीजिए फिर जितना वक्त रुता और लेक्चर देना हो वह कीजिए अर्थात की मैन किंतु आजकल की बात अलग है आज सिर्फ में ही नहीं रामकृष्ण मिशन में बहुत सारे महाराज भी क्लास लेते हैं प्रवचन देते हैं ठाकुर ने खुद ने ठाकुर ने तो नहीं स्वामी जी ने खुद ने अपने शिष्यों को इस तरह से क्लास लेने के लिए प्रवचन लेने के लिए कहा था हम लोग जी तरह से ले रहे हैं हम लोग सोच रहे हैं की ठाकुर का नाम स्मरण सुबह-सुबह जो होता है यह मेरी एक साधना है मैं इस तरह से नहीं सोचता की मैं किसी को ज्ञान दे रहा हूं हम लोग जी तरह से प्रवचन या तो क्लास लेते हैं उसका हम इस तरह से अर्थ करते हैं अर्थ गठन करते हैं की हम ठाकुर का नाम ले रहे हैं हम ठाकुर मांस स्वामी जी का ठाकुरमार स्वामी जी की वन लेकिन अब हमारे मुंह से निकाल रही है तो हम लोग खुद उसकी वजह से पवित्र हो रहे हैं ये हमारे लिए साधना है नहीं की सिद्धि प्राप्त करके लोगों को उपदेश देना वो एक अलग हो गया और साधना के रूप में यह लेक्चर देना या क्लास करना साधना के रूप में कर रहे हैं नहीं की हम लोक कल्याण के लिए कर रहे हैं लोक कल्याण का तो कोई रहा है किंतु साधना जो है इसका मुख्य उद्देश्य है तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा