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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत || 27 Oct 1882 - केशव सेन के साथ ठाकुर का नौका विहार || 3 Dec 2024

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः श्री राम कृष्ण कथामृत केशव सेन के साथ में श्री रामकृष्ण देव का नौका विहार आनंद और कथ उप कथन षष्ठ परिच्छेद चल रहा है और 182 27 अक्टूबर यह है दिन मास्टर महाशय हमको दिन तारीख तिथि मुहूर्त नक्षत्र सबके साथ में यह सब घटनाएं हमारे सामने वर्णन की है जिससे कि क्या होगा भविष्य में किसी को यह डाउट नहीं रहेगा कि ठाकुर बोलकर के कोई सही सही पृथ्वी पे थे और उन्होंने यह बात कही है जैसे आइंस्टाइन ने गांधी जी के बारे में कहा था एक बार कि फ्यूचर जनरेशन कभी सोच नहीं पाएगी वह भी डाउट करेगी वो उनको संदेह होगा कि क्या पृथ्वी के ऊपर में इस तरह का कोई मनुष्य चल भी सकता है कि नहीं तो यह ठाकुर के बारे में भी बाद बाद में कुछ-कुछ लोगों ने ऐसा बोलना शुरू कर दिया था ये खास करके एक जो ग्रुप होता है तो उन्होंने ऐसा बोलना शुरू कर दिया था कि ठाकुर तो अनपढ काली के पुजारी थे उनको तो यह सब उच्च आध्यात्मिक तत्व कैसे आएंगे ऐसा कोई होगा काली का पुजारी जिसके कि जिन्होंने किसी भी तरह का सम्मोहन कर दिया होगा मास्टर महाशय के ऊपर में और यह कथामृत है बेसिकली मास्टर महाशय के मन की ही कल्पना क्योंकि मास्टर महाशय अपने से वह एमए थे टीचर थे काफी विद्वान थे फिलोसोफी पढ़ी थी यह वेस्टर्न लिटरेचर बाइबल पढ़ा था तो उसके हिसाब से उन्होंने बहुत सारी बातें ठाकुर के मन में बिठा दी होगी ऐसा बोलने वाले लोगों की कमी नहीं है तो यहां पर किंतु देखिए कि महाशय ने इतना साइंटिफिकली इसको रिकॉर्ड किया है कौन से दिन कौन सी घटना हुई एकदम परफेक्ट रिकॉर्ड के साथ में कि जो डाउट करता है उसको फिर अपना नेगेटिव प्रूफ जुगाड़ करने में उसको बेचारे को तकलीफ हो जाएगी कभी ऐसा होता है ना प्रूफ इतना ओवर वेल्मिनिक यहां पर भी मास्टर महाशय ठाकुर के बारे में जितनी भी घटनाएं लिपिबद्ध करते हैं सब कुछ तिथि वार नक्षत्र ठाकुर यहां तक कि ठाकुर दक्षिणा स्य होकर के बैठे थे ना कि पूर्वा स्य होकर के बैठे थे इतनी जो एकदम छोटी-छोटी जो डिटेल होती है उसका भी उन्होंने वर्णन किया है तो यह जो इस तरह की जो डिटेल है उसका दूसरा भी एक फायदा है कि हमको ध्यान करने में सहजता हो यदि कोई भी प्रसंग हम यहां पर किताब में पढ़ते हैं तो उसी प्रसंग को बाद में हम अपने मन में विजुलाइज कर सकते हैं उसको इनक्टो में अपने को बिठा सकते हैं और फिर किस तरह की कौन सी दिशा में हवा चल रही है गंगा कौन सी दिशा में बह रही है वो तिथि कौन सी है बोलकर के यह पता चलेगा कि चांद कैसा होगा पूर्णिमा होगा अमावस्या होगी ना कि फिर एकादशी द्वादशी कौन सा चांद होगा तो इतना परफेक्ट वर्णन हमारे पास रहने से इसको विजुलाइज करने में और ध्यान करने में भी सुविधा रहती है पहले पहले हम लोग जब बेलूरमठ में मैंने जॉइन किया था उस समय ऐसा था कि हमको प्रतिदिन गीता का एक श्लोक मुख स्त करना है और फिर फ्राइडे को ना ऐसा एक दिन सप्ताह में गीता का क्लास होगा तो हमारे आचार्य महाराज क्या कर सभी को बोलेंगे सात दिन के सात बोल कर के सात श्लोक सात दिन का एक-एक बोल कर के प्रतिदिन के एक-एक कह के सप्ताह में एक क्लास होता है तो भी सात दिन के सात श्लोक तुम मुख स्थ बोलो तो वह ब्रह्मचारी को सात श्लोक मुख स्त बोलने पड़ेंगे पिछले सैटरडे से लेकर के इस फ्राइडे तक के तो अभी देखिए कि ऐसा करके करके बहुत सारी लोगों की गीता मुख स्त होना शुरू हो गई थी मैं भी उस समय मैं जब ट्रेनिंग सेंटर में था उस समय पांच छ महीना जितना तो मेरे भी चार से पांच चैप्टर मुख स्त हो गए थे तो यह गीता के श्लोक मुख स्थ करना बड़ा आसान क्यों है क्योंकि वह छंदों बद्ध है जो कोई भी लिटरेचर कोई भी टेक्स्ट दो तरह के फॉर्मेट में रहती है एक तो है गद्य दूसरा है पद्य प्रोज एंड पोएट्री एक छंदों बद्ध यानी कि पोएटिक फॉर्मेट में जो टेक्स्ट रहती उसको मुख स्थ करना आसान होता है किंतु जो गद्य फॉर्म में होता है जो कि प्रोस फॉर्म में होता है उसको मुख स्त करना थोड़ा सा मुश्किल होता है क्यों क्योंकि पोएट्री का एक फॉर्मेट है एक मीटर है एक छंद है एक छंद का लय यदि आपको समझ में आ गया तो फिर लय के अनुसार आप नेक्स्ट जो वर्ड है वह आपको ऑटोमेटिक मन में आने लगेंगे यह अपना एक साइकोलॉजिकल ट्रिक है ये सूत्र लिटरेचर जो है सूत्र लिटरेचर को डेवलप क्यों किया गया बड़ी-बड़ी टेक्स्ट थी उस टेक्स्ट को उसको पॉइंट बना कर के हमारे लिए सूत्र में बना दी गई जैसे हम लोग फिजिक्स पढ़ते थे या तो फिर ये सोशल साइंस पढ़ते थे उसके बड़े-बड़े जो पैसेजेस होते थे तो परीक्षा में जद प्रश्न पूछा जाएगा कि बताइए कि जो पानीपत का युद्ध है उसका क्या परिणाम हुआ उसका भारत के इतिहास में में क्या असर हुआ वगैरह यदि प्रश्न होंगे तो उसके जो तीन जो तीन चार पेज भर के उसका जो उत्तर होगा उसको आप 10 12 पॉइंट में बना दीजिए और 10 12 पॉइंट याद रखने से ही उसके बेस के ऊपर में प्रत्येक पॉइंट में से आप एक्सपें करके एक पैराग्राफ लिख सकते हैं तो इसको यह सब मेमोरी ट्रिक्स है अपने को याद रखने के लिए तो इस तरह से याद रखने के लिए एक तो सूत्र लिटरेचर है अतः योगा अनुशासन योग चित्तवृत्ति निरोध तदा दृष्ट स्वरूपे अवस्था हमम यह सब योग सूत्र के सूत्र है तो इतने छोटे-छोटे की योग चित्तवृत्ति निरोध इतने में ही आप इसको यदि एक्सपें करने को जाएंगे तो आप पूरी किताब लिख सकते हैं एक ही सूत्र के ऊपर में तो इसको एक सूत्र बद्ध तरीका है मुख स्थ करने का दूसरा एक तरीका है छंदों बद्ध कि छंद में बद्ध कर दिया कर्मण्य वाही दिका रस्ते मा फलेशु कदाच नम तो इस तरह से देखिए कि यदि यह एक सूत्र है कि भगवान कृष्ण कर्म के बारे में क्या कहना चाहते हैं एक ही जो श्लोक है उसको एक्सपें करने से हमारी अंडरस्टैंडिंग काफी बढ़ जाएगी आपको पूरा महाभारत पढ़ने की जरूरत नहीं है गीता के 700 के जितने भी श्लोक हैं उसको यदि आपने मुख स्थ कर दिया तो पूरा गीता ही नहीं पूरा हिंदू शास्त्र जो है हिंदू धार्मिक आध्यात्मिक शास्त्र उसका बहुत हद तक आपको आयत हो जाएगा तो सूत्र बद्ध करने का एक तरीका है दूसरा तरीका है छंदों बद्ध करने का पोएटिक फॉर्म में लिखने का और तीसरा तरीका है यहां पर ठाकुर जो करते हैं ठाकुर करते क्या है देखिए ठाकुर कथामृत की टेक्स्ट का ठीक-ठीक एकदम ध्यान से एनालिसिस करिए आपको क्या देखने को मिलेगा यह सब चीजें हमको ट्रेनिंग सेंटर में सीखने को मिली थी उससे पहले मैं समझता नहीं था कि क्लोज रीडिंग क्या है टेक्चुअल एनालिसिस क्या है क्लोज रीडिंग करेंगे टेक्चुअल एनालिसिस करेंगे तो टेक्स्ट के भीतर में एक रिधम होती है वो रिधम समझ में आएगी किंतु ये रिदम कब होगी जो कि एकदम एक्सपर्ट लिटरेचर जो जिसको लिटरेचर की एक बहुत ही अच्छी अंडरस्टैंडिंग है वो एक पार्टिकुलर रिदम में लिखेगा यह रिथम यदि हमको समझ में आ जाती है तो उस टेक्स्ट के भीतर में हमारा एक इनसाइट बन जाता है हमको याद रखने के लिए यह सब चीजें आसान होती है तो यहां पर देखिए कि कथामृत के पीछे में दो जीनियस है मास्टर महाशय का बंगाली लिटरेचर में जो प्रभुत्व था वह तो है ही है किंतु ठाकुर का अपना एक इनसाइट है मनुष्य की साइकोलॉजी के भीतर में तो ठाकुर का देखिए कि किस तरह से वह बोलते हैं ठाकुर के कहने की वाणी की रिदम क्या है उनके कथामृत का य एक रा राग में जैसे कि मने जैसे यह सब ममन कल्याण फिर ये भैरव भैरवी यह सब जब राग है य ठाकुर का भी कथामृत राग ऐसा आप कह सकते हैं इतना सुंदर रूप से रिदम में बोलते हैं ठाकुर के बोलने की रिदम क्या है लय क्या है पहले तो एक उपदेश देंगे कोई भी एक सिद्धांत वाक्य देंगे उसके बाद में उस सिद्धांत वाक्य के ऊपर में उपमा देना शुरू करेंगे एक के बाद एक उपमा देता जाएंगे और तब तक यह और यह उपमा भी इतनी सहज सरल रूप से यह सब उपमा एं होंगी कि हमारे हृदय को छू जाएगी आपको कोई बहुत ज्यादा पांडित्य या तो कोई बहुत ज्यादा हिस्ट्री लिटरेचर वेदांत साइकोलॉजी फिलोसोफी ईस्टर्न वेस्टर्न यह सबका स्टडी करने की जरूरत नहीं है दिन प्रतिदिन के यह जो सब उदाहरण है उसी में से यह ठाकुर उपमा एं देते हैं और यह उपमा या तो फिर कहानियां यह दो ठाकुर अपने उपदेश के साथ में एसोसिएट करते हैं तो देखिए कि पहले एक सिद्धांत वाक्य अर्थात कि एक उपदेश उसके बाद में उसको इलस्ट्रेट करने के लिए उसको सहज सहज गम्य बनाने के लिए वह कोई उपमा देंगे या तो फिर कोई कहानी कहेंगे और प्रत्येक सिद्धांत वाक्य के साथ में मिनिमम दो से तीन उपमा एं या कहानियां जुड़ी होंगी अभी आप जद कथामृत का एनालिसिस करते हैं देखिए कि आप कथामृत की टेक्स्ट को कितने डिवीजन में डिवाइड कर सकते हैं सर्वप्रथम तो सिद्धांत वाक्य और उपमा यह एक पूरा पोर्शन हो गया पेंसिल लेकर के बैठिए देखिए कि कथामृत में उपदेश क्या है और फिर मार्क आउट करते जाइए कि इसके साथ में एसोसिएटेड उपमा या तो फिर उदाहरण या तो फिर कहानी कौन सी है तो ऐसा करके करके काफी कुछ कथामृत का लय जो है कथामृत का जो राग है समझ में आने लगेगा यह तो एक पोर्शन हुआ कथामृत का फिर दूसरा पोर्शन क्या है कि ठाकुर देखिए कि जब भाव में आ जाते हैं तो कितने एक के बाद एक भजन कीर्तन गाना शुरू कर देते हैं कथामृत में कभी ऐसा देखा है मास्टर महाशय का इतना क्लोज ऑब्जर्वेशन था सभी चीजों के ऊपर में क्या ऐसा कहीं प ऐसा लिखा है कि कोई नरेंद्र को बोला ठाकुर ने मानो चलो नीचे कत ने कि ऐसा कोई भी एक गीत गाओ तो नरेद फिर सीधा गीत गाना शुरू कर देता है क्या वह पॉकेट में वह भजन की किताब रखी है ना कि आसपास में से कोई भजन की किताब रखी है ऐसा है क्या कि जिसको खोल कर के नरेंद्र देख कर के गा रहा है आजकल जितने भी भजन गाने वाले को देखेंगे कि वो नजर के सामने हारमोनियम के ऊपर में भजन की किताब खुली रखी है फिर उसको देख कर के गाएंगे बड़े कम जो गायक होते हैं जिनको यह सब भजन मुख स्त होते हैं तो देखिए कि अभी भजन की किताब का उल्लेख वैसे कथामृत में है किंतु इस तरह से उल्लेख नहीं है कि इसको रेफर करके कोई गा रहा है उसका एक सेपरेट उल्लेख है तो देखिए कि एक बार यह भजन कीर्तन आनंद नृत्य गीत इसका जो प्रवाह बहेगा तो पेज आफ्टर पेज मास्टर महाशय उसको लिखते ही जाते हैं एक के बाद एक भजन वह लिपिबद्ध कर हैं ठाकुर नृत्य कर रहे हैं और समाधि में मग्न हो रहे हैं तो यह एक पूरा पोर्शन है ठाकुर की लाइफ का एक पोर्शन है कि ठाकुर बैठ कर के उपदेश देते हैं और उपदेश को समझाने के लिए उपमा और कहानियां कहते हैं दूसरा पोर्शन है कि यह नृत्य गीत कीर्तन और मुहर मुहू समाधि और तीसरा पोर्शन क्या है पता है ठाकुर अपने खुद के बारे में बोलते हैं अपनी पूर्व कथा पूर्व कथा बोलकर के बंगाली में यह पूर्व कथा शब्द है मुझे पता नहीं दूसरी लैंग्वेज में क्या शब्द यूज किया है किंतु जब टाइटल देते हैं उस पैसेज का तो ठाकुर अपने काशी गए थे वृंदावन गए थे या तो फिर यह हलधार है ना कि ये कृष्ण किशोर है उनके बारे में जो सब एक के बाद एक कहानियां कहते हैं अपने खुद के अनुभव वर्णन करते हैं अभी प्रश्न होगा कि अनुभव वर्णन का क्या तात्पर्य है ठाकुर जब एक उपदेश देते हैं और उपमा या कहानी देकर के समझाते हैं वह समझ सकते हैं कि हमको मतलब ठाकुर का तो मेन उद्देश्य ही यही था कि हमको उपदेश देने का दूसरा कि भजन कीर्तन और मुहर मुहू भाव और समाधि यह भी समझ में आता है कि वह ठाकुर का नेचर ही था कि वह भक्ति प्रवण थे भाव प्रवण थे और समाधि के मतलब समाधि उनकी मुट्ठी में थी मतलब जब भी चाहे बार-बार समाधि में जा सकते थे वो उनका लाइफस्टाइल ही था किंतु पूर्व कथा वर्णन करने का क्या तात्पर्य है कोई जनरली कोई व्यक्ति अपने बारे में बहुत ज्यादा बोलता है तो हम लोगों को एक थोड़ा सा यह हो जाता है मैं कोई कोई साधु को पहचानता हूं साधु ही नहीं मतलब साधु हो ना कि गृहस्थ हो उनको यदि आप थोड़ा सा भी एक कोई भी पॉइंट के टॉपिक के बारे में कोई भी प्रश्न करेंगे कोई बात प्रारंभ करेंगे तो पहले ही अपने से चालू करेंगे मैंने ऐसा किया था फिर मैंने ऐसा किया फिर मैंने वैसा किया अपनी पूरी बायोग्राफी अपनी पूरी बड़ाई वो मार देंगे कि हां मैंने मतलब वो एक क्या है ना एक इंस्टिंक्ट है मनुष्य का कि लोगों को अपनी महत्ता लोगों के सामने प्रदर्शित करने की कोई मतलब मनुष्य का कैरेक्टर की डेप्थ कितनी है आपको इससे पता चलेगा कि यदि उसके साथ बात करते करते वह यदि अपनी ही सिद्धि अपनी ही सफलता के बारे में बात करता जाता है देखिए कि ही इज इनसिक्योर हमेशा से उसको भीतर में से एक ऐसा लगने लगता है कि लोग मुझे मुझे जो प्राप्य सम्मान है वो लोग नहीं देते हैं इसलिए मुझे कैसे भी करके यह सम्मान उनके भीतर में से निकालना पड़ेगा तो मैं अपनी बड़ाई मैं अपने कोई महत् गुणों के बारे में महत कार्य के बारे में सफलताओं के बारे में कहूंगा तो हो सकता है कि लोग मुझे ज्यादा रिस्पेक्ट करें यह एक है दूसरे लोग होते हैं कितना ही कार्य किया है किंतु मुंह पर कभी उनके साथ बात करके पता नहीं चलेगा कि वह इतने महत थे उनके जीवन में इतने रिस्पेक्टेड थे मैंने राम महाराज का पहले भी उदाहरण दिया था हमारे ट्रेनिंग सेंटर के आचार्य थे बहुत बड़े वेदांत के पंडित मैंने उनको श्लोक याद है व्याख्या करेंगे अद्भुत अनफॉर्चूनेटली मैं जब ट्रेनिंग सेंटर में गया था वह रिटायर हो चुके थे और बिल्कुल मृत्यु के समीप खड़े थे तो अभी उस समय क्या था मुझे ड्यूटी दिया गया कि महाराज की सेवा करने का तो बेलूरमठ में एक आरोग्य भवन करके एक जगह है वहां पर रिटायर साधुओं को रखा जाता है तो यह महाराज भी वहां पर रहते थे मुझे दो महीना उनकी सेवा करनी थी और दो महीना मेरी सेवा जैसे ही समाप्त हुई उसके एक दो सप्ताह के बाद में ही महाराज को हॉस्पिटल में एडमिट किया गया और उसके एक दो सप्ताह के बाद में उन्होंने देह त्याग किया अर्थात मुझे सेवा करने का मौका उस समय मिला था जो कि उनके जीवन का लिटरली आखिरी समय था अभी राम महाराज के बारे में मैंने बहुत कुछ सुना था कि वह इस तरह से वेदांत की व्याख्या उनको बेलूरमठ लाया गया था वह एक क्लेरिक वर्क करने के लिए तो मिशन ऑफिस में बैठ कर के कोई क्लेरिक वर्क करते थे अभी उनके साथ में बात करके बाद में लोगों को पता चला कि अरे बाप रे उन्होंने वेदांत का क्या स्टडी किया है कि जो स्टडी कर रहे थे वह किसी को कुछ पता नहीं व एक्सीडेंटली एक दो बात निकल गई तब कहीं जाकर के जनरल सेक्रेटरी महाराज को पता चला तब महाराज कहते हैं तुम यहां पर क्या कर रहे हो यह पेपर पेन व सब छोड़ो ट्रेनिंग सेंटर में जाओ ब्रह्मचार्य को सिखाओ तो महाराज को आचार्य बनाया गया एक पूरी जनरेशन अपने साधुओं की उनके हाथों से तैयार होकर के वेदांत में एक्सपर्टाइज्ड एक भी शब्द सुनते हुए नहीं मैंने मैंने बोलते हुए मैंने नहीं सुना है वह कहेंगे कि तुम काम समाप्त करो फिर मेरे साथ इस तरह से एक घंटे की सेवा है आधा घंटा काम करो आधा घंटा मेरे पास में बैठो फिर तुम्हारे जो भी प्रश्न है मुझे पूछो मैं उत्तर दूंगा तो मैं प्रश्न करूंगा वह उत्तर देंगे वह ठीक है किंतु मैंने यह प्राप्त किया या मैंने मेरी यह सफलता है ऐसा कभी भी नहीं तो देखिए कि यह चरित्र का एक निशान है चरित्र का एक मानदंड है कोई अपने मुंह से अपनी जितनी प्रशंसा करेगा उतना ही वह साइकोलॉजिकली इनसिक्योर है वह समझना है यहां पे ठाकुर को देखिए कि बार-बार अपने बारे में बोल रहे हैं वृंदावन गए थे काशी गए थे या तो फिर वो पुराने दिनों की जितनी भी घटनाएं हैं कथामृत का एक पूरा पोर्शन ऐसा है कि ठाकुर अपनी पूर्व काहिनी पूर्व कथा कहते हैं तो क्या हम ठाकुर को किस तरह से एनालाइज करें वो इनसिक्योर थे ऐसा कहना कोई प्रश्न ही नहीं है ठाकुर ने अपने मन को ही मार दिया था जो मन जो कि यह सब प्रतिष्ठा चाहता है जो मन जो कि इनसिक्योर फील करता है उसी का उन्होंने बलिदान दे दिया था तो फिर ठाकुर यह सब क्यों कहते हैं यह भी उपदेश देने का एक तरीका है देखिए तीनों उपदेश देने के तरीके हैं किंतु तीनों में पार्थ क्य देखिए एक तो है डायरेक्ट उपदेश देते हैं और फिर दूसरा उसके साथ में एसोसिएटेड है कि उपदेश को समझाने के लिए उपमा और कहानियां बताते हैं दूसरा तरीका है अपना जीवन उनका जीवन ही इस तरह का था वर्तमान जीवन कि बार-बार समाधि में चले जाते थे सब उनके आसपास में जब इकट्ठा होते थे भक्तगण तो सब ऐसा एक आनंद का प्रवाह बहता था एक ठाकुर की बर्थडे एक दिन थी वो सेलिब्रेशन हो रही थी ठाकुर की जन्मती थी तो एक डिवोटा वहां पर आया फिर वह क्या कहता है मुझे जाना है वराह नगर वर्किंग मैन एसोसिएशन वहां पर वो साम्यवादी जैसा कोई होगा यह आदमी बोला मुझे वहां पर क्लास लेने के लिए ना कि ऐसा कुछ जाना है तो जैसे ही वह खड़ा होकर के गया ठाकुर ने कहा कि देखो आज कितना आनंद होने वाला है कितना आनंद का प्रवाह बहेगा कितना भजन कीर्तन होगा सब लोग इकट्ठा होके कितना हंसी मजाक करेंगे और वह यहां से चला गया उसके कपाल में ही नहीं है तो देखिए कि यह ठाकुर की लाइफ ही है वर्तमान में यदि उसके सा उनके साथ में हम एसोसिएट हो तो यह जीवन का यह जो प्रवाह है वह हमारे हृदय पे बहके हमको भी परिशुद्ध करेगा तो यह दूसरा तरीका है और यह तीसरा तरीका है ठाकुर अपने पूर्व जीवन की जो बातें कहते हैं वह भी हमको सीख देने के लिए वह भी हमको उपदेश देने के लिए किंतु क्या है कि यह पूर्व कथा के भीतर में इतना माधुर्य है कि उसको पढ़ते पढ़ते आपको आनंद तो बहुत आएगा किंतु आप समझ नहीं पाएंगे कि हृदय में जाकर के हृदय को शुद्ध करती है यह देखिए माने एक तो है कि आपको इंटेलेक्चुअली समझना है ठाकुर के उपदेश और उपमा है दूसरा है कि वर्तमान जीवन और पूर्व जीवन की कहानियां यह उपदेश और उपमा हों को आपको इंटेलेक्चुअली समझ कर के उसको आपको ग्रहण करना है कि प्रत्येक उपदेश और प्रत्येक उपमा के साथ में प्रत्येक उपदेश में ठाकुर क्या कहना चाहते हैं और प्रत्येक उपमा और कहानी के माध्यम से ठाकुर हाउ ठाकुर एनहांस दैट उपदेश ठाकुर किस तरह से उस उपदेश का विस्तृत करण करते हैं विशेष रूप से व्याख्या करते हैं वह एक इंटेलेक्चुअली समझने वाली बात है दूसरा कि हृदय से ग्रहण करना है ठाकुर का यह जो भजन कीर्तन समाधि यह और दूसरा की पूर्व जीवन की कहानियां हमको लगेगा कि इंटेलेक्चुअली उससे ज्यादा कुछ हम एनालाइज करके हम ज्यादा कुछ शायद ना समझ पाए किंतु यह सब कहानियां और यह सब जीवन के प्रसंग अपने हृदय में जब जाएंगे तो अपने हृदय को एकदम शुद्ध परिशुद्ध करेंगे यह जो चित्त शुद्धि करने की जो बात है जैसे हमने देखा कि अपना जो फिजिकल वर्ल्ड है उसको आप सब्जेक्ट ऑब्जेक्ट और इंटरेक्शन तीन पार्ट में डिवाइड कर सकते हैं मेरे हाथ यह जो कर्मेंद्रिय और ज्ञानेंद्रिय वो मेरे सब्जेक्ट है अर्थात कि वो मैं उसको मैं अपने रूप में सोचता हूं ग्रहण करता हूं कर्मेंद्रिय अर्थात कि हाथ है पैर है वगैरह ज्ञानेंद्रिय अर्थात कि ये आंख है कान है नाक है वगैरह पांच कर्मेंद्रिय पांच ज्ञानेंद्रिय तो इस पांच कर्मेंद्रिय पांच ज्ञानेंद्रिय के मदद से हम जगत को ग्रह देखते हैं उसके उसके ऊपर में कुछ ना कुछ कार्य करते हैं और जगत जो कुछ भी है सब कुछ ऑब्जेक्ट है और सब्जेक्ट और ऑब्जेक्ट के बीचर में बीच में जो इंटरेक्शन होता है वह है कर्म यह फिजिकल लेवल पर हो गया तो साइकोलॉजिकल लेवल में भी एक तो मेरी अवेयरनेस है फिर यह जो फिजिकल वर्ल्ड का एक रिफ्लेक्शन मेरे माइंड में पड़ता है वो आइडियाज के रूप में तो इस आइडियाज और मेंटल ऑब्जेक्ट के साथ में मेरी अवेयरनेस इंटरेक्ट करती है तो वह मानसिक कर्मा हो गया एक शारीरिक कर्म हो गया कर्म योग की जद व्याख्या करें तो शंकराचार्य जब कहते हैं कि ज्ञान और कर्म दोनों एक साथ में नहीं रह सकते वो बिल्कुल परफेक्ट कहा है बहुत बार हम लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि स्वामी जी कहते हैं कि कर्म योग करना लोगों को सहाय करना दूसरा कि शंकराचार्य कहते हैं कि कर्म को त्याज दो य ठाकुर स्वयं कहते हैं कि कर्मनाशा एक नदी है उसमें जंप लगाने से ही डुबकी लगाने से ही हम बच जाएंगे तो आमी मली ले घुची बे जंजाल ये जो सब ठाकुर के जो सब उपदेश वाक्य है शंकराचार्य का है कि ज्ञान और कर्म साथ में नहीं रह सकते तो कौन से कर्म की बात की गई है शारीरिक कर्म की नहीं ठाकुर ने स्वयं कहा है खाना खा रहे हैं वह एक कर्म है सांस ले रहे हैं वह एक कर्म है फिजिकल वर्ल्ड में पंच ज्ञानेंद्रिय पंच कर्मेंद्रिय आंख खोल कर के मैं देख रहा हूं वह कर्म है नाक से जो मैं सांस ले रहा हूं वह कर्मा है कानों से श्रवण कर रहा हूं वह कर्मा है यदि आप कहेंगे कि कर्मा और ज्ञान साथ में नहीं रह पाएंगे अर्थात कि आपको जड़ समाधि में चला जाना पड़ेगा क्या दैट इज नॉट द आइडियल ठाकुर कहते है कि इससे भी एक ग्रेटर आइडियल है तो यदि ग्रेटर आइडियल क्या फिर से वह कर्म के जगत में वापस आ जाना है नहीं शारीरिक कर्म तो चलता ही रहेगा उसको आप कभी भी अटका नहीं सकते अन्न ग्रहण करते हैं कर्मा है शरीर के भीतर में जो दैहिक सब क्रियाएं होती है वह कर्म है क्या उससे बच जाएंगे बिल्कुल नहीं तो यहां पर मानसिक कर्म है मानसिक कर्म से छुटकारा पाना है यह जगत का जो रिफ्लेक्शन है आपके अपने मन के भीतर में कोई एक व्यक्ति के प्रति मेरा बहुत ज्यादा आकर्षण है कोई एक व्यक्ति के प्रति मेरा बड़ा द्वेष है कोई एक आइडियाज को लेकर के मैं बड़ा ही ऑब्सेसिव हो रहा हूं कि हां मुझे पैसा कमाना है या तो मुझे कंपनी चलानी है या तो मुझे दुकान व्हाट एवर व्हाट एवर वी थिंक विथ अवर माइंड लिखना भी है तो वह भी एक कर्म हो गया जो कुछ भी मैं मन से करता हूं पढ़ाई करता हूं लिखाई करता हूं श्रवण करता हूं जो कुछ करता हूं अपने मन को अवेयरनेस को जैसे ही मैंने उसमें एसोसिएट किया वैसे ही कर्म प्रारंभ हो गया तो आइडियल क्या है कि डिसोसिएट अवर अवेयरनेस फ्रॉम दिस रिफ्लेक्शन ऑफ वर्ल्ड इन अवर माइंड अपने मन में जो जगत का जो रिफ्लेक्शन हो रहा है उससे अपनी अवेयरनेस को सेपरेट कर दो अभी प्रश्न होगा कि इससे शारीरिक कर्म तो चलते रहेंगे किंतु मैं प्योर अवेयरनेस में स्थित हूं क्या मेरा देह है उस जगत में रहेगा कुछ मतलब जैसे कल हमारी बात हो रही थी फिजिकल वर्क तो हम कर पाएंगे आलू छिलने का काम किंतु सॉफ्टवेयर कोडिंग करना है कंप्यूटर कोडिंग करना है प्रोग्रामिंग करना है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलप करनी है वो क्या मैं कर पाऊंगा तो क्यों नहीं स्वामी जी कहते हैं कि देयर आर लेवल्स ऑफ कॉन्शियस एक तो है सबकॉन्शियस एक है कॉन्शसनेस एक है सुपरकॉन्शियस ये जितने भी हायर थॉट्स है ये जितने भी क्रिएटिव आइडियाज है वो कोई अपनी कॉन्शसनेस में से नहीं आते कॉन्शसनेस इज द सम टोटल ऑफ अवर मेमोरी एंड अवर लर्निंग मैंने जितना भी पढ़ा है सीखा है जितना जाना है वह सब उसका जो टोटल है टोटलिटी वह है मेरी मेमोरी अभी मान लीजिए कि मेरे अपने पीसी के भीतर में कंप्यूटर के भीतर में मैंने 1 जीब का डाटा रखा है तो अभी मैं जब कंप्यूटर में से कोई डाटा सर्च करूंगा तो जो एक जीब डाटा जो है इतनी वर्ड फाइल है इतनी एक्सेल फाइल है इतने वीडियोस है इतनी इमेजेस है मैं उसी में से सर्च कर पाऊंगा किंतु यदि ये 1gb तो कुछ नहीं है अपने जगत में जो इंफॉर्मेशन है वह तो मिलियंस ऑफ टेराबाइट में होगी इतनी इंफॉर्मेशन इस जगत में है तो ऐसी कोई इंफॉर्मेशन मुझे ग्रहण करनी है कि जो कि 1 जीब की कैपेसिटी के कहीं पर है तो मुझे क्या करना होगा इंटरनेट के साथ में अपने पीसी को कनेक्ट करना होगा और जो क्लाउड में जो इंफॉर्मेशन है उसको एक्सेस करना होगा यह जो डिफरेंट डिफरेंट सर्वर्स पर जो इंफॉर्मेशन है उसको एक्सेस करना होगा तो यह कॉन्शियस निस जो है इट्स लाइक स्टैंड अलोन पीसी उसमें जो भी मेमरी आपने फीड की है अपने से मेहनत करके वह वहां पर रहेगी किंतु जो हायर आइडियाज है अभी आइंस्टाइन एक दिन बैठ कर के सोच रहा है कि यदि मैं प्रकाश के किरण की गति के साथ में ही मैं उडू यदि मेरी उड़ने की गति 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड है जो कि प्रकाश के किरण की गति है तो क्या मुझे प्रकाश का किरण स्थिर दिखाई देगा तो उत्तर मिला नहीं प्रकाश का किरण फिर भी 3 लाख किलोमीटर पर सेकंड की गति से ही उड़ता दिखाई देगा दिस इज एन इंपॉसिबल जद आप ट्रेन ट्रेन देखा होगा आपने कि ट्रेन चल रही है और पास में ही रोड है ऐसे बहुत सारे ऐसा होता है सिचुएशन आती है ट्रेन और रोड दोनों पासपास में चल रहे हैं अभी मान लीजिए आप अपनी कार में बैठ कर के ट्रेन के साथ में ही मुसाफर कर रहे हैं ट्रेन की स्पीड है 60 किमी पर आवर 60 किमी पर आवर और आपकी कार की स्पीड भी है 60 किमी पर आवर तो आप ट्रेन के जिस डिब्बे के साथ में आप चल रहे होंगे ना वही डिब्बा आपके साथ में कंटीन्यूअस चलेगा क्यों क्योंकि ट्रेन की स्पीड और आपकी कार की स्पीड दोनों इक्वल है तो पास वाला जो डिब्बा है वो डिब्बा ही आपके साथ में चलता ही जाएगा चलता ही जाएगा चार नंबर का जो वो डिब्बा है तो वही चलेगा आपके साथ में यदि आप इंजन के साथ में चल रहे हैं तो इंजन के साथ में ही चलते जाए आपको ट्रेन जो है वह स्थिर दिखाई देगी किंतु प्रकाश के साथ में ऐसा नहीं है इस उपमा देंगे तो मान लीजिए आप 60 किलोमीटर की स्पीड से चलने वाली कार में बैठे हैं किंतु फिर भी ट्रेन की स्पीड आपको 60 किलोमीटर दिखाई देगी यह तो असंभव है अर्थात कि ट्रेन की स्पीड भी 60 किलोमीटर आपकी स्पीड भी 60 किलोमीटर फिर भी आपको अपनी कार में से ट्रेन की स्पीड 60 किलोमीटर की दिखाई देती है यानी कि फटाक करके ट्रेन आई फटाक करके चली गई तो ये कैसे संभव है दिस इज इंपॉसिबल तो यह जो सीमिंग इंपॉसिबल है इट इज द ट्रू नेचर ऑफ द कॉस्मो यह जो असंभव जो चीज है इसको आपने अपने माइंड में से कैसे लाया मनुष्य इतिहास में कभी भी इस तरह का कोई भी आईडिया किसी ने सोचा नहीं है हां हम लोग चमत्कार के बारे में सोचते हैं ली को जादूगर अपनी वो छड़ी घुमाएगा एक आदमी वहां से यहां आ जाएगा किंतु वो तो यहां पर कोई लॉजिक नहीं है कोई मैथमेटिक्स नहीं है आपकी कल्पना मात्र है ये जो एक सीमिंग इंपॉसिबल आईडिया है उसको फिजिक्स और मैथमेटिक्स की मदद से आपको प्रूव करना है हाउ वाज आइंस्टाइन एबल टू डू दैट बिकॉज ही वाज एबल टू एक्सेस अ हायर लेवल ऑफ कॉन्शियस हायर लेवल ऑफ आइडियाज व्हिच वेर नॉट प्रेजेंट इन अवर नॉर्मल कॉन्शियस लेवल क्योंकि आइंस्टाइन एक इस तरह की हायर इंटेलिजेंस के साथ में कनेक्ट हो गया था सुपरकॉन्शियस के साथ में जो कि सुपरकॉन्शियस में सेय यह सब आइडियाज उसकी नॉर्मल कॉन्शियस में आ रहे थे तो यह मनुष्य यह कॉन्शियस और सुपरकॉन्शियस यह जो स्टैंड अलोन पीसी है और यह ये जो क्लाउड है इन दोनों के बीच में कनेक्शन बिठा सकता है अपने यहां पर इंटरनेट से बैठेगा और वहां पर धारणा ध्यान समाधि या तो फिर योग के जो जितने भी स्टेजेस है उसके माध्यम से बैठेगा तो देखिए कि चित्त की शुद्धि का अर्थ क्या है अपना जो अवेयरनेस है यह अवेयरनेस को डे टू डे कर्म या तो फिर यह डे टू डे जो अपना मन जो सतत व्यस्त रहता है उसमें से निकाल करके टू ओरिएंट इट टुवर्ड्स समथिंग पोरर समथिंग बेटर किसी के ऊपर मैं क्रोध कर रहा हूं किसी चीज के बारे में मैं ऑब्सेसिव हो रहा हूं किसी चीज के बारे में मैं कंटीन्यूअसली सोच रहा हूं वह सब चीजों से निकाल कर के फोकस इट ऑन समथिंग हायर जैसे कि आइंस्टाइन ने इस तरह से एक हायर थिंकिंग करना शुरू किया तो हायर थिंक करते करते एकाक माइंड स्थिर हो गया और सुपरकॉन्शसनेस का गेटवे ओपन हो गया तो हम भी यहां पर मान लीजिए कि जप करते हैं तो दुनिया भर का कचरा साइड पर बिठा करके हम जप करना शुरू करते हैं एक शुद्ध विचार के ऊपर में अपने मन को केंद्रित करते हैं जैसे अपनी एकाग्रता बढ़ती जाएगी वैसा ही देखेंगे कुछ क्षण के बाद में कि सुपरकॉन्शियस निस के गेटवे ओपन हो जाएंगे फिर यह जो उच्च भाव है यह बालक भाव भाव यह मातृ भाव शुद्ध परिशुद्ध भाव है वह सब अपने में प्रस्फुटित होना शुरू हो जाएंगे जनरली क्या है निम्न कक्षा के भाव रहते हैं लोलुपता रहती है क्रोध रहता है घमंड रहता है यह सब रहता है नीच कक्षा के जो भाव है किंतु जब मन एकाग्र होगा सुपर कॉन्शियस निस के गेटवेज ओपन हो जाएंगे तो उच्च कक्षा के जो भाव है वो अपने भीतर में आना शुरू हो जाएंगे तो मन की शुद्धि का ये मन की शुद्धि की जो टेक्निकल डेफिनेशन है वो यह है मन को एकाग्र करने में जो क्रियाएं सहाय करें वो मन की शुद्धि है तो यहां पे देखिए फिर से हम इसको एक आउटलाइन देख लेते हैं ठाकुर के कथामृत को आप बेसिकली तीन डिवीजन में आप बांट पाएंगे एक डिवीजन है उपदेश और उपदेश को एक्सपें करने के लिए उसको बेटर कंप्रिहेंड करने के लिए दी जाने वाली उपमा और कहानियां दूसरा पार्ट है ये सतत भजन कीर्तन नाच नृत्य गीत और मुहूर मुहूर समाधि और थर्ड पार्ट है थर्ड पोर्शन है कि ये ठाकुर अपनी पूर्व कथाएं बताते हैं एक फोर्थ पोर्शन भी है किंतु इसको जनरली मैं ठाकुर की पूर्व कहानियों के साथ में ही वैसे जोड़ देता हूं बहुत सारे भक्त आपस में चर्चा करते हैं कुछ ना कुछ या तो फिर और किसी एक भक्त के बारे में कहेंगे जैसे कि ये एक भक्त के बारे में सब मिलकर के चर्चा कर रहे थे कि किस तरह का खाना उनके घर में बनता है यदि एक मछली आएगी तो उनके घर की उनकी जो परिवार की स्त्रियां है उस मछली अपने सभी परिवार जनों में बांटेगी शेयर करेगी फिर किस तरह माने ये जो भक्त लोग आपस में जो चर्चा करते हैं ठाकुर के साथ में अपने दिन प्रतिदिन के जीवन की वो भी एक छोटा सा पोर्शन है बहुत बड़ा नहीं है छोटा सा है किंतु दैट आल्सो इज देयर तो हमको लगेगा कि मास्टर महाशय ने इसको इंक्लूड क्यों किया है क्योंकि देखिए कि मास्टर महाशय भी उनमें भी एक बड़ा ही एक ध्यान रख कर के सोच समझ करके कोई भी बात उन्होंने कथामृत में इंक्लूड की थी अब जैसे कि एक वृंदा बोलकर के एक वहां पर काम वाली थी तो व एक दिन आकर के पूछती है कि अच्छा वह कटोरी कहां खो गई वह तो यहां पर ही थी अभी दिख नहीं रही है ठाकुर ने कहा कि हां हां मुझे भी याद है कि वह कटोरी अभी यहां पर थी अभी नहीं दिख रही है क्या हुआ कटोरी का अभी लगता है कि बहुत छोटी सी घटना और ऐसी तो कितनी घटना वहां पर होती होगी जब मास्टर महाशय वहां पर जाते होंगे कि सब कुछ तो लिपिबद्ध नहीं किया इसको क्यों किया है तो इसका आप एनालिसिस कर सकते हैं इसका कोई मेटा फिजिकल फिलोसॉफिकल इसकी कोई व्याख्या कर सकते हैं कि हां ठाकुर इतने ब्रह्म भाव में रहते थे किंतु उनकी जो प्रैक्टिकल सेंस थी बड़ी ही तीक्षण थी मास्टर महाशय वह वहां पर छाता छोड़ के आ गए अंब्रेला छोड़ कर के वहां पे पंचवटी में तो ठाकुर उस उनको कहते कि मेरी धोती भी ठीक नहीं रहती फिर भी मैं छाता नहीं भूलता और तुम लोग हो घर संसार करते हो तुम्हारा एक प्रैक्टिकल सेंस है फिर भी छाता भूल जाते हो यह देखिए कि यह सब उसका एक व्याख्या आप कर सकते हैं किंतु इस तरह की व्याख्या की वजह यह जो सब प्रसंग है उसका जो सही सही उद्देश्य है कि वह एकदम भीतर में चले जाते हैं तो समझने के लिए आपको एक 1 पर भी मेहनत नहीं करनी पड़ती ठाकुर के उपदेश को यदि समझना है तो बड़ी मेहनत करनी पड़ेगी कभी-कभी यह ब्रह्मा और शक्ति एक है ब स्थिर रहने से ब्रह्मा कहता हूं यदि वह चलित होती है कार्य करती है तो मैं उसको शक्ति कहता हूं अब यह एक ऐसा हायर थिंकिंग इस तरह का एक विचार है जिसको समझने के लिए आपको वेदांत का एक अच्छा सा ज्ञान होना चाहिए राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य का काफी कुछ अच्छा बैकग्राउंड होना चाहिए तो इसको यदि ना समझ पाए ऐसे लोग भी तो बहुत है इस जगत में तो उन लोगों के लिए यह सब है कि कटोरी खो गई है न कि छाता भुल कर के आ गए हैं ना कि ठाकुर जब जा रहे हैं वहां पर देखा कि वह वहीं एक गेस्ट के वहां पर बैठे राजा बाबू के वहां पे मथुर बाबू वगैरह अपने बिजनेस की बातें कर रहे हैं इतना रुपया लाभ हुआ इतना नुकसान हुआ तो ठाकुर रोते-रोते कहते हैं मैं कहां पे यहां पे आकर के फंसा दिया मां जगदंबा को कहते हैं मां काली को वहां प दक्षिणेश्वर में था तो यह सब मुझे नहीं सुनना पड़ता था फिर ठाकुर क्या कहते हैं वहां पर जाकर के देखा तो सब कुछ यहां के जैसा ही है बस व देर भुर में तो बाज उनकी जो शौच जाने के लिए उनको विष्ठा है उसका वह आकार शेप थोड़ा डिफरेंट टाइप का है तो यह सब ऑब्जर्वेशन पढ़ कर के सीधे भीतर में चले जाते हैं तो कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती है समझने के लिए बड़ा ही आसान तरी और याद भी रह जाता है इस तरह से ठाकुर बात करते हैं व नर्तकी के वो नर्तकी की यह जो सब हाव भाव है उस की यह जो बहे आचरण है उसका उसका अभिनय करके ठाकुर अपने ब यह जो संतान है त्यागी संतान यह भक्त उनके सामने वो दिखा रहे हैं और सब लोग हंसते-हंसते जमीन पर गड़ा गड़ी दे रहे हैं लोट लेट जा रहे हैं जमीन पे तो यह सब हमको याद रखने के लिए कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती तो यह एक बीज की तरह अपने हृदय में बैठा रहेगा उसका आप जितना सिंचन करेंगे वैसे ही एक भावर रूपी वटवृक्ष में परिणत होगा और यह अपनी अवेयरनेस का यह जो जगत के प्रतिबिंब है उसके साथ में जो ये हो गया है सत्यानगर अर्थात की मिथ्या ये सत्य और मिथ्या इन दोनों का मिथुन कृतम अर्थात कि एक तरह का ये जो मिक्सचर हो गया है उस मिक्सचर से यह जो भाव के जो बीज है हमको छुड़ा देंगे प्योर अवेयरनेस धीरे-धीरे करके पनपना शुरू हो जाएगी और यह प्योर अवेयरनेस जो है सुपरकॉन्शियस के गेटवे ओपन कर देगी और फिर वहां से एक हायर लेवल की चिंता भावना है चिंता धारा है हायर लेवल के भाव है इमोशन है वह सब हमारे भीतर में आना शुरू हो जाएंगे सो यह कथामृत रूपी टेक्स्ट का एक थोड़ा सा एनालिसिस अभी हम आगे थोड़ा सा पाठ करते हैं कि क्या हो रहा है ब्रह्म भक्तों के साथ में ठाकुर वो नौका में बैठ कर के गंगा में भ्रमण करने के लिए गए हैं ब्रह्म भक्त उनको प्रश्न कर रहे हैं और फिर ठाकुर उनका उत्तर दे रहे हैं कल ठाकुर ने कहा सत्य कहता हूं यदि आप लोग संसार में है तो उसका कोई भी दोष नहीं है ईश्वर की ओर मन को रखना होगा किंतु यदि ईश्वर की ओर मन नहीं रहेगा तो आप डूब जाएंगे किंतु ईश्वर की ओर जब मन रहेगा तब तक कोई दिक्कत नहीं है और इसका भी हमने एनालिसिस किया कि चाहे जहांज कितनी ही कौन सी भी डायरेक्शन में चलता रहे जो कंपास होता है वह उत्तर ध्रुव की ओर ही पॉइंटेड रहता है यानी कि अपने खुद के जीवन में कितने ही झंझावात वगैरह आ जाए मन जब तक ईश्वर की ओर है तब तक हम यह एट द एंड ऑफ द डे हम सही डायरेक्शन में चले जाएंगे किंतु मन ही जद चक्री कुत चक्रवात में फंस गया कंपास यदि बिगड़ गया तो आपका शीप जो है जहाज है कितना ही स्ट्रांग क्यों ना हो कितना पावरफुल टेक्नोलॉजी क्यों ना हो वो कहीं पे एक ना एक दिन तो वह भटक ही जाएगा तो यह सब बातें हुई प्रश्न था कि महाशय सब त्याग ना करले ईश्वर के पावा जावे ना क्या सब कुछ त्याग नहीं करेंगे तो ईश्वर को नहीं प्राप्त कर सकते तो इस प्रश्न के उत्तर में ठाकुर बात कर रहे हैं देखिए आगे क्या कहते हैं मने तेही बद्धो मने तेही मुक्तो मन से ही बद्ध है मन से ही मुक्त है आमी मुक्त पुरुष संसारे थाकी बा हरण थाकी आर बंधन की देखिए यह एकदम साहस से करेज के साथ में कहना है कि मैं मुक्त पुरुष हूं मैं संसार में रहूं कि जंगल में वन में रहूं ना कि डेजर्ट में रहूं क्या फर्क पड़ता है मुझे कहां का बंधन है आमी ईश्व संतान राजाधिराज छेल मैं ईश्वर का संतान हूं राजाओं के राजाओं का पुत्र हूं देखिए जो स्वामी जी आत्म श्रद्धा के बारे में बोलते हैं तो कभी-कभी हम लोग इसको इस उपदेश को व आर द अमृतस्य पुत्र वयं अमृतस्य पुत्रा हम लोग आनंद अमृत के संतान है हम लोगों के लिए शोक ताप य सब क्या है यह जो सब बड़े उत्साहजनक प्रेरणादायक जो उपदेश है जनरली हम स्वामी जी के साथ एसोसिएट करते हैं वो ठाकुर के साथ में जैसे कि भक्ति एसोसिएट करते हैं किंतु देखिए यहां पर भी ठाकुर जो आत्म श्रद्धा की वही बात कर रहे हैं जिसको कि स्वामी जी ने बाद में पूरे जगत में फैलाया है ठाकुर कहते हैं ना आमी पापी पापी बोलले पापी होए जाए बद्धो बदु बोलले सालारा बद्धो ही होए जाए जो यह कहता रहेगा मैं पापी हूं वह साला पापी ही होगा जो कहेगा मैं बद हूं साला बद्ध ही होगा वो जो क्रिश्चन बाइबल किसी ने उनको सुनाया तो ठाकुर को पूछा गया कि आपको कैसा लगा ठाकुर कहता है कोई बुरा कुछ नहीं है किंतु सब पाप और पाप यह पाप क्या है अभी पापी पापी जितना ही आप कहेंगे उतना ही आप पाप में डूबते जाएंगे यहां पर देखिए कितना सुंदर रूप से ठाकुर ने कहा है आमी मुक्त पुरुष मैं मुक्त पुरुष हूं संसारे थाकी बा अरण्य थाकी हमार बंधन की मैं संसार में रहूं ना कि अरण्य में रहूं मुझे किस चीज का बंधन है ईश्व संतान राजाधिराज छेल मैं ईश्वर का संतान हूं राजाओं के राजा महाराजा का पुत्र हूं आमाई आबार बांधे के मुझे बंधन में डालने वाला है कौन जद पपे कामड़ बीश नाई झोर कोरे बोलले बी छेड़े जाए जद सांप काटेगा और मैं जद जोर से एकदम प्रचंड आत्मविश्वास से जाहिर करूंगा कि नहीं मुझे मेरे शरीर में विष नहीं उठा है तो ये विष भी कट जाएगा तमनी आमी बद्धो नई आमी मुक्तो एक कथा टी रोक करे बोलते बोलते ताई होए जाए मैं म बद्ध नहीं हूं मैं मुक्त हूं ऐसा फुल कॉन्फिडेंस में इस बात को कहते कहते हम लोग मुक्त ही हो जाएंगे मुक्त ही होए जाए देखिए दो बार ठाकुर इसको कहते हैं आमी बद्धो नाई आमी मुक्तो एक थाटी रोक कर रे बोलते बोलते ताई होए जाए मुक्त ही होए जाए मैं बद्ध नहीं हूं मुक्त हूं यह कथा बिल्कुल आत्मविश्वास के साथ में कहने से वही हो जाएगा मुक्त ही हो जाएंगे हम देखिए ये वो जो जो आत्म श्रद्धा का जो मैसेज नच केता की जो कहानी हम स्वामी जी के साथ में सबसे ज्यादा एसोसिएट करते हैं वो सबका ये जो सीड फॉर्म है उसका जो बीज रूप है ठाकुर के ही कथामृत में हमको देखने को मिलता है और स्वामी जी को जिसने ऊपर ऊपर से भी स्टडी किया है उनको बताने की जरूरत है कि आत्म श्रद्धा का क्या महात्म्य है स्वामी जी कहते हैं कि पूरा भारत घूम कर के मैं जैसे कि डिप्रेसो गया था किंतु फिर वह सेकंड टाइम अमेरिका जा रहे हैं देखा कि यह जो भारतीय खलासी है वह देखो कि जब तूफान आता है तो यही लोग वह सड़ पकड़ कर के वह सेल पकड़ कर के खड़े रहते हैं तूफान में और यूरोपियन जो खलासी है नाविक है वह शराब पीके वह मत हो जाते हैं क्यों क्योंकि मृत्यु भय सामने है मन जो है उसके सामने मृत्यु भय आता है तो मन या तो कमजोर हो जाएगा या तो फिर वह टूट ही जाएगा पागल ही हो जाएगा तो मृत्यु भई के सामने मन को टिकाने के लिए यह लोग मद्यपान करते हैं किंतु भारतीय खलासी ऐसा नहीं करते तो स्वामी जी कहते हैं कि पहली बार मुझे कुछ लगा कि हां हम भारतीयों में भी कुछ साहस है वरना तो फिर यह जो 1857 के जो फर्स्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस ये जो इसके बारे में स्वामी जी किसी के पास में से सुने थे एक जो ब्रिटिश कर्नल था उनके साथ में उनकी जहाज प मुलाकात हो गई तो स्वामी जी ने बात-बात में पूछ लिया कि आपको क्या लगता है कि आप लोग जीत क्यों गए हम लोग हार क्यों गए तो उसने कहा कि आप लोगों के जो कमांडर थे जो अपनी जो भारतीय आर्मी के वह सब कमांडर पीछे में खड़े रहते थे और जोर-जोर से चिल्लाते थे सैनिकों को फ्रंट पे बेज के कि लड़ो शाबाश बहादुर लड़ो बहादुर किंतु खुद पीछे में रहेंगे अभी जो फ्रंट लाइन पे सैनिक है वह तो मूर्ख नहीं है वह समझ रहा है कि जिस दिन हम हारेंगे उस दिन यही कमांडर लोग हमको दगा देकर के उनके साथ में संधी कर देंगे हुआ भी सही भारत जब एक बार हारना शुरू किया तो जितने भी राजा थे वह सब अंग्रेज के पैरों में लेट गए फिर अंग्रेज लोग इनको खिताब देते हैं किसी को राजा का खिताब देते हैं किसी को प्रिंस का खिताब देते हैं किसी को रानी का खिताब देते हैं मने वो एक डेजिग्नेशन देते हैं और वे भी ब्रिटिश लोगों ने हमको राजा बनाया बोलक के बड़ी-बड़ी मुछ ऐसा करके वो घूमते रहेंगे वो दिल्ली दरबार के जो पिक्चर्स है वो जो सब वीडियोस कुछ कुछ है अब देखेंगे तो शर्म से हम लोगों का सर झुक जाएगा वह ब्रिटेन में से कोई राजा न की रानी आ रही है तो इंडिया के उसको स्वागत करने के लिए इंडिया के जितने भी राजा है सब बड़े सुंदर पीकॉक की तरह मोर की तरह बढ़िया-बढ़िया सुंदर कपड़े पहन के वस्त्र पहन के बड़े-बड़े हाथी और घोड़े पर बैठ के उनका स्वागत करने के लिए बड़ी तलवार लेकर के खड़े हैं कि देखो हमारी बहादुरी बहादुरी क्या है उनके गुलाम हो गए हो बहादुरी दिखा रहे हो तो यह जो भीतर में से जो जो गुलामी हमने स्वीकार कर ली थी यही था हम लोगों की हार का सबसे बड़ा कारण ये ब्रिटिश लोगों की साइकोलॉजी बड़ी पक्की थी उनको पता था कि ये भारतीय जितने भी है एक साथ में हमारे से फाइट करेंगे तो हम लोग अवश्य हार जाएंगे तो दो-तीन पॉलिसी उन्होंने बनाई थी एक तो है कि डिवाइड एंड रूल एक राजा का हमेशा दूसरे राजा के साथ में झगड़ा लगा दो और बीच में हम मध्यस्था करें जैसे कि दोनों हमारे पे डिपेंडेंट होके रहे ये तो एक पॉलिसी था दूसरा था कि जो कहते हैं ना कि अ पमप पमप अर्थात कि एक ऐसा भव्य नजारा खड़ा करो कि सब लोग चकाच हो जाए तो वहां पर दिल्ली दरबार यानी को कोई एक बड़े मैदान में बड़ी-बड़ी परेड करनी है वहां पर अपनी जो भारतीय लोगों की ब्रिटिश आर्मी है बड़े सुंदर वस्त्र पहन के हथियार हाथ में लेकर परेड करेंगे अभी यह परेड करते हुए सैनिकों को देख कर के सभी लोग डर जाएंगे अरे इन लोगों के पास में इतनी ताकात है हम लोग यदि लड़ने को जाएंगे तो हम लोग अवश्य हार जाएंगे तो क्या है कि साइकोलॉजिकली हमको दबा करके रखते हैं जिस दिन हमने यह समझ लिया कि ये परेड करने वाली आदमी को आर्मी कहो ना कि हम लोगों के भाई भाई में जो फुट पढ़ाने की जो बात है वह सब कुछ नहीं है हम लोग इकट्ठा होकर के इकट्ठा हो होंगे और इकट्ठा होकर लड़ेंगे जैसे ही हमने यह ठीक किया अंग्रेजों को भागना पड़ा यहां से हालांकि सेकंड वर्ल्ड वॉर में काफी पिटाई हुई थी उनकी यह भी एक उनके जाने का पीछे का कारण था किंतु जो भी है एटलीस्ट हम लोग यूनाइटेड होना तो सीखे तो देखिए कि एक बार एक साइकोलॉजिकल डर अपने सर पर बैठ जाता है फिर यह जो हाथी भी होता है ना वो भी डर जाता है छोटी-छोटी चीजों से हाथी को यदि भगाना है तो आपको आग ये जो मशाल होती है मशाल को प्रज्वलित करना है गांव में जाएंगे ना तो गांव वाले वो जो मशाल बड़ी-बड़ी रखते हैं टॉर्च जिसको कहते हैं टॉर्च के ऊपर में ऑयल में डूबा हुआ वस्त्र जो है वो उसको ब उसको ऊपर में लपेट करके रखते हैं जैसे ही गांव में जैसे ट्राइबल एरिया में मैं रांची में जाता था तो हाथी के आने का बड़ा भाई था तो यह लोग इस तरह की टॉर्च तैयार ही रखेंगे वह थोड़ा ऑयल जक टन जो है व भी रखेंगे जैसे ही पता चला हाथी आ रहे हैं ऑयल वाले टिन में वो टॉर्च डाला फिर उसको जवल प्रज्वलित किया फिर ऐसा करके घुमाएंगे अभी हाथी को जो एक चीज का सबसे ज्यादा डर लगता है वह है अग्नि इतना बड़ा हाथी है जो कि अपने पैर के नीचे में हमारे जैसे 10-15 मनुष्य को आराम से कुछड़ी के सामने एक मशाल यदि आप प्रज्वलित करेंगे वैसे ही वो वहां से भागेगा आंख बंद करके तो एक उसको क्यों अग्नि का डर क्यों लगता है उसने जंगल में लगी हुई आग देखी है जंगल में एक बार आग लगेगी तो किसी को भी खत्म कर देगी हाथी तो क्या पूरे पूरे गांव को खत्म कर देगी किंतु ये जो मशाल है टॉर्च है वो तो कुछ नहीं है वो टॉर्च को तो आप सूंड से उठा कर के ऐसा करके फेंक देगा वो खत्म हो जाएगी किंतु एक बार डर बैठ गया है कि ना आग जैसे लगती है हाथियों के पूरे के पूरे झुंड को वह जला देती है अर्थात कि आग से हमेशा डर के रहना है तो यह डर एक बार उसके मन में बैठ गया तो छोटी सी चिंगारी भी जलाएंगे हाथी वहां से दौड़ के भाग जाएगा तो क्या है ना प्रकृति ऐसी ही है हमेशा मनुष्य को सप्रे करने के लिए मनुष्य को दबाने के लिए तैयार बैठती है कभी-कभी हमको किसी सिचुएशन का डर लगता है किसी व्यक्ति का डर लगता है जैसे कि यह मास्टर महाशय को अपने पिताजी के घर में रहने का डर लगता था तो अभी मास्टर महाशय को बहुत सारे बस्त है अभी जैसे नौका में आ रहे हैं तो वहां पे वो यह आ गया ज्वार जैसा आ गया तो मास्टर महाशय जैसे ही नौका हलने डुलने लगी वो कहना शुरू कर दिया मुझे उतार दो ज मतलब किनारे पे उतार दो मैं पैदल जाऊंगा मुझे इस तरह से जब ये ज्वार भट आता है नौका हिलती है तो डर लगता है तो जब साथी लोग थे बड़ा उनको समझाने लगे अरे क्या है इसमें नौका हिलेगी डोलेगी इतना ही होगा वो डूब नहीं जाएगी हम लोग है साथ में तो ना मास्टर महाशय बोलते हैं बार-बार कि मुझे उतार ही दो मैं पैदल जाऊंगा तो ठीक है अभी ना वो कहेंगे तो उनको किनारे पर लाकर के उतार दिया गया वो पैदल चलकर आए फिर जब ठाकुर पूछ रहे हैं उनको उसी दिन में उसी दिन की घटना वो आए सब सब लोगों ने ठाकुर को कहा कंप्लेन करके कि देखिए मास्टर महाशय चलती नौका में से उतर गए तो उस समय तो ठाकुर कुछ नहीं बोले किंतु जब बाकी सब लोग चले गए ठाकुर पूछ रहे उनके पिताजी के बारे में कि क्यों तुम अपने पिताजी के घर पर रहने को नहीं जाते तो मास्टर महाशय कहते हैं कि मुझे वहां पर बहुत कष्ट मिला था इसलिए मैं नहीं जाना चाहता हूं तो मास्टर महाशय कहते हैं वो जो तुम्हारा डर है ना वो ऐसा ही डर है ना जो नौका में से तुम उतर गए ठाकुर ने एकदम पकड़ लिया कि ये फोबिया मास्टर महाशय के भीतर में बहुत सारे बैठे हुए हैं एक डर एक जैसे कि घर करके बैठा हुआ है अपने पिताजी का घर हो जहां पर उनको कष्ट मिला था नहीं कि ये जवार भाटे में हिलती डुल नौका हो सब समय एक डर उनके ऊपर में सवार होकर के बैठता है तो यहां पे ठाकुर कहते हैं कि देखो मन को प्रचंड रूप से संकल्प शक्ति संकल्प शक्ति से अपने मन को प्रचंड रूप से स्ट्रन करना है फिर देखिए कि य महामाया है क्या अपने बंधन में हमको बांधने के लिए आएगी कि नहीं आएगी आने से ही उसके साथ में तलवार निकाल कर के युद्ध करना है और उसको हरा कर के भगा देना है मुक्त होए जाए आमी बध नोई आमी मुक्तो य कथा टी रोक करे बोलते बोलते ताई होए जाए मुक्त होए जाए मैं बद्ध नहीं हूं मैं मुक्त हूं यह दृढ़ विश्वास बारबार कहने से हम वही हो जाएंगे हम मुक्त ही हो जाएंगे तो आज यही तक अभी कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु यह जो सत्वर रजस तमस जो है ना जो तामसिक होते हैं वह बद्ध होकर के भी स्वीकार नहीं करते कि मैं बद्ध हूं जो राजसिक होते हैं मतलब आध्यात्मिक दृष्टि से थोड़ा सा जिनमें चेतना जागृत हो गई है वे लोग बध जो है जाल उसमें से बचने का प्रयास करते हैं और फिर जाल में से जो एक दो निकल के चले जाते हैं वे लोग मुक्त जीव है और जो कभी जाल में फंसते ही नहीं है वह है नित्य मुक्त यह ऐसी ही एक कहानी सर्वप्रिया अंद जी हमको क्लास में बताए थे उस समय बंगोल के चीफ मिनिस्टर थे मैं नाम भूल गया विधान चंद्र ना कि ऐसा ही कुछ उनका नाम था तो यह रामकृष्ण मिशन को यह जो सब फंड देते हैं ना स्कूल वगैरह चलाने के लिए तो किसी ने जाकर के उनको कहा कि आपको यह डर नहीं लगता कि साधु लोग करप्शन करेंगे तो यह उन्होंने क्या चीफ मिनिस्टर ने क्या कहा पता है कि साधु ज्यादा से ज्यादा क्या करेगा एक रसगुल्ला खा रहा है तो दो खाएगा इतना ही तो तुम लोगों की तरह डीप पॉकेट्स तो उनके नहीं है यहां पे यह जो प्रोपोर्शनल जो है ठाकुर ने बहुत कुछ कहा है किंतु स्वामी जी ने जैसे कि कुछ-कुछ पॉइंट्स को पकड़ करके उसको काफी एक्सपें किया मुझे ऐसा लग रहा है ना कि ये जो प्रोपोर्शनल है या किस चीज पर फोकस करना है ठाकुर ने ही शायद उनको बताया होगा क्योंकि काशीपुर का वह जो हमको पता है कि ठाकुर फिर नरेंद्र को डायरेक्ट तैयार करना शुरू कर दिए थे आखिर आखिर में कमरे का दरवाजा बंद करके सबको निकाल देते थे यहां तक कि बाकी डायरेक्ट डिसाइल को भी त्यागी संतानों को भी निकाल देते थे फिर नरेंद्र रहेगा ठाकुर रहेंगे और उनके बीच में जो बात होती थी किसी को नहीं पता ये किसी भी किताब में लिपिबद्ध नहीं स्वामी जी ने खुद ने उसका कभी उल्लेख नहीं किया कि मुझे अकेला बुला कर के ठाकुर क्या कहते थे बस एक दो घटनाएं हमको पता है कि ठाकुर ने एक बार स्पर्श किया और कहा कि मेरी श पूरी शक्ति तुमको दे दी अभी मैं फकीर हो गया हूं ऐसी एक दो घटना पता है किंतु और क्या-क्या हुआ होगा स्वामी जी ने जो मैसेज डेवलप किया उसमें ठाकुर का डायरेक्ट कितना अवदान है कि कथामृत में उन्होंने बहुत सारी जगह प बहुत कुछ बोला है तो हो सकता है ऐसा अभी हमको तो अनुमान ही करना है ना तो एक ऐसा अनुमान कर सकते हैं कि इन ल ऑफ फर्द एविडेंस कि ठाकुर ने ही यह सब एक्सपें करके उनको कहा होगा कि यह यह पॉइंट कलयुग में मतलब करने के लिए योग्य है यहां पर देखिए स्वामी जी का एक प्रॉब्लम क्या था पता है ही वाज वेरी केरलेससवीडियो वेशन कुछ प्रिजर्व होकर पड़ा है किंतु लेटर पोयम और आर्टिकल में वह बात नहीं है कि जो उन्होंने अपने मुंह से जो प्रवचन दिए राज योग कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग कितना एक्सपें किया है लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा कितना सब कुछ है अभी प्रॉब्लम यह था कि जब गुडविन का उनके बाकी सब डिसाइल्स के साथ में झगड़ा हो गया तो स्वामी जी ने कहा ठीक है तुम चले जाओ उटी चले जाओ वहां पर रहकर वो ब्रह्मवादिनी अभी कहां ब्रह्मवादिनी का एडिटिंग कहां वो स्वामी जी के साथ में रहकर वो लिखता उनको लिपिबद्ध करता वो जब से गया है ना तब से फिर स्वामी जी की वाणी को लिपिबद्ध करने वाला जैसे कोई बचा ही नहीं है वो एक शरद चंद्र चक्रवर्ती था शुद्धाओ दर किया है विरजानंद जी ने कुछ किया है किंतु यह जो गुडविन के जाने का जो एक हमको लगा है ना वो एक डैमेज हो गया अपने ऑर्डर को वो कभी खत्म नहीं होगा खास करके ये जो सेकंड विजिट में जो स्वामी जी कैलिफोर्निया में जो कुछ बोले हैं ना वो सब ऊपर ऊपर से है अपने पास माने जो बोले उसका 1 पर ना 5 पर मुश्किल से होगा यह निवेदिता ने बेचारी ने मुश्किल से बहुत मेहनत करके स्वामी जी के पत्रों को कलेक्ट किया तो स्वामी जी हिमसेल्फ वस वेरी केरलेससवीडियो को तो सोसाइटी के मेंबर्स ने स्वामी जी को कहा कि हम स्टेनोग्राफर को अपॉइंट्स का खर्चा चलेगा तो स्वामी जी ने कहा अच्छा ठीक है तुम लोग जो चाहे वो करो तो ही वास सो [हंसी] केरलेससवीडियो कि उनको पता है कि अल्टीमेटली जिस तरह से उन्होंने ये आइडियाज डिस्कवर किए जिस तरह से ठाकुर ने डिस्कवर किए वी आर आल्सो कैपेबल ऑफ डिस्कवरिंग देम और यह भी है ना कि सब कुछ एक साथ में दे देना वह भी तो ठीक नहीं देखिए ठाकुर ने खुद बोला है कि मैं अपने शिष्यों को सब कुछ नहीं बता देता बता देने से वह मेरे पास क्यों आएंगे मैं जब पहली बार पढ़ा मैं तो आश्चर्य चक ठाकुर ऐसी बात करते हैं जितना कैपेसिटी है उतना दो फिर जैसे कैपेसिटी वो जो हा मैंने वो वो गाय की वो जो है ना स्टोरी कि गाय को बांध के रखा है अभी जितना खा है वो घास चरना है उतना चर लिया विदन दैट सर्कल फिर वो दोरी को थोड़ा बढा देते हैं तो सर्कल बड़ा और ज्यादा घास खाएगी तो पहले से ही छोड़ दिया ज्यादा खाके इनडाइजेशन हो गया किसको पता साथ-साथ में देखिए जो अच्छे कथाकार होते हैं ना वो अपना भाव ट्रांसमिट करते हैं मैं वो पहले अपने डोंगरे जी महाराज के बारे में जो बात हुआ था डोंगरे जी महाराज वो जो वर्णन करेंगे ना उनकी आंखों में से भी आंसू आ रहे हैं आप सुनेंगे आपकी आंखों में से भी आंसू आना शुरू हो जाएगा चित्त शुद्धि मतलब डायरेक्ट हो रही है ऐसा आपको लगेगा आप अपने से रामायण खोलकर पढ़िए और डोंगरे जी महाराज की कथा सुनिए मतलब य ही एलिट ट कथा न कंपलीटली डिफरेंट लेवल तो यह भी एक है कि जो अच्छे कथाकार है उनके पास में आप कथा सुनेंगे ना उसका अपना एक पावर है तो उने एट द एंड ऑफ द डे कथा को ग्रहण करना है आप अपने से पढ़ के करे कि कथाकार के माध्यम से करें तो किंतु उसका चित्त शुद्धि का पावर अद्भुत है ये देखिए कि जितने भी मंत्र है ना वह सब लिख लिए गए हैं अभी मैं रिसेंटली विश्वरूप महाराज का मंत्र और उसके ऊपर मैं क्लास सुन रहा था तो महाराज वो मंत्र बता रहे कि मंत्र का फॉर्मेट क्या होता है तो बोलते हैं कि पहले ओमकार होता है फिर नाम होता है मैंने बोला कि मंत्र तो बता ही दिया फिर आपने बाकी क्या रखा किंतु देखिए ये तो आपको मिल ही जाएगा कोई कहां पर भी अब विरजा होम के मंत्र दुनिया भर की किताब में लिखे किंतु जब आप विरजा होम चल रहा है आचार्य के मुंह से जो मंत्र सुनेंगे ना पूरे शरीर में देह में जैसे रोमांच हो जाएगा हम लोगों ने तो अनुभव किया है आधी रात को गंगा स्नान करके नव वस्त्र धारण करके वह वर्जा होम हो रहा है वहां पर जाकर बैठना मंदिर बंद कर दिया है पूरा सन्नाटा है पूरे जगत में कोई वहां पर नहीं है सन्यासियों ब्रह्मचार्य को भी अलाव नहीं सिर्फ सन्यासी अपने ऑर्डर के ऑर्डन सन्यासी खिड़की दरवाजे मंदिर के सब बंद है सिर्फ सन्यासी है ठाकुर का वो जो काच का दरवाजा है ना उसको खोल दिया है हमको विरजा होम के बाद में वहां पे भीतर में गर्भगृह में जाकर के ठाकुर को साक्षात प्रणाम करना साष्टांग प्रणाम करना है तो ये सब जो विधि विधान सब पढ़े हुए हैं क्लास हो गए हैं मंत्र पता है मंत्र मुख स्त कर दिए किंतु जब आचार्य जब चैटिंग करेंगे हमारे समय में भजनानंद जी महाराज आचार्य थे वो जब चैटिंग करेंगे ना बाप रे मतलब इट्स अ कंपलीटली डिफरेंट वर्ल्ड आप स्वर्ग में चले गए ऐसा लगेगा आपको देखिए सबसे बड़ा क्या है पता है ठाकुर ने जो भी अपने गुरु से सीखा ऐसा कहीं लिपिबद्ध नहीं है कि ठाकुर ने नया कुछ अपने गुरुओं को सिखाया तोतापुरी से वेदांत सीखा तो तोतापुरी की साधना पूर्ण करनी थी उनको यह समझाना था कि ब्रह्मा जैसे है शक्ति का भी एक तात्पर्य है किंतु नया कुछ नहीं दिया तोतापुरी वो स्वीकार नहीं करना चाहते थे वो उनसे स्वीकृत करवाया भैरवी ब्राह्मणी ने तंत्र साधना सिखाई तो ठाकुर ने नया कुछ इंटर्न भैरवी को नहीं सिखाया उसकी जो ठाकुर के ऊपर में एक आकर्षण आ गया था आकर्षण को तोड़ना था ट मींस के जो ट्रेडिशनल नॉलेज जो गुरुओं ने उनको दिया वही उन्होंने हमको दिया है यदि ठाकुर नहीं भी होते तो भैरवी ब्राह्मणी होने वाली थी जटाधारी तो था तोतापुरी तो थे ही थे दे कुड हैव कंटिन्यू दिस ट्रांसमिशन ठाकुर का वैल्यू एडेड जो कहते है ना कि वो एक ऐसी इंटेंसिटी से साधना की कि उसका वैल्यू बढ़ गया आजकल के लड़के हम लोग तोतापुरी को देख कर के नहीं आने वाले थे यहां पर तो ठाकुर को देख के ही आने वाले थे म आप हमारी क्या बात करते हैं ठाकुर कहते हैं नारद है सुखदेव है ब्रह्म समुद्र का एक गंडू यानी हाथ में इतना लेकर पान किया है बस तो भी सुखदेव नारद की यह हालत है अपनी क्या हालत है