प्रार्थना
ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री राम कृष्ण कथामृत नाथ दिसंबर 1883 के दिन की यह घटना मास्टर महाशय ने लिख करके रखी है चैप्टर का टाइटल है दक्षिणेश्वर में श्री रामकृष्ण भक्तों के साथ में और ठन ठन में सिद्धेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए गमन
ठाकुर के दिन-प्रतिदिन के घटनाक्रम
तो इस चैप्टर की विशेषता क्या है वह कल हमने देखा कि अभी मास्टर महाशय ठाकुर के साथ में आकर के रहने वाले हैं कुछ दिनों तक और वह गुरु शिष्य संवाद जो हमको सुनने को मिलेगा वह तो इस चैप्टर का यूनिकनेक्ट से देखते हैं ज रली ठाकुर भक्तों के घर जाते हैं जैसे कि बलराम भवन में या तो और कहीं या तो फिर भक्त गण जब दक्षिणेश्वर में आकर के इत्र इकट्ठा होते हैं तब ठाकुर का एक स्वरूप देखने को मिलता है कि वह भक्तों के साथ में वार्तालाप कर रहे हैं कभी-कभी हंसी मजाक करते हैं कभी-कभी भाव समाधि में चले जाते हैं तो कभी-कभी उद्दा नृत्य कीर्तन करते हैं उद्दा अर्थात कि भाव में मत्त होकर के तो भाव में मत होकर के नृत्य कीर्तन करते हैं तो यह सब ठाकुर के चरित्र की या तो उनकी पर्सनालिटी की जो एस्पेक्ट्स है उनके दिन की जो विभिन्न डायमेंशन है वह हमने देखी किंतु साथ-साथ में ही इस चैप्टर्स यह जो कुछ चैप्टर है उसमें हम और एक चीज देखेंगे कि मास्टर महाशय इस समय भी उपस्थित है जिस समय की ठाक कुर के पास में और कोई नहीं है भक्तगण मास्टर महाशय के अलावा ऑफकोर्स वहां पर काली मंदिर में ठाकुर के साथ में जो रहने वाले लोग थे या तो फिर ये खास कर के यह रामलाल दादा वे लोग होते थे किंतु और कोई बाहर का भक्त उपस्थित नहीं होता था तो फिर हमको प्रश्न होगा कि इस समय ठाकुर क्या करते होंगे जैसे कि कोई बड़ा अच्छा वक्ता है तो वह स्टेज पर जाकर के प्रवचन करते हैं तो फिर हम को लगता है कि अच्छा यह जो सब आदर्श के बारे में उन्होंने पब्लिक में जो कहा वह उनकी प्राइवेट लाइफ में किस तरह से इस आदर्श का इंप्लीमेंटेशन करते होंगे इस आदर्श के ऊपर में क्या उनका पर्सनल लाइफ होगा कि भी नहीं वह तो एक प्रश्न हमको होगा क्योंकि बहुत बार हमको इस तरह से देखने को मिला है कि कोईकोई व्यक्ति आदर्श की बातें तो बड़ी-बड़ी करता है किंतु उसका पर्सनल जीवन देखने को जाए तो बड़ा कम आदर्श उस पर्सनल लाइफ में रिफ्लेक्ट होता हुआ दिखेगा तो ठाकुर के जीवन में क्या है तो ऑफकोर्स हमको तो पता है कि बहुत सारी स्मृति कथाएं हमने पढ़ी है देखा है कि ठाकुर के साथ में रात बिताने से बहुत बार वह समाधि में ही चले जाते हैं किंतु दिन के दौरान क्या करते होंगे क्या वह वही भाव समाधि में ही मत्त होकर के घूमते होंगे नहीं कि क्या तो उस प्रश्न का उत्तर इन दो-तीन चैप्टर्स में हमको मिलता है कि ठाकुर वहां पर हमेशा कुछ ना कुछ पाठ चलता रहता था या तो फिर भक्त माल में से पाठ होगा ना कि कोई ऐसा कोई और कोई धार्मिक पुस्तक में से पाठ होगा तो रामलाल दादा पाठ करेंगे और ठाकुर सुनेंगे तो अभी हम जब यह देखते हैं कि ठाकुर इतने सुंदर उपदेश देते हैं और कहां-कहां से सब उपमा है लेकर आते हैं कहां से यह सब स्टोरीज लेकर आते हैं तो उसका यदि प्रश्न किया जाएगा कि एक अनपढ़ आदमी सो कॉल्ड कोट अनकोट अनपढ़ व्यक्ति अन इलिटरेट पर्सन इतनी सारी सुंदर बातें कैसे कर सकता है इतने सारे उदाहरण उपमा इलस्ट्रेशंस और आध्यात्मिक टीचिंग कहां से लेकर आते हैं तो हम कहते हैं कि ठाकुर की जिहुआ पर सरस्वती का वास था और फिर निवास था और वही सरस्वती ही ठाकुर के माध्यम से बात कर रही है वह तो एक है दूसरा जैसे ठाकुर कहते हैं कि मां राश ठेले दे अर्थात कि जैसे-जैसे ठाकुर की बातों का भंडार धीरे-धीरे करके कम होता जाएगा बात करते-करते वैसे ही मां काली मां जगदंबा नई बातें ठाकुर के स्टोरेज में धकेल देगी तो ठाकुर का कहानियों का उपदेश का उपमा हों का स्टोरेज हमेशा फुलफिल भरपूर रहेगा तो यह सब तो हमको पता है किंतु यह दो-तीन चैप्टर है उसमें हमको और भी एक बात देखने को मिलेगी कि ठाकुर जब अकेले होते हैं दिन के दौरान तो यह धार्मिक कहानियों का पाठ सतत उनके सामने चलता रहता है तो अभी जैसे कि मैं अपने खुद के उदाहरण से कहूं कि यदि प्रतिदिन मुझे आधा पौना घंटा बोलना है तो दिन के दौरान मुझे एटलीस्ट तीन तीन से चार घंटा स्टडी करना पड़ेगा यदि मैं नहीं करूंगा तो क्या होगा कि यह प्रतिदिन नई-नई जो बातें नई नई कहानियां नए-नए यह जो कुछ इलस्ट्रेशंस उपमा य यह जो सब मैं यहां पर वर्णित करता हूं वह फिर नहीं होगा जो कुछ चार-पांच घटनाएं मैंने जो कि फेमस होती है वही मेरे माइंड में रहेगी अभी बात यह नहीं है मैं खुद के एक्सपीरियंस से जो बताता हूं कि बात सिर्फ यह नहीं है कि हमने एक बार पढ़ लिया तो चलेगा क्योंकि अपना जो माइंड है वह अभी यदि इसको कहेंगे कि सबकॉन्शियस और कॉन्शियस और सुपरकॉन्शियस तीन लेवल में यदि बांट दे तो हम लोग जो पढ़ते हैं तो उसमें से ज्यादातर मटेरियल तो सबकॉन्शियस में चला जाता है मान लीजिए आज मैंने 3040 पेजेस पढ़े तो उसमें से ऑलमोस्ट 80 पर 30 पेजेस जब मैंने पढ़े हैं आज के दिन में तो उसमें से 25 पेजेस जो है वह मेरी सबकॉन्शियस में चले जाएंगे कॉन्शियस लेवल पर मुश्किल से पांच पेज जितना मटेरियल मेरी कॉन्शियस लेवल पर हो कल परसों या तो फिर नर्सों या तो फिर नेक्स्ट मंथ आप मुझे पूछेंगे कि वोह 30 पेज पढ़े उसमें से कितना याद रहा तो मुझे व माने पहले दिन तो मुश्किल से मुझे पांच पेज याद रहेंगे एक सप्ताह के बाद में हो सकता है मुश्किल से एक पेज भी याद रहा हो तो क्या है कि जितना पढ़ते हैं सीधा सबकॉन्शियस में चला जाता है कॉन्शियस में रखने के लिए रिपीटेडली उस को पढ़ना पड़ता है नो डाउट एक जब साधना का लेवल जब आ जाएगा तो सुपरकॉन्शियस में से नॉलेज आना शुरू होगा किंतु अदर वाइज हमको सबकॉन्शियस लेवल में से कॉन्शियस में लाने के लिए नॉलेज को सतत उसको रिफ्रेश करना पड़ता है तो मैं सोचता था कि यह सब मेरे ही साथ में हो रहा है यहां पर देखेंगे कि ठाकुर भी देखिए कि ठाकुर के सामने भी सतत यह सब धार्मिक कथा कहानियों का पाठ चलता रहता है ऑफकोर्स ठाकुर में और हम में यह डिफरेंस है कि हमको यह सब मेमोराइज करना पड़ता है या तो फिर मेहनत करके याद रखना पड़ता है जो जिससे कि हम इसको सबकॉन्शियस लेवल में से निकाल पाए ठाकुर का ऐसा था कि सुपरकॉन्शियस के साथ में जो उनका डायरेक्ट कनेक्शन था हॉटलाइन जो था उनका उसकी वजह से सब समय सुपरकॉन्शियस में से वह लेकर आते थे यह पाठ वगैरह जो है ठाकुर के लिए अपने ने मन को जमीन पर रखने के लिए इस लोक में रखने का एक उपाय मात्र है जैसे कि ठाकुर समाधि में जाते थे तो फिर क्या कहते थे कि मैं आमी तमा खाबो आमी बाजे जावो अर्थात कि मैं तमाकू तमाकू का सेवन करूंगा या तो फिर मैं शौच के लिए जाऊंगा ऐसा कोई एक एक सामान्य इच्छा प्रकट करने से इस इच्छा का जोर उनको धीरे-धीरे करके सुपर कॉन्शियस से कॉन्शियस लेवल पे लेके आएगा जैसे ठाकुर बार-बार कहते हैं चीनी होते चाई चाइना मा चीनी खेते चाई अर्थात कि मैं शुगर होना नहीं चाहता मैं शुगर खाना चाहता हूं ईश्वर से एक हाथ दूर रहे जिससे कि भक्ति भक्त को लेकर के रह सके ईश्वरीय प्रेम का आनंद प्राप्त कर सके तो सब समय ठाकुर उनका मन समाधि में ना चला जाए सुपरकॉन्शियस लेवल पर चला ना जाए इसके लिए यह सब कहानी या कथा उसका आश्रय लेकर के वह जमीन पर अपने मन को रखते थे कॉन्शियस लेवल पर ऑर्डिनरी पर्सन के लेवल पर अपने मन को रखते थे तो वह जब ठाकुर के दिन प्रतिदिन दिनचर्या जिसको कहते हैं डेली लाइफ ऑफ श्री रामकृष्णा वह सब हमको देखने को
द्वितीय परिच्छेद: मास्टर महाशय की चिंता और ठाकुर का अभयदान
मिलेगा तो अभी हमने प्रथम परिच्छेद समाप्त कर दिया है द्वितीय परिच्छेद प्रारंभ करते हैं टाइट है मास्टर महाशय ने इसका दिया है ठाकुरर तपस्या ठाकुर की तपस्या ठाकुरर आत्मीय गुण और भविष्यत महातीर्थ ठाकुर के आत्मीय गुण और भविष्य का महातीर्थ अभी यह जो पूरे परिच्छेद में पूरे पैसेज में जितना भी मैटर है उसका सारांश करके यह टाइटल बनाया है टाइटल का क्या अर्थ होता है क्या तपस्या की है क्या महातीर्थ होने वाला है वह सब अभी हम पढ़ेंगे क्या लिखते हैं मास्टर महाशय ठाकुर श्री रामकृष्ण नहब देर पार्श्व रास्ता दाईया अछन ठाकुर श्री रामकृष्ण नबत के पास में से जो रास्ता जा रहा था वहां पर खड़े हैं अभी देखिए कि हम यदि दक्षिणेश्वर गए होंगे तो हमको पता है कि आप यदि नौका लेकर के बेलूरमठ से आप दक्षिणेश्वर की ओर जाएंगे तो आपको सर्वप्रथम प्रथम क्या दिखेगा कि द्वादश यानी कि 12 शिव मंदिर दिखेंगे एक और छह शिव मंदिर है बीच में फिर चांदनी घाट है और फिर उसके बाद में दूसरे छह शिव मंदिर है और यह छह शिव मंदिर के पीछे जद देखेंगे तो काली मंदिर जो मेन टेंपल है उसका शिखर हमको दिखाई देता है फिर यह 12 शिव मंदिर पूरे करके जैसे ही नौका आगे जाएगी तो फिर हमको ठाकुर का कमरा दिखाई देगा उससे भी यदि थोड़ा सा आगे जाएंगे तो नबत आएगा अभी क्या है एक्चुअली दो नहब बत है जयदिश की ओर तो सर्वप्रथम एक नबत आता है उसके बाद में फिर 12 शिव मंदिर प्रारंभ होते हैं और फिर ठाकुर का कमरा फिर जो दूसरा नबत आता है वहां पर मां शारदा देवी रहा करती थी उनसे पहले मां मां शारदा देवी से पहले ठाकुर की जननी चंद्रा मणि देवी वहां पर रहा करती थी तो वह नबत आएगा और कभी-कभी क्या होता था कि अभी खास करके इन दिनों की जो घटना है कि मास्टर महाशय दक्षिणेश्वर में रहने के लिए गए हैं उस समय मां शारदा दक्षिणेश्वर में नहीं थी वह मोस्ट प्रोबेबली जयराम बाटी में होगी तो यहां पर दक्षिण तो इस नबत के पास में से जो रास्ता जा रहा है उस व वहां पर ठाकुर खड़े थे यह उद्यान पथ यानी कि यह गार्डन गार्डन पथ जो कि शिव मंदिर से होता हुआ यह ठाकुर के कमरे से सामने से निकलता हुआ नौबद से होता हुआ उसके बाद में यह पंचवटी है वहां पर जाएगा उससे भी आगे जाएगा बकुलतला उससे भी आगे जाएगा झाऊ तला तो यह पूरा रास्ता था गार्डन का वहां पर नबत के पास में रास्ते पे ठाकुर खड़े थे देखीते छ नबत बरादर एक पार्श्व बसिया बेडर आडा मणि गभीर चिंता मग्न ठाकुर देख रहे हैं कि नबत का जो वरांडा है ग्राउंड फ्लोर पे जहां पर बैठ कर के हमने देखा मां के जीवन में कि जहां पर बैठ कर के मां खुद रात को जप किया करती थी सुबह को 3 बजे उठकर के मां जप करने को बैठती थी और मां ने खुद कहा जैसे कि जब ठाकुर झाऊ चला जाते थे वही गार्डन पथ से होकर के तो मैं उनके जूतों का आवाज सुन पाती थी किंतु मां एक बार जैसे कहती है कि मेरा मन इतना गंभीर ध्यान में मग्न हो गया था कि मेरे देह के ऊपर में से आंचल उड़ा जा रहा है पवन में वह भी मुझे होश नहीं था और ठाकुर कब गए उनके पैरों की आवाज भी मैं न सुन पाई तो इतनी महा पवित्र जगह इस समय मां शारदा वहां पर नहीं थी नौबत में तो फिर मास्टर महाशय वहीं पर बैठ कर के गंभीर चिंता में निमग्न थे तो ठाकुर जब जा रहे होंगे इधर-उधर तो उन्होंने मास्टर महाशय को देखा होगा अभी यहां पर मास्टर महाशय ने अपना नाम लिया है मणि अभी हमको पता है कि बहुत बार कथामृत में मास्टर महाशय अपने को अपने नाम से नहीं पुकारते या तो फिर अपनी जो आइडेंटिटी है उसको छुपा के रखते हैं कभी लिखते हैं श्रीम कभी लिखते हैं मास्टर महाशय कभी कहते हैं मणि तो कभी कहते हैं मोहिनी मोहन जहां तक मुझे याद है यह चार नाम से मास्टर महाशय अपने को पुकारते हैं तो जब जब जहां तक वो मणि या तो मास्टर महाशय या श्रीम लिखेंगे एकदम स्पष्ट समय में आ जाएगा वही है किंतु जब मणि भी लिखते हैं तो भी हमने अपने सीनियर से सुना है कि मणि यानी कि यही मास्टर महाशय तो ठाकुर ने देखा कि वहीं पर वहां पर नबत के रांडे में मणि एक कोने में बैठ कर के गंभीर चिंता में निमग्न हो गए हैं तिनी की ईश्वर चिंता कोरीते छन अभी मास्टर महाशय देखिए स्पष्ट रूप से नहीं कहते कि वह क्या कर रहे हैं वोह प्रश्न कर रहे हैं सामने कि क्या वह ईश्वर चिंता कर रहे हैं माने कुछ भी कर रहे होंगे हमको यदि लगेगा कि जहां पर मां बैठ कर के ध्यान में डूब जाती थी उसी जगह पर यदि मास्टर महाशय बैठे हैं या तो फिर यहां पर हम उनको मणि कहेंगे तो यह मणि क्या वह भी क्या ईश्वर चिंता में डूबे हुए हैं नहीं यहां पे पहले तो शब्द यूज किया है गभीर चिंता में निमग्न है यानी कि और कोई टेंशन उनको खाए जा रहा है और फिर मास्टर महाशय खुद प्रश् करते हैं क्या वह ईश्वर चिंता कर रहे हैं प्रश्नार्थक भी रहे होंगे नहीं भी कर रहे होंगे ठाकुर तया झाऊ तलाई गया लेन मुख धया ओई खाने आशिया दाड़ा लेन ठाकुर गए थे झावतला में शौच करने के लिए फिर वहां से मुंह धो कर के आए तो वहां पर मणि को देख कर के खड़े रह गए श्री रामकृष्ण की गो एक खाने बोसे क्या जी यहां पर बैठे हो क्या रे यहां पर बैठे हो तोमार शीघ्र हबे तुम्हारा जल्दी से होगा क्या होगा ईश्वर का कोई ना कोई आध्यात्मिक दर्शन प्राप्त होगा या तो कोई ना कोई दिव्य अनुभूति प्राप्त होगी ऐसा भी हो सकता है कि जन्म जन्मांतर के यह जो संसार चक्र है उसका भी वो भी टूट जाए हालांकि ठाकुर तो कहते हैं कि उनके साथ में जो लोग आए हैं सभी नित्य मुक्त ही है और जितनी भी बार लीला करने के लिए ठाकुर पृथ्वी पर अवतरण करेंगे साथ में ही उनके यह अंतरंग भक्त गण भी उन्हीं के साथ में पृथ्वी पर आएंगे तो अभी ऑलरेडी मास्टर महाशय को तो ठाकुर ने देख लिया है कि चैतन्य के दल में ठाकुर कहते हैं मैंने तुमको भी देखा था तो मा के देखे जीी आर जेनो बलराम केव देखे छी मैंने शायद तुम जेनो ये जेनो शब्द यूज किया है बंगाली में इसका अर्थ है कि ठाकुर यहां पर 1 पर डाउट रख रहे हैं कि 99 पर मैंने तुमको भी देखा था और शायद बलराम बसू को भी देखा था तो वह ऑलरेडी मास्टर महाशय उनके साथ में चैतन्य अवतार में आए ही थे रामकृष्ण अवतार में भी आए हैं भविष्य के अवतारों में भी आना होगा उनका तो किंतु जैसे कि ठाकुर ने लक्ष्मी दीदी को कहा था कोलोमर दोल एकटा के टान ले श बाई टेने आशय लक्ष्मी दीदी जब यह कह रही है कि अभी फिर से मैं नहीं आती हूं तो ठाकुर ने क्या कहा यह कलमी अर्थात कि यह जो जलाशय के भीतर में जो फूल होते हैं उनकी ये जो रूट्स होते हैं वह सब एक दूसरों के साथ में मिली हुई होती है एक रूट को खींचें तो सभी रूट्स एक साथ में खींच करके आ जाएंगे तो इसी तरह मास्टर महाशय को शायद आना होगा ही होगा पहली बार पहले भी आए हैं किंतु क्या है ना कि जैसे देह धारण करते हैं तो सब समस्याएं तो रहेगी ही रहेगी साथ में तो वह समस्याओं का निराकरण करके सर्वप्रथम तो अपने खुद के जीवन में शांति प्राप्ति करनी है और उसके बाद में उन्होंने जिस तरीके से शांति प्राप्ति की ठाकुर की अमृतम कहानियों को सुन कर के तो उन्हीं कहानियों को उनको लिपिबद्ध भी करके जाना है यह उनका मिशन होता है है जगत में ठाकुर ने खुद मास्टर महाशय को कहा था कि भागवत पंडित को मां अर्थात कि मां काली एक पाश दे कर के रखती है यानी कि जो भगवत कथा का पाठ करेंगे उनको तो उनके जितने भी पाश है जितने भी कर्म है कुकर्म है सब कट जाएंगे कर्म का जितना बंधन है सब कट जाएगा किंतु जो भागवत सुनाता है वह भागवत पंडित को मां एक पाश देकर के एक बंधन देकर के रखती है तो प्रश्न होगा कि जो भागवत का पाठ करते हैं उनके सब बंधन टूट जाएंगे तो भागवत जो सुनाता है भागवत पंडित स्वयं वह तो हमेशा मुक्त होना चाहिए उसको बंधन किस चीज का तो ठाकुर कहते हैं कि एक पाश देख कर के मां रखती है जिससे कि भागवत पंडित लोगों को भागवत सुनाए तो यह कथामृत पढ़कर के जैसे कि हमने देखा था कि वीरेश्वरा नंद जी महाराज कहते हैं 12 साल कथामृत का नियमित पाठ करेंगे तो मुक्ति अवश्यंभावी है तो हमको लगेगा कि हम यदि 12 साल पाठ करके मुक्ति प्राप्त कर ले तो मास्टर महाशय को तो क्या है जिन्होंने कथामृत स्वयं लिखा है उन्होंने तो सालों साल प्रतिदिन कथामृत पर चिंतन करके उसको लिपिबद्ध किया है तो उनका तो मुक्ति फक्ति सब तो कब का हो गया किंतु ऐसा नहीं उनको एक पाश देकर के माने रख खा है जिससे कि वह कथामृत लिख पाए और फिर भविष्य में भी जब भी ठाकुर आए तो ठाकुर के साथ में फिर से आना हो तो अभी यह सब इसीलिए कुछ ना कुछ चिंता में कुछ ना कुछ टेंशन में यह मास्टर महाशय डुबे हुए हैं तो जब ठाकुर आकर के खड़े रहे तो उनको लगा ऑलरेडी मास्टर महाशय तो कह दिए हैं कि सुसाइडल माइंड सेट उनका एक बार हो गया था घर की जो परिस्थिति थी उसके टेंशन में सोचा था की आत्महत्या कर लूंगा और फिर इतना ही नहीं यह मास्टर महाशय और भी कहीं-कहीं पे ठाकुर के पास में सलाह मांगते हैं कहते हैं कि मेरी पत्नी है वह कहती है कि मैं उनका ख्याल नहीं रख रहा हूं तो जदिया करेगी तो अभी मैं क्या करूं तो नेचुरली पत्नी जद आत्महत्या करेगी तो किसी भी पति को दुख तो होगा भले पत्नी के ऊपर में प्रेम नहीं है किंतु आत्महत्या करने से फिर जो दूसरे जो प्रॉब्लम आकर के खड़े होंगे पुलिस केस होगा ना फिर समाज में बदनामी होगी वगैरह वगैरह वह भी तो एक बहुत बड़ी बात है तो मास्टर महाशय बड़े ही टेंशन में है तो उन्होंने एक बार ठाकुर को कहा था कि पत्नी यदि ऐसा कहती है कि मैं आत्महत्या करूंगी तो फिर मैं क्या करूं तो इतने गंभीर चिंता में वह डूब गए थे तो ठाकुर ने इमीडिएट कहा कि इस तरह की पत्नी का त्याग करो जो कि तुम्हारे ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में बाधा बनकर खड़ी है तो ठाकुर ने इतने गंभीर स्वर से यह कहा कि फिर वहां पे यह जो नरेण वगैरह भी खड़े थे और नरेण यानी भविष्य के स्वामी विवेकानंद हमको पता है कि किस तरह का हंसी मजाक करने वाला उनका नेचर था तो वे लोग इसी तरह का कुछ ना कुछ हटो गोल गप लगा रहे थे उसमें जब ठाकुर ने इतने गंभीर स्वर से यह बात कही कि सभी लोग चुप हो गए नरेंद्र भी चुप हो गया कि अरे बाप रे यह तो ठाकुर ने क्या कह दिया और मास्टर महाशय स्वयं बिल्कुल एकदम गंभीर चिंता में डूब गए बड़े टेंशन में आ गए कि यहां पे ठाकुर कहते हैं पत्नी का त्याग करो वहां पे पत्नी कहती है मैं आत्महत्या करूंगी तो क्या करें क्या ना करें तो अभी यह कह कर के ठाकुर फिर नरेंद के पास में चले गए ये लड़के भक्त हैं उनके साथ में फिर से हंसी मजा करना शुरू कर दिया यहां पे मास्टर महाशय बैठ खड़े हैं एकदम सर के ऊपर में हाथ रख कर के टेंशन में आकर के कि अरे बाप रे अभी क्या होगा उसी समय ठाकुर फिर से मास्टर महाशय के पास में आते और फिर क्या हल्के से क्या कह देते हैं कि देखो जिसके ऊपर में जिसकी जिस भक्त की ईश्वर के ऊपर में सही सही निष्ठा है उसके सभी जितने भी लोग हैं जो कि मनुष्य को जनरली कष्ट पहुंचाते हैं वह सब उस भक्त के वश में आ जाएंगे अभी मनुष्य को कष्ट पहुंचाने वाले लोग है कौन तो है पत्नी फिर दुष्ट लोग फिर राजा तो यह कुछ कुछ लोग है कि हमको सबसे ज्यादा कष्ट पहुंचा ते हैं पत्नी का अर्थ है कि हमने जिसके हमारे लाइफ पार्टनर यानी पत्नी के जद यदि कोई स्त्री भक्त के साथ में ठाकुर यह बात करते तो उनको कहते कि तुमको जो सबसे ज्यादा कष्ट पहुंचाने वाले लोग जो हो सकते हैं उसमें एक पति होगा क्योंकि जनरली क्या होता है कि यदि सांसारिक जीवन मैरिड लाइफ वह यदि उसमें सुख ना हो तो बहुत ज्यादा कष्ट है मनुष्य यदि बाहर घर के बाहर जाकर के नौकरी धंधा वगैरह सब करके जितना टेंशन है वह सब लेकर जब घर में आता है तो जदी एक हंसी खुशी वाला जो फैमिली लाइफ होता है पत्नी है पिताजी वृद्ध मां और पिताजी है बच्चे हैं भाई-बहन यदि साथ में रहते हो मैंने खुद ने ये जॉइंट फैमिली देखा है जो जॉइंट फैमिली में खुशी होती है तो कितना आनंद आता है रहने में वहां पे तो हम लोग वहां पे मैं जब अपने गांव में जाता था तो जॉइंट फैमिली था सभी तीन भाइयां तीन भाई साथ में रहते थे और और उनका पूरा परिवार और मेरे मां के पिताजी तो पूरा परिवार सब साथ में रहते थे तो हम लोग रात को बैठ कर के जब यह हमारा एक दुकान था वहां पे कुछ शॉप दुकान थी वहां पे गांव में तो वह बंद हो गया सब लोग अपने घर में इकट्ठा हुए फिर कोई चाची है ना कि कोई वह चाय बनाएगा और चाय पीते पीते वो रात के 10 11 12 बजे तक गप लगाएंगे सभी 15-20 मेंबर होते थे जो कि वहीं पर रहते थे और यदि कोई गेस्ट आया तो संख्या 30 35 की हो जाती थी तो यह जो इतना हंसी मजाक होता था इतना आनंद आता था जॉइंट फैमिली में तो जद फैमिली लाइफ हमारा हंसी खुशी से भरा हो तो मनुष्य आदमी जब इंसान घर में आकर के जगत का सब दुख भूल जाता है किंतु वही फैमिली लाइफ जद जहर बन जाए तो फिर एक तो बाहर का टेंशन घर में आए तो घर का टेंशन तो इसीलिए ठाकुर कहते हैं कि जो कुछ लोग हमको कष्ट पहुंचाते हैं उसमें से एक तो है पति या पत्नी तो यह एक है दूसरा है दुष्ट लोग जगत में देखिए कि दुष्ट लोगों की कमी नहीं है कहां से कहां से कोई आकर के क्या क्या ना क्या एक झगड़ा विवाद खड़ा करेगा वह चाहे हमारा कोई फैमिली मेंबर भी हो ना कि चाहे कोई मित्र भी हो कोई चाहे दुश्मन भी हो कोई बॉस भी हो कोई कोई भी हो माने ये दुष्ट लोगों की कमी नहीं है तो दुष्ट लोग हमको तकलीफ पहुंचाते हैं फिर है राजा अभी आज के जगत में कहेंगे तो गवर्नमेंट और गवर्नमेंट हमको कितना कष्ट पहुंचाती है वो तो आप लोग उससे माहिर ही है उससे तो इतना कुछ बोलना जरूरत नहीं है तो ठाकुर कहते हैं जो कुछ लोग मनुष्य को कष्ट पहुंचाते हैं पत्नी क्योंकि मास्टर महाशय को कह रहे हैं इसलिए पत्नी दुष्ट लोग राजा यह सब जद भक्त एकनिष्ठ है ईश्वर के ऊपर में अपनी श्रद्धा के बारे में तो यह सब भक्त के वश में आ जाएंगे तो जैसे ही ठाकुर ने ऐसा कहा मास्टर महाशय की चिंता में चिंता अग्नि चिंता रूपी अग्नि में जैसे कि ठंडा पानी पड़ा और मास्टर महाशय थोड़ा सा चैन की सांस लेकर कहते हैं कि अच्छा वह जद आत्महत्या करना चाहती है तो करें उ मैं अभी मैं और क्या कर सकता हूं मैं तो ठाकुर के पास आऊंगा ही आऊंगा सांसारिक जीवन में मेरी ऐसी कोई अभिरुचि है नहीं ईश्वर प्राप्ति के रास्ते में मैं साधना तो करता ही जाऊंगा यदि पत्नी की अकल ठिकाने आए और वह भी यदि ठाकुर के पास आए तो अच्छा है नहीं आती है आत्महत्या करती है तो करे आत्महत्या अभी देखिए कि मास्टर महाशय की पत्नी का नाम था निकुंज देवी मोस्ट प्रोबेबली यही नाम था तो फिर बाद बाद में वह भी मां के पास में आती है वो उनका मास्टर महाशय के एक एक संतान का मृत्यु हो गया था तो ये निकुंज देवी को बड़ा आघात पहुंचा था तो उस समय मास्टर महाशय उसको लेकर के पत्नी को लेकर के ठाकुर के पास में आते हैं तो ठाकुर उसको जो दो-तीन बातें कहते हैं कि उसका सर दर्द कर रहा है चिंता में बड़ी वो पड़ी हुई है रो रही है सब समय उसके संतान का मृत्यु हुआ है तो उस समय ठाकुर कहते हैं मास्टर महाशय को कि इसको खाना मत पका दे पकाने देना क्यों खाना पकाने के लिए चूल्हे के सामने खड़ा रहना पड़ता है अभी चूल्हे का जो अग्नि है वो तो गर्म अभी ये उसका ऑलरेडी उसका सर गर्म है सर दर्द हो रहा है वगैरह हो रहा है ऊपर में से वो चूल्हे के सामने खड़ी रह के खाना बनाएगी तो फिर क्या से क्या ना हो जाए इसलिए ठाकुर मास्टर महाशय को कहते हैं कि अपनी पत्नी को खाना मत पकाने देना बाद में फिर यही निकुंज देवी उन हब्बत में जाती है फिर मां के साथ में मां का दर्शन करने के लिए वह बार-बार आती है सब जगह पे तो वह सब निकुंज देवी का भविष्य में है कि ठाकुर ने कृपा जैसे वह ठाकुर ने कहा ना कि यदि ठीक-ठीक ईश्वर पर निष्ठा हो तो पत्नी दुष्ट लोग राजा सब वश में आ जाएंगे तो यही मास्टर महाशय की पत्नी भी धीरे-धीरे करके बिकॉज की मास्टर महाशय की इतनी निष्ठा गंभीर श्रद्धा भक्ति थी ठाकुर के ऊपर में तो उसकी वजह से यह जो उनकी पत्नी भी धीरे-धीरे करके ठाकुर और मां की भक्त बन गई थी मां के पास में नियमित जाया करती थी मां के साथ में और कहीं यात्रा के लिए भी गई है बहुत सारे वर्णन है तो यहां पर भी अब जब यहां पर मास्टर महाशय कह रहे हैं कि मैं गंभीर चिंता में निमग्न था तो वह यह तो नहीं कहते कि कौन सी चिंता में निमग्न थे किंतु कथामृत पढ़ कर के मास्टर महाशय की लाइफ पढ़ कर के हम कुछ ना कुछ अनुमान यह सब सकते हैं तो उस समय जैसे कि उस बार हुआ था कि यहां पर जैसे ही ठाकुर ने कहा कि अरे वह आत्महत्या करती है तो करें यदि ईश्वर के रास्ते में बाधा देती है तो ऐसी स्त्री का त्याग करना चाहिए तो मास्टर महाशय एकदम टेंशन में आ गए और फिर ठाकुर ने आकर के हल्के से कह दिया एकदम मृदु स्वर से कि जिसकी ईश्वर पर निष्ठा है तो यह राजा दुष्ट लोक स्त्री उसके वश में आ जाएंगे तो मास्टर महाशय कहते हैं कि मेरी जैसे कि चिंता अग्नि में ठंडा पानी पड़ा मे हृदय जैसे कि शीतल हुआ तो वह ठाकुर ने उनको हृदय को शीतलता पहुंचाई थी उस समय यहां पर भी इसी तरह से हुआ है कि मणि मास्टर महाशय टेंशन में बैठे हैं उसी समय ठाकुर ने आकर के कह दिया कि तुम्हार समय होए छे कीग एक खाने बसे अरे यहां पर बैठे हो तुम्हार शीघ्र होवे तुम्हारा जल्दी से होगा शीघ्र होगा एक टू करले क्यों बलवे ई ई थोड़ा सा जदी करोगे साथ में ही कोई बोल देगा यह यह अभी देखिए यह जो आखिरी सेंटेंस है थोड़ा सा करने से ही क्या करने से यानी कि थोड़ी सी साधना करने से ही कोई कह देगा यह यह तो कोई कौन कोई तो गुरु यानी यहां पर इस केस में अपने ठाकुर स्वयं क्या कह देगा यह यह यह यह अर्थात कि ऐसा करो ऐसा करो यानी कि जद यह जो वो ये जो होता है ना इंक्रिप्शन इंक्रिप्शन अर्थात क्या आज की लैंग्वेज में कि वह कोड लैंग्वेज में कोई बड़ा मैसेज पहुंचाते हैं यदि आपको कोड लैंग्वेज समझ में आ गई तो मैसेज भी समझ में आ गया तो ठाकुर की बातें भी कभी-कभी एक कोड लैंग्वेज जैसी बड़ी गुड होती है एनक्रिप्टेड होती है तो इसको डिक्रिप्ट करना पड़ता है तो यहां पर भी जो ठाकुर ने कहा इसका अर्थ है कि यदि मास्टर महाशय कुछ समय तक साधन भजन करेंगे तो साथ में ही गुरु रूपी श्री राम कृष्ण आकर के क देंगे कि अभी साधन भजन में इस तरह से आगे बढ़ो देखिए कि यहां पर होता क्या है कि जब भी हम गुरु के पास में से मंत्र ग्रहण करते हैं या तो फिर यह इनिशियल इंस्ट्रक्शन प्राप्त करते हैं तो ठाकुर है या कोई भी गुरु है पहले तो हमको 510 मिनट में कह देगा कि अच्छा इतना इतना करो फिर यह बैठ कर के यह जब मंत्र दे देते हैं मंत्र का जप करो जप करने के समय यह यह सब आपको सावधानियां बरतनी है और इस तरह से जप को आप और भी अच्छे से कर सकते हैं ऐसा वह 510 मिनट में कुछ कह देंगे इसके बाद में आप जप करते जाइए जैसे-जैसे जप करते जाएंगे वैसे-वैसे ही जप या ध्यान के रिलेटेड जो कुछ समस्याएं हैं जो कुछ अनुभूतियां है जो कुछ विजन है या तो फिर उसकी जो बाय प्रोडक्ट है वह सब आकर के अपने सामने खड़े होंगे तो जब यह कोई विजन खड़ा होता है कोई समस्या खड़ी होती है तो फिर आप ठाकुर के पास जाकर के कहिए कि ठाकुर मैं तो इस तरह से जप कर रहा था अभी यह समस्या आ रही है तो क्या करूं तो फिर तो क्या है कि ठाकुर यदि देखते हैं कि हमने जब किया है ध्यान किया है और करते-करते यह समस्या आई है तो फिर उसका समाधान बता देंगे किंतु करना कुछ नहीं है अभी गुरु महाराज के पास में से मंत्र लिया है अपने संघ के ब्रह्म पूजनीय प्रेसिडेंट महाराज के पास से और फिर हम लोग कहेंगे कि मंत्र तो ले लिया 5 साल पहले जब फब तो कुछ किया नहीं और यदि महाराज जी के साथ में बात करने का मौका मिल गया तो प्रश्न कर बैठे कि मन तो एकाग्र होता नहीं है क्या करें तो अभी कुछ किया ही नहीं है ना ही कोई अनुभूति हुई है करते-करते कोई समस्या खड़ी हुई कुछ नहीं हुआ और झूठ मुठ का हम प्रश्न करते रहेंगे तो ऐसा नहीं करके ठाकुर कहते हैं ज सिंसियर जप ध्यान करेंगे गुरु प्रदत्त मंत्र का तो फिर देखिए कि जितने भी बार कोई भी समस्या आएगी गुरु खुद सामने आकर के कह देंगे कि इसका इस तरह से निवारण किया जाए और ऐसा तो नॉट पॉसिबल कि हमारे गुरु जो है उनके साथ में हमको वार्तालाप करने का सब समय मौका मिले ठाकुर के साथ में भी वार्तालाप करने का मौका ऐसे सबको नहीं मिलता था किंतु फिर ठाकुर या तो फिर अपने जो भी गुरु है वह क्या है कि अपने मन के माध्यम से हमको कहलवान देखा वह नरेण की स्टोरी ही हमने यह पहारी बाबा के केस में देखी कि नर ने ठाकुर के पास में से इतना सब कुछ सीखा इसके बावजूद नरेण के मन में यह इच्छा जागृत हुई कि देह की रक्षा करने के लिए देह का स्वास्थ्य मेंटेन करने के लिए मुझे हठ योग सीखना होगा तो यह हठ योग सीखने के लिए नरेण पहारी बाबा के पास जाता है और उसी समय कु कुछ दिनों तक सतत ठाकुर आकर के नरेण के सामने दर्शन देते हैं और बड़े ही सकु चेहरे से उनके सामने देखते रहते हैं तब कहीं जाकर के नरेंद्र को अकल आई कि ठाकुर की इच्छा नहीं है कि मैं पहारी बाबा से हठयोग सीखूं तो फिर नरेण वहां से भविष्य के स्वामी विवेकानंद वहां से चले गए तो देखिए कि नरेंद्र ने इतनी तपस्या की है बोलक के ही तो ठाकुर बीच-बीच में आकर के वो कान पकड़ कर के सीधे रास्ते पर चले उनको ले जाते हैं वो अमेरिका की जो फेमस घटना है कि किसी के घर गए थे स्वामी जी तो उन्होंने उनको कॉफी पीने के लिए दिया एक कप में तो जैसे ही नरेण ने व स्वामी जी ने वो कॉफी का कप अपने मुंह के सामने लाया है तो वैसे ही कॉफी के कप में भीतर में ठाकुर प्रकट होकर के बोले कि नरेद इसके भीतर में जहर है इसको पीना मत यानी कि वहां के जो कुछ दुष्ट लोग यही दुष्ट लोग जो अभी ठाकुर कहते हैं कि स्त्री दुष्ट लोग और राजा तो ऐसे ही कुछ दुष्ट लोग चाहते थे कि यह जो स्वामी जी हिंदू धर्म का वेदांत का इतने बड़े पैमाने पर प्रचार कर रहे हैं अमेरिका की जनता का ब्रेन वॉश कर रहे हैं तो यही स्वामी जी को ही ठिकाने ला दिया जाए वह जो कहते थे ना स्वामी जी ने खुद वो माय प्लान ऑफ कैंपेन में कहा कि ऐसी एक फेक न्यूज़ फैला भारत में कि स्वामी जी मर गए हैं तो ये थियोसोफिकल सोसाइटी वाले बड़े खुश हो गए कि एक दूसरे को पत्र लिख के कहते हैं कि डेविल हैज नाउ डाइड नाउ वी आर सेव्ड तो देखिए कि दुश्मन भी होते हैं तो उनसे अपनी रक्षा किस तरह से प्राप्त करनी है तो ठाकुर आ कर के दिखा देंगे किंतु यह सब कब होगा बीच-बीच में गुरु आकर के स्वयं अपना रास्ता कब ठिकाने कब दिखा देंगे कब अपना कान पकड़ कर के हमको सही रास्ते पर ले जाएंगे व कब होगा जबकि हमारा साधन भजन नियम है तब होगा तो यहां पर भी ठाकुर मास्टर महाशय को दो चीज कहते हैं एक तो उनके हृदय की ताप और चिंता को ठंडी करने के लिए कहते हैं कि तुम्हारा शीघ्र होगा और फिर शीघ्र होगा कैसे तो फिर यह कहते हैं कि यदि नियमित साधन भजन करोगे तो गुरु स्वयं आकर के रास्ता बीच-बीच में दिखा देंगे चौकी होया तीनी ठाकुरे दिके ता कईया आन अभी यहां पर ठाकुर ने जैसे ही सामने आकर के खड़े होकर बात करना शुरू किया उस समय मास्टर महाशय जो कि नबत के रांडे में बैठे थे वह एकदम चकित हो गए उन्होंने अपेक्षा नहीं रखी थी कि ठाकुर स्वयं आकर के उनके सामने खड़े हो जाएंगे तो चकित होकर के वह ठाकुर के सामने देख रहे हैं ताक रहे हैं नो आसन त्याग करेना अभी भी उन्होंने आसन त्याग नहीं किया है ठाकुर के सन्मान में खड़े नहीं हुए हैं अभी भी बैठे हैं श्री राम कृष्ण तुमार समय होए छ ठाकुर कहते हैं तुम्हारा समय हो चुका है पाखी डीम फूटो बार समय ना होले डीम फूटो ना पंखी का जो अंडा है वो टूटने का समय जब तक नहीं होता माने पंखी का बच्चा जब तक तैयार नहीं हो जाता बड़ा नहीं हो जाता तब तक ये अंडा फूटता नहीं है फिर अ वो जब पंखी का बच्चा बड़ा हो जाएगा तो अपनी ही चोंच मार कर के वोह अंडे को तोड़ कर के बाहर आ जाएगा तो वैसे ही कि अपनी आध्यात्मिक जीवन में भी देखिए कि मैच्योरिटी का एक समय आता है जब हमारे जीवन में एक टर्निंग पॉइंट आता है तो जैसे हमने देखा कि नरेद के जीवन में जो टर्निंग पॉइंट था कि पिताजी का मृत्यु होने के बाद में उनका जीवन पूरा झंझावात में डूबा हुआ था क्या करें क्या ना करें यह नरेंद मास्टर महाशय को कहते हैं शरत को भी कहते हैं कि तुम लोगों को शांति मिल गई है किंतु अभी तक मुझे शांति नहीं मिली यह कब की बात है यह वराह नगर मठ की बात है मास्टर महाशय कलकाता से ठाकुर की महासमाधि के बाद में कोलकात्ता में वराह नगर मठ की स्थापना हुई थी वहां पर मास्टर महाशय आते हैं तब नरेंद उनको यह कहता है कि आपको शांति मिल गई है शरद को भी शांति मिल गई है मुझे किंतु शांति नहीं मिली क्या अर्थ है शांति नहीं मिलने का कि मन अभी ऐसा नहीं है कि आध्यात्मिक शांति नहीं मिली वो तो मिल गई है किंतु फिर जीवन का जो एक हायर पर्पस क्या है ठाकुर का मिशन क्या है किस कारण से ठाकुर ने देह धारण किया है और जिस कारण से देह धारण किया उसमें यह त्यागी संतानों की क्या भूमिका है यह सब जो चर्निंग हो रहा था नरेंद्र के हृदय में जिस चर्निंग के परिणाम स्वरूप नरेंद्र पूरे भारत में घूमा विदेश में गया भारत वापस आकर के रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और फिर रामकृष्ण मिशन को एक सॉलिड फाउंडेशन पे फिलोसॉफिकल स्पिरिचुअल फाउंडेशन पर रख के गए वह जो भविष्य का जो महत कार्य करना है उसका चर्निंग सतत उनके मन में चल रहा था तो वह तभी शांत होगा जबकि उन्होंने संघ की स्थापना कर दी थी कल हमने जैसे देखा था कि यदि यह स्वामी जी के जीवन का जो चर्निंग पॉइंट है चर्निंग पीरियड है क्या करें भविष्य में उसका शांति एक एक तरह से उनको अमरनाथ में आया था अमरनाथ गुफा की यात्रा करने के समय स्वामी जी का स्टेटस क्या था कि पूरे विश्व में घूम लिए थे अमेरिका में भारत में ब्रिटेन में यूरोप में वेदांत और योग के बीज सब जगह पर फैला करके आए थे भारत में आकर के गुरु भाइयों को इकट्ठा करके रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर दी थी और अपने गुरु भाइयों को उसका जिम्मा सौंप दिया था तो उनका जो महत कार्य है उस जीवन का बाय दैट टाइम समाप्त हो चुका था वही है कि ये जो नवनिर्मित रामकृष्ण मिशन है उसके लिए उसको सॉलिड फाउंडेशन पर रखने के लिए जो फाइनेंशियल सिक्योरिटी चाहिए फिर यह जो नए आए हुए ब्रह्मचार्य की ट्रेनिंग किस तरह से सिस्टम बना कर के जाए जो कि हजार साल तक चलती रहे 1500 साल तक यह सॉलिड फाउंडेशन और थोड़ा सा सॉलिड करना था उतना ना ही काम बाकी था तो बाय द टाइम स्वामी जी अमरनाथ गुफा में गए तो धीरे-धीरे करके फिर उनका मन अंतर्मुखी जी के जीवन के कुछ टर्निंग पॉइंट यहां पे मास्टर महाशय के जीवन में भी टर्निंग पॉइंट कि ठाकुर के पास में आने से पहले जो डोमेस्टिक उनके जो समस्याएं थी वो इस हद तक उनको टेंशन में लाकर के खड़ी कर दी थी पिताजी के साथ में नहीं पट रहा है पिताजी का घर छोड़ कर के अपना घर अलग से किया है ठाकुर खुद मास्टर महाशय को पूछते हैं कि अच्छा तुम अपने पिताजी के घर कब जाओगे वापस क्योंकि ठाकुर चाहते हैं कि फिर यह मास्टर महाशय पिताजी के साथ में समाधान कर ले क्योंकि ठाकुर यह जॉइंट फैमिली के बड़े हिमायती थे यह मैंने देखा है तो यह अलग से रह रहे हैं पिताजी को छोड़ कर के वह ठाकुर को पसंद नहीं था तो इसीलिए ठाकुर मास्टर महाशय को पूछते हैं कि तुम पिताजी के पास कब जाओगे वापस रहने के लिए तो फिर यह मास्टर महाशय कहते हैं कि वहां पर मुझे बहुत कष्ट मिला है वहां पर वापस जाने की मेरी इच्छा नहीं अभी यह मुझे नहीं पता कि कष्ट उनको पिताजी से मिला कि फिर उनके दूसरे भाई वहां पर रहते होंगे उससे मिला कि क्या है किंतु मास्टर महाशय इतना तो कहते हैं कि उस घर में मुझे बहुत कष्ट मिला उस घर में वापस पैर रखने की मेरी कोई इच्छा नहीं है तो फिर भी ठाकुर इंसिस्ट करते हैं कि नहीं तो नहीं तुम वापस जाओ ही जाओ किंतु मास्टर महाशय लिखते हैं कि ठाकुर की इस तरह की इच्छा होने के बावजूद मेरा जो बदनसीब है उसकी वजह से मैं उस घर में वापस नहीं जा पाया तो वह सब जो टेंशन डोमेस्टिक टेंशन था मास्टर महाशय के मन में तो अभी क्या है कि अभी एक समय ऐसा आया है कि जो अंडे के भीतर में पंखी तैयार हो गया है यानी कि जब चर्निंग आती है जीवन में ये टेंशन है या मुसीबतें आती है तब हमारा मन जैसे कि और खुलता है जैसे किय चंदन का लकड़ी उसको आप जितना घिस होगे उतना ही उसमें से खुशबू आएगी सुवास आएगी तो यह चर्निंग यह टेंशन यह संघर्ष यह कष्ट यह तपस्या हमारे आध्यात्मिक जीवन को और भी सुवासित बनाते हैं तो मास्टर महाशय के जीवन में यह जितनी भी ट्रबल संघर्ष था वह एक कहेंगे कि एक क्या कहेंगे कि मैच्योरिटी के पॉइंट पर आकर के खड़े हो ग गए हैं अभी आध्यात्मिक नवजागरण उनका होना ही होना है यह जो यह ठाकुर को जॉइंट फैमिली ज्यादा पसंद थे तो राम बाबू रामचंद्र दत्त ठाकुर के बड़े ही घनिष्ठ गह गृहस्थ शिष्य एक बार ठाकुर के पास में आकर के कह रहे हैं अभी क्या है कि राम बाबू के पिताजी ने दूसरी शादी की थी तो अभी जो नई मां सौतेली मां थी तो वह राम बाबू उसके बारे में ठाकुर के के सामने कंप्लेन कर रहे हैं कहते हैं कि बाबा गोलाई गए छ बाबा अर्थात कि उनके पिताजी गोलाई गछ यानी पागल हो गए हैं तो ठाकुर ने जैसा ऐसा सुना कि राम बाबू अपने पिताजी के बारे में ऐसा कह रहे साथ-साथ में ही वह नाराज होकर के बोले उठे देखो देखो और बाबा गल्लाई गछ और निजे ठीक आछ यानी पिताजी पागल हो गए खुद ठीक है तो फिर राम बाबू कंप्लेन करते हैं कि देखिए ना उनकी जो जो दूसरी पत्नी है जब भी घर में आती है तब भी घर में कंका झगड़ा यह सब होता है और घर में अशांति आ जाती है वो अपने पिताजी के घर में जाकर के रहे ना उसकी जो सौतेली मां है जाओ अपने पिताजी के घर प जाकर रहो हमारे घर में आकर के रहने की क्या जरूरत है तो फिर ठाकुर कहते हैं तुम अपनी बीवी को पिताजी के घर भेज दो ना अपनी बीवी को साथ में रख कर क्यों क्यों रह रहे हो यानी कि ये जॉइंट फैमिली के प्रति ठाकुर का एक था और मास्टर महाशय को भी वो कहते हैं कि जब साथ में रहेंगे तो क्या है खाना पना साथ में बनता है इससे होता क्या है कि साधन भजन करने में सुविधा होती है जो भी है यह ठाकुर के सब विचार है आजकल के जगत में अभी जॉइंट फैमिली में रहना बड़ा मुश्किल है लोगों का मन भी ऐसा विचित्र हो गया है दूसरा की सहन शक्ति चली गई है माने मैं खुद की बात करूं दूसरों की तो क्या कहूंगा कि मुझे यदि जॉइंट फैमिली में आज रहने को आए या तो फिर तो मुश्किल लग रहा है क्योंकि हम सभी की एक इडियो सिंक्रेसी होती है एक खास प्रकार प्रकार का माइंड सेट हो जाता है तो फिर अभी यह आश्रम भी तो एक जॉइंट फैमिली जैसा ही है यहां पर कोई साउथ इंडियन है कोई नॉर्थ इंडियन है कोई बंगाली है कोई गुजराती है तो यह पूरा डिफरेंट डिफरेंट तरह के संस्कार लेकर के हम लोग यहां पे इकट्ठा हुए हैं ठाकुर महा स्वामी जी के प्रति हमारी भक्ति है उस पर कोई संदेह नहीं किंतु फिर जो बाकी के संस्कार है वह इतने डिफरेंट है कि फिर साथ में रहना एक बहुत बड़ी तपस्या है तो यह तो मैं एकदम कहता हूं कि ठाकुर यह देखिए कि यह जो जॉइंट फैमिली के प्रति ठाकुर का जो इस तरह का एक यह है कि हमेशा उसको प्रमोट करते रहते हैं उसी का भविष्य का परिणाम है यह रामकृष्ण संघ यह भी एक तरह से जॉइंट फैमिली हिंदू जॉइंट फैमिली की तरह ही है सब तरह के संस्कार वाले सब तरह के रीजन से सब तरह के देशों से सब तरह की भाषाओं के विभिन्न साधु आकर के भक्त आक के एक जगह पर रहते हैं तो यह जो ठाकुर कहते हैं ना कि प्रेम और भालोबासा उसी से यह संघ घड़ा हुआ है तो शुरू शुरू में तो हमको बड़ा दिक्कत लगेगा कभी-कभी गुस्सा भी आ जाएगा किंतु क्या है कि आध्यात्मिकता का यह एक कहेंगे कि मेजरमेंट है कि मैं कितना आध्यात्मिक हूं बताता है कि मैं दूसरों के प्रति कितना मैं मेरे दूसरों के प्रति मेरा कंपेज कितना है दूसरों के प्रति मेरी करुणा कितनी है मैं दूसरों को कितना टॉलरेट कर पाता हूं छोटी-छोटी बातों में गुस्सा हो जाऊंगा कोई म सब समय लोगों की निंदा करूंगा अरे यह यह कर रहा है यह यह नियम का भंग कर रहा है यह यह कार्य नहीं कर रहा वह यह नहीं कर रहा एक सतत लोगों के प्रति एक तरह की कटुता लोगों के प्रति निंदा लोगों की निंदा लोगों के प्रति एक तरह का एक वि घृणा का भाव यह यदि हम प्रकट करते रहे तो जानिए कि आध्यात्मिकता में हमने प्रवेश ही किया है आगे बिल्कुल नहीं बढ़े हैं भले ही चाहे हमारा पर्सनल लाइफ कितना ही यह ना हो और यदि किसी में आप यह देखें कि उनका हृदय दूसरों के प्रति प्रेम से भरा हुआ है सब समय उनका एक मित्रता पूर्ण व्यवहार होता है दूसरों के प्रति एक करुणा होती है तो दूसरों को सहाय करने की एक वृत्ति होती है दूसरों के साथ में हंस कर के बात करते हैं तो यह जो विनम्रता बड़ों के प्रति विनम्रता अपने सह जो उम्र वाले हैं उनके साथ में मित्रता अपने से जो छो टे हैं उनके प्रति करुणा उनको सहाय करने का यह भाव यह जब आप देखेंगे तब देखिए कि इस तरह का व्यक्ति भले ही चाहे आध्यात्मिकता ना दिखाता हो किंतु फिर भी आध्यात्मिक जीवन में वह काफी आगे बढ़ा है तो यहां पर भी ठाकुर कहते हैं कि मास्टर महाशय के जीवन का यह जो डोमेस्टिक लाइफ का जो प्रॉब्लम चल रहा था वह प्रॉब्लम उनके जीवन में इतना एक संघर्ष लाकर के खड़ा किया कि संघर्ष की वजह से अभी उनका आध्यात्मिक नवजागरण आध्यात्मिक सूर्योदय होने ही वाला है अंडे के भीतर में जो पंखी है पंखी का बच्चा वह बड़ा हो गया है अभी चोंच मार कर के अंडे को तोड़ेगा और बाहर आएगा और पंख फैला करके उड़ान भरेगा तो यह समय मास्टर महाशय का आ गया है जे घोर बोले छी तोमार शी घरही बटे यह थोड़ा सा गुड है ठाकुर कहते हैं मैंने तुमको जो घर बताया है वही तुम्हारा घर है यहां पर घर क्या अर्थ ठाकुर क्या कहते हैं कि जिस प्रकार की साधन पद्धति जिस प्रकार की फिलोसोफी मास्टर महाशय को ठाकुर ने बताई है वह फिलोसोफी वह साधन पद्धति तुम्हारे लिए मैंने ठीक ही सिलेक्ट की है अभी क्या है कि हमको पता है कि ठाकुर के पास में जैसे नरेण आता था तो नरेण को ठाकुर अहित वेदांत की शिक्षा देते थे और बाकी जो सब आते थे उनको ठाकुर कहते थे कि भक्ति मार्ग में जाओ मास्टर महाशय जो इतना तर्क करते थे कि दूध यदि सफेद है तो वह काला कैसे हो सकता है यदि काला है तो सफेद कैसे हो सकता है मूर्ति पूजा यदि करते हैं तो मूर्ति पूजा में तो हम मिट्टी की मूर्ति की पूजा नहीं करते हम तो पूजा करते हैं उसके भीतर में जो ईश्वरीय स्वरूप है उनकी वगैरह वगैरह साकार निरा यह जो सब उनके मन में जो विचारों का युद्ध चल रहा था तो ठाकुर ने कहा वह विचार बंद करो ईश्वर के ऊपर में श्रद्धा रख करके साधन भजन करना शुरू कर दो फिर ईश्वर ही आ करर के बता देंगे कि मैं साकार हूं ना कि निराकार हूं ईश्वर स्वयं यह मूर्ति पूजा करनी है कि नहीं करनी है वगैरह वगैरह तो फिर ईश्वर ही बता देंगे तो इस अर्थ में यहां पर ठाकुर कहते हैं कि मैंने तुम्हारा जो घर बताया है वो तुम्हारा घर ठीक ही है तुमार शही घरही बटे वह तुम्हारा ही घर है अर्थात कि जिस प्रकार की साधन पद्धति मैंने तुमको बताई है वह साधन पद्धति तुम्हारी ही है ई बोलिया ठाकुर मनीर घर आबार बोलिया दिलन यह बोलकर के ठाकुर ने मणि का जो घर है जो साधन पद्धति है जो विचार सारणी उनको फॉलो करनी है वह फिर से बता दी अभी यह घर क्या है वो तो मास्टर महाशय नहीं बताएंगे किंतु एटलीस्ट बाकी जितने भी डिसाइल है उनके बारे में इतना भी हमको नहीं पता कि ठाकुर ने उनको किस भाषा में बात की उनके साथ में कब-कब कहां-कहां पर कैसे-कैसे उनको गाइड किया बस एक नरेण है स्वामी जी है थोड़ा बहुत हमको बताते हैं बाकी बाकी सब डिसाइल राजा महाराज हरि महाराज निरंजन महाराज योगेंद्र महाराज उनका ठाकुर के साथ में वन ऑन वन क्या वार्तालाप हुआ गुरु श विषय में क्या संवाद हुआ बड़ा ही रेयरली कुछ जानने को मिलता है तो उस दृष्टि से यह डिस्कशन बड़ा ही यूनिक है बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु इसके बारे में हमने इतने सारे
प्रश्न: ठाकुर ने माँ की षोडशी पूजा की इसके पीछे का तात्पर्य क्या है?
क्लासेस किए हैं पास अच्छा यदि शॉर्ट में कहा जाए तो देखिए कि अवतार और शक्ति दोनों एक दूसरे के पूरक है यानी कि ब्रह्म और शक्ति ब्रह्म कार्य नहीं करेगा किंतु आध्यात्मिक चेतना ब्रह्म में ही है शक्ति कार्य करती है यानी कि यह आप यदि उदाहरण दूं तो एक जनरेटर होता है इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने वाला और फिर वायर होता है कि जो जनरेट की हुई इलेक्ट्रिसिटी अपने घर तक लाता है तो वह जो इलेक्ट्रिकल जनरेटर है वह है ठाकुर और जिस वायर के माध्यम से शक्ति अपने यहां पर आती है वह है मां देखिए कि जब क्राइसिस आएगी
प्रश्न: जीवन में थोड़ी सी समस्या आने के साथ साथ ही हमारा सारा आध्यात्मिक ज्ञान हवा में उड़ जाता है. हम टेंशन में, चिंता में पड़ जाते है. इसका क्या सोलुशन है?
तो ठाकुर का हमने देखा कि वह हृदय को जूता मार देते थे झाड़ू मार देते थे हालांकि निर्विकल्प समाधि प्राप्त की अवतार स्वयं है है किंतु ठाकुर हृदय को कहते हैं कि जब मैं गुस्सा करूं तो तुम सहन कर लेना तुम गुस्सा करोगे तो मैं सहन कर लूंगा वरना तो हमको फिर खजांची को बुलाना होगा मध्यस्था करने के लिए मां का देखा हमने कि किस तरह से पागली मामी को श्राप दे दिया फिर मां खुद दुखित हो गई कि अरे मेरे मुंह से यह क्या निकल आया फिर हमने देखा कि एक व्यक्ति है बड़ा सीनियर वह कहता है कि मां इस तरह का श्राप दे ही नहीं सकती यह घटना गलत लिखी गई है क्यों क्योंकि ठाकुर ने कहा है जिसने समाधि प्राप्त करती है गलती से भी गलती नहीं कर पाएगा तो अभी यह दो ठाकुर और मां जिनसे ऊपर में आधुनिक युग में और कोई नहीं है वे लोग जद गुस्सा करेंगे तो वे लोग पिटाई करना शुरू कर देंगे या श्राप देना शुरू कर देंगे तो फिर उनके सामने हम कौन है तो क्या है कि जब क्राइसिस आती है मोमेंट ऐसा होगा कि सब कुछ दिमाग से निकल जाए और हम सर्वाइवल के लिए जो भी करना है करें द फाइट और फ्लाइट इंस्टिंक्ट जिसको कहते हैं किंतु साथ-साथ में ही देखना है कि साधन भजन यदि नियमित रूप से चलते रहते हैं तो यह जो क्राइसिस वाला पॉइंट जो है ना कि हमारा सेल्फ डिसिप्लिन टूट जाए वगैरह वह धीरे-धीरे करके कम होता जाएगा अदृश्य नहीं होगा स्वामी जी अमेरिका गए थे और यह चारों ओर से उनके ऊपर में मिशनरियों का अटैक हो रहा था तो भारत में बार-बार लेटर लिखते हैं कि तुम लोग मीटिंग करके रेजोल्यूशन भेजो और कहो कि यह तो हमारे एक एक्रेडिटेड रिप्रेजेंटेटिव है तो यह कर नहीं पा रहा है आला सिंगा तो उसको ली देता हुआ पत्र लिख दिया फिर स्वामी जी ने कहा कि उस समय में बड़ा टेंशन में था इसलिए मैंने ऐसा लिखा तुम माइंड मत करना तो यह पढ़ कर के मैंने जब पहली बार पढ़ा था मैंने कहा यह क्या मैंने पढ़ लिया जिनको कि काशीपुर में निर्विकल्प समाधि प्राप्त हो गई थी वह आज कहते हैं मैंने टेंशन में आकर गुस्सा कर लिया डोंट माइंड दैट मच तो अभी क्या है कि यह तो मनुष्य जीवन के साथ में है ही है क्राइसिस आने से ही कुछ ना कुछ यह सब होगा किंतु गोइंग बियोंड दैट यदि नियमित रूप से साधन भजन चलता रहेगा ना तो फिर क्या है कि उसका जो रिपल इफेक्ट जो है या तो फिर साइड इफेक्ट है वह सब नहीं आएगा अदर वाइज यदि हम गुस्सा करते हैं टेंशन करते हैं तो क्या है कि उसका फिर शरीर के ऊपर में फिर मन के ऊपर में बड़े लंबे समय तक उसका प्रभाव चलता रहता है नींद उड़ जाता है ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है वगैरह वगैरह तो साधन भजन करने से वह सब साइड इफेक्ट नहीं होगा जो मोमेंट जो होना है सो हो गया बाद बाद में इमीडिएट माइंड कंट्रोल में आ जाएगा इमीडिएट यह सब उसका साइड इफेक्ट वश आउट हो जाएगा तो वह एक बात है दूसरी बात है कि क्या करना है तो करने में तो वही है कि नियमित रूप से साधन भजन करते रहना है वह चाहे स्वाध्याय हो चाहे भक्ति हो कि चाहे वह कर्म योग हो यह कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान यह जो चार साधनाएं हैं नियमित रूप से जितना करेंगे उतना ही देखेंगे कि भीतर से ही क्योंकि क्या है कि कोई यूनिवर्सल सोल्यूशन नहीं है देर आर नो क्राइसिस कि जिसका एक यूनिवर्सल सोल्यूशन हो हमारे जीवन में हमारी क्राइसिस आती है आपके जीवन में आपकी क्राइसिस है किंतु यह जब गुरु मन रूपी गुरु मन में से ही यह जो यहां पर ठाकुर ने हमको भरोसा दिलवाया ना कि एकट करले के ऐसे बोले देवे थोड़ा सा भी करने से कोई आ कर के यानी कि गुरु आ करके कह देगा कि यह यह करो तो भीतर में से ही मन ही गुरु बन कर के हमको मार्गदर्शन दे देगा किंतु इसके पहले प्री कंडीशन क्या है एक्टू करते हुए थोड़ा सा करना पड़ेगा व थोड़ा सा करेंगे बाद में गुरु आ कर के कहेंगे कि यह यह करो तो नियमित साधन वजन करते जाइए जब मोमेंट हम लोग एक कंट्रोल गवा देते हैं फॉरगेट अबाउट दैट वो ठाकुर के साथ में भी हुआ मां के साथ में भी हुआ और मैं कहता हूं कि उनके अवतार तोव का यही निशानी है कि मनुष्य जैसे लक्षण उनमें प्रकट हुए हैं मां कभी अपना टेंपर नहीं गवा ठाकुर कभी हृदय के साथ में गुस्सा नहीं होते स्वामी जी कभी टेंशन नहीं लेते तो यह लोग हमारे लिए एक देवता बनक रह जाता हैं जैसे भवान शिव है भगवान विष्णु है वे लोग है स्वर्ग में उनके साथ में अपना कोई कंपैरिजन नहीं है तो उनकी कही हुई पद्धति के अनुसार साधन भजन हम कभी करेंगे ही नहीं सो ट इज व्ट वी हैव टू थिंक ट यदि उनके साथ में भी ऐसा होता है तो मेरे साथ में हो तो कोई बड़ी बात नहीं है सो ट इज वन कंसोलेशन एंड सेकंड इज की कीप ऑन गोइंग डेली साधन भजन देखिए यह क्या है ना कि कोई भी साधु
प्रश्न: थोड़ी सी साधना करने से कोई आ के कह देगा यह यह. क्या इसके कोई उदाहरण है?
अपना आध्यात्मिक जीवन इस तरह से डिस्कस नहीं करता माने बड़ा रेर हमको देखने को मिलता है और इसीलिए यह जो मास्टर महाशय का ठाकुर के साथ में जो वार्तालाप है उसका इतना सिग्निफिकेंट है कि एक हाईएस्ट लेवल के साधक उनका किस तरह से ठाकुर ने उनका लाइफ उनका बिल्ड अप किया अ मुझे ऐसा याद नहीं आ रहा है पढ़ा होगा बहुत सारा कुछ पढ़ा है किंतु इमीडिएट में रिकॉल नहीं कर पा रहा हूं मैं अपने खुद की लाइफ में से बताऊं कि आपको पता है कि मैं जॉइन करने को आया था किंतु मेरे माइंड में यह सब वो रूरल डेवलपमेंट ट्राइबल डेवलपमेंट वाले विचार इतने सारे थे कि फिर आखिर में मैं संघ छोड़ केर चला गया रांची में जाके यह सब कर रहा था फिर वहां पर भी एक टर्निंग पॉइंट आया जो टर्निंग पॉइंट मुझे संघ में वापस लेकर आया किंतु जब मैं वापस आया बेलूरमठ तो उस समय मेरे मन की परिस्थिति इतनी यह थी संघर्ष इतना चल रहा था रांची में प्रतिदिन में गांव में जाता था और यहां पर तो पूरा दिन भर आपको एक ही जगह पर रहना है और वो परा मब एकदम कंप्लीट एक्सट्रोवर्ट लाइफ में से कंपलीटली इंट्रोवर्ट लाइफ लीड करना है ट्राइबल डेवलपमेंट और बेलर मट का ट्रेनिंग सेंटर यू कैन इमेजिन कि इससे बड़ा कंट्रास्ट नहीं मिलेगा तो वो संघर्ष इतना चल रहा था मुझे डाउट हो गया कि ये सेकंड टाइम में टिक पाऊंगा कि नहीं लगा कि पहली बार की तरह मैं मुझे चले जाना पड़ेगा तो उस समय हम लोग जयराम बाटी गए थे जयराम बाटी कामर पुकुर की यात्रा होती है मने सभी जितने भी आसपास के तीर्थ स्थान होते हैं तो जयराम बाटी गए थे और मेरे मन में यही चल रहा था अभी क्या करें वापस आने के बाद में मैं जाकर के बता दूं सुहितानंद जी हमारे इंचार्ज थे बता दूं क्या कि मैं फिर से जाना चाहता हूं वहां पर रांची नहीं रह पाऊंगा यहां पर यह सब चल रहा था तो अभी हुआ क्या कि जयराम बाटी का जो था हमारा स्टे उस सुबह को निकलना था वहां से तो नाश्ते के बाद में इमीडिएट तो नाश्ते के बाद में सबको बोल दिया कि वह जहां पर गाड़ी खड़ी है हम हमारी बस वहां पर चले आना तो हम लोग गए बस के पास में देखा कि वह कुछ पंचर वगैरह कुछ हो गया है ना कि कुछ है डिले होगा मैंने डिपार्चर एक घंटा जितना डिले होगा तो आपको जो करना है वोह कीजिए तो मैंने क्या किया मां का जो घर है जयराम बाटी आप जदी गए होंगे तो मां के एक घर है वहां पे उसका एक वरांडा है तो मैं वहां पर जाकर के बैठा अभी उस समय और कोई नहीं था पूरा एकदम खाली था बस एक बंगोली डिवटी था वो बंगाली में कोई भजन गा रहा था तो वो एक भजन ग रहा था मैं चुपचाप वहां पर बैठा था उस समय मुझे एक ऐसी अनुभूति हुई कि जिसने मुझे लगा कि मेरा पूरा पर्सपेक्टिव मेरा पूरा लाइफ मेरा पूरा थिंकिंग प्रोसेस उसने जैसे कि कंप्लीट ट्रांसफॉर्म कर दिया हो और फिर मैं जब वापस आया बेलूरमठ तब बेलूर पहली बार मैंने मां को पढ़ना शुरू किया तब तक मैंने मां को नहीं पढ़ा था या तो फिर प्रॉब्लम क्या था मैं मां को पढ़ता था हिंदी में जो कि बड़ा बोरिंग लगता था उस समय मुझे नहीं वह ठाकुर की तरह समाधि का ईश्वर है ना ही स्वामी जी की तरह फिलोसोफी का ऐश्वर्य है तो है क्या फिर मां के जीवन में कुछ नहीं है तो हिंदी में पढ़ना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा था दो-तीन पेज पढ़कर मैंने छोड़ दिया था किंतु बाय दिस टाइम मैंने बंगाली सीख लिया था तो जयराम बाटी से आने के बाद में पहली बार मां को बंगाली में पढ़ना शुरू किया एंड देन एज इफ के जैसे कि हृदय के जितने भी बंद दरवाजे हैं एक के बाद एक खुलना शुरू हुए एटलीस्ट में टिक गया संघ में एटलीस्ट वापस जाना नहीं हुआ सो दैट इज माय ओन एक्सपीरियंस