Invocation
ॐ स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री श्री राम कृष्ण कथामृत और चैप्टर का नाम है श्री जुक्तो केशव चंद्र सेनेर सहीद ठाकुर श्री राम कृष्णेर नौका बिहार आनंद और कथ उप कथन श्री युक्त केशव सेन ब्रह्म समाज का जो लीडर था उसके साथ में ठाकुर का नौका विहार आनंद और वार्तालाप डेट है 27 अक्टूबर आए फिर ठाकुर के साथ में उस समय विजय कृष्ण गोस्वामी भी था वह भी दक्षिणेश्वर में ठाकुर के कमरे में उपस्थित था तो ठाकुर ने कहा तुम भी चलो तो वह भी आ गया अभी हमको पता है ब्राह्मण समाज का थोड़ा सा बैकग्राउंड थोड़ा सा हिस्ट्री हमको पता है कि किस तरह से केशव सेन और यह विजय कृष्ण गोस्वामी इन दोनों के बीच में झगड़ा लग गया था ब्राह्मण समाज का एक नियम था कि विवाह का एक मिनिमम एज होना चाहिए लड़की का क्योंकि उस समय अ भारत में जो एक भाव आंदोलन एक आया था धार्मिक आंदोलन उसमें एक बहुत सारी रिफॉर्म ऑर्गेनाइजेशन भी भारत में खड़े हुए थे उनका सोचना था कि भारत की यह जो अधोगति है पिछले 1000 साल की उसके पीछे में कारण भूत है हमारे समाज में यह जितने भी कुसंस्कार है जितनी भी अंधश्रद्धा एं हैं उसकी वजह से हमारा समाज भीतर से खोखला हो गया है भीतर से कमजोर हो गया है यदि भारत को यह फिर से आर्थिक राजनीतिक मिलिटरी उन्नति करनी है पावर यदि विश्व में फिर से अपना आधिपत्य स्थापित करना है तो फिर भारत को अपने समाज को फिर से परिपट्स है एक स्त्री तो उसको किस तरह के कठोर बंधन में रहना पड़ता था यदि वह लड़की छोटी है तो उसी छोटी उम्र में ही उसकी शादी हो जाती थी फिर ये इस तरह की बहुत सारी कुप्रथा एं हमारे समाज में प्रचलित थी किंतु देखिए कि जब माय प्लान ऑफ कैंपेन स्वामी जी का यह जो प्रवचन हम जो पाठ कर रहे हैं उसमें स्वामी जी स्वयं कहेंगे आश्चर्य की बात है कि पहले कई बार तो वैसे स्वामी जी ने कहा है कि यह पर्दा प्रथा है या तो फिर स्त्रियों को एक तरह से समाज में नहीं उनको डेवलप होने देना उनको एक अंदर महल में रहना उनको एजुकेट नहीं करना उनके स्वास्थ्य के बारे में चिंता नहीं करना यह जो सब स्त्रियों के ऊपर में सामाजिक बंधन थे उसका एक कारण था कई कहीं-कहीं पर स्वामी जी ने कहा है कि यह बाहर से आक्रमण होना प्रारंभ हुए तब से इस तरह की प्रथा पर्दा प्रथा फिर यह बाल्य विवाह प्रथा इस तरह की हमारे देश में स्टार्ट हुई किंतु यह माय प्लान ऑफ कैंपेन में स्वामी जी और भी एक बात कहते हैं कहते हैं कि बुद्धिज्म में जब विकृति आना शुरू हुई तो वह हमारे भारतीय समाज के पतन का सर्वप्रथम कारण था इसी वजह से हमारा क्षत्रिय क्लास इस देश को डिफेंड करने में असमर्थ रहा सबको पकड़ पकड़ करके साधु बना दिए जाते थे और इसीलिए क्षत्रिय लोग जब आक्रमण स्टार्ट हुए देश की रक्षा नहीं कर पाए और फिर जब आक्रमण स्टार्ट हुए तो फिर स्त्रियों की रक्षा ही एक सबसे बड़ा गुरुत्व पूर्ण मामला बन जाता है तो स्त्रियों को फिर सब समय बंधन में रहना पड़ता है और उनके विकास की तक कम हो गई अभी देखिए कि यदि देश को विकसित होना है तो सर्वप्रथम स्त्रियों का विकास होना आवश्यक है क्यों आवश्यक है क्योंकि स्त्रियां ही बच्चों का लालन पालन करती है बच्चों के भविष्य का घडतर करती है यदि मां खुद शारीरिक मानसिक रूप से कमजोर हो मां के जीवन में ही यह आध्यात्मिक आदर्श ना हो तो मां फिर अपने बच्चे को क्या सिखाएगी इसीलिए आप देखिए कि जितने भी महापुरुषों का जीवनी आप पढ़ेंगे उसके उस जीवनी में उन सबकी मां की एक बड़ी ही महत् पूर्ण भूमिका हमको दिखाई देगी स्वामी जी का ही देखिए कि भुवनेश्वरी देवी उनका जो अध उनकी एक जो आध्यात्मिक उपलब्धि थी उनकी एक जो स्ट्रांग पर्सनालिटी थी उनका जो एक आदर्श था जीवन में आदर्श के अनुसार सब कुछ करना है मुझे कुछ बेनिफिट हो रहा है या तो मुझे कुछ अपने स्वार्थ के लिए प्राप्त करना है इसके लिए नहीं किंतु आदर्श के लिए सब कुछ करना है तो छोटे में यह भुवनेश्वर भुवनेश्वरी देवी ने जब आदर्श स्थापित किए तो वही नरेंद भविष्य में बड़ा हो बड़े होकर के स्वामी विवेकानंद हुए तो मां की भूमिका सामाजिक उत्थान में सबसे ज्यादा आवश्यक है अभी यह आजकल कहा भी जाता है कि यदि आप एक पुरुष को यदि आप कुछ उसको हेल्प करेंगे तो आप सिर्फ एक व्यक्ति को ही हेल्प करेंगे कि यह जो ये एनजीओ सर कल है ना आजकल की ये जो नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन सर्विस नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन उसमें इस तरह की बात चलती है यदि पुरुष को हेल्प करेंगे तो एक व्यक्ति को ही हेल्प करने के समान हुआ किंतु यदि आप स्त्री को हेल्प करेंगे तो आप पूरे परिवार को हेल्प करेंगे क्यों क्योंकि स्त्री की जब उन्नति होती है तो वह अपने पूरे परिवार को साथ में लेकर के चलती है वह सिर्फ अपने खुद के स्वार्थ के लिए कुछ नहीं करेगी पुरुष को आपने पैसा वगैरह दिया यदि गरीब को तो हो सकता है कि दारू पीने में ना ऐसा कोई जुआ वगैरह में व मतलब वह जो यह सब बैड हैबिट होती है उसमें वह पैसा उड़ा देगा किंतु मां को यदि पैसा मिलता है गरीब घर में मां है उसको तो वह अपने बच्चों के पोषण के लिए सबसे पहले बच्चों के पोषण के लिए बच्चों की शिक्षा के लिए सबसे पहले उस पैसों का इस्तेमाल करेगी तो जिस तरह से यह परिवार के लिए सही है कि यदि मां को हेल्प करेंगे तो सबसे उससे उस पूरे परिवार को उससे हेल्प मिलेगा पूरे ब परिवार इससे बेनिफिट होगा तो इट इज इक्वली ट्रू अबाउट द नेशन देश के लिए भी यह इतना ही सही है देश की स्त्रियों को यदि आप हेल्प करते हैं तो पूरे देश की उन्नति होगी तो अभी यह जितनी भी रिफॉर्म मूवमेंट्स थी तो यह सब स्त्रियों का उत्थान करना है वो सब कर रही थी किंतु देखिए कि ठाकुर की दृष्टि यहां पर किस तरह से है ठाकुर ने कहा है यह जो सब छुआछूत प्रथा है अस्पृष्यता का एक रोग हमारे समाज में आ गया था तो यह सब रिफॉर्म सोसाइटी स्त्रियों की उन्नति है कि अस्पृष्यता निवारण है या तो फिर यह सती प्रथा है इस सब कु रिवाजों को दूर करना चाहती थी उसी समय किसी ने ठाकुर को पूछा था कि ये अस्पृष्यता निवारण किस तरह से किया जाए यह इसको स्पर्श करना यह छोटी जाति यह बड़ी जाति इसका सोल्यूशन क्या है भारत में तो ठाकुर ने क्या उत्तर दिया था भक्ति ही एकमात्र सॉल्यूशन है भक्ति का प्रवाह यदि बहाएंगे तो उस प्रवाह में कोई चंडाल कौन है ना कि कोई ब्राह्मण है ना कि कोई क्षत्रिय है सभी उस प्रवाह में बह जाएंगे इसीलिए तो ठाकुर कहते हैं कि चैतन्य देव ने आ चंडाल मने चंडाल से लेकर के सभी जातियों को उन्होंने आलिंगन किया था चंडाल सभाई के कोलेनी य छल ठाकुर बोल चैतन्य देव के बारे में तो यह भक्ति ही एकमात्र सार है यदि आप यह कहेंगे कि समाज में कुरीतियां है समाज में अंधश्रद्धा है सुपरस्टिशन है तो यह सुपरस्टिशन को दूर हटाया जाए उससे पहले किंतु यह देखिए कि यह कुप्रथा आई कहां से कोई भी किसी भी तरह का डिसीज जब शरीर में प्रवेश करता है तो उससे पहले आपको यह समझना होगा कि हमारी इम्यून सिस्टम वीक हो गई है इसीलिए तो बाद में सब रोग प्रवेश करते हैं जैसे कि यह डायबिटीज है जैसे कि यह हार्ट डिसीज है किडनी लीवर यह सब हमारा बिगड़ना शुरू कब होता है जबकि हमारा दो चीजें हैं एक तो डाइजेस्टिव सिस्टम गड़बड़ हो या तो फिर हम सतत स्ट्रेस में रहते हैं यह स्ट्रेस जो है वह सबसे बड़ा किलर है सबसे बड़ा वह मृत्यु का कारण है आज के समय में जितना ही हम स्ट्रेस में रहेंगे जितना ही हम टेंशन में रहेंगे उतना ही हमारा इम्यून सिस्टम वेक होता जाएगा कमजोर होता जाएगा और यह कमजोर इम्यून सिस्टम में फिर धीरे-धीरे करके एक के बाद एक रोग आकर के प्रवेश करेंगे अब ये हार्ट हार्ट डिसीज यदि शरीर में आ गया है तो नो डाउट अब बाईपास सर्जरी शायद करनी पड़ेगी या तो फिर यह डायबिटीज हो गया है तो आपको वोह इंश न के इंजेक्शन लेने पड़ेंगे वो तो क्या है किंतु वो आपका यदि आप हार्ट का ट्रीटमेंट करते हैं ना कि डायबिटीज का ट्रीटमेंट करते हैं उससे किंतु आपका हेल्थ वापस नहीं आएगा ये जो डिसीज है वो कुछ समय तक उसके सिम्टम्स को यह सप्रे करके रखेगा इतना ही यदि आपको हेल्थ की ओर आरोग्य की ओर फिर से वापस जाना है तो यह डिसीज जो प्रवेश किए हैं अपने जीवन में उसका जो रूट कॉज है वो क्या है मेंटल स्ट्रेस उसका सबसे पहले समाधान कीजिए आजकल तो लोगों को नींद नहीं आती है अनिद्रा का रोग एक बहुत बड़ा एक हो गया है आजकल सोने के साथ में ही वह मोबाइल खोल कर के सोशल मीडिया यह सब देखना शुरू कर देते हैं कहीं वह सात आठ घंटों की एक हेल्दी नींद चाहिए एक व्यक्ति को व किसको मिलती है तो देखिए कि इस सबके पीछे का जो रूट कॉज है उसको एड्रेस कीजिए तो फिर यह डिसीज है वह अपने आप दूर हो जाएंगे तो ठाकुर का था कि रूट कोस को एड्रेस करना और व था कि आध्यात्मिकता का पतन भारत में आध्यात्मिकता का रास हुआ धीरे-धीरे करके वैसे तो ये अपना धार्मिक देश है संत महापुरुष अवतारों की भरमार लगी ही रहती है किंतु क्या है ना कि समय बड़ा बलवान है और जैसे अपने शास्त्र में कहा गया है कि यह कृत युग फिर यह त्रेता युग फिर यह द्वापर युग फिर यह कलयुग तो कलियुग का प्रभाव बढ़ जाने से फिर धर्म की हानि होती है धर्म का रास होता है तो फिर आप रिफॉर्म चाहे हजार आप नियम बना ले देखेंगे कि वह नियम जो नियम बनाते हैं वही लोग नियम का पालन नहीं करेंगे वे लोग कहेंगे भाई तुम पालन करो नियम का मैं नहीं पालन करने वाला हूं तो यह तो सब के लिए आप बड़े-बड़े दावे करते हैं कि हां मैं बड़ा रिफॉर्मर हूं आजकल की लैंग्वेज में कहे तो मैं बड़ा लिबरल हूं किंतु उसका खुद का जीवन देखेंगे वो लिबरल वैल्यू या रिफॉर्म वैल्यू जो प्रोफेस करता है मुंह से बोलता है प्रवचन देता है उसके खुद के जीवन में वो वैल्यूज देखने को नहीं मिलेगी तो यहां पर भी केशव के सेन के साथ में वही हुआ यह ब्रह्म समाज का नियम था कि विवाह की लड़की के विवाह की एक मिनिमम ऐज होनी चाहिए और इस एज से पहले लड़की का विवाह नहीं करना है यहां पे था कि यह केशव सेन उसकी लड़की मिनिमम एज से छ छोटी थी शायद एकद साल और एक बहुत धनी व्यक्ति का वह एक प्रस्ताव आ गया तो कैशव ने सोचा कि पहले तो मुझे लड़की का भविष्य देखना है इतना धनी पात्र है वह जदी आज प्रस्ताव आया है आज मैं जदी नियम की वजह से यह कहूंगा कि और एक साल रुक जाओ तो फिर वह तो धनी व्यक्ति और किसी के साथ में शादी रचा लेगा उसको तो क्या है तो पहले लड़की का भविष्य देखो उसकी शादी करवा लो बाद में यह सब ब्राह्मण समाज के नियम टीएम बाद में देखे जाएंगे ऐसा सोच कर के केशव ने अपनी लड़की की शादी करवा दी और फिर साथ-साथ में ही ब्राह्मण समाज में यह विजय कृष्ण गोस्वामी शिवनाथ शास्त्री वगैरह कुछ लोगों का एक अलग दल बन गया उन्होंने कोलकात्ता में प्रवचन देना शुरू कर दिया कि केशव हुसैन बातें तो बड़ी-बड़ी करता है किंतु खुद की लड़की की शादी उसने मिनिमम एज के पहले करवा दी है बोलकर के यह लोग सेपरेट हो गए अभी देखिए कि यह दोनों दलों में यह जो सेपरेट हुआ विजय कृष्ण गोस्वामी का उन्होंने साधारण ब्राह्मण समाज का गठन किया यहां पर यह केशव सेन ने अपने समाज का नाम दिया नव विधान ब्राह्मण समाज तो एक और है नव विधान ब्राह्मण समाज इस और है यह साधारण ब्राह्मण समाज फिर इन दोनों में फिर आर्गुमेंट होती है वाद विवाद होता है वक्त होता एक दूसरे के अपोजिशन में देते हैं आर्टिकल लिखते हैं यह सब होने लगा तो देखिए कि कहां वह भारत को रिफॉर्म करने को आए थे खुद ही वह बेचारे गड्ढे में गिर गए तो ऐसा होता रहता है अभी देखिए कि ठाकुर के पास में किस तरह का यह होता है केशव सेन विजय कृष्ण गोस्वामी दोनों ठाकुर के पास आते हैं यभ ये विजय जहाज लेक आया है वहां पर विजय कृष्ण केशव सेन जहाज लेके आया है विजय वहां पर बैठा था ठाकुर ने कहा चलो मेरे साथ अभी जहाज में इन दोनों को ठाकुर ने मिला दिया है फिर अभी इसके पहले का जो परिच्छेद था सप्तम परिच्छेद उसमें ठाकुर ने कहा इन दोनों में आपस में सुलह करवाने की बात की और इन दोनों को जैसे कि ठाकुर कहते हैं कि शिव के गुरु राम राम के गुरु शिव इन दोनों के बीच में झगड़ा भी हुआ और सुलह भी हो गई किंतु यह जो राम के बंदर और शिव के भूत इनका झगड़ा और इनका आर्गुमेंट वो जैसे कि खत्म नहीं हो रहा है तो ठाकुर ने इन दोनों के बीच में में सुलह करवाने का एक प्रयास किया अभी अष्टम परिच्छेद में देखते हैं कि ठाकुर आगे क्या कहते हैं ठाकुर अभी मास्टर महाशय लिखते हैं श कोले आनंद कोरीते छन सभी लोग आनंद कर रहे हैं ठाकुर केशव के बोली ते छन ठाकुर ने केशव को कहा तुम्ही प्रकृति देखे शिष्य करो ना ताई रूप भें भें जाए तुम प्रकृति देखे बिना जो शिष्य बना लेते हो इसलिए तुम्हारे से वोह बिछड़ जाते हैं है तुम्हारा समाज तोड़ कर के चले जाते हैं अर्थात कि देखिए कि ठाकुर अभी हमको तो पता है कि ठाकुर के पास जो लोग भी आते थे उनका ठाकुर काफी अच्छे से परीक्षण करते थे देखते थे कि यह किस तरह का इसका अधिकारत्ती थे वह देखते थे कि कौन किस तरह के उपदेश का अधिकारत्ती थे जबकि यह केशव का ब्राह्मण समाज या तो कोई भी आप एक नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन अब देख लीजिए कि वहां पर जो फॉलोअर आता है उसको ले ले लिया जाता है और फिर उसको सब की तरह ही उसको भी ट्रीट किया जाता है यानी कि यह फॉलोवर्स में एक तरह का एक कैटेगरी इजेशन जनरली नहीं होता है हां लीडर के कुछ फेवरेट होंगे कुछ अनफेवरेट होंगे वो अलग चीज है किंतु ये फॉलोवर का खुद का एलिजिबिलिटी क्या है उसका खुद का अधिकारत्ती क्या है वो किस लेवल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए उसका सामर्थ्य है उसको देख कर के कस्टमाइज उसके लिए वो उस तरह की शिक्षा नहीं रची जाती जो कि ठाकुर के पास में था अब यह यह बात सुनकर के कभी-कभी हमको ऐसा लगेगा कि केशव सबको ले लेता है जबकि ठाकुर क्या सबको नहीं लेते थे ठाकुर भी सबको लेते थे किंतु यह बहुत बड़ा डिफरेंस हमको याद रखना है कि ठाकुर सामने वाले का चरित्र देख कर के सामने वाले की प्रकृति देख कर के उसको उपदेश देते थे यह निराकार साधना या तो अद्वैद साधना का उपदेश उन्होंने सिर्फ स्वामी जी को दिया था बाकी उसमें भी फिर देखिए कि तीन कैटेगरी हमारे सामने आएगी एक तो है कि सबसे बड़ी दो कैटेगरी है ठाकुर अपने भक्तों में करते थे एक तो है कि जो भक्त जो उनके डिसाइल त्याग के रास्ते के लिए वह तैयार है प्रस्तुत है उनको वह त्याग की शिक्षा देते थे और फिर उस तरह के भक्त जो कि त्याग के लिए तैयार नहीं है किंतु भक्ति के लिए तैयार है उनको वह भक्ति की शिक्षा देते थे अभी त्यागी भक्तों में जिन लोगों के भीतर में त्याग है इस तरह के त्यागी भक्तों में फिर उन्होंने दो कैटेगरी बनाई थी एक तो है कि त्याग के साथ में भक्ति और फिर त्याग के साथ में अद्वैत वेदांत तो त्याग प्लस अद्वैत वेदांत यह वाली कैटेगरी में सिर्फ स्वामी जी आते थे बाकी जितने भी त्यागी संतान थे ठाकुर के उनको ज्यादातर तो ठाकुर ने भक्ति का ही उपदेश दिया था ज्ञान मिश्रा भक्ति जिस तरह से हमारे संघ में इसको कहा जाता है ज्ञान अर्थात कि यह दृढ़ धारणा की जगत है मिथ्या या तो फिर जगत में यह जो जो सब रस के विषय है वह सब मिथ्या है इसके साथ में हमारा रिलेशनशिप मिथ्या है इस रिलेशनशिप को हमको काट देना है देखिए जगत मिथ्या बोलने से नहीं चलेगा क्योंकि यह जगत के हम जो कर्म करते हैं उसके संस्कार तो रियल है उस रियल संस्कार से आप बच नहीं सकते हैं हमको ऐसा कहना पड़ेगा कि ये जगत के प्रति हमारी कामना वासना एं है लोलुपता है भोग लोलुपता उसको हमको त्याग करना है जगत में आप यदि बोलेंगे कि जगत मिथ्या है तो एक इस तरह का एक मिस इंटरप्रिटेशन होता है तो कि यदि जगत ही मिथ्या है तो मैं जगत में जो कुछ भी करूं वह सब मिथ्या है नहीं जब जो इच्छा करना चाहेंगे अपनी कामना वासनाओं को यदि छूटा उसको खुला छोड़ देंगे तो तो फिर जो संस्कार उसके लगेंगे दैट संस्कार आर वेरी रियल उस समय आप नहीं कह सकते कि यह मिथ्या है संस्कार संस्कार तो रियल ही है आपकी हमारी य जो आत्मा है उसको पकड़ करके वह जन्म जन्मांतर तक वो चक्की में पिसते रहेंगे हमको जब तक हम यह ना स्वीकार कर ले कि ये संस्कार से भी मुक्ति प्राप्त करनी है संस्कार रियल है यह हमको स्वीकार करवा के छोड़ेगा तो यह त्यागी भक्तों में दो कैटेगरी एक तो है कि नरेण एक सेपरेट कैटेगरी है बाकी सब ज्ञान मिश्रा भक्ति फिर गृहस्थ जो भक्त थे ठाकुर के उसमें भी देखिए कि दो कैटेगरी है ज्यादातर भक्तों को ठाकुर कहते थे कि हाथ ताली लगाते लगाते ईश्वर का चिंतन करो कीर्तन करो किंतु जब यह गिरीश घोष ठाकुर के पास में आया तो उसने कह दिया कि महाशय मैं ना ही सुबह को जैसे ठाकुर ने कहा सुबह शाम एक बार ईश्वर का नाम ले लिया करो तो गिरीश सोच में पड़ गया कि कैसे हो सकता है तब ठाकुर कहते हैं अच्छा खाने से पहले एक बार नाम ले लो तो तो फिर भी गिरीश सोचता है यह भी करना संभव नहीं तो आखिर में ठाकुर ने कहा मुझे पावर ऑफ एटर्नी दे दो तो देखिए कि ठाकुर के पास में आने वाले शिष्यों को बेसिकली हम चार कैटेगरी में डिवाइड कर सकते हैं एक तो त्यागी संतान दूसरे है गृहस्थ संतान गृहस्थ भक्त और त्यागी में भी दो कैटेगरी एक कैटेगरी है त्याग प्लस भक्ति जिसमें ज्यादातर डायरेक्ट डिसाइल आते हैं और एक कैटेगरी है त्याग प्लस अद्वैत वेदांत जो यूनिक है सिर्फ स्वामी जी के लिए भक्तों में भी ऐसा गृहस्थ भक्तों में भी दो कैटेगरी है ज्यादातर गृहस्थ भक्तों को ठाकुर ने कहा था कि हरिनाम नियमित रूप से करते रहो किंतु एक यूनिक कैटेगरी सिर्फ गिरीश घोष के लिए बनाया है कहा है कि मुझे पावर ऑफ एटर्नी दे दो यानी कि देखिए कि यह गिरीश घोष और स्वामी विवेकानंद एक स्पेक्ट्रम यदि हम कहेंगे तो एक स्पेक्ट्रम के दोनों अपोजिट साइड पर वह खड़े हैं और दोनों यूनिक है अपने-अपने अप्रोच में ठाकुर के प्रति तो ठाकुर यह देखते थे कि किसकी क्या प्रकृति है उसके अनुसार उसको क्या उपदेश देना है दूसरी बात है कि जब ठाकुर को कैंसर हुआ उस समय फिर से दो कैटेगरी फिर से मेजर कैटेगरी बन गई एक तरफ के लोग थे कि वो सोचते हैं कि ठाकुर के पास आने से क्या लाभ है ठाकुर खुद की रक्षा नहीं कर पाते तो वे लोग बहिरंग हो गए और जो ठाकुर के साथ में रह गए उन्होंने सोचा कि ठाकुर की सेवा करना ही जीवन का सर्वोत्तम उद्देश्य है वो अंतरंग हो गए तो अभी देखिए कि ठाकुर के पास आने वाले भक्तों की कैटेगरी किस तरह से होती है सर्वप्रथम सर्वोच्च लेवल वन कैटेगरी होगी कि अंतरंग और बहिरंग बहिरंग में जितना भी पूरा समाज आ जाएगा आए हैं ठाकुर के पास में आउट ऑफ क्यूरियोसिटी बैठे हैं अब जैसे कि तारक यानी कि महापुरुष महाराज के साथ में एक लड़का आया था तो अभी क्या है कि इतना लंबा पथ है तो साथ में किसी को लेकर आते हैं यह लोग लड़के लोग तो महापुरुष महाराज उनका नाम था उस समय तारक तो तारक लेके आया है और ठाकुर ने समझ लिया कि ये आध्यात्मिकता धर्म उस सब के प्रति लड़के का थोड़ा सा कटाक्ष भाव है तो भाई ठाकुर तारक के साथ में बात कर रहे हैं महापुरुष महाराज के साथ में बीच-बीच में लड़के के सामने देख रहे हैं फिर वो ठाकुर उस लड़के को पूछते हैं थोड़ी देर के बाद में कि अच्छा यह जो तारक है तुम्हारा मित्र वो यहां पे जो आता है मेरे पास में तो इससे तुम्हारा इसके बारे में तुम्हारा क्या ओपिनियन है यानी कि ठाकुर उसको टेस्ट करना चाहते हैं कि उसके मन का क्या भाव है तारक ठाकुर के पास में आकर के टाइम वेस्ट करता है ठाकुर क्या उसको ब्रेन वॉश कर दे रहे हैं या तारक इतना मूर्ख है कि समझ नहीं पाता ऐसे ढोंगी धुता औरों के पास क्यों आता है ज ठाकुर उसको पूछ रहे हैं तो अब ये लड़का भी थोड़ा स्मार्ट था बिल्कुल वो गया गुजरा नहीं था उसने ऐसा गोल घुमा करके उत्तर दे दिया कि महाशय वो तो आप ही समझेंगे कि आपके पास में आ रहा है तो सही कर रहा है कि नहीं कर रहा है तो अच्छा तो ठाकुर ने कहा कि तुम एक काम करो यह बाहर में बिल्डिंग बड़े अच्छे-अच्छे हैं यह काली मंदिर वगैरह जा कर के देख के आओ थोड़ी देर के लिए क्योंकि उसका वो नेगेटिव वाइब्रेशन वो फैल रहा है ना चारों ओर तो ठाकुर फिर तारक को कुछ अच्छी बात बता रहा है साथ में ये नेगेटिव व्यक्ति बैठा है तो वो जमेगा नहीं वो वार्तालाप उनका तो ये लड़का फिर से कहता है कि वो सब देखा अच्छ है मैंने बिल्डिंग वगैरह देख लिया है वो जाने की जरूरत नहीं है मुझे तो अच्छा तो ठाकुर अभी देखिए कि ठाकुर की भी स्ट्रेटेजी किस तरह से इवोल्व होती है तो ठाकुर ने कहा फिर अभी देखो कि एक बार तो उसको सह हृदय से पूछा कि यह लड़का मेरे पास में आ रहा है तो तुम्हारा क्या ओपिनियन है दूसरा है कि उसको वहां से भगाने का प्रयास किया तो भाग भी नहीं रहा है अभी उसको थोड़ा सा दंड दिखाना पड़ेगा तो ठाकुर कहते हैं कि यह मास्टर महाशय वहीं पर बैठे थे तो ठाकुर ने उनको दिखाकर करके कहा कि ये उन्हीं हेड मास्टर ये हेड मास्टर है तो वैसे ही लड़का थोड़ा सा चमक गया हां अच्छा यानी कि देखिए ये लड़के लोग होते हैं स्कूल में जाते हैं कॉलेज में जाते हैं तो हेडमास्टर के तो एक तो डर रहता है कि हां वो तो एक बड़ा पोजीशन है परीक्षा में फेल कर देंगे तो क्या होगा और वो समय तो था कॉर्पोरल पनिशमेंट का ये लोग चाटा बाटा मार देंगे तो कोई भी आप कुछ नहीं कर सकते हैं वो पिटाई भी कर दे सकते हैं टीचर तो अभी देखिए कि ठाकुर ने डर दिखाया ये मैं हेड मास्टर है तो लड़का एकदम चौक गया अच्छा ओ ऐसा करके तो देखिए कि ये ठाकुर चरित्र प्रकृति सब समझ लेते थे तो एक हो गया एकदम ठाकुर की यदि अभी फिर से हम कैलकुलेशन करें तो लेवल वन कैटेगरी हो गई कि बहिरंग और अंतरंग अभ अंतरंग में सेकंड लेवल कैटेगरी देखेंगे तो त्यागी भक्त और गृहस्थ भक्त त्यागी भक्तों में थर्ड लेवल में कैटेगरी देखेंगे तो एक नरेन का यूनिक कैटेगरी है त्याग प्लस अद्वैत और बाकी सब त्यागी संतान त्याग प्लस भक्ति अभी गृहस्थ भक्तों में भी दो कैटेगरी है सबको ज्यादातर सभी को कहा ठाकुर ने कि हरि नाम लेना है नियमित और फिर एक यूनिक कैटेगरी है गिरीश घोष के लिए कहा कि मुझे पावर ऑफ एटर्नी दे दो तो यह था ठाकुर का अप्रोच अभी यह जब ठाकुर कहते हैं कि तुम प्रकृति देख कर के शिष्य नहीं करते हो इसलिए सबब तुम्हारा समाज भांग तोड़ कर के यह लोग चले जाते हैं तो हमको यह इंटरप्रिटेशन नहीं करना है कि ठाकुर जो उनकी प्रकृति के अनुसार साधक नहीं होते थे उनको भगा देते थे ऐसा नहीं है प्रकृति देख कर के उपदेश देते थे दिस इज द मेजर डिस्टिंक्शन हमको याद रखनी है तो यहां और फिर क्या है पता है उस समय ब्रह्म समाज बड़ा ही य यह था मतलब फेमस था तो लाटू महाराज ने एक बार कहा था कि ब्राह्मण समाज के उत्सव में देखा इतनी सारी गाड़ियां खड़ी है वो घोड़ा गाड़ी वगैरह तो क्योंकि बड़े धनी लोग आते हैं बहुत सारे धनी लोग आते हैं और ठाकुर के जन्मोत्सव के समय य इतनी कम घोड़ा गाड़ी यहां पर खड़ी है तो यह ठाकुर ये कहते हैं कि लाटू इस तरह से कैलकुलेशन कर रहा है देखिए कि आज जो परिस्थिति है 2024 में हमको ब्राह्मण समाज के बारे में क्यों पता है क्योंकि रामकृष्ण संघ के साहित्य में उनका नाम है इसीलिए उनका नाम हमको पता है और यदि फिफ्थ सिक्स्थ स्टैंडर्ड में हमने भारत की रिफॉर्म मूवमेंट्स के बारे में यदि पढ़ा होता तो उसमें ब्राह्मण समाज का नाम आता है यदि इतना हम को याद रहता तो तो अदर वाइज ब्राह्मण समाज को आज कोई नहीं पहचानता तो देखिए कि ठाकुर यह नहीं कहते कि आपको इस लोगों को लेना है उस लोगों को नहीं लेना है लेना सबको है किंतु उनकी अधिकारत्ती हैं मानुष गुली देखते सब एक रकम मनुष्य लोगों को जितने भी यह है जगत में सब बाहर से तो एक ही तरह के दिखेंगे किंतु भिन्न प्रकृति किंतु उनकी प्रकृति जो होती है पर्सनालिटी होती है संस्कार का जो प्रवाह होता है वह अलग-अलग होता है कारु भीतर सत्व गुण बेशी कारु रजोगुण बेशी कारु तमोगुण किसी के भीतर में सत्व गुण ज्यादा होता है किसी में रजोगुण किसी में तमोगुण पुली गुली देखते सब एक रकम यह जो एक आता है ना कचोरी जैसा कि वो वो बाहर से तो आटे का बनाया होता है भीतर में कुछ फिलिंग होता है है तो इस तरह से वह बाहर से सब एक तरह की देखती है किंतु कारु भीतर खिरर पोर कारु भीतर नार केलर छाई कारु भीतर कलायर पोर सकलर हस्य तो बाहर से तो एक ही तरह का दिखता है किंतु किसी किसी के भीतर में खीर का फीलिंग है यानी कि वो टेस्ट उसका बड़ा ही सुंदर आता है खीर का बनाया हुआ उसके भीतर में है किसी के भीतर में नारी केलर छाई नारी नारियल जो है उसका ये जो क्रश किया हुआ ग्रेटेड कोकोनट वह उसके भीतर में फिलिंग के रूप में डाला होता है और किसी किसी के भीतर में कोलार पोल क कलाई की जो दाल होती है उसका वो जो उसके भीतर में फीलिंग है तो श कोलेर हश अच्छा यह जो ठाकुर कहते हैं ना कि किसी किसी के भीतर में खीरे पो और किसी किसी भीतर ये दाल का वो फीलिंग है तो अब जब देखिए कि ईर्षा तो जाने वाली नहीं है मनुष्य मात्र में तो ईर्ष्या होने वाली है जब नरेंद ठाकुर के पास आता था तो ठाकुर सबके साथ में बात बंद करना बंद करके सिर्फ नरेंद्र के सामने देख कर के नरेण के ही साथ में बात करते रहते थे तो अभी पता नहीं इस वजह से हो ना कि और कोई वजह से हो ये ठाकुर के एक भक्त कुछ समय से ठाकुर के पास नहीं आ रहे थे तो ठाकुर ने पूछा अच्छा वो क्यों नहीं आ रहा है तो किसी ने बताया महाशय वह तो ऐसा कहता है कि हमारे भीतर में तो यह कलायर पो अर्थात कि यह हमारे भीतर में तो दाल का फीलिंग है इसलिए हम हम ठाकुर के पास जाने से हमको क्या लाभ है हम तो कोई अर्थ नहीं है तो ठाकुर एकदम आश्चर्य चकित हो गए अरे ये पहले तो ऐसी बातें नहीं करता था आज ऐसी बातें क्यों कर रहा है अर्थात कि उसको ऐसा लगा होगा मन में थोड़ा सा उसको यह हो गया होगा कि यह नरेंद्र जब आता है तो ठाकुर सबको छोड़ कर के नरेंद्र के ही साथ में बातें करते रहते हैं हमको इग्नोर करते हैं इसलिए वो एक अभिमान होता है ना तो अभिमान करके वो शायद हो सकता है कि ऐसा बोलता होगा तो देखिए कि यह ठाकुर का अभी सेम थिंग के जैसे हमने डिस्कस किया कि जो आता था ठाकुर के पास उन सबकी प्रकृति ठाकुर समझ लेते थे और हमने पहले भी यह डिस्कस किया है कि स्वामी जी ने कहा कि ठाकुर का जो असेसमेंट होता था लोगों का वह असेसमेंट कभी गलत नहीं हुआ जबकि स्वामी जी कहते हैं कि मेरा जो असेसमेंट है लोगों का लोगों को पहचानने का उसमें कभी-कभी यह यह हो सकता है कि वह कंप्लीट ना हो परफेक्ट ना हो असेसमेंट के अलावा भी दूसरों का चरित्र डिफरेंट तरह का निकला है अभी यह देखिए कि स्वामी जी को दगा देने वाले लोगों की कमी नहीं थी स्वामी जी को बिट्रेट स्टर्डी मिस मलर फिर ये अपना लियोन लैंडसबर्ग स्वामी कृपानंद उसको नाम दे दिया था स्वामी जी ने तो ऐसे लोग थे जो कि बाद बाद में स्वामी जी के विरोध में उन्होंने बहुत सारा कुछ किया था यह लियोन लैंडसबर्ग जो था वह थाउ आइलैंड पार्क में स्वामी जी के साथ में गया था उसी के साथ में शुरू शुरू में स्वामी जी रहते थे न्यूयॉर्क में और वह जर्नलिस्ट था और जू था और उसमें स्पिरिचुअल टेंडेंसी भी थी और स्वामी जी को अपने गुरु के रूप में स्वीकार करता था सब कुछ वह स्वामी जी के लिए करता था न्यूयॉर्क में सबसे पहली पहली बार स्वामी जी ने रहना शुरू किया तो स्वामी जी के जो लेक्चर होते थे तो लेक्चर की नोट्स वो एकदम वो शॉर्ट हैंड में ले लेता था टाइप करता था न्यूज़पेपर को भेजता था पेंपलेट छपवा था इंडिया में डिस्ट्रीब्यूटर था यह आला सिंगा पेरूमल वगैरह को भेजता था तो काफी कुछ करता था वह वो ब्रह्मवादिनी यह आर्टिकल लिखना वगैरह उसने सब शुरू कर दिया था यानी कि स्वामी जी के सेक्रेटरी की तरह ही पूरा रहता था किंतु देखिए कि जैसे-जैसे स्वामी जी का नाम बढ़ने लगा वैसे-वैसे ही स्वामी जी के डेडिकेटेड भक्तों की संख्या डिसा पल्स की संख्या बढ़ने लगी उसमें फिर वह जो जो इंस्पायर्ड टॉक जिसने लिखा है उसका नाम में भूल गया हरिदासी ना कि ऐसा कुछ तो वह एक डिवोटा थी फिर यह जो उन लोगों ने जो न्यूयॉर्क वेदांत सोसाइटी है उनकी ओर से यह गुडविन को हायर किया गया अभी गुडविन का ऐसा था वैसे तो पैसा देकर के उसको हायर किया था किंतु कुछ ही समय में वह स्वामी जी का एकदम पक्का बंदा हो गया था डिसाइल हो गया था तो स्वामी जी का प्र वचन शॉर्ट हैंड में ले लेना टाइप करके उसको यह कंप्लीट करके उसका वो इतना एफिशिएंट सेक्रेटरी हो गया था तो यहां पे ये स्वामी जी की लेडी डिसाइल्स कुछ थी यहां पे यह गुडविन था तो सबने मिलकर के स्वामी जी को इतना सुंदर रूप से एक पूरा एक सिस्टम बना दिया था कि फिर यह लैंडसबर्ग सोचता है कि अरे मैं तो स्वामी जी के साथ में सबसे पहली बार मने जबकि स्वामी जी किसी को पहचानते नहीं थे न्यूयॉर्क में तब से मैं उनके साथ में रह रहा हूं आज वो फेमस हो गए हैं और खुद के डिसाइल बना दिए हैं तो मुझे इग्नोर कर रहे हैं मुझे ये जो जितने भी डिसाइल है डिवोटा है स्वामी जी के पास में आते हैं मुझे पता ही नहीं देते हैं ऐसा उसके मन में लग गया तो उस समय तो व स्वामी जी के सामने कुछ नहीं बोला किंतु दूसरे लोगों के सामने सब समय जाकर के कंप्लेन करता था स्वामी जी के बारे में नहीं किंतु स्वामी जी के डिसाइल्स के बारे में कभी ये गुडविन के बारे में कंप्लेन करेगा कभी उसके अगेंस्ट में कंप्लेन करेगा क्या-क्या नहीं करेगा किंतु जब स्वामी जी भारत वापस आए उस समय किंतु उसके मन में किस तरह का यह विकृति खड़ी हुई स्वामी जी की ही निंदा करना शुरू कर दिया और न्यूयॉर्क के न्यूज़पेपर में स्वामी जी की निंदा क्मक कुछ-कुछ आर्टिकल उसने लिख दिए कि किस तरह से यह भारत में से यह तांत्रिक यह सब लोग आते हैं यहां पे और यहां के उच्च घर की यह जो भद्र महिलाएं हैं स्त्रियां हैं धनी स्त्रियां उनका ब्रेन वॉश करके उनको किस तरह की यह ओरिएंटल रिचुअल्स को सिखाते हैं और उनके पास में से पैसा निकालते हैं ऐसा कुछ आर्टिकल उसने लिख दिया तो स्वामी जी उस समय स्वामी जी को बड़ा दुख हुआ था एक बड़ी फनी घटना है हमने इसको पहले भी डिस्कस किया था कि एक डॉक्टर के वहां पर स्वामी जी बैठे थे और डॉक्टर उनका पल्स ले रहा था वो पल्स जो होता है हाथ का तो पल्स ले रहा था उसी समय उस कमरे में लियोन लैंडसबर्ग ने प्रवेश किया जैसे ही स्वामी जी ने उसको देखा उनका स्वामी जी का पल्स एकदम बढ़ गया तो डॉक्टर जोर से हंस उठा है वो एकदम मतलब एकदम मेडिकली प्रूव हो गया कि स्वामी जी और उसको देख कर के टेंशन में आ गए और जैसे ही लैंडसबर्ग ने भी देखा कि स्वामी जी वहां पे है वो एकदम पीछे मुड़कर चला गया भाग गया वहां से तो ये देखिए कि स्वामी जी भी ऐसा नहीं है कि स्वामी जी की असेसमेंट की कैपेसिटी कोई कम थी हम लोगों से तो लाखों गुना ज्यादा थी किंतु एक जो परफेक्ट असेसमेंट होता है मनुष्य के हृदय में झांक कर के कि उसके संस्कार के प्रवाह कैसे हैं आज हमको कोई भी आदमी बात करने से बड़ा अच्छा लगता है किंतु उसके जो संस्कार का प्रवाह है कल उसके पास में क्या करवाएगा हम बता नहीं सकते हैं तो वह जो जन्म जन्मांतर के संस्कार को पहचान करके मनुष्य का सही सही आकलन करना उसको कौन सी दिशा में ले जाने से उसका भी भला हो और आसपास के लोगों को भी कोई हानि ना हो यह परफेक्ट असेसमेंट करने की कैपेसिटी ठाकुर में थी इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि मैंने कुछ-कुछ चरित्रों का आकलन किया है कुछ-कुछ लोगों के चरित्र का जो आकलन किया है वह कभी-कभी गलत सिद्ध हुआ है किंतु ठाकुर ने जिनके बारे में जो कुछ भी कहा है वह कभी भी गलत सिद्ध नहीं हुआ और यह हजरा को लेकर के भी ठाकुर और नरेंद्र का वो आर्गुमेंट चलता रहता था अभी दो-तीन दिन पहले ही उसके बारे में हमने डिस्कस किया था कि किस तरह से नरेद हाजरा को डिफेंड करता है किंतु ठाकुर कहते हैं कि नहीं नहीं तुम उसके भुलावे में मत आना माने वो जो भी आपको तुमको अच्छी-अच्छी बातें करते उससे तुम एकदम यह मत हो जाना इंप्रेस मत हो जाना अभी देखिए कि हजरा महाशय के पीछे के जीवन में क्या हुआ है उनका जीवन कोई बहुत खराब था ऐसा कुछ हमारे पास में न्यूज़ नहीं है किंतु फिर भी जहां तक आध्यात्मिक उन्नति की बात है उस आध्यात्मिक उन्नति में रास्ते में कहां पर क्या अंतराय है वह यदि आप नहीं समझेंगे तब तक उस अंतराय को आप दूर नहीं कर पाएंगे और उस अंतराय को दूर करने के लिए जो आध्यात्मिक टीचर होता है जो गुरु होता है उसको एकदम परफेक्ट उसको असेसमेंट करना होगा कि इस शिष्य के भीतर में यह अंतराय है इस शिष्य के संस्कार में यह बाधा है यह विघ्न है उसको इस तरह से काटा जाए तभी कहीं जाकर के आध्यात्मिक जीवन में उस शिष्य की उन्नति होगी अभी ठाकुर आगे कहते हैं अमार की भाव जानो मेरा क्या भाव है पता है आमी यदाई था कि आर मां सब जाने मैं खाता हूं पीता हूं शांति से रहता हूं और बाकी सब मां जाने आर तीन कथा ते गाय कांटा बाध है गुरु करता और बाबा मुझे तीन बातें से मेरे जैसे देह में कोई कांटे मार रहा है कांटे चुभ रहा है इस तरह से मुझे महसूस होता है कौन सी बात यदि मुझे कोई कहता है गुरु कहता है कोई जद मुझे कर्ता कहता है या तो कोई मुझे बाबा कहता है देखिए यहां पर ठाकुर क्या कहना चाहते हैं यह जो रिफॉर्म सोसाइटीज थी वे लोग एक्टिवली प्रयास करती थी कि उनके मेंबर्स की संख्या बढ़े जैसे कि यह कांकड़ काछी आश्रम की स्थापना की थी राम मा राम बाबू ने ठाकुर की महासमाधि के बाद में फिर वह दीवाल पर बड़े-बड़े अक्षरों से लिखते थे वो कलकाता की कि आज इस समय यहां पर यह अनुष्ठान है या तो फिर यहां से नगर कीर्तन जाएगा तो ऐसा करके करके लोगों को इकट्ठा करते थे यानी कि उनका एक प्रोएक्टिव पॉलिसी रहता था कि लोगों को कैसे भी करके यहां पर आकर्षित किया जाए जाए लोगों को कैसे भी करके लाया जाए तो यह एडवर्टाइज देना अपना प्रचार करना यह सब यह लोग करते थे जबकि ठाकुर का भाव था कि प्रचार बचार कुछ नहीं करना है लोगों को जैसे जद इच्छ अभी क्या है कि जैसे ठाकुर ने कहा ना कि फूल खिलता है तो यह मधुमक्खियां अपने से आ जाती है ठाकुर ने जब आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त कर ही ली है तभी कोलकात्ता में जो जिज्ञासु है जो मुमुक्षु है जो साधक है उनको मां जगदंबा ही भीतर प्रेरणा देगी कि हां दक्षिणेश्वर में जाइए वहां पर ठाकुर है उनके पास में जाइए तो ठाकुर यदि खुद प्रचार ना करें वो तो एक ठीक है चलो कि ठाकुर अपना प्रचार नहीं करते किंतु ठाकुर का प्रचार ये लोग जब करते थे रामचंद्र दत्त ना की इवन ये केशव सेन तो वो भी ठाकुर सहन नहीं कर पाते थे कभी किसी ने अभी ये हमको पता है कथामृत के प्रथम चैप्टर में ही आपको देखने को मिलेगा कि मास्टर महाशय लिखते हैं कि वह तो ब्राह्मण समाज में जाते थे और ब्राह्मण समाज की पत्र पत्रिकाओं में उन्होंने पढ़ा था कि यह केशव सेन किस तरह से ठाकुर की प्रशंसा कर रहे हैं और क्या आर्टिकल लिखा था उसका कुछ एक्सर्ट भी वहां पे कथामृत में दिया हुआ है केशव सेन लिखता है कि जिस धर्म में इतना श्री राम कृष्ण परमहंस जैसे किसी साधक का सिद्ध का अवतरण होता है जन्म होता है तो सोच के देखिए कि उस हिंदू धर्म में यह अमृत का प्रवाह कितना बह रहा होगा कितना गहन यह अमृत का प्रवाह होगा इस तरह से कुछ उसने लिखा है तो अब यह ब्राह्मण समाज के न्यूज़पेपर वगैरह में पढ़ कर के अभी टाउन हॉल में केशव सेन ने वहां पर प्रवचन दिया था वहां पर भी वह ठाकुर के नाम का उल्लेख करता है कि हम लोगों ने पर दक्षिणेश्वर के परमहंस की साथ जाकर के वहां पर मुलाकात की उनके दर्शन किए उनकी सरलता उनकी तपो निष्ठा उनका उनके जो एक के बाद एक उपमा देकर के प्रांजल भाषा में जो उपदेश देते हैं वह सुनकर के हम लोग बड़े ही मनोम मुग्ध हो गए हैं इस तरह से केशव सेन ने जब ठाकुर का प्रचार करना शुरू किया तब कहीं जाकर के यह जो एक वाइडर एक जो साधक वर्ग था मास्टर महाशय नकी वो सब लोग ठाकुर के पास आना शुरू हुए किंतु जब ठाकुर को यह समाचार मिला कि केशव ने उनके बारे में न्यूज़पेपर में लिख दिया है और छाप छाप दिया है प्रिंट कर दिया है तो साथ-साथ में ठाकुर का रिएक्शन क्या था अरे छापी देवा शेकी अरे छाप दिया मेरे बारे में यह क्या कर दिया तो ठाकुर को यह सब पसंद नहीं था कि खुद तो प्रचार नहीं करेंगे दूसरों को भी प्रचार नहीं करने देंगे वह तो मां की इच्छा से जो आएगा वह आएगा अच्छा अभी यह ठाकुर बोलते तो है ऐसा कि वह प्रचार नहीं करना चाहते या यह नहीं चाहते कि दूसरे लोग उनका प्रचार करें किसी ने कहा कि यह राम बाबू ने आपके जीवन के ऊपर में आपके कथा आप उनके जो वचन है ठक ठकर के उपदेश उसको कलेक्ट करके किताब लिखी है यह राम रामचंद्र दत्त अपने तो साथ-साथ में ही ठाकुर ने कहा तो बहुत अच्छा है अभी राम फेमस हो जाएगा यानी कि बात यह नहीं है कि किताब लिखना प्रचार करना उसके पीछे यह भी तो एक होता है ना कि उनका नाम लेकर के मैं फेमस हो जाऊं आजकल जो सेलिब्रिटी होते हैं उनको आप अपने अ कहीं पे अनुष्ठान करके सेलिब्रिटीज को इनवाइट करते हैं तो उनके साथ में आपका भी तो नाम होगा ना कि वहां प ये अनुष्ठान था तो बहुत बड़ा इन लोगों ने आयोजन किया सेलिब्रिटीज को बुलाया वगैरह वगैरह तो उनका नाम लेकर के अपने को फेमस होना है तो साथ-साथ में ही ठाकुर ने पकड़ लिया देखिए मन का भाव क्या है वैसे तो रामचंद्र दत्त पता है कि ठाकुर के अंतरंग शिष्य है बिल्कुल डेडिकेटेड ठाकुर के डिवटी है किंतु फिर भी ठाकुर ने उनके मन का भाव पकड़ लिया कि अच्छा मेरे बारे में किताब लिखी है अभी राम फेमस हो जाएगा ये भी तो एक उल्टीरियर मोटिव होता है गलत कुछ नहीं है माने कोई गलत काम करके पैसा कमाना यह सब तो यह नहीं है जैसे कि यह राजा महाराज एक बार कहते हैं कि ठाकुर ने उनको राजा महाराज को पूछ कहा एक दिन कि अरे तुमने ऐसा तो कौन सा खराब काम करके तुम आए हो मैं तुम्हारे सामने देख नहीं पा रहा हूं तो राजा महाराज कहते हैं कि हम तो वही सोच रहे थे कि खराब काम करना बुरा काम करना या तो चोरी करना डके करना मर्डर करना ऐसा सब कुछ होता है तो मैंने तो ऐसा कुछ नहीं किया तो क्यों ठाकुर ऐसा पूछ रहे हैं तो फिर ठाकुर ने पूछा राजा महाराज को झूठ बोल के आए हो कहीं पे तो राजा महाराज ने कहा हंसी मजाक में झूठ बोल दिया था तो ठाकुर ने कहा अच्छा इसीलिए मैं तुम्हारे चेहरे के सामने नहीं देख पाता हूं तब राजा महाराज कहते हैं कि मैं आश्चर्य चकित हो गया कि ये जो एक सामान्य एकदम एक झूठ बोलना वो भी ठाकुर के लिए इतना बड़ा अपराध है हो सकता है वो हमने कभी कल्पना नहीं की थी तो अब जब ठाकुर कहते हैं कि इसका चरित्र ऐसा है या इसका ऐसा तो ये नहीं मान लेना है कि उन्होंने कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया है यहां पे आध्यात्मिक स्टैंडर्ड के हिसाब से हमको देखना है बाहर के जगत के स्टैंडर्ड के हिसाब से नहीं बाहर के जगत में आप परफेक्ट जेंटलमैन होंगे सभी तरह के नियमों का लॉज रूल्स रेगुलेशंस का पालन करते होंगे किंतु जब साधक होते हैं तो एक छोटा सा डेविएशन भी ना आध्यात्मिक जगत केय जो नियम है उसमें से छोटा सा भी डेविएशन ना बहुत बड़ा होकर के हो जाता है इसलिए यहां पर ठाकुर ऐसा कहते हैं तो देखिए कि अच्छा अभी ऊपर ऊपर से तो लगता है कि ठाकुर नहीं चाहते कि कोई उनका प्रचार करें नहीं ठाकुर चाहते हैं कि वह खुद का प्रचार करें किंतु पता है ठाकुर प्रैक्टिकल भी बहुत है यानी कि वो जो फेमस घटना कि टाका माटी माटी टाका पैसा मिट्टी है पैसा मिट्टी पैसा है पैसा मिट्टी ऐसा बोल कर के उन्होंने वो पैसा गंगा में फेंक दिए फिर वो साथ-साथ में उन्होंने सोचा मा मां लखी जद खट बंद करे दे अर्थात कि यह जो उनको जो सैलरी मिलती थी वो काली मंदिर से और खाने वगैरह का तो मिलता ही ही था रहने की भी जगह थी तो यह सब जद मां लक्ष्मी बंद कर देगी तो नाराज होकर के कि मैंने लक्ष्मी का अपमान किया है बोलकर के तब ठाकुर ने वो मिडल एक रास्ता निकाला मां लक्ष्मी को प्रार्थना की मां तुम मेरे हृदय में रहो तो ठाकुर वैसे जितना आदर्श उनका एकदम हाईएस्ट है ठाकुर प्रैक्टिकल भी इतने हैं तो ठाकुर प्रचार कैसे करते हैं पता है देखिए प्रचार नहीं भी करना है और प्रचार हो भी जाता है ठाकुर कहते हैं कि भक्ति भक्तो नहीं है थाक भक्ति और भक्त को लेकर के रहना है जो अच्छे-अच्छे साधक हैं उनका उनके साथ में जाकर के उनका दर्शन करने की इच्छा ठाकुर की थी तो कलकाता के जितने भी साधक वर्ग हैं उन सबके जाकर के साथ में ठाकुर मुलाकात करते थे और उसमें यह जो सब अपॉइंटमेंट लेना सब ऑर्गेनाइज कर देना अरेंजमेंट कर देना उसके लिए मथुर बाबू थे जैसे कि ये देवेंद्रनाथ टैगोर ब्राह्मण समाज के वह जो स्थापक थे तो अभी यह ठाकुर ने सोच लिया कि ये देवेंद्र तो बहुत बड़ा साधक है बहुत बड़ा एक धार्मिक व्यक्ति है तो मुझे उसके साथ में बात करनी है और मथुर बाबू को पकड़ लिया जीद करके कि मेरे मुझे उसके पास में ले चलो तो अभी मथुर बाबू पहले तो इधर-उधर करने लगे ईगो होता है ना बड़े आदमी का सामने से क्यों किसी को मिलने को जाएंगे खुद तो वो जमींदार है बड़े फिर किंतु ठाकुर जिद कर ही रहे हैं तो फिर मथुर बाबू ने कहा अच्छा ठीक है हम लोग तो स्कूल में साथ में पड़े थे मैं ले जाता हूं चलिए तो ऐसा करके मथुर बाबू ठाकुर को लेकर के देवेंद्रनाथ टैगोर को मिलने को जाते हैं फिर इसी तरह से एक साधक था कलकाता में जिसके बारे में ठाकुर ने सुना था कि बड़ा ही सात्विक साधक है तो ठाकुर ने कहा कि चलो वही मथुर बाबू को पकड़ा कि उसको मिलने को जाते हैं उसके दर्शन के लिए जाते हैं अभी वो ये तो बेचारा सात्विक आदमी था छोटा सा घर था पैसा भी इतना कुछ नहीं था और फिर जिस दिन ये इतना बड़ा गाड़ी लेकर के यह मथुर बाबू और ठाकुर गए उस दिन उसके घर में प्रसंग था छोटा सा घर सब इतने सारे रिलेटिव बैठे हुए हैं अभी ये बड़ी गाड़ी करके धनी व्यक्ति आया है तो उसको कहां बिठाए क्या करें वो बेचारा वो सात्विक साधक समझ नहीं पा रहा है अब ये कहां पर तो बिठाना पड़ेगा तो ये लोग एक दूसरे कमरे में जा रहे हैं मथुर बाबू और ठाकुर तो वो चिल्ला करके बोल उठा अरे वहां पे मत जाइए वहां पे तो स्त्रियां बैठी हुई है तो मथुर बाबू उस दिन फिर ठाकुर के ऊपर में बड़े नाराज हो गए थे आपको लेकर के और कहीं नहीं जाऊंगा अभी इस तरह से वो बड़ा आदमी होता है ना किंतु खैर ठाकुर की आज्ञा का उल्लंघन करना वो तो उससे संभव नहीं था तो इसी तरह से ठाकुरी ये केशव सेन को भी मिले थे पहले हृदय को भेज दिया था देखने के लिए कि उसके भीतर में घमंड तो ज्यादा नहीं है फिर वो जाकर के केशव को मिले तो देखिए कि ये ठाकुर का स्ट्रेटेजी था कि जितने भी आध्यात्मिक साधक है उनको जाकर के मिलेंगे उनको साथ में वार्तालाप करेंगे फिर यही लोग कन्वर्ट होकर के ठाकुर का प्रचार करेंगे जैसे ईश्वर चंद्र विद्यासागर उनके पास में वो जाते हैं ठाकुर तो इस तरह से इतने सारे साधकों के साथ में सामने से जाकर के के ठाकुर ने जब बात की उसमें से एक साधक था केशव चंद्र सेन वो आखिर में ठाकुर के चंगुल में फंस गया और फिर उसने ठाकुर के नाम का प्रचार करना शुरू कर दिया तो देखिए कि हाईएस्ट आइडियल ठाकुर के जीवन में है साथ में ही हाईएस्ट प्रैक्टिलिटी भी है और ये प्रैक्टिलिटी क्या है पता है अपनी दृष्टि से हम लोग सोचते हैं कि ठाकुर इस तरह से व प्रैक्टिकल है किंतु ठाकुर ऐसा नहीं सोचते ठाकुर सोचते नहीं इस तरह से यदि देखा जाए तो स्ट्रेटेजी प्लानिंग ठाकुर के जीवन में था ही नहीं मां के ऊपर में संपूर्ण रूप से निर्भर होकर के रहते थे और मां काली ही जैसे कि उनके पद कमलों को चलाती थी उनके पैरों को चलाती थी उनके शरीर को चलाती थी तो अभी यदि हमको यह कहना है कि कौन सबसे बड़ा स्ट्रेटजिस्ट है तो कहना पड़ेगा मां जगदंबा ई है मां जगदंबा ने इस तरह से एक प्लान बनाया था कि बड़े साधकों को जाकर के मिला जाए ठाकुर जाकर के उनको उपदेश देंगे फिर वे लोग प्रभावित होकर के वे लोग ठाकुर का प्रचार करेंगे हो सकता है ये मां जगदंबा का ही प्लान हो तो यहां पर भी ठाकुर कहते हैं कि देखिए किंतु ठाकुर खुद संपूर्ण रूप से शरणागत सेम थिंग परफेक्ट आइडियल परफेक्ट प्रैक्टिलिटी ठाकुर कहते हैं मैं मैं आराम से शांति से रहता हूं खाता हूं पीता हूं आनंद करता हूं और जद कोई आकर के मुझे कहता है आप गुरु है आप करता है और आप बाबा है तो ऐसा लगता है कोई मेरे देह में मेरे शरीर में कांटे जुबो रहा है गुरु एक सच्चिदानंद तीनी शिखा दिवेन गुरु है एक सच्चि चिदानंद वही शिक्षा देंगे आमार संतान भाव मेरा संतान भाव है मानुष गुरु मेले लाख लाख सकले गुरु होते चाहे शिष्य के होते चाय मनुष्य गुरु आपको लाख लाख मिल जाएंगे सबको गुरु होना है शिष्य किसको होना है देखिए यह भी तो एक बड़ा सुंदर ठाकुर ने कहा कि गुरु है एक सच्चिदानंद मात्रा और प्रॉब्लम यह है कि हमारे भीतर में घमंड आ जाता है हम अपने को गुरु के रूप में घोषित कर देते हैं और फिर हम चाहते हैं कि लोग आकर के मेरे सामने झुके किंतु ठाकुर कहते हैं कि गुरु बनने को लाख-लाख तैयार है शिष्य बनने को कौन तैयार है यहां पे देखिए ये शिष्य बनने को कौन तैयार है गिरीश घोष ने कहा था कि ठाकुर ने प्रणाम अस्त्र से जगत को जय किया है किस तरह से यह केशव सेन वगैरह जो सब अपने को बड़ा आदमी मानते थे वे लोग कभी भी ठाकुर के सामने झुकते नहीं झुकेंगे नहीं खड़े होकर के ऐसा करके प्रणाम नमस्ते करेंगे तब ठाकुर ने उनको झुक कर के प्रणाम करना शुरू किया तब कहीं जाकर के उन्होंने देखा कि अरे ठाकुर भीतर में तो पता चलता है ना अभी हमारा कैटेगरी क्या है उनका कैटेगरी क्या है उनकी कैटेगरी का इतना बड़ा सिद्ध अवतार स्वयं अभी अवतार आप के रूप में आप नहीं भी मानेंगे तो आध्यात्मिक उपलब्धि जो है ठाकुर की वह तो नजर में आ जाती है ना तो उनकी कैटेगरी का कोई हमारे सामने झुके तो हम सामने क्यों नहीं झुकेंगे हृदय पिघल जाता है यह घमंड बम वग वगैरह सब उस समय अदृश्य हो जाता है आध्यात्मिकता का जो प्रवाह जब बहता है तो लोगों के सामने हम ऐसा सीना तान के खड़े हैं किंतु सही सही आध्यात्मिक आदमी नजर के सामने आते हैं तो हम बिल्कुल उनके सामने झुक जाएंगे भीतर से सब कुछ हमारा संस्कार निर्मल हो जाएंगे घमंड वासना एं सब कहां अदृश्य हो जाएगी यह महापुरुषों के सत्संग का परिणाम है तो ठाकुर सामने से झुक कर के इनको प्रणाम करते थे तब कहीं जाकर के उन्होंने भूमि होकर के ठाकुर को प्रणाम करना सीखा था यानी कि यदि देखे कि हम अपने को झुकाते हैं तो जगत हमारे सामने झुकेगा यदि हम सीना तान के खड़े रहेंगे मैं गुरु हूं आकर के मुझे प्रणाम करो तो हमारे से लाख गुना घमंड करने वाले लोगों की इस जगत में कमी नहीं है तो इसलिए गिरीश घोष ने कहा था कि ठाकुर ने प्रणाम अस्त्र से जगत को जय किया है लोको शिक्षा देवा बड़ो कठिन लोगों को शिक्षा देना बड़ा ही कठिन है जदी तीनी साक्षात्कार होन आर आदेश देन ता होले होते पारे जदी ईश्वर साक्षात्कार होते हैं आदेश देते हैं तब यह हो पाएगा अच्छा यह पैराग्राफ काफी लंबा चलता है तो अभी इसको आगे कल देखते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु जहां तक एक्सटर्नल स्ट्रगल का प्रश्न है स्वामी जी की एक्सटर्नल स्ट्रगल तो थी ठाकुर से ज्यादा थी हम कह सकते हैं किंतु हमको यह भी ख्याल में रखना है कि ठाकुर की इंटरनल स्ट्रगल थी वह जो हजार साल का जो तमस था उसको हटा कर के सतयुग का पुनः स्थापना करना वही तो एक सबसे बड़ा कार्य था एक बार वह हो गया एक बार आपने वह जनरेटर स्टार्ट कर दिया इलेक्ट्रिक वो जो यह आता है फिर तो आपको वो लाइन ही बिठा है ना यहां से वहां इलेक्ट्रिक करंट पहुंचा ट वास द मेन थिंग ठाकुर का किंतु यह जो ठाकुर का व जो प्रैक्टिकल
प्रश्न: हम प्रचार से बहुत कतराते हैं?
भाव साथ में था हम लोग वीआईपी को सब समय बुलाते रहते हैं एस गेस्ट फिर य आशा रखते हैं कि वीआईपी इंटर्न जाकर के किसी को इन्फ्लुएंस करेगा चीफ मिनिस्टर है गवर्नर है उनको बुलाओ प्रॉब्लम य है पूरा मार्केट बैठा है फूलों का उसमें आपके फूल कौन लेने वाला है ट इज द थिंग टुडे मैंने बताया था कि किसी ने मुझे बोला था कुछ समय पहले कि बड़े सुंदर फूल खिले थे तो उसने बोला अरे देखो कितने सुंदर फूल है बिल्कुल प्लास्टिक जैसे दिख रहे है हमारा पूरा मानदंड जो है वो स्टैंडर्ड अभी चेंज हो गया है प्लास्टिक जैसा दिखना चाहिए तो बड़ा सुंदर फूल है किंतु यहां पे एक बात बताऊं आज से ना 510 साल पहले तक ये बात सही में थी ऐसी कि हमारा जो आइडियाज है बड़े ही कम लोग उसके बारे में जानते थे अभी हमारे आश्रम के आसपास में कुछ लोग रह रहे हैं उनको पता है हमारी एक्टिविटीज में जो एक्टिविटीज के किसी टच में आए हैं रिलीफ एक्टिविटी या स्कूल या तो हॉस्पिटल उन लोगों को पता है इस तरह से बड़ा ही एक लिमिटेड सर्कल था किंतु देखिए कि ईश्वर का भी यह कैसा विधान है जब से यह सोशल मीडिया स्टार्ट हुआ है और सोशल मीडिया एल्गोरिदम है वह देखते हैं कि क्या वायरल हो सकता है और उन्होंने फिर य अपने जैसे सर्वप्रिया अंद जी या दिव्यानंद प्राणा माता जी तो समझ लिया एल्गोरिदम ने कि य लोग वायरल होने को सकते हैं तो फिर यह सोशल मीडिया का एल्गोरिदम हमारा स्प्रेड कर रहा है यानी कि यह आज का युग जो है यह एआई बेस्ड युग तो ट इज वेरी स्ट्रेंज थिंग के य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्प्रेडिंग द नेम ऑफ रामकृष्ण ऑर्डर एक तरह से देखे तो किसको क्या रिकमेंड करना और दूसरे भी अभी स्तव प्रियानंदनसेक्स वो ईशा आत्मानंद जी है अभी एक कल्याणी आश्रम है वहां पर वहां पर वह उनके वह सेवक महाराज है प्रमे आनंद जी के वह बड़े अच्छे सिंगर है दुर्गा नाथ आनंद जी आजकल वह भी अच्छा वह उनका चल रहा है बड़े सुंदर प्रवचन देते हैं बंगाली में तो यह टब का एल्गोरिदम यह सब कैप्चर करके फिर रिकमेंडेशन देता है तो इसमें हमारा नाम हो जाता
प्रश्न: जब हम महान साधकों के संपर्क में आते हैं तो हमें महसूस होता है कि हम अपने आध्यात्मिक लक्ष्य से कितने दूर हैं। लेकिन अधिकतर समय हम भौतिकवादी लोगों से घिरे रहते हैं और हमें लगता है कि हम उनसे बेहतर हैं। ऐसी स्थिति में हम अपना लक्ष्य कैसे न खोएं?
है देखिए एक तो प्लान करके भी एक कर सकते हैं दूसरा क्या है कि ठाकुर की तरह थोड़ा सा बेपरवाह हो जाना है ठाकुर कहते हैं कि जैसे-जैसे आप सूरज की ओर जाएंगे वैसे ही पृथ्वी से आप ऑटोमेटिक दूर जाते जाएंगे तो एक नित्य सत्संग नित्य साधना यदि हम इसको हम एक डिसिप्लिन वे में कंटिन्यू रखते हैं तो यह सब चीजों से हम ऑटोमेटिक दूर होते ही जाएंगे उस समय फिर हमको यह प्लान करके जरूरत नहीं पड़ेगी जो यदि कर सकते हैं तो दैट इज द बेस्ट कोई प्रश्न ही नहीं है आपको वो डबल इंजन वो हो जाएगा फिर कि यहां पर मैं नित्य साधना भी कर रहा हूं और यहां पर मैं बड़ा ही विजिलेंट भी हूं कि इस तरह के भाव मेरे मन में प्रवेश ना करें इफ यू कैन डू बोथ देन दैट इज द बेस्ट ये ज्ञान का पथ है कि ज्ञान मार्ग में आप साधना भी करते हैं साथ-साथ में बड़े विजिलेंट भी रहते हैं कि कहीं से कुछ लीक लीकेज ना हो जाए ठाकुर कहते हैं ना एक गड़ा है उसमें आप कितना ही पानी डालते रहिए नीचे में होल है तो पानी धीरे-धीरे करके निकलता ही जाएगा सो आप दोनों तरह से आप अवेयर है किंतु फिर ये भक्ति का भी रास्ता है कि फिर ईश्वर पर भरोसा करके आप जो नित्य साधनाए है करते जाइए फिर ईश्वर ही सब देख लेंगे सो बोथ आर देयर अकॉर्डिंग टू अवर कैपेसिटी वी कैन फॉलो मैं समझ गया देखिए इवन हमारे साथ में भी तो वही होता है ना आज आपने कहा कि आज स्टैंडर्ड लो हो गया है कहां वह अभी ठाकुर म स्वामी जी को तो भूल ही जाइए बात की जो जनरेशन है रंगनाथन जी किचन में काम करते थे किचन में काम करते करते करते 50 बार उन्होंने कंप्लीट वर्क्स पढ़ दिया अभी आप बोले मैंने एडिटोरियल सेक्शन में रह कर के कभी 50 बार नहीं पढ़ा कंप्लीट वर्स को एडिट करने के बाद में भी मैंने कभी उसको 50 बार नहीं पढ़ा वो कहां वो स्टैंडर्ड है कहां आज का स्टैंडर्ड है आज मैंने कंप्लीट वर्स एडिट किया है लोग बोलते हैं अरे कंप्लीट वर्स के ये तो बड़ा अच्छा उनको पता है किंतु मुझे पता है कि मैं कहां पे हूं क्योंकि मुझे रंग नाथा आनंद जी का आइडियल पता है यदि मुझे वो आइडियल नहीं पता होता तो फिर मैं अपने को एकदम बड़ा एक शेर खा समझने लगता था कि हां मैंने यह कंप्लीट वर्स मास्टर कर लिया है राइट तो वो आइडियल जद क्लियर है तब वो हमको पता चलेगा कि हम किस लेवल पे हैं सो दैट इज वन थिंग वी कैन डू एज फार एज भीतर से पुश करने की बात है कि हां लेट मी ट्राई टू डू समथिंग लाइक रंग नाथा नंद जी 25 बार तो एटलीस्ट पड़े 50 बार नहीं तो एटलीस्ट इतना तो मैं कर पाऊं तो फिर वह अपनी इंडिविजुअल कैपेसिटी प आ जाता है कि मैं अपने को पुश कर पाता हूं कि नहीं किंतु थिंग इज कि मुझे वो आइडियल पता है बोलकर के मुझे अपना कैपेसिटी पता है जैसे आपको एक बार पता चल गया कि नवरचना में क्या परिस्थिति है फिर आप जद अपने गांव में वापस भी जाएंगे तो दैट नॉलेज विल ऑलवेज रिमन विथ यू वो नॉलेज कभी नहीं चला जाएगा दैट मींस इफ यू हैव एंबिशन नाउ देन यू विल पुश योरसेल्फ किंतु वो नॉलेज ही नहीं था कभी आप वड़ोदरा आए ही नहीं थे तो आपको कभी पता ही नहीं चलेगा कि मैं कहां पर हूं सो एक बार हाईएस्ट आइडियल को समझ लेना है फिर यह देख लेना है कि हम उस केकेल में कहां पे आते हैं देन यू हैव टू स्ट्राइव फर्द य हाईएस्ट आइडियल क्या है वो समझ लेते हैं एक बार फिर अपने हम कहां पे हैं वो एक समझ लेना है फिर हमको कहां से कहां जाना है फिर दूसरा क्या है पता है कि देखिए ठाकुर महा स्वामी जी वाला आइडियल तो हमारे जीवन में कभी होने ही नहीं वाला है फुलफिल तो स्वामी जी कहते हैं कि इंपॉसिबल आइडियल भी नजर के सामने नहीं रखना इस तरह का आइडियल रखना है जो कि मैं फुलफिल कर पाऊं यदि मैं रंगनाथ आनंद जी जैसा मुझे कुछ होना हैट दैट इज अ मतलब मतलब इट्स अ वैलिड आइडियल मैंने टेनेबल आइडियल है कि मैं ऐसा सोचूंगा कि मां की तरह एक लाख जब करूंगा इट्स नेवर गोइंग टू हैपन इंपॉसिबल आइडियल रखने से लाभ नहीं है किंतु मां का आइडियल मैंने देख लिया नाउ आई एम क्लियर कि मैं कहां पर हूं मुझे कहां तक जाना है इस रास्ते पे क्या है ना इजी आंसर नहीं होते हैं आपको जो भी आंसर मिलेगा वोह आपको वो मतलब यू विल हैव टू अपने को उसमें डालना पड़ता है यू विल हैव टू गो अलोंग मतलब रास्ता मंजिल अभी भी बहुत दूर है बहुत लंबा रास्ता काटना है