Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ Sri Ramakrishna Hindi 9 May 2023

Transcript

आज हम कथामृत से ही शुरू करते हैं पिछली बार जब स्वामी जी के बड़े में बात कर रहे थे तो ऐसा हो गया था की इस में सब समय चला गया था तो श्री राम कृष्णा कथा हमने देखा की किस तरह से ठाकुर जो है वो विद्यासागर को मिलने के लिए आए हैं और जैसे होता है उसे समय की जो विद्यासागर या तो एक जो एक पढ़ा लिखा है की मिडिल क्लास था उसे समय का उनके मां में हिंदू धर्म के प्रति जो एक संदेह राहत था जो एक संसाई या एक समस्या रहती थी की हां की जैसे एन क्रिश्चियनिटी है उसे समय तो नेचरली ये लोग तो मतलब भारत तो गुलाम था तो ब्रिटिश लोग हमारे पर राज करते थे तो बहुत सारे लोगों के मां में ऐसा हो गया था की जो क्रिश्चियन जो धर्म है क्रिस्टी धर्म वो हिंदू धर्म से ज्यादा सुपीरियर है तो जैसे ब्राह्मी समाज है फिर ये जैसे आर्य समाज है फिर जैसे ये विद्यासागर है ऐसे बहुत सारे लोगों ने इस तरह से सोचना शुरू किया की चलो हिंदू धर्म में ठीक है की आपने यह कहा की हिंदू धर्म को नए सरे से लोगों के सामने प्रस्तुत करना है उसे बात में गलत कुछ नहीं है किंतु जी तरह से प्रस्तुत करना है वो प्रस्तुति इस तरह की थी की क्रिश्चियन धर्म के सभी जो एलिमेंट है वो हमारे में ले लिए जाए तो इस तरह की उनकी धरना थी तो ठाकुर देखिए भारत के भाग्य विधाता उनकी भी कैसी ये मर्जी है की ठाकुर का भी इस समय जन्म हुआ और वह मैन कोलकाता में जो माना जाता था की काली का पुजारी कौन होगा तो निरक्षर होगा अनपढ़ होगा और पूरा वो अंदर श्रद्धा में डूबा होगा आध्यात्मिक राज्य में जो सबसे निम्न श्रेणी पे जो होगा वो काली का पुजारी होगा मैंने ऐसा कहना की कोई काली का पुजारी है अर्थात ही वो समझ लेना है की पुरी तरह से वो जो है निरक्षर और अंधश्रद्धालु है तो ऐसे ही महाकाली की पूजा करके ही ठाकुर ने जो है ब्रह्म ज्ञान प्रताप की और एक के बाद एक जैसे विद्यासागर है केशव सेन है वह फिर विजय कृष्णा गोस्वामी है शिवनाथ शास्त्री उदाहरण मिलते हैं की ठाकुर ने उनके साथ में बात करके उनके हृदय परिवर्तित किया तो वैसे ही यहां पर है है की अभी मैं रिपेयर नहीं करूंगा जो पीछे चला गया नए सरे से ही चलते हैं बात करते करते विद्यासागर के साथ में ठाकुर जो है गेट हुए समाधि तक हो गए हाथों की अंजलि बन गई देहुनाहट और थीl नेतृतसपांधीन हो गए अच्छा अभी यहां पे जो लिखा है ना ये बहुत ही एक इंपॉर्टेंट चीज है जैसे मैंने पहले भी कहा था की कथामृत में एक-एक शब्द एक-एक वाक्य जिसके यदि हमारे पास समय है और यदि हमारे पास में वो जो थोड़ा बहुत ये एक इंक्लिनेशन है दीप में जान का तो कथामृत के प्रत्येक शब्दों में इतना वो मतलब छुपा हुआ है डेथ तो यहां पर जो लिखा है समाधि का जो वर्णन है हाथों की अंजलि बन गई डे उन्नत और स्थिर नेतृत्व बंदगी एन हो गए जब बेलूर मठ में सर्वप्रथम ठाकुर की जो ये आरएस की प्रतिमा बनाने की बात हुई थी तो जो एक जो उसे समय के यह जो यह होते हैं मूर्तिकार उन लोगों का यह मानना था की ठाकुर का फोटो देखिए ठाकुर कैसे बैठे हैं तो उनका यह जो कहानी है कोहनी जो है उनके पैरों को टच कर रही है ओल्मोस्ट तो इस तरह से जो ह्यूमन फिजियोलॉजी जो स्टडी करते हैं ह्यूमन बॉडी तो उन लोगों का मानना है की यदि आपकी कहानी आपके जी तरह से वो पद्मासन में बैठने हैं और आपकी कोहली यदि आपके पैरों को टच होती है इसका अर्थ है की आप झुकी हुए हैं आप सीधे नहीं बैठे अगर सीधे बैठे हैं तो आपके कौन ही जो है वो आपके वो पैरों को टच नहीं होगी तो इसका अर्थ है की वो फोटो में देखेंगे की ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट टच होती देखिए थोड़ी सी ऊपर है ऑलमोस्ट टच हो रही है इसका अर्थ है की ठाकुर जो है झुक करके बैठे हैं अभी ये जो फोटो है जिसका हम मंदिर में पूजा करते हैं सब समय उसमें तो यह तो समाधि का फोटो है तो इस के अनुसार वो मूर्ति बनानी थी तो सभी लोगों ने ऐसा सोचा की जो वह जो जिसको वह प्लास्टर ऑफ पेरिस का वो जो मॉडल बनाते हैं ना तो पहले जो मॉडल था उसमें ठाकुर को बहुत ज्यादा झुका करके बिठा दिया था इस तरह से लगता था जैसे ठाकुर बूढ़े हो गए हैं तक गए हैं और वो ठीक से बैठ नहीं का रहा है और जैसे वो ठाकुर के बड़े में तो सब लोग कहते थे ना समाधि में जब चले जाते थे की हां उन्होंने श्राप पीके राखी है तो इस तरह से कुछ वो दिखते थे तो ये देख करके वो जो पहले मॉडल देख कर के उसे समय तो राजा महाराजा का शायद महासम्मती हो गया था उसके बाद की बात है जहां तक मुझे ख्याल है वो मैं टेंपल की स्थापना तो 18 1836 में हुई तो उसे समय अखंडानंद जी विज्ञान आनंद जी और शायद महापुरुष महाराज ने देखा होगा अभी इन्होंने किन-किन डायरेक्ट डिसाइड करने ठाकुर का वो मूर्ति देखा है वो मुझे याद था अभी मैं भूल गया हूं अखंडानंद जी तो पक्का आवेदन दीपक का विज्ञान आनंद जी तो थे महापुरुष महाराज और शरद महाराज यह और सुबोध महाराज यह तीन ठेके नहीं ये मुझे अभी याद नहीं ए रहा है किंतु मां लेते हैं की तो इन लोगों ने जाकर के उसे मूर्तिकार को बोला की देखो हम लोगों ने तो ठाकुर को नजरों से देखा है तो आप जिससे इस तरह से मूर्ति बने फोटो में नहीं पता चला है की ठाकुर सीधे बैठे हैं की झुक गए हैं किंतु जो मूर्ति जो बनाई है आपने तो साइड से ऐसा दिखता है की ठाकुर पूरे झुक गए हैं तो ये बात सही नहीं है ठाकुर जो है वो जान बहुत है जान बहू का अर्थ पता है ना की जिनके जो हाथ है वो जो लंबे होते हैं और सीधे जब खड़े रहते हैं घुटने तक ए जाता है उनको आजनबाहु कहते हैं तो ठाकुर के हाथ इस तरह के लंबे थे तो भले ही चाहे उनकी फोटोग्राफ में दिखे की पैरों को टच हो गई है किंतु वह सीधे बैठे हैं तो इन लोगों की बात सुनकर के जो मूर्तिकार है उसने दूसरी मूर्ति गधी जो की अभी बेलूर मठ में है और इस मोड से तीन मूर्तियां बनाई गई थी इस मोड से एक बेलूर मठ में है एक राजकोट आश्रम में है और एक काशी में है मोस्ट प्रोबेबली जहां तक मुझे याद मुझे तीसरी याद नहीं है किंतु ये दो जगह पे तो है ही तो ये जो है की यहां पे जो मास्टर महाशय कहते हैं की समाधि में होने से क्या हुआ बेहद की अंजलि बन गई यानी की इस तरह से हाथ जैसे की हमको फोटो में देखते हैं नेतृत्व स्पांधीन आंख जो है इसे टीम टीम नहीं करती है एकदम स्थिर हो गई है आंख बैंड भी नहीं है पूरी-पूरी खली भी नहीं है निम्न दृष्टि है और अस्थिर है और जो है उन्नत डे ये उन्नत डे लिखने का अर्थ क्या है तो ये है की भविष्य में हम जी तरह से ठाकुर के बड़े में कल्पना करेंगे जी तरह से ठाकुर के बड़े में इमेजिनेशन करेंगे उसे समय हमको पता चलेगा की हमको भले ही चाहे फोटो में किसी को ऐसा लगे की चुप करके बैठे हैं क्योंकि उनकी कहानी पैरों को टच हो रही है किंतु यह बात सही नहीं रात देहात थी अच्छा यह जो नेत्र स्थिर जो लिखे हैं उसके बाद में उसके बड़े में भी एक इंटरेस्टिंग बात है की कथा अमृत में ही वर्णन है की किसी एक इस तरह से एक आदमी आया था मैं उसका नाम भूल गया वो आकर के उसने क्या किया की देखा की ठाकुर इस तरह से समाधि में है तो वो उसने सोचा की चलो ठाकुर का टेस्ट करते हैं उसने जो है जो नेत्र जो पलक नहीं वो खुला थे एकदम स्थिर थे तो आंख के भीतर में उसने अपनी उंगली दाल दी अभी देखिए की कोई अपनी आंख के भीतर में उंगली डालेगा तो हम कैसे एकदम एक चौक जाएंगे आंख बैंड कर देंगे और दर्द से चिल्ला उठाएंगे तो उसने सोचा दीदी ठाकुर ढोंग करते हैं तो मैं यदि उनकी आंखों में उंगली डालूंगा तो इमीडीएटली वो चिल्ला उठाएंगे पता चल जाएगा तो अभी बाकी सब भक्ति लोग जो बैठे हैं किंतु जो है की वो वो जो है की किसी को बिना बताए किसी को बिना परमिशन लिए उसने सिद्धि की आंख में उंगली में समाधि स्थित है तो उसने उंगली डाली तो ठाकुर को कुछ नहीं हुआ वैसे ही जो स्थिर बैठे थे तो वैसे ही थे किंतु ये देख कर के बाकी के भक्ति जो थे बड़े ही नाराज हो गए और जिसने उंगली डाली थी उसको पकड़ करके वो कमरे से निकाल दिया तो देखिए की ऐसे लोग भी थे की ठाकुर को इस तरह से परीक्षा करते थे और अभी चाहे हमको इस बात सुनकर के गुस्सा भले ही ए जाए की अरे ठाकुर की आंखों को यदि जीजा हो गई होती उनको इंजरी हो गई होती तो कितना मतलब वो तो कितना भयानक वो हो गया होता कांड बांग्लादेश हिस्ट्री की दृष्टि से देखा जाए तो हमारे पास में यह भी एक एविडेंस है की चलो ठाकुर जो है वो ये सब चीज जो है वो एक तरह का नाटक नहीं करते थे लोगों को भ्रमित नहीं करते थे सही सही में जो उनकी आंखों में उंगली दाल करके उंगली दाल करके गया है की वह थोड़ा सा भी उससे वो मतलब उनको ज्ञान थोड़ा सा भी नहीं है संपूर्ण रूप से वो जो है ईश्वर ज्ञान में ब्रह्मज्ञान में मगन हो गए हैं तो वैसे ठाकुर की दृष्टि से भक्तों की दृष्टि से बहुत बड़ा हुआ किंतु जो लोग हिस्ट्री लिखने हैं जो लोग की यह सब चिंतन करते हैं एनालिसिस करते हैं उनको एक प्रूफ मिल गया की सही-सही में की ठाकुर जो है क्योंकि क्या है बात-बात में बहुत सारे लोगों ने ऐसा बोलना शुरू कर दिया था की यह तो निरीक्षण ब्राह्मण है काली का पुजारी है कैसे सब खास करके जो कम्युनिस्ट लोगों का ऐसा था की वो मैंने वो डाइजेस्ट नहीं कर पता है की हिंदू धर्म में ऐसा कोई महापुरुष हुआ होगा तो सब समय कुछ ना कुछ नेगेटिव तो बोलते ही रहना है हिंदू धर्म के बड़े में तो हिंदू धर्म के सर्वश्रेष्ठ यदि अवतार कहे एन की सबसे ज्यादा सम्मानित यदि कोई साधु संत महात्मा कहे आज के समय में तो ठाकुर है अभी भले चाहे सब लोग ठाकुर को इतना सर्वश्रेष्ठ इंपॉर्टेंट वो कहेंगे की अरे चलो जैसे देवेंद्र नाथ टैगोर थे जैसे यह जो थे अपने आ बाकी के जैसे ही यहां पे स्वामी नारायण है तो वैसे ही एक ठाकुर थे तो भले ही चाहे ठाकुर को सर्वोच्च आसन पे वो ना बिठा किंतु सर्वोच्च सर्वप्रथम श्रेणी के जो सर्वश्रेष्ठ महात्मा है उनमें तो उनका स्थान अवश्य होगा तो ये जो कम्युनिस्ट वगैरा कुछ लोगों को यह डाइजेस्ट नहीं होता और सब समय ऐसे हमारे जो आ हम हमारे जो सम्माननीय है हमारे जो पूजनीय है ऐसे लोगों के प्रति कुछ ना कुछ नेगेटिव बातें ये लोग करते रहते हैं तो उनको भी ये एक एविडेंस है की देखो की ठाकुर जो है ये सब फेक मैन की ये सब नाटक नहीं करते थे सही सही आंख में उंगली डालकर के देखा गया था कोई भी रिएक्शन नहीं है संपूर्ण रूप से वो बाकी आज्ञा शून्य हो गए हैं तो यहां पे ये प्रत्येक सेंटेंस प्रत्येक शब्द कथामृत का देखिएगा की उसमें कितना सब कुछ हमको सीखने को मिलता है कितना सब कुछ जन को मिलता है और अध्यात्म की दृष्टि से भी है ठाकुर की समाधि का वर्णन कर दिया तो हम फोटो तो देखते हैं किंतु फोटो के साथ में यदि शब्द हमको मिले मां में चिंतन करने के लिए मंत्र की तरह दोहराने के लिए तो मैं आंख बैंड करके सोचूंगा मंगल आरती में बैठे हैं आंख बैंड करके और यहां पे हमारे मंदिर में खासकर के एन रामकृष्ण मंदिर में की मंगल आरती के समय सभी लिए बैंड रहती है और पुजारी महाराज जब आरती करते हैं तब वो भी वो फिर मंदिर में से वो जो ठाकुर का जो श्री है वो जो गर्भ मंदिर है वहां से चले जाते हैं बाकी सब जगह पे क्या होता है पुजारी लोग बैठे रहते हैं और कुछ ना कुछ मचाते राहत है तो आपको आंख बैंड करके शांति से बैठने का मौका नहीं मिलता किंतु हमारे मंदिर में खास करके संध्या आरती के बाद में और मंगल आरती के बाद में इस तरह का एक सुंदर शांत वातावरण परिवेश बंता है की आप आंख बैंड करके बैठ करके थोड़ा बहुत कर सकते हैं संध्या आरती के बाद में कभी-कभी भजन गायन होता है कभी कभी कोई महाराज जी का प्रवचन होता है तो भी वह इतने सुंदर सुमित स्वर से होता है की आप यदि उसे समय आंख बैंड करके थोड़ा सा ठाकुर का नाम लेंगे तो आपको थोड़ा सा भी आकर नहीं होगा ऊपर से आपको ठाकुर का नाम लेने में सुविधा होगे| हमारे साधु हमारे सन्यासियों का तो गण भजन का स्वर भी इतना मिस्टेक राहत है तो उसे समय यदि आप ठाकुर की मूर्ति के सामने देखते हैं तो ये सब जो वर्णन है वह मां में सोचना है की ठाकुर समाधि में चले गए हैं उनके हाथों की अंजलि बढ़ गई है उनके नेत्र जो है पलक स्थिर हो गए हैं डे उन्नत है और जैसे की ऐसा ग रहा है की जैसे जितने सर्वोदय देवी स्वरूप आए ठाकुर के बड़े में कहा जाता है तो ब्रह्मा विष्णु महेश सब जो है वो ठाकुर के शरीर में है और एक साथ में सब लोग हमको आशीर्वाद दे रहे हैं हमारे जो जन्म जन्मांतर के कर्म है उनका दर्शन करके कट जा रहा है तो इस तरह से उसे समय इमेजिन करना है सभी लोग गार्डन ऊंची करके यह अद्भुत अवस्था देखने लगे पंडित विद्यासागर भी चुपचाप एक तक देख रहे हैं श्री राम कृष्णा अभी कुछ क्षण बीती कुछ समय बीता उसके बाद में श्री रामकृष्ण प्रकृति स्थल हुए लंबी सांस छोड़कर फिर हंसते हुए बात कर रहे हैं जैसे की वो बीच में रिसेस होती है ना स्कूल में वो इंटरवल हो बीच में वो जो रिसेस होती है बच्चे लोग खेल करके ए करके फिर से उसको क्लास में बैठ जाते हैं और फिर से पढ़ाई लिखी शुरू कर देते हैं तो वैसे ही विद्यासागर को बात कर रहे थे विद्यासागर को उपदेश दे रहे थे बीच में रिसर्च हुआ और जाकर के ठाकुर बच्चे की तरह दौड़ करके मां के साथ में थोड़ी डर खेल कर के वापस ए गए अब फिर से अभी हंसते हुए वो वो रिसर्च के बाद में वो इंटरवल के बाद में बच्चा कैसे वो थोड़ा फ्रेश हो जाता है वह प्लेग्राउंड में जाकर के वह चिकन चिल्लाना दौड़ा-दौड़ी करना अपने मित्रों के साथ में गैप लगाना वह सब करके वो कैसा वो फ्रेश हो करके वो पूरा मां से वापस ए के स्टडी करता है कैसा होना चाहिए तो ठाकुर का भी ऐसा है की वो थोड़ी रानो के लिए मां के पास चले गए उमा के साथ में खेल करके फिर से हंसी मुख से फ्रेश होकर के आकर के विद्यासागर के साथ में बात कर रहा है हंसते हुए भाव भक्ति इसके मैन उन्हें प्यार करना ठाकुर कहते हैं भाव और भक्ति का अर्थ क्या है ईश्वर को प्यार करना ईश्वर को प्रेम करना बच्चा जैसे अपनी मां के ऊपर में संपूर्ण विश्वास रखकर के वो किस तरह से वो मां के वो मां की गॉड में बैठता है मां के आसपास वो दौड़ा दाऊदी करता है मां के मां के भरोसे राहत है उसको पता है वो भूख लगेगी मां खिलाएगी उसको कोई खिलौना चाहिए तो माल ला के देगी अभी वो मां सब समय सब चीज नहीं भी देती वह टी भी करती है कभी-कभी तो बच्चे को किंतु मां में मां में पता है यदि मां मारती भी है उसको तो इस के भले के लिए इसलिए नहीं की मां उसके ऊपर नाराज है तो ईश्वर के साथ में इस तरह का संपूर्ण विश्वास ए जाए की हां मेरे साथ में जो कुछ भी हो रहा है अच्छा हो ना की बड़ा हो यदि मेरे मां के अनुसार अभी यहां पर भी आश्रम में हम लोग रहते हैं तो क्या है की इतने सारे साधु सन्यासी साथ रहते हैं अभी हमको लगता है की सभी चीजों में हम हमको सम्मान मिले सभी चीजों में सभी बटन में हम सबसे ज्यादा आगे जाके खड़े रहे किंतु ऐसा तो नहीं होता हमारे डिपार्मेंट में हमारा चला है या दूसरे डिपार्मेंट में अपना चलने वाला नहीं है और जैसे-जैसे आप अथॉरिटी बढ़नी जाति है हमारे ऊपर में महंत है अध्यक्ष महाराजा अध्यक्ष महाराज के ऊपर में ट्रस्टी महाराजा ट्रस्टी महाराज के ऊपर में जनरल सेक्रेटरी महाराज है उनके ऊपर में वाइस प्रेसिडेंट महाराज प्रेसिडेंट महाराज है तो इतना बड़ा एक हमारा अथॉरिटी का स्ट्रक्चर है तो मैं तो एक छोटा सा शब्द हूं तुम मेरे मां में बहुत साड़ी इच्छा होती है मैं ऐसा कम करू ऐसी सेवा करूं इस तरह का प्रवचन इस तरह से करूं किंतु यह सब करने का मौका नहीं मिलता क्यों क्योंकि हम सबको एक तरह से डिसिप्लिन में रहना है हम सबको एक जो कम दिया गया है इस को करना है उससे बाहर जाकर के वह दूसरों के कम में टांग नहीं अदा नहीं है तो कभी-कभी ये हमको लगता है की अरे ये हमारे ऊपर में किस तरह का बंधन है सब छोड़ कर सन्यासी होकर की यहां पे आए फिर भी हमको इस तरह से डिसिप्लिन में रहना पड़ता है क्यों यह सब में करूं चलो मैं चला जाता हूं वो कहानी नर्मदा किनारे जाकर के रहेंगे वहां पर ध्वनि जलाएंगे और बस वो खुला आकाश के नीचे में जब ध्यान करेंगे ऐसी बात बहुत सारे सब हो के मां में आई भी है और कुछ कुछ साधु है वो इस तरह से चले भी जाते हैं और मैं किसी किसी साधु को पहचानता हूं की नर्मदा किनारे वे लोग र रहे हैं और ऐसे छोटी सी कुटिया में और बहुत ही शुद्ध पवित्र जीवन वे लोग बीता रहे हैं ऐसा लगता है की जैसे हमारे ट्रेडिशनल वो जो सन्यास परंपरा ऋषि मनी परंपरा है वो उनके भीतर में पुनः जागृत हो गई है की और कोई मतलब उनको ये मतलब ये नहीं है अटैचमेंट नहीं है किसी तरह का कम करने का कोई फिक्र नहीं है उसे थोड़ा सा भिक्षा किया दिवस दरमियां दिन के दौरान और फिर सुबह शाम जो है बढ़िया मजे से वो धूनी जलाओ और अपने वो जो छोटा सा कुटिया बनाया है उसके वंद में बैठ करके वो ठाकुर का नाम लो या तो फिर कोई धर्म पुस्तक पढ़ो या तो फिर जो दो पांच लोग आपके मित्र हैं या तो कोई देवोटी है वो आता है तो उनके साथ में बात करो लगता है की बहुत ही आदर्श जीवन है किंतु यह संघ में रहना संघ के डिसिप्लिन में रहना बड़े लोगों की बात मानकर के चलना अपना जो अंक मेरी जो इच्छाएं उसको ठाकुर के श्री चरण में बाली देते देना ये भी एक बहुत बड़ी तपस्या है पूरा जो हमारे ट्रेडिशनल जो हमारे ऋषि मुनियों की जो तपस्या ठीक करके खाता थे यहां पे तो आपको जो चाहिए वो खाने को मिल जाता है आपको यहां पे तो संयम रखना पड़ता है की वेट ना बाढ़ जाए डायबिटीज ना हो जाए शुगर एन बाढ़ जाए बड़ा संयम करके आओ तो खाने-पीने रहने की सब तरह की सुविधा है किंतु फिर भी मां के ऊपर में जो हमको डिसिप्लिन रख करके चलना पड़ता है वो बाहर से कहानी ज्यादा है तो मां में कभी-कभी होता है की यह सब छोड़ करके अपने अलग से रहे अपनी मस्ती में रहे किंतु देखिए की अहंकार जो है अहंकार का निर्मूलन ही हमारे लिए सबसे बड़ी साधना है यह जो हम ठाकुर की बात करते हैं मां की बात करते हैं स्वामी जी की बात सकते हैं उन लोगों को कितना कष्ट सी पड़ा है क्या आज मेरी वो ताकत है की स्वामी जी की तरह वो वो पूरा दुनिया पुरी दुनिया मेरे अगेंस्ट में हो जाए स्वामी जी ने एक पत्र में लिखा था बहुत ही सुंदर लिखा था की यदि पुरी पूरा जगत मेरा अपमान करें मेरा विरोध करें मेरे अगेंस्ट में जाकर के खड़ा रहे मुझे कोई गम नहीं है कोई मुझे उससे कोई परवाह नहीं है जब एक गुरु भाइयों को पत्र में लिखा था जब तक तुम लोग जो है मेरे पीछे में इकट्ठा होकर खड़े रहते हो मैं पुरी दुनिया से झगड़ना के लिए लड़ने के लिए तैयार हूं तो संघ की यह शक्ति है की जो ठाकुर का कम है इस जगत में जो हो रहा है तो भले ही चाहे ठाकुर के कम के सामने जितना भी विरोध हो बाहर से हम लोगों की ये जो यूनिटी है वह जो है हमको बच्चा के रखती है ठाकुर पर कम को जो है धीरे-धीरे करके वो आगे बढ़नी है हमको लगेगा की नहीं की इतना फास्ट कम नहीं हो रहा है किंतु फिर भी जो भी है वो धीरे-धीरे तो करिए आगे बाढ़ रहा है और यहां पर रहना संघ में रहना वह बाहर में रहने से ज्यादा वह कठिनाई भारत है बाहर में हमको लगता है की दीक्षा करके खाना या तो फिर अकेले रहना इतनी बीमा हो जाते हैं तो हमारी संभल करने वाला संभालने वाला कोई नहीं है मेडिसिन वगैरा का क्या होगा कोई ठिकाना नहीं है यदि कोई बहुत बड़ी आपत्ती ए जाए तो मेरे साथ में 10 लोग खड़े होंगे की भी नहीं वो कोई ठीक नहीं है यहां पे सब कुछ है किंतु मैं फिजिकल सिक्योरिटी पूरा है किंतु साथ-साथ में एक चीज है की जो मेंटल डिसिप्लिन यहां पे आवश्यक है रहने के लिए वो बाहर से कहानी ज्यादा आवश्यक है क्योंकि ये जो पूरा चैन ऑफ अथॉरिटी है उसमें कहानी से भी थोड़ा बहुत इधर-उधर हो गया तो ऊपर से एक्सीडेंट करना वो यहां पर रहने के लिए बड़ा ही इंपॉर्टेंट है प्रसाद कहता है की मैं मातृभाऊ से जिसकी खोज कर रहा हूं उसके तत्व का भांड क्या मुझे छोरा है पर फोड़ना होगा मां इशारे से ही समझ लो अभी यहां पर क्या है वो जो जितने भी वो भजन कीर्तन है उसको इस तरह से वह वज में नहीं करके पॉज में कर दिया है मैंने उसका ठीक ट्रांसलेशन नहीं किया संभव ही नहीं है सब समय इसलिए उसे तरह से नरेशन लिखने हैं वैसे लिख दिए हैं हिंदी में ठाकुर आगे कहते हैं रामप्रसाद मां को इशारे से ही समझना के लिए उपदेश करते हैं यह समझना को कहते हैं की मैं की वेदों ने जिन्हें ब्रह्म कहा है उन्हें को मैं मां कष्ट पुकारता हूं जो निर्गुण है वही सगुन है जो ब्रह्मा है वही शक्ति है जब यह दिशा होता है की वे निष्क्रिय है तब उन्हें ब्रह्मा कहता हूं और जब यह सोचता हूं की वह सृष्टि स्थिति और प्रलय करते हैं तब उन्हें अध्याशक्ति काली कहता हूं ब्रह्म का स्वभाव क्या है अभी कल परसों ही एक देवोतीन है एक हमारे भाई है बहुत ही एक्टिव है और बहुत अच्छे वॉलिंटियर है और बहुत इंटेलिजेंट भी बहुत है उन्होंने प्रश्न किया की डिबिनिटी जो है उसका मेनिफेस्टेशन जो है वह कैसे हो सकता है मैंने हमारे भीतर में क्या है की वह तो मैन ईश्वर की कृपा या तो ईश्वर का आशीर्वाद दिया तो फिर ईश्वर का प्रकाश वह है यदि उसको जगत में उसको ट्रांसलेट करेंगे उसको ट्रांसलेट करेंगे तो वो क्या होगा मैन ये निष्काम कर्म होगा दिविनिटी का मेनिफेस्टेशन ना की वो जो है की मेरे मेरे जो भी कार्य है उसमें मैं यूनेस्टी मैन की वो प्रमाणिकता पूर्वक सब कार्य करू ये है की मेरे जो संबंधी वगैरा है उनकी में ज्यादा से ठीक से उनकी में केयर करूं ये है मैन दिविनिटी का मेनिफेस्टेशन क्या है मुझे कैसे पता चलेगा की दूसरे क्या मुझे दूसरे लोगों को दिखाना पड़ेगा की मेरे भीतर में साधना में सक्सेसफुल हो रहा हूं की नहीं जैसे की बहुत बार हम लोग कहते हैं की ये लोग बहुत सारे लोग दिखावा करते हैं ना की मंदिर में जाकर के वो साधुओं के साथ बात करेंगे बहुत ज्यादा गैप लगाएंगे वो थोड़ा बहुत डोनेशन भी सबके सब लोग देखें इस तरह से वो पैसे भी देंगे और बोलते भी घूमेंगे मैंने इतना डोनेशन दिया ये किया वो किया फिर किंतु जो है की दिखावा जो है वाक्य दिखावा क्या ये मेनिफेस्टेशन है इसलिए वह हम चुपचाप साधना करते रहे मेरे हृदय में जो साधना चलती रहे तो तो दिविनिटी का डेवलपमेंट हुआ मेनिफेस्टेशन कहां हुआ मेनिफेस्टेशन क्या दिखावा है इस तरह से उनका प्रश्न है तो मैंने कहा उसका उत्तर की योग शास्त्र की दृष्टि से वो जो यह जो है सत्य अहिंसा अस्थाई परिग्रह ब्रह्मचर्य ये जो है वो एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन है और नियम जो है तब सोच संतोष वैद्य ईश्वर परिधान ये इंटरनल मेनिफेस्टेशन है तो बाह्य दिखावा करना की मैं इस एन वॉलिंटियर सब जगह पे जाकर के खड़ा राहत हूं या तो फिर मैं डोनेशन देता हूं या तुम्हें साधुओं के साथ में गैप लगता हूं ये दिखाऊंगा में फ्रस्ट्रेशन नहीं है मेनिफेस्टेशन है की मेरा जो स्वभाव है मेरा जो बिहेवियर है मेरा जो इंटरेक्शन है दूसरे लोगों के साथ में वो बहुत ही संस्कृत बहुत ही संयमित बहुत ही वो जो है दूसरों को दूसरों को यह एन पहुंचे इस तरह का होता है सत्य मैं सत्य का पालनपुर करूंगा अहिंसा दूसरों को दूसरों का शंकर नहीं करूंगा दूसरों को इस तरह से ऐसा लगे की हां मैं उनके जो अधिकार छन ले रहा हूं ऐसा मैं नहीं करूंगा सत्य अहिंसा असते असते यानी की दूसरे लोगों का वो जो अधिकार छन लेना वो मैं नहीं करूंगा एस्ट अपरिग्रह यदि मैं परिग्रह करता हूं लोगों के साथ में जितना ही मेरी संपत्ति बढ़नी है वैसे ही दूसरों की संपत्ति कम होती है यह आपको इकोनॉमिक्स का एक सिंपल एक उदय है बेसिक आइडिया है की यदि केपीटलाइज्म जो है केपीटलाइज्म का क्या अर्थ है की टॉप टेन लोग हैं उन लोगों की संपत्ति जितनी भी बढ़नी है उतना ही एक गैप इन इनकम होता है टॉप बॉटम जो 50% है उन लोगों की इनकम कम होती जाएगी और टॉप टेन परसेंटेज उनके इनकम बढ़नी जाएगी जैसे जैसे ये जो नेशन इकोनॉमिकली डेवलप होता है तब तब ऐसा होता है भारत में भी अभी देखेंगे की जो टॉप 10% है उनकी जो इनकम है और बोट 250 परसेंट है उनकी इनकम में गैप पिछले 10 साल में कितने गुना बाढ़ गई है हमको लगता है की भारत में से बहुत डेवलप हो रहा है किंतु जो बॉटम 50% जो इकोनॉमिकली जो टॉप बॉटम 50% में आते हैं उनकी इनकम एक्चुअली कम हो रही है जो टॉप 10% है उन्हें की इनकम बढ़नी है तो मेजॉरिटी परिग्रह करता हूं मेरी आई है मेरा धन है मेरा वैभव है जितना बढ़ेगा उतना ही दूसरों का कम होगा और आखिर में है ब्रह्मचर्य ब्रह्मचर्य अर्थात की दूसरों के प्रति जो आ यदि पुरुष है तो महिला के प्रति महिला है तो पुरुष के प्रति जो कूद दृष्टि से वो यदि उनको देखते हैं तो क्या होता है की दूसरों के मां में एक बहुत ही एक नेगेटिव एक इंप्रेशन होता है दूसरों को सामने वाले को जो है उससे बहुत ही एक मां में एक आघात पहुंचता है की मेरा जो सलमान है मेरी जो इज्जत है उसका वह थोड़ा सा भी उसको यह नहीं है उसको रिस्पेक्ट नहीं है ऐसा करने वाले को लगता है तो ब्रह्मचर्य का अर्थात सभी के लिए मतलब 100% ब्रह्मचारी है यह नहीं सन्यासी के लिए है और सांसारिक के लिए है की वो जो अपने वो पति पत्नी जो है सिर्फ इस के साथ में संबंध रखें दूसरों के साथ में नहीं तो एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन ये है नहीं किया दिखावा करना लोग बोलेंगे की मेजॉरिटी दिखावा नहीं करता हूं सिर्फ जब ध्यान करता हूं तो मेनिफेस्टेशन तो हुआ नहीं मेनिफेस्टेशन होगा इस तरह से होगा तो ठाकुर जब यहां पे कहते हैं जब निष्क्रिय है तो ब्रह्मा है सक्रिय है तो शक्ति है तो मैं जब ध्यान करता हूं तो ब्रह्मा का प्रकाश मेरे हृदय में होगा उत्पन्न और जब मैं कार्य करता हूं या तो फिर मेरा जो बिहेवियर है दूसरे लोगों के साथ में जब वो इंप्रूव होगा तो वो शक्ति है मेरी मेरी शक्ति क्या है मतलब यह नहीं की मैं बहुत बड़ा कार्य कर दिया या तो मेरे में बहुत बड़ी विद्वत्ता है या तो मेरे में बहुत सर शारीरिक बाल है या तो मेरा बहुत बड़ा नेटवर्क है फ्रेंड्स का और कलीग का यह सब मेरे सही शक्ति नहीं है मेरी सही शक्ति है सत्य अहीन असते और परिग्रह और ब्रह्मचर्य हम लोग बहुत बार सोचते हैं की बुद्धिमता जो है क्रिएटिविटी जो है वो हमारा एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन ऑफ डीबीटी है तो है यूपीटीओ और एक्सट्रैक्ट किंतु वो ये बात संपूर्ण नहीं है संपूर्ण सत्य ये है की यदि क्रिएटिविटी एक आपका ये कन्फ्यूजन जैसे चित्र प्रसाद हमने कहा मैत्री करुणा मुदित और अपेक्षा ये दूसरों के प्रति ये होना चाहिए तो चित्र प्रसाद जो है एक मेनिफेस्टेशन है क्रिएटिविटी जो है क्यूरोसिटी जो है वो दूसरा मेनिफेस्टेशन है और यह सत्य अहिंसा असते परिग्रह और ब्रह्मचर्य ये तीसरा मेनिफेस्टेशन है यदि इस तीन रूप में यदि मेनिफेस्टेशन होता है तो वो हमारा सही सही वो जो ब्रह्मा वो निष्क्रिय और जो सक्रिय वो शक्ति वो हमारी सही-सही शक्ति है नहीं की बाकी सब चीज जो की हम मां रहे हैं मेरे पास में बहुत सर धन वैभव है मेरे मेरा बहुत बड़ा फ्रेंड सर्किल है मेरे ऊपर में यदि कोई आपत्ती ए गई तो मैं उसे लोगों को बता करके वे लोग मुझे मदद करेंगे यह सब राहत है बहुत सोशल नेटवर्किंग जिसको आजकल कहते हैं सोशल कैपिटल जिसको आजकल कहते हैं ये इंटरनेट जिसको कहा जाता है किंतु यह सब जो है सही शक्ति नहीं सही शक्ति चिताप्रसाद यम और क्यूरोसिटी और क्रिएटिविटी ये हुई हमारी ये जो ब्रह्मचर्य सक्रिय होता है तो इस तरह से शक्ति मेनिफेस्ट होगी और निष्क्रिय राहत है तो हमारा मां जो है वो ईश्वर का आशीर्वाद ईश्वर के जो कृपा ईश्वर का वो जो आविर्भाव उससे हमारा मां भर जाता है ठाकुर आगे कहते हैं ब्रह्मा और शक्ति अवैध है जैसे की अग्नि और उसकी दही का शक्ति अग्नि कहते ही दही का शक्ति का ज्ञान होता है और दही का शक्ति खाने से ही अग्नि का ज्ञान एक को मानिए तो दूसरा भी साथ मां लिया जाता है उन्हें को भक्तजन मां कहकर पुकारते हैं मां बड़े प्यार की वास्तु है ना ईश्वर को प्यार करने से वे प्राप्त होते हैं भाव भक्ति प्रीति और विश्वास चाहिए एक गाना और सुनो घर के वो पूरा गाना लिखा है किंतु वह पोयम के रूप में नहीं लिखा है पैराग्राफ के रूप में लिखा है तो ब्रह्मा और शक्ति अभय यह बात जो है ठाकुर बार-बार कहते हैं की मैं जब पहले पहले बार यह पढ़ना शुरू किया तो मुझे लगा की इस तरह का एक फिलासफी के लिए आइडिया है जिसका की हमारे जीवन में कोई प्रैक्टिकल एप्लीकेशन नहीं है ऐसा मुझे लगता था किंतु धीरे-धीरे जैसे जैसे मैं इसके बड़े में सोचता गया तो मुझे पता चला है की देखिए इसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन कितना बड़ा है हम जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रति मुहूर्त जो कुछ भी करते हैं वो ईश्वर की शक्ति का प्रकाश है वह ईश्वर की शक्ति जो है वहां पे मेनिफेस्ट होती है थोड़ा सा भी मेरे मां में कम भाव उत्पन्न हुआ थोड़ा सा भी मेरे मां में जो है अहंकार उत्पन्न हुआ थोड़ा सा भी जो मेरे मां में जो लोग मो यह सब उत्पन्न हुए और इस सब भाव से मैं कोई कार्य कर रहा हूं तो वो जो है वो मेरे अंधकार का वो मेनिफेस्टेशन है मतलब ईश्वर की शक्ति वहां पर अब्सेंट है वो मेरे अहंकार का मेनिफेस्टेशन है अविद्या का मेनिफेस्टेशन है किंतु जैसे मेरे मां में दूसरों के प्रति एक करुणा का भाव उत्पन्न हुआ अभी जैसे मोदित जो मुद्दा के बड़े में सब समय सोचता राहत हूं बहुत ही कम लोगों को मैंने देखा है मुट्ठी भर में बहुत लोगों को मिलन हजारों लोगों को मिला हूं बहुत सीनरी साधु बहुत ही मैन सीनरी देवोटी जो लोग बहुत अच्छे से जब जान करते हैं रेगुलर एक आध्या जीवन लेट करते हैं बहुत लोगों को मिला हूं किंतु एक चीज अच्छी है की मुद्रा यह जो गन है बहुत ही रेयरली आपको देखने को मिलेगा यदि दूसरों के भीतर में कोई आपको टैलेंट दिखाई देती है दूसरों का कोई श्रेष्ठ तत्व दिखाई देता है तो उसको सरल हृदय से उसको अप्रिशिएट करना ये भाव जो है बड़ा ही रेयर है इस जगत में और जिन लोगों के भीतर में ये भाव देखा है मैंने साथ-साथ में ये भी देखा है की वे लोग स्पिरिचुअल कितने एडवांस है स्पिरिचुअल उन लोगों के लिए प्रगति करना कितना आसन है कितने फटी करके वो जो है जो उच्च से उच्चतर सोपान है उसके ऊपर में आगे बढ़ते जाता है तो ये भाव होना की मैं बहुत सारे लोग होते हैं की बहुत प्रवचन देंगे बहुत बुद्धिमता होगी उन लोगों में बहुत अध्ययन किया होगा बहुत कम भी करते हैं किंतु उनकी बातें सुनेंगे ना तो उनकी बातें सिर्फ उनके बड़े में होगी मैंने ये किया मैंने वो किया मैंने वहां पर गया था मैं वहां पर जाकर के प्रवचन में ऐसा कहां मैं उसे समय रिलीफ कर रहा था तो पूरा दिन भर बिना खाए पिए में पूरा दाैधाम करता रहा इतने लोगों को इतने लोगों को मैंने खिचड़ी प्रसाद बंता यह सब मैं मैं सब समय उनकी बटन में देखेंगे की मैं के अलावा खुद के अलावा और कोई बात ही नहीं होगी तो ये देखिए की स्पिरिचुअलिटी का जो मेनिफेस्टेशन है प्रैक्टिकल मेनिफेस्टेशन वो किस तरह से हमको समझना है किस तरह से सूक्ष्म रास्ता है हम मैंने इतनी साधना की फिर भी मैं अपने अहंकार से मुक्त नहीं हो रहा हूं और अहंकार से मुक्ति ही तो सही सही साधना है वो जो जड़ भारत की बात है ना वो राजा वो जा रहे थे तो एक उनको वो जो उनकी पालकी उठाने वाला मिल नहीं रहा था तो राजा ने कहा पास के गांव से किसी को पकड़ के ले आओ तो ये लोग जो है वो उनको लेकर आए तो अभी थोड़ी डर के बाद में वो जड़ भारत जो बोल रहा है की राजा तुम्हारे भीतर में वो जो आत्मा है इसके भीतर में भी वो आफमैन है और ऐसा करके ऐसी वेदांत की बातें करनी शुरू कर दी तो राजा जो है एकदम वो पालकी से उतारकर के उनके पैरों में गिर गया किया अरे आप कौन है मतलब आप इतने सहज सरल दिखते हैं किंतु आपके भीतर में एशिया आध्यात्मिक की शक्ति में सोच भी नहीं का रहा हूं तो ऐसे लोग जो है संपूर्ण रूप से निराहनकर होते हैं तो मतलब आप यदि साधना करते हैं निष्काम कर्म करते हैं जब ध्यान करते हैं बहुत अच्छे से रूटीन फॉलो करते हैं किंतु साथ-साथ में ही ये जो अहंकार आपके मां में सब समय स्वर रहेगा की हां मैं यह कर रहा हूं मैं वो कर रहा हूं और दूसरे लोगों को यह सब समय आप बताते रहेंगे की मैं मैं और दूसरों का जो टैलेंट को अप्रिशिएट करना दूसरों को मां में थोड़ा सा झांक करके उसका क्या दर्द है उसकी क्या मतलब एक नीड होती है ना फ्रेंडशिप की एक हथियारों की उसको सब किसी किसी को ऐसा होता है की वो दुखी है तो वह कोई-कोई लोग होते हैं ना आपके साथ बात करते हैं तो आपके क्या कुछ कष्ट है कुछ दुख है आपका मां करके समझ जाते हैं और इस इतना सुंदर तरीके से आपके साथ बात करते हैं ऐसा नहीं की आपको समझते हैं बात ही इस तरह से करेंगे की आपका मां जो है वो हल्का हो जाए आप चैन के सांस लेंगे और लगेगा की हां चलो भाई ये इसके साथ में बात करके बड़ा अच्छा लगा तो ऐसे लोग जो होते हैं की दूसरों के मां में उनकी इनसाइड होती है तो ये इनसाइड आना ये एंपटी आना दिस इस डी ग्रेटेस्ट मेनिफेस्टेशन ऑफ दिविनिटी विदीन यदि मैं दूसरों के मां की बात नहीं समझ पता हूं मैं मेरा मां जो है मेरे ही कार्यकलापों से पूरा भर चुका है तो फिर क्या है की मैं चाहे कितनी ही साधना करना योग हो ना की ज्ञान योग हो भक्तियोग हो ना की राजयोग हो एक एक डेयर से बाहर में नहीं जा पाऊंगा क्योंकि धैर्य से बाहर जान के लिए अहंकार से मुक्ति होना आवश्यक है अहंकार जाएगा तो mp3 आएगी एगो जाएगा तो यह दया आएगी करुणा आएगी तो दया और जो है चित्र प्रसाद यह ग्रेटेस्ट मेनिफेस्टेशन ऑफ दिविनिटी विदीन यदि मैं जब ध्यान करता हूं और यदि मेरे मां में दूसरों के पति दया करुणा मैत्री मुदित्ता नहीं है तो फिर मेरा जब ध्यान जो है वो रुख सुख है उसमें सही-सही मैं अपने प्राणों को नहीं दाल का रहा हूं मैं उसमें सही-सही जो ईश्वर के प्रति जो निर्भरता का भाव है ईश्वर के प्रति सही-सही भालोबासा जिसको बांग्ला में बोले प्रेम जो है वो नहीं ए रहा है मुझे बहुत कुछ करने की अभी जरूर है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं