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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत || 27 Oct 1882 - केशव सेन के साथ ठाकुर का नौका विहार || 25 Dec 2024

Invocation

ओ स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार रिय राम कृष्णाय ते नमः आज तो छुट्टी होगी बहुत जगहो पर

Story of Jesus and Ramakrishna

क्रिसमस तो कल मैं यहां पर मुझे बोलना था मंदिर में तो क्या बोलना है मेन आईडिया ये था कि जीसस के ऊपर में तो बोलेंगे ही किंतु साथ में अपने ऑर्डर का भी आ जाना चाहिए तो वो आठुर की घटना जो है कि सब गुरु भाई वहां पर गए थे आठुर में और फिर वहां पर तपस्या कर रहे थे और एक दिन मध्यरात्रि को यह लोग धुनि जला करके जब यह जब ध्यान कर रहे थे फिर बीच में कुछ ब्रेक हुआ तो फिर नरेंद्र जो है स्वामी विवेकानंद जीसस का जो अनुपम जन्मा और उनका रिसरेक्शन यह दो कहानी और फिर जीसस का जो प्रेरणादाई जीवन है वोह बता रहा था तो फिर उसी दिन रात को फिर वो नरेण यह भी कहता है कि किस तरह से सेंट पॉल में वो जीसस का गोस्पेल का प्रचार करने की इतनी यह जो उमंग थी इतनी झील थी कि उसी की वजह से यह जो इनिशियल डिसाइल्स थे जीसस के अपोस्ट जिनको कहते हैं तो उनके ये जो फर्वर है यह जो उनका उल्लास है उत्साह है जीसस का नाम का प्रचार करने का उसी की वजह से उन्होंने पूरी पृथ्वी पर घूम कर के जीसस के नाम का गोस्पेल जो है वो उन्होंने यह किया व प्रचार किया तो नरेंद जब यह कह रहा है तो एट दैट टाइम सेम टाइम यह जितने भी डायरेक्ट डिसाइल आठ पूर में इकट्ठा हुए थे उन्होंने भी यह ठान लिया कि नहीं ठाकुर का गोस्पेल हम लोग भी ये अपोस्ट की तरह जिसस के अपोस्ट की तरह हम लोग भी ठाकुर का गोस्पेल पृथ्वी के प्रत्येक कोने पर पहुंचाएंगे और फिर दूसरे दिन पता चला कि जब यह लोग जीसस के बारे में यह सब बात कर रहे थे दैट वास 24th दिसंबर की मिडनाइट यानी कि वो नेटिविटी जीसस का पृथ्वी पर अवतरण हुआ उसी क्षण यह सब बातें चल रही थी उनको पता नहीं था कि यह जो क्रिस्मस ईव है बोलकर के और फिर बाद में महापुरुष महाराज लिखते हैं कि हम लोगों के जी जी वन में त्याग सन्यास और वैराग्य तो श्री रामकृष्ण पहले ही अर्पण करके गए थे उनकी महासमाधि के पहले ही हमारे भीतर में वो त्याग और वैराग्य आ गया था किंतु संघ बद्ध होना और संघ बद्ध तरीके से ठाकुर के नाम का प्रचार करना ठाकुर की जो अनुपम अमृतवाणी है उसका यह जो संदेश है वह घर-घर पहुंचाना यह हमारा संकल्प उसी दिन रात को आठुर में दृढ़ हुआ और ऐसा जब कहेंगे तब फिर एक दूसरा भी इसमें से थ्रेड आता है कि जैसे नरेंद्र ने कहा था उस दिन को कि जीसस का अपूर्व जन्म और अपूर्व रिसरेक्शन तो इसका ठाकुर के जीवन में किस तरह से पैरेलल तो जीसस का जन्म की कहानी तो पता है कि बेथलेहम में यह लोग गए थे वहां पर रहने की जगह नहीं थी किसी होटल वगैरह में तो फिर इन लोगों को मेरी और जोसेफ को जहां पे यह पशु रखे जाते हैं वहां पे पशुशाला में रहने के लिए उनको जगह दी गई जिस का मिडनाइट को जन्म हुआ तो फिर उसको कहां पर रखेंगे तो वह जो एक पत्थर का एक जो होता है व कुंडी जैसा जिसमें पानी भरा ता है और उसमें से यह घोड़ा है गाय है वह सब पानी पिएंगे तो उसमें कंबल से लपेट करके मदर मेरी ने जीसस को रखा था यानी कि इ हंबल बर्थ जीसस का तो सिमिलरली अपने ठाकुर का जन्म भी तो हमको पता है खुदीराम और ये चंद्रा मणि देवी का शिव का संसार शिव के संसार में ठाकुर का जन्म हुआ था फिर उसमें भी खुदीराम का आप देखिए कि त्याग वैराग्य और फिर यह सत्य निष्ठा या तो फिर आचार निष्ठा ऐसी थी कि हर किसी के हाथ का वो भिक्षा भी ग्रहण नहीं करेंगे तो वैसे भी घर में खाने को ज्यादा कुछ नहीं था और सभी की हाथ की भिक्षा भी नहीं ग्रहण करना यानी कि सत्य और निष्ठा पर आधारित इन लोगों का जीवन था और यह हो गया जन्म के बारे में और रिसरेक्शन के साथ में यदि पैरेलल ड्रॉ करें तो हमको पता है कि ठाकुर की महासमाधि के बाद में तीन दर्शन उन्होंने दिए थे सबसे पहला दर्शन तो मां शारदा देवी को जिस क्षण ठाकुर का ठाकुर की महासमाधि हुई मां शारदा देवी दौड़ कर के वहां पर आई ठाकुर के कमरे में और यह कहक रोने लगी कि मां काली तुम मुझे छोड़ के क्यों चली गई हो इसके बाद में मां जब अपने कमरे में गई तो जैसे विधवाओं का होता है उस समय की जो प्रथा थी कि गहे नहीं पहने हैं वस्त्र जो है वो भी बड़े ही सिंपल पहनने हैं और फिर ये खाना वगैरह भी बड़ा ही सामान्य होना चाहिए तो मां जब अपने गहने निकाल रही थी उसी समय ठाकुर ने जो सर्वप्रथम दर्शन दिया महासमाधि के बाद में तो मां शारदा देवी को उसी दिन दर्शन देकर के उनका हाथ पकड़ कर के कहा कि आमी गेची को था य य रूम थे कि वही रूम ताई तो माने मैं कहां गया हूं इस कमरे में से दूसरे कमरे में ऐसा ही तो है पहले ठाकुर स्थूल देह में थे अभी ठाकुर भक्तों के हृदय में विराजमान है सूक्ष्म देह से तो मैं गया कहां हूं तो फिर मां शारदा देवी ने फिर अपने गहने नहीं निकाले माने बाकी सब गहने निकाल दिए किंतु वो चूड़िया एक पहन के रखी देखिए मां शारदा के साथ में कैसी ट्रेजेडी पहले तो वो सब भक्त लोग कंप्लेन करके मां को कहते हैं जब ठाकुर दक्षिणेश्वर में थे उस समय कि ठाकुर है त्यागियो के राजा और मां ये सब गहने पहनती है नथ पहनती है चूड़ियां पहन पहनती है क्याक सब पहनती है यह क्या शोभा देता है क्या तो उनकी बात सुन कर के मां ने आधे गहने पहले ही निकाल दिए और फिर जब ठाकुर की महासमाधि हुई तो दो चूड़ियों को छोड़ कर के बाकी सब गहने भी मां ने निकाल दिए और उसके बाद के दिन तो विधवा को तो सफेद वस्त्र पहनने हैं तो बलराम बाबू ने इस तरह का सफेद वस्त्र लाकर के अपनी गोलाब मां के हाथ में देकर के कहा कि जाओ मां को यह दे दो तो गलाप मां ये वस्त्र को हाथ में लेकर के ही चिल्लाओ उठी अरे बाप रे मां को यह सफेद वस्त्र कौन देने को जाएगा विधवा का वस्त्र मां को कौन देगा किंतु अभी जैसे समाज की प्रथा है अभी आप क्या करेंगे गोलाप मा गई बड़े ही दुखित हृदय से मां को यह सफेद वस्त्र देने के लिए बाय दैट टाइम किंतु उन्होंने देखा कि मां ने क्या किया था कि अभी ये जो वस्त्र है उसकी ये जो लाल किनारी होती है जो मां ने पहनी थी तो लाल किनारी वाला वस् पाड़ बोलते हैं बांगला में तो उसको फाड़ करके वो लाल किनारी जो थी उसको काट करके एकदम पतली लाल किनारी कर दी थी और वो मां ने अपने हाथों से ऐसा करके उसको पहन के रखा था यह वही साड़ी है जो कि हमको मां का जो फोटो है उसमें दिखाई देता है वैसे सफेद साड़ी है सफेद वस्त्र है किंतु उसमें लाल पतली किनारी है तो मोटी लाल किनारी की जगह एकदम पतली काट करके मां ने कर दी थी तो ये तो था पहला दृश्य ठाकुर का विजन दूसरा विजन नरेण को मिला था नरेण जब उसी दिन रात उस महासमाधि के दो-तीन दिन के बाद में काशीपुर में टहल रहा था अभी क्या है कि लीस एक महीने तक की थी ठाकुर की महासमाधि हुई 16 अगत को तो लीज थी अभी तो 30 तारीख तक की तब तक ये लोग वहां पर रह रहे थे तो अभी रह रहे हैं तो वहां पर वह ठाकुर के बारे में ही बात करेंगे और तो कोई सब्जेक्ट ही नहीं है तो नरेण और हरीश वही पागल हरीश जो कि बाद में जयराम कामर पुकुर जाकर के मां को तंग किया करता था वही हरीश ये दोनों उस समय उसका दिमाग ठिकाने था तो वो दोनों बात कर रहे हैं और वहां प जो गार्डन में जो रास्ता है उसके ऊपर में टहल रहे हैं एकाएक नरे ने देखा कि दरवाजे के दरवाजे से गेट जो है वो गार्डन हाउस का वो गेट से कोई एक मने एक प्रकाशित देह वहां से प्रवेश हुआ अभी यह प्रकाशित देह देख कर के नरेंद्र तो सोच रहा है कि अरे यह मुझे क्या दिख रहा है अभी ठाकुर को जैसे दर्शन दिखते थे तो नरेंद्र कैसा कहता था कि आपके मन का भ्रम है लुसने है अभी नरें सोचता है कि क्या ठाकुर के जाने के बाद में अभी मुझे भी क्या भ्रम होने लगा ठाकुर ने कहा था स्पर्श करके मेरी सब शक्ति तुमको दे दी है तो ये सब शक्ति दे दी तो साथ में ये भ्रम भी दे दिया क्या मुझे ये भ्रम क्यों हो रहा है कि इस तरह से एक प्रकाशमान देह मेरी ओर आ रहा है रास्ते पर चलते चलते तो नरन उस समय कुछ बोला नहीं सोचा कि देखते हैं क्या होता है कि मेरा मन का भ्रम किस तरह से वर्कआउट होता है उसी उसी क्षण ये हरिश जो था साथ में वो चिल्ला उठा अरे ये कौन आ रहा है सामने से उस समय नरेंद को लगा कि नहीं ये मेरे मन का भ्रम नहीं सही सही ऐसा कुछ हो रहा है तो नरेंद वेट कर रहा है कि कौन आ रहा है यह प्रकाशमान देह लेकर के किंतु जैसे ही यह देह पास में आया यह आकृति पास में आई वैसे ही वो हवा में पिघल गई तो नरेण एकदम फिर चिल्लाने लगा अरे कौन है यहां पे कौन है क्योंकि मन में पता है कि कौन है किंतु अभी ये जो रेशनल जो एक माइंड है वेस्टर्नाइज्ड लॉजिकल माइंड वो भी तो एक उत्तर चाहता है जैसे नरेंद्र चिल्लाने लगा सभी लोग दौड़ के आ गए सभी के मन में था कि ठाकुर को कुछ ना कुछ तो चमत्कार करेंगे जीसस के जाने के बाद में रिसरेक्शन की कहानी कैसी है कि जीसस को क्रूसिफिकेशन पल था उसने यह पनटियस पायलेट जो वहां का गवर्नर था उसको रिक्वेस्ट किया कि आप जीसस के देह को हमको दे दीजिए हम उनको दफनाए गे विधि पूर्वक तो पनटियस पायलट ने कहा अच्छा ठीक है ले जाओ तो उनको एक कबर में उनको रखा था उनके देह को और फिर कबर को बड़े पत्थर से बंद कर दिया था जिससे कि कोई वह देह को चोरी ना कर ले और फिर वहां पर दो-तीन सैनिक भी रखे थे अभी तीन दिन के बाद में मेरी मैगडेलीन वहां पर गई उसने सोचा कि जीसस के देह को एनोएंट करेंगी एनोएंट अर्थात ये जो पवित्र तेल वगैरह होता है वो उनके देह पर लेपन करेगी वो जो जो भी उन लोगों की विधि होती है जीव लोगों की उस समय की उसके अनुसार जा कर के देखा तो कबर खुली है और जीसस का शरीर वहां पर नहीं है तो बड़ी आश्चर्य चकित हो गई क्या चोर लोग ले गए क्या क्या हुआ जीसस का किंतु फिर जीसस ने वहां पर उनको दर्शन दिया आकर के कि देखो आई आई हैव बीन रिसरेक्टेड मैं फिर से खड़ा हुआ हूं च कबर में से और ये गुड न्यूज ये गोस्पेल तुम जाकर के बाकी सब डिसाइल को दो सो दिस वाज द स्टोरी ऑफ जीसस तो सबको पता है उस समय तो क्रिश्चियनिटी का काफी फैला हुआ था स्कूल कॉलेज में पढ़ने को उनको आता था तो वो लोग एक्सपेक्ट कर रहे थे कुछ ना कुछ तो मिरेकल होना चाहिए अदर वाइज ठाकुर ठाकुर किस काम के अभी ये जैसे नरेंद्र ने चिल्लाना शुरू किया सभी लोग दौड़ते दौड़ते आए क्या हुआ क्या हुआ और वो बत्ती जला कर के चारों ओर देख रहे हैं नरेंद्र ने कहा देखिए यहां पे जो ये झाड़ी वगैरह है ना यहीं पे जाकर के वो आकार अदृश्य हो गया था तो गाड़ी जो है उसमें वो प्रकाश डाल के देखा कुछ नहीं था वो कैसे मिलेगा कुछ किंतु गंभीरानंद जी महाराज जिन्होंने स्वामी विवेकानंद की बायोग्राफी लिखी है युग नायक विवेकानंद उसमें और यह जो विरजानंद जी ने जो कंपाइल किया है लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद बाय ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डिसाइल उसमें उल्लेख है कि इस घटना का नरेंद के ऊपर में बड़ा ही गहरा असर हुआ यह जो ठाकुर के जाने के बाद में एक जो कसम कश थी कि क्या करें क्या ना करें घर चले जाए घर का भी तो एक ड्यूटी है ठाकुर ने मन से सन्यास देक के गए हैं और यह भी कहा है सबको इकट्ठा रहना है किंतु फिर व्हाट इज द फ्यूचर ऑफ लिविंग टुगेदर यह भी तो एक होना चाहिए तो यह जो चल रहा था नरेंद्र के मन में द्वंद उसी समय जैसे कि मिट गया इस दर्शन से और पक्का एक हो गया निश्चय कि साथ में रहना है किंतु साथ में रहेंगे तो रहेंगे कहां पे वह लीस्ट तो खत्म हो जा रही है काशीपुर गार्डन हाउस की 30 तारीख को तो उसके बाद में कहां पे जाएंगे तो यहां पे ठाकुर सब चक्र घटना चक्र ठाकुर ही चला रहे है वो सुरेश मित्र को जाकर के दर्शन दिया कि अरे देखो मेरे लड़के मेरे संतान इधर-उधर घूम रहे हैं तो तुम उसके लिए कुछ करो उन लोगों के लिए तो सुरेश मित्र दूसरे ही दिन दौड़ा दौड़ा स्वामी जी के पास जाता है कहता है कि देखिए मैं तो काशीपुर का खर्चा तो मैं ही देता था तो वहां प जितना खर्चा मैं देता था उतना ही मैं आप लोगों को दूंगा तुम लोग इकट्ठा होकर के कहीं पे एक साथ में रहो तुम लोग ठाकुर का नाम साधन भजन करोगे और हम लोग भी पापी तापी जग संसार के बीच-बीच में शांतोना पाने के लिए वहां पर आएंगे तो बोलक के वराह नगर मठ की शुरुआत

Varahnagar math

हुई ज इंटरेस्टिंग पैरेलल जीसस ने सदेव जैसे कि रेजर क्शन हुआ और अपने यहां पे है

Monks in Varahnagar math

कि बिकॉज कि वी बिलीव बिलीव क्या वी आर द फॉलोअर्स ऑफ अद्वैत वेदांत हम लोग यह नहीं कहते कि आपको देह की जरूरत है जीने के लिए आप सूक्ष्म शरीर में भी जी सकते हैं और देह तो आएगा जा आगा सूक्ष्म शरीर से आप युग युगांतर तक रह सकते हैं जब तक आपके कर्म के फेरे नहीं समाप्त होते तब तक आप देह धारण करते रहेंगे और ठाकुर के केस में है कि उनको कर्म की वजह से कर्म को वर्क आउट करने के लिए देह धारण नहीं करना है जगत कल्याण के लिए वह देह धारण करते हैं तो दैट इज कि ये हमारी दोनों की जो फिलोसोफी में ये डिफरेंस है स्वामी जी यह जो सब मृत्यु के रिलेटेड जो आइडियाज है उसका सुंदर एनालिसिस दो-तीन जगह पर करते हैं कहते हैं कि एक तो हार्डकोर मटेरियल िक आइडिया जो कि इजिप्शियंस का था जब फेरो का डेथ होता था फेरो अर्थात कि इजिप्त के राजा तो उनका डेथ होता था तब उनके पूरे देह को इस तरह से वो ममीफाइड करके पिरामिड में रखा जाता था यह अपेक्षा के साथ में कि जजमेंट डे जब आएगा या तो फिर अदर वर्ल्ड में जब जाएंगे तो यही उनका शरीर फिर से जीवंत होगा फिर राजा के साथ में जितनी रा है जितने उनके सेवक है उनको हत्या करके उनको भी ममीफाई करके वहां पर रखा जाता था उस मकबरे में जिससे कि क्या होगा कि वे लोग भी फिर से जीवित होंगे और इस जगत में जिस तरह से फेरो की सेवा करते थे वह अधर वर्ल्ड में भी इस तरह से सेवा करेंगे और फिर एक बोट रखते थे कि वह जो नदी है जो अदर वर्ल्ड में ले जाती है उसको क्रॉस करने के लिए तो दैट इज अ हार्डकोर मटेरियल िक आइडिया उसके बाद में क्रिश्चियनिटी है क्रि टी और फिर उसके बाद में जो हाईएस्ट आता है अपना वेदांत तो यह रिगार्डिंग टू डेथ किस तरह से पूरा एक स्पेक्ट्रम है फिलोसोफी का रिगार्डिंग टू डेथ रिगार्डिंग टू स्पिरिचुअलिटी हार्डकोर मटेरियल से स्टार्ट करके प्योर स्पिरिचुअल प्योर स्पिरिट तक जो कि अद्वैत वेदांत है तो यह एक पैरेलल बिटवीन द लाइफ ऑफ जीसस एंड राम कृष्ण अच्छा हम लोग कथामृत का पाठ कर रहे

Kathamrita

थे और और अभी कथामृत में यह जो चैप्टर है केशव सेन के साथ में नौका विहार उसमें जो ठाकुर उपदेश दे रहे थे वो उपदेश पर्व अभी यहां पर ऑलमोस्ट समाप्त होने को आया है एक गीत और एक पैराग्राफ उपदेश बस इतना ही बचा है इसके बाद में नौका फिर कलकत्ता जाती है कलकत्ता में ठाकुर उतर जाते हैं फिर वहां से गाड़ी में बैठ कर के दक्षिणेश्वर आते हैं उसमें भी प्रसंग बड़े सुंदर-सुंदर है उसका भी हम पाठ करेंगे किंतु उपदेश पर्व है व यहां पर समाप्त होता है ठाकुर क्या कह देखिए बैकग्राउंड क्या था कि ठाकुर तो सत और असत विचार को विवेक कहते हैं और कहते हैं ईश्वर ही सत है नित्य वस्तु और बाकी सब है असत अनित्य दो दिन के लिए यह जब हमको समझ में आएगा और ईश्वर पर अनुराग होगा उनके ऊपर में एक आकर्षण प्रेम बढ़ेगा तब हमारा आध्यात्मिक जीवन शुरू होगा गोपियों की कृष्ण के ऊपर में जिस तरह का आकर्षण था इस तरह का आकर्षण हमको अपने जीवन में लाना है और यह सब उपदेश की शुरुआत भी कैसे हुई एक ब्रह्म भक्त ने प्रश्न किया था कि महाशय क्या संसार में रह कर के भी ईश्वर लाभ हो सकता है कि नहीं तो उस प्रश्न के उत्तर में ठाकुर ने यह सब बातें कही थी तो यह बातों का आखिरी समाप्ति अभी यहां पर ठाकुर करते हैं क्या कहते हैं एकटा गान सुनो एक गीत सुनो बंशी बाजी लो ओई बपी ने बपिन अर्थात की वो वन वृंदावन का जिसमें की वहां पर बंसी बजी आमार तो ना गलेनो श्याम पथे दाए अछ जैसे ही श्याम ने काना कृष्णा ने बंसी बजाना शुरू किया गोपियों के हृदय में वही आकर्षण प्रस्फुटित हुआ बंसी की आवाज सुनकर के मंत्र मुग्धा की तरह वे लोग वहां पर जाएगी तो कहती है कि हमको तो वहां पर नहीं जाने से नहीं होगा और फिर श्याम वहां पर रास्ते में खड़े हैं तोरा जाबी की ना जाबी बोलोगो तुम लोग जाओगी कि ना जाओगी बताओ तो देर श्याम कथारू लोगों का श्याम है वो बातों की बातें हैं कि हां चलो भगवान कृष्णा है यह वो और हमारा श्याम जो है वो अंतर की व्यथा है अर्थात कि अंतर का प्राण का आकर्षण है यह मां शारदा देवी और ठाकुर का किस तरह का वो गंभीरानंद जी महाराज ने चैप्टर का नाम दिया है प्राण टान अर्थात कि अंतर का आकर्षण यही वही एगजैक्टली नाम जैसे कि यहां पर ठाकुर इस गीत में गाते हैं अमार श्याम अंतरेर यथा हमारा श्याम है अंतर की व्यथा अर्थात की अंतर का आकर्षण तो देर बाजे बांसी कानेरकर बाजे हृदय माझ तुम लोगों का है किं जब ठाकुर श्री कृष्ण बजाएंगे तो आप आपको कान से सुनाई देगी किंतु मुझे तो बंसी हृदय में सुनाई देती है श्यामर बाशी बाजे बेरो राई तो मा बिना कुंजर शोभा नाई श्याम की बंसी बांसुरी बज रही है राई अर्थात की राधा रानी अभी आप भी घर से आइए तो मा बिने कुंजर शोभा नाई तुम्हारे बिना कुंज अर्थात की ये निकुंज वन उसकी शोभा नहीं है तो देखिए कि ठाकुर ने यह जो पूरी बात प्रारंभ की थी कि आपको संसार में ईश्वर लाभ होने वाला है कि नहीं उसका अंत इस तरह से सर्वोच्च गोपी प्रेम के गीत से ठाकुर ने किया है ठाकुर अश्रुपूर्ण नयने ही गान गायते गायते केश बादी भक्तो देर बोलेन

Keshav sen and brahmo devotees

ठाकुर अश्रुपूर्ण नयनों से यही गान गाते गाते केशव वगैरह भक्तों को कहते हैं राधा कृष्ण मानो और नहीं मानो राधा कृष्ण को स्वीकारो या तो ना स्वीकारो टान टक ना यह जो आकर्षण है राधा और कृष्ण का गोपियों का श्री कृष्ण के प्रति वो आकर्षण लो इस आकर्षण को अपने जीवन में उतारो भगवान जुन्न की से रूप व्याकुलता होए चेष्टा करो भगवान के लिए ईश्वर के लिए किस तरह से अपने अंतर मन हृदय में इस तरह की व्याकुलता होती है उसके लिए प्रयास करो व्याकुलता थाक ली ताकि लाभ करा जाए व्याकुलता आने से ही उनको प्राप्त कर सकते हैं जैसे कि ठाकुर ने कहा था ना कि एक संतान की मां के ऊपर में आकर्षण या प्रेम सती का अपने पति के ऊपर में प्रेम और यह जो उप पत्नी होती है उसका अपने प्रेमी के साथ में प्रेम ये सभी तरह के प्रेम इकट्ठा होंगे अपने हृदय में तब कहीं जाकर के ईश्वर प्रेम का सही आस्वाद हमको मिलना शुरू होगा तो यहां पे भी देखिए अ ठाकुर को जब हम पढ़ते हैं और बाकी रिसेंट जो धर्म गुरु है या तो जो बाकी सब है उनको पढ़ते हैं उसमें एक चीज जो हमको सबसे बड़ा डिफरेंस दिखाई देता है अ वह है ठाकुर भाव वेदांत में आप बाकी सब फिलोसोफी जितना भी डिस्कस कर लीजिए कि जगत की रचना कैसे हुई पंची करण कैसे हुआ फिर यह किस तरह से आप त्याग वैराग्य के रास्ते से ईश्वर या तो फिर आत्मज्ञान प्राप्त करेंगे यह वेदांत है या तो फिर आज के जो मॉडर्न मॉडर्नाइज स्पिरिचुअलिटी है उन सब में देखेंगे कि कुंडलिनी क्या है यह चक्र क्या है यह फिर यह यही सब बातें योग क्या है इवन हम लोग राज योग का इतना डिस्कशन किया राज योग भक्ति भक्ति योग तो नहीं किंतु यह ज्ञान योग जो हमने कॉस्मो मैक्रो कजम माइक्रो कजम में देखा सब कुछ हमने देखा बाहर में भी इतना सब चलता है किंतु ठाकुर को जब हम पढ़ेंगे तो एक चीज जो सर्वोपरि हमको दिखाई देती है वह है यह प्रेम यह है भाव अंतर का आकर्षण ठाकुर हमको बाकी सब चीजें कहते हैं शट चक्र भेद के बारे में भी बताते हैं कुंडलिनी के बारे में भी बताते हैं यह ब्रह्मा और शति एक है जिसको तुम स्थिर है तो ब्रह्म है चलित है तो शक्ति है यह सब बातें ठाकुर करते हैं किंतु कथामृत बार-बार जब पढ़ेंगे तो उसमें से जो एक उपदेश ऐसा है जो एक सेंट्रल थीम ऐसी है जो कि सबसे ज्यादा हमको दिखाई देती है हमारे पर सबसे ज्यादा असर करती है वह है यह भाव यह भाव ही कथामृत का प्राण है बाकी जितने भी तंत्र की भी यहां पे बातें हैं पौराणिक बहुत सारी कहानियां है फिर यह वेदांत की भी चर्चा है फिर यह ब्राह्मण भक्त आते हैं वोह पूछते हैं कि महात्मा है कि नहीं संसार में ईश्वर लाभ होगा कि नहीं बहुत कुछ कथामृत में है किंतु सबका सारांश ठाकुर जब उत्तर देंगे प्रश्नों का या कोई भी फिलोसोफी समझाएंगे उन सबका सारांश उन सबका जो एसेंस है वो एसेंस एक ही शब्द में हम व्यक्त कर सकते हैं और वो है भाव यह भाव ही है ठाकुर को इसीलिए भाव राज्य का राजा कहा जाता है ठाकुर के भीतर में यह भाव इस तरह से प्रस्फुटित होता था अभी जैसे यह बालक भाव है वो एक कमरे में अपने कमरे में बैठे हैं दक्षिणेश्वर में और एक बड़ा सा बास्केट उनके सामने रख दिया गया है कोई डिवटी आकर लाया होगा और फिर बास्केट में जलेबी है भरी हुई और उसमें से ठाकुर बच्चे की तरह हंसी मजाक करते करते एक एक जलेबी रहे हैं उसी समय कमरे में एक 5 साल के लड़के का आगमन हुआ तो उसको देख कर के ठाकुर का बालक भाव इस तरह से उत्थ हो उठा कि उन्होंने बालक भाव के आवेश में आकर के वो जो बास्केट था जलेबी का अपने पीछे में छुपा दिया जिसे छोटा बच्चा होता है ना उसको आप यदि स्वीट देते हैं कोई मिठाई देते हैं तो सोचता है मैं अकेला खा लूंगा अपने भाई बहन या मित्रों के साथ में शेयर नहीं करूंगा अभी ऐसा नहीं है कि बच्चे के भीतर में वो लालच है या ग्रीड है या लोलुपता है नहीं बच्चे का स्वभाव ही है इस तरह से सहज सरल ठाकुर कहते हैं ना बच्चा कभी बोलेगा कि नहीं यह तो मेरी चीज है यह धोती पिताजी ने दे दी तो कोई आकर के कहेगा अरे ये धोती मुझे दो बड़ा सुंदर वस्त्र पहन के तुम घूम रहे हो तो बच्चा उसको पकड़ के कहेगा नहीं नहीं मेरे पिताजी ने दी है मैं क्यों आपको दूं और फिर पता नहीं कोई रैंडम कोई स्ट्रेंजर कोई आएगा और उसको भी धोती दे करर के चला जाएगा ये अपना क्या दूसरों का क्या ये सब उसके भीतर में है ही नहीं निर्मल स्वच्छ हृदय ये बालक होता है तो यहां पर भी ठाकुर के मन में वही बालक भाव का उदय हुआ और वो बास्केट जो है अपने पीछे में छुपा दी जिससे कि ये लड़के के साथ में शेयर ना करनी पड़े तो उस समय उनके चेहरे पर जो बालक भाव जिस तरह से परिस्ता उसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते और यह गोपी भाव जब ये राधा भाव में गोपी भाव में मधुर भाव की साधना करते थे उस समय वो जान बाजार में मथुर बाबू के निवास में रहते थे और उनके घर की जो स्त्रियां है

Mathur babu

उनको भी ये लोग ठाकुर को इस तरह से अपने पास में रखते थे जैसे कि वो भी एक स्त्री

Mathur's Jan bazar home

ही है और उन्हीं के तरह है मथुर बाबू की पुत्री का विवाह हुआ तो उसकी सखियां जैसे होती है ना जब किसी लड़की का विवाह होता है तो पहली बार जब पति के पास में जाती है तो उसकी सखियां उसको अच्छे से सजा करके उसको पति के पास में ले जाती है और और फिर जिस तरह से हंसी मजाक चलती है वहां पर एक पूरा एक माहौल खड़ा होता है तो मथुर बाबू की पुत्री का विवाह हुआ और ठाकुर बिल्कुल स्त्री वेश में सज्ज होकर के उसकी सखी की तरह उसको अपने पति के पास में ले गए और उसी तरह की सलाह भी देते हैं जो नववधू को जिस तरह की सलाह देनी चाहिए ऐसा लगा कि जैसे कि पूरे वो एक स्त्री ही हो गए हैं एक दिन की घटना है कि मथुर बाबू हृदय को ले गए अंतपुर में जहां पर वह पूजा हो रही

Hriday

थी और कहा कि देखो कि वहां पर एक स्त्री बड़ी सुंदर दिखती हुई स्त्री व ईश्वर वो जो भगवान की मूर्ति है उसको चामर दुला रही थी तो अभी मथुर बाबू कहते हैं हृदय को बताओ तुम्हारे मामा कौन है अभी हृदय ने तो ठाकुर की इतनी सेवा की है ठाकुर को सभी परिस्थिति में देखा है किंतु जब मथुर बाबू यह कहते हैं पहचानो कौन है तुम्हारे मामा कौन है ठाकुर हृदय पहचान नहीं पाया बाद में पता चला जो बड़ी सुंदर स्त्री थी जो चामर दुला रही थी वही थे ठाकुर तो ठाकुर जब जिस भाव में आते थे उस भाव को जैसे कि उनका देह मन सब रूप से जैसे कि उसके अनुसार डल जाता था अभी जैसे कि ठाकुर एक बार वो ये होते हैं ना यात्रा करने वाले उन लोगों का एक दल दक्षिणेश्वर में आया और

Dakshineswar Kali Temple

यात्रा अर्थात कि उस समय के नाटक तो नाटक वालों का एक दल वहां पे आया और उस समय ऐसा था कि स्त्रियां इस तरह के नाटक के दल में पार्टिसिपेट नहीं करती थी अभी स्टार थिएटर वगैरह जहां पे रेसिडेंशियल व्यवस्था है वो एक चीज है किंतु यह जो गांव-गांव शहर शहर घूमने वाले यात्रा के दल है उसमें तो स्त्रियों का जाना मुश्किल था तो यात्रा के दल में स्त्रियों का अभिनय भी पुरुष लोग ही करेंगे तो इस तरह का यात्रा का दल आया तो ठाकुर ने उन लोगों को स्त्री किस तरह से उनकी एक किस तरह बिहेवियर होता है किस तरह से विभिन्न कार्य करती है वह सब अभिनय करके करके दिखाने लगे तो सब लोग हंस हस करके एकदम यह हो गए कहा कि अरे आपको स्त्रियों का यह अभिनय हालचाल यह सब किस तरह से आपको इतना एक्युरेटली पता है तो देखिए कि ठाकुर का ऐसा था किय भाव राज्य के वो राजा थे मधुर भाव शांत भाव दास भाव बालक भाव ये जितने भी भाव है सभी भाव जैसे कि उनमें थे जब जिस भाव की साधना करेंगे उसमें अपने को एकाकार कर देंगे शरीर और मन को ढाल देंगे यदि ठाकुर का जीवन और उपदेश हम अच्छे से पढ़े और एक जद चीज हमको उसमें से ले जानी है तो वह यह नहीं होगा कि ब्रह्म शक्ति एक और अभेद तो यह उपदेश हो है निश्चय है किंतु दिस आर सेकंडरी उपदेश एक सेंट्रल थीम यदि ठाकुर के जीवन की होगी तो वो है भाव देखिए इंटरेस्टिंग मां को जब यह प्रश्न किया गया केदार बाबू ने जयराम

Ma Sarada

बाटी में कहा था कि ठाकुर ने तो सर्वधर्म की साधना की वही तो ठाकुर का मुख्य उपदेश है तब मां ने कहा कि नहीं त्याग ही ठाकुर का मुख्य उपदेश है अभी देखिए त्याग तो है ही है बिना त्याग के भाव किसी काम का नहीं है क्योंकि स्वामी जी ने खुद ने कहा था कि अपने जीवन में त्याग दृढ़ तर ना हो और यदि आप भाव साधना करने का प्रयास करें तो वहां इसके बाद में ही महा भयानक पतन अपने नजर के सामने है तो यह बात हमको ख्याल में रखनी है कि यह भाव साधना जो भी ठाकुर ने की वो त्याग की दृढ़ भूमि के ऊपर में उन्होंने यह भाव का महल बनाया था अर्थात कि यदि अभी हम यह दोनों बातों को रिकन साइल करें तो त्याग और भाव यह दोनों एक एक सिक्के की दो पहलुओं की तरह है या तो फिर कहेंगे कि त्याग फाउंडेशन है और उसके ऊपर में भाव रूपी महल ठाकुर ने बनाया है और भाव के ऊपर में यदि सेकंड स्टोरी होगी तो वो है अद्वैत वेदांत अर्थात कि जयदिश को एनालाइज करें तो तीन लेयर हमको देखने को मिलते हैं ग्राउंड फ्लोर या तो फाउंडेशन है त्याग उसके ऊपर में फर्स्ट फ्लोर ए बाव और सेकंड फ्लोर है ये पिरामिड की जो टोच कही जाएगी पिरामिड का पिनेकल या तो फिर ये कैलाश पर्वत तो वो है अद्वैत वेदांत तो यह है ठाकुर का जीवन समस्त उपदेश समस्त और यदि यह भाव का एक अंश भी हम अपने जीवन में यह कर पाए कि तो हमारा जीवन जो है आध्यात्मिक जीवन बहुत ही आसानी से चलना शुरू हो जाएगा बहुत सारे भक्त इस तरह से प्रैक्टिस करते हैं भाव साधना करते हैं किंतु वही है कि कोई इसके बारे में प्रकाश रूप से डिस्कस नहीं करेगा तो हमको यह रास्ता जो है अपने से ही चुनना है हमको ही इसके ऊपर आगे बढ़ना है अच्छा तो यहां पर ठाकुर के उपदेश का अंत हुआ अभी और भी बहुत सारे प्रसंग है हम देखते हैं भाटा पड़िया छ अर्थात कि यह जो पानी भरती और ओट आती है तो अभी ओट आना शुरू हो गई है गंगा में आगने पोत कलकाता भीमुदु गति ते चोलते छ यह जो आग्नेय पोत अर्थात की ये आग बोट है यह जो शिप जिसमें यह केशव आया था वह कलकाता की ओर बिल्कुल ही द्रुत गति त बड़ा स्पीडली वहां पर जा रहा है ताई पोल पार होया कंपानी बागानी दिख आरो खानि बेड़ाया आशीते कापन के हुकुम हैया छ अभी इतना जल्दी जद कलकाता चले जाएंगे तो होगा नहीं ठाकुर के जो उपदेश है और भी हमको सुनना है तो फिर कैप्टन जो कैप्टन था वह शिप का उसको हुकम हुआ कि कंपनी का बागान कंपनी अर्थात की ईस्ट इंडिया कंपनी उसका एक गार्डन होगा वहां पर तो उसकी ओर थोड़ा सा घूम कर के आते हैं तो ठाकुर का श्रीर संग लाभ करने का पूत उनका जो यह है संग लाभ करने का और भी मौका मिले कतो दूर जहाज गया छलो अनेकेरे ज्ञान बहुत लोगों को तो यह खुशी नहीं है कि जहाज कहां गया था कहां तक गया था कितना दूर गया था तरा मग्न होया श्री राम कृष्ण कथा सुनते छ वे लोग मग्न होकर के बिल्कुल जगत को भूल कर के श्री राम कृष्ण देव की अमृतवाणी सुन रहे थे कौन दिख दिया समय जाते छे होश नाई किस ओर समय जा रहा है कोई भी होश नहीं है एक बार मुड़ी नारी केल खावा होते अभी यह मुड़ी और िकल अर्थात की मुड़ी यानी कि हिंदी में कहते हैं मुरमुरा गुजराती में कहते हैं मम और वो और नारियल यह दोनों नारियल का यह जो होता है वो ये उसको क्रश करके जो करते हैं यह खाने को दिया गया है शकल किछु किछु कोच लेले खाते छ सबने कोच अर्थात की ये जो वस्त्र जो पहना होता है ना कुर्ता वगैरह उसके एक किनारे में उसको ले लिया और खा र है जैसे कि वो ठकर की कहानी है ना वो अपने वस्त्र में वो जो मुड़ी लेकर के खाते-खाते वो जा रहे थे कामर कुकुर में बच्चे थे उस समय एकाएक देखा कि आकाश में वह जो सफेद कलर के जो स्वान है वो उड़ रहे हैं और काला नील कलर का आकाश है बारिश का समय था तो देख कर के ही ठाकुर को भाव हो गया वह गिर गए और जो कापड़ी ये जो अपने कुर्ते में यह जो मुड़ी वगैरह लिया था वो भी जैसे जमीन पर बिखर गया तो यहां पे भी ये लोग अपने कपड़े में ऐसा कुछ कुछ लेकर के खा रहे हैं आनंदर हाट आनंद का बाजार बैठा हुआ है केशव मुनीर आयोजन करे एन केशव य मुड़ी का आयोजन करके मुरमुरा का आयोजन करके साथ में आए हैं ही अवसरे ठाकुर देखिले विजय और केशव दई जने संकुचित भावे बसिया इस अवसर पे ठाकुर ने देखा कि विजय कृष्ण गोस्वामी

Vijay Krishna Goswami

और केशव सेन यह दोनों संकुचित भाव से बैठे हुए हैं क्यों बैठे हुए हैं पता है हमको बैक स्टोरी कि केशव ने अपनी कन्या का विवाह दे दिया था ब्राह्मण समाज में नियम था कि मिनिमम एज ऑफ मैरेज कन्या विवाह की एक मिनिमम एज होनी चाहिए उसके बाद में ही उसका विवाह देना चाहिए बोलकर के यह जो सोशल रिफॉर्मेशन यह ब्राह्मण समाज का एक पार्ट था अभी इस भंग इस उस जो नियम है उसका भंग करके यह जो मिनिमम एज से भी जिसकी उम्र कम थी ऐसी लड़ लड़की का विवाह केशव सन ने एक बड़े धनी व्यक्ति के साथ में कर दिया यह धनी लोगों का यह जब यह आता है इनविटेशन कि आपकी लड़की के साथ में विवाह करना है तो फिर यह सोशल कन्वेंशन यह समाज सुधारणा यह सब कहां रहेगी तो य स्वामी जी यह समाज सुधारक को ज्यादा वैल्यू नहीं देते हैं वो इसीलिए कि वह आखिर में तो अपना खुद का स्वार्थ ही देखते हैं भले चाहे यह कहेंगे कि समाज को कहेंगे कि विधवा विवाह करो लड़कियों की बड़ी उमर में शादी दो यह सब किंतु अपना खुद का स्वार्थ आता है तो यह लोग नहीं देखेंगे तो इस घटना के विरुद्ध में केशव विजय कृष्ण गोस्वामी ने केशव सेन का ब्राह्मण समाज छोड़ कर के दूसरा ब्राह्मण समाज गठित किया था और फिर उसके केशव के विरुद्ध में बहुत सारे प्रवचन भी दिए थे तो दोनों के बीच में इस तरह का कटु भाव आ गया था अभी ठाकुर केशव को विजय कृष्ण को लेकर आए है तो केशव उसको कह भी नहीं सकते कि भाई तुम क्यों आए यहां पे तो अभी दोनों है दोनों के बीच में वेर है कटु भाव है कि ठाकुर के साथ में सामने कुछ बोल भी नहीं सकते तो संकुचित होकर के बैठे हुए हैं तखन ठाकुर जनो दुई जन अबोध छेने के भाव करिया दबन इस तरह से जैसे ठाकुर ने देखा कि ये दोनों छोटे-छोटे बच्चे होते हैं ना खेलते खेलते झगड़ा करते हैं फिर मां के पास में जाकर कंप्लेन करते हैं कि मां उसने ऐसा किया तो दूसरा बच्चा कहता है मां नहीं उसने ऐसा किया तो मां फिर कैसे दोनों बच्चों में वो सुलह करवा देती यहां पर भी ठाकुर जैसे दो अबोध बालक अर्थात की जिन लोगों में ज्यादा अकल नहीं है इस तरह के दो बच्चों के बीच में सुलह करवाने की आशय से ठाकुर अभी बात कर रहे हैं सर्व भूत हीते रता मास्टर महाशय लिखते हैं जैसे कि सभी के हित के ऊपर में वह कार्य कर रहे हैं ऐसे ठाकुर श्री रामकृष्ण केशव प्रति ठाकुर केशव को कहते हैं ओगो विजय न अरे यह विजय आया है तो मादर झगड़ा विवाद जेनो शिव और रामेर जुद्ध तुम लोगों का झगड़ा और विवाद है जैसे कि शिव और राम का युद्ध सभी लोग हंसने लगे रामेर गुरु शिव जुद्ध होलो दई जने भावो होलो राम के गुरु है शिव दोनों के बीच में युद्ध भी हुआ और फिर आखिर में सुलह भी हो गई राम के गुरु शिव शिव के गुरु राम युद्ध भी हुआ सुलह भी हो गई किंतु शिवे भूत प्रेत गुलो और रामेर बानर गुलो उदर झगड़ा की कीची आर मिटे ना किंतु शिव के भूत और राम के बंदर इन लोगों का जो झगड़ा और मारामारी है वो जैसे कि पूरा समाप्त नहीं हो रहा है उच्च हस्य सभी लोग बड़े जोर से हंसने लगे क्योंकि बात भी तो ऐसी है ना कि ये ब्राह्मण समाज की ये जो दो लीडर है केशव और यह विजय दोनों ठाकुर के पास में आते थे दोनों ठाकुर के डिवोेडली हमेशा उनको विपरीत दिशा में प्रेरित करता था केशव के दल के लोग केश को कहते थे कि आप ठाकुर के पास जाते हैं तो आप चुपचाप बैठे क्यों रहते हैं ठाकुर इतनी सारी बात करते हैं सामने आप कुछ नहीं बोलते हैं यहां पे टाउन हॉल में विदेश में जाकर के आप रिलीजन के ऊपर में इतने वक्त होता देते हैं इतने लेक्चर देते हैं ठाकुर के सामने आप क्यों नहीं बोलते अनपढ काली का पुजारी है तो केशव माने ऐसा बोलने वाले लोग थे केशव के दल में तो यह क्या है कि ये चमचे लोग जो होते हैं वो अपने लीडर को अपने गुरु को और ज्यादा बढ़ावा देते हैं तो ये दोनों के बीच में जैसे राम और शिव की तरह दोनों के बीच में विजय और केशव के बीच में झगड़ा भी हुआ और सुलह एक तरह से हुई कि ठाकुर के सामने दोनों अपने को उनके भक्त के रूप में पेश आते थे किंतु उनके जो दोनों दल थे उन दोनों दल के बीच में झगड़ा और किच किची जैसे कि मिटता नहीं है आपना लोग तो रूप हुए था के अपने लोग है अपना खुद का आदमी है तो ऐसा होता रहता है लव कुश ज रामेर संगे जुद्ध कोरे छिले लव और कुष ने राम के साथ में युद्ध किया था अबार जानो माए जिए अलाद मंगलवार करे अर्थात की जानते हो मां और पुत्री उसकी लड़की दोनों अल अलग-अलग मंगलवार करते हैं अभी मंगलवार अर्थात की एक व्रत होता है मंगलवार को रखा जाता है किंतु मां अपना अलग से मंगलवार करेगी और उसकी लड़की जो है अलग से करेगी मार मंगल और मेर मंगल जनो दूट अलाद मां का मंगल और लड़की का मंगल जैसे कि अलग है अभी आजकल तो क्या है उस समय इतना यह नहीं था किंतु आजकल आप देखें कि टीनेज अर्थात कि ये 12 13 14 साल की उम्र होती है तो लड़के लड़कियां जो होते हैं अपने पेरेंट्स के सामने एक तरह का विद्रोह करना शुरू कर देते हैं उनका माइंड सेट जैसे कि दूसरी ही डायरेक्शन में जाता है और पिता और माता इतने चिंतित हो जाते हैं अरे ये लड़का या लड़की का क्या होगा ना ही मेरी बात सुन रहा है ना ही पढ़ाई लिखाई कर रहा है पता नहीं क्या करेगा क्या नहीं करेगा ये जो टेंशन आजकल के मां और पिताजी का है टीनेज सन और डॉटर को लेकर के तो देखिए ठाकुर उस समय यह सब बातें कर रहे हैं जैसे कि मां और उसकी लड़की इन दोनों का मंगलवार अलाद अलग व्रत भी करेंगे आजकल तो व्रत करने की बात छोड़ दीजिए उस समय यदि व्रत करते थे तो व्रत भी जैसे कि अलग-अलग करेंगे मां का मंगल और लड़की का मंगल जैसे कि अलग-अलग है ऐसा वो बिहेव करेंगे तमनी तो मादे एक एकटी समाज आ ऐसे ही तुम्हारा और इसका दोनों का अपना अपना समाज है आबार आर एकटी दरकार म तुम्हारा एक समाज है तो उसको भी एक समाज चाहिए शकल रहस्य केशव को कहते हैं कि केशव तुम्हारे पास में एक समाज है तो विजय को भी अपना एक समाज चाहिए तभी य शब चाहि ठाकुर क्या कहते हैं कि किंतु यह सब चाहिए जद बोलो भगवान निज लीला करे छन शेखाने जटिल कुटिल की दरकार जद ईश्वर स्वयं लीला करने को आए हैं वहां पर जटिला और कुटिला की क्या जरूरत है टले कुटिल ना थकले लीला पोटाई होईना चट और कुटिला नहीं होंगी तो फिर यह लीला में रस नहीं आएगा इंग्लिश इसका ट्रांसलेशन मैंने एक बार देखा था द जटिला एंड कुटिला आर देर टू थिकन द प्लॉट ये इंग्लिश में ट्रांसलेशन है अर्थात की यह प्लॉट जो है कहानी का उसको और रसपे लोग आते हैं श कोलेर सब लोग हंस रहे हैं जटिल कुटिल ना थकले रगड़ होए ना उच्च हस्य ज जटिला और कुटिला नहीं होगी तो आनंद नहीं होगा रगड़ अर्थात कि ये हस्य रस कौतुक यह सब नहीं होगा उच्च हास्य सभी लोग जोर-जोर से हसना शुरू कर दिए देखिए ये इंटरेस्टिंग ठाकुर के जीवन में भी देखेंगे यह हाजरा महाशय थे वो इस तरह से जटिला कुटिला का एक कार्य करते थे एक विपरीत मत हमेशा प्रदर्शित करते थे जिससे कि ठाकुर की कभी-कभी नाराज हो जाते थे कभी-कभी चिंता में पड़ जाते थे एक बार यह राखल उनके साथ में बात कर रहा है हाजरा महाशय के साथ में तो ठाकुर कहते हैं कि उसके मन में इस तरह का संदेह प्रकट कर दिया राखल के मन में हजरा ने कि उसका मन कितना नीचे आ गया किंतु ऑन द अदर हैंड देखिए कि वही स्वामी जी है ठाकुर के दूसरे संतान जो कि हजरा के साथ में बड़ी अच्छी फ्रेंडशिप करते हैं क्यों रीजन क्या है हजरा का स्केप्टिकल नेचर है सभी चीजों को वो स्वीकार नहीं कर लेता ठाकुर के कहते हैं कि मुझे दर्शन होते हैं तो जैसे नरेद स्वीकार नहीं करता था प्रूफ क्या है लॉजिक क्या है रीजन क्या है फिलोसोफी क्या है सबके पीछे में एक क्वेश्चनिंग एटीट्यूड था नरेण का तो वैसे ही हजरा का था तो ये हजरा महाशय को कहेंगे कि ठाकुर के जीवन में जटिला कुटिला का वो एक अभिनय करते थे रामानुज विशिष्ट अ द्वेत वादी रामानुज थे विशिष्ट अद्वैतवाद तार गुरु लेन अद्वैतवाद उनके गुरु थे अद्वैतवाद शेषे द जने अमील आखिर में दोनों के बीच में मतभेद हो गया गुरु शिष्य परस्पर मत खंडन करते लाग लो गुरु और शिष्य आपस में एक दूसरे का मत खंडन करने लगे रूप होही था के ऐसा होता ही है जाई हो तबू आपना लोग जो भी है आखिर में तो अपना खुद का आदमी है आखिर में तो यह ईश्वर पथ के ही तो पथिक है आखिर में तो दोनों ही साधक ही तो है तो साधक के बीच में अपने मत को लेकर के फिलोसोफी को लेकर के यदि अमत होता भी है तो भी किंतु साथ-साथ में ही हमको रहना है देखिए जो हिंदू धर्म का यह जो है एटीट्यूड कि आपके साथ में दूसरों के मत का कितना ही यह डिफरेंस ऑफ ओपिनियन आ जाए हम लोग बैठ कर के आर्गुमेंट करके इसके बीच में सुलभ लाएंगे कंपेयर टू बाकी सब रिलीजन और फिलोसोफी है वहां पे जैसे ही डिफरेंट डिफरेंट ओपिनियन स्टार्ट हुए दोनों अलग-अलग दल बनना शुरू हुए साथ-साथ ही रक्तपात जैसे कि शुरू हो गया यह मत खंडन करने की तो बात छोड़ ही दीजिए इसके जो फॉलोअर है वो दूसरे ग्रुप के फॉलोअर्स की जाकर के हत्या करने लगे यह जो वेस्टर्न रिलीजन हिस्ट्री है वो पूरा इस तरह की खूना मर्की से भरा हुआ है जबकि भारत में देखिए मत यदि भिन्न भी होता है यहां तक कि वो फेमस कहानी है बाबूराम महाराज की जगन्नाथ गए देखा कि कृ प्रीचर है व वहां पर जगन्नाथ मंदिर के सामने ही खड़ा रह कर के हिंदू धर्म को गाली दे रहा है और सब हिंदू लोग सुन भी रहे हैं यह सोच करके कि अभी इन लोगों का राज्य है जो चाहे करेंगे जो चाहे बोलेंगे हम कौन होते हैं कुछ करने वाले तो बाबूराम महाराज के मन में एकाएक

Swami Premananda

क्रोध प्रकट हुआ और उन्होंने हरि बोल हरि बोल कर कर के वो उन्होंने ये देना शुरू किया नारा तो साथ-साथ में ही पूरे मंडल में जितने भी वहां पर लोग खड़े थे सब लोग उच्च स्वर से हरि बोल हरि बोल करना शुरू कर दिए तो इससे ये क्रिश्चियन प्रीचर जो था बेचारा वो दुखी होकर के नाराज होकर के वहां से चला गया फिर अगेन वर्ल्ड फेमस घटना रात को बाबूराम महाराज को ठाकुर ने आकर के दर्शन दिए और कहा कि अरे वो भी तो मेरा ही नाम दे रहा था तुमने उसके कार्य में बाधा क्यों दी तो देखिए कि यह है हमारे ठाकुर और ठाकुर के जैसे ही हमारे सभी ऋषि मुनि यदि दूसरों का मत होता है तो तो उस मत को हमको दर्शन के माध्यम से तर्क के माध्यम से उसमें ये डिफरेंस ऑफ ओपिनियन को सॉल्व करना है और यदि डिफरेंस ऑफ ओपिनियन रह भी जाए तो भी क्या है तुम अपने शांति से जिओ हम लोग अपने तरते से जीते हैं जिओ और जिने दो जैसे ये किसी अमेरिका में जब स्वामी जी गए थे तो किसी ने स्वामी जी को कहा कि बुद्ध तो थे कि वृद्धावस्था

Swami Vivekananda

की वजह से मारे थे हमारे जीसस को देखिए कैसे क्रूसिफिकेशन धर्म सक्सेसफुल ज तभी होगा जब पर्सीक्यूशन होता है जब क्रूसिफिकेशन होता है बुद्ध वहां पे हिंदुओं के सामने ही हिंदुओं के देवी देवताओं को ही रिजेक्ट करके एक नया धर्म शुरू करके गए और ना ही बुद्ध का मर्डर हुआ ना ही उनके डिसाइल का मर्डर हुआ यह कौन सा सक्सेसफुल रिलीजन है तो यह उन लोगों का वेस्टर्न थिंकिंग है बिकॉज़ कि ब्लड शेड के माध्यम से खोना मर्की से गुजर करके उनके धर्म ऊपर आए हैं जबकि भारत में है कि कितने ही पंथ अलग अलग हो जाए कितने ही मत अलग-अलग हो जाए आखिर में यदि आप रिकन साइल नहीं कर सकते हैं तो एटलीस्ट साथ-साथ में शांति से रहे झगड़ा वगैरह ज्यादा ना करें इसके रिलेटेड एक इंटरेस्टिंग इंसिडेंट है कि उस समय अखंडानंद जी महाराज गंगाधर महाराज भ्रमण

Swami Akhandananda

कर रहे थे तो भ्रमण करते-करते नदिया के पास में नदिया अर्थात कि चैतन्य महाप्रभु का जन्मस्थान और वहां पर न्याय शस्त्र जो है उसका एक बहुत बड़ा केंद्र तो उसी के आसपास किसी एक गांव में वह पहुंच गए और वहां पर बैठे हैं किसी पेड़ के नीचे में शीतल छाया में विश्राम ले रहे हैं तो अभी ये जो तर्क करने वाले जो लोग होते हैं न्याय का अर्थ ही तर्क करना तो तर्क करने वाले न्याय के कुछ पंडित वहां पे बैठे हुए थे तो अखंडानंद जी महाराज लिखते हैं बसे बोसे जटला कोर छिल जटला अर्थात कि लोक निंदा न कि दूसरों के प्रति कटाक्ष भाव से बातें करना ऐसा य पंडित लोग बैठे-बैठे कर रहे थे अभी अखंडानंद जी को देखा देखा कि साधू के कपड़े पहने हैं और चेहरे पे तेज है तो ये जो जटला करने वाले थे लोक निंदा करने वाले चेहरे से ही दुष्ट दिखने वाले कुछ पंडित आकर के अखंडानंद जी के आसपास में बैठ गए फिर इसमें से प्रश्न किया किसी ने अच्छा महाशय आप बताइए देखिए तर्क किस तरह से चालू करना है लोगों को किस तरह से फंसाना है किस तरह से झगड़ा करना है न्यायशास्त्र में कुछ-कुछ लोग ऐसा करते हैं तो इन लोगों में से एक ने आगे वानी लेकर के अखंडानंद जी को प्रश्न किया अच्छा बताइए तो महाशय यदि शुद्र गुरु है और उसका ब्राह्मण शिष्य है तो ब्राह्मण शुद्र गुरु को प्रणाम करेगा कि नहीं करेगा यानी देखिए ये लोग किस तरह से ट्रेप खड़ा कर रहे हैं ब्राह्मण कैसा भी होगा वो पूजनीय है और शुद्र कैसा भी होगा यदि गुरु भी है तो वह समाज में निम्न कक्षा का उसका स्थान है तो अभी शुद्र गुरु है और ब्राह्मण शिष्य है तो ये ब्राह्मण शिष्य शुद्र गुरु को प्रणाम करेगा कि नहीं करेगा तो अखंडानंद जी बेचारे भोले भाले उनको समझ नहीं आ रहा है कि उसके लिए ट्रेप बना रहे हैं उनके लिए तो उन्होंने बड़े सरल भाव से कह दिया यदि गुरु अभी ठाकुर का है ना वो उपदेश कि हमार गुरु जद सड़ी बायो जाए तब वो हमार गुरु नित्यानंद राय अर्थात कि मेरे गुरु जद शराब की दुकान पर जाकर के मध्य पान भी करते हैं फिर भी मेरे गुरु नित्यानंद राय है तो ठाकुर का यह उपदेश तो अखंडानंद जी ने सरलता पूर्वक कह दिया कि यदि शुद्र गुरु है ब्राह्मण शिष्य है तो ब्राह्मण शिष्य को शुद्र गुरु को प्रणाम करना होगा बस जैसे ही उन्होंने ऐसा कहा व सब पंडित लोग वो जो दुष्ट लोग थे वह बड़े ही खुश हो गए चिल्ला चिल्ला करके कहने लगे अरे आओ आओ आओ देखो देखो शुद्र को प्रणाम करने की बात कर रहा है तो ऐसा करके सब एक पूरा बंदर की तरह एक पूरा एक खड़ा हो गया इकट्ठा हो गया पूरा क्राउड और जोर जोर से चिल्ला चिल्ला करके अखंडानंद जी के साथ में वाद विवाद कर रहा है अखंडानंद जी बेचारे डर गए सोचा कि आज पिटाई होगी क्या आज कैसे भी करके वहां से अपनी जान बचा करके भागे तो ऐसा होता था ऐसा नहीं है कि नहीं होता था थोड़ा बहुत जैसे ठाकुर कहते हैं ना जटिला कुटिला ना रहने से फिर मजा नहीं आता ऐसे वो इनकी बात है दयानंद सरस्वती की दयानंद व उनके सब विचार थे ना रेडिकल आइडियाज काशी में पंडितों की सभा में अपने विचार रजू करने के लिए गए कथामृत में ही इस घटना का वर्णन है फिर पंडित लोगों ने ऐसा उनके सामने इकट्ठा हो करके चिल्लाना शुरू किया कि दयानंद को मारने की ही बात आ गई थी दयानंद को बेचारे को जी जान बचा कर के भागना पड़ा था तो ऐसा भी होता था किंतु देखिए कि कंपेयर टू वेस्ट में जो हुआ है इनक्विजिशन बोलक के एक बड़ा ही डार्क चैप्टर वेस्टर्न रिलीजन में है अभी ये क्रुसेड और इनक्विजिशन यह दो बहुत डार्क चैप्टर है उनके तो इस तरह का तो हमारे यहां कुछ नहीं हुआ है जटिला कुटिला जै से कुछ लोग होंगे झगड़ा टी करेंगे लीला पुष्टा करेंगे रगड़ करेंगे किंतु यही तक इससे आगे ब्लड शेड तक बात बहुत रेर ली गई है तो आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्स श्री राम कृष्णर्पण मस्तु जो अद्वैतवाद अर्थात के ईश्वर मारी

मुझे द्वैत और अद्वैतवाद में फर्क समझ नहीं आ रहा है

अंदर छ अने ईश्वर स्वरूप छ अने धत ले के ईश्वर बहर क्या स्वर्ग मा अने मारे आराधना करवानी आटलो डिफरेंस नाथ वधारे कना त के ईश्वर स्वर्ग मा रछ अने अवत के ईश्वर मारा हृदय मा रहे बस आलो देखिए डाउट जो है और विश्वास जो है वह

ठाकुर सरल विश्वास सिखाते थे, लेकिन नरेन हर बात पर सवाल उठाते थे. क्या इन दोनों में विरोधाभास नहीं है?

दोनों अपेरेंटली अपोजिट है कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु ठाकुर और स्वामी जी की जद बात करें तो हमने देखा ना कि एक सिक्के के दो पार्ट है एक है भाव तो दूसरा है त्याग तो स्वामी जी एट द एंड ऑफ द डे ही एंबोडिड त्याग हजरा और नरेण में क्या डिफरेंस था डाउट दोनों में थे किंतु हजरा के भीतर में त्याग नहीं था उसका वो ऋण था कुछ तो ऋण को चुकाने के लिए वहां पर बैठा रहता था यह नाटक करता रहता था कि मैं कितना बड़ा भक्त हूं तो कोई धनी भक्त है आकर के उनको कुछ पैसा वगैरह दे दे तो यह रेण चुकते हो जाए तो अभी ऐसा नहीं है कि नरेंद्र को ये सब प्रॉब्लम नहीं थे घर से निकाल दिया था कोर्ट में केस चल रहे थे और घर का पोशन वापस लेने के लिए तो ऐसा नहीं है कि नरेंद्र को पैसे नहीं चाहिए परिवार होने से ही यह सब चाहिए कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु आखिर में तो नरेंद्र ने परिवार का त्याग किया सो नर के भीतर में य त्याग की ज्वाला थी वह बड़ी ही प्रचंड थी तो बात सिर्फ यह नहीं है कि आप सिर्फ क्वेश्चन करें आपके साथ में एक त्याग का एक भाव रहना चाहिए तभी वो उसका कोई मीनिंग है अदर वाइज ये जो कहते है ना संशय आत्मा विनश्यति वो क्यों कहते हैं नरेण को क्यों ये अप्लाई नहीं होता है हजरा को य अप्लाई होगा नरेण को नहीं होगा क्योंकि त्याग जो है अल्टीमेटली आपको सही रास्ते में लेके ही आएंगे और ठाकुर का सरल विश्वास इसके पीछे था भाव तो भाव और त्याग अल्टीमेटली दोनों आपको एक ही रास्ते प ले जाएंगे यस स्वामी जी बड़ा ही इंटरेस्टिंग ऑब्जर्वेशन करते हैं वो अपने बारे में कहते हैं कि मैं बाहर से पूरा त्यागी दिखता हूं ज्ञानी दिखता हूं किंतु भीतर में से मैं भक्त हूं और ठाकुर के बारे में में रिवर्स है कि ठाकुर बाहर से पूरे भक्त दिखते हैं किंतु भीतर से पूरा त्याग

ठाकुर के प्रत्येक सन्यासी शिष्य ठाकुर को अपने-अपने भाव से देखते थे. क्या इसके बारे में कोई इनसाइट है?

है दो दो बातें हैं यहां पे एक तो जैसे ठाकुर ने खुद ने एक डिस्टिंक्शन ड्रॉ किया है ठाकुर का एक दर्शन था देखा कि एक जगह है विजन में कहीं मने दूसरे लोक में कि लाल सुर्की का प्रकाश है और उसके बीच में नरेण जैसे कि अद्वैत भाव में तन्मय होकर के बैठा हुआ है और वहां पे एक बैरियर जैसा है और दूसरी ओर बाकी सब द्वैतवाद भक्त है साकार वादी भक्त है वो अधर सेन है न कि राजा महाराज है राखल है सभी जितने भी भक्त है वो सब वहां पर है उसमें से किसी ने वो थोड़ा सा उस नरेण की ओर झाक करके देखा किंतु अद्वैत भाव का जो रु स्वरूप उसने देखा तो डर के मारे वहां से भाग गया तो ठाकुर इस तरह से डिस्टिंक्शन करते थे एक और है नरेद जो कि संपूर्ण अद्वैत भाव में स्थित है बाकी दूसरी और है सभी साकार वादी भक्त दिस इज हिस डिस्टिंक्शन और दूसरा डिस्टिंक्शन देखिए कि स्वामी जी ने किया है इंटरेस्टिंग डिस्टिंक्शन हमने कुछ दिनों पहले ही डिस्कस किया था स्वामी जी ने ज्यादातर डिसाइल को निराकार वादी नाम दिए हैं अद्वैतानंद अदभुता आनंद अभेदानंद इस तरह से किंतु हां किंतु दो है दो कजन दो भाई जिनको कि अपने इष्ट के नाम से नाम दि शारदानंद जी और राम कृष्णानंद जी और तीसरा अपने को दिया है वि दिशा नंद यानी कि तीन कैटेगरी उन्होने बनाई है वेरी इंटरेस्टिंग तीन कैटेगरी बाद में दोनों का लाइफ देखिए कि शशि महाराज और शरत महाराज सेवा में उन्होंने जो एक नाम किया है अद्भुत है मने एक ने मां की सेवा में दूसरे ने ठाकुर की सेवा

सारदानन्दजी ने ठाकुर की कहानी लिख कर माँ के लिए बनाये हुए घर का कर्ज चूकते किया। कैसा मधुर संयोग है.

में ठाकुर का तो जवाबदारी है अभी ना मां की रक्षा करने की

सारदानन्दजी के द्वारा लिखित लीलाप्रसंग ही है आज ठाकुर की प्रामाणिक जीवनी

फ्रॉम हिम एंड फ्रॉम स्वामी जी क्योंकि वो इंटरेस्टिंग कहानी पता है ना कि मैक्स मलर ने स्वामी जी को कहा कि आप ठाकुर की एक बायोग्राफी मुझे दीजिए तो मैं पब्लिश करूंगा उसके बेस पे वो एक रियल महात्मा बोलक के उसने एक छोटा सा आर्टिकल तो लिखा था किंतु उसकी इच्छा थी पूरी बुक लिखने की ठाकुर के ऊपर में तो उस समय स्वामी जी ने शरद महाराज को कहा कि देखो मैं तो बिजी हूं तुम लिखो बायोग्राफी और मैं तुमको पॉइंट दे देता हूं कि मिरेकल नहीं होने चाहिए फिलोसोफी साधना इन दोनों के ऊपर में ज्यादा भार देना है त्याग यह सब मैंने स्वामी जी ने पूरे पॉइंट दे दिए थे उस पॉइंट्स के आधार पर शरत महाराज ने बायोग्राफी लिख करके स्वामी जी को भेजी स्वामी जी ने एज इट इज ऑलमोस्ट ओके करके मैक्स मलर को दे दी और मैक्स मलर ने भी मोर और लेस उसको इंटैक्ट रख कर के वो पब्लिश कर दिया था सो दैट वाज द फाउंडेशन ऑफ शरद महाराज अंडरस्टैंडिंग ऑफ ठाकुर्स लाइफ बेस्ड ऑन दैट लेटर ऑन ही रोट लीला

ठाकुर ने निरंजन महाराज से कहा कि वे उन लोगों को हानि न पहुंचाएं जो उन्हें बदनाम कर रहे हैं। दूसरी ओर, उन्होंने एक अन्य शिष्य से पूछा कि उसने उन लोगों के खिलाफ विरोध क्यों नहीं किया जो ठाकुर की आलोचना कर रहे थे

प्रसन मैंने जिसके प्रति यह हो रहा है उसके आध्यात्मिक रास्ते में क्या सहाय करेगा दैट मैटर्स नहीं कि आप हत्या करते हैं नहीं करते हैं एक्चुअली ये देखिए ये जो अपने अशोकानंद जी है ना उनका गांधी जी के साथ में जो एक डिफरेंस ऑफ ओपिनियन था कि अहिंसा कोई परमो धर्म जो कहते हैं वैसे लिमिटेड टू जैन रिलीजन हिंदू धर्म में आपको ऐसा नहीं दिखेगा हिंदू धर्म में है कि आध्यात्मिक अ ज्ञान प्राप्त करना वही जीवन का अंतिम उद्देश्य है उसके लिए यदि आपको युद्ध भी करना पड़े तो दैट डज नॉट मैटर वह जैसे कि गीता है राइट गीता इट सेल्फ इज द बिगेस्ट एग्जांपल कि धर्म युद्ध करना पड़े तो आपको करना है भगवान कृष्ण स्वयं यह बात करते हैं तो हिंसा नहीं करनी यह सब चीजें अपने धर्मों में है ही नहीं बट वही है कि आप यदि हिंसा करते हैं तो इस तरह से हिंसा कीजिए कि जिसका कि फल आपको ना लगे निमित्त मात्रमो सव्य साची जैसे भगवान कृष्ण कहते हैं मुझ पर संपूर्ण रूप से तुम पहले भरोसा करो तुम यह मान लो कि तुम जो करते हो वो धर्म युद्ध है तभी करो अधर्म के लिए अपने खुद की लालसा उसको परितृप्ति करने के लिए मत करो अभी पांडवों के पास में ऑलरेडी राज्य होता और कहते कौरवों को कि तुम्हारा राज्य भी हमको दे दो तो उस युद्ध में फिर भगवान कृष्ण उनके साथ में नहीं रहते यहां तो झूठ मूठ का उनके पास से राज्य छीन लिया गया और फिर उनको भगा दिया गया और फिर वो जो वापस आने के के बाद में राज्य नहीं दे रहे तो वो तो नहीं चलेगा सो धर्म युद्ध करना कोई गलत नहीं है गीता इज अ परफेक्ट टवे और स्वामी जी का जो वर्ल्ड फेमस वो उनका है कि जिस क्राइस्ट के फॉलोअर्स फॉलोइंग कृष्णा एंड कृष्णा फॉलोअर्स आर फॉलोइंग [हंसी] क्राइस्ट क्राइस्ट कहते एक ल प चाटा मारने से दूसरा गाल दिखा दो और कृष्णा कहते एक गल में चाटा मारने से हाथ काट दो उसका यूरोपिय आर फॉलोइंग कृष्णा इंडियंस आर फॉलोइंग क्राइस्ट ठाकुर का ठाकुर के जीवन में

ब्रह्मो समाज ने बिना सोचे समझे सब को अनुयायी बना दिया लेकिन ठाकुर ने हर किसीको शिष्य नहीं बनाया

देखिए कि कैंसर क्यों हुआ तो लोग बाछा जन मैंने लोगों को फिल्टर करने के लिए अंतरंग जो है वह रह गए और जो बहिरंग है वो लोग सोचना शुरू किए ठाकुर अपने को ही नहीं बचा पा रहे हमारा क्या करेंगे मतलब कैंसर हुआ जिससे कि जो झूठ मूठ के भक्त थे व लोग चले जाए जिससे कि एक स्ट्रांग फाउंडेशन के ऊपर में संघ बने अब यह भवनाथ वगैरह जो कि नरेंद्र के साथ में आया करता था ईश्वर कोटि और ठाकुर उसको कहते थे कहते थे नरेंद्र पुरुष है तो भवनाथ प्रकृति है इन दोनों की जोड़ी है अभी नरेंद्र के साथ में कंपेयर होना यानी कितनी बड़ी बात है वो भवनाथ जब ठाकुर को कैंसर हुआ तो वहां पर वो वर राजा सच करके गया था शादी वादी करके कि ठाकुर कैसे है आप ऐसा पूछने के लिए तो ठाकुर की तो उसको साथ में देखने की उस बात करने की इच्छा ही नहीं थी किंतु नरेंद्र की आग्रह पर बात किया तो ये ठाकुर को भी पता था कि ये जितने भी उनके पास में आ रहे हैं उनमें से दो दल होने वाले हैं एक जो है अंतरंग संघ उन्हीं पर रचित होगा बहिरंग है उनको भगा दो तो कैंसर के वैसे बहुत सारे पर्पसस है किंतु यह भी एक था कि लोगों को फिल्टर करने के लिए स्वामी जी के एक बड़ा ही एक फेमस इंसिडेंट है कि स्वामी जी प्रवचन दे रहे हैं तो देते देते उनके भीतर में से ऐसा भाव प्रकट हुआ उनको लगा कि उनके भीतर में लोगों को मंत्र मुक्त करने की शक्ति आ गई है जितने भी लिसन है व चाहे तो उनके दिमाग को जिस तरह से चाहे गठन कर सकते हैं मैं यदि उनको अपना ब्लाइंड फॉलोवर बनाना चाहूं तो वो मैं बना सकता हूं ऐसा भाव स्वामी जी के मन में आ गया दूसरे ही क्षण उनको लगा कि ब्लाइंड फॉलोवर बना के मैं करूंगा क्या उनका तो जीवन नष्ट होगा अपना भी संग बर्बाद करेंगे तो फिर स्वामी जी वो लेक्चर को अधूरा छोड़ के चले गए तो लोग जितने भी सुन रहे थे तो सडन बड़े ही डिसपे कि क्यों स्वामी जी चले गए अधूरे लेक्चर में फिर उनके डिसाइल ने स्वामी जी को पूछा कि आपने अधूरा क्यों छोड़ दिया लेक्चर तब स्वामी जी ने यह बात बताई वो पावर उस क्षण के लिए मेरे पास आ गया था मैं चाहे उनको ब्लाइंड डिवटी बना सकता था किंतु मैं इस तरह के फॉलोअर नहीं

हम चमत्कार की बात नहीं करते।

चाहता इसीलिए अपने डिवटी संख्या में बड़े कम है कंपेयर टू इवन कोई भी यह श्री श्री है नास जग्गी वसुदेव है आप एनी ऑर्गेनाइजेशन को ले लीजिए अपना स्वामीनारायण है उनकी जो डिवोटा स्ट्रेंथ है गजब स्ट्रेंथ है उसके सामने हम टिक भी नहीं पाएंगे बंगोल में होगा अपना किंतु बंगल के बाहर में तो ऐसा कुछ नहीं है तो वई बिकॉज कि यहां प जो लोग आते हैं ना वे लोग एक रेशनल माइंड सेट उनका होता है वे लोग मिरेकल की अपेक्षा भी नहीं करते कि बीमार हो गए महाराज को ले आओ घर में वो कुछ जादू चमत्कार कर देंगे तो ये लोग ठीक हो जाएंगे ये लोग अपेक्षा भी नहीं करते हमसे इस तरह की सो दैट इज अवर स्ट्रेंथ इन अ वे अने वीकनेस कहे तो यह है कि अपना प्रचार जो है वो इतना रेपिडली कभी होने वाला नहीं है जैसा बाकी सब संप्रदाय का होता है हम लोग हमेशा के लिए ये बुद्धिज्म का ऐसा था बुद्धिज्म इतना रेशनल और लॉजिकल रिलीजन था कि फिर उसका प्रचार ही नहीं हो रहा था तो बोलकर के महायान बोलकर के एक सेपरेट बुद्धिज्म स्टार्ट किया गया जिसमें जितने भी देवी देवता चमत्कार जादू हिंदू धर्म से लेकर के उसमें भर दिए गए फिर वो महायान बुद्धिज्म का स्प्रेड होना शुरू हुआ तो एक हियन बुद्धिज्म जो पहले का व जो मोर ट्रेडिशनल मोर रेशनल जो था और फिर यह महायान बुद्धिज्म इस तरह के दो डिवीजन हो गए तो हो सकता है फ्यूचर में कि यह महायान राम कृष्ण इजम ऐसा कुछ चालू हो जाए जहां पर सब तरह के चमत्कार वहां पर हो सकते हैं यह कल्पतरु दिन सबसे मुख्य उत्सव हो जाएगा वहां पर एनीथिंग कैन हैपन ना सी देयर आर नीड्स ऑफ पीपल हमको ये भी तो ख्याल रखना है हम लोग भले चाहे ऐसे लोगों की मजाक करें कि इन लोगों को चमत्कार चाहिए किंतु दे आल्सो हैव नीड्स ना व रेशनल नहीं है त्याग नहीं है जीवन में जीवन इतना दुख पूर्ण है कि कुछ आशा भरोसा चाहिए और यहां पे है ठाकुर है जो आपको आपको आशा दिखाते हैं तो व्हाई वोंट यू टेक इट मैंने पहले भी कहा था कि वो गया था ना वहां काशीपुर तो वहां पे ये लोग मिन्नत मान कर के वो छोटे-छोटे कागज में लिख कर के वहां पे टांग देते हैं तो बहुत सारे इस तरह के कागज के ये थे हम लोग क्लीन कर रहे थे मैं पढ़-पढ़ करके कुछ कुछ देख रहा हूं पढ़ रहा हूं तो हे राम उन लोगों की जो राम कहानी जो है दुख की कहानी अभी उनको किस मुंह से आप जाकर के त्याग वैराग्य भाव साधना उसका उपदेश देंगे जीवन में इतना बड़ा दुख है एक लड़की ने लिखा था मेरे पिताजी का मृत्यु हो गया मां बीमार है छोटे भाई के लिए खाने का पैसा नहीं है मैं जॉब कर रही हूं जॉब जाने वाली है आप कुछ कर दीजिए अभी आप उसको किस मुंह से त्याग और वैराग्य का उपदेश देंगे तो ऐसा जो महा दुख जीवन में जब आ जाता है तो उनको चमत्कार के अलावा और कुछ दिखता भी नहीं है दैट ह्यूमन नेचर इज देयर तो वयर एवर देयर इज अ डिमांड उसका वो जो एक फुलफिलमेंट कहीं ना कहीं से तो होगा ही होगा सो देर इज एंटायस बल कि मोर मिरेकल ओरिएंटेड रामकृष्णा इजम उसका जन्म हो वी डू नॉट नो वट इज इन द फ्यूचर बट पॉसिबिलिटी इ देर ना किंतु देखिए अभी हम लोग यहां पर जो आते हैं व वी हैव मोर और लेस स्टेबल फैमिली लाइफ मोर और लेस स्टेबल इकोनॉमिक लाइफ मोर और लेस गुड हेल्थ और एक रेशनल माइंडसेट होता है व एक स्टूडियस अप्रोच होता है लाइफ और रिलीजन के प्रति किंतु हम कितने हैं 1 पर मुश्किल से होंगे इंडिया की पॉपुलेशन में बाकी 90 पर का क्या 99 का क्या फर दे नीड सम पॉपुलर फॉर्म ऑफ रिलीजन सो नीड इज देयर किंतु कौन करेगा वी डू नॉट नो और होप फुली यदि होना है ना तो एक सक्शन वे में हो कि हम ही लोग सक्शन करें कि हां चलो यदि आपको रिलीजन को राम कृष्ण के आ आदर्श को यदि थोड़ा बहुत पॉपुलर इज करके करना है तो इस फॉर्म में कीजिए स दैट विल बी मोर अंडर अवर कंट्रोल रदर देन की फिर और ही कोई उसको हाईजैक कर ले हाईजैक करके फिर एकदम विकृत स्वरूप देते अभी जैसे कि नाम देक के अच्छा आरएसएस वाले जिस तरह से स्वामी जी का प्रचार करते हैं ट इ कंपलीटली डिफरेंट फ्रॉम द वे वी डू राइट तो अभी आप क्यों नहीं मैंने प्रश्न होगा ना कि पेट्रियोटिक एक बुक पब्लिश हुई थी रिसेंट पाछ साल हो गए उस किताब का टाइटल था टू ब्रिंग विवेकानंद आउट ऑफ द श्राइन मने गर्भ गुरु से विवेकानंद को बाहर लाया इस तरह का किताब का नाम था वी हैव पुट विवेन इन द श्राइन स्वामी जी वांटेड टू ब्रिंग द वेदांता फ्रॉम द फॉरेस्ट टू द विलेजेस नाउ वी आर ब्रिंगिंग इट बैक टू फॉरेस्ट फ्रॉम विलेजेस एंड सिटीज एंड स्टूडेंट एंड क्लासरूम तो यू कैन से दैट दिस इज अ पोरर अप्रोच बट दिस प्योर अप्रोच विल नॉट फ्लाई इन द फेस ऑफ द डिमांड पब्लिक डिमांड सो बेटर है कि हम खुद इस तरह का एक फॉर्म स्वामी जी का ना कि श्री राम कृष्ण का च इज मोर पॉपुलर हम सक्शन करें रदर देन की फिर उसका बिल्कुल ही विकृत स्वरूप और कोई चल लेकर के आ जाए यह जो भाव प्रचार परिषद का क्यों प्रारंभ हुआ अभी गांव गांव शहर शहर तो हम तो सेंटर बनाने वाले नहीं है और वहां पर डिमांड भी है तो बेटर की हम लोग सक्शन करें रदर देन की अभी कर्नाटक में देखिए कर्नाटक में पुरुषोत्तमानंद जी महाराज थे तो उनसे प्रभावित होकर के इतने सारे लोगों ने त्याग रास्ता अपनाया है अभी वहां पर बड़े बड़े सेंटर है वहां पर हमारे आश्रम से भी बड़े मंदिर है हमारे आश्रम से भी ज्यादा डिवटी आते हैं किंतु पूरा भाव प्रचार सिस्टम के बाहर है उन्हीं के साधु गुरु है वही लोग दीक्षा देते हैं वही लोग सब करते हैं अभी पूरे हुए हमसे प्र हा मने पुरुषोत्तमानंद जी अपने महाराज थे हां हां पुरुषोत्तमानंद जी महाराज अपने महाराज थे किंतु उनका प्रभाव इतना था कि पूरा एक दल वहां पर उनके प्रभाव से साधु हुआ बट आउटसाइड और उन्होंने सेंटर चालू किए वो भी अगेन आउटसाइड ऑफ भाव प्रचार परिषद उस सेंटर में वहां के साधु दीक्षा भी देते हैं और कितने लोग वहां से दीक्षा भी लेते हैं बट दिस एंटायस इज आउटसाइड ऑफ भाव प्रचार सिस्टम सो बेटर है कि वी अवर सेल्व सक्शन समथिंग तो एटलीस्ट जो मिनिमम जो होना चाहिए कि त्याग तो एक फंडामेंटल है बाकी और कुछ हो ना हो आप गरुवा पहन के ना कि धर्म का स्वांग रच करके भोगवा द यदि चालू करेंगे ट विल बी डेंजरस फॉर एवरीवन व फिर साधुओं का बदनाम होगा