Transcript
ओम संस्थापक धर्म आज फिर से कथामृत हम लोग एक-एक सप्ताह का साइकिल रखेंगे एक सप्ताह मां एक सप्ताह तो दोनों टॉपिक इजीली कर चिंतन और विचार में और यह भी है की ठाकुर और मां यह दोनों जो कहते हैं इन दोनों की जीवनी और उपदेश एक दूसरे के पूरक है तो दोनों का साथ में समांतर अभ्यास करने से चिंतन करने से हमको मां जो कहती है उसकी पुष्टि ठाकुर जो कहते हैं उसमें मिल जाति है और जो ठाकुर कहते हैं उसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन हमको मां में मिल जाएगा ठाकुर अभी जैसे कहते हैं की ब्रह्मा और दही का शक्ति वह दोनों एक ही है अभी हमको सोचते हैं की ब्रह्मा और दही का शक्ति के रूप में तो ठीक हो गया हमारे जीवन में क्या एप्लीकेशन है तो जीवन में एप्लीकेशन वही है की ठाकुर के साथ में मां आई थी और यदि हमको ऐसा लगता है की ठाकुर का त्याग वैराग्य और ईएसओटेरिक जिसको कहते हैं ना जिसको लाइफ और टीचिंग वो यदि बहुत ज्यादा हो जाता है हमारे लिए तो दे टुडे प्रैक्टिकल जीवन में कैसे जीना है लोगों के साथ में किस तरह से बिहेव करना है डेल करना है हमारे हृदय में मैत्री करुणा मोदित और अपेक्षा की भावना किस तरह से जागृत करनी है तो ये प्रैक्टिकल हिंट्स हमको मां से मिल जाति है वो ठाकुर मैंने किसी किसी से सुना है लोग क्या करते हैं कभी-कभी की बिजनेस में किसी भगवान को पार्टनर बनाते जैसे यहां पे गुजरात में है की भगवान कृष्णा को पार्टनर बनाएंगे अभी ये होता है उनका बिजनेस की दृष्टि से वे लोग करते हैं सोचते हैं की इसको भगवान कृष्णा को पार्टनर बनाएंगे तो फिर हमको बेनिफिट होगा क्योंकि भगवान तो शंशा स्वयं आ अभी मैंने ऐसा सुना है किसी किसी से की जब-जब ठाकुर को पार्टनर बनाया है बिजनेस में दोस्तों को लाभ कुछ नहीं होता इन मां को जब-जब पार्टनर बना है तो बहुत बेनिफिट होता है तो इसका रीजन स्वयं सिद्ध है ठाकुर तो त्यागियो के रजत है उनको बिजनेस में पार्टनर बनाने से थोड़ी ना कुछ मिलने वाला है किंतु मां तो लक्ष्मी स्वयं वो यदि साथ में रहेगी तो यह लोग और पढ़ लो शुभ और लाभ दोनों हमको प्राप्त होंगे हमारे गुजरात में यह दीपावली का त्योहार जब मनाया जाता है तो अब हम अपना घर की जो चौखट होती है दरवाजा प्रवेश करने का वहां पे लिखने हैं वो साथिया दूर कब कुमकुम से वो दौड़ते हैं ना वो जमीन के ऊपर में ड्रा करते हैं तो उससे कुमकुम से ड्रा करते हैं साथियों और फिर लिखने हैं शुभ एक और लिखने हैं शुभ और दूसरे और लिखने हैं लाभ तो ऐसा गुजरातियों का है की शुभ भी हो और लाभ भी हो दोनों साथ-साथ में चले तो कहानी वो ठीक ठीक हुआ तो हम लोग सब कुछ प्रैक्टिकल देखते हैं बंगालियों का है की वे लोग ज्यादा से ज्यादा देखेंगे की फिलॉस्फर है साइंटिस्ट है वो बंगाल से आते हैं और यह जितने भी यह प्रैक्टिकल लोग जो होते हैं वो बिजनेसमैन है या की पॉलीटिशियन है ये सब हमारे गांधी महात्मा गांधी है या सरदार पटेल है यह तो नए लोगों की बात छोड़ दे तो उसे पुराने लोगों से ज्यादातर नेशनल लेवल पर बिजनेस और पॉलिटिक्स में ज्यादा ए गया है वो गुजरात है तो यहां पे वो हमेशा एक प्रैक्टिकल सेट बैंड ऑफ मन राहत है की हां वो तो ठीक है चलो ब्रह्मा सत्य जगत मिथ्या ये तो आपने बोल लिया मैं मुझे उसे लाभ क्या होता है ये पहले बताओ ये लाभ भी साथ साथ में बताना पड़ता है जैसे की स्वामी जी स्वामी जी शरद चंद्र चक्रवर्ती को कहते हैं या तो तुम साधु हो जो या तो फिर तुम पैसा कमाओ अपने लिए कोई देश के लिए कुछ करो मतलब इतना बड़े बिजनेसमैन हो स्वामी जी तो अमेरिका जाकर के देख के आए थे रॉक फेल और यह करने की ये लोग बड़े-बड़े मैग्नेट उसे समय उनको कहा जाता था ये लोग किस तरह से पूरा अमेरिका का ट्रांसपोर्टेशन कर रहे हैं मैन्युफैक्चरिंग और फिर इंडस्ट्रियलिज्म रेलरोड पूरा अमेरिका में बेस्ट कॉस्ट से तक जान के लिए रेल लाइन लगा दिया है पहाड़ नदी जंगल कैट करके वो रेल लगी है तो पूरा बिजनेस कॉमर्स इनोवेशन टेक्नोलॉजी यह किस तरह से वो बाढ़ रहा है भारत और अमेरिका में ये सब स्वामी जी ने देखा था तो स्वामी जी कहते हैं या तो तुम ब्रह्मा प्रताप करो आत्मा साक्षात्कार करो ईश्वर का दर्शन करो या तो बड़े मैग्नेट को मैन्युफैक्चरिंग करो भारत देश को इंडस्ट्रियलिज्म टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाओ कुछ ऐसा कुछ करो की जो की मतलब वो बड़े लेवल पे हो मैंने एक वीडियो कर एक मिडलिंग लाइफ ऐसा लीड करने से क्या लाभ है ऐसा वो स्वामी जी वो कुछ और चंद्र चक्रवर्ती को कहते थे तो एक दिन बात-बात में बोले की चलो मैं तुमको बताता हूं की कैसे इंपॉर्टेंट करना है एटलिस्ट इंपोर्ट एक्सपोर्ट करके तुम अपना अर्जन करो तो स्वामी जी यहां तक उपदेश दे दिए हैं की यदि ईश्वर प्रताप ना हो तो इंपोर्ट एक्सपोर्ट कैसे किया जाए तो हमारे रामकृष्ण मिशन में सबके लिए सब कुछ है और जगह पे उनका जन्म हुआ है जी राज्य में वही तक वो सीमित होकर के र जाते हैं मैं नाम नहीं लेना चाहता किंतु है मैंने देखें हैं की अभी जैसे गुजरात के कुछ एक्ट है गुजरात के कुछ इस तरह की धार्मिक संस्थाएं हैं वैसे उनके पास में बहुत सारे साधु बहुत सर धन है बहुत सारे राज्यों में विदेश में उनकी शाखाएं हैं मंदिर हैं किंतु देखेंगे की उसमें गुजराती लोग ही ज्यादा आते हैं बिकॉज़ की गुजराती लोग चारों और फाइल हुए हैं विदेश में भी तो विदेश में भी यदि मंदिर बनाएंगे तो उसमें गुजराती लोग ही आएंगे तो क्या है की पर्टिकुलर रीजन या तो पर्टिकुलर कास्ट या तो पर्टिकुलर जाट वहां तक वह सीमित रहते हैं किंतु रामकृष्ण मिशन है वह यूनिवर्सल क्यों है हम लोग कभी भी धन शक्ति या तो मैनपॉवर या तो फिर इन्फ्लुएंस इन सब चीजों में दूसरों के कंपेयर में हम कभी शायद नहीं आएंगे जो की बड़ी-बड़ी संस्थाएं हैं आजकल की धार्मिक संस्थाएं किंतु राम कृष्णा मिशन की सबसे बड़ी विशिष्टया क्या है की यहां पे सभी रीजन के लिए सभी रीजन की सभी प्रकार की मन सेट के लिए कुछ ना कुछ अवेलेबल है जैसे की मैं खुद गुजराती हूं मेरा परिवेश मेरा बड़ा हुआ हूं एकदम बिल्कुल डिफरेंट टाइप के परिवेश में किंतु फिर भी ठाकुर मां स्वामी जी के प्रति मेरी श्रद्धा भक्ति जागृत हुई वो इसलिए नहीं की मुझे कोई यहां पर और कोई मटेरियल बेनिफिट मिलने वाला था फिलोसॉफिकल मैं यहां पर अट्रैक्ट हुआ हूं मैं बहुत तो इस तरह से हिस्ट्री सोशियोलॉजी है साइंस ये सब पढ़ना राहत था फिर मैंने देखा जब भी मैंने स्वामी जी को पढ़ा की मैंने देखा की उन सब का कल्मिनेशन स्वामी जी के कंप्लीट वर्क में है जो कुछ भी मैंने पढ़ा था उसका कंक्लुजन कल्मिनेशन या तो फिर उसका ग्रेजुएशन इस इन डी कंप्लीट वर्क ऑफ स्वामी विवेकानंद तो ये सोच समझ कर के मैं यहां पे आया हूं मेरे जैसे ज्यादातर साधु इस तरह से इंटेलेक्चुअल कनविक्शन होने के बाद नहीं यहां पे आते हैं की हां हमारा हम लोग जी तरह की विचारधारा जी तरह की चिंतन प्रवाह जो हमारा है जी तरह का चिंतन प्रवाह उसको लेकर के हम चल रहे थे उसका जो उसका ये परिणति है वो परिणति यहां पे रामकृष्ण संघर्ष की भावधारा में होती है बोलकर के हम यहां पे आए हैं जैसे ज्यादातर साधुओं में देखने को मिलता है तो इसीलिए की एक और हम पढ़ने हैं फिलासफी तो साथ में ही पढ़ने हैं हम उसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन शुभ और लाभ और लाभ सिर्फ मटेरियल नाप नहीं होता वो दोनों तरफ बहुत तरह के लाभ होते हैं एक तो स्वास्थ्य कर स्वास्थ्य लाभ है एक धन लाभ तो है ही है स्वास्थ्य लाभ है फिर एक इंटेलेक्चुअल सेटिस्फेक्शन होता है एक इंटेलेक्चुअल प्लेजर होता है जो लोग चिंतन करते हैं उन लोगों को पढ़ाई लिखी में इतना आनंद आता है की उसे आनंद के सामने इंद्रियों के आनंद भी टच हो जाते हैं जैसे की हम लोग कभी-कभी न्यूटन है या तो आइंस्टीन है जो की फर्स्ट मैंने फर्स्ट रो के पहले पहले दाज्जे के उन्हें ग्रेटेस्ट ऑफ डी ग्रेटेस्ट साइंटिस्ट की लाइफ पढ़ेंगे तब हमको पता चलेगा की उनका जो इंटेलेक्चुअल प्लेजर जो है एबिलिटी तू डेरिव प्लेजर फ्रॉम इंटेलेक्चुअल परस्यूट्स कम करके बौद्धिक चिंतन करके जो आनंद प्राप्त करने की उनकी क्षमता और एबिलिटी जो है वो इंद्रियों के भोग करके जो आनंद प्राप्त होता है उससे करोड़ करोड़ गुना ज्यादा होती है बोलकर के ही वो अपना जीवन साइंटिफिक डिस्कवरी में लगा सके रडार दें के सब समय ये सोचते रहना की किस तरह से मेरा प्रमोशन हो किस तरह से मेरा सैलरी ज्यादा हो ना की मैं यदि मैं कुछ भी खोजना हूं तो किस तरह से मैं उसको संकेश कर पाऊं संकेश अर्थात की मेरी जो भी डिस्कवरी है या तो फिर इनोवेशन है उसको मैं पेटेंट बना करके ज्यादा से ज्यादा लोगों को दे पाव देखिए फोर एग्जांपल यह लेते हैं डायबिटीज के लिए क्या बोलते हैं उसको मैं भूल गया इसको कंट्रोल करने की इंसुलिन यस यस तो इंसुलिन की खोज जिसने की उसने क्या किया की $1 में उसकी पेटेंट सेल कर दी अभी देखिए की उसे इंसुलिन को सेल करके बड़ी बड़ी कंपनियां करोड़ करोड़ कमेटी है अभी वो आजकल का नया नया चला है किंतु उसका जो फाउंडर है उसने इंसुलिन को उसने कहा की मानव जाति के लिए ये है इसका बेनिफिट मैं उससे पैसा नहीं कमाऊंगा वर्ल्ड वाइड वेब जिसको की टीम बनर ली जिसने की उसको डेवलप किया था उसने उसका पेटेंट नहीं लिया अभी इस वर्ल्ड वाइड वेब या तो फिर ये इंटरनेट इंटरनेट के बेस पर यह गूगल है ना की माइक्रोसॉफ्ट है ना की एप्पल है ऐसी कंपनियां करोड़ करोड़ कमेटी है किंतु उसका जो ओरिजिनल डेवलपर है टीम बनर ली उसको कुछ नहीं मिलता सर्वप्रथम मैन की मॉडर्न आगे में सर्वप्रथम आधुनिक युग में सर्वप्रथम जिसको की आ और फ्लाइट विमान की खोज की विमान को किस तरह से चलाया जाता है वो मेकैनिज्म की खोज की उन्होंने उसमें से ज्यादा कुछ नहीं मिला किंतु आजकल की ये बड़ी बड़ी कंपनियां रेठियों है ना की फिर मैकडॉनल्स है ना की वो फिर वो कितनी ही कंपनियां है बोईंग है जो की एयरक्राफ्ट बनती है और एयरक्राफ्ट सेल करके कितने पैसे कमेटी है अभी रिसेंटली हमने भारत ने के 40500 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया है बोईंग को और एअरबस को अभी सोचिए की वे लोग लाखों एम्पलाई को इससे एंप्लॉयमेंट मिलेगा किंतु उसके जो ओरिजिनल इनवेटर से उनको ऐसा कुछ नहीं मिलता तो देखिए की जीवन में आनंद जो है ब्लेजर जो है अभी हमको लगेगा की क्या यह लोग मूर्ख नहीं है मतलब उनकी इनोवेशन से दूसरे लोग पैसा काम लेते हैं और उनको कुछ नहीं मिला रिकॉग्निशन मिलता है आपकी वह हवा होगी लोग न्यूज़पेपर में आपके बड़े में लिखेंगे बोईंग का प्रेसिडेंट कौन है किसी को नहीं पता एअरबस का कौन मलिक है किसी को नहीं पता किंतु यह जो राइट ब्रदर्स से सर्वर पर पावर्ड और फ्लाइट जिसको कहते हैं वो उन्होंने किया 1902 या 1905 संवर लाइक डेट मोड और युग में पहले जो हुआ सो हुआ होगा आजकल हम लोग कहते हैं की हमारा पुष्पक विमान भी ऐसे ही था कुछ तो जो भी है डेट तू पट डेट साइड हम लोग तो उससे बेनिफिट नहीं ले पे तो ये लोग किन तू राइट ब्रदर्स उनको कुछ नहीं मिला किंतु उसका नाम जो है सबको पता है जबकि ये बोईंग या तो एअरबस इसके लिए वो मलिक कौन है या सीईओ कौन है इसका प्रेसिडेंट वो है उसका नाम किसी को नहीं पता किंतु क्या मेरा नाम सबको पता हो जान से मेरी प्रशंसा होने से मेरे बड़े में किताबें बायोग्राफी लिखे जान से क्या मैं संतुष्ट होऊंगा ना की मुझे बहुत बड़ी गाड़ी चाहिए बहुत बड़ा मेंशन चाहिए और आजकल तो तो लोग पूरे आयरलैंड खरीद लेते हैं आयरलैंड मेरे नाम से मैंने खरीद लिया ना की ये सब कुछ तो मैंने ये धनु प्रताप वैभव भोग विलास ये चाहिए ना की सिर्फ मेरे बड़े में एक किताब लिखी जाए बायोग्राफी कल बुक और इस से मैं संतुष्ट भले चाहे में एक छोटे से कमरे में राहत हूं खाने के लिए सुबह शाम में सैंडविच करता हूं मेरी केयर रखना के लिए भी मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए भी ऐसा कुछ ज्यादा मैंने कुछ सेविंग नहीं किया तो मैं ऐसे क्या इस से संतुष्ट हूं ना की मुझे ये चाहिए देखिए ये डिसीजन हमारे जीवन में जब आता है जब हमारे में ग्रेटनेस होती है वो इस से आदमी की ग्रेटनेस सही सही समझी जाति है कोई कोई होता है की अच्छा वो ये सब तो किताब तो करने के बाद में लिखी जाएगी तो जब तक जिंदा है तब तक तो हम जीवन का लाभ उठा आनंद करें वो एक तरह का थिंकिंग है और दूसरे है की मृत्यु के बाद क्या होगा हम जैसे कहते हैं ना की जन्म मृत्यु तो यह साइंटिस्ट लोगों के सब शायद सभी लोग कॉन्शियसली ऐसा नहीं सोचते होंगे किंतु सब कॉन्शियसली तो सोचते ही होंगे की ये जन्म मृत्यु जरा व्याधि के बाद में भी एक ऐसा जीवन है जो की हमको अमर बनाए रखना है जब तक मानव सभ्यता रहेगी तब तक यह जेम्स क्लार्क मैक्सवेल है ना की ये मैक्स प्लांक है ना की ये फिर ओपन हैमर है ना की ये आइंस्टीन है रदरफोर्ड है ना की हमारे 36 चंद्र बसु है ना की फिर यह आर्यभट्ट है भास्कर है जिन्होंने फिर ये मतलब जिन लोगों ने जो कुछ भी खोज की साइंस के जगत में विज्ञान के जगत में उन लोगों का नाम जब तक सभ्यता रहेगी आरिश टोटल प्लेटो उन सबका नाम हमेशा के लिए अमर रहेगा तो मुझे इस तरह से अमर होना है ना की मुझे यह धनु वैभव करके यह बस जीवन खत्म हो गया तो मेरा नाम भी खत्म हो जाना है यह डिसीजन मेकिंग हमारी सही ग्रेटनेस को दिखता है हमने यहां पर भी की मेरा यह परिवार है फिर ये बिजनेस है ये सब के बड़े में मैं सोचूं की इस सबके पैर एक आत्मा है एक ईश्वर है उसकी प्रताप के लिए मैं जीवन को समर्पित करो मुझे क्या सोचना है और देखिए की ये दो एलिमेंट है ईस्ट ने डेवलप किया की जन्म मृत्यु हो जरा व्याधि सृष्टि स्थिति प्रलय के पर है एक अनंत सचित आनंद में आत्मन है जिसकी मुझे प्राप्त जिसका मुझे प्राप्त करना है ये दिस इस डी बेस्ट ऑफ दी स्टंट सिविलाइजेशन और व्हाट इसे डी बेस्ट ऑफ डी वेस्टर्न सिविलाइजेशन के सिविलाइजेशन बिल राइस और फल बट नॉलेज बिल रीमें ईटरनल तो परस्यूट ऑफ नॉलेज इसे डी ग्रेटेस्ट प्रोडक्ट ऑफ वेस्टर्न सिविलाइजेशन और हर डी परस्यूट ऑफ डी आत्मन और ईश्वर इसे डी ग्रेटेस्ट प्रोडक्ट की स्तन सिविलाइजेशन और यदि हम दोनों को कंबाइन करें की ऐसी एक सिविलाइजेशन हो स्वामी जी कहते थे तो बेस्ट एलिमेंट ऑफ डी वेस्ट और बेस्ट एलिमेंट ऑफ डी ईस्ट ईस्ट की सर्वोच्च जो की सभ्यता का जो प्रताप है सर्वोच्च प्रताप है पूर्वी सिविलाइजेशन की सर्वोच्च प्रताप है वेस्टर्न सिविलाइजेशन की दोनों जाति इकट्ठा होता है यानी की एक ही जीवन एक ही एक देश एक ही सिविलाइजेशन और एक ही व्यक्ति वो सोचता है की मुझे ये दोनों की प्रताप करनी है ऑन वन हैंड में जब दिन में कर्म करता हूं तो मेरा कर्म बिल बी डेडीकेटेड तू दिस एडवांसमेंट ऑफ नो नॉलेज और यदि मैं शाम को सुबह को रात को अपने घर में जाता हूं अपने रूम में जाता हूं बहन मी लाइफ बिल बी डेडीकेटेड तू दी ईश्वर प्रताप आत्मा साक्षात का एक ही व्यक्ति में एक ही सिविलाइजेशन में एक ही देश में यह दोनों सर्वश्रेष्ठ तत्व संगम हो तो डेट बिल बी ग्रेटेस्ट सिविलाइजेशन डेट बिल बी डी ग्रेटेस्ट परसों ऑन डी प्लेनेट अर्थ सोच के देखिए की एक ही व्यक्ति जिसमें ठाकुर के भी गन है वो पूरा निराला है उसका मां सब समय वो एकाग्र ईश्वर के श्री चरणों में वह शरणागत होकर के पढ़ा राहत है और फिर जब उसको थोड़ा बहुत श आई है तो वो सोचता है की हां ये तारा और गैलेक्सी इसके पीछे में ये डार्क मटर ये फिर ये जो इंटीग्रिटी आजकल क्या-क्या सब चला है साइंस में एक समय था मैं बहुत क्लाजली ट्रैक रखना था अभी धीरे-धीरे वो थोड़ा कम होता जा रहा है किंतु यदि मेरे थोड़ा सा होश आता है तो मैं सोचता हूं की पूरे विश्व ब्रह्मांड में किस तरह से लॉस ऑफ ग्रेविटी लॉस ऑफ रिलेटिविटी कम करते हैं या तो फिर माइक्रोस्कोपिक लेवल पर किस तरह से क्वांटम डायनामिक कम करता है और जैसे ही हो चली जाति है तुम्हें बहुत अपने विभोर हो जाता हूं एक ऑन वन हैंड ठाकुर के पूरे गन और आंधी अदर हैंड आइंस्टीन के पूरे गन इस तरह से यदि एक ही व्यक्ति में दो तरह के गन यदि प्रगति हो तो देहात बिल बी डी ग्रेटेस्ट परसों ऑन डी प्लेनेट अर्थ आज हम कहते हैं की वेस्टर्न सिविलाइजेशन पूरा मैटेरियलिस्टिक हो गया है इसलिए उनके मां को शांति नहीं मिलती आंधी अदर हैंड हमारी पूर्वी सिविलाइजेशन के साथ में हम बार-बार विदेशी सातों के गुलाम बनते जा रहा है हम अपने को डिफेंड भी नहीं कर पाते क्योंकि इंडस्ट्रियलिज्म टेक्नोलॉजी का भेज नहीं है हमारे पास तो अभी एक सिविलाइजेशन हो की जहां पर मंदिर है फिर ये मेडिटेशन होल है ये आध्यात्मिकता है योग मेडिटेशन प्राणायाम यह सब ध्यान ये सब बच्चों को बचपन से ही सिखाया जाए और साथ में ये क्यूरोसिटी इनोवेशन डेवलपमेंट यह सब भी बचपन से सिखाया जाए मेट ऑफ ईस्ट और वेस्ट इकट्ठा हो तो इमेज इन करके देखिए की वह देश वह सिविलाइजेशन और वह इंडिविजुअल या तो वह फैमिली कितना डेवलप करेंगे कितना प्रोग्रेस करेंगे कितना खुशी खुशी यह लोग रहेंगे ओके तो कथामृत में से हम पाठ करते हैं मास्टर महाशय लिखने हैं षष्ठ परिच्छेद श्री रामकृष्ण विजय दिवस दक्षिणेश्वर मंदिर भक्ति संज्ञा विजयदशमी के दिन ठाकुर में भक्ति लोगों के साथ में बैठे हैं ठाकुर श्री रामकृष्ण दक्षिणी ईश्वर मंदिर विराज परिर्टेक्न ठाकुर श्री राम कृष्णा दक्षिणेश्वर मंदिर में विराजमान है बेला नोट हुए सुबह के 9:00 बजे होंगे छोटी घटिया जो है उसके ऊपर में ठाकुर विश्राम कर रहे हैं और मनी यानी की हमको पता है आज विजय रविवार 22 अगस्त 1882 खिस्तब्ध आज विजय का दिन है विजयदशमी रविवार है 22 अक्टूबर है और 1882 की साल है अश्विन शुक्ला दशमी तिथि अश्विन शुक्ला दशमी तिथि है छुए कार्तिक 1200 1289 1289 बंगाली थी आजकल ठाकुर के साथ में रखा यानी की राजा महाराज स्वामी ब्रह्मानंद ठाकुर के मानस पुत्र रामकृष्ण संघ के सर्वप्रथम प्रेसिडेंट और इतना जब ध्यान करते थे की स्वामी जी ने का दिया था की राखल अध्यक्ष स्वामी विवेकानंद ने कहा था आध्यात्मिकता में राखल मुझे भी बड़ा है अभी वो स्वामी जी है तो बड़े दिल से कहा होगा व्यक्ति होगा हनुमान करके देख लीजिए और किसी के बड़े में स्वामी जी ने ऐसा नहीं कहा गुरु भाइयों में सिर्फ राखल के बड़े में कहा है आजकल राखल ठाकुर के साथ में रहे नरेंद्र भावनात माझे माझे जटायत करें नरेंद्र अर्थात स्वामी विवेकानंद कॉलेज में पढ़ने थे यंग लड़के थे वो और भावना दूसरा एक लड़का ठाकुर के साथ ठाकुर के पास दक्षिणेश्वर में आना जाना करते थे उनका अपने घर से ठाकुर और संगीत आहार भर्तृष पुत्र रामलाल और हजार महाशय बांसपेरी थे ठाकुर के साथ में ठाकुर के भाई का लड़का रामलाल और हाजरा हाजरा महाशय ठाकुर के गांव के पास में ही कहानी पर रहते थे उनके सर पे थोड़ा सा री हो गया था तो सोचा मैं कोलकाता जाता हूं ठाकुर के पास राहत हूं बड़े-बड़े लोग आते हैं तो मैं माला वहां पर जाप करूंगा सबके सामने बैठ करके पीतांबर ही देख के तिलक लगाकर के रुद्राक्ष की माला पहन के सबके सामने जब करूंगा बड़ी-बड़ी वह रुद्राक्ष की माला लेकर तो लोग मां लेंगे की बड़ा सड़क है और मुझे कुछ पैसा दे देंगे तो वह गांव में जो री है थोड़ा सा वह ठीक हो जाएगा उसको मैं रिटर्न कर पाऊंगा इसलिए ठाकुर ने रखें दिया था पास में वरना ठाकुर किसी को अपने पास में नहीं रखते दुर्गुण वाले लोगों को राम मनमोहन सुरेश मास्टर बलराम अहरा हो प्राय प्रति सप्ताह ठाकुर के दर्शन करिया जाट राम मनमोहन सुरेश मास्टर मास्टर महाशय स्वयं बलराम यह लोग भी प्राय नियमित रूप से हर सप्ताह प्रति सप्ताह ठाकुर के दर्शन करने के लिए दक्षिणी ईश्वर में आते थे और ये जितने भी नाम लिखे रामबाबू ये मनमोहन ये ये सब ठाकुर के अंतरंग बाबूराम सभी दी एक बार दर्शन कोरिया छन बाबूराम महाराज यानी की स्वामी प्रेमानंद जो की बाद में ठाकुर स्वामी जी के साथ में सन्यास ग्रहण करके इनका नाम हुआ था नामकरण स्वामी प्रेमानंद और बेलूर मठ में वह मैनेजर थे हालांकि उसे समय ऐसा कोई फॉर्मल पोजीशन शायद ना ही था किंतु बैलून मटका पूरा संचालन बाबूराम महाराज करते थे और 1918 में उनका शरीर त्याग हुआ था और यह बाबूराम महाराज को किंतु फिर नरेंद्र के साथ में इंटेलेक्चुअल डिबेट बहुत सर हो चुका था इसके बड़े में हमने पहले भी एक दो बार डिस्कस किया अभी नए नए आए हैं ठाकुर का एक दो बार ही दर्शन किया हैं श्री राम कृष्णा तोमर पुजार छुट्टी हुई छे ठाकुर ने मास्टर महाशय को पूछा क्या तुम्हारी पूजा की छुट्टी हुई है अभी हमको पता है की बंगाल में दुर्गा पूजा एक बहुत बड़ा त्योहार है और काफी लंबी छुट्टी मिलती है और खासकर के मास्टर महाशय तो स्कूल में थे तो स्कूल में तो शायद ज्यादा लंबी छुट्टी मिलती होगी यह शक्ति सप्तमी अष्टमी नवमी और दशहरा विजय यादव यह पूरा चार-पांच दिन उनकी पूजा होती है वो उद्बोधन होता है पूजा वगैरा सब बोधन फिर वहां से लेकर के विसर्जन दशमी के दिन ये पुरी पूजा चलती है और बहुत ही विस्तृत रूप से बंगाल में मनाया जाता है अभी गुजरात में जैसे दो त्योहार है नवरात्रि और दूसरा है दीपावली ये बहुत बड़े पैमाने पे मने जाते हैं और आजकल ये गणेश पूजा का भी काफी ये हुआ है बंगाल इसी तरह से दुर्गा पूजा है कोई बोलेगा की दुर्गा पूजा का बैंक अभी क्योंकि मैं गुजरात में र रहा हूं मैंने वहां पे जाकर पहले बार देखा था की इतने धूमधाम से इस तरह से शास्त्री विधि से पूजा का आयोजन होता है पूजा का सेलिब्रेशन होता है देख करके मुझे बड़ा ही अच्छा लगा था और मैंने यहां पे कभी देखा नहीं है हमने यहां पे देखा है नवरात्रि अच्छी है 9 दिन रात को गरबा होता है फिर दीपावली अच्छी है तो ये सब हमने देखा है तो वो एक नया एक सो देखकर के वो भी अपनी भारतीय परंपरा के अनुसार शास्त्र विधि के अनुसार होता देखकर के वो इतना आनंद मिला था पहले बार देख करके कभी क्या बताऊं वन ऑफ डी बेस्ट मेमोरीज ऑफ मी लाइफ हम सबके जीवन में कुछ कुछ मेमोरीज होती है ना की हम जब एकदम बूढ़े हो जाएंगे वृद्ध हो जाएंगे किंतु फिर भी इतना लंबा जीवन है 60 70 में 80 साल का उसमें सिर्फ ज्यादातर तो हम भूल जाते हैं किंतु कुछ कुछ मेमोरीज हमारे साथ में सब समय मृत्यु तक हमारे साथ में रहती है तो ये दुर्गा पूजा प्रथम दुर्गा पूजा जो मैंने बेलूर मठ में अच्छी थी और वो मेमोरी जो है मेरा मृत्यु तक मेरे साथ में रहेगी इतना मुझे आनंद आया था है तो ठाकुर कहते हैं की क्या तुम्हारी पूजा की छुट्टी हो गई है तो मनी अर्थात की मास्टर महाशय कहते हैं आगे हां की जी हां ई सप्तमी अष्टमी और नवमी पुजार दिन केशव सेन अभी यह तो विजयदशमी के दिन ठाकुर के पास में आए हैं और भी हो तो षष्ठी से ही बोधन के दिन से ही तो पूजा का प्रयारंभ हो जाता है तो मास्टर महाशय जब ठाकुर ने पूछा की तुम्हारी पूजा की छुट्टी हो गई तो मास्टर महाशय कहते हैं हां जी हां पूजा की छुट्टी हो गई है और मैं सप्तमी अष्टमी और नवमी पूजा के दिन केशव सेन के घर नियमित में जाता था श्री रामकृष्ण कहते हैं बोलो की वह क्या बोल रहे हो अभी अभी ऐसे देखिए की ठाकुर के शिष्य है ठाकुर को मिलने के लिए आते हैं दशहरा के दिन विजयदशमी के दिन वो छुट्टी तो हो गई है और पूजा भी प्रारंभ हो गई है षष्ठी को जो बोधन होता है इस दिन से सप्तमी अष्टमी नवमी 3 दिन की बड़ी संधि पूजा कुमारी पूजा सब तो वो उसे दिन हो जाता है बड़ी-बड़ी पूजा है विजयदशमी के दिन तो विसर्जन होता है तो विसर्जन के दिन ठाकुर को मिलने के लिए आए हो संदीप पूजा वो जो सबसे इंपॉर्टेंट पूजा वो सब सप्तमी अष्टमी नवमी के दिन ठाकुर को मिलने के लिए नहीं दर्शन करने के लिए नहीं जा करके केशव सिंह के वहां पे घर गए और केशव सिंह का प्रवचन सुन और पूजा में भाग लिया तो अभी ठाकुर तो बोलेंगे ना की अरे भाई क्या बोल रहा है ऐसा नहीं है की ठाकुर के भीतर में ईर्ष्या है किंतु अभी देखिए प्रसंग बड़ा ही सुंदर है आखिर में ठाकुर क्या कहते हैं अभी ईर्षा की बात नहीं अपने अंतरंग शिष्यों को जीवन गठन ठाकुर किस तरह से करते हैं यह बहुत ही सुंदर प्रसंग से हमको जन को मिलता है बहुत सर डेथ है इसमें और इसके साथ में वो भगवान बुद्ध का भी एक सिमिलर प्रश्न है वो मैं बाद में कहता हूं ठाकुर कहते हैं क्या बोल रहे हो तो मनी कहते हैं दुर्गा पूजा बेस व्याख्या सुनेची मैंने दुर्गा पूजा की बहुत ही सुंदर व्याख्या सनी वहां पर ठाकुर कहते हैं की बोलो अच्छी बोलो तो क्या सुना तुमने घर रोज सुबह उपासना होती थी होती है दोस्तों 10 11 बजे तक बजे तक सुबह के पूजा होती है दुर्गा पूजा व्याख्या करें उसे उपासना के समय के शिवसेना दुर्गा पूजा की व्याख्या की थी यदि मां को हम प्राप्त कर सकते हैं मां का दर्शन आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं यदि मां दुर्गा को कोई हृदय मंदिर में विराजमान कर सकता है स्थापित कर सकता है ता होल लक्ष्मी सरस्वती कार्तिक गणेश अपनी आशीन तो फिर लक्ष्मी सरस्वती कार्तिक और गणेश अपने से ए जाते हैं अभी देखिए की इसके पीछे का क्या अर्थ है बंगाली को तो सबको पता ही होगा किंतु जो बंगाली नहीं है या तो फिर जिसने दुर्गा पूजा नहीं अच्छी की जब मां की पूजा होती है तो लक्ष्मी सरस्वती करती और गणित ये चारों को भी उनकी मूर्तियां चारों दोनों साथ में मां दुर्गा के दोनों साइड में रहती है और उनकी भी पूजा होती है यानी की जब दुर्गा की पूजा करेंगे तो स्वाभाविक रूप से लक्ष्मी सरस्वती कार्तिक और गणेश यह चारों को तो आना ही है उनके बिना तो मां दुर्गा की पूजा अधूरी र जाएगी अभी यह कहते हैं व्याख्या क्या करते हैं आप यदि मां दुर्गा की पूजा करेंगे तो साथ-साथ में लक्ष्मी सरस्वती गणेश और कार्तिक की तो पूजा करनी ही पड़ेगी ये तो पार्ट ऑफ डी ट्रेडीशन शास्त्र की व्याख्या अनुसार शास्त्रों में शास्त्र के दिए निर्देशानुसार तो ऐसे ही करना है तो उसका अर्थ क्या है वो केशव कहते हैं यदि मां को हृदय मंदिर में बिठाऊ तो लक्ष्मी सरस्वती गणेश तो आएंगे ही आएंगे और इसका अर्थ लक्ष्मी अर्थात ऐश्वर्या सरस्वती अर्थात ज्ञान कार्तिक अर्थात विक्रम साहस गणेश अर्थात सिद्धि आई है तो कार्तिक अर्थात लक्ष्मी अर्थात ऐश्वर्या सरस्वती अर्थात ज्ञान कार्तिक अर्थात विक्रम साहस और गणेश अर्थात सिद्धि यह चारों अपने से ए जाता है यदि मां दुर्गा की पूजा करते हैं अच्छा आज यही तक रखते हैं कल यह प्रश्न को समाप्त करेंगे