Transcript
ओ स्थापक आज सुबह को स्वामी जी के लेटर्स पढ़ रहा था तो स्वामी जो बीच बीच में एकदम स्टर्लिंग सेंटेंस हमारे सामने आश्चर्य जनक ऐसे सेंटेंस की वो पढ़ कर के हमको 10 मिनट तो बैठ कर के सोचना पड़ेगा कि स्वामी जी क्या कहना चाहते हैं तो वैसा एक सेंटेंस पढ़ा स्वामी जी कहते हैं कि आई हैव गिवन टू इंडिया फार मोर देन इंडिया ज गिवन टू मी अर्थात कि मैंने भारत को भारत ने मुझे जितना दिया है उससे कहीं ज्यादा मैंने कई गुना मैंने भारत को दिया है अर्थात की सोचिए कि स्वामी जी जब अमेरिका जाकर के प्रवचन दे रहे थे गांव गांव शहर शहर सिटी से सिटी एक स्टेट से दूसरे स्टेट घूम रहे थे ये जितने भी यह मिशनरी है यह जितने भी कटु वाक्य बोलने वाले थे व मैंने उन लोगों के उन लोगों की तो बात ही छोड़ दीजिए कि वहां के कुछ कुछ लोग उनकी निंदा करते थे भारत के भी कितने ही लोग उनके पीछे में लगे थे यह मजूमदार य ब्रह्म समाज वगैरा कितनी निंदा उनको सहन करनी पड़ी थी कितना कष्ट उनको उठाना पड़ा था तब कहीं जाकर के उन्होंने अमेरिका में वेदांत का यह जो ध्वज है वेदांत की जो विजय पताका है वह स्वामी जी ने अमेरिका में उसको रोपित किया था उसको गाड़ा था किंतु ऐसा करते करते स्वामी जी का हेल्थ संपूर्ण रूप से नष्ट हो गया वह तो इतने फिजिकली फिट है मेंटली भी फिट है किंतु उन्होंने अपना सब कुछ जैसे कि अमेरिका और लंदन में वेदांत प्रचार करके गंवा दिया और भारत में आए तो इनका स्वास्थ्य पहले से ही भारत में आकर के ही उनको पहले तो डायबिटीज लग गया और डायबिटीज एक ऐसा चीज है कि एक बार वो होता है तो बाकी 10 चीजें उसके साथ में आ जाती है तो फिर स्वामी जी का स्वास्थ्य वहां से जो खराब होना शुरू हुआ तो आखिर में 1909 1902 4थ जुलाई 1902 39 इयर्स की उम्र में ही स्वामी जी को देह त्या करना पड़ा तो यह जो पूरा कष्ट स्वामी जी सहन कर र और सामने बार-बार ये अपने गुरु भाई है या तो फिर यह चेन्नई के उनके जो कुछ डिसाइल है उनको कहते हैं कि जो लोग जद मेरी निंदा करते हैं या हिंदू धर्म की निंदा करते हैं तो उससे तुम लोग डर क्यों जाते उनलोगों की बातों को सच क्यों मान लेते हो तुम मुझे डिफेंड करो और मुझे नहीं तो एटलीस्ट हिंदू धर्म को डिफेंड करो वेदांत को डिफेंड करो इतना कायरता से रहने से थोड़ी ना चलेगा यह सब स्वामी जी बता रहे हैं उस समय अपने डिसाइल अपने गुरु भाइयों की एक या तो उदासीनता कहिए या तो आलस्य कहिए या तो फिर यह डर कहिए यह सब देख कर के स्वामी जी ने यह सेंटेंस कहा था कि आई हैव गिवन टू इंडिया फार मोर देन इंडिया जज गिवन टू मी भारत ने मेरे लिए जो कुछ भी किया है उससे कहीं ज्यादा मैंने भारत के लिए किया है और यहां पर सिर्फ यह बात नहीं है कि अमेरिका में इतने क के सामने एक गुलाम प्रजा है एक गुलाम देश है वहां से एक धर्म प्रचारक आकर के विजेताओं के देश में धर्म का प्रचार करें यह सहन करना तो उन लोगों के लिए तो मुश्किल ही है यह तो कष्ट किंतु साथ में ही भारत में आकर के अपनी ज्वलंत वाणी से यह सोए हुए देश को जगाना रामकृष्ण मिशन की स्थापना करना सेवा कार्य का प्रारंभ करना पूरे भारत के ये जो युवा है उन लोगों को देश के हित के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करना कितना प्रचंड कार्य उन्होंने किया है किंतु स्वामी जी का जो कंट्रीब्यूशन है उसके बारे में किसी को कोई भी डाउट नहीं आज हमको किसी को भी डाउट नहीं है किंतु एक प्रश्न होता है कि स्वामी जी का यह जो सेंटेंस है कि मैंने भारत को कहीं ज्यादा कुछ दिया है बढ़ चढ़ कर के उसकी अपेक्षा भारत से मुझे इतना कुछ नहीं मिला या तो फिर भारत से मुझे जितना मिला उससे कहीं ज्यादा मैंने भारत को दिया तो यह सेंटेंस की सत्यता किनी है क्या इस बात को हम लिटरली सच मानले इस सेंटेंस को हम किस तरह से इंटरप्रेट करेंगे क्योंकि मान लीजिए कि मातृभूमि भारत से जितना स्वामी जी को मिला होगा उससे कहीं गुना स्वामी जी ने भारत को दिया यह तो फिर भी एक मान्य दायक बात है किंतु फिर यहां पर तो ठाकुर भी तो थे मां भी तो थी उनके गुरु भाई भी तो थे य गुरु भाइयों का स्नेह जी को मिला स्नेह और श्रद्धा मिली ठाकुर और मां की शिक्षा और आशीर्वाद मिला उनकी उदेश मिले उन ठाकुर ने तो अपनी पूरी शक्ति स्वामी जी के भीतर में संचारित कर दी और जब स्वामी ठाकुर ने कहा कि मैं अपना सब कुछ देकर के फकीर हो गया तो यह ठाकुर की शक्ति लेकर के स्वामी जी ने भारत में काम किया है अदर वाइज ठाकुर खुद कहते थे ना कि जद नरेण यहां पर नहीं आता तो केशव सेन की तरह एक दल का सेनापति बनकर रह जाता एक दल का नेता बन कर के रह जाता उसकी जो प्रतिभा है जो आज सर्वत मुखी प्रतिभा विश्वव्यापी जो स्वामी जी की कीर्ति है वो ठाकुर के पास स्वामी जी नहीं आते तो वो कीर्ति उतनी प्रकट नहीं हुई होती इतना तो ठाकुर ने भी कहा है तो फिर यह कहना कि भारत से मुझे जितना मिला है उससे कहीं गुना मैंने भारत को लौटाया है यह सत्य सेंटर्स की यथार्थता किस तरह से आप प्रणित करेंगे क्योंकि यदि ठाकुर इक्वेशन में है ठाकुर जद इक्वेशन में नहीं होते केशव सेन की तरह मान लीजिए केशव सेन की तरह का स्वामी जी का अपब्रिंगिंग होता उनका जद बचपन से लेकर के बड़े केशो की तरह हुए होते और यदि भारत के लिए उन्होंने इतना कुछ किया होता तो यह सहज में स्वीकार्य होने वाली बात थी कि हां ठीक है कि भारत देश की उस समय की जो परिस्थिति थी उससे तो कहीं ज मने एक यंग लड़के को एक भारत देश जितना दे सकता था अपनी संस्कृति अपनी अपनी य रोकर अपना ये इतिहास अपना यह कल्चर अपना यह धर्म अपना यह वेदांत जितना भारत एक लड़के को दे सकता है एक यंग मेन को जितना दे सकता है उससे तो कहीं ज्यादा भारत ने इस स्वामी जी ने सोए हुए भारत को जगा करके भारत का कल्याण किया है ये भारत के अच्छे के कार्य किया तो यह बात मानने लायक थी किंतु इस इक्वेशन में यह जो दो पल्ले है उसमें जद यह स्वामी जी का पल्ला है यहां पर भरत होगा तो निश्चय स्वामी जी का पल्ला नीचे जाएगा किंतु दूसरे पल्ले में भारत के साथ में ठाकुर को रखते मा को रखते गुरु भाइयों को रखते तो यह पन्ना फिर पर कैसे जाएगा ठाकुर वाला माने ठाकुर ने जो स्वामी जी को दिया उसी के बेस पर तो स्वामी जी का सब कुछ बना है तो अभी इस पॉइंट को ध्यान में रख कर के स्वामी जी का सेंटेंस हम कैसे इंटरप्रेट करेंगे यहां पे कुछ कुछ संभावनाएं है कुछ कुछ ऑप्शन से कुछ कुछ पॉसिबिलिटीज है कि हम स्वामी जी को किस तरह से इंटरप्रेट करेंगे इस पर्टिकुलर सेंटेंस को क्या हम यह कहेंगे कि स्वामी जी इतने परेशान हो गए थे उस समय इतने मतलब परिस्थितियों के दबाव में आकर के स्वामी जी ने खुद ने अपने एक लेटर में लिखा है आला सिंगा को कि मैंने तुम को जो गाली वगैरह दी है जो डाटा है वगैरह है उसको तुम बहुत ज्यादा सीरियसली मत लेना क्योंकि यहां पर मैं बड़ा प्रेशर में था सभी जितने भी लोग हैं यहां के धर्म गुरु मेरा अहित करना चाहते थे साथ-साथ में हमारे कुछ देश बांधव भी मिल गए सब मिलकर के मेरे पीछे लगे थे तो वह जो परिस्थिति के प्रेशर में आकर के मैंने तुमको जो कुछ कह दिया होगा मैंने डांट दिया होगा डोंट टेक इट सीरियसली तो यहां पर स्वामी जी खुद ये एक्सेप्ट करते हैं कि परिस्थिति के प्रेशर में करके इवेंट्स के चक्कर में पड़ कर के वह इस तरह से कुछ शब्द बोल दे सकते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि उनके मन में अपने शिष्यों के प्रति या आला सिंगा के प्रति थोड़ा सा भी दश पाव है ऐसा हम नहीं मानेंगे तो एक तो यह एक इंटरप्रिटेशन हुआ अने परिस्थिति इसके रिलेटेड रिलेटेड या अनरिलेटेड ठाकुर का एक छोटा सा इंसिडेंट है कि वो छोटो नर ठाकुर के पास में तो पहले तो बहुत आता था फिर वो इतना ठाकुर को श्रद्धा भक्ति भी करता था ठाकुर भी इसको उसको इतना प्रेम करते थे फिर कुछ समय के लिए शायद उसने आना बंद कर दिया और ठाकुर ने शायद किसी को भेजा होगा या कोई भक्त के साथ में उसकी मुलाकात हुई बो के भाई क्यों नहीं आ रहे हो आजकल ठाकुर के पास दक्षिणेश्वर में या तो फिर ठाकुर कलकाता आते हैं तो भक्त गृहो प जो उत्सव होता है उसका निमंत्रण तो सबको मिलता है और ठाकुर ने खुद कहा है ना कि राजा महाराज निमंत्रण देना भूल गए तो अधर सेन वहां पर नहीं गए तो ना अधर सेन ना कि वो राम बाबू वहां पर नहीं गए अधर सेन के वहां पर ऐसा ही कुछ है तो जो भी है व जब ठाकुर के पास कंप्लेन गई कि हमको निमंत्रण नहीं मिला तो ठाकुर ने कहा कि देखो निमंत्रण का निमंत्रण देने का भर राल के ऊपर था और रफल तो भी बच्चे जैसा है बोला टिकले दूध बेरो बंगाली में कहते उसका गला जद दबाए तो मुंह से दूध निकलेगा यानी कि छोटा बच्चा मां का दूध पीता है तो तो दूध से ही भरा हुआ है थोड़ा सा उसको दबाए तो दूध निकलना शुरू हो जाएगा यानी कि राखा तो छोटा है उसका उसका गलती नहीं लेना है एक चीज दूसरा की जहां पर हरि नाम संकीर्तन होता है हरि के नाम पर उत्सव होता है वहां पर आमंत्रण की कोई जरूरत नहीं है सभी लोगों को ओपन इनविटेशन है तो वैसे ही यहां पर ठाकुर कलकाता जाते हैं तो सबको इन्विटेशन होता है नरे छोटो नरेण यानी कि ये छोटा नर वो बड़ा नरेण यानी स्वामी विवेका ये छोटा नर तो छोटा नर व कुछ समय ठाकुर के पास नहीं गया तो फिर जब एक दिन आया आखिर में तो ठाकुर ने कहा उसको अभी क्या है कि सब तरह की बातें तो चलती रहती है ना भक्त मंडली में तो किसी ने ठाकुर को जाक के कहा होगा कि हम लोगों ने नरन के साथ में बात किया वो तो ऐसा कह रहा है कि अभी पढ़ाई लिखाई में ध्यान देना पड़ता है ठाकुर के पास जाने से पढ़ाई में थोड़ा सा डिस्टरबेंस होता है इसलिए मैं ठाकुर के पास नहीं जाता तो अभी यह बात ठाकुर के कान में गई तो ठाकुर ने जब यह छोट नरेण आया ठाकुर के पास में तो ठाकुर ने उसको कहा कि अच्छा मैं मैंने तो तुमको बुलाया नहीं है तुम यहां पे मत आया करो तुम आओगे तो तुम्हारी पढ़ाई में विघ्न होगा जैसे कि ठाकुर अभिमान करके बोल रहे हैं उनको थोड़ा दुख हुआ होगा भीतर में कि अभी मैं तो इतनी उसको शिक्षा देता हूं धर्म शिक्षा देता हूं इतना स्नेह प्रेम करता हूं फिर भी जाकर के मेरे बारे में ऐसी बात करता है कि वहां आने से मेरा स्टडी डिस्टर्ब होता है तो ठाकुर जैसे कि अभिमान करके बोल रहा है कि ज तुम्हारी स्टडी में जद विघ्न प्रकट हो तो यहां पर मत आया करो मुझे इस तरह से किसी को बुलाने की आवश्यकता नहीं है मैंने तुमको इनवाइट भी नहीं किया इसलिए फिर भी तुम अपने से आए हो आज तो ठाकुर यहां पर देखिए कि कैसा एक अभिमान करके इस छोटो नरेण को कहते हैं और यहां पर वही बड़ो नर यानी कि अपने स्वामी विवेकानंद स्वामी जी जब उनके पिताजी का देह त्याग हुआ उस उसके बाद में जो परिस्थिति विषम परिस्थिति के विष चक्र में फंस कर के कुछ-कुछ ऐसे लोगों का संग कर बैठे थे जिनका कि चरित्र अच्छा नहीं था और इस तरह के लोगों के संग में रहने की वजह से कुछ-कुछ लोग उसमें से ये छोटो नरेण भी शायद एक होगा उन लोगों ने जाकर के ठाकुर के पास जाकर के बड़ा दुख करके कहा होगा कि ठाकुर देखिए कि महाशय देखिए कि उनको तो लगता था नरेण इतना अच्छा रदाय कि इनको अभी कैसे कैसे संग में पढ़ कर के कैसी कु प्रवृत्ति कर रहा है यह सुन कर के ठाकुर एक दो बार सुन कर के तो ठाकुर कुछ नहीं बोले किंतु फिर जबी उसी बात को रिपीट किया गया ठाकुर ने एकदम चिल्ला करके उसका मुंह बंद कर दिया कि तुम होते कौन हो नरेण के बारे में ऐसा बोलने वाले नरेंद का जो चरित्र है इतना शुभ्र स्वच्छ है कि मैं स्वीकार ही नहीं कर सकता कि नरेंद किसी दुस में पु संग में फस सकता है तो देखिए कि ठाकुर का दोनों के ओर किस तरह का डिफरेंस से उन छोटू नरेण के बाद में बारे में जो बात ठाकुर ने सुनी दूसरे लोगों से कि हां वो आपके बारे में ऐसा कह रहा है कि दक्षिणेश्वर जाकर के प जाने से दक्षिणेश्वर जाने से ठाकुर के साथ में ठाकुर का दर्शन करने से पढ़ाई में डिस्टरबेंस होता है ठाकुर जैसे अभिमान करके कह रहा है कि तुम्हारी पढ़ाई में डिस्टरबेंस हुआ तो यहां पे मत आना मैं तो तुमको बुलाता भी नहीं हूं यहां पे यही नरेण यानी की भविष्य के स्वामी विवेकानंद उनके बारे में इससे कहीं ज्यादा डेंजरस अवाए कहीं ज्यादा डेंजरस रूमर्स ठाकुर के पास में आ रही है किंतु ठाकुर उसको स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है देखिए कि स्वामी जी को ठकुर का कितना प्रेम मिला है तो अभी हम लोग ये ऑप्शंस खोज रहे थे कि स्वामी जी ने ये वो सेंटेंस कहा कि मैंने भारत को भारत से मुझे जितना मिला उससे कई गुना ज्यादा मैंने भारत को दिया तो इसके पीछे पॉसिबिलिटीज क्या है सर्वप्रथम पॉसिबिलिटी तो यह है कि स्वामी जी शायद परिस्थिति के चक्रवात में फंस कर के ऐसा कुछ उनके मुंह से निकल गया होगा शी डिडेंट रियली मीन इट सीरियसली तो सीरियसली इसको उन्होंने ऐसा कुछ कहा नहीं होगा परिस्थिति के चक्कर में उन्होंने यह बात कह दी यह एक ऑप्शन दूसरा ऑप्शन ये है कि स्वामी जी ठाकुर को इंडियन ही नहीं गिनते थे शायद ठाकुर तो सर्वव्यापी है विश्व अवतार है पूरे विश्व के लिए आए हैं ठाकुर को ऐसा कहना कि वो भारतीय है या तो फिर वह बेंगोली है या तो वो कलकाता का माटकुर के निवासी है या तो फिर वो काली मंदिर के पुजारी है या तो फिर एक अनपढ गरीब ब्रामीण है यह सब एडजेक्टिव्स है यह जो सब डिस्क्रिप्शन है ठाकुर के साथ में एक भी डिस्क्रिप्शन लगेगा नहीं ठकुर सर्वव्यापी पूरे विश्व के पूरे मानव सभ्यता के कल्याण के लिए अवतरित हुए हैं अर्थात कि ठाकुर से जो आशीर्वाद मिला ठाकुर से जो शक्ति संचार स्वामी जी के भीतर में प्रवेश किया उसको वो इंडिया के अकाउंट में नहीं डालते हैं शायद वर्ल्ड के अकाउंट में डालेंगे तो ये एक पॉसिबिलिटी है ये सेकंड पॉसिबिलिटी हो गई और थर्ड पॉसिबिलिटी है कि मान लीजिए कि ठाकुर और मां के आशीर्वाद को भी इंडिया के अकाउंट में डाल दिया इसके बावजूद स्वामी जी ने अल्टीमेटली भारत के कल्याण के लिए जो किया है उसका इंपॉर्टेंस उसका वेटेज उसका जो प्रभाव है वो श अपूर और मां के आशीर्वाद से भी कहीं ज्यादा है ये एक थर्ड पॉसिबिलिटी है तो अभी देखिए कि इतनी पॉसिबिलिटी हमारे सामने है इस सेंटेंस को इंटरप्रेट करने के लिए उसमें से कौन सी पॉसिबिलिटी को हम स्वीकार करते हैं कौन सी पॉसिबिलिटी सही है यह तो हम कैसे कह पाएंगे यसे वो जो क्वान होते हैं ना वो कि एक ऐसे जैसे कि ऐसे एक पजल कि गुरु शिष्य को दे देगा कि हां अभी इस पजल को सॉल्व करने का प्रयास करो वो पजल सॉल्व करते करते ही शिष्य का जन्म बीत जाएगा और जब पजल का उत्तर मिलेगा शिष्य को साथ में ही इनलाइटनमेंट या तो फिर निर्वाण प्राप्त हो जाए तो यह सेंटेंस भी ऐसे वो अपने लिटरेचर में कुछ-कुछ ऐसे सेंटर्स मैंने कहा कि ने पजलिंग इस तरह के कंट्रा इक्ट पैराडॉक्सिकल सेंडल्स है कि जिसको इंटरप्रेट करते करते अपना पूरा सम जीवन चला जाए हो सकता है कितने ही जीवन चले जाए तो व यह एक मुझे लगा कि पढ़ने के बाद में मुझे लगा कि इसमें यदि सोचेंगे तो कितनी सारी पॉसिबिलिटीज है अच्छा तो अभी कथामृत प हम कथामृत का पाठ आगे बढ़ाते हैं कल तक हमने देखा कि यह अध्याय श्री राम कृष्ण का केश सन के साथ में मिलन दोनों न का विहार करते करते गंगा के ऊपर में सवारी करते हैं गंगा पर भ्रमण करते हैं और साथ में ही ठाकुर केशव को उपदेश देते हैं तो ये प्रण का तो प्रारंभ ही हुआ है अभी आगे देखते हैं कि मास्टर महाशय क्या लिखते हैं मास्टर महाशय लिखते हैं सवे केशव प्रमुख ब्रह्म भक्तो गण जहाज कोते ठाकुरबाड़ी शोभा सं दर्शन करते समवेत यानी कि केशव के साथ में मिलित ब्रह्म भक्त गढ़ जहाज में बैठकर के ठाकुरबाड़ी की शोभा का आनंद ले रहे हैं संदर्श कर रहे हैं आपको तो पता ही होगा दक्षिणेश्वर में गए होंगे तो गंगा के किनारे में नौका भ्रमण करते करते जो काली मंदिर का जो कितना सुमधुर दृश्य जो दिखता है सबसे पहले तो आपको वो द्वादश शिव मंदिर दिखाई देंगे 12 शिव मंदिर है सबसे पहले तो दिखाई देगा चांदनी का वो घाट गंगा के किनारे पर घाट है वो इसको क्रॉस करके आप चांदनी रूपी जो मंडप है उसमें जाएंगे इस मंडप के बाद में आते हैं पव शिव मंदिर और जद शिव मंदिर से पीछे दृष्टि करेंगे तो पता चलेगा कि काली मंदिर का जो शिखर है वो ऊपर में आकाश की ओर जैसे की रहा है तो वो हो गया काली मंदिर का वो मुख्य भाग जहां प सभी मंदिर आए हैं गंगा के किनारे में से आपको शायद ये विष्णु घर जिसको ठाकुर कहते हैं विष्णु मंदिर या तो फिर वो नाट मंदिर इसका शायद दर्शन नहीं होगा मुझे कंफर्म करना पड़ेगा मुझे याद नहीं है कि मैंने गंगा के किनारे प इस तरह से वो देख अरे किन इतने पास से किंतु मुझे नहीं लगता कि दर्शन होगा तो गंगा के किनारे से मंदिर वाला जो हिस्सा है वहां पे आपको द्वादश शिव मंदिर दिखाई देंगे और काली मंदिर का जो शिखर है वो दिखाई देगा उससे आगे आप जाएंगे तो आप देखेंगे कि गंगा के किनारे ही बहुत ही सुंदर एक बागान बनाया हुआ है और इस बागान में से ही मां काली की पूजा के लिए पुष्पों का चयन किया जाता यह मैं ठाकुर के समय की बात कर रहा हूं आज के समय की नहीं तो यह बागान दिखाई देगा और बागान के परे आप देखेंगे तो उनका कमरा दिखाई देगा जहां पर ठाकुर ने इतना लंबा समय बिताया जहां पे ठाकुर के जितने में भी अंतरंग शिष्य है वो करके ठाकुर के साथ मिलित हुए थे और वहीं पे यह कथामृत की रचना हुई थी या तो फिर कथामृत की रचना करने वाले जितने भी प्रसंग है कल दक्षिणेश्वर वाले वो सब वही पे एक के बाद एक अभिनित हुए थे इससे थोड़ा सा आगे जाएंगे तो वो दिखेगा नबत जहां पे की मां रहा करती थी इससे थोड़ा सा आगे जाएंगे तो दिखेगा ये पंचवटी इससे आगे जाएंगे तो झावतला वगैरह दिखेगा तो यहां पर द्वादश काली मंदिर और उस सबसे पहले हमको दूसरा नबत दिखेगा दो नबत है तो सर्वप्रथम नबत उसके बाद में ये द्वादश शिव मंदिर और काली मंदिर का शिकर ठाकुर का कमरा पंचवटी फिर दूसरा नबत और फिर ठाकुर के कमरे के बाद में दूसरा नाम उसके बाद में पंचवटी और उसके बाद में झावतला बेलतला शायद दिखे कि नहीं मुझे थोड़ा सा डाउट है एक बकुलतला बोल के एक था तो बकुल तला तो दिखेगा बेलतला शायद नहीं दिखेगा देखना पड़ेगा वहां प गंगा में नौका विहार करके देखना पड़ेगा तो जब य ये इतना जो है प्रथम पत से लेकर के तला तक का यह दक्षिणेश्वर का काली मंदिर था तो केशव और बाकी सबम भक्त सब मिल मिलकर के यह काली मंदिर का दर्शन कर रहे थे बाय द टाइम ठूर में से पहुंचाया गया है सभी लोग वो जहाज के वो जो यह होता है रेली रेलिंग प आकर के अपेक्षा कर रहे हैं कि कब ठाकुर आए कब हम उनको दर्शन करें हम उनके मुह से अमृतम वाणी सुने तो सभी केशव और सभी ब्राह्मण भक्तगण रेलिंग के पास खड़े हुए हैं ठाकुर का इंतजार कर रहे हैं और जहाज जो होगा शायद वो गंगा के किनारे तक नहीं जाएगा क्योंकि जहाज में जो पानी के नीचे का जो हिस्सा होता है वो काफी बड़ा होता है तो गंगा के किनारे पर तो क्या है कि जगह नहीं होती पानी के नीचे इतनी इसलिए नौका को भेज कर के ठाकुर को आमंत्रण किया गया नौका प बैठकर के ठाकुर पधार रहे हैं सभी ब्राह्मण भक्तगण यह सुंदर दृश्य देख रहे हैं ऊपर में फुला नींद आसमान है सफेद बादल उड़ रहे हैं इधर से उधर सामने सुंदर काली मंदिर है उस काली मंदिर में से इसके बाद में ये जो बड़ा सुंदर वर्णन आएगा मास्ट महाशय इतना सुंदर पोएटिक वर्णन कर इसी काली मंदिर में से इस युग के अवतार विश्व के पूरे तारणहार श्री राम कृष्ण देव नोका में बैठ कर के आगमन कर रहे हैं जिन्होंने यह दृश्य देखा होगा उनके जन्म जन्मांतर के उनके नहीं उनके पाद में आने वाली सात पीढ़ी के जितने भी दुष्कर्म है सब कट गए होंगे ऐसा मुझे लगता है तो यह इतना सुंदर वर्णन कि केशव के साथ में सभी ब्राह्मण भक्त गण काली मंदिर का शोभा का दर्शन करते हैं जहाज पूर्व द के अनती दूरे बांधा घड़ और ठाकुरबाड़ी चांदनी अच्छा यहां पर भी यह पूरा वर्णन आया है कि जहाज के थोड़ा सा आप आगे देखेंगे तो गंगा के किनारे आपको क्या दिखाई देगा जो घाट है पानी में स्नान करने का वह घट दिखाई देगा और फिर बाद में चांदनी बोलकर के एक मंडप है वो दिखाई देगा आरोही दे बा पाश में चांदनी उत्तरे आदश शिव मंदिर प्रमान छ मंदिर दक्षिण पावे छ शिव मंदिर यह जो गंगा में विचरण कर रहे थे उनके उनके बाम यानी की दाई ओर और बाई ओर दोनों ओ छह छह शिव मंदिर है यदि आप चांदनी के घाट के सामने खड़े होंगे तो आपको इस साइड में छह शिव मंदिर दिखाई देंगे इस साइड में छह शिव मंदिर दिखाई देंगे टोटल ब शिव मंदिर है शरते नील आकाश चित्रपट भव तारिणी मंदिरे चूड़ा यानी कितना सुंदर वर्णन शरद का यानी कि हेम ऋतु का ंड की ये ऋतु का जो पूरा नील आकाश है स्वच्छ नील आकाश उसके चित्रपट के ऊपर में जैसे कि काली मंदिर का शिखर चित्रित हुआ है काली मंदिर का शिखर तो आपको दिख रहा है किंतु कैसे दिख रहा है शरद का नील आकाश रूपी चित्रपट है उसके सामने ये काली मंदिर का शि घर दिख रहा है व उत्तर द के पंचवटी और ऊगा छेर माथा गुली देखा जाते से नि शरत का ये जो नील आकाश है उसके चित्रपट के पर में यह भावतारिणी के मंदिर का चूड़ा अर्थात की शिखर और उत्तर दिशा में पंचवटी और झाऊ गाज ऊ दला चौक हमने कहा था ना झाऊ बोल कर के एक पेड़ है तो उस पेड़ के नीचे में जो घट है या तो फिर उसके नीचे की जो जगह है उसको झावतला कहेंगे जहां पर की काली मंदिर के सभी लोग शौच करने के लिए जाते थे तो वो ौ अभी छाऊ का इंग्लिश हिंदी क्या है मुझे नहीं पता अब देखना पड़ेगा तो जो भी है पंचवटी और गाज का उसके ऊपर का हिस्सा दिख रहा है यह जो शरद का नील आकाश है उसके परिपेक्ष में उसके ब बैक ड्रॉप बकुल लार निकोड एटी कालीबाड़ी दक्षि पार प्रांतो भागे आर एकटी नबत थाना वहां पे दो नबत खाने है एक तो बकुलतला के पास में है बकुलतला अर्थात की बकुल का उसके पास में एक नबत है और दूसरा नबत है वहां पर कि जहां पर आप बरूर मट से जब आने की शुरुआत करेंगे तो आपको सर्वप्रथम एक नपत दिखाई देगा बाद में यह द्वादश शिव मंदिर और फिर बाद में ये दूसरा नबत दिखाई देगा दई नबत खाना मध्यवर्ती उद्यान पद धारे ारे सारी सारी पुष्प दोलो उसके बीच में एक उद्यान पथ है और इस उद्यान पथ के किनारे पे बहुत सारे उष वृक्ष शरते नीला काश नीली मा जनवी तले प्रति भाषित होते छ शरत के नील आकाश की नीली मा चक नवी जल चक नवी यानी की गंगा गंगा के पानी में प्रति भाषित हो रही है प्रतिबिंबित हो रही है तना सुंदर पोएटिक वर्णन फिर से एक बार पढ़ता हूं शरते नी काश नीली मानतले प्रति भाषित होते बहिर जगत कोमल भाव बाह्य जगत में कोमल भाव है ब्राहमम भक्तो देद म कोमल भाव और कोमल भाव ब्रह्म भक्तो के हृदय में और दवे सुंदर सुनील अनंत आकाश ऊपर में है सुंदर सुनील नील जिसका रंग है किंतु बड़ा ही सुरूप सुनील है इस तरह का सुनील अनंत आकाश में सन्मुख है सुंदर कालीबाड़ी नजर के सामने सुंदर काली मंदिर है सुंदर ठाकुर बाड़ी बहुत ही सुंदर ठाकुर का मंदिर है निने पवित्र शोला पंगा और नीचे से बह रही है जहाज के नीचे से बह रही है पवित्र सरीला गंगा जो हमारे जितने भी पाप है उसको हर नेने वाली गंगा जहा तीरे आर जो ऋषि गण भगवाने चिंता परया छन यह वही गंगा है जिसके किनारे पे आर्य ऋषि गण सनातन आर्य सभ्यता के सनातन आर्य संस्कृति के आर्य ऋषियों ने जिसके किनारे तपस्या की है ईश्वर चिंतन किया ब्रह्म साक्षात्कार किया है ब्रह्म भाव में स्थित हुए हैं वही ऋषि मुनियों से वह शोभित वही ऋषि मुनियों द्वारा पूजित यह पुण्य सलीला गंगा जहाज के नीचे में से बह रही है आकाश ऊपर में सुंदर नील आकाश सामने अति पवित्र दिव्य काली मंदिर और नीचे है पुण्य सलीला गंगा अबार आशीते छन एकटी महापुरुष फिर आ रहे हैं एक महापुरुष साक्षात सनातन धर्म जो कि है साक्षात सनातन धर्म माने कि जो ऋषि मुनि हजारों हजारों सालों से हजारों हजारों ऋषि मुनियों ने जिस गंगा के किनारे पर तपस्या करके इस सनातन धर्म को जन्म दिया था या तो फिर सनातन धर्म का आविष्कार किया था यही सनातन धर्म के मूर्ति मंत साक्षात सनातन धर्म स्वयं वो महापुरुष अवतार वरिष्ठ श्री राम कृष्ण नौका में बैठ कर के बता रहे हैं रूप दर्शन मानु शेर कपाले सर्वदा टेना इस तरह का दर्शन मनुष्य के सर पे हमेशा लिखा हुआ नहीं होता है मनुष्य को हमेशा इस तरह का दर्शन प्राप्त होने का सौभाग्य नहीं मिलता है रूप समाधि महापुरुष का आर भक्ति ना उद इस तरह की जगह पर इस तरह के समाधि महापुरुष का दर्शन करके किसके हृदय में भक्ति का उन्मेष नहीं होगा कन पाषाण हृदय ना बिकलित होय किस पाषाण हृदय को उसके भीतर में पवित्रता का संचार ना होगा न पाषाण हृदय विगत न इतना सुंदर वर्णन ठाकुर के आगम का अभी एक नया सेक्शन स्टार्ट होता है उसका टाइटल है समाधि मंदिर आत्मा अनि अनश्वर और पहारी नौका आशिया लागी लो नौका आकर के जहाज को लग शक ठाकुर श्री राम कृष्ण के देखी बार जन्नो व्यस्त सभी लोग श्री राम का दर्शन करने के लिए व्यस्त हो गए भीड़ होईया सभी लोग इकट्ठा हो गए हैं भीड़ के जैसा हो गया है ठाकुर के निरापद नामावर जन्नो केश सतो कोई ठाकुर को कोई आपत्ति ना हो ठाकुर को कोई हानि ना हो इस रूप से ठाकुर को नौका में से जहाज में पदार्पण करवाने के लिए केशव व्यस्त हो गए हैं अनेक कष्ट नुष करया रेर भीतर लया जा कोते बहुत कष्ट करके ठाकुर तो समाधि में मग्न हो गए थे उनको समाधि में से होश में ला कर के और धीरे-धीरे वहां का जो केबिन होगा जहाज का उसके भीतर में उनको ले जा रहे हैं एक भाबो ठाकुर एक बार तो समाधि में प्रवेश गए हैं कैसे भी करके नौका में से जहाज में उठे हैं किंतु अभी भी भाव में मग्न है एक जन भक्ते ऊ परर र दिया आशीते छन एक भक्त के कंधे प अपना हाथ रख कर के एक भक्त केत के सहारे वो केबिल के भीतर में प्रवेश कर रहा है अब ये एक जन भक्त कौन होगा यह मुझे लगता है यही मास्टर महाशय स्वयं अपना नाम नहीं दिया है किंतु हम लोग अनुमान कर सकते हैं क्योंकि जहां जहां भी ये एक जन भक्त अर्थात की एक भक्त ऐसी बात आती है वहां पर जनरली मास्टर महाशय अपने को गोपन कर रहे हैं अपने को छुपा रहे हैं जो भी है अनुमान करके कह सकते हैं कि मास्टर महाशय के सहारे वह केबिन के भीतर में प्रवेश कर रहे हैं पार मते छे मात्र पेर सिर्फ चल रहे हैं वैसे मन तो भावत है समाधि स्त है आधा समाधि स्त आधा इस जगत में पेर चल रहे हैं सिर्फ केबिन घरे प्रवेश करी लेन केबिन के र में प्रवेश किया केशवा आदी तेरा प्रणाम करि में किंतु को उनाई केशव वगैरे भक्तों ने आम किया किंतु ठाकुर को कोई होश नहीं है बेहोश हो कर के पड़े और यह बेहोश और हमारा बेहोश बड़ा अलग है ठाकुर कॉन्शियस लेवल से सुपरकॉन्शियस लेवल प चले जाते हैं और हम लोग बेहोश होते हैं तो कॉन्शियस लेवल से सबकॉन्शियस प चले जाते हैं इतना ही डिफरेंस है रेर म एकटी टेबिल खान पतो चेयर घर के भीतर में केबल के भीतर में एक टेंबल है और थोड़ी सी कुर्सिया है एक नी चियार ठाकुर के बशा एक कुर्सी पर ठाकुर को बिठाया गया केशव एक खानी ते बोशी लेन एक कुर्सी पे केशव बैठे विजय कोशी विजय भी एक कुर्सी पे उड़ उन्होने विराजमान हुए बैठे अन्नान तेरा जे जेमन पाई लेन भते बसी लेन बाकी सब भक्त जिनको जैसे भी जगह मिली जमीन पर बैठ गए अनेक लो के स्थान लोना बहुत सारे लोगों को केबिन में बैठने के लिए जगह ना मिली तारा बाहर ते की मारिया देखीते न वेलो केमी के बाहर से ही वो भीतर में जा करके रहे ठाकुर बसिया आबार समाधि स् ठाकुर कुर्सी पर बैठ कर के ही फिर से समाधि में चले गए संपूर्ण बाह्य शून्य संपूर्ण बाह्य शून्य है सपोले एक दृष्ट देखीते छ सब लोग एक नजर से देख रहे हैं कि किस तरह से समाधि स्तक एक महापुरुष समाधि में प्रवेश करते हैं यह सब समाधि के बारे में सुना ही है उसके बारे में पढ़ा ही है एक भक्त ठाकुर को प्रथम मिलने के लिए आया ठाकुर को समाधि देख कर के उसने दूसरे भक्त को कहा कि तुम लोग जो यह भाव और समाधि की बातें करते हो और तुम लोग जो दावा करते हो कि तुमको भाव होता है तो तुम्हारे चेहरे पर जो टॉर्चर का भाव दिखाई देता है भीतर में तुम बोलते हो भाव होता है चेहरे तो इतना विकट और भयावह हो जाता है कि ये भाव और समाधि के नाम से ही मुझे घृणा हो गई थी फिर जब ठाकुर को मैंने भाव में जाते देखा समाधि स्थ देखा तब मुझे पता चला कि असली भाव या समाधि होने से चेहरा कितना सौम्य दिव्य पवित्र हो जाता है तो यह सौम्या दिव्य पवित्र ठाकुर का चेहरा देखने के लिए सभी लोग एक दृष्टि से ठाकुर के सामने देख रहे हैं केशव देखिले हरेर मथे अनेक लोग केशव ने देखा कि घर के भीतर में बहुत सारे लोग इकट्ठा हो गए ठाकुरे कष्ट होते ठकुर को कष्ट हो रहा है र तो गर्म हो जाएगा बहुत सारे लोग एक छोटी केबिन में इकट्ठा हो जाएंगे तो विजय तहा के त्याग कोया गया साधारण समाजत होया व कन्या विवाह इत्यादि कार्जर विरुद्ध अनेक पता दिया छन ताई विजय के देखिया केशव एक अपस्तंबा गया छोटे से केबिन के भीतर में बहुत सारे दो ठाकुर को कष्ट हो रहा होगा यह सुनकर यह सोच कर के दूसरा कि विचय वहां पे एक तो एका एक वहां प आ गया अभी ठाकुर की तो यह शायद इच्छा ना केशव की तो शायद ये इच्छा नहीं होग कि विजय के साथ में फिर से आदाब करे फिर विजय के साथ में बात करें किंतु क्या करें जब वो ठाकुर को बुलाने के लिए किसी को भेजा था तब ऑलरेडी विजय वहां पर उपस्थित थे और ठाकुर के साथ में ही विजय भी आए थे अभी किंतु विजय कृष्णा गोस्वामी के साथ में प्रॉब्लम यह है कि केशव ने अपनी कन्या का विवाह करवा दिया ब्राह्मण समाज के नियम के विरुद्ध में जाकर के ब्रह्म समाज का मिशन था कि भारत में सामाजिक रिफॉर्म्स लाने है सोशल रिफॉर्म लाना है जितनी भी अंधश्रद्धा कु प्रथाएं है उसको हटाना है इसके अनुसार कन्या के विवाह की मिनिमम जज 14 न की ऐसा कुछ फिक्स किया हुआ था और इस उम्र से छोटी कन्या का केशव विवाह करवा दिया इसके लिए विजय कृष्ण गोस्वामी ने ब्राह्मण समाज जोक केशव के साथ में ब्राह्मण समाज में थे किंतु इस बात को लेकर के केशव से नाराज होकर के बाहर चले गए दूसरे एक ब्रह्म समाज की स्थापना की उसको नाम दिया साधारण ब्राह्मण समाज और सिर्फ इतना ही नहीं केशव के बहुत सारे शिष्यों को भी लेते गए और केशव के विरुद्ध में प्रवचन भी कितने दिए तृता भी कितनी थी तो यही विजय को सामने देख कर के केशव थोड़े से अप्र कुत हो गए हैं थोड़े से संकुचित हो गए हैं इसलिए केशव आसन त्याग परया रेर नाला खुलिया केशव आसन अर्थात की कुर्सी छोड़ करके खड़े हुए और घर का दरवाजा वगैरा खोल देंगे इसके लिए व खड़े ब्राहमम भक्ते रा एक दृष्टि चाहिया ब्रह्म भक्त एक नजर से देख रहे हैं ठाकुर समाधि ठाकुर की समाधि बंद ई एकन भाव पूर्ण मात्रा बया समाधि में से तो व बाहर आ गए किंतु फिर भी पूर्ण मात्रा में में मगन है ठाकुर अपना अपनी अफू स्वर बोली छ ठाकुर अपने से उ अफू रूप से बड़े ही निम्न स्वर से क्या बोल रहे हैं मामा खाने आनली केनो मां मुझे यहां पर क्यों लाई है आमी की बे रोते पबो मैं क्या इनकी बेड़ा अर्थात की बेरियर एक एक बाउंड्री जैसा कुछ क्या मैं इन लोग इन लोगों की बैरियर के भीतर में से वाढ के बंडी के भीतर में से रक्षा कर पाऊंगा यह ठाक रहे है मां के साथ में बात कर रहे ठाकुर की देखीते मास्टर महाशय इसमें अपना इंटरप्रिटेशन देते हैं कि ठाकुर क्या देख रहे हैं जो संसारी व्यक्ति रा बेड़े बथ संसारी जो लोग है वो कामिनी कांचन व्यवहारिकता यह संसार इस सबकी यह जो बेड़ा है बैरियर है यह जो बंधन है इसके भीतर में पत है बाहर आशीते पारित छिन्न बाहर नहीं आ पा रहे हैं बाहर लो को देखीते पाते सेना बाहर का जो प्रकाश है सांसारिक का के बाहर में जो ईश्वरीय प्रकाश उसको नहीं देख पा रहे हैं शोको ने विषयक ने हाथ पा बांधा सभी का संसार यों का विषय कर्म से हाथ और पैर बंधे हुए हैं केवल बाड़ी भीतर जिनीश उनी देखीते पाते छे सिर्फ घर के भीतर की चीजें देख सकते हैं घर में आपने लाइट जलाया हुआ है और खिड़की दरवाजे बंद कर दिए हैं तो घर के भीतर की ये जो ट्यूबलाइट है उस समय दिया था प्रदीप था आज ये ट्यूब लाइट है तो भीतर की ट्यूबलाइट या फ भीतर का प्रदीप छोटा सा जिसका प्रकाश का स्रोत है वह दिखाई देता है किंतु घर के बाहर में एक प्रचंड सूर्य वो ऊर्जा दे रहा है प्रकाश दे रहा है आशीर्वाद दे रहा है व नहीं दिखाई देता इसीलिए ठाकुर ने जो कहा कि क्या मैं उनको बंधन के भीतर में से रक्षा कर पाऊंगा जो बंधन में बद्ध है सांसारिक का के उनकी में रक्षा कर पाऊंगा यह जो कापर पूछ रहे है मा इसका इंटरप्रिटेशन मास्टर महाशय इस तरह से दे रहे हैं केवल पाड़ी भीतर जिनि ली देखीते पाते छ घर के भीतर की चीज वो देख रहे है आर मने करते छ ज जीवन उद्देश केवल देहो श और विषय कर्मा और मन में सोच रहे हैं कि जीवन का उद्देश्य है सिर्फ देहस और वि कनी ओ कांचन ताई की ठाकुर बो क्या किसी लिए यह सोच कर के य जितने भी सांसारिक लोग है ब्रह्म भक्त है मुझे घेर कर जो खड़े वो तो सब संसार में बद्ध है मैं उनकी रक्षा कैसे कर पाऊंगा यह सोच कर के ही क्या ठाकुर यह बोल रहे हैं कि मां आमाई अनली केन मां मुझे यहां पर क्यों आई है अमी की बे भीतर रो करते क्या इनकी धन के भीतर में से रक्षा कर पाऊंगा यह बात ठाकुर शायद इसीलिए मा काली पु तो आज यही तक पर फिर से अ शरा क्योंकि यह एक ऐसा इशू है एक ऐसा एक क्वेश्चन है कि जिसका कोई यूनिवर्सल आंसर नहीं हो सकता हम सबको अपने अपने हिसाब से इंटरप्रेट करना है राइट क्योंकि ठाकुर को इक्वेशन में रखे कि नहीं वो एक बड़ा सीरियस क्वेश्चन है और दूसरा है कि स्वामी जी ने जो दिया वो जो बाह्य दृष्टि से तो हम एक देन सकते हैं किंतु एक जो अदृश्य उनका जो एक दान है ठाकुर ने स्वामी जी ने खुद का ठाकुर के बारे में जो कहा था कि उन्होंने ब्रह्म कुंडलिनी को जागृत कर दिया है पूरे विश्व की जो सुश आत्मा है उसको जागृत कर दिया है तो वो तो एक अदृश्य एक एक ऐसा कार्य है कॉस्मिक लेवल प जिसकी तो हम कल्पना भी नहीं कर सकते स्वामी जी ने कहा न दूसरा विवेकानंद आएगा तब वह समझ पाएगा कि इस विवेकानंद ने क्या किया है तो अल्टीमेटली इस इक्वेशन की दोनों साइड में अदृश्य परिब अननोन फैक्टर्स इतने सारे हैं कि अपनी बुद्धि से अभी कैसे इंटरमट करें इसको इसके बारे में सोचते रहना है सोचते रहना है ध्यान करने के समय जब करने के समय तो उससे दो चीज होगा एक तो राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य में बड़ा एक डीप अपना इनसाइट आएगा वेदांत क्या है आध्यात्मिकता क्या है उसके बारे में अपना अंडरस्टैंडिंग बढ़ता जाएगा और एक सत चिंतन में मन प्रवृत हो फिर जब जीवन का आखिरी समय आएगा हम साधु लोग रिटायर होकर के आरोग्य भवन में जाते हैं ब मठ में तो हम मैं जद आरोग्य भवन में बैठा ऊंगा एक दिन कहीं कि दिन सनली स्पार्क होगा कि अरे हां इसका तो यह उत्तर है स्लेन करना हैट कनेक्शन जाति प्रथा के बारे में ठाकुर ने खुद कहा है कि जाति प्रथा एक उपाय से चली जाएगी और वो उपाय है भक्ति आ चंडाल मने ब्राह्मण से लेकर के चंडाल को आप अपने आलिंगन बद्ध कर सकते हैं यदि आप सबकी के भीतर में उसी ईश्वर का दर्शन करेंगे तो भक्ति एक पाए जो कि जितने भी ये सामाजिक भूषण है उस सबको काट सकती है तो ठाकुर भी और स्वामी जी भी स्वामी जी ने जो भारत आकर के जो सब मैसेज वगैरह दिया उन्होंने कहा कि सोशल रिफॉर्म अपना काम नहीं है अपना काम है सोशल ट्रांसफर्ट में यह पूरे समाज को ईश्वर की ओर ले जा रहा यदि बहते पानी को आप एक कुए में बांध देंगे एक बर्तन में बांध देंगे तो उसके भीतर में जीवा वगैरह जो सब वो तो पढने ही वाला है पानी तो बहते रहना चाहिए तब तो कहीं जाकर के वह सुषण निर्मल होगा पानी बंद जाएगा तो उसके भीतर में नील है कचरा है सब जमा होगा तो यह जो भारतीय लोगों ने अपने कोय काला पानी क्रॉस नहीं करना है बाहर की ये जो दसरे दोष को की जो प्रगति है उसको स्वीकार नहीं करना है अपने भीतर के जो रत्ना है दूसरों के साथ में शेयर नहीं करना है वो जो अपने को बांध दिया ना वो है सबसे बड़ा दूषण स्वामी जी की दृष्टि से कि हमको बाहर जाकर के आदान प्रदान करना है विचारों का विनिमय करना है यूरोप है जापान है अमेरिका है देखिए कि वे लोग सामाजिक और पॉलिटिकल इकोनॉमिक और ये इंडस्ट्रियल साइंस टेक्नोलॉजी क्षेत्र में कितने बढ़ रहे उनसे वो चीज लो और उनके साथ में अपने ये जो सनातन ऋषि जो अपने को धन देकर के गए हैं बारसे में वो उनके साथ मा ये आदान प्रदान देशों के बीच में जदी पड़ेगा तब कहीं जाकर के अपनी सोसाइटी का जो ये है वो स्वामी जी ने कहा है ना कि ब्राह्मण नई नई वो ट्रेन आई चल रही थी वो उसको देखने के लिए अपने गांव से ट्रेन देखने के लिए गया जब वापस गया गांव में तो उस लोगों ने उसका बहिष्कार कर दिया कि वो अभी अपवित्र हो गया है तो ये सब अ जो एक साउथ में पंडित मिला था स्वामी जी को स्वामी जी उसके साथ में अपने विचार शेयर कर कि मैं विदेश में जाऊंगा अमेरिका में वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन है वहां पर जाके वेदांत के बारे में बात करूंगा तो अभी यह पंडित पता नहीं क्या उसके मन में आ गया और स्वामी जी के साथ आर्गुमेंट कर रहा है कर रहा है फिर आखिर में जोर-जोर से चिल्ला रहा है कदापि ना कदापि ना कदापि ना तो स्वामी जी को यह बात बड़ी मन में लग गई थी स्वामी जी इसके बारे में उल्लेख भी किया है कि इतना एक फेनेटिसिजम कि हम लोग दूसरे किसी के संपर्क में नहीं आएंगे उनके साथ विचारों का आधार प्रदान नहीं करेंगे तो हम लोग कभी भी डेवलप नहीं तो ठाकुर और स्वामी जी दोनों का कहना है कि ये जो सोशल इवेंट दिख रहे हैं उसके पीछे एक तो है कि विदेशी आक्रमण चलो वो इस्लामिक आक्रमण हुआ हमको सबको बचाने के लिए पर्दा प्रथा है बाल्य विवाह प्रथा है वह सब का एक प्रारंभ करना पड़ा किंतु वे लोग हम पर विजेता हो गए क्यों वो भी तो सबसे पहला प्रश्न है कि हम लोग इतने कमजोर क्यों हो गए तो जितने जितने हिस्ट्री में जाएंगे उतने उतने जो एक के बाद एक लेयर ओपन होते जाएंगे बुद्धिज्म ने सबको पकड़ पकड़ करके क्षत्रिय को भी और यह जो वैश्य शूद्र जितने भी है सबको यह भिखू बनाना शुरू किया साधु बनाना उसे साधु समाज में अवनति आ गई और का पूरा संहार हो गया भारत में फिर कहीं जाके शंकराचार्य को धर्म का पुनरुत्थान करना पड़ा वोह परंपरा फिर ठाकुर में कल्मिनेट हुई शंकराचार्य से लेकर के ठाकुर की एक यात्रा है पोस्ट बुद्धिज्म तो देखिए कि सेंटर्स बहुत सारे हैं सोशल इविक के और सबसे बड़ा फैक्टर स्वामी जी की दृष्टि से यह पोस्ट बुद्धिस्ट करप्शन जो था वह है और इसका सोल्यूशन हमको इतिहास में जाकर के ऐतिहासिक जो प्रॉब्लम्स थे इसको पहले सॉल्व करना है तब कहीं जाकर के धीरे-धीरे सोशल एल्स अपने से दूर होना शुरू हो जाएंगे यदि जोर जबरदस्ती करके यह सब करेंगे कि नहीं बच्चे की लड़की की शादी इतनी ही उम्र में होनी चाहिए फिर विधवा का विवाह होने नहीं चाहिए तो फिर यही सब झगड़ा चालू होगा जो कि ब्रह्म समाज में हो गया हां क्योंकि रूट ऑफ द प्रॉब्लम तो बहुत पीछे में जाता है ना 2000 साल पीछे में जाता है भारत की अवनति तो दो दिन में तो कोई नहीं है तो जब तक यह रूट नहीं समझेंगे तब तक आप इलाज कैसे करेंगे बुखार हो गया है डॉक्टर के पास जाएंगे पैरासिटामोल देता रहेगा तो उससे थोड़ा सा तो आपको ठीक होगा किंतु ब्लड टेस्ट नहीं करेंगे पता नहीं चलेगा डेंगू है कि मलेरिया है और उसका सोल्यूशन नहीं लाएंगे तब तक तो बुखार का सलूशन लाने से होगा नहीं अभी रिसेंटली मैंने किसी के नजरों से देखा वो पता है कि उसके फिजिकल कुछ प्रॉब्लम चल रहा है चल रहा है सोल्यूशन वो खुद डॉक्टर को दिखाना अवॉइड करते हैं जब डॉक्टर को दिखाया पता चला कैंसर अरे बाप ये क्या करें तो वो जब जो समय ट्रीटमेंट होने वाली संभावना थी वो समय चला गया तो ऐसा है कि जो जो रूट है उसको आपको अटैक करना होता है तब कहीं जाकर के उसके एसोसिएटेड सिंगटम है अपने से कंट्रोल में आ जाए जब तक आप सिप टॉ पे अटैक करते रहेंगे उप को नहीं पकड़ेंगे तब क्या होगा करप्शन पूरा ल जाएगा और फिर एक समय ऐसा आएगा कि अभी सोल्यूशन नहीं है कि टर्मिनल केस हो सब तरस अध्यन भी का अनेक दो तरह से है ना एक इनर वर्ल्ड है आउटर वर्ल्ड है इनर वर्ल्ड में है आपका ईश्वर मुखी मत एक आध्यात्मिक एक दृष्टिकोण होना चाहिए और बाहर की दृष्टि से जद देखे तो नेचुरल एक्सप्लोरेशन है एडवेंचरस नेस है एक कंपेज है अपने भाइयों बंधव के प्रति देशवासियों के प्रति एक एड क्यूरियोसिटी है ये साइ हम लोगों को तो क्या है वो जैसे वो बात हुआ ना कि एक भक्त ने दूसरे भक्त को कहा कि तुम ये भाव समाधि की बात करते हो तो तुम्हारे चेहरे प इतना टॉर्चर भाव दिखता है एक्सप्रेशन दिखता है मुझे पूरी चीज से घृणा हो गई थी अने इंडियनों को भी ये जो साइंस है वगैरह हमको रटा दिया जाता है यह रट लो वो रट लो बोलकर के साइंस मैथमेटिक्स प अप बड़ा हो जाती है किंतु एक्चुअली ये सब डेवलपमेंट आउट ऑफ क्यूरियोसिटी आउट ऑफ फंडर मेंट आउट ऑफ सेंस ऑफ एक्सप्लोरेशन यह सब हुआ है आप साइंस की हिस्ट्री तो पढ़िए न्यूटन सोच रहा है कि अरे भाई यह जो टाइड है समुंदर में यह जो भरती ओट क्यों आती यह जो सफर्जन जमीन पे ही क्यों गिरता है आकाश में क्यों नहीं उड़ता आइंस्टाइन यह सोचता है कि ये लिफ्ट में बैठ कर के मैं जद नीचे जाता हूं तो वो क्या उसके बीच में और ग्रेविटी में कोई डिफरेंस है कि वो फ्री फॉल और ग्रेविटी एक ही चीज है एंड स्पेस में जाकर के जीरो ग्रेविटी में रहना एक आउट ऑफ क्यूरियोसिटी आउट ऑफ वंडरमेंट आउट ऑफ एक मने एक अदर वर्नेस एक ड्रे मनेस उसमें से तो साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेवलप हुआ है हम लोग इतना संचित बन के हो गए हैं यदि किसी को एक ड्रीमी नेचर देखे इंट्रोवर्ट नेचर देखे तो उसको हमको ऐसा लगता है किय मेंटल पेशेंट है अपना सोसाइटी इतना हाइपर एक्टिव है मने एक दृष्टि से कि इतना हाइपर कनेक्टेड है एक दुश्मों के साथ में कि सब समय आपको कुछ ना कुछ बोलते रहना है थोड़ी सी भी देर आपने बात बंद करी तो फिर लोग बोलना शुरू कर देंगे इसके मन में कुछ ना कुछ गणब चल र है इसलिए बात नहीं कर रहा है