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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

Sri Ramakrishna Kathamrita 13 July 2023 पूर्व कथा - श्री रामकृष्ण के प्रथम प्रेमोन्माद की कहानी

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ओम स्थापना कल हमने देखा की किस तरह से ठाकुर अपने जीवन की पूर्व कथा अभी पूर्वक कथा का अर्थ है यहां पर मास्टर महाशय ने खुद लिखा है पूर्व कथा इसलिए हम का रहे हैं पूर्व कथा अर्थात की उन दोनों की बात जबकि ठाकुर के पास में उनके अंतरंग भक्ति नहीं आते थे उनके पास में इतना समय था की वह पंडित लोगों को देखने के लिए जाते थे उनके घर उनको मिलने के लिए जाते थे और एकदम हम लोग हनुमान करके सोच सकते हैं की वह कितना सुंदर दिन होंगे हम लोग टहलते टहलते कालीबाड़ी में चले गए हैं देखा की ठाकुर अपने कमरे में बैठे हुए हैं अकेले और हमने जमीन पर बैठकर वो गंगा वाला जो दरवाजा है जो गंगा नदी की और खुलना है दरवाजा वहां पर बैठकर हमने ठाकुर के साथ में दोपहर को दो-तीन घंटा गैप लगा दिया फिर हम से टहलते अपने घर वापस ए गए जैसे की इस जगत में हमारे ठाकुर और फिर इस गंगा नदी और ये पेड़ पौधे मां काली इन सबके अलावा जैसे की इस जगत में कोई है ही नहीं इतना सुंदर सुहाना वो मतलब वो दृश्य होता होगा बात-बात में तो हमको पता है की हम जब भी जानेंगे ठाकुर के अंतरंग भक्ति जब आना शुरू हो गए थे तब तो ठाकुर के पास में सब समय दो या तीन भक्ति बैठे ही रहते थे यह लाटू है यह राखल है राजा महाराजा इन लोगों ने तो ठाकुर के साथ में आकर के रहना शुरू कर दिया था इसलिए बात बाद में कथामृत के बड़े में कथामृत में पढ़ने हैं तो मास्टर महाशय जब भी जाते हैं तो लिखने हैं की तिथि नक्षत्र तिथि वार नक्षत्र मैन कौन सा दिन है वह गंगा कौन सी डायरेक्शन में बा रही है उत्तर वहिनी कौन सी डायरेक्शन में बा रही है और साथ में यह भी लिखने हैं की ठाकुर के साथ में कौन उपस्थित है तो ऐसा बहुत रैली होता है की एवं पहले दर्शन में ही हमने देखा की वो सिद्धू के साथ में घूमते घूमते दक्षिणेश्वर में ए गए हैं देखा की ठाकुर के कमरे में जाकर के देखा की भक्तों लोगों के सामने बैठकर के ठाकुर बात कर रहे हैं तो मास्टर महाशय को ऐसा महसूस हुआ जैसे की सुखदेव स्वयं भागवत कथा सुना रहे हो किंतु वह तो तभी सुनेंगे जब सामने वो वो श्रोता उपस्थित है तो ऐसा बहुत रेयरली होता है की ठाकुर के साथ में अंतरंग भक्तों का आ अकेले मिलन हो होगा होता ही होगा होता है हुआ है हमने बहुत कुछ पढ़ा भी है नरेंद्र के साथ में ठाकुर ये बहुत साड़ी बातें हुई थी जो की एकांत में हुई थी वगैरह-वगैरह किंतु हम जैसे नहीं लगता की हम जल्दी जाते ठाकुर के पास में तो हमको कोई अंतरंग भक्ति में स्थान मिलता हम लोग ऐसे ही घूमते घूमते चले जाते और वैसे ठाकुर का कथामृतपान करके हम लोग पवित्र हो जाते सिद्ध कम हो जाते हम लोग हमारा जीवन सार्थक हो जाता किंतु क्या ठाकुर के अंतरंग भक्तों में हमको स्थान मिलता यदि हम उसे समय उपस्थित होते हैं पता नहीं किसको पता मुझे नहीं लगता की मेरे संस्कार इतने पवित्र है इतने दृढ़ है इतने सुंदर है की आपको अपने अंतरिम शिष्यों में स्थान दे दें तो मैं तो शायद ऐसे ही लोगों में से होऊंगा की ठाकुर के कमरे में गए दो-तीन बार उनकी बात सुन ली और बस धनिया हो करके घर लोट आया तो यदि इस तरह से ठाकुर के पास जाना है एक सामान्य भक्ति हो करके अंतरंग भक्ति नहीं एक सामान्य भक्ति हो करके जाना है तो यह मास्टर महाशय जिसको पूर्व जीवन कहते हैं ठाकुर का पूर्व कथा जिसके बड़े में ठाकुर हमको बता रहे हैं उसे समय जाना था तो क्या होता जाना है नेक्स्ट टाइम जब ठाकुर आएंगे तो पहले से ही बुकिंग करवा लेना है की आप अपने अंतर साधना समाप्त होती है अंतरंग भक्तों को मिलते हैं इसके बीच वाला जो पीरियड है उसमें हमको बोला ना उसमें हम आकर के आपके साथ बात करके हम घर चले जाएंगे और शांत हो जाएंगे और फिर वही जो कुछ क्षण कुछ दिन या तो कुछ घंटे आपके बात आपकी बात सुनते हुए हमने बीते इस का स्मरण मनन निदिद्याशन करते करते हमारा शरीर जाए ईश्वर के पद पद्भमों में ठाकुर के पड़ा में विलेन हो आखिरी दिन तो इतना हम आज से ही बुकिंग करवा के ठाकुर के पास रख लेते हैं तो वही पूर्व दोनों की बात है कृष्णकेश्वर के बड़े में बात हुई थी आगे चलते हैं ठाकुर कहते हैं उन्माद अवस्थाएं लोक के ठीक-ठीक तथा हुक्कठा बोले तुम जब ईश्वर प्रेम का उन्माद उनके सर पर स्वर हो जाता था तब ठाकुर कहते हैं उसे अवस्था में मैं लोगों को ठीक-ठीक बात कहता जो हकीकत है जो सत्य कथा है वह का देता अभी वो संस्कृत में कहते हैं ना सत्यम दम वह सब से दूर की बात है प्रेम कुछ नहीं सत्य कथा बोलनी है और इस तरह से बोलनी है की जैसे की सामने वाला जब सुनता है तो उसके लिए जो कुछ संस्कार है टूट जाए ये जो प्रियंवदा वाला क्या है की हम लोगों की जैसे सामान्य लोगों के लिए यह सब नियम ठीक है किंतु ठाकुर तो क्यों आते हैं हमारे संस्कारों को तोड़ने के लिए कुछ संस्कारों को तोड़ने के लिए कब टूटे हैं जब किसी कोई संस्कार पर आघात करता है और ये आघात कब होता है जब कोई कठोर बात हमको देता है जैसे की हम लोग में जॉइन करने के लिए गया था बेलूर मठ में तो अभी कभी-कभी नहीं उठ पता था सुबह को ऐसा सुबह को 3:30 बजे उठाना पूरा जीवन में तो हमने तो 7:00 बजे ऐसा ही 6:30 साथ ऐसा ही हम लोग उठाते हैं जीवन में हमारे विद्यार्थी जीवन में क्योंकि क्या है की स्कूल में जाना है तो उसके लिए इससे ज्यादा आगे उठने की जरूर नहीं बेलूर मठ में ब्रह्मचारी होने को गए हैं तो 3:30 को उठाना है अभी रात को ऐसा भी नहीं है की जल्दी सो जाते हैं सोना भी 10:30 के बाद में होता है तो अभी नींद होती नहीं है पुरी तो बड़ा ही फिर उसे सुबह को उठने में दिक्कत होती है तो अभी यदि हमको कोई ऐसा छोड़ देता की अच्छा ठीक है जब उठाना चाहे उठो या तो जब चाहे जो करो तो फिर क्या है की ये सुबह को उठने का हैबिट कभी हमारा बंता नहीं किंतु वहां पर ऐसा था की जो कोई एक दो दिन ना जाए तो सीधा हमारे इंचार्ज महाराज जो ट्रस्टी महाराज थे उनके पास में भेज देते थे और महाराज बोल देते जो तुम घर चले जो अभी उसे समय बड़ा डर ग जाता था बाद में बाद में पता चला की इस तरह से सुबह नहीं उठ पे बोल करके किसी को घर वापस नहीं भेजो गया है बहुत सारे लोग घर वापस चले जाते थे किंतु वो तो फिर उनके खुद के संस्कार कम पद जाते थे वो मतलब कोई गाड़ी लेने के लिए जाते हैं ₹5 लाख की गाड़ी और वहां पे जाकर के हम भाव लाल करते हैं ये गाड़ी दे दो वो गाड़ी नहीं आई है उसमें ये सब फैसिलिटी है ऐसी है फोर व्हील ड्राइव है क्या-क्या नहीं है फिर बोला की 5 लाख की हमने ठीक की फिर वो पॉकेट में से वो निकाल के देखा मोबाइल पेमेंट करने के लिए पता चला 4.5 लाख ही है हमारे अकाउंट में पांच लोग 5 लाख नहीं है तो गाड़ी नहीं परचेज हुई वापस ए जाए तो वैसे ही ऐसा कहानी भी कभी कोई हो जाता है की मार्केट वैराग्य से उत्पत्ति हो करके उद्दीपित होकर के वो साधु बने के लिए चला आता है ब्रह्मचारी बने के लिए किंतु फिर संस्कार कम पद जाते हैं बोल करके संस्कार अच्छे होंगे बोलकर के एक बार तो वो साधु बने के लिए आया तो इतने सफिशिएंट संस्कार नहीं थे की वह फिर वहां पर र पे लंबे समय के लिए तो फिर वो कम पद गए संस्कार उसको घर जाना पड़ा वापस तो दूसरी बात है तो जो भी है घर चले जाते थे तो इसलिए क्योंकि उनके संस्कार उनको सपोर्ट नहीं करते थे इसलिए नहीं की सुबह को उठ नहीं पता था वो सब हमको डर दिखाने के लिए कहा जाता था किंतु जो भी है ऐसा डर दिखाई थे तो बोल करके हम लोग सुबह को उठने का हमको हैबिट हुआ तो ये तो अवतार वरिष्ठ स्वयं है वो कोई डर पर नहीं दिखाएंगे सीधा चांटा मार देंगे चेहरे के ऊपर में मुंह के ऊपर में और वही सब बात आपको राज का रहे हैं उन्माद अवस्थाएं उन्माद अवस्था में लोगों को ठीक-ठीक बात कहता जो हक से बोलने वाली बात है वो कहता करू के मानता ना मैन किसी का डर नहीं रखना था बड़ों लोग देख ले भाई हो तो ना मैन करू के मानता ना अर्थात की किसी की बात सुनता नहीं था बड़ों लोग देख ले भाई हो तो नाम बड़ा आदमी देखकर के डर नहीं लगता था हम लोग तो दो बार सोचेंगे की हमारे से सीनरी है हम जिसके पास में बहुत सर पैसा है यहां पे आश्रम में आते हैं बहुत सारे दाता भी आते हैं कोई इस ऑफिसर ना कोई गवर्नमेंट ऑफिसर भी आते हैं तो हम लोग साधु लोग भी बड़ा रिस्पेक्टफुली उनके साथ में बात करते हैं उनका कभी-कभी ऐसा कोई बिहेवियर होगा जो की हमको अच्छा नहीं लगता फिर भी हम बोलने से दीदा करते हैं संकोच करते हैं की भाई बड़ा आदमी है बड़ा मां लेंगे तो फिर उन नेसेसरी आश्रम को फिर वो नुकसान कर सकता है ऐसा ऐसा अपने मां में बोलकर सोच करके हम लोग फिर ऐसा ज्यादा कुछ उसके पीछे लगता नहीं है उसको बोलते नहीं है कुछ किंतु ठाकुर की सामने जो कोई भी हो जाए जल्दी लगेगा की इसका जो व्यवहार है वह आपत्तिजनक है सीधा उसके मुंह पर बोल देंगे किंतु कब जब यह उन्माद अवस्था हुई थी तब जादू मल्लिका बाघ ने जतिन रायशैची लो जादू मलिक का बागान जो है यदि मल्लिका दक्षिणेश्वर कालीबाड़ी के पास में ही है वहां पर यतींद्र आया था अभी यहां पर लिखा नहीं है यतेंद्र कौन है और मुझे भी याद नहीं ए रहा किंतु मैं मां लेट हूं की कोई बड़ा आदमी होगा धनवान व्यक्ति होगा उसे समय के कोलकाता का अमीरों से खाने चला मैं भी उसे समय वहां पे था अनीता के बोलना करतब्बों की मैंने उसको पूछा ही जितेंद्र को की कर्तव्य क्या है जितेंद्र बोले अमरा संसारी लोग यतींद्र ने कहा हम लोग तो संसार ही है आम आदमी अच्छे क्या हम लोगों की मुक्ति है राजा युधिष्ठिर ही नरक दर्शन कोरेची लेने राजा युधिष्ठिर ने भी नरक दर्शन किया था देखिए वो किस तरह से यदि किसी को कहा जाए की जीवन का कर्तव्य क्या है या तो फिर कहेंगे किसी विद्यार्थी को पूछा जाए की विद्यार्थी का कर्तव्य क्या है तो विद्यार्थी को यह कहना चाहिए ना की पढ़ाई लिखी करके अच्छे मार्क्स प्राप्त हो जिससे की मैं बटर जब जो है अच्छी नौकरी या तो फिर कोई अच्छी कॉलेज में मुझे एडमिशन मिले ये विद्यार्थी जीवन का कर्तव्य है किंतु जब विद्यार्थी ये खाने लगे अरे भाई मेरे दिमाग में तो बुद्धि ही नहीं है मेरे मुझे जो पढ़ना वाले टीचर है वो टीचर लोग भी मूर्ख है मुझे कुछ ठीक से समझा बन नहीं का रहा है या तो फिर का देंगे मेरे माता-पिता के पास में इतने पैसे नहीं है की मुझे सब स्टडी मटेरियल जुगाड़ करके दे दी अच्छी किताबें अच्छा क्लासेस आजकल तो कोचिंग क्लास का बहुत चला है तो कोई बड़े महंगे वाले कोचिंग क्लास में मुझे एडमिशन दे दे ऐसा पैसा नहीं है इसलिए मेरे से तो ज्यादा कुछ होगा नहीं यदि पास हो गया तो बहुत हो गया यदि कोई विद्यार्थी ऐसा बोलना है तो हमको क्या लगता है पहले ही क्या सोचा आएगा अपने मां में की हमारे मां में वो सब कहानी ए जाएगी जो की हमने पेपर में पड़ी है मैंने खुद मैंने ऐसी बहुत सारे आर्टिकल पड़े हैं न्यूज़पेपर में की वो एक भिखारी एक पुल के नीचे र रहा है हमारे शहर की बात है वो वो फ्लावर बना था नया नया उसके नीचे में एक भिखारी र रहा है भिक्षा मांग करके अपने परिवार का निर्वाह करता है उसकी लड़की ने बोर्ड की एग्जामिनेशन में फिफ्थ होने की सिक्स्थ नंबर लेकर आई थी सोच के देखिए एक भिखारी फ्लावर के नीचे र रहा है खुला में भिक्षा करके अपनी बच्ची को पड़ता है लड़की को पड़ता है और बोर्ड की एग्जाम में उसका रैंक कहा जाता है टॉप टेन में ऐसी तो हमने कहानी कितनी पड़ी होगी गरीब घर का लड़का है या गरीब घर की लड़की है बड़ा संघर्ष करके पढ़ाई लिखी कर रही है उसकी मां शायद हो शक्ति है दूसरों के घर में बर्तन धोने के लिए या तो फिर झाड़ू पूछा लगाने के लिए जाति है पिताजी शायद रिक्शा चलते हैं किंतु ऐसी स्थिति में भी यह लड़के लड़कियां मेहनत करके पढ़ने हैं और बोर्ड में रैंक लेट हैं फर्स्ट रैंक से क्लर्क सेकंड रेंज ऐसा वो 10th की एग्जाम में 12th की एग्जाम में पूरे स्टेट में और टॉप टेन में ए जाते हैं ऐसी कहानी हमने कितनी बड़ी है न्यूज़पेपर में तो यह सब हमको याद ए जाता है फिर हमको लगता है की यह जो लड़का बहन बना रहा है की नहीं मेरे पिताजी के पास पैसा नहीं है या तो मैं मूर्ख हूं या तो मेरे टीचर मूर्ख है मेरा कुछ होने वाला नहीं है तब हमको क्या लगता है इसको पढ़ना नहीं है बहाने बाजी बना रहा है है तो जब यह यतींद्र को ठाकुर ने पूछा की भाई जीवन का कर्तव्य क्या है अभी जो ठाकुर ने मुंह से बोला नहीं किंतु जो की अपेक्षित है जो उत्तर की जीवन का कर्तव्य तो ईश्वर प्रताप ही है तो यतींद्र समझ गया की ठाकुर क्या पूछना चाहते हैं तो फिर उसने लंबा अपना कहना कहानी शुरू कर दिया बोला की हम संसारी लोग हैं हमको मुक्ति कहां है राजा युधिष्ठिर को भी नरक दर्शन करना पड़ा था क्या क्या सब उल्टा-पुल्टा बोल रहा है तो मैंने युद्ध युधिष्ठिर ने एक बार झूठ बोला था तो वो हाथी को मार दिया था और ये कहकर की वो द्रोणाचार्य का पुत्र मा गया है तो द्रोणाचार्य पूछने के लिए गए की युधिष्ठिर को तो झूठ नहीं बोलेगा पूछा की कौन मा गया तो बोला की आपका लड़का वो जो है वो मृत्यु वो लड़के का नाम देकर के कहा की क्या वो मा गया है तो युधिष्ठिर ने कहा किंतु फिर साथ-साथ में क्या बोले ना रावा कुंजारोवा यानी की ये ये नाम का एक कोई मा गया है किंतु यह आदमी है ना है की वह हर हाथी है पता नहीं कोई हो सकता है मैंने पता नहीं नहीं कोई भी हो सकता है दोनों में से तो अभी ये पूरे जीवन में युधिष्ठिर ने झूठ नहीं बोला था सत्य वचन का पालनपुर किया था बोलकर के उनका रथ जो है जमीन से एक एन की कर पांच एच ऊपर में चला था उड़ता था मैं कितने इंच वो मैं भूल गया मेरे ख्याल से वो पढ़ा भी था मैंने जो भी है जो जमीन से ऊपर में उड़ता था किंतु सत्य वचन एक बार भांग कर दिया जीवन में बोलकर के वो रथ जो है जमीन को स्पर्श हो गया और जमीन पे चलने लगा जैसे की बाकी सब राजाओं का रथ जमीन पे चला है इस तरह से और एक झूठ बोलने के लिए एक बार नरक दर्शन करना पड़ा था तो अभी यतेंद्र बोलना है की यदि रुधिर युधिष्ठिर जैसे जो राजा है उन्होंने भी संसार में एक बार लिपट हो गए हैं उनको भी यदि नरक दर्शन करना पड़ा है तो हम लोग इस खेत की मूली है हम लोग क्या साधन भजन करेंगे हमारे लिए तो भोग वगैरा ठीक है शांति से भोग करेंगे फिर नेक्स्ट जन्म में देखा जाएगा की ईश्वर का साधन भजन करना है की नहीं नाम स्मरण करना है की नहीं मैंने पूरा वो आलस की वजह से एन की मुद्दत की वजह से एन की भोग में लिपट होने की वजह से जो बहानेबाजी जो एक गृहस्ती या तो फिर एक मूड व्यक्ति बनाता है बहाने इस तरह से ही यतेंद्र बहाने बना रहा था अमर बड़ों राज हलो तब मुझे बड़ा गुस्सा हो गया बड़ा गुस्सा ए गया मैं बड़ा ही नाराज हो गया ठाकुर कहता है बोलना ठाकुर कहते हैं मैंने कहा तुम्ही की रकम लोग का तुम किस तरह के आदमी हो युधिष्ठिर केवल नारद दर्शन ही एक मां में करके बैठ गए हो युधिष्ठिर है सत्ता को था कोमा धैरजो विवेक बेरगो ईश्वर भक्ति ईश्वर का यह सत्य कथा क्षमा धैर्य विवेक वैराग्य ईश्वर के ऊपर में भक्ति ये जितने सदगुण है इसमें से कोई भी तुमको याद नहीं है क्या तुम सिर्फ एक युधिष्ठी ने नरक दर्शन किया था की युधिष्ठिर के बड़े में सिर्फ एक जो नेगेटिव बात है वही मां में करके बैठे हो और अपनी वासनाओं को पूछने के लिए एक बहन बनाकर के बैठे हो स्वामी जी ने अमेरिका में लेक्चर देते हुए बहुत सुंदर बात कहीं थी और इट्स फीरेस्ट फ्रूट एक जो वृक्ष है उसकी पहचान क्या है उसका सबसे स्वादिष्ट फल वृक्ष के ऊपर में जब फल आते हैं तो कोई कोई फल कच्छ हो जाता है कोई पाक जाता है कोई गिरता है तो कोई कड़वा हो जाता है ये सब विभिन्न एक फल के ऊपर में यदि 100 एक वृक्ष के ऊपर में 100 फल आएंगे तो ये सब बहुत सारे फल के साथ में ऐसा होगा किंतु वो वृक्ष की पहचान क्या है ऐसा फल नहीं की जो पाक गया है जिसमें कीड़े पद गए हैं ऐसा फल नहीं जो की बिगड़ गया है ऐसा फल नहीं जो की कच्छ र गया है ऐसा फल नहीं जिसके ऊपर में कौवे ने चंद अपनी कोंच मेरी है वृक्ष की पहचान है वो फल जो की सबसे सुंदर दिखने में है सबसे स्वादिष्ट है एकदम अच्छे से पक्का है कच्छ भी नहीं है ज्यादा भी पाक नहीं गया है एकदम उसको ठीक अव्यवस्था में है वह फल उसे वृक्ष की पहचान है तो यहां पर तो ये जो यतेंद्र ने बिल्कुल उल्टा कर दिया वृक्ष की पहचान क्या कर दी जो की सबसे सदा हुआ फल था उसके बेस पर उसे वृक्ष की पहचान करके यह बैठ रहा है रोकटो की बोलते जा अच्छे नाम ठाकुर कहते हैं की मैं और भी उसको क्या सब सुनने वाला था हृदय अमर मुक्चे पे धार ले हृदय ने ठाकुर का भांजा हृदय ठाकुर के साथ में सब समय राहत था ठाकुर की सेवा करता था और ठाकुर के साथ में सब जगह जाता था तो यह हृदय ने ठाकुर का मुंह दबाकर के बैंड कर दिया मैंने यकीन जब बड़ा आदमी होगा अभी ठाकुर बेचारे गरीब ब्राह्मण है वो काली मां काली के पुजारी है अभी उनके ऊपर नाराज हो जाएगा तो पता नहीं क्या से क्या कर देगा हालांकि ठाकुर को ऐसे कोई डरने की जरूर नहीं है वो मथुरा बाबू जो है वो ठाकुर की रक्षा करने के लिए खड़ी तलवार लेकर के खड़े हैं एक बार वो एक अच्छा एक दृश्य है वो दक्षिणेश्वर में ठाकुर वह शिवा मंदिर का दर्शन कर रहे थे सुद्दनली उनके मां के ऊपर में भगवान शिवा का आवेश ए गया शिवा के मां में शिवा के प्रति उनकी भक्ति इतनी मतलब बाढ़ गई की वह समाधि में चले गए भाव समाधि में और शिवा तांडव स्तोत्र माही माही स्तोत्र का पाठ करने लगे तो यह देख करके सब लोग खड़े हो गए काली मंदिर में से अरे ये पागल बाहमून मैंने पगला बहुमून लड़की ये छोटू भट्टाचार्य महाशय पागल हो गए हैं फिर से और देख पता नहीं क्या-क्या करेंगे तो देखने के लिए लोग ए गए सब उसे समय वो मथुरा बाबू भी वहां पे थे कुठीवाड़ी में है तो उन्होंने आकर के देखा की लोग इकट्ठा हो गए अभी ऐसा लगा की किसी ने कोई वो वहां के वो जो भंडारी भंडारी तो नहीं कोठारी ना की ये सब खजांची उसको कहते थे जो की वहां का यह जो एडमिनिस्ट्रेटर होता था कालीबाड़ी का तो वो खजांची ने शायद ऐसा सोचा होगा की उनको पकड़ करके उनके रूम में जाकर के दरवाजा बैंड कर दो रूम में जाकर के जितना पगलापन करना होकर ऐसा शायद उसने सोचा होगा लिखा नहीं है मैं हनुमान करके बोल रहा हूं तब मथुरा बाबू ने क्या किया तलवार थी उनके पास में तलवार निकाल और खली तलवार लेकर के खड़े रहे ठाकुर की पहरेदारी करने के लिए उसे ठाकुर के वो चौकीदार के रूप में और जोर से चिल्ला के कहा जो किसी ने भट्टाचार्य महाशय को थोड़ा सा भी विकसित किया है मैं उसका सर कैट दूंगा तो देखिए की उसे समय मथुरा बाबू भी कोई कम नहीं थे जब ठाकुर ने मथुरा बाबू को कहा की चलो हम लोग वो देवेंद्र नाथ टैगोर है देवेंद्र नाथ ठाकुर उसको मिलने के लिए जाते हैं उसे समय देवेंद्र नाथ ठाकुर का उसे समय कोलकाता में बहुत नाम था ब्राह्मण समाज के स्थापक भी थे स्थापक थे की नहीं मैं एक्जेक्टली नहीं का सकता याद नहीं ए रहा है किंतु ब्राह्मण समाज के वो बड़े ही अभिनय अंगत है और जो जिसको की लिटरेरी सर्किल कहते हैं भद्रोह समाज जाके बोले मैन वो जो की वो हायर क्लास अपर क्लास अपार क्लास में ठाकुर परिवार का बड़ा ही सम्मान था बड़ी ही प्रतिष्ठा थी तो ऐसे देवेंद्र नाथ ठाकुर को मिलने के लिए देवेंद्र ठाकुर को मिलने के लिए हमारे ठाकुर उनका भी नाम ठाकुर करके बुलेट हैं तो वही देवेंद्र नाथ टैगोर को मिलने के लिए ठाकुर रेडी हो गए और मधुर बाबू को बोला की चलो हम उनको मिलने के लिए जाते तुम मुझे लेकर चलो अभी माथुर बाबू का खुद का अहंकारी इतना है की वो मैं इतना बड़ा जमींदार हूं मैं इतनी बड़ी कालीबाड़ी का व्यवस्थापक हूं रसमणि की लड़की के साथ में मेरी शादी हुई है उनका परिवार का मैं जमाई हूं मैं थोड़ी ना देवेंद्रनाथ टैगोर के वो मिलने के लिए सामने से जाऊंगा उसको मिलन है तो वो मुझे मिलने के लिए आए मैं तो उसको मिलने को ऐसा एक हम कर राहत है ना किंतु फिर ठाकुर जब जीत करके बैठ जाता है तो फिर उनको तो माना करना भी तो संभव नहीं है ले आखिर में मथुरा बाबू ने कहा ठीक है बाबा चलो बाबा कर के पुकारते थे ठाकुर को ठीक है बाबा चलो मैं भी रविंद्र देवेंद्र नाथ के साथ में वो एक साथ स्कूल में पढ़ना था तो मेरा वो तो बालियान बंधु है तो चलो इस बहाने हम उसको जाकर के मिलकर आते हैं तो मतलब यह माथुर बाबू भी वो प्रतिष्ठित समाज का एक बड़ा ही अभिन्न अंग था बड़ा ही एक प्रतिष्ठित व्यक्ति था तो ऐसे ठाकुर डरने की जरूर नहीं है किंतु फिर भी एक छोटे मतलब गरीब ब्राह्मण के घर से आए हैं तो हृदय का तो खास करके ठाकुर तो प्रेम ईश्वर भक्ति के उन्माद में चले जाते थे तो ये फिर वो कौन सामने बैठा है वो सोचते नहीं थे हृदय का था थोड़ा सा की डर के चलते हैं लोगों से बड़े लोगों से दो चीज होती है की कोई हमारा अहित एन कर दें ये भी एक राहत है फिर उन लोगों से कुछ अपने की भी अपेक्षा रहती है हृदय का ऐसा था की लोगों के पास सब पैसा निकलेगा कुछ इतना एक्चुअली पैसा निकाला था की नहीं पता नहीं किंतु उसकी इस तरह की मनोभावना थी बड़े लोग ठाकुर के पास बहुत आते थे तो उसमें से उनको का समय से एक बार वो मथुरा बाबू के साथ में डिस्कस कर रहा था मथुरा बाबू ने सोच लिया की ठाकुर की सेवा ठीक से चले इसके लिए उनको एक जमींदारी छोटा सा लिख के दे दे तो हृदय बड़ा खुश हो गया था बोला जमींदारी मिलेगी तो उसका तो व्यवस्था में ही करना है मुझे ही करनी है ठाकुर तो वैसे ही वो भक्ति में दुबे हुए घूमते हैं उनका तो शरीर के ऊपर में वस्त्र भी नहीं रहते हैं धोती भी निकाल जाति है समाधि में चले जाते हैं है तो वह थोड़ी ना जमींदारी देखने वाले जमींदारी तो मैं भी देखूंगा और मैं जमींदार हो जाऊंगा ऐसा सोचते सोचते रेड बड़ा खुश हो गया था किंतु ठाकुर ने जैसे ही सुना जोर से दौड़ के गए और मतलब नाराज होकर के गला गली देने लगे बोला मथुरा बाबू को के अरे साले तुम मुझे क्या संसारी बनाना चाहते हो और साला शब्द ठाकुर का है मेरा नहीं है तो ठाकुर ने मथुरा बाबू को गली देकर के कहा था तो अभी ये हृदय का हिस्सा था की इस तरह से जमींदार यदि वह बन जाए या तो कोई धनिया आदमी उसका पालनपुर पोषण करना शुरू कर दे पैसा देना शुरू कर दे तो एक इस तरह का लालच उसके मां में था तो एक भाई की वजह से भी शायद ठाकुर को रॉक होगा और लालच की वजह से भी शायद ठाकुर को रॉक होगा की बाद में यतेंद्र के पास जाएगा पैसा मांगेगा और यतेंद्र ठाकुर शायद उसको दे देगा जो भी है उसमें हृदय ने ठाकुर का मुंह ढाबा करके बैंड कर दिया रोकटो की बोलते और भी क्या मैं यतींद्र को सुनने वाला था किंतु हृदय ने मेरा मुंह ढाबा करके बैंड कर दिया जितेंद्र इक्टू पड़े हमारे एक तू कहा जा छे बोले कोल जेलो थोड़ी डर के बाद में ही यतींद्र मुझे थोड़ा सा कम है ऐसा का के चला गया मैन सबके सामने अपमान हो गया तो दूंगा मैन ये लोग तो ठाकुर को किस तरह से सोचेंगे दो कोटी का दो कौड़ी का एक काली का पुजारी मुझे सबके सामने ऐसा सुना करके गया ऐसे बड़े लोगों का तो हुंकार बड़ा एकदम यह होता है ना स्ट्रांग होता है और ठाकुर की ईश्वर भक्ति या तो ठाकुर अवतार स्वयं है यह मूड लोगों को तो यह सब दिखता नहीं है मैं मथुरा बाबू को दिखे गया था सभी धनी तो ऐसे होते नहीं है तो एक गरीब ब्राह्मी ने सबके सामने मेरी मेरा अपमान कर दिया और मैं उसको कुछ बोल भी नहीं पाया ठाकुर जब किसी के इस तरह से दांते थे किसी का साहस नहीं होता था ठाकुर के सामने झगड़ा करें या तो फिर ठाकुर के सामने और कोई गुस्सा दिखाएं हमको कभी कभी सोच कर के आश्चर्य होता है बड़े लोगों के सामने ठाकुर कुछ इस तरह से बोल देते थे तो क्या वह जैसे राष्ट्रमणि को चांटा मार दिया तो रश्मानी के सहयोग जो सी जो चौकीदार वगैरा तो होगी होंगे बड़े लोग तो साथ में सब दो तीन चमचों को लेकर के घूमते हैं तो उन्होंने क्या आकर के ठाकुर के साथ में झगड़ा वगैरा नहीं किया होगा किंतु हमने ये हृदय के पास से मैं सब बहुत सारे वर्णन पड़े हैं की जब ठाकुर के मां के ऊपर में एक आवेश होता था ईश्वर का तब इस तरह का उनका रुख होता था की उनको देखकर के डर लगता था उनको आप कुछ खाने ही पाएंगे ठाकुर जब मंदिर में पूजा करते थे कल भी हमने ये बट डिस्कस किया की मंदिर में पूजा करते थे तो मां काली को देने वाला भोग अपने से ग्रहण कर लेते थे कभी कभी मां काली के साथ में एक ही वो खाट में सेंड करते थे तो ये जो खजांची लोग देखने के लिए आए तो बाहर जाकर के फिर वो निंदा कर रहे हैं अरे देखिए छोटू भट्टाचार्य मशी क्या कर रहे हैं दिलों मैन मां काली के भोग के लिए जो पुरी बनाई है वो बिल्ली को मिला दिया ऐसा बोलकर के बाहर निंदा कर रहे हैं किंतु ठाकुर के सामने उनके मुंह पे कुछ भी बोलने का साहस किसी का नहीं होता था क्योंकि जगदंबा स्वयं जब उपस्थित होती है तो हम लोग तो एक सामान्य आदमी है पांच महाभूत के बने हुए माझा दिए तोक बीमारी तो ये पांच महाभूत का पिंजर कहां पे उड़ करके रख होकर के कहां चला जाएगा तो वो ठाकुर के सामने जब ठाकुर का इस तरह का एक भाभावेश होता था जब नाराज हो जाते थे या तो फिर महाकाली का इस तरह से भाव में आकर के पूजा करते थे ठाकुर को कुछ बोलने का किसी का साहस नहीं होता था हालांकि हृदय साथ-साथ में था सब समय तो उसका एक हक बंता है की ठाकुर को वो इस तरह का कोई कम करने से रॉक जैसे की फिर आखिर में मथुरा बाबू के पास में कंप्लेन जाए की ठाकुर यहां पर आकर के ऐसा बोल रहे थे फिर मथुरा को जा करके वो सब झगड़ा शांत करना पड़े ऐसा वो मतलब थोड़ा सा ठाकुर को संभल करके रखा था तो यतेंद्र ठाकुर को तो बेचारा कुछ बोल नहीं पाया सबके सामने अपमानित हो गया है तो अभी क्या करेगा तो मुझे थोड़ा सा कम है ऐसा बोल कर के उठ कर के खड़े होकर के चला गया ठाकुर ए गए कहते हैं दूसरा एक प्रसंग अनेक दिन पूरे कपड़े बहुत दोनों के बाद में कैप्टन कैप्टन विश्वनाथ उपाध्याय बोलकर के ठाकुर के भक्ति हैं उनके साथ में सोरींद्र ठाकुर के घर गया था अभी यह सुरेंद्र ठाकुर भी मां लेते हैं उसे समय का धनी प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा ताकि देखें बोलना उसको देखकर के मैंने कहा ठाकुर का रहे हैं की उसको देखकर के मैंने कहा तुम के राजा राजा बोलते पार्बोना सेट अमित थकता हो गया मैं तुमको राजा बजा बोलते मूल नहीं पाऊंगा क्यों क्योंकि वो गलत बात होगी अभी वो भारत वर्ष में पुराने राजा थे जिनका की सही सही क्षत्रिय खून जिनके शरीर में जिनकी रेगन में दौड़ रहा था और वह जैसे भगवान राम के बड़े में कहते हैं ना की रघुवंश समिति सदा चली आई प्राण जाए पर वचन ना जाए इस तरह के जो असली राजा थे प्रजा पालनपुर करने के लिए दुश्मनों के साथ में भीड़ जाएंगे अपने जीवन की भी परवाह नहीं करेंगे किसी को वचन दे दिया तो वचन पालनपुर करने के लिए भगवान दशरथ पिताजी दशरथ ने वचन दिया है तो वचन का पालनपुर करने के लिए 14 साल का वनवास जो है वनवास ग्रहण कर लेंगे किंतु पिताजी का वचन जो है वो मिथ्या नहीं होने देंगे रावण ने मां सीता का अपहरण कर लिया तो रावण के साथ में जाकर के युद्ध कर लेंगे तो ये प्रजा पलक जो है वो किसी ने मां सीता के चरित्र के बड़े में कोई कटु वचन किया की मां सीता को लंका से वापस लेकर आए हैं और सब र रहे हैं वो अयोध्या में किसी ने मां के बड़े में कुछ ऐसा का दिया तो फिर भगवान राम ने मां सीता को भी त्याग कर दिया आ लक्ष्मण को भी त्याग कर दिया तो ये जिम त्याग तपस्या वैराग्य जो पुरुषोत्तम है वो राम है मैन वो राजा है वो भारत वर्ष के असली राजा तो ये थे अभी आजकल के राजा आजकल के मनी की ठाकुर के समय के राजा तो कौन थे भारतवर्ष को गुलाम बनाने के लिए ब्रिटिश लोगों के साथ में जाकर के जो लोग फोंस भी रस्सी करते थे उन लोगों को खुश होकर के ब्रिटिश लोग राजा का किताब देते थे वो ये राजा कौन जो की गद्दार है भारत को ही ल कर के ब्रिटिश लोगों का खजाना बाढ़ रहा है ब्रिटिश लोगों की चापलूसी कर रहा है उनकी गुलामी कर रहा है और उसको बड़ा प्रतिष्ठा देने के लिए समाज में जिनको की ब्रिटिश लोगों ने राजा का किताब दिया है ये लोग सब राजा है ठाकुर कहते हैं की कहां राजा राम और कहां ये गंगू तेली मैन यह कहां राजा राम वो ये कहां के आजकल के दो कोटी के निकम्मी लोग जो की राजा का किताब लेकर घूमते हैं तो ठाकुर ने उसको मुंह पे बोल दिया तुम के राजा राजा बोलते पार्बोना किहो ना शूटर मिठा कथा होवे तुमको राजा आज मैं नहीं बोल पाऊंगा क्यों क्योंकि वो गलत बात होगी हमारी भारतीय परंपरा संस्कृति के अनुसार तुम राजा तो हो ही नहीं एक नंबर के गुलाम हो तुम ब्रिटिश लोगों के हालांकि ठाकुर इतना सब कुछ बोला नहीं है अमर अमर संगी खाने तक मेरे साथ में थोड़ी डर बात की अभी उसको भी सबके सामने बोला है अभी वो मां में है की ब्रिटिश लोगों ने मुझे राजा बनाया है किंतु उसके मां में भी तो है की गुलामी करके देशद्रोही करके मैं तो राजा बना हो राजा का खेती प्राप्त किया है नहीं राजा के कोई सदगुण है सत्य वचन पालनपुर का कोई गन है नहीं वो प्रजा पालनपुर का कोई गन है नहीं वो मतलब निष्ठा क्षत्रिय का कोई गन है उसके भीतर में वैसे ही वो चोरी चक्की करके वो लोगों को ल करके जमींदारी में से वो जो गरीब किसान है उसके पास में ज्यादा ज्यादा टैक्स निकाल कर के ब्रिटिश लोगों का खजाना भर रहा है वो बोल करके वो राजा उसके मां में भी ये बात पता है किंतु जब उसको कोई मुंह पे बोल देता है तो कितना भयानक उसको अपमान नहीं लगा होगा हम अनुमान करके का सकते हैं ब्रिटिश लोग आज आना जाना शुरू कर दिया रजोगुणी आदमी है बहुत सर कामकाज लेकर के बैठा है यह सुरेंद्र जितेंद्र के खबर पठानों से बोले पथले अमर गले बेड ना हो छे फिर जितेंद्र जितेंद्र के खबर पठानों हलो छे बोले पथले अमर गलत है जितेंद्र को बोल करके वो भेजो की ठाकुर आए हैं आओ मिलकर के बात करते हैं और यात्री इंद्र बोला ठाकुर का सॉन्ग एक बार हो गया है दूसरी बार सबके सामने अपमानित नहीं होना है झूठ-मुठ का वो बहन बनाकर के भेज दिया की मेरे गले में वेदना हुई है नहीं ए पाऊंगा मैन ठाकुर से अपमानित होना अभी उन लोगों को लगता है की अपमानित हुए हैं किंतु हमको पता है की जब ठाकुर कड़े शब्दों में मैन दांत करके हमको कुछ कहते हैं तो हमारे ही कुछ संस्कार काटेंगे हमारे लिए ही ये बड़ी अच्छी बात है हमारे ही साधन भजन में यह बड़ा सुविधा का बात है किंतु अभी यह लोग मूड तामसिक लोग है तो अभी क्या सोचेंगे क्या बोलेंगे ठाकुर के पास जान का वेट करके बात करने का मौका था उसने गाव दिया हम लोग आज के बाद में ठाकुर की वह मूर्ति है मंदिर में बिताई हुई रोज जाकर के दो बार आरती कर आरती में हम भाग लेते हैं भजन गेट हैं प्रार्थना करते हैं ध्यान करते हैं उनका दिया हुआ मंत्र नाम जाप करते हैं जो की ठाकुर का एक बार दर्शन हो जाए सपना में भी जल्दी हो जाए जल्दी दो आंखों से ना हो और ये मूर्ख है की ठाकुर वो बैठे हैं सामने से बुलाया भी आओ बैठे हैं बात करते हैं तो झूठ-मूठ का वो बहन बना दिया की गले में दर्द हो रहा है नहीं आऊंगा क्यों जाएगा तो ठाकुर फिर से सबके सामने अपमान कर देंगे