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ओम स्थापतयेचा धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप ने अवतार वरिष्ठ रामकृष्ण श्री राम कृष्णा कथा की वहां पर गए थे काशी में तो देखा की वो वहां पर जाकर के सेजो बाबू अर्थात की मधुर बाबू के साथ में राजा बाबू वहां का जो कोई लोकल धनी व्यक्ति होगा उसके घर पर बैठे थे और वही पैसों की बात बिजनेस की बात इतना प्रॉफिट हुआ इतना लॉस हुआ तो यह सब सुनकर के ठाकुर बेचारी इतने परेशान हो गए की रोटी रोटी मां को खाने लगे की मां यहां से तुम शनेश्वर में ही अच्छा था वहां पर तो यह सब बातें मुझे नहीं सुनने को पद्धति थी है की बहुत बार हम लोग तीर्थ दर्शन को जाते हैं तो वह वहां पर भगवान की पूजा करने के अलावा मंदिर की क्या स्थिति है वो देखने के अलावा भी बाकी बहुत साड़ी चीजों पे हमारी नजर ए जाति है की वहां के रास्ते कैसे हैं वहां के दुकान कैसे हैं वहां पे क्या मिलता है कौन सी चीज सस्ती है कौन सी चीज महंगी है वहां के लोग कैसे हैं तो किंतु यह हमारी दृष्टि जो है वो इतनी चारों आ डिसेंट्रलाइज हो गई है इतनी डर बिखेर हो गई है मैन इतनी चारों और फेल गई है की हम लोग एक चीज के ऊपर में कंसंट्रेट करके नहीं देख पाते जब तीर्थ दर्शन में जाते हैं तो भगवान के अलावा और कोई चीज के ऊपर में हमारी दृष्टि हनी ही नहीं चाहिए राजा महाराज के बड़े में है विशुद्ध आनंद जी महाराज वगैरा लोगों को लेकर के वो चेन्नई से उसे समय का मद्रास शशि महाराज ने व्यवस्था की थी राम कृष्णानंद जी महाराज ने की राजा महाराज को साउथ इंडिया बुलाएंगे साउथ इंडिया बुलाकर के वहां के भक्तों से भक्तों को आशीर्वाद भी दिलवाएंगे राजा महाराज के पास और फिर वहां के जो तीर्थ दर्शन है उनकी परिक्रमा भी उनके यात्रा भी करेंगे तो राजा महाराजा को लेकर के गए एक के बाद एक तीर्थ दर्शन किया वहां का वर्णन पढ़ेंगे तो हमारा दिल एकदम हमारे मां में इतना श्रद्धा भक्ति का उदय होगा राजा हमारा जी क्षेत्र में जाते थे जैसे की मदुरई है ना की वो कन्याकुमारी का मंदिर है वहां जाएंगे तो पूरा मां की मूर्ति के सामने जाकर के भाव से सफल हो जाते थे जैसे ही मूर्ति का दर्शन हुआ श्री भगवान का दर्शन हुआ वैसे ही इस तरह से उनका मां एक सुपर कॉन्शियस लेवल पर स्थित हो जाता था की उनको लगता था की बस उनको उनके और ईश्वर के अलावा और कोई नहीं है वो अभी मंदिर में भीड़ भी रहती है तो शशि महाराज वगैरा करते थे और जितने भी साधु वगैरा है अपने हाथों से एक पूरा गोल्डन बना देते थे पूरा बैरियर बना देते थे राजा महाराज के आसपास जिससे की और किसी भक्ति का उनको धक्का ना लगे वहां पे इतनी भीड़ इतनी है तो चारों और खड़े हो जाते थे उनको प्रोटेस्ट करने के लिए और बीच में देखिए की राजा महाराज पूरे भाव वास्तव में चले गए हैं और उन समाधि बार-बार उनकी आंखों में शरीर पे असुर और पलक ये वैष्णव शब्द है अश्रु का अर्थ की आंखों में से आंसू आना पलक यानी की अर्थात की ये लोम हर्षण जिसको कहते हैं संस्कृत में शायद की अपने हाथों के ऊपर में अपने जो बाल है वो खड़े हो जाना उसको पलक कहते हैं तो यह बार-बार असुर और पलक राजा महाराज को होते थे तो उनको देखकर के लगता है की सही सही तीर्थ यात्रा किस तरह से करनी चाहिए यहां पर ठाकुर है ठाकुर के बड़े में ठाकुर अपनी तीर्थ यात्राओं का वर्णन करते हैं एक नदी में जा रहे हैं नौका में बैठकर के और दिखा की वहां एकाएक भगवान शिवा का दर्शन हुआ मणिकर्णिका घाट तो खड़ा करके जाकर के वो नौका के वहां पे जाकर के उसके कोनी पे जाकर के खड़े हो गए वो अभी हृदय ने बोल दिया वो सभी लोगों को का रहे हैं उनको संभल के रखना उनको पकड़ के रखना वरना कब कहानी वो पानी में वो खुद जाएंगे उनका कुछ ठीक नहीं है अभी कोई भगवान का दर्शन हुआ फाटक कर के ठाकुर दौड़ना शुरू कर देंगे वो उन्हें एक के बाद एक दर्शन उनको होते थे और ऐसे भाव समाधि में वो रहते थे तो इस तरह से तीर्थ यात्रा करनी चाहिए इसीलिए ठाकुर यहां पे कहते हैं की काशी में जाकर के देखा तो ये लोग बिजनेस की प्रॉफिट लॉस की बात कर रहे तो मुझे इतना दुख हुआ बाद में बोलते हैं राज अर्थात की प्रज्ञा प्रज्ञा में जाकर के देखा तो वही तेतुल का वही दूर्वा वही का चुका था की जो कोलकाता में जो जी तरह से पेड़ पौधे हैं कोलकाता में जी तरह से लोग रहते हैं इस तरह से लोग वहां पर भी रहते हैं डिफरेंस क्या है ऑफ कोर्स वहां के जो वाइब्रेशन है उसमें वो डिफरेंस है और ठाकुर लोग जो सब ये विषय की बातें लेकर के रहते थे उससे उनको कष्ट भी इतना ही होता था और साथ में देखा की ठाकुर ने जो एक बात कहीं है जो की हिंदी में ट्रांसलेट नहीं हुई केवल तो खाट पश्चिम लॉकेट भुशिमा तो भांजे उन्हें डिफरेंस इतना ही है की पश्चिम के लोग जो है भूसी की तरह उनकी विष्ठा होती है ठाकुर आगे कहते हैं तीर्थ यात्रा करने से ईश्वरीय प्रेरणा अवश्य मिलती है उद्दीपन अर्थ की प्रेरणा माथुर बाबू संगे वृंदावन मथुरा बाबू के साथ में वृंदावन में गया माथुर बाबर बड़ी और मेरा और चिल्लू चिल्लू मथुरा बाबू के घर की स्त्रियां भी थी हृदय भी था हृदय यानी की ठाकुर का भांजा उनका सेवक केली दमन घाट देखो मातृ उद्दीपन हो तो कालिया दमन खाट देखा की देख करके ही ईश्वरीय प्रेरणा होती थी अमी विहुवल हुए जब में सफल हो जाता था भाव से विभोर हो जाते थे अभी यह अवस्था के सी है पता है जिन लोगों ने रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य का अभ्यास नहीं किया या तो फिर हमारी किताबें नहीं पड़ी उनको लगता है ये भाव ये कौन सी बड़ी चीज है मैंने ये कौन सा कौन सी चीज है क्योंकि मैंने भी यहां पे आने से पहले ये मेडिटेशन स्पिरिचुअल लाइफ यह सब किताबें पड़ी थी बुद्धिस्म में मेडिटेशन के बड़े में ध्यान के बड़े में बहुत कुछ लिखा गया है डिफरेंट डिफरेंट टाइप की ध्यान की साधनाएं है वो वहां पर बहुत ही विशुद्ध रूप से बहुत ही विस्तारित रूप से उसमें डिस्क्रिप्शन दिया गया है तो मैं थोड़ा प्रैक्टिस भी करता था अभी जितना भी हो सके सही गलत अपने अपने से बैठकर के किंतु जब यहां पर ठाकुर का कथा तब मैं सोचा की यह भाव क्या है बार-बार ऐसा क्यों कहते हैं ठाकुर को भाव हो जाता है ठाकुर को भाव हो जाता है समाधि होती है यह समझ सकता हूं अभी जैसे बुद्ध का वर्णन है की या तो फिर अपनी वेदांत की किताबें में जी तरह से वर्णन है की आपका मां है वो कहानी ईश्वर के साथ में एक आकर हो जाएगा ना की इस आत्मा के साथ में वो आत्मा साक्षात्कार होगा ये भाव बड़ी इमोशन वाली कौन सी चीज है इमोशन होना तो ठीक नहीं है जो लोग हम जी तरह से मैं वो बौद्ध भो के बड़े में पढ़ना था या तो जैन मुनियों के बड़े में पढ़ना था तो लगता है की उनका मां एकदम शांत हो गया है किसी भी तरह का उनमें विचलन उनमें विक्षेप नहीं है जी तरह से एक समुद्र हो या फिर तालाब हो उसकी सात जो है उसका जो सरफेस है किस तरह से एकदम शांत होता है उसे तरह से उनका मां है अगर सामान्य आदमी है आम आदमी है उसका मां कैसा है तो तालाब के अगर मैं आप पत्थर बड़ा सा फेक तो तालाब की वह जो लहरें होती है पानी की वो किस तरह से तालाब कोहिन्न चिन्ह कर देती है तो विक्षिप्त कर देती है वो उसे तरह से हम लोगों का मां होता है यानी की किसी भी तरह की इमोशन किसी भी तरह की ये जो भाव या तो फिर किसी के प्रति अट्रैक्शंस या तो अटैचमेंट यह सब गलत चीज है इनको छोड़ कर के मां को संपूर्ण रूप से शांत करने का पर्यटन करना चाहिए योग शास्त्र में पढ़ना था उसे समय तो वहां पर लिखा है योगेश चित्त्ववृत्ति निरोध योग का डेफिनेशन क्या है चित की वृत्तियों का निरोध यानी की मां में किसी भी तरह का विचार या तो थॉट और इमोशन नहीं होना चाहिए अभी कर भी नहीं होना चाहिए किसी के प्रति किसी भी तरह का अटैचमेंट भी इमोशनल अटैचमेंट भी नहीं होना चाहिए तो यह ठाकुर जो है छोटे बच्चे की तरह या तो फिर एक बार बार भाव में चले जाते हैं रोना शुरू कर देते हैं रोते-रोते फिर गाना शुरू कर देते हैं तो उनका जो पूरा बिहेवियर है और जी तरह से मैं आध्यात्मिक जीवन को समझा था वो पूरा उल्टा है वो किस तरह से ठाकुर जड़ी कहते हैं की अवतार वरिष्ठ है यदि आध्यात्मिक जीवन की सर्वोच्च शिखर है आध्यात्मिक जीवन का आध्यात्मिक जीवन का एवरेस्ट जो है या तो कैलाश जो है उसके ऊपर में वो यदि असिन है तो इस तरह से उनका बिहेवियर क्यों है मैंने जो अभी तक पढ़ा क्या वो सब कुछ गलत गलत है तो सही में जैसे बुद्धिस्म है या तो जैनिज्म है या तो इन जनरल आजकल जो मेडिटेशन की प्रैक्टिस या जो ध्यान सीखने हैं योग ध्यान वगैरा प्राणायाम वगैरा यह लोग एक चीज जो नहीं समझ पाते की जो पॉजिटिव कहेंगे की अटैचमेंट नहीं होना चाहिए ऑफ कोर्स अटैचमेंट नहीं होना चाहिए किसी के प्रति एक पर्सनल नहीं होना चाहिए जो की इंद्रियों के भोग के लिए हम लोग यह सब करते हैं किंतु ईश्वर के प्रति रिलेशनशिप कंपलीटली डिफरेंटली मेरा यदि मां लीजिए की मेरे कोई मित्र है उसके साथ में मेरा रिलेशन है या तो फिर मेरे मां है या तो मेरे पिताजी है उनके साथ में जो मेरा रिलेशन है वो सब क्या है की एक तरह से सांसारिक रिलेशन है किंतु यदि ईश्वर के साथ में जो मेरा रिलेशन है डेट इस होली रिलेशन और इसकी कैटिगरी ही अलग है जैसे की एक बच्चे का हम अपने के ऊपर में बालक भाव का आप करके इमेजिन करेंगे की मां जगदंबा जो है वो मां है हमारी और हम उनके गॉड में खेल रहे हैं या तो फिर हम अपने ऊपर में दास से भाव का आप करके सोचेंगे की हम हनुमान महावीर हनुमान है और भगवान राम की सेवा कर रहे हैं या तो हम अपने ऊपर में सखियों भाव का आप करके सोचेंगे की मैं राम हूं और भगवान कृष्णा के साथ में मित्र के रूप से खेल रहा हूं तो एक के बाद एक भाव का आप करके भगवान के साथ में जो रिलेशनशिप राखी जाति है उसकी कैटिगरी ही अलग है ये जो चैतन्य महाप्रभु ने ये जो पूरा भाव साधना था पहले से ही किंतु चैतन्य महाप्रभु ने इसको जी तरह से पापुलराइज किया है इसका और बाद में जो वैष्णव आचार्य जो है वृंदावन में रहकर के इस पूरे साइंस को साइंस ऑफ साइंस ऑफ पॉजिटिव इमोशन और र- लेट मी से साइंस ऑफ होली इमोशनल ये जो इसको डेवलप किया है अद्वितीय है पूरे आ विश्व के धर्म इतिहास में कोई भी किताब आप उठा करके पढ़ लीजिए सब किताबें में आपको एक तरह से देखने को मिलेगा या तो यदि आप निराकार के साधना कर रहे बुद्धिस्म है या तो जैनिज्म है या तो फिर ये और कोई संप्रदाय है इस्लाम के कुछ संप्रदाय हैं वो कहेंगे की आपका मां एकदम शांत होना चाहिए किसी भी तरह का अट्रैक्शंस अटैचमेंट इमोशन नहीं होना चाहिए या तो फिर यदि डिवोशनल किसी ब्रांच को आप फॉलो करेंगे स्कूल या रिलिजन को फॉलो करेंगे जैसे क्रिश्चियनिटी है तो उसमें रहेगा की ईश्वर के प्रति आपका शरणाग गति का भाव होना चाहिए ईश्वर के प्रति एक कंप्लीट फेथ और डिसिप्लिन होना चाहिए आपकी लाइफ में किंतु एक ये जो हरसोट फूल एक भीतर में से एक हास्य का एक पूरा एक फव्वारक छुट्टा है एक आपका चेहरे पे इस तरह से आनंद छ जाता है की आपके आसपास में यदि इस तरह से लगेगा की यह 1000 वत का एक प्रकाश का आपके भीतर में एक बल्ब जो है उसको ऑन कर दिया है चारों और उजाला फेल गया है ये जो हर्षत फूल भाव जो है वो सिर्फ हमको यह जो वैष्णव आचार्य द्वारा जो स्थापित वैष्णव भाव है इस में हमको देखने को मिलता है एटलिस्ट मैंने और कहानी पर इसको नहीं पढ़ा इसका एक दूर का अभ्यास जिसको इंग्लिश में कहेंगे डिस्टेंट एक एक दूर का आभास हमको बाकी सब चीज जगाओ पे शायद देखने को मिलेगा किंतु इतना हर्ष इतना आनंद इतना जय ईश्वर को देखकर के या तो ईश्वर के प्रति समर्पण करके या तो ईश्वर के साथ में किसी भी एक तरह का रिलेशन रख करके जो हमको ठाकुर में देखने को मिलता है यह वैष्णव आचार्य के साहित्य में पढ़ने को मिलता है वह और कहानी पे भी पढ़ने को नहीं मिलेगा ठाकुर कहते हैं तबीयत तीर्थ उद्दीपन होय बेट तीर्थ में जान से ईश्वरीय प्रेरणा अवश्य मिलती है उद्दीपन यानी की एक किंडलमेंट या तो फिर स्पार्क जैसे की एक बहुत बड़ा जंगल है सुखी लड़कियों से भारत हुआ है और एक छोटा सा स्पार्क उसमें गिरा पूरा जंगल में आज ग जाएगी तो वैसे ही इस तरह उसको उद्दीपन कहते हैं जिसका मां संपूर्ण रूप से ईश्वर को समर्पित है उसको कोई भी एक ईश्वरीय कोई नाम भी सुनने से वह विकल्प हो जाएगा वो भाव में मखना हो जाएगा आंखों में से आंसू आना शुरू हो जाएंगे माथुर बाबर बाड़मेर जीता मथुरा बाबू के घर की स्त्रियां भी थी हृदय भी था कालिया दमन कैट देखने से ही मैं मुझे उद्दीपन होता था और मैं सफल हो जाता था हृदय हमारी जमुना शेख यमुना नदी है उसके घाट पे एक बच्चे को जी तरह से नहलाती है अपनी मां उसे तरह से ठाकुर को हृदय नहीं लता था जमुना और तीर सुंदर समय बढ़ते जैतम यमुना के उसके ऊपर में घाट के ऊपर में किनारे के ऊपर में शाम के समय में घूमने के लिए जय करता था जमुनार चौड़ा दिए शहीदों मैं गोष्ट होते गुरु शफ्फायर एस्टन वहां से जब संध्या होती है तो गायों को चरवाने के लिए जो ले जाते हैं वो वापस आई है वो गे सभी लोग रखते हैं तो गोपाल तो क्या करते हैं गोपाल के बच्चे की दिन में गायों को चढ़ाने के लिए बाहर में कहानी ले जाते हैं वो मैदान जैसा होता है वहां पे कहानी पे तो जब शाम के समय गे जब वापस आई है वो ठाकुर उसको देखते थे देखो मंत्र अमर कृष्णर उद्दीपन हो तो बोलो और उम्मत ते न्याय अमी दौड़ते लागलं जैसे ही गे सब वापस ए रही है गोपाल सब बालक या तो गोपाल जो गायों के रखवाले हैं उनके साथ में देखकर के ही उनको भगवान कृष्णा का उद्दीपन हुआ और डा करने लगे कई कृष्णा कृष्णा कई बोलते बोलते कहां है कृष्णा कहां है कृष्णा यह बोलते हैं देखिए वृंदावन की कहानी हमको पता है वैष्णव आचार्य ने लिखी है और भागवत में भी तो इस सब चीजों का उल्लेख है की भगवान कृष्णा एक भले ही चाहे राज परिवार के संतान हो उनका बचपन वृंदावन के वहां पे गोपाल लोगों के घर पे हुआ था और अपने बचपन में वो गायों को चढ़ाने के लिए ले जाते थे तो ये जब गे जब मैदान में से जो चढ़ कर के वापस आई है तब ठाकुर को वो कृष्णा का उद्दीपन होता था वो बालक कृष्णा युवान कृष्णा की वो भी वो गायों को चरवाने के लिए ले गए हैं और वहां से वापस ए रहे हैं तो अभी जैसे ही ये पिक्चर जैसे ही ये इमेजिनेशन उनके मां में आई तो ऐसे ही वो सफल हो गए और भाव से दौड़ने लगे चारों और की कहां है कृष्णा कहां है कृष्णा देखिए ठाकुर के ये सब हम देखते हैं तब हमको सही में एक आश्चर्य होता है की ईश्वर प्रेम से मां किस हद तक डब जाता है कोई भी सामान्य आदमी इस तरह का पागलपन जाहिर में नहीं करेगा हम लोग जिनके मां में ठाकुर के प्रति इतनी श्रद्धा भक्ति है हम लोग कभी बेलूर मठ जाएंगे और यदि हम खुला में दौड़ना शुरू कर दें की कहां है भगवान राम कृष्णा कहां है भगवान राम कृष्णा है तो सभी भक्तों और सभी साधु लोग मिलकर कहेंगे ये पागल हो गया है इसके कुछ ट्रीटमेंट करवानी चाहिए क्योंकि पता है की हम लोग यदि ऐसा मुंह से बोलते भी है तो बिस्तर में कितना फूल करते हैं किसको पता ये जो संपूर्ण रूप से आत्मा समर्पण होना उसे समय जो मां की जो पवित्रता है मां के भीतर में जो मैन जैसे हजार वोट का एक जो प्रदीप चल रहा है उसका यह जो प्रकाश है अपने मुंह पे दिखाई देता है अपने चेहरे पे दिखाई देता है जब इस तरह का प्रकाश दिखाई देगा तब लोग हमारी बात सही मारेंगे की हां ठीक है यह पागलपन कर रहा है तो यह ऐश्वर्या पागलपन है वरना हम लोग यदि इस तरह का बाहर में इस तरह का कोई भी भाव प्रकट करेंगे तो लोग बोलेंगे या तो ये दिखावा कर रहा है सब अपने को मां सम्मान दिलवाने के लिए या तो लोगों को ठग रहा है या तो ये इसका मथक खराब हो गया है तो यदि इतना ठाकुर को जीवन समर्पित करने के बाद में भी हमको नहीं लगता की हमारे में बाकियों भाव प्रकाश करने की क्षमता है या तो हमको यह बाकी भाव प्रकाश करना चाहिए तो ठाकुर इस रास्ते पे भाव राज्य के रास्ते पे कहां कितने उच्च असिन पे स्नेहा असित होंगे वो हम अनुमान करके कल्पना करके सोच सकते हैं देख लीजिए की यदि कोई भी ठाकुर के एवं हमारी बात तो छोड़ ही दीजिए ये जो वो आता था नृत्य गोपाल ठाकुर के पास आता था ठाकुर जब कीर्तन करते थे नृत्य गोपाल समाधि में भाव समाधि में चला जाता था ठाकुर ने खुद ने उसको देखकर के कहा था यह ठीक-ठीक भाव समाधि है किंतु इस नृत्य गोपाल को नित्य गोपाल या नृत्य गोपाल दोनों तरह के नाम मैंने पड़े हैं अभी सही कौन सा है वो पता नहीं तो जो भी है ठाकुर ने उसको कहा था की साधु सावधान इतना उच्च कक्षा पे तुम्हारा यदि मां चला जाता है तो वहां से उतना ही गहराई में उतना ही गद्दे में गिरने की संभावना है तुम्हारे मां की और बाद में ऐसा हुआ भी सही वो किसी के साथ में उनका रिलेशन हुआ था और फिर ठाकुर ने कहा था की यदि कोई तुमको इतना किसी के घर इतना मत जय करो तो थोड़ा सा उनके साथ में दूर से ही व्यवहार करना तो ऐसा उनके साथ में हुआ भी था तो जिनको की बार-बार भाव समाधि होती है ठाकुर के शिष्य थे उनके साथ में यदि ऐसी स्थिति हो शक्ति है तो फिर हम लोग तो कौन सी चीज है हम लोग ने कौन सी बड़ी टॉप मार दी है तो हम लोग मतलब अपने को देखते हैं या तो फिर यह नृत्य गोपाल जैसे अच्छे मैन शुद्ध लोगों को देखते हैं तब इन हम लोगों को डर लगता है की बाहर में भाव प्रकाश करना कितना डेंजर्स है उससे माता खराब होने की संभावना है या तो फिर एन लोगों को इस लोगों को ऐसा लगा हमको ठग रहे हैं यहां पर ठाकुर को देखिए की बार-बार उनको भाव हो जा रहा है और इस तरह से भिहवे करते हैं की जैसे की वो बिल्कुल या तो छोटे बच्चे हो या तो पागल हो या तो फिर ईश्वर के प्रति इतने समर्पित हो गए हैं की फिर उनके लिए जगत नहीं है ये हृदय है वगैरा ठाकुर ने खुद एक बार कहा था की जब मैं भाव में पढ़ा राहत हूं तो मुझे सब ईश्वर ही दिखते हैं ये लोग चारों और जो लोग मेरे साथ में खड़े र करके ठाकुर जब ईश्वर का दर्शन अपने के लिए व्याकुल हो जाते थे अपना चेहरा मिट्टी पर घिसते थे यह बोलकर के मुझे ईश्वर का दर्शन क्यों नहीं हो रहा है मैं ऐसा तो क्या करूं मैं अपने को किस हद तक ले जाऊं की मुझे मतलब उससे ईश्वर का दर्शन प्राप्त हो नहीं हो करके अपना चेहरा मिट्टी पर घिसते थे चेहरे पर खून बहाने लगता था लोग इकट्ठा हो जाते थे सोचते थे अरे यह क्या पागलपन का दौरा पड़ा है उसे समय ठाकुर कहते हैं की लोग मेरे चारों और इकट्ठा होकर के मेरे बड़े में बात करते थे उनको परछाई जैसा मैं देखा था ईश्वर ही दिखते हैं या तो ईश्वर के प्रति मेरी व्याकुलता सफलता जो है ईश्वर के प्रति मेरी श्रद्धा निष्ठा जो है वही एकमात्र मुझे सत्य दिखता है और ये चारों और खड़े लोग जो मेरी निंदा भी कर रहे हो या मेरे ऊपर में कटाक्ष भी कर रहे हो ये मुझे परछाइयां की तरह दिखते हैं तो देखिए की हम लोग दिन में 100 बार सोचेंगे कुछ कोई भी कम करने से पहले क्या अरे वो मेरे बड़े में क्या सोचेगा अरे वो मेरे बड़े में क्या रहेगा क्या वो मेरी निंदा करेगा की नहीं क्या वो मेरे साथ में कटक से पूर्ण व्यवहार करेगा की नहीं क्या वो मेरे पीछे वो बातें फैलाएगा की नहीं इतना डर डर करके हम दूर रहते हैं क्योंकि हमको लगता है की हम जो कुछ कर रहे हैं वह हमारे खुद के बेनिफिट के लिए या तो हमारी खुद की कोई वासना का चरितार्थ करने के लिए यह वासना को पूर्ण करने के लिए कर रहे हैं हमको कभी ऐसा नहीं लगता की हम ये ईश्वर के लिए कर रहे हैं और यदि हम मुझे बोलते भी है ईश्वर सत्य जगत मिथ्या या तो जगत में जो कुछ हो रहा है उसका कोई मीनिंग नहीं है ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा भक्ति जितनी बढ़नी जाएगी उतना ही इस जन्म में हम लोग जो बैंक बैलेंस बनाएंगे वही बैंक बैलेंस नेक्स्ट जनों में हमारे साथ में जान वाला है तो यह हम मुंह से बोलते हैं किंतु इसके ऊपर में हम अमल नहीं कर पाते तो ये भीतर में से व्याकुलता आना यदि मां लीजिए तो हमारे लिए उपाय सामने एक ही प्रश्न है की यह भीतर का यह हमारे चारों और एक ठाकुर कहते हैं ना लज्जा घृणा भाई तीन थकते नहीं अर्थात की लज्जा घृणा और भाई ये तीन जब तक रहेगा तब तक हम ये ईश्वर प्रताप के रास्ते में बहुत ज्यादा आगे नहीं बाढ़ पाएंगे तो यह लज्जा घृणा और भाई ग जाए यानी की लोग क्या बोलेंगे मेजॉरिटी ईश्वर की साधना करता हूं आराधना करता हूं मेरा बिहेवियर यदि थोड़ा सा विचित्र प्रकार का होजरा रहा है तो लोग क्या बोलेंगे ये उसकी एक शर्म होना घृणा अर्थात की क्या मुझे ईश्वर प्रताप के लिए यह सब चीज करनी होगी ठाकुर को लगा था की वो ब्राह्मण है ब्राह्मण का अहंकार छोड़ना चाहिए तो क्या किया उन्होंने अपने बाल बाढ़ गए थे साधना करने के समय तो इस लंबे बालों से वो जो रसिक तथा उसका टॉयलेट था अपने बालों से क्लीन किया था अब सोच के देखिए की हम लोग इस तरह की कोई कल्पना भी नहीं कर सकते बहुत सारे लोगों को तो अपना खुद का टॉयलेट क्लीन करने में दिक्कत होती है तो कहानी जाकर के दूसरे के घर में वो भी नीचे जाति के घर में जाकर के उसका टॉयलेट बालों से क्लीन करना ये घृणा अपना जो भी भीतर का यह जो उच्च जाति का अभिमान मैं अमुक हूं मैं वो हूं मेरा मेरा एगो जो है उसको छोड़ने के लिए जो करना पड़ेगा और आखिर में लोगों के साथ में लोगों के खाने में नहीं रहूंगा तो फिर मेरे जो रोटी कपड़ा मकान यह जो व्यवस्था है वह उसका मैं किस तरह से बंदोबस्त करूंगा लोग कहेंगे की अच्छा यह ठीक है ये पागल है या तो फिर यह हमारी बात नहीं सुनता है या तो इसका कोई विचित्र तरह का बिहेवियर है उसको यहां से निकाल दो वो अपनी व्यवस्था अपने से करें तो फिर वो हम कहां जाएंगे कहां जाएंगे क्या खाएंगे क्या पियेंगे मैंने खुद कुछ लड़के बेलूर मठ से जीवन सन्यासी निकाल गए और मां के पास गए मां हमको हम लोग जाकर के काशी जा रहे हैं पैदल जा रहे हैं और जाकर के तपस्या करेंगे तो मैन क्या कहा बेटा ठाकुर के पेयर्स और मच्छर मुंडो और पे शेर पार्टी माथुर जुगाड़ की बायर्स की कटोरी और मछली का माता वो माथुर बाबू उनके लिए व्यवस्था करते थे बोल करके वो इतना कठोर तपस्या कर पे तुम लोगों को इस तरह से कौन देखने वाला है तुम जो बेलूर मठ वापस फिर जो वहां का जो डिसिप्लिन है वहां का जो रूटीन है वहां पे आपको जो ब्यूटी दिया जाता है वहां पे आपके सीनरी जो कहते हैं उनके आजा का पालनपुर करके तुम लोग साधन भजन वगैरा करो अपने को बोलोगे मैं मुक्त पंछी की तरह ठाकुर की तरह किसी भी तरह के बंधन में नहीं रहने वाला मां काली की पूजा करता हूं तो काली के लिए जो नई विद्यासाता है मैं ग्रहण कर लूंगा काली के लिए मां काली को ऑफर करने के लिए जो पुष्प आते हैं है वह अपने अपने सर पर रख दूंगा तो इस तरह का स्वेच्छा कर जिसको कहते हैं वो करना तुम लोगों के लिए संभव नहीं है तुम लोग बेलूर मठ के डिसिप्लिन में जाकर के रहो धीरे-धीरे करो धीरे-धीरे करके इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में तुम लोगों को कुछ ना कुछ दर्शन अनुभूति होना स्वरूप हो जाएगा तो हम लोगों के लिए हम लोगों को डिसिप्लिन में रहना ही पड़ेगा हम लोगों का वाक्य अचार विचार व्यवहार है उसको एक एक नॉर्मल आईडी के लेवल पे हमको रखना ही पड़ेगा बात बात में रोना धोना शुरू कर देना आंखों में से आंसू ए जाना शुरू कर देना पलक होना तो लोग बोलेंगे यह तो लोगों को ठग रहा है या तो इसका मंत्र खराब हो गया तो हम लोगों के लिए फिर क्या उपाय है हम लोग क्या एक वीडियो क्रिटिक के लेवल पर रहने के लिए ही बने हैं क्या हम लोग क्या यह जो सुपर कॉन्शियस और कॉन्शियस के पीछे की जो बैरियर है उसको तोड़कर के हम क्या उच्च आध्यात्मिक अनुभूति करने के लिए कभी भी उपयुक्त नहीं एलिजिबल नहीं है क्या तो हमको यदि ये प्रश्न होता है तो हमारे लिए सॉल्यूशन है ठाकुर के इस तरह के वर्णन को पढ़ना और पढ़कर के भीतर में से जो भीतर में से जो हरशॉट फूल लास्ट जो होता है जो आनंद होता है उसको ध्यान में ही उसकी अनुभूति करना और सुबह को संध्या आरती के बाद में मां लीजिए मैं अपने रूम में बैठा हूं तो मैंने ये थोड़ा सा वर्णन पढ़ लिया और फिर आंख बैंड करके मैं सोने लगा अभी कुछ दोनों से मैं स्वामी जी अमेरिका में जाकर के जो प्रवचन दे रहे थे वो अमेरिका की रिमिनेशंस वगैरा बहुत ही सुंदर किताबें विवेकानंद इन डी वेस्ट न्यू डिस्कवरी लिखी हुई है तो मैं उसको पढ़ना हूं उसमें इतना सुंदर सुंदर वर्णन है एक फ्रेंड रोड हिमाल करके एक उनका देवोटी है वो उनको मिलने के लिए जाता है फिर ये एडिट एलन करके है तो एडिट हेलेन के बहुत सुंदर कहानी है वो ये जो जिसको स्पिरिचुअलिज्म विभिन्न प्रीत तत्व अक्ल उसे समय जैसे की वह अवतार आते हैं तो अवतार के साथ में बहुत साड़ी तरह की वह जो धार्मिक मूवमेंट स्टार्ट हो जाति है स्पिरिचुअल मूवमेंट स्टार्ट हो जाति है फिर अवतार आकर के अपने सही उपदेश का प्रचार करते हैं तब कहानी जाकर के बाकी की मूवमेंट्स धीरे-धीरे करके सब साइड हो जाति है और अवतार का संदेश खेलने की शुरुआत हो जाति है तो वैसे ही ठाकुर के आने से एक अकल्ट का एक बहुत चला था प्रेत तत्व का अमेरिका में लोग कहानी जाकर के मुर्तात्माओं को बुलेट थे और उनके साथ में कम्युनिकेशन करने का पर्यटन करते थे क्या पागलपन अमृत लोगों के साथ कम्युनिकेशन करने से क्या लाभ है यदि कम्युनिकेशन करना ही है तो ईश्वर के साथ में कीजिए तो ये एडिट बोल करके एक महिला थी वो और ये सब ऑपल्ट में डब गई थी तो प्रेत तत्व करते करते उसका नर्वस ब्रेकडाउन हो गया और फिजिकल भी उसकी हेल्थ बहुत खराब हो गई और वो बड़ी परेशान होती थी की अभी मैं क्या करूं है तो एक दिन उसको पता चला की स्वामी विवेकानंद सन फ्रांसिस्को में तारक स्ट्रीट बोलकर फ्लैट है वहां पर र कर के प्रवचन देते हैं राजयोग और वगैरा के बड़े में और इस्ट यानी की इंडिया से आए हैं तो भारत से आए हैं वो तो बहुत बड़े महात्मा होंगे ये ऑपल्ट वगैरा तो इन लोगों के लिए बड़ा ही आसन कम है समझना वगैरा तो वो स्वामी जी को मिलने के लिए आए पहले तो एक स्वामी जी का प्रवचन सुना उसको बड़ा ही अच्छा लगा फिर उसने स्वामी जी को रिक्वेस्ट किया की मैं आपको मिलन चाहती हूं अभी क्लास में तो सब पर्सनल बातें नहीं हो शक्ति आप मुझे पर्सनल इंटरव्यू दे तो मैं आपके आपको मिलने के लिए होंगे तो स्वामी जी ने कहा ठीक है चलो तुम कल सुबह 9:00 बजे ए जाना तो जैसे ही वो एडिट उनको मिलने के लिए गई तो देखा की स्वामी जी बैठे हैं वहां पे एक चेयर में तो जाकर के स्वामी जी के सामने बैठी अभी स्वामी जी जब वो आए थे उसने पहले तो एडिट थी उसे कमरे में फिर स्वामी जी बाद में आए स्वामी जी आए तो देखा की वो पोर्ट पहने हुआ है जी तरह से स्वामी जी का फोटोग्राफ है ना वो पगड़ी और कोर्ट पा हुए इस तरह के ड्रेस में सज्जू करके आए और कुछ संस्कृत में चेंजिंग कर रहे थे एकदम मृदुस्वर से तो चैटिंग करते-करते आए तो एडीएफ ने कहा की स्वामी जी के चेहरे पे इस तरह के दिव्या पवित्र हा है वो देखकर के ही वो मेरा मां खुशी से ये हो जाता है तो ऐसा करके फिर वो स्वामी जी आकर के मंत्र पाठ करते हुए वो वहां पे चेयर के ऊपर में बैठे तो जैसे ही बैठे थे और फिर वो थोड़ी डर तो मंत्र पाठ करते ही रहे उसके बाद में स्वामी जी ने उसको पूछा की अच्छा यस मैडम व्हाट डू यू हैव तू से अब समझना सिर्फ इतने का यस मैडम यानी की बताइए आपको क्या कहना है तो स्वामी जी की सिर्फ इतनी ही बात सुनकर के वो एडिट एकदम रोना शुरू कर दी अभी उसने सोच के रखा था अगले दिन रात को की मैं स्वामी जी को मिलने के लिए जा रहे हूं तो यह प्रश्न करूंगी वह प्रश्न करूंगी यह पूछूंगी वो पूछूंगी किंतु सब चला गया वो रोटी ही रहती है रोटी ही रहती है इतना राई इतना राई मुझे चुपचाप बैठे हैं शांत होकर के उसको रन दिया भले चाहे भीतर में से जो कुछ भी है वो निकाल जाए तो आधे घंटे तक वो होती रही और रोते-रोते भीतर का जितना भी शौक संता तप दुख कष्ट ये अकलता में जाकर के माता खराब करके बैठी थी सब ठीक हो गया फिर स्वामी जी वो जब शांत हुई आधे घंटे के बाद स्वामी जी ने कहा ठीक है आप कल सुबह 9:00 बजे फिर से आएगा हम फिर से बात करेंगे तो दूसरे दिन जब वो आई तब कहानी जाकर के थोड़ा प्रश्न उत्तर वगैरा हुआ तो देखिए ये भीतर में से जो इमोशन आई है तो वो इतनी पावरफुल होती है की जन्म जन्म मंत्र के पाप शोक संतो संतान जो भी है सब उठाकर के ले जाति है तो हमारे लिए क्या है हम लोग कहानी जाकर के ऐसा रोना धोना शुरू कर देंगे तो पता नहीं लोग क्या कहेंगे हमारे बड़े में हमारे लिए बेस्ट है की अपने कमरे में जाकर के यह सब चीजों के बड़े में बड़े और आंख बैंड करके चिंतन करें और अनुमान करें की हम भी ठाकुर के सामने स्वामी जी के सामने बैठे हैं और स्वामी जी ने हमको बोला की हां बताइए आपको क्या बोलना है और हमने रोना शुरू कर दिया और भीतर में से जो कुछ भी था वो सब निकाल गया फिर मां में पूरा शांति छ गई तो हमको यह सब चीज ध्यान में ही करनी उचित है रडार दें तू डू आईटी आउट इन पब्लिक तो आज यही तक अभी कल संडे है मंडे को मिलेंगे