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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत || 16 Dec 1883 - श्रीरामकृष्ण भक्तों के साथ दक्षिणेश्वर में || 17 Apr 2026

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकाय धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठाय रामकृष्णाय नमः श्री रामकृष्ण कथामृत वो 16th दिसंबर का यह दिन 1883 वो मुखजे चले गए हैं जिनके साथ में ठाकुर ने दोपहर को वार्तालाप किया था और उसके रिलेटेड फिर मास्टर महाशय ने ठाकुर को प्रश्न भी किए थे कि क्या यह जीव और जगत में मेरा जो अस्तित्व है क्या यह सब मिथ्या है? तो ठाकुर ने इसके उत्तर में कहा था कि यह मिथ्या क्यों होने लगा? यह सब विचार की बातें हैं। एक बार नीति नीति करके ईश्वर प्राप्ति कर लेनी है। यह इस अर्थ में कि ईश्वर प्राप्ति ना ब्रह्म साक्षात्कार करने के लिए संपूर्ण त्याग चाहिए। यदि त्याग नहीं है जीवन में तो फिर ब्रह्म साक्षात्कार सिर्फ बातें की बातें ही रह जाएगी। वह सिर्फ मुंह से बोलना हो जाएगा। किंतु अनुभूति कुछ नहीं होगी।

My discussion with a young man who is searching for the meaning of life

कल एक लड़का मुझे मिलने के लिए आया था तो मुझे कहता है कि जीवन का पर्पस क्या है? मुझे कुछ समझ में नहीं आता। तो फिर मैं क्या करूं? मुझे तो ऐसा लगता है कि जीने से कोई मतलब नहीं है। मैं आत्महत्या कर लेता हूं। और फिर उसने एक पूरा एक राइट अप भी रेडी किया है उसके मन की बातें समझाने के लिए कि यह मेरे मन में चल रहा है। तो मैंने कहा अच्छा ठीक है इट्स वेरी गुड कि तुम इस तरह से सोचते हो इसलिए नहीं कि तुम माने पर्पस हीन है जीवन तो सुसाइड कर लोगे इसलिए नहीं किंतु एटलीस्ट तुम जीवन का पर्पस खोजने का प्रयास कर रहे हो जो हमारे यहां पे रीडिंग रूम है तो इस रीडिंग रूम में सब यह स्टूडेंट्स लोग बैठे रहते हैं गवर्नमेंट एग्जाम देंगे बोल करके उसका प्रिपरेशन करते हैं तो किसी को देखेंगे पांचप साल से 10 साल से 15 साल से प्रिपरेशन कर रहा है। अपने पिताजी के घर में रहते हैं। पिताजी का अन्न खाते हैं और प्रिपरेशन करते हैं। तो अभी प्रॉब्लम यह है कि देखिए कि यदि 15 साल भी 10 साल भी मेहनत करने से नौकरी मिल जाएगा गवर्नमेंट तो अच्छा है। प्रॉब्लम यह है कि हजार लोग यदि देंगे एग्जाम यह कोई भी गवर्नमेंट की यह बैंक की हो ना क्लार्क की हो ना कि यह जो भी हो यूपीएससी वगैरह 1000 में से मुश्किल से 510 का सिलेक्शन होता है रेलवे की हो तो क्या है कि बाकी लोगों का क्या मैं कभी-कभी इन लोगों को पूछता हूं कि अच्छा तुम इतने साल से यह सब कर रहे हो आर यू श्योर कि तुमको नौकरी मिल ही जाएगा इससे बेटर है तो एक प्राइवेट सेक्टर में जाकर कुछ करो अपना खुद का बिजनेस करो। यदि मैं ऐसा कुछ कहूंगा ना तो यह लोग लंबा मुझे एक्सक्यूज देना शुरू करेंगे। प्राइवेट सेक्टर में यह प्रॉब्लम है। अपना पर्सनल बिजनेस करने में यह प्रॉब्लम है। माने प्रॉब्लम्स इतने सारे आपको गिना देंगे। फिर आप कहेंगे अच्छा अच्छा बेटर है कि इससे तुम गवर्नमेंट की प्रिपरेशन करो। तो देखिए कि ज्यादातर लोग जो है इस जगत में आप देखेंगे अपना एक छोटा सा दायरा बना करके उसके भीतर में रहना चाहते हैं। छोटे से उसके भीतर में रह के उनको लगता है कि हमको इससे ज्यादा और कुछ नहीं चाहिए। तो यह लड़का है कहता है कि जीवन का पर्पस चाहिए मुझे। तो दिस इज वेरी गुड। मैंने कहा कि बाकी के जो लोग हैं जो कि अपना एक गवर्नमेंट जॉब कैसे भी करके मिल जाए और फिर बाकी का जीवन शांति से आनंद से बिठा बिताए बिना किसी काम के तो इससे तो बेटर है कि तुम लाइफ में पर्पस खोज रहे हो। किंतु देखो कि यह पर्पस जीवन में यदि तुमको खोजना है ना तो उसके लिए यू विल हैव टू पे द कॉस्ट। उसके लिए तुमको मेहनत करनी पड़ेगी। मेहनत करनी पड़ेगी, स्ट्रगल करनी पड़ेगी, संघर्ष करना पड़ेगा। क्योंकि दो पाथ है। एक तो है कि पाथ ऑफ हैप्पीनेस। जहां पे कैसे भी करके अपना छोटा सा एक आमदनी का रास्ता कर लिया। एक छोटा सा फैमिली बना दिया और फिर आराम से आनंद से रहते हैं। वो आनंद कब निरनंद में हो जाएगा? देखिए जन्म मृत्यु जरा व्याधि तो है ही है। आधिदैविक आधि भौतिक आध्यात्मिक यह सब दुख तो है ही है। किंतु फिर भी चलो यह एक ट्राइड एंड ट्रस्टेड रास्ता है। सभी लोगों को आप देखते हैं फैमिली बना के रहते हैं। तो हम भी रहते हैं। अभी फैमिली में जो होगा सो हमको सफर करना है। बट वेरी गुड। यह एक ट्राइड एंड टेस्टेड रास्ता है। और दूसरा है द पाथ ऑफ पर्पस। जीवन में एक हायर पर्पस चाहिए। जीवन में एक हायर एम चाहिए। तो यह एम पपस आइडियलिज्म यह सब रास्ते पर तुम यदि चलोगे तो देखना कि यू विल हैव टू पे द कॉस्ट फॉर दैट। माने उसके लिए तुमको संघर्ष नहीं करोगे तो इस रास्ते पर ज्यादा कुछ होने वाला नहीं है। मां के पास में एक लड़का आया तो काफी अच्छे से पढ़ाई लिखाई किया है। बीए एमए सब कुछ कर रहा है। तो मां ने उसको कहा बेटा वो लड़का मां को पूछने के लिए आया कि मां मैं शादी करूं कि ना करूं। साधु नहीं होना है। संसार में ही रहना है। किंतु शादी करने की मेरी इच्छा थोड़ी कम है। इसलिए मैं आपसे सलाह मांगने के लिए आया हूं कि मुझे क्या करना चाहिए। तो अभी देखिए मां भी सामने वाले का मन देखकर के देखती थी। यदि किसी को शादी करनी है इच्छा बहुत है। किंतु मुंह पर वैराग्य का भान दिखा रहा है तो फिर मां के पास में आएगा सलाह मांगने के लिए। मां यदि शादी करने की परमिशन दे दे तो मैं जाकर के लोगों को कह सकता हूं कि देखो मेरा तो त्याग और वैराग्य पर रास्ते पर जाने का इच्छा था किंतु मां ने ही शादी करने को बोला तो क्या है मां के पास में अपने मन की बात निकलवा देना चाहते हैं तो मां भी समझती थी तो जिसके भीतर में सही-सही वैराग्य नहीं है मां के पास में एक्सक्यूज खोजने को ही आता है तो मां उसको कहेगी बेटा देखो संसार में सब कुछ दोद है आंखें भी दो है हाथ भी दो है तो वैसे तुमको पतिप दोनों मिलकर के संसार में रहते हैं। तुम शादी कर लो। और इस तरह का जो है लड़का खुश होकर चला जाता है। जो मेरे मन की बात मां ने कर दी। ऑफ कोर्स जो त्यागी है उसको तो मां त्याग का ही रास्ता दिखाएगी। अभी किंतु यह जो लड़का है उसने कहा कि साधु तो नहीं होना है। किंतु मैं शादी करूं कि ना करूं इसके बारे में मेरे मन में दुविधा है। तो मां ने उसके भीतर में सिंसियरिटी देखी होगी। तो फिर मां ने उसको कहा देखो बेटा तुम एक काम करो तुम शादी मत करना तो बड़ा हाईली क्वालिफाइड हो उस समय का एमए तो एक काम करो छोटे से गांव में जाकर के स्कूल वगैरह चालू करो और बच्चों को पढ़ाओ देखो तुम्हारे से लोक कल्याण का बहुत सारा काम ठाकुर करवाना चाहते हैं। तो यह लड़का पूछता है कि मां मेरा मन तो बड़ा ही दुर्बल है, बड़ा ही चंचल है। साधु बनना क्या है? आप एक प्रोटेक्शन के भीतर में रहते हैं। आश्रम के भीतर में रहते हैं। तो मन यदि दुर्बल हो भी जाता है तो आपके पास में दूसरे बहुत तरह के प्रोटेक्शन है। किंतु संसार में ही रहना बिना शादी के रहना। मन यदि दुर्बल हुआ तो फिर क्या है? अधः पतन तो होने ही वाला है। तो फिर मां ऐसा यदि कुछ हो गया तो तो मां ने उसको भरोसा देकर कहा नहीं बेटा कुछ नहीं होगा। देखो और फिर माइक बहुत ही इंपॉर्टेंट बात करती है कल कलते मनेर पाप पाप नहीं कल युग में मन का पाप पाप नहीं है तुम जाओ तुम स्कूल चालू करो बच्चों को पढ़ाओ सेवा का कार्य करो और शादी मत करना ठाकुर तुमको सहाय करेंगे तो मां से यह भरोसे का वचन मिला तो फिर यह लड़का जाकर के ऐसे ही स्कूल चलाया और फिर काफी उसने सेवा की और अपने जीवन के आखिरी समय में ये रेमिनेशंस लिखने के समय ये कहता है कि जीवन में चढ़ाव उतार बहुत आए देख लिया सब कुछ मन कभी स्ट्रांग होता है कभी वीक हो जाता है किंतु मां की दया से पूरा जीवन मैंने सेवा भाव में निकाला है। यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्राप्ति है। तो देखिए मां उसका मन यदि दुर्बल होता तो उसको कह देती कि संसार में सब कुछ दोद है तो तुम भी जाकर के शादी करके रहो पति और पत्नी दोनों साथ में रहो ऐसा मां कह सकती थी किंतु उसके जो चरित्र की जो स्ट्रेंथ जो है मां को दिखी होगी और मां को यह भी पता चला होगा कि ठाकुर की इच्छा है कि उसके पास में से सेवा करवाए तो क्या है मां ने ऐसा कहा अभी देखिए कि यदि यह जो हायर पर्पस है जीवन का वो पाथ आपको सिलेलेक्ट करना है तो फिर यू हैव टू स्ट्रगल फॉर दैट। तो यह जो लड़का मुझे पूछ रहा है कि जीवन में पपस क्या है? जीवन में पपस खोजना है तो मैंने उसको कहा कि देखो तुम्हारे पास में दो रास्ते हैं। एक तो तुम अपना करियर बनाओ और दूसरा कि तुम पर्पस के लिए हायर पर्पस के लिए स्ट्रगल करो। याद रखना कि यह जो हायर पर्पस का रास्ता है वह तुम्हारा अश्रुओं का रास्ता है। सफरिंग का रास्ता है। दुख कष्ट से भरा हुआ रास्ता है। इस रास्ते पर चलने से पैरों में कांटे ही चुभेंगे। यह बात याद रखना। और किसी भी तरह का यह मत सोचना कि हायर पर्पस पे चलते-चलते एकाएक में बहुत फेमस हो गया। पूरे दुनिया में से मेरी वाहवाह हो रही है। हम लोग देखते हैं ना ऐसे लोगों को। क्योंकि बड़ा फेमस और पॉपुलर हो जाते हैं और फिर सब तरह से उनको बड़ा बड़ा ही कांग्रेचुलेशन मिलता है। बड़ा ही प्रेस्टीज होता है। धन पैसा वगैरह आना शुरू हो जाता है। तो इस तरह की अपेक्षा मत रखना। वो क्या है पता है? ठाकुर ने एक उदाहरण दिया। ठाकुर के जो वो नॉनवेज उदाहरण रहता है ना उसमें से यह एक उदाहरण है कि ब्राह्मण की विधवा वो 12 साल उसने हविषान वगैरह किया। जैसे वो ब्राह्मण की विधवा का उस समय का चलन था। हम तो देखते ही हैं कि कितना स्ट्रिक कठोरता में रहना है। गोपाल की मां का ही उदाहरण हमको पता है कि कितनी कठोरता में रहना है। कितने नीति नियमों का पालन करना है। तो ठाकुर कहते हैं कि ब्राह्मण की विधवा है 12 साल भविष्य किया। कठोरता की सब कुछ किया। आखिर में एक बागदी को उपपति बनाया। अभी बागदी उस समय की तथाकथित नीची जात तो उसके साथ में उसने संबंध बनाया 12 साल हविष्या न कठोरता करने के बाद में तो क्या है कि ऐसा भयानक माने तपस्या के रास्ते पर जा रहे हैं 12 साल के बाद में अधः पतन हुआ तो ऐसा हुआ कि सब कुछ आप मुंह के बल गिरेंगे तो मैंने उसको कहा कि इस तरह से तुम यदि अपेक्षा रखोगे पाथ ऑफ हायर पर्पस उसके ऊपर चलते-चलते यह सब अपेक्षा क्षा रखोगे कि इस रास्ते पर चलते-चलते मुझे कुछ प्राप्ति हो जाएगी। फिर मैं उपदेश देना शुरू करूंगा और मैं बड़ा फेमस हो जाऊंगा। यह अपेक्षा रख के तुम यहां पर मत आओ। ऐसा हो सकता है माने इनफ उदाहरण है सोसाइटी में कि जो लोग तपस्या कर रहे हैं। फिर अब देखिए ना प्रेमानंद जी महाराज है वृंदावन के। सबसे बड़ा उदाहरण है। तो तपस्या की है। कठोर भयानक तपस्या की है। और फिर जो प्राप्ति हुई है ईश्वर की कृपा से आज इतने सारे लोगों को सांत्वना पहुंचा रहे हैं। इतने रिस्पेक्टेड है सोसाइटी में। किंतु उन्होंने इस पाथ पे इसलिए नहीं चला कि इवेंचुअली मेरा YouTube चैनल बनेगा। मेरे वीडियो पॉपुलर होंगे। यह क्रिकेटर बड़े-बड़े मुझे मिलने के लिए आएंगे। इसलिए उन्होंने यह पाथ सिलेलेक्ट नहीं किया था। भीतर में से जेन्युइन मुमुक्षुत्व था। इसलिए उन्होंने वह पाथ सिलेलेक्ट किया। यदि सक्सेस आन पड़ती है तो ईश्वर की कृपा है। नहीं आ पड़ती है तो डज नॉट मैटर सक्सेस हम चाहते ही नहीं थे। एट द माने हमारा उद्देश्य ही सक्सेस नहीं था। हमारा उद्देश्य था मुमुक्षुत्व की मुमुक्षुत्व के अंत में फल प्राप्ति। कौन सी फल प्राप्ति? तो हायर पर्पस जीवन में प्रकट होता है। तो मैंने उसको यह सब समझाया। फिर मैंने उसको कहा कि अच्छा तुमको क्या लगता है कि तुम क्या इस तरह के रास्ते पर चल चल पाओगे? तो मुझे बोलता है कि अच्छा मैं इतना सब कुछ कष्ट करूंगा और आखिर में मुझे कुछ नहीं मिला तो क्या होगा? तो मैं समझ गया कि मंद वैराग्य वो मंद वैराग्य का लक्षण बताया ना ठाकुर कहता है एक लड़का वो काशी चला गया। म घर छोड़कर गया। अभी क्या है? मंद वैराग्य था। मंद वैराग्य इस तरह से रोटी कपड़ा मकान का जुगाड़ इजीली नहीं हो रहा था। पैसा का व्यवस्था नहीं हो रहा था। घर छोड़कर के चला गया काशी फिर वहां से लेटर लिखता है अब चिंता मत कीजिए मुझे एक नौकरी मिल गई है और फिर उसी पैसों में से एक सोने की अंगूठी वगैरह कुछ बना के पहनना चालू कर देता है वो जो हाजरा है हाजरा महाशय ठाकुर के कमरे के सामने बैठकर के जप किया करते थे और साथ-साथ में पीछेछे से ठाकुर की थोड़ी निंदा यह जो यंग लड़के ठाकुर के पास में आते थे उन लोगों की थोड़ी निंदा यह सब चलता था और फिर क्या है देना भी था माने कुछ ऋण भी किया था तो ऋण कैसे चुकता हो उसकी एक फिक्र लगी रहती थी कि कोई धनी व्यक्ति ठाकुर के पास आएगा तो फिर वह अपना वो चालू कर देगा उपदेश देना मैं कितना धार्मिक हूं यह दिखाना और फिर कैसे भी करके उसके पास में से रुपए निकालना जिससे कि ऋण ऋण जो है वो हो सके तो देखो मैंने देखा कि उसका मंद वैराग्य है तो मैंने कहा देखो तुम्हारे पास में और एक पाथ है हाइब्रिड पाथ है तुम कैरियर बनाओ करियर शादी करो करियर बनाओ नौकरी करो बिजनेस करो व्हाटएवर यू वांट टू डू और फिर साथ में ना जीवन में एक व्रत ले लो साधना प्रतिदिन एक घंटा मुझे किसी साधना में बिताना है वो चाहे तुम किसी मंदिर में जाओ हमारे रामकृष्ण मिशन के और कोई भी मंदिर में आप देखेंगे ना गुजरात में मैं था तो मैं तो स्वामी नारायण मंदिर से परिचित था तो कोई डिवोटी होते हैं प्रतिदिन दिन मंदिर में जाएंगे। प्रतिदिन आरती का दर्शन करेंगे। प्रतिदिन वहां पर बैठकर के एक घंटा ना कि इतना जप ध्यान में बिताएंगे। पूरा लाइफ टाइम का इन लोगों का रूटीन रहता है। जैसे जैन लोगों में भी है वहां पे बहुत सारे मंदिरों में आपको इस तरह से दिखेगा। हमारे मंदिर में भी यहां पे भी राजकोट में भी देखा यहां पे भी देखा विशाखापट्टनम में कि एकदम रूटीन करके कुछ डिवोटी आएंगे ही आएंगे। एक घंटा मंदिर में बिताना ही बिताना है प्रतिदिन तो यह या तो फिर इस तरह से और यदि तुमको सुविधा नहीं है किसी मंदिर में जाने की तो ऑनलाइन क्लासेस है ऑनलाइन सत्संग है यह कथा वगैरह चलता रहता है या तो फिर अपना पर्सनल रीडिंग है टेक अप समथिंग और पूरा लाइफ उस साधना को लेकर के रहो यह जो साधना जो है पूरा जीवन मिनिमम एक घंटा तुमको देना है तो यहां पे क्या होगा तुम्हारा दोनों एक तो भीतर की जो मंद वैराग्य की वजह से कुछ कामना वासनाएं है वह संसार करके वह समाप्त हो जाएगी और यह जो पाथ ऑफ हायर पर्पस जो तुमको चाहिए उसको फॉलो करना अभी इस लड़के की उम्र 20 ना कि 22 साल इतनी है। मैंने कहा इट्स अ गोल्डन अपॉर्चुनिटी इन योर लाइफ। इस तरह से जो हाइब्रिड पाथ तुम बनाते हो आज से ही ठीक कर लो। 1 घंटा प्रतिदिन साधना करनी है। तुम देखना बाय द टाइम तुम रिटायर होगे। 50 है, 55 है। देखो तुम्हारे भीतर से जो आनंद आएगा और फिर तुम अपने आसपास में सबको देखना। देखना कि सभी लोग कितना टेंशन में जीते हैं। कितना स्ट्रेस में जीते हैं। पैसा इज नॉट इनफ। ब्रेड इज नॉट इनफ। जैसा वो जीसस कहते हैं। सिर्फ पैसा इज नॉट इनफ। पैसा होने से भी टेंशन तो दुनिया भर का रहेगा ही रहेगा। जैसे उम्र बढ़ती जाती है देखेंगे कि यह रिग्रेट जो है बहुत सारे लोगों के मन में सवार हो जाती है। यह मुझे नहीं मिला। मेरा प्रमोशन होना था नहीं हुआ। यह मेरा किसी से रिलेशन होना था नहीं हुआ। वो मां की कहानी है ना फेमस कहानी। वो एक दिन जय राम भाटी में ऐसा ही कहीं पर बैठी थी। बहुत सारे भक्त जो है वो दुर्गा पूजा का कोई उपलक्ष था ऐसा कुछ तो साड़ी है, मिठाई है, फल है वगैरह प्रणामी है। कितना सब कुछ मां के सामने आकर के पड़ा था। तो वहां पे एक दूसरी औरत बैठी थी भाविनी देवी मोस्ट प्रोबेबबली यदि मुझे नाम याद है तो तो वह सब देख रही है और फिर देख करके कहती है माने दुख की सांस लेकर कहती है कि देखिए परमहंस महाशय के साथ में तो मेरा ही विवाह होने वाला था किंतु [गला साफ़ करने की आवाज़] फिर मेरे पिताजी ने सोचा वह खुद तो पागल है कहां मैं एक पागल के साथ में अपनी लड़की का विवाह करवाऊंगा बोल कर के उनके साथ में मेरा विवाह अटक गया आज देखिए उनके साथ विवाह होता तो ये सब चीजें मेरे पास में आती। तो [हंसी] सब लोग हंसना शुरू कर दिए। मां ने कहा अरे तुम लो ना इसमें से जो कुछ चाहिए ले लो। मिठाई ले लो, कपड़े ले लो जो चाहिए ले लो। तो क्या है ये रिग्रेट जो है ये धीरे-धीरे करके उम्र बढ़ती जाएगी। देखेंगे कि रिग्रेट आकर के ऐसा घर कर लेती है किसी किसी के मन में। तो मैंने इस लड़के को कहा अभी तुमको यह समझ में नहीं आएगा। किंतु जैसे-जैसे बड़े होगे पता चलेगा कि ये मिसपॉर्चुनिटी ये वह सब कितना अपने सर के ऊपर में हावी होकर के बैठ जाता है। डिसअपॉइंटमेंट्स इंसल्ट्स यह सब चीजें ना भीतर में जैसे रूट जमा लेती है। और फिर जैसे जहरीले पौधे की तरह इसके रूट जो है ना भीतर में जाते ही जाएंगे। भीतर में से पूरा हमारी लाइफ को सड़ा देंगे। बाहर से हम हंसते रहेंगे। भीतर में से पूरा सड़ा हुआ है। तो मैंने कहा है इसको कि इट्स अ वेरी गुड कि तुम इस हायर पर्पस को खोज रहे हो। तुम्हारे में इतना तीव्र वैराग्य नहीं कि प्योर पर्पस के रास्ते पर चलो। तुम ऐसा हाइब्रिड रास्ता अपनाओ और देखो कि एट द एंड ऑफ 30 इयर्स 40 इयर्स तुमको भीतर में से कितना सुकून मिलेगा। तो यह मुझे पूछता है कि प्रतिदिन ऐसा करना होगा 30 40 इयर्स इससे कम में नहीं होगा। मैंने कहा कम में करना है तो तुमको फिर करियर को छोड़कर के प्योर पर्पस वाले रास्ते पर चलना है। किंतु उसके लिए तुम्हारी कैपेसिटी नहीं। सो एनीवे अभी यह लड़का तो चला गया। कितना सुनेगा कितना नहीं सुनेगा क्या पता। किंतु देखिए यहां

पहले नेति-नेति कहकर भोग-त्याग करे, फिर इति-इति कहकर ईश्वर ही सब हुए है यह दर्शन करे

पर जो ठाकुर कहते हैं ना पहले नेति नेति विचार करना है। विचार करके जीव जगत को एक बार मिथ्या साबित कर देना है। देखिए यह जो सुकृति जो है हम सभी में यदि आए कि विद्यार्थी अवस्था में प्रारंभ में ही कि थोड़ा सा एक जगत के प्रति विराग उत्पन्न हो। थोड़ा सा एक साधना नियमित साधना का रास्ता पकड़ ले। उसके बाद में आप पैरेलली संसार कीजिए ना। कौन मना करता है? यह जो अपनी वैदिक सिस्टम थी कि यह पहले 25 साल ब्रह्मचर्य आश्रम उसके बाद में 25 साल गृहस्थ आश्रम उसके बाद में 25 साल वानप्रस्थ आश्रम और फिर 25 साल सन्यास आश्रम तो देखिए कि ब्रह्मचर्य आश्रम अर्थात कि विद्यार्थी अवस्था इस तरह से डिजाइन की गई थी कि जीवन का एक हायर पपस है वह आपको आपके बचपन में ही समझा दिया जाए और कहा जाए कि हां संसार करो संसार ना करना करना सबके लिए हितावह नहीं। मन की यह जो सब कामना वासनाएं है कब कहां पे वह आकर के खड़ी हो जाएगी। मैं एक लड़के को पहचानता हूं। अभी गरीब है यहां पे यहां का ही है। गरीब है और शादी का ऐसा कोई यह नहीं है। पॉसिबिलिटी गरीब ऐसा नहीं है किंतु क्या है? तामसिक भयानक तामसिक है और शादी का पॉसिबिलिटी है नहीं शायद। अ तो फिर मैंने उसके व्यवहार में देखा थोड़ा-थोड़ा विकृति आना मैंने देखा शुरू हो गया है। अभी मैंने उसको बोलना पड़ेगा कि भाई तुम या तो शादी करो या तो फिर क्या है कि तुम सीरियसली कुछ साधन भजन करो। यह जो बिना शादी के तुम रह रहे हो तुम्हारे भीतर में जो विकृति खड़ी हो रही है। इट्स अ वेरी डेंजरस। वेरी डेंजरस। तो क्या है कि ये बचपन से ही विद्यार्थी अवस्था ही समझा दिया जाए कि हायर पर्पस इज देयर। नाउ यू मेक अ सिलेक्शन कि आप संसार के रास्ते पर भी यदि चलते हैं तो हमेशा नित्य नियमित आधा घंटा एक घंटा साधन भजन को आप दीजिए। जैसे भी हो कहां पे भी हो एक जगह ठीक कर लीजिए। एक मेथड ठीक कर लीजिए। एंड स्टिक टू इट टू योर होल लाइफ। कथा श्रवण है, मंदिर में जाना है, स्वाध्याय है, जप ध्यान तो थोड़ा मुश्किल होता है। किंतु यदि वो भी कर पाओ। सो वेरी गुड म अपना लाइफ बन जाएगा। यदि तुम ऐसा कर पाओ। तो क्या है कि यहां पर ठाकुर कहते हैं कि नेति नेति विचार एक बार कर लेना है। जगत मिथ्या है। यह एक बार अपने भीतर में डाल देना है। बाद में तो ठाकुर तो फिर कहते हैं निर्विकल्प समाधि तक चले जाओ। फिर इति करना तो वो अभी कहां पे होने वाला है? ज्यादातर लोगों के लिए मैं कहता हूं कि एक बार नेति नेति करके कि जगत मिथ्या है। जगत में जितने भी सुख है एक ना एक दिन तो रिग्रेट में परिणत होने ही वाले हैं। और फिर देखिए जैसे वृद्धावस्था आई बीमारी भी आएगी। वो जो मेंटल फिजिकल स्ट्रगल स्टार्ट होगा ही होगा। उस समय भीतर में से जो रेजिलियंस चाहिए देखिए हमारे प्रेसिडेंट महाराज को आप जितने भी है रिवियर्ड वाइस प्रेसिडेंट महाराज है रिवर्ड प्रेसिडेंट महाराज जिनको भी आप पहचानते होंगे मैं रंगनाथानंद जी से मैं जब आया था प्रवेश किया था संघ में तो परम पूजनीय रंगनाथानंद जी महाराज संघ गुरु थे और फिर गीतानंद जी महाराज थे गहनानंद जी महाराज वाइस प्रेसिडेंट है उस समय तो उस समय से मैं यह जो अपने ऑर्डर में जो टॉप लेवल पे जो लोग बैठे हैं उनको देख रहा हूं। उम्र हो गई है 80 85 90 91 2 3 अभी जो वर्तमान रिवर्ड प्रेसिडेंट महाराज है उनका 95 96 97 आई थिंक अभी जस्ट उनका पहला वैशाख को ही उनका बर्थडे था। तो देखिए कि इस उम्र में भी वे लोग चेयरफुल है। ऐसा नहीं है कि भीतर में सफरिंग नहीं है। वो तो यहां पे आए मैं देख रहा हूं सफरिंग के होने के बावजूद जो चीयरफुलनेस है आपको उनके पास में जाकर बैठने का मन होगा वरना बहुत सारे वृद्ध लोग ऐसे होते हैं कि उनको आप अवॉइड करना चाहते हैं 98 इयर्स देखिए [हंसी] तो तो देखिए कि बहुत सारे वृद्ध लोग ऐसे होते हैं कि इनको आप अवॉइड ही करना चाहते हैं। क्यों? क्योंकि उनके आसपास में यह रिग्रेट है, निराशा है, हताशा है। उसका एक ओरा जो है ना तन मात्रा है उनके चारों ओर घूमती रहती है। सो एक बार जीवन में नेति करके समझ लीजिए कि ये जो संसार आप भले कीजिए संसार करना उचित है ज्यादा 99% लोगों के लिए। किंतु पहले से ही यह ठीक कर लीजिए कि संसार कहीं आपको अल्टीमेट सुख नहीं देने वाला है। देयर इज अ हायर पर्पस इन लाइफ। और फिर जाग्ञाती सवार गुजराती में एक कहावत है जब जिस क्षण जगे उसी क्षण से सुबह होती है तो ऐसा मत सोचिए कि अरे मेरी युवावस्था चली गई अभी कहां मैं साधन भजन करूंगा अरे मेरी मिडिल एज भी चली गई मैं वृद्ध हो गया अभी कहां सा नहीं जिस दिन जगे जिस क्षण जगे उसी क्षण से सुबह हो गई है यह समझ [गला साफ़ करने की आवाज़] लेना है तो एक बार नेति नेति करके समझ लीजिए संसार मिथ्या है संसार में आपको जितना भी सक्सेस मिले, धन मिले, शोहरत मिले, पोजीशन मिले, रिस्पेक्ट मिले। अल्टीमेटली ऑल ऑफ दिस वो कोई काम का नहीं है। इससे हायर पर्पस में एक ईश्वर है ऐसा एक विश्वास जागृत हो। आत्मन है। यह विश्वास जागृत हो। और यदि नहीं भी होता। यह लड़का मुझे बोलता है मैं नास्तिक हूं। मैंने कहा डोंट वरी। मैं भी नास्तिक था। बहुत लंबे समय तक नास्तिक था। इन अ वे मैं अभी भी नास्तिक हूं। [हंसी] डजंट मैटर एनीथिंग। जब तक तुम एक सिंसियरली साधना का रास्ता फॉलो करते हो, नास्तिक होना, आस्तिक होना, ईश्वर में विश्वास नहीं है। ऑल ऑफ दिस डज नॉट मैटर। एक इतना यह रखो कि एक हायर पर्पस है लाइफ में। और हायर पर्पस मुझे अचीव करना है। चलो मुझे साधना करके देखने दो कि मेरी साधना मुझे कहां पे लेके जाती है। इतना भी यदि होगा दैट इटसेल्फ इज इनफ। तो एक बार नेति नेति करके जगत मिथ्या है। ऐसा एक भीतर में बैठा दीजिए। एक नियमित साधना का एक सूत्र अपना लीजिए। सूत्र को फॉलो कीजिए। आधा घंटा एक घंटा इनफ है दिन का। यदि इससे ज्यादा कर पाए तो बहुत अच्छा है। किंतु फिर इससे कम भी होगा तो भी कोई यह चिंता नहीं है। हाफ एन आवर वन आवर ऐसा आप नित्य नियमित प्रतिदिन आप देखिए अपने क्लास में कितने लोग हैं जो कि नियमित रूप से इस तरह से क्लास अटेंड करते हैं। अपना भी और भी बहुत सारी जगह पर क्लासेस होते हैं ऑनलाइन। सब जगह पे ये लोग उपस्थित होते हैं। वि इज सो गुड। देखिए ठाकुर मां स्वामी जी की ये जो वाणी अपने कानों में प्रवेश की है अपने हृदय में जो प्रवेश करती है इससे जो भीतर की चित्त की जो मलिनता है वो शुद्ध होती है। ये जो श्रवण है कितना सुंदर है। ये जो अभी आजकल कोरोना के बाद में जो एक अच्छा एक बेनिफिट सबको मिला है कि ये अपने आश्रमों में सभी अभी आरती लाइव होती है। तो बेंगलुरु की आरती लाइव होती है। बेलूर मठ की आई मुझे पता नहीं। कामरारपुक की होती है। अह राजकोट की होती है। काफी सेंटर की होती है लाइव आरती। तो लोग आरती भी देखते हैं संध्या आरती। अभी क्या है कि अह डिस्टेंस इतने बड़े-बड़े हो गए तो लंबे-लंबे हो गए और ट्रैफिक का भी समस्या आजकल का कैसा है? घर से बाहर निकलने से ही भयानक भयानक ट्रैफिक। शाम के समय तो खास ये जो रशवर जिसको कहते हैं तो ठीक है चलो हमको मंदिर में जाने की सुविधा नहीं आश्रम में नहीं जा सकते तो घर में ऑनलाइन आरती देखिए सो मेनी गुड थिंग्स आर अवेलेबल ऑनलाइन नाउ अ डज़ तो फिजिकली जा सकते हैं मंदिर में साधना की जगह पे जाइए नहीं जा सकते तो ऑनलाइन भी कहां पे भी कैसे भी करके अपना एक फिक्स कर लीजिए कुछ भी और फिर ठाकुर जैसे से कहते हैं मनने वने और कोण बीच-बीच में फिर रिटरीट में चले जाना है। तो ऑल ऑफ दिस एक बार कर लेना है। लाइफ में एक बार फिक्स कर लेना है। एक सूत्र पकड़ लेना है कि लाइफ में वन आवर एवरीडे इतना तो मुझे करना ही करना है। तो यहां पर ठाकुर कहते हैं कि पहले तो नेति नेति विचार करने के समय जीव नहीं जगत नहीं चतुर्विशति तत्व नहीं यह सब कर दो। यह सब सब स्वप्नवत है। यह सब कर दो। फिर अनुलोमविलोम फिर वो एक बार एक बार ठीक हो जाए। यह ठाकुर तो निर्विकल्प समाधि की बात करते हैं। किंतु हमारे लिए कि एक बार एक वैराग्य का भाव एक हायर पर्पस का भाव जीवन में ठीक हो जाए। फिर है अनुलोम के बाद में विलोम। फिर तीन ही जीव जगत होए छन बोध होए। फिर वही जीव जगत हुए हैं। भले संसार करते हैं। भले सब कुछ करते हैं। बीवी बच्चों की संभाल रखते हैं। नौकरी करते हैं। पैसों के पीछे में दौड़ते हैं। सब कुछ कीजिए। किंतु साथ में ही साधना का एक सूत्र पकड़ करके जो रखा है जीवन भर उसको पकड़ करके रहिए। फिर ठाकुर कहते हैं सीढ़ी चढ़कर के एक बार छत के ऊपर में उठे और उसके बाद में पता चलेगा जिस चीज का छत बना है उसी चीज की यह सीढ़ी भी बनी है और वैसे तो यह प्रैक्टिकल नहीं किंतु फिर भी कह सकते हैं कि उसी ही चीज का मनुष्य का देह बना है। प्रैक्टिकल क्यों नहीं? एक्चुअली इट्स अ प्रैक्टिकल माने सीमेंट वगैरह का देह नहीं बना तो वही एटम का बना है देह वही वो मॉलिक्यूल है जो कि ये सभी चीजों में जो एटम है इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन वो हमारे ही देह में है और इससे भी आगे जाए तो एवरीथिंग इज प्योर एनर्जी e = mc² जो आइंस्टाइन कहता है एनर्जी इक्वल्स मास * स्क्वायर ऑफ स्पीड ऑफ लाइट जो भी मास है आप इसको 100% एनर्जी में कन्वर्ट कर सकते हैं। द वर्ल्ड इज़ नथिंग बट एनर्जी। तो इस दृष्टि से देखें तो सब कुछ एनर्जी है। जो कुछ भी मैटर है, जो कुछ भी आप देख रहे हैं, स्पर्श कर रहे हैं, सूंघ रहे हैं, टेस्ट कर रहे हैं, दैट एवरीथिंग इज नथिंग बट एनर्जी। सो, एक बार एक समय आएगा आप धीरे-धीरे करके। यह लड़का

ठाकुर की वार्ता और वार्तालाप का पाठ -- यही है आध्यात्मिक जीवन की नींव

मुझे पूछ रहा था कि आपको ऐसा कोई अनुभूति हुई है क्या कि आपको ऐसा कुछ लगता है कि वो पहले तो पूछा आप कितने साल से यहां पे हैं? मैंने कहा मोर और लेस 25 ईयर तो हो गए। अ जॉइ करने से पहले से कुछ साल गिन करके रांची से गिन करके जॉइ करने के बाद में सब 25 के आसपास तो हुए ही हुए हैं। तो बोलता है कि आपको क्या अनुभूति हुई है? मैंने कहा देखो यह बात तो है कि कुछ तो अनुभूति होगी ही होगी। अदर वाइज तो एक जगह पे यहां पर इतना आप नहीं रह सकते हैं। किंतु बात क्या है? आप यह सब अनुभूतियां है। क्षणभंगुर रहती है। हुआ एक अनुभूति फिर चला गया। अभी ध्यान कर रहे हैं। ध्यान करते-करते एकाएक कुछ फ्लैश हुआ। फ्लैश के बाद में चला गया। तो हमारे जीवन का पर्पस क्या होता है कि यह जो अनुभूति जो है ये जो एक फ्लैश एक क्षण भर के लिए हुआ उसको हम परमानेंट रूप से टका करके रखें। ऑलवेज एट द बैक ऑफ आवर माइंड यह बना रहे कि हां एक अनुभूति है। एक दिव्य अनुभूति है। जो कभी मेरे साथ में एटलीस्ट तो नहीं होता। जब ध्यान करेंगे कुछ स्मरण मनन निधिसन करेंगे उस समय कुछ अनुभूति होगी कुछ फ्लेश होगा आनंद का एक फ्लेश होगा ठाकुर पर थोड़ा सा भक्ति भरोसा सीरियसली आएगा शरणागति का भाव आएगा किंतु जैसे ही वह सब बंद करते हैं फिर वैसे ही नॉर्मल लेवल पर आ जाता है लाइफ किंतु एक बात है कि अनुभूति होती है सो इट इज़ नॉट लाइक के अह आप 20-25 साल बिताएंगे हाथ में कुछ नहीं आया रामकृष्ण संघ के जो भी आप भक्त हैं ठाकुर के जितने भी फॉलोअर्स हैं मैं आपको गारंटी देकर के कह सकता हूं कि ये ठाकुर मां स्वामी जी की वाणी और वचन और यह वार्ताएं वार्ता और वार्तालाप कथा और कहानी यह जो ठाकुर मां स्वामी जी की है उसको आप प्रति नियमित रूप से आप श्रवण करेंगे ना आपको कुछ ना कुछ अनुभूति होने ही वाली है। कोई आपको फैंसी आप कोई तपस्या व्रत करना यह प्रायोपवेशन करना वह हत्या देना यह जो पंचतपा अपने ऑर्डर में तो सब हायर हायर टाइप की सब है ना वो मेथड सब वो जो पूर्णाभिषेक करना वो वो सब नॉट नेसेसरी करें तो बहुत अच्छा है किंतु नॉट नेसेसरी कि वो सब आपको करना पड़े वाणी और वार वचन और यह वार्ता और वार्तालाप ये सिर्फ कहानियां ठाकुर मा स्वामी जी की आप सुनेंगे यह सिर्फ उनके वचन भी सुनेंगे एक ना एक दिन आपको कुछ ना कुछ अनुभूति होने ही वाली है यह अनुभूतियों का यह फ्लेश का ये भीतर में से एक शरणागति का भाव आए जेन्युइन शरणागति का भाव सिर्फ मुंह से बोलना नहीं भीतर में से जेन्युइन शरणागति आती है भीतर में एक जेन्युइन आनंद प्रसारित हो जाता है भीतर में जेन्युइन भक्ति भाव जो भाव की हम साधना करते हैं बालक भाव कहो मातृ भाव कहो दास्य भाव कहो सख्य भाव कहो जो भाव की हम साधना करते हैं वह भाव का अनुभूति जेनुइन अनुभूति हमको होना ही होना है। यह मैं एकदम गारंटी देकर कहता हूं। जो भी रामकृष्ण संघ के जो फॉलोअर्स है जो भी ठाकुर मां स्वामी जी के भक्त हैं यह अनुभूति होनी ही है और बहुत सहज रूप से होती है। कोई फैंसी आपको कुछ नहीं कर लेना है कि मां ने कहा 10,000 जप करो। वेरी गुड। कीजिए। वो जो मां की वो फेमस कहानी है उद्बोधन में एक डॉक्टर महाराज वो खाने के लिए देरी से आते थे रात को तो गोलाप मां चिल्लाती थी उन पे बड़ी नाराज हो जाती थी कि अरे सबके साथ में खाना खा लो तुम देरी से आते हो तुम्हारे लिए मुझे डिश एक जो प्लेट है वो सेपरेटली सजा के रखना है बिल्ली वगैरह कुछ आ गई उसमें मुंह डाल दिया तो तुमको ही तकलीफ होगी ऐसा बोल कर गए तो फिर मां ने वो डॉक्टर महाराज को बुलाया स्नेह से पूछा कि बेटा क्या बात है तुम डेली क्यों देरी से आते हो गुलाब इतनी चिल्लाती क्यों ऐसा? तो फिर वो जैसे ही मां ने स्नेह से पूछा, यह महाराज बेचारे रो पड़े। रोते-रोते मां को कहा कि मां राजा महाराज उनके गुरु थे। तो राजा महाराज ने मुझे बताया है तुम प्रतिदिन 10,000 जप करना और संख्या को ठीक रखना। यदि संख्या में गड़बड़ हो गई तो फिर से एक प्रथम एक से स्टार्ट करना। और यदि ऐसा नहीं करोगे तो तुम्हारे जप का फल राक्षस खा जाएगा। तो मां यह सुनकर के हंस पड़ी और मां ने कहा देखो बेटा तुम मन लगा के जप करो इसलिए राजा ने तुमको ऐसा कहा है तो मैं कहती हूं जब खाने का समय हो तुम आकर के खाना खा लो फिर तुम जाकर फिर से जप करो तुमको कोई दिक्कत नहीं तो अभी यह तो गुरु के भी गुरु है सुप्रीम कोर्ट में से चुकादा मिल गया तो फिर यह साधु फिर सांत्वना प्राप्त करके फिर प्रतिदिन भोजन के लिए नियमित आता था तो यह सब है अपने ऑर्डर में किंतु मैं एकदम गारंटी देकर कहता हूं। यह यदि हमारे से नहीं भी होता है। 10,000 जप नहीं भी होते हैं प्रतिदिन। सिर्फ यह हम कथामृत का पाठ करते हैं। देखिए यह जो एक हाथ में कथामृत रखना और एक हाथ में जप का माला। आप जप करते जाइए और जब भी मन थोड़ा सा भी डिस्ट्रैक्ट हो इमीडिएटली कथामृत का एक पैसेज पाठ कर लीजिए। फिर से जप कीजिए। देखिए कि यह कथामृत का पाठ करते-करते आप जप करेंगे ना तो जप का जो फल है ना 10 टाइम्स बढ़ जाएगा। वो मल्टीप्लाई होता जाएगा। जिनका नाम लेते हैं उन्हीं का वाणी हम श्रवण करते हैं। सुनते हैं। सो रामकृष्ण संग में साधन भजन जप ध्यान सहज है। कुछ इसमें दिक्कत वाली बात नहीं। और फिर ठाकुर कहते हैं कि यह मैं तो जाने वाला नहीं। मैं रूपी घट जब तक है तब तक जीव और जगत भी है। उनको लाभ करने से देखा जाता है कि वही जीव जगत हुए हैं। सिर्फ विचार से नहीं। इसके बाद में यदि ये एक हमने साधन भजन का सूत्र पकड़ लिया। फिर आप संसार कीजिए, घर में रहिए, नौकरी कीजिए, बिजनेस कीजिए, सब कुछ कीजिए। देखिए, एक शांति से सब कुछ भर जाएगा। एक तरह की सीरिनिटी जीवन में आ जाएगी। एक तरह की प्रशांति फैल जाएगी आपके चारों ओर। लोग आपका संग करना चाहेंगे। लोग आपके कंपनी में वे लोग पीसफुल फील करेंगे। तो क्या है कि यह संसार जो आप कर रहे हैं संसार विद्या का संसार हो जाएगा। ठाकुर कहते हैं ना अविद्या का संसार है। विद्या का संसार है। तो आपका संसार विद्या के संसार में परिणत हो जाएगा। देखिए ठाकुर वैसे बहुत उच्च कक्षा की बात करते हैं निर्विकल्प समाधि से वापस आने की। मैं उतनी उतनी लेवल की बात नहीं करके सिर्फ इतना ही कहता हूं कि थोड़ा बहुत वैराग्य प्राप्त करके एक बार साधन भजन नियमित रूप से स्टार्ट कर दिया मिनिमम वन आवर 10 15 20 25 साल देखेंगे कि यह विद्या का संसार में सब कुछ परिणत हो जाएगा। शिव की दो अवस्था है। जब समाधि में महायोग में बैठे हैं तब आत्माराम है। फिर जब उस अवस्था में से नीचे आते हैं थोड़ा सा आमी प्रकट होता है तो राम राम करके नृत्य करते हैं। ठाकुर शिव की वर्णना शिव की अवस्था की वर्णना करके क्या अपनी खुद की अवस्था इंगित कर रहे हैं? [हंसी] अच्छा यह तो हमने ऑलरेडी देखा है। इसके बाद में और थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं। मास्टर महाशय क्या लिखते हैं? संध्या हो

दक्षिणेश्वर की दिव्य संध्या: जहाँ मन स्वतः ईश्वर में डूब जाए

संध्या हुई ठाकुर जगन माता नाम ओ तहार चिंता कोते छ ठाकुर जगन माता का नाम और उनकी चिंता चिंता अर्थात टेंशन नहीं यह बेंगली वर्ड चिंता है उसका अर्थ है चिंतन चिंतन या तो फिर स्मरण कर रहे हैं भक्तराओ निर्जनगिया जे जा ध्यानादि कोते लागी भक्त लोग भी निर्जन में जाकर के जो जिसको आया इस तरह से ध्यान वगरा करने लगे ए के ठाकुर बाड़ी ते मां काली मंदिर श्री श्री राधाकांत मंदिर ओ द्वादश शिव मंदिर आरती होइते लागीो यहां पे ठाकुर वाड़ी में मां काली के मंदिर में श्री श्री राधाकांत के मंदिर में और द्वादश शिव मंदिर में आरती होने लगी। यह कितना सुंदर वो एटमॉस्फियर होगा। ठाकुर ध्यान कर रहे हैं। यहां पर चारों ओर आरती चल रही है। तो आरती का वो जो जो घंटी का जो शब्द होता है वो जो कांसर वगैरह जो बजता है कितना सुमधुर वो समय होगा। आज कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि आज कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। शार की काल परे चंद्रोदय हो संध्या के कुछ समय के बाद चंद्रोदय हुआ। चंद्र है आकाश में निकला से आलो मंदिर शीर्षो चतुर दिके तरुलता ओ मंदिर पश्चिम में भागीरथी बखे पड़िया अपूर्व शोभा धारण करिया छे वही चंद्र का प्रकाश वही आलो मंदिर शीर्ष अर्थात कि मंदिर का यह जो शिखर है उसके ऊपर में चारों ओर की तरुलता है उसके ऊपर में मंदिर के पश्चिम में जो भागीरथी बह कह रही है। वह भागीरथी वक्ष अर्थात कि भागीरथी के सीने पे पड़कर के अपूर्व शोभा धारण किया है। मैं फिर से पढ़ता हूं। बहुत ही सुंदर सेंटेंस है। कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। संध्या के कुछ समय के बाद चंद्रोदय हुआ है। वही चंद्र प्रकाश मंदिर शीर्ष चारों ओर की तरुलता मंदिर के पश्चिम में भागीरथी वक्ष के ऊपर में पड़कर के अपूर्व शोभा धारण किया है। ए समय से पूर्व परिचित घरे ठाकुर श्री रामकृष्ण बोशिया छे इस समय वही पूर्व परिचित घर में ठाकुर श्री रामकृष्ण बैठे हुए हैं। देखिए ठाकुर का कमरा जब भी मास्टर महाशय उसका मेंशन करते हैं। पूर्व परिचित चीर परिचित यह सब शब्द यूज करते हैं। क्यों? क्योंकि देखिए कोई जगह के साथ में आपका स्पिरिचुअल रिलेशन भी बनता है ना तो आप कुछ समय के लिए भी वहां पर जाएंगे ना ऐसा लगेगा कि जन्म जन्मांतर का नाता हमारा उस जगह के साथ में है। वो फेमस घटना स्वामी जी शरद महाराज के घर आते हैं। पहली बार आते हैं। कहते हैं कि जैसे इस घर के साथ में मेरा चीर परिचित का नाता है। सभी इस घर में कौन सी चीज कहां पे है। मुझे जैसे कि सब कुछ पता है। पता नहीं मैं यहां पे मैं कितनी बार आ चुका हूं। ये जो अनुभूति क्यों होती है? क्योंकि शरद महाराज के साथ में शरद महाराज के घर के साथ में स्वामी जी का एक गहरा स्पिरिचुअल संबंध बनने वाला था। तो यहां पे भी ठाकुर का वो कमरा जिसके साथ में मास्टर महाशय का गहन आध्यात्मिक संबंध बनने वाला था। इसी कमरे में ठाकुर का कथामृत श्रवण करके मास्टर महाशय के यह जो त्रिताप दग्ध जो हृदय है उसको जो सांत्वना मिलने वाली थी बोलकर के वैसे तो बाय दिस टाइम 189 1883 मास्टर महाशय मोर और लेस 2 साल से ठाकुर के पास आ रहे हैं। किंतु फिर भी यह नाता सिर्फ दो साल का नहीं है। पता नहीं जन्म जन्मांतर का नाता ठाकुर के साथ में है। इसलिए ठाकुर जहां पर रहते हैं वो कमरा जैसे कि उनको चीर परिचित लगता है। तो मास्टर महाशय लिखते हैं इस समय वही पूर्व

ठाकुर का अद्भुत दर्शन: जगन्माता स्वयं ही सब कुछ हुई हैं

परिचित घर में ठाकुर श्री रामकृष्ण बैठे हुए हैं। मणि में ते बोशिया छे मणि जमीन पर बैठे हुए हैं। मणि अर्थात मास्टर महाशय मणि बैले वेदांतो संबंध जे कथार अवतारणा कोरिया छिलेन ठाकुर आबार से कथाई कोहते छ मणि ने शाम के समय वेदांत के बारे में जिस बात की अवतारणा की थी अर्थात जिस बात के बारे में बात कर रहे थे ठाकुर फिर से वही बात ही कर रहे हैं बस वही बात कि जगत क्या मिथ्या है जगत मिथ्या है तो फिर यह जो नौकरी करना यह सब करना इसका कोई प्रयोजन नहीं रह जाता। नौकरी वगैरह इसीलिए करना है कि जिससे आप साधन भजन अल्टीमेटली साथ-साथ में करके ईश्वर प्राप्ति करें। तो यह एक प्रश्न उनके मन में था। श्री रामकृष्ण क्या कहते हैं? उसके उत्तर में शाम को तो बात हो ही गई। अभी फिर से वही बात चलती है। क्या कहते हैं ठाकुर? श्री रामकृष्ण मणिर प्रति श्री रामकृष्ण मणि अर्थात मास्टर महाशय के प्रति जगत मिथ्या क्यों होवे जगत मिथ्या क्यों होगा क्यों होने लगा वो सब बिचारे कथा वह सब विचारों की बातें हैं ताके दर्शन होले तो खून बोझा जाए जे तीन जीव जगत होए छ उनको दर्शन करेंगे उनका दर्शन होगा तब समझ में आएगा कि वही जीव और जगत हुए हैं आमाए मां काली घरे देखे दिल जे माई सब होए छ मुझे मां ने काली घर में दिखा दिया कि मां ही सब हुई है। मां अर्थात मां काली काली घर में यही मां काली ने ठाकुर को दिखा दिया कि वही सब कुछ हुई है। देखिए दिलन दिखा दिया शो चिन्मय सब चिन्मय प्रतिमा चिन्मय वेदी चिन्मय वेदी अर्थात कि जहां पे यह प्रतिमा या तो फिर वेदी अर्थात जहां पर प्रतिमा रखी जाती है कोषाकुशी चिन्मय अर्थात कि यह जो पूजा के जो बर्तन है वह भी चिन्मय है चौकाट चिन्मय मार्बलर पत्थर सब चिन्मय मार्बल का पत्थर चौकाट सब चिन्मय अर्थात चिन्मय अर्थात कि जीवंत इस सबके भीतर में वही ओजस या तो वही ब्रह्म तत्व उनके भीतर में भी है वही वही ब्रह्म का उजाला वही ब्रह्म का ज्योति उन सबके भीतर में है। बस यह है कि यह किसी ने यह वेदी रूपी नाम रूप का मुखौटा पहना है। किसी ने यह प्रतिमा रूपी मुखौटा पहना है। किसी ने कोषाकुशी रूपी मुखौटा पहना है। किंतु देखेंगे कि सब कुछ चिन्मय है। देखिए जस्ट इमेजिन कि ठाकुर को यह दर्शन हुआ होगा। काली मंदिर में आप गए होंगे तो देखा होगा छोटा सा वो गर्भगृह है वहां पर सामने मां काली की प्रतिमा है। उसके सामने बैठकर के ठाकुर आरती करते होंगे। तो आरती के वह सब बर्तन वगैरह रखने के लिए चौकाट जैसा भी होगा। फिर यह बर्तन ये पूजा के पुष्प पात्र ये धूप दीप वगैरह जो रखा होगा। एकाएक ठाकुर को दर्शन होता है कि वही ब्रह्म साक्षात्कार वही ब्रह्म ही सब कुछ हुए हैं। मां ही सब कुछ हुई है। ब्रह्म जब स्थिर है तो ब्रह्म है और फिर जब वो गति या तो नाम रूप का मुखौटा पहनते हैं तब यह सब होते हैं। तब वो मां होते हैं और फिर यही मां यह सब चीजें चीजों में परिणत होती है। तो वो जो दर्शन होगा कितना सुंदर होगा। देखिए क्रिश्चियनिटी के साथ में एक आप देखेंगे कि जैसे-जैसे समय बीतता जाता है ना ग्रेट पेंटर्स सब आए हैं और उन्होंने वो जो कुछ-कुछ सीन जो है वो जीसस का नेटिविटी है, जीसस का क्रुसिफिकेशन है, वो जो बैप्टिज्म है वगैरह-वगैरह को लेकर के ग्रेट पेंटिंग्स तैयार किए हैं। अभी ऐसे कोई ग्रेट पेंटर्स अपनी परंपरा में प्रकट हो और यह जो सब कुछ कुछ म अमर यह जो सीन है ठाकुर वहां पे बैठे सब कुछ चिन्मय दिखता है। ऐसा एक ग्रेट पेंटर इसको पेंट करेगा तो कितना सुंदर वो सीन होगा। अभी आजकल ये एआई जनरेटेड सब कुछ होता है। इसको आप एआई में डालेंगे तो सुंदर वो बना देगा पेंटिंग। तो सी दैट कि यह सब चीजों को ना विजुअलाइज़ करेंगे और फिर इसको विजुअलाइज़ करके अपने हृदय में रखेंगे और फिर उसके ऊपर ध्यान करेंगे। ठाकुर वहां पे बैठे हैं। एकाएक जैसे देखा मां काली ही सब कुछ हुई है। सब कुछ चिन्मय है। वेदी चिन्मय प्रतिमा चिन्मय यह चौकाट चिन्मय कोशाक चिन्मय मार्बल का पत्थर चिन्मय ये जो धूप दीप पुष्प पूजा के जो पात्र सब कुछ चिन्मय ठाकुर स्वयं चिन्मय सब कुछ जैसे ही मां ने ही एक तरह से नाम रूप रूपी मुखौटा पहन करके यह सब हुई है। म सच ए वंडरफुल थीम फॉर मेडिटेशन। घर भीतर देखी सब जेनो रसे रोए छ सच्चिदानंद रसे घर के भीतर में देखा सब कुछ जैसे कि रस में डूबा हुआ है सच्चिदानंद रूपी रस एक जो कल हम बात कर रहे थे ना कि वह भाव का विषय अभाव से कैसे मिलेंगे तो ठाकुर कहते हैं एक समाध्याय बोलकर के एक पंडित वो लेक्चर दे रहा है ब्राह्म समाज का कि ईश्वर तो नीरस है उसमें अपना रस डालकर के उसको सर सरस कर दीजिए। तो ठाकुर कहते हैं कि वेद में जिसको रसोवई सह कहा गया है उसको यह पगला निरस कहता है। जिस जिस ईश्वर से रस प्रकट होता है उसके भीतर में हम उसको ऊपर में से रस डालना ये कहां से होगा? तो देखिए कि सब कुछ जैसे कि रस में डूबा हुआ है। सच्चिदानंद रूपी रस ये जो बेंगली जो है आप सभी लोग तो रसगुल्ला तो खाते ही है। रसगुल्ला में कैसा आपको वो रस में डूबाना है। हाजरा महाशय एक बार कहते हैं ठाकुर किसी एक भक्त के बारे में कहते हैं कि कुछ कहा होगा कि उसका स्पिरिचुअल इवोल्यूशन अच्छा हो रहा है। ऐसा कुछ उसके बारे में कहा होगा। मैं एग्जैक्ट कॉन्टेक्स्ट भूल गया। किंतु हाजरा महाशय वहां पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि ये जो वड़ा है वड़ा अर्थात ये रसगुल्ला का ये जो ये होता है वो बॉल तो वो है अच्छे से फ्राई हुआ है। अभी उसको रस में डालेंगे अच्छे से वो रस चूसेगा। यानी कि आप तपस्या करेंगे तो तपस्या अर्थात कि अच्छे से फ्राई होना। इसके बाद में उसको रस में रखिए तो रसगुल्ला कितना अच्छे से रस चूसता है। तो वैसे ही तपस्या करने से भीतर का जो निर्मल हो जाता है पवित्र हो जाता है। फिर सच्चिदानंद रूपी रस जो है वो हमारे भीतर में प्रवेश करता है। अच्छे से रस चूसता है रसगुल्ला। टेस्ट में फिर एकदम स्वादिष्ट लगता है। तो यहां पर भी ठाकुर कहते हैं घर के भीतर में देखा सब कुछ जैसे रस में डूबा हुआ है। सच्चिदानंद रूपी रस में जैसे कि सब कुछ डूबा है। काली घरे सम्मुखे एक जन दुष्ट लोक के देखलाम। काली घर के सामने एक दुष्ट लोक को देखा। दुष्ट व्यक्ति को देखा किंतु तारों भीतर तार शक्ति ज्वलजल को छचे देखलाम किंतु उसके भीतर में भी ईश्वर की शक्ति ज्वलजल कर रही है देखा ताई तो बिडाल के भोगे लुची खाई छिलाम इसीलिए तो बिल्ली को भोग की लुची अर्थात कि पूरी खिलाई थी देखला माई सब होए छ देखा कि मां ही सब हुई है बिाल पर जंतु बिल दिल्ली तक सब कुछ मां ही हुई है। तो खाजची शेजो बाबू के चिट्ठी लिख ले जे भट्टाचार्य जी महाशय भोगेर लुची बिडाल देर खावा छन तब यह जो वहां का खजची अर्थात कि चीफ एडमिनिस्ट्रेटर उसने सेजो बाबू अर्थात कि मथुर बाबू को चिट्ठी लिखी कि भट्टाचार्य जी महाशय अर्थात कि ठाकुर भोग की लुची या पूरी बिल्लियों को खिला रहे हैं। सेजो बाबू हमारा अवस्था बुझतो सेजो बाबू मथुर बाबू मेरी अवस्था समझते थे पत्रेर उत्तरे लिख ले इस तरह का पत्र जब गया तो उसके उत्तर में लिखा उन जा कोरेनताते कोनो कथा बोलो ना वह जा कर रहे हैं उसमें और कोई भी आप प्रतिवाद मत करना उनको रोकना मत ताकि लाभ कर ले ईगुली ठीक देखा जाए जब ईश्वर को लाभ करते हैं तो यह सब कुछ आप नजरों से देख सकते है। सिर्फ बातों की बातें नहीं नजरों से देख सकते हैं। तीन जीव जगत चतुर्भिशति तत्व होए छ वही ईश्वर ही जीव जगत और चतुर्विंशति तत्व हुए हैं। अच्छा इसके बाद जो है उसको अभी हम नेक्स्ट क्लास में देखेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु

एक भक्त: क्या ठाकुर ने सही में अंग्रेजी में "मार्बल" शब्द कहा है?

ठाकुर को अंग्रेजी आता था ना क्वट अनकोट अंग्रेजी आता था। थैंक यू। [हंसी] ठाकुर वो कहानी कहते हैं ना कि एक आदमी हजाम के पास गया वो हजाम वो काट रहा है तो कट गया बोला डैम तो बोला कि क्या है डैम का अर्थ बताओ तो बोला नहीं नहीं अरे तुम करो ना तुम्हारा अपना काम करो वो बोलता है यदि डैम का अर्थ अच्छा है तो मैं डैम मेरे बाबा डैम मेरे चो पुरुष डैम और यदि डैम का अर्थ बुरा है तो तुम डैम तुम्हारा बाबा डैम तुम्हारे चो पुरुष डैम और सुधु डैम नहीं डैम डैम डैम डैम डीडी डैम [हंसी] ठाकुर को तो अंग्रेजी आता था। मैं जब राजकोट में था ना तो ज्योत में एक मैंने आर्टिकल सीरीज लिखना शुरू किया था। जहांजहां वो इंग्लिश शब्द यूज़ करते हैं ना ठाकुर वो एक पैसेज कलेक्ट करके वहां पर डालना चार पांच किया उसके बाद में मुझे छोड़ देना पड़ा क्योंकि फिर दूसरा दूसरा वो सब वो जगह चाहिए थी उसके लिए दूसरे आर्टिकल के लिए इतने सारे अंग्रेजी शब्द है वो किसी ने लिस्ट बनाया है आई थिंक 100 प्लस का वो लिस्ट है कथामृत में जो इंग्लिश शब्द है उसके

एक भक्त: सर्वभूत में ईश्वर -- क्या अद्भुत दर्शन!

एक दुष्ट व्यक्ति को देखा उसके भीतर में भी मां दिखती है। [हंसी]

एक भक्त: ठाकुर बिल्ली को भोग की पूरी खिलाने से मथुर बाबू भी कुछ नहीं कहते

इसी को कहते हैं नेपोटिज्म। [हंसी] वो इसलिए जो वो हवलदार था ना ठाकुर को जूतों से लात मार के मारा था। क्यों? कि सेजो बाबू को पटा के रखा है। वो सबको वो टाइट देते हैं। सेजो बाबू ठाकुर को कुछ नहीं बोलते। ऐसा कैसे [हंसी] चलेगा? फेवरेटिज्म।

एक भक्त: ठाकुर मार्बल में चैतन्य कैसे देख सकते हैं? वह तो जड़ है!

एक्चुअली क्या है? देखिए ये जड़ है। वो तो हम कहते हैं ना। अल्टीमेटली देखिए कि जड़ और चेतन का डिफरेंस भी तो अज्ञान से प्रकट होता है। जैसे ही ज्ञान प्रकट होगा तो ये डिफरेंशिएशन जो है सब मिट जाएंगे। पता चलेगा जड़ और चेतन एक ही है। स्थिर रहता है तो ब्रह्मन है। कार्य करते हैं तो शक्ति है। तो यह जड़ और चेतन सिंपली ए चेंज ऑफ पर्सपेक्टिव। हायर डायमेंशन पे हायर लेवल पे यह पर्सपेक्टिव हमको मिलता है कि यह डिफरेंस जो है वह लोअर लेवल पे ही है। कॉन्शियसनेस के लोअर लेवल पर भी है। कॉन्शियसनेस के वो लेयर्स तो आपको पता ही है सबकॉन्शियस, कॉन्शियस और सुपरकॉन्शियस। तो जहां तक हम नॉर्मल कॉन्शियस लेवल पे हैं। यह जड़ और चेतन का डिफरेंस दिखेगा। सुपरकॉन्शियस पे जाएंगे तो सब कुछ चेतन दिखेगा। यह ऐसा है कि मैं जमीन पर खड़ा हूं तो मुझे यहां से सामने वाला जो घर है वहीं तक दिखता है। इससे आगे मेरी नजर ही नहीं जाएगी क्योंकि यह घर रास्ते में है। किंतु मैं छत पर उठ गया तो मुझे आसपास के सभी घर दिखाई देंगे। क्यों? क्योंकि मेरी नजर के सामने बैरियर नहीं है। सो हायर कॉन्शियस लेवल पर जाएंगे यह बैरियर्स गिर जाती है। और नॉर्मल कॉन्शियस पे जो हमारा लिमिटेड विज़ था वह भी एक्सपैंड हो जाता है।

एक भक्त: ठाकुर की बातें कितनी रसप्रद है !

थोड़ा सा कुछ है। एक एक पैसेज बाकी है। उसमें निर्विकल्प समाधि के बारे में ठाकुर बात कर रहा है। सो इट्स अ वेरी गुड पैसेज एक्चुअली नहीं अपने टोटल पांच क्लास है। छह क्लास है। अपने टोटल छह क्लास है। कथामृत फिर मां का लाइफ फिर स्वामी जी का लाइफ उसके बाद में लीला प्रसंग फिर मां का लाइफ और फिर स्वामी जी का वो प्लान ऑफ कैंपेन सो सिक्स क्लासेस का साइकिल किंतु देखिए ठाकुर में यह सब थीम यही सब सभी चीजों में यही रिपीट होने वाला है। अल्टीमेटली यही जो थीम है वो आप मां को पढ़े ना कि स्वामी जी को पढ़े। अभी नेक्स्ट वीक जो स्वामी जी का लाइफ है वह पढ़ेंगे। अल्टीमेटली यही थीम जो है कि आंख बंद करके भी ईश्वर, आंख खोल के भी ईश्वर। सो इट्स गोइंग टू रिपीट एवरीवेयर। [हंसी] ठाकुर बोलता है साला मैं एक नहीं बार 10 बार बोलूं उससे तुमको क्या है? एक बार वो उनको बोल रहा है रामलाल दादा को ठाकुर बोल रहा है। कोलकाता में कुछ लोग अच्छी बातें करते हैं। कुछ लोग बेकार फालतू की बातें करते हैं। कोई लोग बोलता है कि ये परमहंस ना कि बाबू की तरह रहते हैं ना कि पैरों में जूते पहनते हैं। बढ़िया मजे से ये सब खाते पीते हैं। तो ठाकुर कहते हैं आमी शाला देर भलो कथायो मुते दी और शाला देर मंदो कथायो मुते दी। म उन सालों की मैं अच्छी बातों पे भी मुत देता हूं और बुरी बातों पे भी सालों की मैं मुत देता हूं। [हंसी] देखिए रिग्रेट नहीं रहेगा लाइफ में। एक बार लाइफ रिग्रेट से भर जाता है ना फिर उससे निकलना बड़ा मुश्किल है। बट रिग्रेट नहीं रहेगा। मतलब इतना तो मैं गारंटी दे सकता हूं। अच्छा बुरा हंसना रोना हंसी आंसू आंसू ये सब चलता रहेगा। इट्स अ पार्ट एंड पार्सल ऑफ लाइफ। जन्म मृत्यु जरा व्याधि का चक्कर है। आप देखिए ना ठाकुर को कैंसर हो गया। ठाकुर को इतना कष्ट हुआ। मां को तो सिंह वाहिनी के सामने जाकर हत्या देनी पड़ी थी। म कितना कष्ट इन्होंने नहीं सहन किया। कल ही हमने काली महाराज की बात कही। चल नहीं पा रहे हैं। तो शरद महाराज उनको नीचे छोड़ के आ गए। फिर उनको इतना गाली दिया तो कैसे भी करके वो ऊपर में उठे। जस्ट इमेजिन के फिजिकल पेन कितना होता होगा। बट देयर वाज़ है उनकी बातें वार्तालाप सुनेंगे ना ऐसा लगेगा ही नहीं कि उनके जीवन में कष्ट है। उनकी आप लाइफ छोड़कर के सिर्फ बातों और कहानियों को सुनेंगे। वार्तालाप को लगेगा ही नहीं कि लाइफ में ऐसा कुछ है। एज इफ के डिसोसिएट हो गया है दोनों का। वो एक अनंत आनंद के पथ पर चल रहा है। यह मटेरियल बॉडी अपना काम कर रहा है। ओम