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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत || 27 Oct 1882 - केशव सेन के साथ ठाकुर का नौका विहार || 6 Feb 2025

Invocation

ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री राम कृष्ण कथामृत श्री म चरित श्री म द्वारा लिखित इसका हम जो चैप्टर पाठ कर रहे थे उसका ऑलमोस्ट लास्ट फेज तक हम पहुंच गए हैं दशम परिच्छेद डेट है 27 अक्टूबर किंतु दक्षिणेश्वर जाने से पहले ये लोग सुरेंद्र मित्र के सुरेंद्र सेन हां सुरेंद्र मित्र के घर पर जाएंगे और वहां पर जाकर के थोड़ा सा विश्राम करेंगे और हमको प्रश्न होगा कि यदि देरी हो ही गया है तो फिर चांद तो निकल ही गया है तो फिर ठाकुर सीधे दक्षिणेश्वर जाने के लिए यात्रा क्यों नहीं करते तो उसका उत्तर है कि वही जिस गली में सिमुलिया स्ट्रीट जिसमें सुरेंद्र मित्र रह थे वहीं पर भी नरेण भी रहता था तो नरेण जद कलकाता तक आ गए हैं और नरेण को देखे बिना जाए ऐसा कैसे चलेगा इसलिए ठाकुर गए सुरेंद्र मित्र के घर और किसी को भेजा मैसेंजर को कि ठाकुर आए हैं नर को बुलाने के लिए भेजा तो वहां पर ठाकुर बैठे हैं सुरेंद्र मित्र के घर पर अभी सबसे पहला तो प्रॉब्लम यह है कि सुरेंद्र खुद वहां उपस्थित नहीं था उसने एक नया बागान खरीदा था वहां पर वह गया था तो अभी गाड़ी का रुपया देना होगा तो गाड़ी का रुपया कौन देगा हमको एक थोड़ा आश्चर्य हो सकता है कि केशव सैन ने खुद ने क्यों गाड़ी भाड़ा नहीं दिया या तो फिर नंदलाल जो कि आधे रास्ते तक ठाकुर को छोड़ने के लिए आए थे तो नंदलाल ने क्यों नहीं दिया तो खेर अभी ठाकुर मांगेंगे नहीं उनको तो सामने से देना चाहिए जो भी है तो अभी ठाकुर ने कहा कि इन लोगों की जो स्त्री है घर में उन लोगों के पास में से गाड़ी भाड़ा मांग लो ना क्या उनको पता नहीं है कि उनके पति वहां पर दक्षिणेश्वर में आना जाना करते हैं अभी ठाकुर ने ऐसा कहा तो सभी लोग हंसने लगे हालांकि ठाकुर के पास में पैसा देने वाले लोगों की कमी नहीं थी एटलीस्ट गाड़ी भाड़ा जद देना है तो मास्टर महाशय तो थे ही वह भी दे सकते थे जो भी है अभी यहां पर ठाकुर को पहली मंजिल पर बिठाया गया फर्स्ट फ्लोर पर ग्राउंड फ्लोर पर थे अभी फर्स्ट फ्लोर पर ले आया गया वहां पर गादी और तकिया बिछाया हुआ है और दीवाल के ऊपर में एक ऑइल पेंटिंग लगाया है ऑइल पेंटिंग में क्या है ठाकुर केशव सेन को दिखा रहे हैं सर्व धर्म समन्वय इसमें जितने भी मत है जितने भी धर्म है हिंदू मुसलमान क्रिस्टा बौद्ध सकल धर्मर समन बय आर वैष्णव शकतो शैब इत्यादि सकोल संप्रदाय समन्वय जितने भी धर्म है हिंदू मुसलमान क्रिस्टा बौद्ध उनका भी समन्वय और वैष्णव शाक्त शैव वगैरह का भी समन्वय तो यह धर्म का धर्म समन्वय का चित्र यानी कि धर्म समन्वय की बात ठाकुर ने केशव सेन को कही थी तो उसके आधार पर सुरेंद्र मित्र ने इस ऑइल पेंटिंग को बना बनाया है यदि ठाकुर की महासमाधि का फोटो एक लिया गया था जो कि हम जनरली पब्लिश नहीं करते या तो फिर पब्लिश करते भी है तो फिर ठाकुर को छुपा देते हैं क्योंकि वहां पर नीचे में कोर्ट है कोर्ट में ठाकुर सोए हुए हैं उनकी महासमाधि के बाद के बाद के दिन की यह बात है और किंतु यह ठाकुर को छुपा देने के बाद में यह ठाकुर की जो भक्त मंडली है वह सभी वहां पर खड़े हैं तो एक हिस्टोरिकल इसका सिग्निफिकेंट है उस फोटो के सेंटर में देखेंगे कि नरेंद्र खड़ा है और उसके कंधे पर हाथ रख कर के राम बाबू खड़े हैं तो इसमें देखेंगे कि यह जो सर्वधर्म के जो चिन्न होते हैं वो लेकर के सभी लोग खड़े हैं बलराम बाबू के हाथ में ऐसा एक है करके तो मैंने जब पहली बार इस चित्र को देखा था तो मुझे ऐसा लगा कि क्या यह लोग पहले से ही यह सब सर्वधर्म के यह जो चिन्न है वह लेकर के उन्होंने तैयार रखे होंगे ना कि क्या है यह सब चिन्ह कहां पर काम आएंगे तो खैर जो भी है वी डू नॉट हैव एनी हिस्टोरिकल कांटेक्ट एज टू हाउ दिस सिंबल्स ऑफ डिफरेंट रिलीजन केम ये विभिन्न धर्म के सिंबल उस आखिरी फोटोग्राफ के समय कहां से आए हमको पता नहीं है एटलीस्ट मुझे पता नहीं है तो फिर किंतु जस्ट एक एक इंटरेस्टिंग फैक्ट है रामकृष्ण के जितने भी यह सभागृह वगैरह होते हैं जैसे कि यह राजकोट का सभागृह है वहां पर भी आप देखेंगे कि सभी धर्मों के सिंबल लगाए हुए हैं तो यह जुडा इजम का फिर यह क्रिश्चियनिटी का हिंदुइज्म का सिख जम का वगैरह सब धर्म के सिंबल वहां पर रहते हैं तो मने यह एक आइकोनोग्राफी है तो जनरली क्या होता है कोई भी धार्मिक मूवमेंट होती है वह जब जैसे जैसे डेवलप होती है उसके साथ में उसकी आइकोनोग्राफी आर्किटेक्चरल स्टाइल म्यूजिकल एक ट्रेंड वगैरह भी एक डेवलप होता रहता है साथ-साथ में जैसे क्रिश्चियनिटी के साथ में आप यह ग्रेगोरियन चैट्स है अ वगैरह जो एक म्यूजिकल स्टाइल वह चर्च कोयर फिर यह केरोल वगैरह कैसे डेवलप हुआ है और साथ-साथ में ही चर्च आइकोनोग्राफी चर्च आर्किटेक्चर यह वगैरह डेवलप हुआ है तो वैसे ही बुद्धिज्म के साथ में देखिए कि रिलीजन के साथ में बहुत सारे अधर आर्ट्स वगैरह भी डेवलप होती है अभी हमारे रामकृष्ण मूवमेंट अभी भी बड़ी अभी भी नई है अभी भी हम कंपैरेटिव बड़े ही यंग है हिस्टोरिकल स्पीकिंग तो अभी भी हमने इस तरह की यूनिक आर्किटेक्चरल स्टाइल वगैरह इतना कुछ डेवलप नहीं किया है बेलूरमठ का मंदिर आप कह सकते हैं निश्चय कि स्वामी जी ने विभिन्न आर्किटेक्चरल स्टाइल जो कि स्टडी की थी नॉर्थ इंडिया में उसके बेस पर उन्होंने बेलूरमठ के मेन टेंपल की परिकल्पना की थी जिसको कि विज्ञान महाराज ने वास्तविकता में परिणत किया है विज्ञान महाराज पुट इन टू कंस्ट्रक्शन आइडियाज ऑफ स्वामी विवेकानंदा आर्किटेक्चरल आइडियाज ऑफ स्वामी विवेकानंद किंतु इसमें भी एक बात देखेंगे कि स्वामी जी के जो एकदम कुछ-कुछ रेडिकल आइडियाज थे कि मंदिर जैसे ओम जैसा दिखना चाहिए दूर से देखें तो इस तरह का तो कुछ नहीं दिखता है सो दैट वी हैव टू अंडरस्टैंड कि कुछ-कुछ आइडियाज को इंप्लीमेंट करें इस तरह की टेक्नोलॉजी या फंडिंग उस समय हमारे पास में नहीं था यह सब कुछ यह स्वामी शिष्य संवाद में एक बार स्वामी जी डिस्कस करते हैं उसके साथ में शरद चंद्र चक्रवर्ती के साथ में कि किस तरह से भगवान श्री रामकृष्ण देव के मंदिर का उसका होना चाहिए नक्शा होना चाहिए किस तरह का उसका आर्किटेक्चर होना चाहिए इसके बाद में आप देखेंगे कि एक बेलूरमठ से ही एक पुस्तिका पब्लिश हुई है एक बुकलेट पब्लिश हुई है जिसके भीतर में अ कौन से मंदिर का कौन सा आर्किटेक्चरल एलिमेंट बेलूरमठ के मेन टेंपल में यूज किया गया है उसमें में से प्रेरणा ली गई है तो अब देखेंगे कि काफी मंदिरों में से प्रेरणा ली गई है बेलूरमठ के मेन टेंपल को कंस्ट्रक्ट करने में किंतु यह तो एक एसिस्टिंग मॉन्यूमेंट्स में से एसिस्टिंग उसमें से प्रेरणा लेना जैसा हुआ आर्किटेक्चरल स्टाइल में से जब भी कोई भी वर्ल्ड रिलीजन होता है वो स्प्रेड होता है तो साथ में बहुत सारी चीजों को व डेवलप करता जाता है उसमें से ये एक आइकोनोग्राफी है तो तो आइकोनोग्राफी अपने यहां पर एक यूनिक आइकोनोग्राफी जो कि आपको रेयरली और कहीं पर देखने को मिलेगा और यदि देखने को मिलेगा भी जदी तो वह हमारे से ही ऑलमोस्ट कॉपी किया होगा वह है यह सभी धर्मों के सिंबल को एक जगह पर एकत्र करना एक जगह पर डिस्प्ले करना तो जैसे मैंने कहा कि राजकोट का जो सभागृह है उसमें इस तरह से आपको देखने को मिलेगा और भी मैंने बहुत सारे रामकृष्ण के सभागृह है या तो फिर बिल्डिंग है वहां पर मैंने इस तरह से सर्वधर्म के सिंबल को एक साथ में देखा है तो यह आइकोनोग्राफी जो है यह एक स्टाइल जो है आर्किटेक्चरल स्टाइल तो यह हमको यहां पर पढ़ने से पता चलता है कि सुरेश मित्र जो था उसने सर्वप्रथम इसको विजुलाइज किया था अभी जैसे देखिए कि ठाकुर ब्रह्म समाज में और ठाकुर के भाव को भाव को आधार करके यह लोग गान बांधते थे यह लोग संगीत की रचना करते थे और कभी-कभी इन लोगों के संगीत हमको बड़े अच्छे भी लगते थे किंतु हमको यह देखना होगा कि कथामृत में ही डिस्कशन है कि वह सब एक भक्त ठाकुर को कहता है कि महाशय आप ही के भावों को लेकर के ही यह सब गान की रचना की गई है तो जिस तरह से ठाकुर के भाव के आधार पर इस तरह से संगीत की रचना हुई है तो यही ठाकुर के उपदेश के आधार पर इस पार्टिकुलर आइकोनोग्राफी को सुरेश मित्र ने डेवलप किया है जिसको कि बाद में हमारे संघ के आर्किटेक्चरल कांसेप्ट में उठा दिया गया है तो दिस आर सम इंटरेस्टिंग पैरेलल्स अभी कुछ समय से मैं चर्च का जो आर्किटेक्चरल स्टाइल है उसका थोड़ा सा मैं एक स्टडी करता हूं अ स्टडी इतना डीप भी नहीं ऊपर से थोड़ा सा तो मैं मतलब एक आश्चर्यजनक जो चीज मुझे देखने को मिली कि हम लोग तो यूरोप अमेरिका की मतलब यात्रा तो करते नहीं है हमने तो क्रिश्चियनिटी को इंडिया में ही देखा है और इंडिया में कन्वर्ट कौन होते हैं जो कि इकोनॉमिकली बैकवर्ड जो होते हैं वही लोग ज्यादातर कन्वर्ट होते हैं तो ऐसा एक हमारे माइंड में क्रिश्चियनिटी का चित्र है किंतु क्रिश्चियनिटी इन इट्स होमलैंड दैट इज यूरोप वहां पर उसका जो फ्लोरिशिंग जो हुआ है वह सही में अद्भुत है जो एक के बाद एक चर्च के इंटीरियर्स को आप स्टडी करेंगे अद्भुत वहां के जो पेंटर्स है स्कल्पचर्स है आर्किटेक्ट है उन लोगों ने जो एक मने पोएट्री इन कंक्रीट ऐसा आप कह सकते हैं कि इस तरह से जो चर्च की सब रचना की है तो हमको ऐसा मुझे ऐसा लगता है कि इंडिया में हमारा संघ इस तरह के मंदिर बनाए वह दिन कब आएगा क्योंकि यदि आर्किटेक्चर की दृष्टि से मॉडर्न डेवलपमेंट जो हम देखेंगे तो स्वामिनारायण के मंदिरों में ज्यादा हुई है वहां पे वैसे तो उनका एक यही है मेन फोकस ही है मंदिर बनाना तो उन लोगों ने बड़े ही सुंदर आर्किटेक्चर अली बड़े ही खूबसूरत मंदिर बनाए हैं हमारा तो मेनली है शिव ज्ञान जीव सेवा इसके लिए हम इस तरह से म मर बनाने में ज्यादा पैसा खर्च नहीं करते हैं किंतु यह भी एक देखना है कि जैसे-जैसे मूवमेंट एक्सपें होती है सभी एस्पेक्ट को इसके साथ-साथ में इवॉल्व होना है तो यह भी एक एस्पेक्ट है कि हमारे मंदिर एक समय आएगा नेचुरली आएगा बिकॉज वी क्लेम टू बी द वर्ल्ड रिलीजन और वर्ल्ड रिलीजन का क्राइटेरिया जैसे हमने कल देखा कि जनसाधारण के लिए भी यहां पर साधन पद्धति है जो कि आप मंद वैराग्य है मॉडरेटली क्यूरियस है और आपको अपनी लाइफ में उसको अप्लाई करना है तो वह भी एक पाथ है और इंटेंस साधना करनी है मन प्राण देह समग्र आपको होम अग्नि में अर्पित कर देना है तो उसके लिए भी आपके पास में रास्ता है सो बोथ एस्पेक्ट्स आर हियर अवेलेबल सो दिस फैक्टर दिस कैरेक्टरिस्टिक इट मे एकस एलिजिबल एज अ वर्ल्ड रिलीजन युग धर्म के रूप में यह हमको एक एस्टेब्लिश करता है तो यदि हमको वर्ल्ड रिलीजन इस्लाम है या क्रिश्चियनिटी है या तो फिर अपना क्लासिकल हिंदुइज्म है या तो फिर यह ईस्ट एशियन बुद्धिज्म है उस लेवल तक जद जाना है तो सभी एस्पेक्ट में हमको डेवलपमेंट करना होगा हमारी खुद की एक म्यूजिकल स्टाइल होनी चाहिए अपनी खुद की एक आर्किटेक्चरल स्टाइल होनी चाहिए अपनी खुद की एक सॉलिड फिलोसॉफिकल फाउंडेशन होना चाहिए यह एक फिलोसोफी को लेकर के अ स्वामीनारायण स्वामीनारायण में वहां के एक आचार्य है उन्होंने प्रस्थानत्रई के ऊपर में टीका लिखी है अभी देखिए कि यदि आपको अपनी मूवमेंट एक सॉलिड फिलोसॉफिकल फाउंडेशन अपनी मूवमेंट का डालना है तो उसके लिए अपना हिंदुइज्म में ट्रेडिशनल हिंदुइज्म में क्राइट रिया क्या है कि आपको प्रस्थान त्रय के ऊपर में टीका लिखनी होगी और इस टीका के माध्यम से आपको अपना जो पथ है उसको एस्टेब्लिश करना होगा तो प्रस्थानत्रई अर्थात कि उपनिषद ब्रह्मसूत्र और गीता इन तीनों की ओरिजिनल टेक्स्ट के ऊपर में आप अपना मत किस तरह से ओरिजिनल टेक्स्ट से डिराइवर करते हैं यह आपको देखना होगा जैसे कि शंकराचार्य ने इन तीनों के ऊपर में भाष्य लिखा जैसे कि रामानुजाचार्य ने लिखा तो इस तरह से आपको भाष्य लिखने होंगे टीका लिखनी होगी और वो भी आपको ओरिजिनल टेक्स्ट के ऊपर में से डिराइवर करना होगा तब कहीं जाकर के आप अपना मत एक इंडिपेंडेंट एक अस्तित्व सिद्ध कर पाएंगे तो इसके अनदर इंटरेस्टिंग फैक्ट कि स्वामी जी ने शरदचंद्र चक्रवर्ती को कहा था कहा था कि नहीं डायरेक्टली उनके आदेश दिया था कि नहीं वह थोड़ा सा कॉन्टेक्स्ट मुझे इतना नहीं पता है या तो फिर इतना रिकॉर्ड नहीं हुआ है किंतु शरदचंद्र ने ब्रह्मसूत्र के ऊपर में एक भाष्य लिखने की शुरुआत की थी और इस भाष्य का उसने नाम दिया था विवेक भाष्य और ऐसा कहा जाता है कि स्वामी जी ने शरद चंद्र के साथ में जो डिस्कस किया था शास्त्र के पॉइंट उसके आधार पर वह यह सब लिख रहा था अनफॉर्चूनेटली यह भाष्य समाप्त नहीं कर पाया और किंतु यह जितना सा भी उसने लिखा है उसकी मैनु स्क्रिप्ट अभी भी उद्बोधन कार्यालय में कलकाता में रक्षित है तो अभी ् वेरी मुझे पता नहीं कि इन लोगों ने इसको जो यदि इनकंप्लीट भी है तो भी इसको पब्लिश क्यों नहीं किया क्योंकि दिस बिकम अ वेरी सिग्निफिकेंट हिस्टोरिकल डेवलपमेंट हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट यदि हमको भविष्य में ठाकुर मा स्वामी जी के चिंतन मनन को को आधार करके एक अपनी फिलोसॉफिकल स्टाइल यूनिक फिलोसॉफिकल स्टाइल यदि एस्टेब्लिश करनी है तो हमको इसको करने के लिए हिंदू जो बृहत अपना हिंदू धर्म है उसमें इस अपनी पार्टिकुलर फिलोसोफी को एक्सेप्ट करवाने के लिए हमको वह प्रस्थान त्रय पे भाष्य लिखना ही पड़ेगा प्रस्थान त्रय पे यदि भाष्य लिखेंगे तभी वो हम अब एक क्लेम कर पाएंगे कि यस वी हैव अराइव्ड टुडे मतलब हमारा एक इंडिपेंडेंट अस्तित्व है वी आर नॉट और यहां पे है ना देखिए कि अपने संघ में डिफरेंट डिफरेंट तरह की विचारधाराएं हैं कोई-कोई कहता है कि वी आर प्योर शंक राइट शंकराचार्य का जो अद्वैत वेदांत है उसके आगे हमको और कुछ नहीं सोचना है क्योंकि हमने एक्चुअली पता ही है कि ठाकुर ने खुद ने तोतापुरी के पास में से सन्यास दीक्षा ली थी और तोतापुरी दशनामी संप्रदाय के वो साधु थे वो सन्यासी थे दशनामी संप्रदाय अर्थात कि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सन्यास आश्रम की 10 ब्रांच विभिन्न 10 ब्रांच पूरी गिरी पर्वत वगैरह जो भी ब्रांचेस है तो उसके अनुसार तो अपनी जो ब्रांच है उसको पूरी कहते हैं जैसे कि तोतापुरी तो एक्चुअली मेरा नाम यदि ट्रेडिशनल लिखा जाए तो स्वामी जी का यदि नाम ट्रेडिशनल लिखा जाए तो वोह होगा स्वामी विवेकानंद पुरी क्यों क्योंकि पूरी ब्रांच में हमने न्यास लिया है तो पूरी ब्रांच के मठ कौन सा है तो श्रृंगेरी मठ है पूरी ब्रांच का एक महावाक्य कौन सा है तो वह अहम ब्रह्मास्मि है पूरी ब्रांच का पर्वत कौन सा है नदी कौन सी है वगैरह जो पूरी आइकोनोग्राफी है वो सभी 10 ब्रांच के साथ में उसकी पूरी आइकोनोग्राफी एस्टेब्लिश की गई है तो जैसे कि पूरी संप्रदाय के साधुओं के पास में एक दंड रहता है तो हमारा जब सन्यास होता है हमको एक दंड दिया जाता है एक लकड़ी का बना हुआ अभी होता क्या है कि देखिए कि इस दंड को जनरली आपको सब समय अपने साथ में रखना होता है किंतु हम लोग तो पता है कि वर्किंग साधु है फिर इस तरह से दंड लेकर के जाएंगे इधर-उधर तो वह कैसा रहेगा तो जो प्रथा हमारे यहां पे है कि सन्यास के बाद में ही इस दंड को तोड़ कर के गंगा में उसको प्रवाहित कर देते हैं जिससे कि वो ट्रेडिशनल हो जाए और हमारे साधुओं को यदि विदेश में जाना है पूरे दुनिया में घूमना है रिलीफ वर्क करना है कहां पर रहेंगे जो हरिद्वार जाएंगे ना कि ये सारगामा लाइफ इज अ वेरी डायनेमिक लाइफ ये जो ट्रेडिशनल सन्यासियों की तरह की एक स्टेटिक लाइफ नहीं है तो उसके अनुसार इस सब प्रथाओं को थोड़ा सा एक मॉडर्नाइज कर दिया गया है अब यह दंड को तोड़ कर के विसर्जन करना यह क्या हमने इस प्रथा को प्रारंभ किया है कि यह ट्रेडिशनल दैट आई डू नॉट नो किंतु शंकराचार्य को आप जभी भी देखेंगे आजकल के जो चार मठ है जैसे कि गुजरात में एक मठ है फ शारदा मठ है यहां पर जैसे कि श्रृंगेरी मठ है तो इन सबके शंकराचार्य को देखेंगे कि उनके पास में एक दंड रहता है तो ट्रेडिशनल स्पीकिंग हमने भी तो उसी संप्रदाय में सन्यास ग्रहण किया है तो हमारे पास में भी होना चाहिए किंतु वह जैसे कहा कि वह उसी समय तोड़ कर के संन्यास सेरिमनी के बाद में ही गंगा में उसको विसर्जन कर देते हैं तो अभी देखिए कि कोई भी वर्ल्ड रिलीजन होता है युग धर्म होता है उसके साथ में यह सब आइकोनोग्राफी एसोसिएटेड होती है कि आपकी कौन सी यूनिक ट्रेडिशनल म्यूजिकल सिस्टम है यहां तक कि पाक शास्त्र अभी देखिए कि जितने भी बड़े-बड़े अपने मंदिर हैं ट्रेडिशनल मंदिर वहां पे सबका अपना-अपना एक स्पेशल प्रसाद होता है तो अभी यह प्रसाद भी जितने भी मंदिरों का अपना एक यूनिक होना चाहिए अपने यहां पे इस तरह से यूनिक कुछ नहीं है प्रसाद के क्षेत्र में एटलीस्ट बेलूरमठ में जाएंगे और यदि भंडारा वगैरह होता है या तो फिर यह उत्सव होता है तो खिचड़ी प्रसाद दिया जाता है ज्यादातर किंतु यह खिचड़ी तो एक ट्रेडिशनल है तो उसमें भी कोई नया इनोवेशन जैसा अभी तक नहीं हुआ है तो यह होगा होना चाहिए क्योंकि एक यूनिकनेक्ट मूवमेंट के रूप में स्थान दे पाएंगे एक बहुत बार ऐसा होता है खास करके हमारे साधुओं के भीतर में यह भाव बड़ा ही स्ट्रांग है कि एक तो है ज्ञान दूसरा है कर्म शिव ज्ञान से जीव सेवा का कर्म है और दूसरी ओर है यह शास्त्र और रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य का अभ्यास यही दो तो है जो कि हमको हम बनाता है इसके अलावा आर्किटेक्चरल स्टाइल या तो फिर यह पाक शास्त्र की एक यूनिक टाइप का डिस्टिंक्टिव प्रसाद सिस्टम होनी चाहिए या तो फिर यह हमारा म्यूजिकल सिस्टम होना चाहिए व्हाट डज इट मैटर व उस सबसे तो ये तो सब एक्सटर्नल चीजें हैं इन सब से क्या हमको लेना देना है किंतु देखिए कि यह भी एक बात है कि जनसाधारण है वह हमको डिस्टिंक्ट किस तरह से करता है डिस्टिंग्विश किस तरह से करता है तो वो इस सब आइकोनोग्राफी से हमको डिस्टिंग्विश करता है अब वो रास्ते में जा रहे हैं अभी यहां पर विशाखापटनम में ही देखेंगे कि अपना जो मंदिर है वह रास्ते से जाते हुए देखेंगे तो एक ट्रेडिशनल साउथ इंडियन स्टाइल का मंदिर ही आपको दिखेगा बाहर से भीतर में जाएंगे तो पता चलेगा यहां पर ठाकुर है तो व्हाट इज सो डिस्टिंक्टिव अबाउट अस दैट पीपल कैन रिकॉग्नाइज एट अ फर्स्ट साइट हमारे बारे में ऐसा यूनिक क्या है जो लोग देख कर के ही समझ जाए कि हां यह रामकृष्ण मिशन का है इवन हमारे पहनने के कपड़े भी आप देखेंगे एक तरह से व जो योगी आदित्यनाथ पहली बार सीएम बना था तो उस समय एक बड़े ही सीनियर स्वामी जी के साथ में मेरी बात हो रही थी तो यह स्वामी जी मुझे कहते हैं उसको मैं देखता हूं तो हमारे संघ का वो किसी साधु का मुझे याद आती है उसी के जैसा दिखता है क्यों दिखता है उसके जैसा क्योंकि हम भी मुंडन करते वह भी करते हैं हम भी उसी तरह के कपड़े पहनते हैं वो भी उसी तरह के कपड़े पहनते हैं सो समथिंग अबाउट अभी जैसे कि क्रिश्चियनिटी में देखिए वहां पर पूरी जो हायरा कील सिस्टम है उनका अपना एक यूनिक ड्रेस है अपना यूनिक एक नोमेनक्लेच्योर यूनिक सिस्टम बनाया है तो हियर आल्सो आज यह सब सुनकर के हमको शायद हंसी भी आएगी और शायद ऐसा भी लगेगा कि यह सब एक्सटर्नल पेरा फेरना लिया अर्थात कि ये जो बाह्य एक आभास मात्र है बाह्य वस्त्र मात्र है यह सबको चेंज करने से क्या होगा यदि हम भीतर में अपने को चेंज नहीं करेंगे इस तरह से अपना ऑर्डर एक बड़ा ही एलिटस है कि भीतर में ही चेंज वही चेंज असली है बाकी आप किस तरह के कपड़े पहनते हैं किस तरह का खाना खाते हैं किस तरह के मंदिर में प्रार्थना करते हैं किस तरह के घर में रहते हैं क्या सिंबॉलिज्म है क्या म्यूजिक है व्हाट डज इट मैटर सो इट्स अ परफेक्टली लेजिटिमेसी कि हमको सही सही वर्ल्ड रिलीजन होना है तो यह जो कोर स्पिरिचुअल एस्पेक्ट है उसका एक मटेरियल एक्सप्रेशन भी होना चाहिए दिस इज व्हाट मेक्स अस यूनिक बुद्धिज्म की जितनी भी आर्किटेक्चरल स्टाइल है आप देख कर के ही पता चल जाए तोरण है अर्थात कि यह बुद्धिज्म का सिंबल है तो यह चर्च का स्टाइल अलग है यह मॉस्क का स्टाइल अलग है दे ऑल डेवलप देयर यूनिक लेट मी से फुटप्रिंट दे एवरीवन डेवलप देयर यूनिक फुटप्रिंट्स एवरीवन डेवलप देयर यूनिक आइकोनोग्राफी सो वी आल्सो विल हैव टू डू दैट और वह होगा ही समय के साथ में इस तरह से किसी को कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी प्रेसिडेंट महाराज को कोई आदेश देने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि हां अपना एक यूनिक प्रसाद सिस्टम डेवलप करो या तो फिर कपड़ों में इस तरह से हमारा वस्त्र होना चाहिए व्हिच इज कंप्लीट डिफरेंट डिस्टिंक्टिव टू अबाउट अस वो सब बोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी इट विल हैपन जैसे कि कपड़े के बारे में स्वामी जी ने वो केप टोपी एक डेवलप की थी वो टोपी अर्था अभी हम लोग नहीं पहनते हैं ज्यादातर साधु नहीं पहनते हैं बड़े सीनियर ट्रस्टी ही उस टोपी को पहनते हैं यदि बड़े सीनियर ट्रस्टी है या रिवर्ड प्रेसिडेंट महाराज है वो जिस तरह की टोपी पहनते हैं आपने देखा होगा वो टोपी जो स्टाइल है वो स्वामी जी ने उसको डेवलप किया था एक दिन बैठ कर के कि किस तरह से यह होना चाहिए ये हेड गियर जिसको कहते हैं तो थोड़ा सा फॉर्मल शब्द यूज करें तो यह टॉपिक इस तरह की होनी चाहिए व्हिच मेक्स अस डिस्टिंक्टिव फ्रॉम अदर्स तो वोह स्टाइल स्वामी जी ने डेवलप की थी हालांकि आज हम लोग में से जैसे कहा कि हम लोग सामान्य साधु उसको नहीं पहनते हैं सिर्फ सीनियर साधु ही पहनते हैं किंतु स्वामी जी ने उसको डेवलप किया था सभी के लिए कि हमारे पास में एक डिस्टिंक्टिव एक ऐसा एक सिंबल रहना चाहिए व्हिच मेक्सस अस व्हिच मेक्स अस डिफरेंट फ्रॉम अदर्स तो अभी जैसे कि अपना यह लोगो है तो लोगो भी स्वामी जी ने इस तरह से डेवलप किया लोगो इज अ आजकल की लैंग्वेज में उसको कहेंगे ब्रांडिंग तो अ जो भी कंपनी है जो भी एंटरप्राइज है वोह जैसे ही स्टार्ट होता है तो उनको कहा जाएगा कि अपना एक ब्रांडिंग डेवलप कीजिए तो किस तरह से डेवलप करेंगे एक आइकॉन होगा एक लोगो होगा एक लेटर हेड होगा फिर यह डिस्टिंक्टिव पैटर्स ऑफ कलर होंगे वगैरह वगैरह वो ब्रांडिंग के बहुत सारे फैक्टर्स होते हैं तो अपना लोगो भी स्वामी जी ने इसी तरह से डेवलप किया है और उसके पीछे का फिलोसोफी भी हमको पता है कि यह सर्प है वह राजयोग का सिंबल है फिर यह सूर्य है वह ज्ञान योग का सिंबल है वगैरह वगैरह वह जो पानी की तरंग है कर्म योग है फिर यह कमल है वह भक्ति योग है फिर हंस है वह इन सभी का चारों योग का समन्वय करके इसके ऊपर में से आत्मा से परमात्मा की ओर जर्नी कर रहा है परमहंस की उपाधि उसको दी गई है तो यह सब सब कुछ फिर वो जो एक लोग लाइन जिसको कहते हैं वो जब भी आप कोई भी लोगो डेवलप करेंगे तो आपको वो पूछेगा कि आपका वो कोई ऐसा कोई सूत्र है वो एक छोटा सा सिंबल जैसा ना कि छोटा सा एक ब्रांडिंग सेंटेंस व्हाट एवर उसको कहते होंगे तो वो भी स्वामी जी ने डेवलप किया है तन्नो हंस प्रचोदयात तो स्वामी जी का ये ब्रांडिंग कहे कि डिस्टिंक्टिव कहे यूनिकनेक्ट थी तो वह भविष्य में इसको और भी ज्यादा डेवलप होना है तो यह सब जो हम पढ़ते हैं च आर द ओरिजिनल ब्रांडिंग आइडिया या तो फिर कहेंगे कि आइकोनोग्राफी की शुरुआत यह सब चीजों से होती है तो यहां पर भी इसलिए तरह से यह हमको यह सुरेश मित्र ने इस चित्र को बनाया है इस चित्र में सभी धर्म के समन्वय का एक चितार दिया गया है और ठाकुर केशव सेन को बताते हैं ठाकुर बसिया सहस गल्प करते छन एमन एमन समय नरेंद्र आशिया पहु चलन ठाकुर बेठ करके सभी के साथ में गप लगा रहे थे उस समय नरेंद्र वहां पर आकर के उपस्थित हुआ तखन ठाकुरर आनंद जनो द्विगुण होलो जैसे ही नरेण आया वैसे ही ठाकुर का आनंद जैसे की दुगुना हो गया द्विगुण हो गया तिनी बोली लेन आज केशव सेने संगे केमन जहाज बड़ते गय लाम आज ठाकुर ने कहा नरेंद को कि आज पता है मैं किस तरह से केशव सेन के साथ में जहाज पर भ्रमण करने के लिए गया था विजय छीलो एरा शब छीलो विजय था यह सब थे यह सब में एटलीस्ट मास्टर महाशय तो है साथ में मास्टर के निर्देश करिया बोली लेन एक के जिज्ञासा करो केमन विजय और केशव के बोलू माए जिए मंगलवार और टले कुटल ना थाक ले लीलाई पुष्टा होई ना श कथा मास्टर महाशय की ओर उंगली करके इशारा करके ठाकुर ने नरेंद्र को कहा कि इनको पूछो कि किस तरह से मैंने केशव और विजय को कहा क्या-क्या कहा मां और स्त्री इन दोनों मां और उसकी पुत्री इन दोनों का अलग-अलग मंगलवार आर जटिल कुटिल जो नहीं होते हैं जटिला कुटिला तो लीला पोटाई नहीं होती है लीला में व जैसे इंग्लिश में उसको कहा है द थिकन द पट एक एक स्टोरी टेलिंग डिवाइस है स्टोरी जद सिंपल सिंपल होगी तो फिर उसमें कोई इंटरेस्ट नहीं आएगा स्टोरी में सस्पेंस होना चाहिए मिस्ट्री होनी चाहिए चैलेंज होनी चाहिए थ्रेट होना चाहिए तभी तो कहीं जाकर के वह प्रोटेगर है अर्थात कि जो स्टोरी का हीरो है उसके सामने मतलब उसका क्या होगा कि कैरेक्टर डेवलपमेंट होगा यह स्टोरी टेलिंग भी एक ऐसा साइंस है देखिए कि स्टोरी टेलिंग साइंस के बारे में भी काफी एक स्टडी हुआ है और उसमें यह जो वेस्टर्न स्टोरी टेलिंग मेथड है उसके ऊपर में और फिर ये उसको अपनी इंडियन स्टोरी टेलिंग मेथड इन सबके साथ में कंपेयर और कंट्रास्ट करके तो उसमें एक कांसेप्ट है हीरोज जर्नी अर्थात कि जो हीरो अर्थात कि जो प्रोटेगी प्रोटेगर इज अ मोर टेक्निकल टर्म और हीरो जिसको हम एक सामान्य शब्द यूज करते हैं सभी हीरो में स्टोरी में एक हीरो होता है तो ये हीरोज जर्नी बोलकर के एक कांसेप्ट है वो कांसेप्ट कैसे काम करता है कि वह कहते हैं कि जितनी भी आप सक्सेसफुल स्टोरीज देखिए वो स्टार्ट कहां से होती है तो एक हीरो बड़े शांति से रह रहा है उसके बाद में सेकंड स्टेप क्या आता है कि इस हीरो के सामने एक बहुत बड़ी चैलेंज आती है फिर थर्ड स्टेप क्या है ये हीरो इस चैलेंज को फेस करता है उसका सामना करता है और शुरू में तो वह थोड़ा सा डिप्रेसो जाता है इस क्योंकि वह चैलेंज इतनी बड़ी होती है तो उसका सामना वह ठीक-ठीक नहीं कर पाता इसके बाद का स्टेप क्या है हीरो को गाइड करने वाला एक वाइज मैन या तो एक मेंटर आ कर के खड़ा होता है और हीरो को सिखाता है कि किस तरह से वह अपने को अपनी एनर्जी अपनी शक्तियों को बढ़ाए फोकस करें और चैलेंज को फेस करें तो अभी यह वाइज मैन जो होता है उसके पास में से शिक्षा ग्रहण करके हीरो सेकंड टाइम चैलेंज को फेस करता है और इस समय वो जीत जाता है और जो कंक्लूजन है कि हीरो का कैरेक्टर डेवलपमेंट होता है जो भी ग्रेट स्टोरीज होती है वो बेसिकली यह हीरो होता है उसके कैरेक्टर को बिल्ड करने के लिए चैलेंज वो उसके रास्ते में डालती है दिस इज दी एम ऑफ स्टोरी टेलिंग कि एक सामान्य व्यक्ति था किस तरह से वह ग्रेट हुआ किस तरह से उसका कैरेक्टर बिल्ड अप हुआ किस तरह से उसने एक समाज में एक कुछ कुछ कंट्रीब्यूट किया अभी समाज में कंट्रीब्यूट करे ना करे दैट अवर कांसेप्ट किंतु एटलीस्ट उसका कैरेक्टर बिल्ड अप होता है उस सभी सक्सेसफुल स्टोरीज में आप देख सकते हैं तो यहां पे भी देखिए कि यह जटिला कुटिला अपना जो इंडियन कांसेप्ट है स्टोरी टेलिंग का उसमें भी ऐसा है कि हीरो के सामने कुछ विलन को डालना पड़ेगा ऐसे कुछ चैलेंज डालनी पड़ेगी कि जिसको फेस करके हीरो अपना कैरेक्टर बिल्ड करें और कैरेक्टर बिल्ड करने के बाद में चैलेंज स का व चैलेंज के ऊपर में विजय प्राप्त करें तो यहां पे भी ठाकुर ने यह सब डिस्कशन हमने ऑलरेडी कर लिया है कि किस तरह से जटिला कुटिला नहीं रहले से लीला पोटाई होईना अर्थात कि लीला का एक यह होता है कंक्लूजन कंक्लूजन किस र आएगा कि वहां पर जितने भी लोग हैं उनका एक कैरेक्टर बिल्डिंग होता है उनके भीतर में से एक अब जैसे चंदन का लकड़ी है चंदन के लकड़ी को आप जितनी घिस उतनी ही उसमें से खुशबू आएगी उतनी ही उसमें से सुगंध आएगी तो वो रगड़ करनी पड़ेगी तभी तो यह लीला पुष्टा आई होगी यह बेसिकली यही कहना चाहते हैं तो ही श कथा यह सब कथा मैंने कही मास्टर प्रति केमोन मास्टर के प्रति देख कर के ठाकुर कहते हैं क्यों तो मास्टर कहते हैं आज्ञा हां हां जी तो अब अभी देखिए कि यह सब जो ठाकुर मास्टर महाशय के सामने रिपीट करते हैं कुछ-कुछ चीजें इसके पीछे का भी एक रहस्य है कि ठाकुर मास्टर महाशय के पास में से अपना कथामृत लिखवाना चा ते थे कथामृत में ही देखेंगे कि हमको काफी सारी हिंट्स मिलती है जब ठाकुर का वार्तालाप समाप्त हो जाता है फिर वह मास्टर महाशय को पूछते हैं इस तरह से अच्छा कौन-कौन सी बात हुई अच्छा तुम रिपीट करो तो अभी जब मास्टर महाशय उसको रिपीट करेंगे और उसमें कुछ गलती होगी ठाकुर इमीडिएट उस गलती को चेक करेंगे उसको सुधार देंगे कथामृत में एक जगह पर एक डायलॉग भी है कि ठाकुर मां के साथ में वार्तालाप करते हैं मास्टर महाशय पास में ही बैठे हैं सुन रहे तो ठाकुर मां को पूछते हैं कि अच्छा मां तू एक तो कलाई दली केनो अर्थात कि तुम इसको अभी नाम तो नहीं देते भक्त का किंतु ठाकुर पूछते हैं इसको इतनी ही कला क्यों दी अभी कला तो हमको पता है कि 16 कला से चांद पूरा खिल खिल जाता है और कला जितनी कम होती है चांद का वह इतना ही वह व ये रास होता जाता है तो कम कला देना अर्थात कि चांद पूरा पूरा पूरा खिला नहीं है पूर्ण कला से चांद खिलना यानी कि पूर्णिमा का चांद तो ठाकुर पूछते हैं इसको इतनी कला ही क्यों दी अर्थात कि इसको इतनी कम शक्ति क्यों दी फिर ठाकुर वो मां उसको कुछ ठाकुर को कुछ कहती है फिर ठाकुर उसका रिप्लाई देते हैं अच्छा मां ये तो कला ती तोर का जोवे अच्छा ठीक अच्छ तो अर्थात कि इतनी कम कला से इतनी कम शक्ति से भी शक्ति से ही तुम्हारा काम हो जाएगा तो अच्छा ठीक है तो अब भी अनुमान करके हम लोग खास करके मेरा जो एक एनालिसिस है कि ठाकुर मास्टर महाशय के बारे में ही बात कर रहे थे नरेण है या तो फिर राखल है या तो लाटू है उनके पास में बहुत सारी कलाएं थी अर्थात कि उनके पास में बहुत ज्यादा वैराग्य की शक्ति थी बोलकर के वे लोग साधु हुए किंतु मास्टर महाशय को कथामृत लिखना था और इसके लिए उनको घर में ही रहना पड़ेगा वो जद सन्यास आश्रम ग्र करके यदि वराह नगर मठ में रहते बाद बाद में जब स्वामी जी अमेरिका से वापस आते हैं तो सबको काम में लगा देते ऐसा यदि होता तो मास्टर महाशय फिर यह शायद कथामृत ना लिख पाते तो इसलिए मास्टर महाशय को कथामृत लिखवाना था बोलकर के मां ने उनको इतना दृढ़ वैराग्य नहीं दिया कि वह पूरे पूरे साधु हो जाए संसार में रहे ठाकुर के उपदेशों का स्मरण मनन करें और कथामृत को लिपिबद्ध करें तो यहां पर भी देखिए देखिए कि ठाकुर यह जो रिपीट कर रहे हैं मास्टर महाशय के सामने कि मैंने कौन-कौन सी बात कही थी तो यह एक बात कही थी कि जटिला कुटिला नहीं रहने से लीला की पुष्टा नहीं होगी या तो फिर यह मां और उसकी पुत्री का अलग-अलग मंगलवार वगैरह तो यह रिपीट करते हैं ठाकुर जिसकी वजह से मास्टर महाशय के मन में यह सब कुछ दृढ़ रूप से बैठ जाए और एक इस तरह का एक इंसिडेंट है कथामृत में कि मास्टर महाशय एक हिंदी भाषा जी साधु के साथ में वार्तालाप करते हैं अभी ठाकुर को हिंदी आती है क्योंकि वह बहुत सारे नॉर्थ इंडियन साधु जो भ्रमण करते-करते आते थे तो उनके साथ में वह बचपन से ही बातें करते थे किंतु मास्टर महाशय को हिंदी नहीं आती थी तो जब वह हिंदी भाषी साधु के साथ में ठाकुर बात करते हैं तो मास्टर महाशय के लिए वह बंगाली में ट्रांसलेट करके उनको बताते हैं तो यह कथामृत में जो पूरा सीन है उसमें देखेंगे कि ठाकुर और वो साधु वैसे तो दिखते हैं कथामृत में लिखा है बंगाली में वार्तालाप करते-करते किंतु पहले ही मास्टर महाशय ने कह दिया है कि यह जो बंगाली ट्रांसलेशन है वो ठाकुर ने खुद किया है मास्टर महाशय के लिए तो किस तरह से ठाकुर यहां पर मास्टर महाशय को तैयार करते हैं कथामृत लिखने के लिए वह एक पहले से ही उनका सब प्री प्लान वह सब आयोजन था रात्रि ईलो रात हुई तबू सुरेंद्र फिरी लेना फिर भी सुरेंद्र वापिस नहीं आए ठाकुर दक्षिणेश्वर जाय बेन आर देरी कोरा जायना रात साडे ठाकुर दक्षिणेश्वर जाएंगे और अभी ज्यादा देरी नहीं कर सकते हैं रात को 10:30 हुए हैं रास्ता चांद आलो रास्ते में चांद का उजाला है गाड़िया शिलो ठाकुर उठी लेन गाड़ी आई ठाकुर उसमें उठे नरेंद्र और मास्टर प्रणाम कोरिया कलकाता स्थि तो शोशो बाटी ते प्रत्यागमन कोरी लेन नरेंद्र और मास्टर ठाकुर को प्रणाम करके कलिकता में अपनी अपने घर पर जाने के लिए रवाना हुए तो यहां पर इस पूरे चैप्टर का अंत आ आता है अभी इसके बाद में कथामृत की सीरीज में जो चैप्टर हम लेंगे वह एक पार्टिकुलरली मैं वह लेना चाहता हूं कि 1883 की क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान मास्टर महाशय दक्षिण में कुछ दिनों तक रुके थे क्योंकि ठाकुर ने कहा था कि साधना करनी होती है मन में वन में और मने बने और कोण मन में वन में और किसी कोने में और वहां पर जाकर के थोड़ी सी ही साधना करेंगे साथ-साथ में ही गुरु आपके सामने उपस्थित होकर के आपको बता देंगे कि और भविष्य में क्या-क्या करना है गुरु सामने ऐसे बोले एई एई अर्थात कि ऐसा ऐसा करो बोलक के गुरु बता देंगे कि और आगे किस तरह से जाना है तो वह जो कुछ दिन जब मास्टर महाशय ठाकुर के साथ में रुके थे व व्हिच इज अ यूनिक पर्सपेक्टिव इन एंटायस अ जैसे केशव के साथ में बात करते हैं तो केशव को एक तरह का उपदेश देते हैं किंतु जो अपने अंतरंग भक्त है खास करके जो गृही भक्त उनका चरित्र निर्माण उनकी आध्यात्मिक साधना ठाकुर किस तरह से करवाते हैं तो एक बड़ा सुंदर मसाला इस सब चैप्टर्स में हमारे पास में है वही है कि ठाकुर जो मास्टर महाशय को जो सब कुछ बताते हैं उसमें से सब कुछ तो मास्टर महाशय ने नहीं लिखा है थोड़ा सा ही लिखा है किंतु जो थोड़ा सा भी वर्णन अपने पास में है व्हिच इज वेरी यूनिक तो अभी नर ने तो वो वर्णन तो लिखा नहीं है कि ठाकुर ने उसको अलग से बुला कर के एकांत में क्या कहा था किंतु एटलीस्ट मास्टर महाशय को व एकांत में बुला कर के क्या बातें करते थे उसका कुछ-कुछ वर्णन अपने पास में है सो ट वे विल मेक वेरी इंटरेस्टिंग रीडिंग तो इसके बाद का वह चैप्टर वही वाला हम लेंगे कथामृत वाली सीरीज में आज यहीं तक अभी कल कल मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु नहीं यू आर राइट इन दिस मैनर वन हम लोग को भी जद कोई पर्सनलाइज इंस्ट्रक्शन मिलता है ऐसा कुछ नहीं है जो सीनियर साधु है उन लोगों के साथ में वार्तालाप करने से जो कुछ सीखने को मिलता है जैसे आप किसी आश्रम में चले गए तो आपने कहा था ना एक बार किसी सीनियर साधु की आप बात कर रहे थे तो जो बात करते करते जो सीखने को मिला तो हमारा भी ऐसा ही है रात को खाने के बाद में थोड़ा सा वह टहलते हैं उसमें जो कुछ डिस्कशन हुआ सो हुआ उसमें भी ज्यादातर तो अवॉइड ही करते हैं कोई कोर स्पिरिचुअल डिस्कशन करने का यहां पर एक प्रॉब्लम क्या

प्रश्न: हमें गुरु के पास से नियमित आध्यात्मिक मार्गदर्शन नहीं मिलता

है पता है स्पिरिचुअल लाइफ के साथ में एटलीस्ट आज आज की जो स्पिरिचुअल लाइफ है कि हम लोग जो है ना इसको स्टार्ट बड़ा देरी से करते हैं तो अभी एक बार मैच्योरिटी आ गई इंटेलेक्चुअल मैच्योरिटी ग्रेजुएशन के बाद में या उस समय ऐसा कुछ ज्यादातर तो थोड़ा और भी बाद में 30 40 के आसपास ही ज्यादातर लोग इसको स्टार्ट करते हैं तो फिर होता क्या है कि जो गोल्डन पीरियड है सीखने का वह चला जाता है जबकि ऑन द अदर हैंड ये जो कॉम्पिटेटिव स्पोर्ट है वगैरह आपको स्कूल में ही सीखना शुरू हो जाएगा स्कूल में ही यदि आप अच्छी स्कूल में पढ़ते हैं तो अच्छे कोच को रखते हैं वहीं से आपको बड़ा अच्छा वो इंस्ट्रक्शन मिलना शुरू हो जाता है तो क्या है कोच को पता है कि फिजिकली एंड मेंटली ही इज यंग ही इज ही कैन लर्न अभी हमारे स्पिरिचुअलिटी के साथ में स्कूल अपनी जो सिस्टम है उसके साथ में इस तरह से इसका एक विच्छेद हो गया है कि एक तो आपको फिजिकली एंड मेंटली मैच्योर होने के बाद में ही आप सीखना शुरू करेंगे और फिर उस समय अभी आपकी जो मेलेबल है सीखने की क्षमता अपने को उसमें डालने की क्षमता वो बड़ी लिमिटेड हो जाती है तो इवन कोच जो होता है स्पिरिचुअल वह भी समझता है कि बहुत ज्यादा बियोंड वन पॉइंट इसको ट्रेन नहीं कर सकते हैं यह जो स्कूल सिस्टम के साथ में इसका जो विच्छेद हो गया है स्पिरिचुअलिटी का व्च इज द बिगेस्ट डेंजर इन अवर इंडिया बाकी और इवन देखिए कि क्रिश्चियन कंट्रीज में मुस्लिम कंट्रीज में वो वो ऐसा कभी मूर्ख मूर्खा में जैसा काम नहीं करते कि हम लोग सेकुलर है पहले से ही यह रिलीजियस इंस्ट्रक्शन इज अ पार्ट ऑफ देयर सिलेबस तो फॉर देम दिस प्रॉब्लम इज नॉट ट एक्यूट जो कि आज हमारे यहां पे है ना हमारे लिए जैसे हम लोग खुद हम लोग खुद वी डिपेंड अपऑन रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर सबसे पहली बात है देखिए मेथड इज नॉट दैट इंपोर्टेंट मेथड आपको पता है कंसंट्रेशन आप जब करने को बैठिए दैट इज द ऑल ऑफ द मेथड प्रॉब्लम है अपने यहां पर चित्त शुद्धि का तो चित्त शुद्धि के लिए जो तपस्या है वह ट्रेडिशनल तपस्या है तो यंग पर्सन ही कर पाएगा हमारे लिए है कि रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य का अभ्यास यह जो स्मृति कथाए एक के बाद एक पढ़ते जाते हैं यह जो ठाकुर महा स्वामी जी की वाणी पढ़ते जाते हैं उसी से अपनी चित्त शुद्धि होती है ऐसा करके करके आप देखेंगे कि प्रतिदिन जद आप रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य के संपर्क में रहेंगे आधा घंटा सुना पढ़ा व्ट एवर तो ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम आपको यह फर्क दिखना शुरू हो ही जाएगा और यह मैं अपने पर्सनल एक्सपीरियंस से बता रहा हूं मेरी खुद की साधना क्या है बिल्कुल शुरू से लेकर के मुझे पता है कि ऐसा कोई तपस्या जिस तरह की तपस्या गुरु भाइयों ने की या तो फिर अपने सीनियर साधुओं ने की वो मेरे से नहीं होने वाली है इतना मैं एकदम स्पष्ट था फ्रॉम द बिगिनिंग तो मैंने रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य को पकड़ लिया और मैंने एकदम नियमित रूप से मैं इसका पाठ कर रहा हूं बात नहीं है कि मुझे बहुत कुछ समझ में आता है या मैं बहुत कोई एक्सपर्ट हो गया हूं यह पढ़ते पढ़ते ही यह ऐसा एक आनंद आता है कि वह भीतर में से चित्त शुद्धि भी होती जाती है पता भी नहीं चलता उ लॉन्ग पीरियड के बाद में पता चलेगा कि अरे वाह मतलब मैं जब शुरू किया था तब कहां था और आज कहां पर हूं सो यह स्मृति कथाएं हैं यह किताबें है उसका ट इ पाट दैट इज वन इजस्ट वे फॉर अस माने फिर यह स्वामी जी का है शिव ज्ञान जीव सेवा तो इफ यू हैव ग्रेटर अपॉर्चुनिटी और ग्रेटर कैपेसिटी तो दैट यू कैन डू जैसे मैंने रांची में जाकर किया था तो दैट वाज एन इंटेंस तपस्या इन इट्स ओन सेल्फ किंतु अदर देन दैट वो जो ढाई साल में जो वहां पर रहा अदर वाइज मैंने यह रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य पे ही आधार रख कर के मेरा स्पिरिचुअल लाइफ बनाया है यस यस दैट इज

प्रश्न: आपने हमारे साहित्य का बहुत अच्छा अध्ययन किया है। आपने अंग्रेजी सीखने के लिए भी कड़ी मेहनत की है।

ट्रू और और मैं उसमें फॉर्चूनेटली सिखाने वाले दो कोच मेरे बड़े अच्छे मिल गए थे एक तो आत्म रूपा आनंद जी थे दूसरा ये आयन [हंसी] था टीम में नहीं थे किंतु वो मेरा बड़ा अच्छा मित्र था मैं प्रतिदिन वहां यूनिवर्सिटी में जाता था 5:00 बजे में निकल जाता था 5 5:30 बजे मिशन ऑफिस छोड़ कर के निकल जाता था और वहां पे यूनिवर्सिटी चला जाता था वहां प कॉफी स्नेक वगैरह बड़ा अच्छा मिलता था तो आयन भी उसी समय आता था तो वो कॉफी बफी पिएंगे फिर गप लगाएंगे वो टहलते टहलते वहां पर टहलने की बड़ी सुंदर व्यवस्था है यदि आपने यूनिवर्सिटी देखी होगी तो वो पूरा सर्कल लगा सकते हैं आप तो वो चलते चलते बहुत गप लगाते थे तो बिकॉज के वी यूज टू वी हैड टू स्पीक इन इंग्लिश और उसका एकदम हाईटेक अमेरिकन इंग्लिश उसके साथ में मैच करने के लिए मुझे भी तो थोड़ा अपग्रेड होना पड़ेगा बातें करते करते सीख लिया वो मेरा क्लास भी लेता था वो सप्ताह में एक दिन वो क्लास लेता था मेरा ग्रामर का मैंने उसको रिक्वेस्ट किया था तो हां हां अपने यहां पे ना दो कांसेप्ट है एक तो

प्रश्न: अपने यहाँ मंत्र दे कर छोड़ दिया जाता है, आगे सीखने के लिए किस के पास जाए?

है दीक्षा गुरु फिर शिक्षा गुरु तो दीक्षा गुरु के पास में आपको मंत्र मिलेगा इससे ज्यादा कोई आप एक्सपेक्टेशन करना कोई लाभ नहीं है उ यदि गुरु महाराज के साथ में कुछ इंटरेक्शन हो गया तो अच्छा है नहीं हुआ तो भी अच्छा है किंतु शिक्षा गुरु अर्थात कि ये जैसे कि सर्वप्रिया नंद जी के वो जो लेक्चर है बहुत सारे लोगों के हैं तो दैट वे यू कैन गो डीपर इन टू अवर लिटरेचर एंड अवर ट्रेडिशनल गाइड अल्टीमेटली क्योंकि कथामृत अभी जैसे मान लीजिए कि प्रभु महाराज वीरेश्वरा अंद जी कहते थे 12 साल कथामृत का पाठ किया तो उसको मुक्ति निश्चित है क्योंकि कथामृत के भीतर में सब कुछ है और यह कथामृत का पाठ करना इट सेल्फ एज गुड एस जप करना माने जिनका नाम है उन्हीं की वाणी है तो कथामृत को आप 12 साल माने आधा आधा घंटा करके नॉट नेसेसरी कि कंटीन्यूअस 12 इयर्स किंतु प्रतिदिन आप आधा घंटा करके जद कथामृत का पाठ करेंगे इट इज एज गुड एज डूइंग मेडिटेशन एंड जपम सो यह अपने ऑर्डर का यह सबसे बड़ा फायदा है कोई कोई लोग मुझे पूछते हैं कि ध्यान करना बड़ा कठिन है मैं कहता हूं अपने संघ के जो डिवोटा है उन लोगों के लिए कुछ कठिन नहीं है यह कथामृत है स्मृति कथाएं हैं उसका पाठ करते जाइए इट इज एज गुड एज डूइंग मेडिटेशन एज गुड एस डूइंग जपम इससे माने ऐसा मत सोचिए कि जप करना इससे कोई ज्यादा डिफिकल्ट है या ज्यादा हायर है रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य का यह पावर है नहीं यह बड़ा फेमस है अपने पुराने पुराने जितने भी भक्त है ना सबको यह बात पता है कि वीरेश्वरा नंद जी ने ऐसा कहा है बट यू हैव टू बी सिंसियर देखिए मेहनत नहीं करनी है किंतु नियमितता मेंटेन करनी है चच इज आज के जमाने में वही बड़ी तपस्या है ना फिर मां का प्रॉमिस है कि जिसने ठाकुर का मंत्र लिया है उसको तो आखिर में ठाकुर को आ करके उनका हाथ पकड़ कर के ठाकुर लोक में ले जाना है यह तो मां का भी प्रॉमिस है तो यह 12 साल यह नहीं भी किया आखिर में तो किंतु जाना है वह ठाकुर के पास में वह मंत्र लेने के साथ में ही आप निश्चिंत है किंतु वही है कि वह जद इस जीवन में जद शांति चाहिए तो मां कहती है कि जप कर लीजिए देखिए कि हम किसी भी परिस्थिति में हो दे मां का विश् म मां का ये तो प्रॉमिस है आई माइसेल्फ डू नॉट नो है ना मां के प्रॉमिस के आधार पर मैं कह रहा हूं कि हम किसी भी परिस्थिति में हो ठाकुर को तो पता है कि वह हमारा क्या स्टेटस है हमने दीक्षा ली है तो वह तो ठाकुर को आना ही है अभी इसका सत्य असत्य मैं कुछ बोल नहीं पाऊंगा क्योंकि अभी मुझे भी तो आखिरी समय तक रहा देखनी है कि क्या होने वाला है जीहा किंतु माने जैसे कहा कि इस जन्म में जद शांति चाहिए तो जितना हो सके उतना कर लीजिए अकॉर्डिंग यह साहित्य का पाठ प्रतिदिन हमको करना है वो कोई बड़ा कठिन नहीं है उने शॉर्टकट का भी

प्रश्न: अलग से पढ़ना पड़ेगा या आपके क्लास कर के हो जायेगा ?

[No speech recorded in this chapter]

प्रश्न: कथामृत का क्लास महीने में एक सप्ताह ही होता है, बाकि के समय माँ, स्वामीजी के क्लास होते है

शॉर्टकट ना किंतु देखिए उसमें वो एक कांसेप्ट है ना श्रुति तुल्य माने एक तो उपनिषद है जिसको हम श्रुति कहते हैं फिर गोड पादा चार्य का व जो कारका है उसको श्रुति तुल्य कहते हैं तो फिर यह मां और स्वामी जी को हम कथामृत तुल्य कह सकते हैं उसमें कोई दिक्कत नहीं है उसका कारण बताऊं मैं देखिए मुझे प्रबोध

प्रश्न: ऑनलाइन जीस तरह नियमित क्लास होते है, उस तरह आश्रम के पास रह कर भी नहीं मिलेंगे

महाराज ने कहा था कि वह जब नए-नए राजकोट में गए थे तो वहां पर सभागृह में वह उसके ऊपर में प्रवचन लेते थे एक के बाद एक उसमें जो आरती है ना आरती के मीनिंग के ऊपर में उन्होंने प्रवचन लिए थे बोले कि मैं जब भी लेता था 200 200 लोग उपस्थित होते थे तो मैंने कहा महाराज उस समय 200 लोग होते थे कि हां फिर यही बात मैंने प पोरबंदर में भी सुनी कि पोरबंदर में प्रबोध महाराज प्रवचन लेते थे उसमें भी प र में 200 लोग अभी आज की बात देखें कि वही राजकोट में वही पोरबंदर में आप नियमित प्रवचन जो चलते हैं आज के जो महाराज लेते हैं मुश्किल से 1015 लोग आते हैं और क्या है कि उसमें भी बड़ी-बड़ी गैप लग जाती है कभी-कभी तो बोलने वाले तो है अपने यहां पर कि नियमित बोलने को तैयार है किंतु सुनने वाला जो ऑडियंस है ना वो आज बिल्कुल मतलब इस तरह का जो डेडिकेटेड जो ऑडियंस होता है वोह आजकल मिलना मुश्किल है क्यों क्योंकि अभी ये डिस्ट्रक्शन इतना लोगों के सामने उपस्थित है कि एक जगह पर जाए नियमित सुने ऐसा नहीं होता है आप राजकोट में आज जांगे आज आज का जो सभागृह में कितने लोग बैठे हैं प्रवचन के समय उसी से पता चल जाता है कहां वो उस समय के 150 एकदम नियमित आते थे 150 200 आज कहां 10 15 मैं खुद वहां पर लेता था क्लास राजकोट में तो कभी-कभी 10 कभी-कभी पांच और ऐसा हुआ है कि मैं गया हूं तो मैं अकेला गया हूं फिर मैं राह देखता हूं तो दो तीन लोग आ कर के बैठेंगे फिर उसके बाद में मैंने बंदी कर दिया मैंने कहा छोड़ो अभी नहीं यह जो बात यह नहीं है कि बोलने वाला चाहिए बात है कि सुनने वाले चाहिए दैट इज अ मोर इंपोर्टेंट हियर दैट इज ट्रू दैट इज ट्रू

प्रश्न: लेकिन क्लास ऑनलाइन हुआ है यह भी अच्छा है

और रामकृष्ण मिशन का ये ग्रेटनेस है राइट कि हम लोग टेक्नोलॉजी को ऐसा करके तुच्छ का नहीं करते हैं अभी यहां पर एक डिवटी आते हैं तो वह एक यहां के एक लोकल स्वामी है उनका प्रवचन वह डेली सुनते हैं तो वह भी ऐसे तो लेते हैं वह जूम के ऊपर में क्लासेस लेते हैं किंतु उनका क्या है टेक्नोलॉजी के साथ में थोड़ा सा एवर्ज है तो है ही इज अ वेरी गुड स्कलर शास्त्र के ऊपर में ट्रेडिशनल जो बोलेंगे तो मैंने उनको पूछा कि अच्छा नॉलेज है ना इसी तरह से लॉस्ट हो गया है कि दे आर वेरी गुड स्पीकर बट दे आर सम हाउ टेक्नोलॉजी एवर्स कि यह सब में क्यों जाए अभी रिसेंटली एक बहुत अच्छा इनिशिएटिव ये जो वहां पर एक आश्रम है ष हरिद्वार में मैं नाम भूल गया उसका नाम भल कैलाश आश्रम ना कैलाश आश्रम नहीं मैं उसका मैं लिंक शेयर करूंगा तो मैं खुद वहां पर गया था सन्यास के बाद में मैं और बाकी दो साधु वहां पर 40 दिन का ज्ञान सत्र चलता है तो ज्ञान सत्र में पूरे पाच से छ घंटा प्रतिदिन आपको पूरा पूरा प्रस्थान त्र सिखा देंगे 40 दिन में और प्योर संस्कृत में और वो जो आचार्य होंगे ट्रेडिशनल आचार्य तो मैंने मने इतना सुंदर वह क्लासेस होते हैं तो आई माइसेल्फ वेंट आफ्टर सन्यास टू अटेंड दोस क्लासेस अभी रिसेंटली देखा कि उन्होंने य पर अपना चैनल चालू कर दिया है और व य पर दे रहे हैं मैं भूल गया क्या नाम उसका च इज वन ऑफ द बेस्ट क्लासेस न एडिशनल वेदांता तो ऐसा भी उन्होंने यह इनिशिएटिव लिया तो मुझे भी बड़ा अच्छा लगा ना यह कैसा है पता है मोहम्मद डजन गो

प्रश्न: आजकल कोई भी पढ़ना पसंद नहीं करता। इसलिए ऑनलाइन क्लास या यूट्यूब वीडियो बेहतर हैं।

टू माउंटेन माउंटेन कम्स टू मोहम्मद कथामृत नहीं पढ़ सकते हैं तो कथामृत के ऊपर में क्लास सुन [हंसी] लीजिए मने ठाकुर ने यह भी व्यवस्था कर दी है अभी सर्व प्रियानंदनसेक्स [हंसी] चालू किया है