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Meditation ·

Guided Meditation || श्रीरामकृष्ण ध्यान || 6 Mar 2026

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म [गाना गाने की आवाज़] स्वरूपिणे अवतार वरिष्ठाय [गाना गाने की आवाज़] राम कृष्णायते नमः

ध्यान में बैठने से पहले यह जान लें

तो मेडिटेशन के इस क्लास में आज से हम प्रारंभ कर रहे हैं। मेडिटेशन या तो ध्यान वैसे आप देखेंगे कि है तो थोड़ा सा डिफिकल्ट किंतु कुछ-कुछ टेक्निक को यदि हम फॉलो करते हैं तो यह सहज हो जाता है हम सबके लिए। कोई इतना भी डिफिकल्ट नहीं है। बस आपको टेक्निक जाननी है। टेक्निक जान के आपको इसको फॉलो करना है। अभी देखिए कि मैं यहां पे पिछले ऑलमोस्ट डेढ़ साल से गाइडेड मेडिटेशन के क्लास कंडक्ट कर रहा हूं। अभी जहां तक हम अपने से ध्यान करते हैं जो मेथड्स हम लोग शास्त्र में या तो रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में सीखे हैं। उस मेथड को फॉलो करके जब तक हम खुद जहां तक मैं खुद ध्यान करता था। वह हो गई एक मेथड। किंतु जब हम गाइडेड मेडिटेशन करवाते हैं, वह एक दूसरी मेथड का सहारा लेना पड़ता है। इस तरह की मेथड का सहारा लेना पड़ता है जो कि सबके लिए फॉलो करना इजी हो। एक बात है। दूसरा है कि यह ध्यान में रखना है कि जो लोग फॉलो करने का प्रयास कर रहे हैं उनको ध्यान के बारे में या तो उनका प्रैक्टिस इतना नहीं है या तो फिर उनका अंडरस्टैंडिंग इतना नहीं है। तो हमको स्टार्ट करना है डायरेक्टली फ्रॉम दी अल्फाबेट्स। जब भी स्कूल में जाएंगे तो स्टडी करते-करते आपको स्टार्ट कहां से करवाएंगे? अल्फाबेट से स्टार्ट करवाएंगे। वह पढ़ना सिखाएंगे, लिखना सिखाएंगे। तो अल्फाबेट से हमको स्टार्ट करना है। बाद में फिर जितना हम एडवांस जाते जाएंगे, उतना ही एडवांस हम हो सकते हैं। तो मैं जो मेथड इस गाइडेड मेडिटेशन क्लास में यूज करूंगा, बहुत ही सहज सरल मेथड है। आप सभी लोग उसको फॉलो कर पाएंगे। तो यह तो एक बात हो गई। दूसरी बात है कि कुछ-कुछ आवश्यकताएं हैं मेडिटेशन क्लास में उपस्थित रहने के लिए। जैसे मैं यहां पर क्लास करता हूं तो क्या है कि सभी लोग एक साथ में एक ही कमरे में बैठे हैं। मेरी ही ऑफिस में ही क्लास होता है। तो मुझे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि कौन कितना ध्यान कर रहा है। किसका अटेंशन लगा है ध्यान में किसका नहीं लगा है। तो क्या है कि क्योंकि मैं सेंस कर पाता हूं। आप ग्रुप में ध्यान करेंगे तो क्या होगा कि आपको पता चल जाएगा कि ग्रुप में जो सभी लोगों का मन एकाग्र हुआ है कि नहीं हुआ है और इसके अनुसार आप जो है टाइमिंग्स को बढ़ा सकते हैं कम कर सकते हैं। कभी-कभी मैं देखता हूं कि सभी का मन एकाग्र हो गया है। तब मैं ध्यान का टाइम जो है थोड़ा सा बढ़ा देता हूं। कभी-कभी मुझे लगता है कि सभी लोग मन को एकाग्र नहीं कर पाते हैं। तो इन दैट केस मैं टाइम को थोड़ा सा शॉर्ट कर देता हूं। अभी यह प्रॉब्लम यहां पर ऑनलाइन क्लास में होगा कि मुझे पता नहीं चलने वाला। शायद आई डू नॉट नो हम तो आज एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं कि ऑनलाइन क्लास में जब ग्रुप मेडिटेशन करेंगे तो मुझे कैसे पता चलेगा कि आप लोगों का मन एकाग्र हो रहा है कि नहीं। तो इन इसके लिए मैंने आप सबको रिक्वेस्ट किया है कि आप अपना वीडियो जो है वह ऑन करके रखिए। मैं देख रहा हूं किसी किसी का ऑफ है। आप सब लोग ऑन कर दीजिए क्योंकि क्या है? अदरवाइज सिर्फ क्यूरियोसिटी के लिए इस क्लास में आना कि क्या हो रहा है वो क्यूरियोसिटी के लिए उपस्थित रहना किसी काम का नहीं। सब लोग ध्यान कर रहे हैं। आप भी कीजिए और यदि नहीं कर पाते हैं। देखिए घर में डिस्टरबेंस होता है। बार-बार मुझे इधर से उधर जाना पड़ता है। फोन आ रहे हैं। कोई मुझे आकर के बीच में डिस्टर्ब कर रहा है। इन दैट केस आप क्या है कि इस क्लास को प्रॉपर अटेंड नहीं कर पाएंगे। सो बेटर है कि हम कम लोगों को लेकर के ही स्टार्ट करें। ऐसे लोगों को साथ में ही स्टार्ट करें कि जिनका कि सही-सही में क्लास में उपस्थित होकर के मैं जो आपको गाइड करूंगा जिस तरह से मैं आपको इंस्ट्रक्शन दूंगा उस इंस्ट्रक्शन को आप फॉलो कर पाए। ओके? सो प्लीज जिसका भी वीडियो ऑफ है वो अपना वीडियो ऑन कर दें। तो यह तो एक बात हो गई। दूसरा है कि कुछ कुछ ध्यान करने के लिए कोई बहुत ज्यादा हमको कोई इतनी जिसको कहते हैं ना प्रिपयर्डनेस वैसे तो शास्त्र में बहुत सारी प्रिपयर्डनेस कही गई है। हमारे लिए कुछ-कुछ प्रिपयर्डनेस काफी है। उसमें से एक है कि बिना खाए ध्यान करना उचित है। यदि पेट भर के खाया है तो क्या होगा कि अपना मन एकाग्र नहीं हो पाएगा। सो प्लीज कीप दिस इन माइंड कि लाइट चाय वगैरह बिस्किट वगैरह लेते हैं तो ओके है किंतु पेट भर के मत खाइए। बस यह प्रिपयर्डनेस के रूप में सिर्फ इतना ही है। आप ऐसी जगह पर बैठिए जहां पे आपको डिस्टरबेंस ना हो। माने एस ले माने जितना कम डिस्टरबेंस हो उतना अच्छा है। तो यह एक प्रिकॉशन है या एक प्रिपयर्डनेस है। दूसरा है कि पेट जितना खाली हो उतना अच्छा है। भरे पेट मन को एकाग्र करना मुश्किल है। तो विद दिस टू प्रिपयर्डनेस। उससे ज्यादा कोई हमको टेंशन लेने की नहीं है जरूरत। विद दिस टू प्रिपयर्डनेस हम लोग स्टार्ट करते हैं।

गीता-पाठ हमारी ध्यान-पद्धति का एक आवश्यक अंग है

देखिए मैंने जो यह मेथड डेवलप की है गाइडेड मेडिटेशन की उसमें सेंटर है स्वर। स्वर या तो फिर मंत्र पाठ। मंत्र पाठ को लेकर के ही यह पूरी मेथड मैंने डेवलप की है। अभी देखिए कि ध्यान का अर्थ क्या है? वह तो आप सबको पता ही है। ध्यान का अर्थ है कि अपना मन जो चारों दिशाओं में दौड़ रहा है उसको एकाग्र करना। बस यही तो है ध्यान का अर्थ और तो कुछ नहीं है। तो फिर यह दौड़ते हुए मन को हम एकाग्र कैसे करेंगे? मन को पकड़ेंगे कैसे? ये छोटा बच्चा है। छोटा बच्चा जब उसको मिसिफ बहुत करता है, बहुत तूफान करता है तो इधर-उधर दौड़ेगा। तो मां उसको पकड़ करके एक जगह पर बिठा देगी। तो वह छोटे बच्चे को तो इस तरह से वो मिसचीफ करता है, गड़बड़ करता है। आप अपने दोनों हाथों से उठा के बिठा सकते हैं। मन को कैसे पकड़ेंगे? क्योंकि मन भी तो अपना मिसचीफ मेकर है। मन भी तो एक शिशु की तरह है। आप उसको उठाकर के एक जगह बिठाएंगे तो बैठेगा नहीं। 10 ओर दौड़ेगा। माइंड इज आल्सो अ बिग मिसचीफ मेकर। तो मन को पकड़ेंगे कैसे? यह जो मेथड मैंने डेवलप की है, बहुत ही सहज मेथड है। बहुत ही सरल है। स्वर के माध्यम से मन को पकड़ना है। किस तरह से? हमारे भीतर में तमस है। तमस यानी कि जड़ता कहो ना कि मूढ़ता कहो। यह जड़ता और मूढ़ता हम सबके भीतर में है। इस मूढ़ता या जड़ता या तमस को काटना है। एक तलवार चाहिए। एक ऐसी शाप तलवार कि इस तलवार के माध्यम से हम जड़ता को काट दें। और फिर मन जो है वह चारों ओर दौड़ रहा है तो एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट चाहिए कि मन को पकड़ करके एक जगह पर उसको स्थिर करके बिठा दे। तो यह तमस को काटना है। दौड़ते हुए मन को पकड़ना है। यह दोनों कार्य जो है जिस इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से हम करेंगे वो है स्वर। देखिए रामकृष्ण ट्रेडिशन थोड़ा सा भी आपको पता होगा तो पता होगा कि मां ने कहा है जपात सिद्धि ही जपात सिद्धि ही जपात सिद्धि ही जप है साधना का ध्यान में प्रवेश करने का सर्वोच्च माध्यम किंतु हम इस क्लास में जप का सहाय ज्यादा नहीं लेंगे बीच-बीच में मैं आपको जप करने को कहूंगा बताऊंगा कैसे करना है। किंतु जब के जब क्या है ना इंडिविजुअल बैठकर के करने की साधना है। आप अपने कमरे में बैठिए। लाइट वगैरह बंद कर दीजिए। एक छोटा सा एक टेबल लैंप यदि जलता है तो बहुत अच्छा है। येलो कलर का उसका लाइट होना चाहिए और फिर और कोई डिस्टरबेंस ना हो और आप जप कर रहे हैं तो क्या है? जप अकेले बैठ के करने की साधना है। किंतु बिकॉज़ कि हम लोग ग्रुप में गाइडेड मेडिटेशन कर रहे हैं। हमारे लिए और एक इंस्ट्रूमेंट चाहिए जो कि सब इसमें पार्टिसिपेट कर पाए। सब जो है इसको इजीली फॉलो कर पाए। तो वो इंस्ट्रूमेंट है स्वर अथवा तो मंत्र पाठ। क्या हम करेंगे? गीता के श्लोक का हम पाठ करेंगे। मैंने आप सबको रिक्वेस्ट किया ही था कि गीता का पुस्तक अपने पास में रखिए। श्रीमद्भगवत गीता चैप्टर नंबर 15। तो मैं यहां पे अभी क्या है? अगेन यहां पर जो मैं क्लास करता हूं तो हम सभी लोग तो एक साथ में बैठते हैं। मैं फर्स्ट लाइन चेंट करूंगा, पाठ करूंगा और सभी लोग फॉलो करेंगे। तो वह जो एक वाइब्रेशन का जो इफेक्ट होता है, वह इतना पावरफुल है। जो कि अभी हम उसी मेथड को अभी मैं ऑनलाइन कर रहा हूं। लेट अस सी कि वह कितना इफेक्टिव होता है। तो मेथड यही है कि गीता के श्लोकों का पाठ करना है। जैसे ही यह स्वर है, यह मंत्र पाठ है, इसकी जो पवित्रता है, इसके यह जो वाइब्रेशन है, अपने पूरे देह में फैलेंगे। अपने भीतर में यह तमस है, जड़ता है, मूढ़ता है, उसको काटेंगे और फिर यह एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट खड़ा करेंगे हमारे मन के भीतर में। वो इंस्ट्रूमेंट है विल पावर। अभी आप देखिए ध्यान करने को बैठिए। आप अपने विल पावर को कहिए कि चलो यह मन दौड़ रहा है। उसको पकड़ो। तो प्रॉब्लम क्या होगा कि यह विल पावर स्ट्रांग नहीं है दौड़ते हुए मन को पकड़ने के लिए। जप हम क्यों करते हैं? जप का अर्थ ही है कि वह अपने विल पावर को स्ट्रांग करता है। विल पावर के बिना ध्यान करना ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है। जप करना आसान है। पूजा करना आसान है। ध्यान करना आसान नहीं है। बिना विल पावर के हम ध्यान में प्रवेश करने के भी योग्य नहीं। यह एक बहुत बड़ा ध्यान के बीच में बैरियर है। आज आप देखेंगे YouTube के ऊपर में वो कितने ही इन्फ्लुएंसरर्स से आजकल मेडिटेशन और योगा के बारे में बात करते हैं। किंतु क्या है? जैसे ही आप थोड़ा सा डीप में जाने का प्रयास करेंगे कि चलिए बताइए कि मेडिटेशन क्या है? ध्यान क्या है? आप हमको कैसे सिखा सकते हैं? तो साथ में ही थोड़ा सा ही डिटेल में आप जाएंगे देखेंगे कि उनके ज्ञान की सीमा आ जाती है। वो आपको कुछ-कछ म चमत्कारिक बातें बताएंगे किंतु ध्यान को लेकर के बहुत ज्यादा डिटेल में यह लोग आपको नहीं बता पाएंगे। क्यों? क्योंकि ध्यान करने के लिए विल पावर को डेवलप करना ही होगा। संकल्प शक्ति को डेवलप करना ही होगा। बहुत कम लोग कर पाते हैं। बोलकर के ध्यान में मेडिटेशन में बहुत कम लोग प्रवेश कर पाते हैं। हम लोग यह साहस कर रहे हैं कि ग्रुप मेडिटेशन गाइडेड मेडिटेशन करें। किंतु आपको मेहनत करनी होगी। सिर्फ मैं बोलूं और आप सुने इससे काम नहीं होगा। जैसे-जैसे मैं इंस्ट्रक्शन दूं, इस तरह आपको इंस्ट्रक्शन को फॉलो करना होगा और इस इंस्ट्रक्शन को फॉलो करने के लिए आपके भीतर में स्ट्रांग विल पावर चाहिए होगा। स्ट्रांग विल पावर कैसे डेवलप करेंगे? तो यह गीता पाठ के माध्यम से मंत्र पाठ के माध्यम से जैसे-जैसे हम मंत्र पाठ करते जाएंगे हमारे भीतर का तमस कटता जाएगा और यह तमस जैसे ही कटेगा अपना विल पावर स्ट्रांग होगा और जैसे ही विल पावर स्ट्रांग होगा आपका जो मन है जो 10 जगह पर दौड़ रहा है उसको पकड़ पकड़ करके विल पावर एक ही जगह पर बिठाएगा तो यह गीता पाठ यह अपने गाइडेड मेडिटेशन का एकदम एसेंस है। उसका हार्ट है। जैसे-जैसे मैं पाठ करता हूं, आपको मुझे फॉलो करना है। मैं आपको स्टार्ट करने के बाद में हम क्या करेंगे? दो-तीन श्लोक का पाठ करेंगे। फिर मैं आपको कुछ इंस्ट्रक्शंस दूंगा। फिर दो-तीन श्लोक का पाठ करेंगे। फिर से मैं कुछ इंस्ट्रक्शंस दूंगा ध्यान करने के लिए। तो दो-तीन श्लोक का पाठ फिर दो-ती मिनट ध्यान फिर दो-तीन श्लोक का पाठ फिर दो-ती मिनट ध्यान। ऐसा करके करके अपना पूरा जो मेन मेथड है वह इसी के ऊपर में आधारित है। ध्यान कैसे करना है वो मैं उस समय आपको बताऊंगा। ठीक है? अभी जैसे यहां पर तो मैं करता हूं तो मैं पहली लाइन बोलूंगा और सभी लोग रिपीट करेंगे। किंतु यहां पर क्या है? मैंने सबका ऑडियो इसलिए ऑफ रखा है क्योंकि फिर प्रॉब्लम क्या होगा कि सबका ऑडियो ऑन होगा तो थोड़ा सा डिस्टरबेंस ज्यादा हो जाएगा। तो मैं क्या करूंगा? मैं प्रत्येक लाइन दो बार पाठ करूंगा। यदि आपको गीता चेंटिंग आता है आप दोनों बार मेरे साथ में पाठ कर सकते हैं और यदि आप पहली बार करते हैं या तो आपको इतने अच्छे से नहीं आता है तो आप पहली बार सुनिए कि मैं क्या करता हूं और दूसरी बार मुझे फॉलो कीजिए। ठीक है? तो मैं आशा रखता हूं कि सबके पास में गीता की किताब है। वैसे तो मैंने WhatsApp के भीतर में भी इसको भेजा था। तो 15th चैप्टर राइट? तो गीता आप सबके हाथ में है। मैं आशा रखता हूं स्टार्ट करते हैं। अथः पंचदशोध्यायः श्री भगवान उवाच उर्ध्व मूलम अधः शाखम उर्ध्व मूलम अध शाखम अश्वत्थम प्राहुरव्ययंम छंद यस्य पणानी छंद यस पानी यस्तम वेदस वेदवी अधोधम प्रसुतास शाखा अधोधम प्रसुतास शाखा गुणा प्रवृद्धा विषय प्रवाला गुण प्रव विषय प्रवाला अध चमलानुसतानी अध चमलानुसंत तानी कर्मानुबंध मनुष्य लोके कर्मानुबंध मनुष्य [गाना गाने की आवाज़] लोके देखिए आप जब पाठ करते हैं आपका जो स्वर है आपका जो वाणी है एकदम क्लियरली सुनाना चाहिए आपका वॉल्यूम जो है एकदम एकदम क्लियर होना चाहिए। आप यदि मन में ही मन में पाठ करेंगे या तो फिर आपका जो स्वर है उसका वॉल्यूम कम होगा या तो फिर स्पष्ट होगा तो फिर क्या है यह मेथड आपको बहुत ज्यादा यूज़फुल नहीं होगी। हम करेंगे लंबा पाठ करेंगे। धीरे-धीरे करके आपके उच्चारण है धीरे-धीरे करके आपका जो स्वर है वह सब लेवल में आ जाएगा। किंतु ख्याल रखिएगा कि स्वर जो है स्पष्ट हो। आप संस्कृत में यदि पहली बार पाठ कर रहे हैं तो उच्चारण शायद अस्पष्ट होगा किंतु हम रिपीट करते जाएंगे। धीरे-धीरे करके आपके जो प्रोनाउंसिएशंस है, उच्चारण है वह क्लियर होते जाएंगे। तो आवाज को थोड़ा सा क्लियर रखना है। उच्चारण स्पष्ट करना है। शुरू में ना हो तो दिक्कत नहीं है। किंतु यह एम रखिए। यह टारगेट रखिए धीरे-धीरे करके गीता पाठ इंप्रूव हो अपना। क्योंकि गीता पाठ ही हमारे ध्यान की मेथड का सेंट्रल है। सेंट्रल पार्ट है। ठीक है? तो यह पहले दो श्लोक को फिर से एक बार रिपीट करते हैं। अगेन सेम मेथड कि मैं प्रत्येक कड़ी को दो-द बार गाऊंगा। आपको यदि आता है तो दोनों बार मेरे साथ में चेंट कर सकते हैं। नहीं आता है तो पहली बार सुनिए। सेकंड टाइम मेरे साथ में पाठ कीजिए। फिर से श्लोक नंबर वन एंड श्लोक नंबर टू। पंचदशोध्याय 15वा अध्याय 15th चैप्टर। उर्ध्व मूलम अधः शाखम उर्ध्व मूलम अध शाखम अश्वत्थम प्राहुरव्ययंम छंदस यस्य पण छंद सयस्य पण यस्तम वेदसवे वेदवी यस्तम वेद सवे अध चोधम प्रसुतास शाखा अध चोधम प्रसुता तस्य शाखा गु प्रवद्धा विषय प्रवाला गुणा प्रव विषय प्रवाला अध मूल्यनुसंतानी अध मूल्यनुसंतानी कर्मानुबंध मनुष्य लोके कर्मानुबंध मनुष्य [गाना गाने की आवाज़] लोके

ध्यान कैसे करे

वेरी गुड अभी देखिए ध्यान कैसे करना है। जैसे अपना मेथड है दो या तीन श्लोकों का पाठ करेंगे। फिर ध्यान करेंगे। फिर से दो-तीन श्लोकों का पाठ करेंगे। श्लोक का पाठ करके अपना विल पावर है उसको जागृत करना है। स्वर के माध्यम से मन को पकड़ना है। यह अपनी मेथड है। ओके? तो हमने इतना पाठ किया। अभी देखिए पुस्तक को आप थोड़ा सा साइड पर रख सकते हैं। थोड़ा सा अभी ध्यान कैसे करना है? सर्वप्रथम तो है ध्यान हमेशा हृदय में करना है। ध्यान कभी भी मन के भीतर नहीं करना। सर के भीतर नहीं करना। एक्सट्रीमली डेंजरस। अनाहत विशुद्ध आज्ञा सहस्रार। यह जो अपनी कुंडलिनी की जर्नी के जो आखिरी चार मंजिलें हैं, हृदय में अनाहत चक्र है, कंठ में विशुद्ध चक्र है और यहां पे आज्ञा चक्र है। तो हमारा ध्यान हमेशा हमेशा हृदय में होना चाहिए। हमेशा हमेशा अनाहत चक्र पे होना चाहिए। करना क्या है? अपना जो माइंड है उसको स्विच ऑफ कर देना है। उसको कंप्लीटली ब्लैंक कर देना है। और अपना हृदय है हृदय को स्विच ऑन कर देना है। उसके जैसे कि इमेजिन कीजिए कि अपने हृदय में एक छोटा सा मंदिर है। मंदिर के भीतर में हमने दिए प्रज्वलित किए हैं। मंदिर में वेदी के ऊपर में श्री राम कृष्ण विराजित है। श्री कृष्ण श्री राम मां शारदा जिनके ऊपर में हमारी सर्वोच्च भक्ति हो उन इष्ट को ठाकुर मां स्वामी जी भगवान कृष्ण सबको एक साथ में बिठाना चाहे तो भी कोई दिक्कत नहीं है तो उन सबको हमको हृदय में बिठाना है और आंखें कभी भी बंद नहीं करनी एकदम स्ट्रिक्ट रूल हमेशा याद रखिए आंखों को हमेशा झुकाना है आंख कभी कभी भी बंद नहीं करनी। दो रूल है अपने मेडिटेशन मेथड के। यदि स्वर को लिया जाए तो तीसरा है। सर्वप्रथम स्वर के माध्यम से मन को पकड़ना है। द्वितीय है ध्यान हमेशा हमेशा हृदय में करना है। और तृतीय है आंखों को कभी भी बंद नहीं करना। जैसे ही आंख बंद की वैसे ही हमारा मन जो है अपने सर के भीतर में दिमाग के भीतर में चला आएगा। कभी भी आंख बंद नहीं करनी। स्वामी जी जो ध्यान में बैठे हैं वह फोटो को आप थोड़ा सा क्लोजली देखिए। देखिए कि आंख स्वामी जी की आंखें खुली है। उनकी यह जो आरिस है वह दिख रही है। ठाकुर का वह जो कल्पतरु वाला पोज है के केशव सेन के वहां पर जो फोटो लिया गया है उसको भी आप देखिए ठाकुर है वैसे तो समाधि में मग्न आंखें वैसे तो लग रही है बंद है। ध्यान से देखेंगे आंखें खुली है। नासिकाग्रह अर्थात कि जो अपना जो नाक का जो ये ये है टिप उसके ऊपर में एकाग्र है तो हमको इतना टेंशन लेने की जरूरत नहीं कि मैं नासिकाग्रह पे अपने नाक की टिप के ऊपर में केंद्रित करूं वो जरूरत नहीं है। आंखों को झुकाने से ही हुआ। तो यह तीन रूल अभी तक हमने सीखे। सर्वप्रथम स्वर के माध्यम से मन को पकड़ना। द्वितीय ध्यान हमेशा हमेशा हृदय में करना। तृतीय आंखों को कभी भी बंद नहीं करना है। नेवर नेवर अदरवाइज बड़ा ही डिजास्टर हो सकता है। तो यह तीन रूल्स को समझ करके अभी देखिए। इमेजिन कीजिए कि अपना जो माइंड है वह स्विच ऑफ हो गया है और अपना हार्ट है वह स्विच ऑन हो गया है। अपने दिमाग के भीतर में सर के भीतर में पूरा अंधेरा है। अपना हार्ट जो है उजाले से शांति स्निग्धतामय प्रकाश से भरा हुआ है। वहां पर हमने छोटा सा एक वेदी बनाया है और इस वेदी में श्री रामकृष्ण देव को बिठाया है। तो अपनी आंखों को झुकाइए। अपने मन को जो एकाग्रता है हृदय पर केंद्रित कीजिए। और यह जो कंस्ट्रक्ट है, यह जो सीन है, अपने हृदय में खड़ा कीजिए। देखिए कि हृदय में आप इस तरह से भी इमेजिन कर सकते हैं कि दक्षिणेश्वर में हम पहुंच गए हैं। श्री रामकृष्ण देव संध्या का समय है। अपनी खाट पर विराजमान है। ठाकुर के सामने हम बैठे हैं। और ठाकुर का दर्शन हम कर रहे हैं और कुछ करने की जरूरत नहीं। कुछ कोई मेथड यहां पर दूसरी जरूरत नहीं है। बस हम ठाकुर का दर्शन ही कर रहे हैं। ठाकुर के साथ में मां भी विराजमान है। अन्य गुरु भाई है। वह भी उसी कमरे में उपस्थित है। बैठे हैं जमीन पर। हम भी उनके साथ में बैठे हैं। बाहर में संध्या का समय है। पूरा विश्व जो है शांति और आनंद से भरा है। यह सीन अपने हृदय में इमेजिन कीजिए।

ध्यान अभ्यास

ऊम हरि ओम

ध्यान कैसे करे

इमेजिन करने के समय संध्या या तो मध्य रात्रि का समय इमेजिन करते हैं वह बहुत अच्छा है। साथ-साथ में ही जितना हम अपने मन को इधरउधर दौड़ने से अटका पाएंगे जितना ही हृदय के ऊपर में एकाग्रता बढ़ती जाएगी। वैसे ही आप देखेंगे कि यह जो पूरा सीन है ना वह अलाइव हो जाता है। वह जागृत हो जाता है। सही सही में ठाकुर की जो प्रेजेंस है वह हमारे पूरे देह और मन में हमको फैलती हुई दिखती है। तो यह हमारा मेडिटेशन का प्रथम साइकिल। अभी फिर से हम गीता के श्लोक का पाठ करेंगे। श्लोक नंबर तीन और श्लोक नंबर चार। याद रखिए कि गीता के श्लोक का पाठ क्यों कर रहे हैं। स्वर के माध्यम से मन को पकड़ना है। मन है जड़ता और तमस का घर। यह तमस और जड़ता को काटना है, विल पावर को बढ़ाना है तो यह गीता का पाठ जो है स्वर जो है मंत्र पाठ है बहुत ही हेल्पफुल होगा। इसको इंटरनलाइज करना है। यह जो वाइब्रेशन होंगे आपकी वाणी के आपके स्वर के मंत्र पाठ के उसको आपको इंटरनलाइज करना है। उसको एज ए स्वर्ड एज ए खड़ग के रूप में आपको इस्तेमाल करना है तमस को काटने के लिए। ओके तो श्लोक नंबर तीन और श्लोक नंबर चार न रूपमस तथो पलभ्यते न रूपमस तथो पलभ्यते नंतो न चाद नच सम प्रतिष्ठा नंतो नचा दी नचसम प्रतिष्ठा अश्वत्थमेनम सुविरूढ मूलम अश्वत्थमेनम सुविरूढ़ मूलम असंग शस्त्रे दृढ़ न चित्वा असंग शस्त्रे दृढ़ [गाना गाने की आवाज़] न चित्वा ततः पदम तत परिमार्गव्यम ततः पदम त परमारितव्यम यस्मिन गतान निवर्त भू यस्मिन गतान निवर्तती भूह तमे वचाध्यम पुरुषम प्रपद्य तमेवचाध्यम पुरुषम प्रपध्य यतः प्रवत्ति ही प्रसुता पुराण यतः प्रवत्ति ही प्रसु ता पुराणी ओके फिर से ध्यान करेंगे गीता को साइड पर रख सकते हैं फिर से ध्यान करेंगे फिर से वही मेथड कि हृदय में दक्षिणेश्वर का ठाकुर का कमरा ठाकुर की उपस्थिति को हम अनुभव करेंगे अपनी आंखों को झुकाइए मन को पूरा हृदय के ऊपर में केंद्रित कीजिए। अभी इस बार मैं कथामृत का एक छोटा सा पैसेज है। उसका मैं पाठ कर रहा हूं। तो आप लोग सिर्फ उसको सुनिए। विजुअलाइज कीजिए कि सब कुछ आपके हृदय में हो रहा है। यह जो पैसेज मास्टर महाशय ने कथामृत में जो लिखा है पूरा आपके हृदय में चलचित्र की तरह मूवी की तरह चल रहा है। क्या कहते हैं मास्टर

ध्यान अभ्यास और कथामृत पाठ

महाशय? चलो भाई आ ता के दर्शन करते जाए फिर से उनका दर्शन करने को जाते हैं से महापुरुष के वही महापुरुष के से बालक के देखी वो वही बालक को मैं दर्शन करूंगा जिनी मां ब आर किु जाने ना जो मां के अलावा और कुछ नहीं जानते हैं जिन आमा दे जोो देहो धारण करे ऐसे छ जो हमारे लिए देह धारण करके आए हैं त बोले देवे कि कोरे एक कठिन जीवन समस्या पूर्ण करते होवे वह कह देंगे किस तरह से यह कठिन जीवन समस्या पूर्ण करनी होगी सन्यासी के बोले देवे गही के बोले देव सन्यासी को बोल देंगे गही को बोल देंगे अारी तो द्वार सबके लिए दरवाजा खुला है दक्षिणेश्वर कालीबाड़ी ते आमादर जन्म अपेक्षा कोर छन दक्षिणेश्वर की कालीबाड़ी में हमारे लिए अपेक्षा कर रहे हैं। चलो चलो ताके देखो चलो चलो उनको देखेंगे उनका दर्शन करेंगे अनंत गुणाधार प्रसन्न मूर्ति श्रवण जार कथा आंखी झरे ठाकुर कैसे हैं अनंत गुणों के आधार है प्रसन्न मूर्ति है जिनके श्रवण से आंखों से भक्तिमय अश्रुधारा बहती है चलो भाई अहेतुक कृपा सिंधु प्रिय दर्शन [गला साफ़ करने की आवाज़] ईश्वर प्रेमे निशिदिन मतवारा ईश्वर के प्रेम में दिन रात मत है सहस बदोन श्री राम कृष्ण के दर्शन करे मानव जीवन सार्थक कोरी साहस्य वदन श्री राम कृष्ण का दर्शन करके मनुष्य जीवन को सार्थक करते हैं। आज रविवार 26 अक्टूबर 26 अक्टूबर 1884 हेमंत काल कार्तिकेयर शुक्ला सप्तमी तिथि कार्तिक कार्तिक महीने की शुक्ला सप्तमी तिथि है द्विपहर बेला दोपहर का 2 बजे के समय है ठाकुर श पूर्व प परिचितो घरे भक्तरा समवेत होया छ ठाकुर के वही पूर्व परिचित घर में भक्त लोग एकत्रित हुए हैं। श्री घरे पश्चिम गाय अर्ध चंद्राकार बारंदा यह ठाकुर का कमरा है। उसकी पश्चिम दिशा में अर्ध चंद्राकार वरांडा है। बारंदार पश्चिम में उद्यान पथ वरांडे के बाद में उद्यान पथ है। उत्तर दक्षिणे जाते छ उत्तर से दक्षिण की ओर जा रहा है। पथेर पश्चिम में मां काली पुष्पोद्यान और पथ के बाद में आता है मां काली का पुष्प उद्यान। ताहार पर पोषता। इसके बाद में ही है गंगा का घाट तत्परे पवित्र शलीला दक्षिण वाहिनी गंगा इसके बाद में है पवित्र सलीला दक्षिण को बहती हुई गंगा भक्तरा अनेके ही उपस्थितों भक्तों में से बहुत सारे उपस्थित है आज आनंदर हार्ट आज आनंद का बाजार लगा हुआ आनंदमय ठाकुर श्री राम कृष्ण ईश्वर प्रेम भक्त मुख दर्पण मुकुरित होते छ आनंदमय श्री राम कृष्ण का ईश्वर प्रेम भक्तों के चेहरे पर प्रतिबिंबित हो रहा है की आश्चर्य को कितना आश्चर्य है कैसा आश्चर्य है आनंदो केवल भक्तों मुख दर्पण केो सिर्फ भक्तों के चेहरे पर आनंद क्यों बाहरे उद्यान बाहर के उद्यान में वृक्षो पत्र वृक्ष के पत्रों के ऊपर में नाना विधो जे कुसुम फूटिया रहया छ तन मध्य जो विभिन्न फूल फूले हुए हैं उनके भीतर में विशाल भागीरथी बखे विराट भागीरथी अर्थात गंगा की सीने के ऊपर में वक्ष के ऊपर में रबिक प्रदीप्त नील न भूमंडल ये रवि अर्थात कि सूर्य से जो प्रदीप्त है इस तरह के नील न भो मंडल में मुरारी चरण चूतत गंगा बारी कणाबाही शीतल समिरण मध्य मुरारी के चरण से पवित्र गंगा की जो नदी है वह बहाने वाली यह जो शीतल समीरण है शीतल पवन है इसके मध्य आनंदो प्रतिभाषित होते छिलो यही आनंद प्रतिभाषित हो रहा है। हरि ओम।

ध्यान कैसे करे

देखिए, यह जो आपका कैपेसिटी है, जैसे-जैसे आप यह स्वर साधना करते जाएंगे और साथ में ही यह साथ में बैठकर के हृदय पर मन को एकाग्र करते जाएंगे। वैसे वैसे ही देखेंगे कि यह जो पवित्र वातावरण बनता है, आप जो गीता के मंत्रों का पाठ करते हैं, इससे आपके खुद के कमरे में जो पवित्रता प्रकट होती है, उससे होगा क्या? ऑटोमेटिक जितने भी डिस्ट्रैक्शन है ऑटोमेटिक जितने भी यह जो मन को एकाग्र ना होने देने वाले परिबल है वो कैरेक्टर्स है वह सब अदृश्य हो जाएंगे आपके कमरे के भीतर में जैसे कि वही दक्षिणेश्वर प्रकट होगा आपके घर के भीतर में वही दक्षिणेश्वर प्रकट होगा कोई डिफिकल्ट नहीं है शुरू शुरू में हमको थोड़ा थोड़ा सा डर लगता है। शुरू शुरू में हमको थोड़ा सा भय लगता है कि मैं कर पाऊंगा कि नहीं। किंतु जैसे-जैसे यह जो ग्रुप मेडिटेशन मेथड है उसको आप फॉलो करिए। देखिए कि यहां पे कुछ भी असंभव नहीं। तो अभी देखिए फिर से हम गीता का हमने थर्ड और फोर्थ श्लोक जो किया अभी फिर से दो श्लोक का पाठ करते हैं। श्लोक नंबर फाइव और श्लोक नंबर सिक्स। फिर से वही मेथड आप स्पष्ट उच्चारण कीजिए। आपका जो स्वर है वाणी जो है उसका वॉल्यूम बड़ा क्लियर रखिए। मन में मन में उच्चारण करने से या तो फिर धीमे स्वर से पाठ करने से आपको इतना बेनिफिट नहीं होगा। आपके मन को जो वश में लाना है, कंट्रोल में लाना है वह नहीं हो पाएगा। स्पष्ट उच्चारण और क्लियर आपका जो वॉल्यूम होना चाहिए जिससे होगा क्या कि यह जो पवित्र वातावरण मंत्र पाठ से खड़ा होगा उस पवित्र वातावरण को इंटरनलाइज कीजिए और उसी के माध्यम से अपने मन को पकड़िए। अपने मन को यहां से ले आ के यहां तक खींच करके लाकर के हृदय में बिठाना है। श्री रामकृष्ण देव का दक्षिणेश्वर हमको हृदय में क्रिएट करना है। जैसे ही हृदय में दक्षिणेश्वर क्रिएट हुआ जैसे ही हमने अपने को ठाकुर के कमरे में बिठाया देखेंगे धीरे-धीरे दक्षिणेश्वर हृदय में से निकल कर के अपने घर में आकर के बसेगा। हमको ऐसा लगने लगेगा यदि नियमित प्रैक्टिस करते हैं ऐसा लगने लगेगा आप दक्षिणेश्वर में रह रहे हैं। दक्षिणेश्वर आपके घर में आ गया है। तो श्लोक नंबर फाइव निर्माण मोहा जित संग दोष निर्माण मोहा जित संग दोष अध्यात्म नित्या विनिवत्त [संगीत] काम अध्यात्म नित्या विनिवत्तमा ध्व विमुक्त सुख दुख संगै ध्व विमुक्त सुख दुख संगै गच्छंत मूढ़ा पदमव्ययंम तत गच्छंत मूढ़ा पदमव्ययंम तत न तसते ते सूर्य न तसते सूर्य न शशांको न पावक यगत्वा निवर्तते यगत्वा निवर्तते त परम मम तमाम परम मम ओके फिर से एक बार अपने हृदय में मन को एकाग्र कीजिए। फिर से एक बार वही दक्षिणेश्वर को अपने हृदय में जागृत कीजिए। देखिए कि आपका मन जो है संपूर्ण रूप से शून्य हो जाना चाहिए। आपका हृदय जो है जागृत हो जाना चाहिए। हृदय में दक्षिणेश्वर आकर के बसा है। श्री रामकृष्ण देव स्वयं अपने हृदय के भीतर में विराजित है। आप हृदय पर मन को एकाग्र कीजिए। मैं फिर से यह जो कथामृत का पाठ था थोड़ा सा मैं और आगे पढ़ता हूं।

ध्यान अभ्यास और कथामृत पाठ

मास्टर महाशय लिखते हैं कि आश्चर्य क्या आश्चर्य शत शत मधुवत पार्थिवम रजह सत्य सत्य ही मधुमत पार्थिवम रजहः यह जो उद्यान का धुली कण है वह भी मधुवत हो गया है। वह भी ठाकुर के आनंद का आनंद प्राप्त करके आनंद में दिव्यानंद में मत्त हो गया है। उद्यानेर धली परजंतु मधुमय यह जो बागान है दक्षिणेश्वर काली मंदिर का उसका प्रत्येक धुली कण मधुमय है। इच्छा होए गोपने बा भक्त शंगे ए धुली रूप गड़ागड़ी दी इच्छा होती है गोपने यानी कि अकेले या तो फिर भक्तों के साथ में इस धुली पे लेट जाए धुली को साष्टांग प्रणाम करें इच्छा होए ए उद्याने एक पारश्व दाड़ाइया समस्त दिन ए मनोहारी गंगा बारी दर्शन करी इच्छा होती है। यही उद्यान के एक कोने में खड़े रहकर के समस्त दिन मनोहारी गंगावारी का दर्शन करूं। इच्छा होए ए उद्याने गुरु लता गुल्म पत्र पुष्पो शोभित स्निध्जल वृक्षगुली के अतिने सादर संभाषण और प्रेमालिंगन दान करी इच्छा होती है यही उद्यान के यह पत्र पुष्प और उससे सुशोभित वृक्षों को स्निग्ध उज्जवल वृक्षों को आत्मीय रूप से सादर वार्तालाप करूं और प्रेमालिंगन दान करूं। ए धुली ऊपर दिया कि ठाकुर श्री रामकृष्ण पादुचारण करें क्या यही धूल के ऊपर में रहकर के श्री रामकृष्ण चलते हैं ए बृता गुलमो मध्य दिया तनी की ओरो जाता करेन यही पेड़ों के बीच में से वह हमेशा आते जाते रहते हैं इच्छा करे ज्योतिर्मय गगन पाने अनन्य दृष्टि होइया ताकया था की इच्छा होती है यह ज्योतिर्मय गगन की ओर एक दृष्टि से मैं देखता रहूं दर्शन करता रहूं कैनो ना देखते छ भूलोक धलोक समस्ते प्रेमानंदे भाषेते छे क्यों देख रहा हूं कि पृथ्वी और स्वर्ग समस्त प्रेमंद से भरे हुए हैं। ठाकुर बाड़ी पुजारी दबारी पारिचारक शकल के केनो परम आत्मीय बोध हो ठाकुर वाणी के यह पुजारी है यह द्वारवान है यह सेवक वगैरह है सबको क्यों मेरे परम आत्मीय समझ में आ रहा है केनो ए स्थान बहुनांतते दृष्टो जन्मभूमि न्याय मधुर लागीते छे क्यों यह स्थान बहुत दिनों के बाद में मैं जब वापस आया हूं इस तरह की जन्मभूमि की तरह मधुर लग रहा है। आकाश गंगा देवो मंदिर उद्यान पथ ब्रो लता गुल्मो शेवक गण आशने उपविष्टो भक्तगण शकले जेनो एक जी तैयारी बोध होइ ते छे आकाश गंगा देव मंदिर उद्यान पथ वृक्ष लता गुलम्म सेवक गण आसन के ऊपर में उपविष्ट भक्त गण सब जैसे कि एक ही पदार्थ के बने हुए हैं। जेनी से निर्मितो श्री रामकृष्ण जिस पदार्थ के बने हुए हैं श्री रामकृष्ण स्वयं एराओ बोध होते छ से जी हो बेन तो यह सब कुछ है आकाश गंगा देव मंदिर उद्यान पथ वह सब भी उसी पदार्थ के बने हैं जेनो एक्ट मोमेर बागान जैसे कि एक वैक्स का बना हुआ बागान है गाजपाला फल पाता शब मोर मोम अर्थात कि वैक्स ये जो कैंडल होती है कैंडल में जो वैक्स होता है वो वैक्स उसी वैक्स का बना हुआ गाछ ये पेड़-पौधे हैं फल है पत्ते हैं सब जैसे कि एक ही चीज के बने हैं बागानेर पथ बागानेर माली बागानेर निवासी गों बागान मध्यस्थ तो ग्रह समस्त मोर यह बागान है बाग ये जो गार्डन है गार्डन का जो गार्डनर माली है बागान में जो रहने वाले हैं यह बागान के भीतर में जो घर है सब जैसे कि आनंद से बना हुआ है एकानकार सब आनंद दिय घड़ा यहां का सब कुछ जो है आनंद से बना है ओके तो हरि ओम ये थर्ड राउंड ऑफ मेडिटेशन हुआ।

निष्कर्ष एवं समापन-संगीत

आपने देखा कि सेम मेथड हम फॉलो कर रहे हैं। पहले तो हम गीता चटिंग करेंगे। गीता चटिंग करके अपना जो मन है उसको हम स्ट्रेंथन करेंगे। उसको हम पवित्र करेंगे और यह जो शक्ति है और यह जो पवित्रता है उसका हम इंटरनलाइज करेंगे और अपना जो एकाग्रता मन है हृदय में स्थापित करेंगे। अपनी आंखें ढली होनी चाहिए। बंद नहीं होनी चाहिए। यह जो दक्षिणेश्वर हम प्रकट करते हैं, हृदय में करना है। कभी भी सर के भीतर में नहीं करना। और साथ में ही थोड़ा सा मैं कथामृत का पाठ करूंगा। जिसकी वजह से क्या होगा कि आपका मन जो है मेरे शब्दों को पकड़ करके एक मीडियम चाहिए मन को पकड़ने के लिए। तो शब्दों को पकड़ करके आप उस मन को हृदय में एकाग्र कर पाए। हृदय में ही जैसे कि दक्षिणेश्वर प्रकट होगा और धीरे-धीरे आपका प्रैक्टिस बढ़ता जाएगा। तो यही दक्षिणेश्वर हृदय में से प्रगटित होकर के आपके घर को दक्षिणेश्वर में परिणत कर देगा। सो लेट अस एंड हियर। तो फिर लाली दी जो अंबा स्तोत्रम करके हम इसको समाप्त करेंगे। अंबा का सुख शिव सुख दुख हस्त आतम भव प्रलो शांति विधान निह किम बहुधा भा प्रयत्न परमा सदैव संद वा याता कृत फल कृम वरदा भवारी जाहम धम धित कर्म भाषा जामित कर भाषा किताम वहाना इच्छा दुखता नियमा स्वतंत्र यस्या सदा सदा भव सुखा शरणम म्या यस्या सदा भवतु सा शरणम म्या त [गाना गाने की आवाज़] शिवाम भव हे बुद्ध भम विधिव्याम जगत की चिंतम श्री चरणमय प्रतिष् सेवा परता शरणम प्रप या माय विनय अति दुख मार्ग आता स्वकित ललित या सुध सततम ध्याम सा शिवा मगति सफरे हरे सा शिवा मगति सफरे हरे वेरी गुड ओम शांति शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु ओम