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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत : दक्षिणेश्वर में भक्तों के साथ श्रीरामकृष्ण Sri Ramakrishna Hindi 24 May 2023

Transcript

ठाकुर कहते हैं निर्वाण निष्कंपाम युवा प्रतिम अर्थात की जब हम योग साधना करते हैं तब जैसे की एक ऐसी प्रदीप की शिखा एक ऐसी दीप की ना ही जिसमें कोई कंपन हो रहा है ना ही जिसमें कोई मूवमेंट हो रहा है जो की बिल्कुल स्थिर है जहां पर कोई हवा नहीं पहुंचती जैसे वो प्रदीप आप जैसे एक बैंड घर में आप प्रदीप जलते हैं तो उसकी शिखा जो है किसी एकदम सीधी और एकदम स्थिर रहती है और यदि आप प्रदीप को अपने घर के बाहर में चलाएंगे तो हवा की वजह से क्या होगा की प्रदीप की जो शिखा है वो पुरी जो है वह इधर-उधर वह दो लाइनमैन होगी तो यह तीर शिखा की तरह अपना मां रहना चाहिए अभी जब अपना मां साधना के समय प्रदीप की शिखा की तरह स्थिर नहीं है तो उसका क्या अर्थ है उसका अर्थ है की हमारी साधना में कुछ बिकना यह वाइन क्या ए सकते हैं उसके बड़े में ठाकुर बताते हैं ठाकुर क्या कहते हैं किसी में किसी किसी में योगिया के लक्षण दिखते हैं परंतु उन लोगों को भी सावधानी से रहना चाहिए कामिनी और कंचन ही योग में विखना डालते हैं योग भ्रष्ट होकर सड़क फिर संसार में आता है भोग की कुछ इच्छा रही होगी अच्छा अभी जब स्वामी जी ठाकुर यहां पे कामिनी और कंचन शब्द उसे करते हैं उसका अर्थ यह नहीं है की स्त्रियों के बड़े में कहते हैं स्त्रियों को भी मतलब से चीज से सावधान रहना है अर्थात पुरुष तो यहां पर कभी-कभी उसका इंग्लिश ट्रांसलेशन है तो उसका विमान और गोल्ड ऐसा कभी कर सकते हैं फिर जब अमेरिका में इसको पब्लिश करने की बात आई अमरूद को तो भी वहां पर ट्रांसलेट किया इंग्लिश में उन्होंने ग्रिड ऐसा कर दिया है ठीक है कितना डिफरेंस है कामिनी तो हो गया वूमेन और यदि कहते हैं लस्ट तो हो गया कामवासना अर्थात की स्त्रियों से सावधान नहीं रहना है पुरुषों को या तो फिर एन स्त्रियों को पुरुषों से सावधान रहना है पुरुषों को स्त्रियों से सावधान नहीं रहना है दोनों को सावधान रहना है कम वासना से तो अभी क्या है की जब इंग्लिश में ट्रांसलेशन हुआ तो हो गया उसका लस्ट और ग्रिड रदर दें विमान और गोल्ड लिटरल ट्रांसलेशन होगा शाब्दिक ट्रांसलेशन होगा वूमेन और वर्ल्ड तो अभी आ वहां पे तो क्या है की लोगों विमेन फ्रीडम और फीमेल लिबरेशन और वो जो सब चला है ना की आप यदि औरतें को कहेंगे की आप लोगों से हमको सावधान रहना है पुरुष्ट भी ऐसा कहे तो वहां पर तो उसका बड़ा ही उसका मतलब नेगेटिव अर्थ में ले सकते हैं इंडिया में सबको पता है की जब ठाकुर कहते हैं कामिनी और कंचन तो कोई स्त्रियों को सुचित्र नहीं करते वो जो हमारी जो उसके प्रति जो ये कम भावना है उसको सुचित्र करते हैं ठाकुर को लिटरली नहीं लेना है और ठाकुर जो ये बात हम पुरुषों को कहे की कामिनी और कंचन से सावधान रहना तो स्त्रियों को भी ये सही कहा है की पुरुषों से सावधान रहना तो किसी स्त्री या पुरुष का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं है यदि दूसरों के प्रति अपोजिट सेक्स के प्रति जो कम भाव एवं मां में उसके प्रति ठाकुर सावंत करते हैं तो जब इंग्लिश में अमेरिका में जब ट्रांसलेशन हुआ था तो वूमेन की बजे कर दिया लस्ट आर्ट की स्त्रियों से सावधान नहीं रहना या तो फिर कम ही नहीं से सावधान नहीं रहना कामिनी के प्रति जो कम भाव है उससे सावधान रहना है ऐसा करके वो ट्रांसलेशन बहुत दिन तक चला इसके बाद में मतलब क्या है ना की वहां पर तो अमेरिका में तो बड़ा सावधान क्लिक करके बातें करनी पड़ती है कहां वे लोग ऑफेंस ले लेंगे बड़ा मां लेंगे फिर कोर्ट में कैसे कर देंगे की इन लोगों ने हमारे प्रति इस तरह से अपमान किया है और फिर कोर्ट में से मिलियन डॉलर का यदि दंड हो गया तो सभी वेदांत सेंटर बैंड हो जाएंगे हमारे वो इतना पैसा देते थे तो इसलिए वहां पर बड़ा ही सावधान रहकर के वहां की जो कल्चरल ट्रेडीशन जो है उसको ध्यान में रख करके ये सब बातें करनी पड़ती है तो एक किंतु एक समय ऐसा हुआ की जब ये लेडी देवोते है वेदांत सोसाइटी की उन्होंने सामने से जाकर के चेतनानंद जी वगैरा जो कुछ सीनरी उन लोगों को जाकर के कहा की देखिए ठाकुर के जो शब्द है वो तो कामिनी है उन्होंने तो कम शब्द उसे नहीं किया है तो आपने जो कामिनी कल जो है लस्ट क्यों कर दिया वो तो वूमेन की रहना चाहिए हम लोग तो सब हम लोग तो अपने से ही तो स्त्रियां हैं तो हमको तो ऐसा कोई बड़ा नहीं लगे वाला है आप जो है ठाकुर के जो शब्द है अवतार के जो ओरिजिनल शब्द है इस को व्यवहार कीजिए हम तो समझते हैं की ठाकुर क्या कहना चाहते हैं ठाकुर के शब्दों को आप अपनी मतलब अमेरिका की जो ट्रेडीशन है उसमें फिट बैठने के लिए ठाकुर के शब्दों को चेंज करते हैं ऐसा मुक्त कीजिए ऐसा मत सोचिए की आप वूमेन और गोल्ड ऐसा लिखेंगे तो हम लोग बड़ा मां लेंगे या तो फिर जाकर के कोर्ट में कैसे करेंगे या और किसी को कंप्लेंट करेंगे न्यूज़पेपर में लिख देंगे ऐसा नहीं होने वाला हम लोग चाहते हैं की ठाकुर के शब्दों को यथा वह रखा जाए तो अभी अवतार के जो शब्द है वो मंत्र समाज है उसको सुनने से हमसेलेक्चुअली ही उसका पालनपुर नहीं करते वो शब्द हमारे हृदय में चले जाते हैं और सब कॉन्शियसली वो हमारे से कार्य करवाते हैं हमारी क्या ताकत है की हम लोग जो है की यह जो महामाया का यह जो खेल है महामाया की जो माया है उसके सामने हम लाड सके ये हमारा कहां वो इतना रहस्य अमृत कहा इतना वह दम है या ताकत है हमको तो ठाकुर के शरणागत होकर के ठाकुर को ही कहना है की हमको इतनी शक्ति दो की आपकी ये जो माया है उसके पास में हम लोग बदनाम हो वो ऐसा आप करें तो कम और कंचन या तो कामिनी और कंचन से बचाने के लिए जो ताकत है वो तो ठाकुर ही देंगे अपने में तो वो ताकत के ही नहीं ठाकुर के ही शरणागत होना है अभी ठाकुर के शरणागत होने को आए हैं और ठाकुर के शब्दों को ही चेंज करके सुना शुरू कर दिया तो पता नहीं वो असर होगी की नहीं अपने सब कॉन्शियस लेवल पे या अपने हृदय के ऊपर में तो बटर है जो जैसा लिखा है ठाकुर ने वैसा ही रखो यह सब बात सुनकर के फिर मैंने ऐसा सुना है मैंने मुझे कंफर्म तो नहीं किया किंतु जो अमेरिका में जो लेटेस्ट एडिशन जो चल रहा है शायद तथा अमरूद का उसमें विमेन और गोल्ड किया है मुझे देखना पड़ेगा एक्चुअली हुआ है की नहीं है किंतु यह चेतनानंद जी ने कहानी पे यह बात कहीं थी की वहां से वो लेडी देवोटी ने सामने से कहा की आप ठाकुर के शब्दों को चेंज मत करें तो यहां पर भी जब ठाकुर कहते हैं कामिनी और कंचन तो यहां पे सिर्फ ये नहीं किस स्त्रियां और सोना अभी सोना बहुत लोगों के पास में नहीं राहत आज का तो गोल्ड का जो इक्विवेलेंट है बैंक बैलेंस है फिर यह जो आपका डिजिटल ई है फिर यह क्रिप्टो वो वगैरा क्या-क्या सब चल रहा है तो मैंने सोना शब्द जो उसे किया है वो ये उसका एक रिप्रेजेंटेटिव शब्द है हमारी जो धन संपत्ति और हमारी जो मां और यश इसके प्रति जो लालसा है उसको मतलब बहुत ही सहज सरल बनाकर के ठाकुर ने ये शब्द उसे किया है कंचन कंचन अर्थात की सोना गोल्ड तो अभी देखिए की ठाकुर भी यदि ऐसा हमारी साइकोलॉजी के बड़े में बताने को जाते की सब कॉन्शियस लेवल पे हमारा जो एव सॉल्यूशन है ह्यूमन इवोल्यूशन इवोल्यूशन ने हमेशा दो चीजों को प्रेफर किया है एक तो है सिक्योरिटी दूसरा है रिप्रोडक्शन रिप्रोडक्शन इसके लिए जिससे की आप जैसे छोटी-छोटी ट्राइब्स ने जंगल में तो वो जो ट्रीज में यदि रिप्रोडक्शन प्रॉपर्ली नहीं होगा तो दूसरी टाइप के सामने अटैक होगा तो हमारी ड्राइव जो है हमारे वो जो दाल है छोटा सा वो पूरा खत्म हो जाएगा ये तो एक भोह है एक ऐसा डर है फिर जो एक नेचुरल डिजास्टर है अभी इंडिया में तो 1040 करोड़ लोग हैं की जब ये काल भी ए जाए दुष्कल भी ए जाए अतिवृष्टि भी ए जाए यानी की अर्थक्वेक भी हो जाए तो 10-15 लाख जैसे पेडेमिक था तो पेडेमिक में मां लीजिए की 10 15 लाख लोग मा भी गया किंतु देहांत बीजेपी इनका हो गया तो 140 करोड़ लोगों में तो ये पापुलेशन इनफ है की हमारे देश को बच्चा के रखें किंतु ऐसा समय था जबकि पृथ्वी की जो ह्यूमन पापुलेशन है वही पुरी पृथ्वी में शायद लाख 2 लाख इंसान जो जिसको होमो सेपियंस कहते हैं वो थे आईटी ट्राइब्स बना करके छोटी-छोटी वो रहते थे उसमें से यदि एक के बाद एक ट्राइब जो है उसका वो जो मैंने वो उसका मैन ये विनाश होना शुरू हो जाए तो पूरा ह्यूमन इवोल्यूशन ही खत्म हो जाएगा इसलिए रिप्रोडक्शन जो है वो तो हमारे वो हमारे डीएनए में है तो डीएनए जो है उसको तो इमीडीएटली या इजीली अब चेंज नहीं कर सकते ये जो हमारे डिजायर है वो इतना स्ट्रांग्ली हमारे जो सब कॉन्शियस लेवल में वो अंबेडकर के बेटे हैं की इसको आप आईएसआईएलआई नहीं निकाल सकते और इजीली नहीं निकाल सकते एक बात है किंतु उसको तो उसके सामने हमको संग्राम अवश्य करना है तो यह पुरी चीज जो है वो ठाकुर अभी इतना लंबा वो साइकोलॉजी नहीं समझा दूसरा एक है किसी सिक्योरिटी की आपके पास में सिक्योरिटी होने से यदि आप सिक्योरिटी अर्थात की 10 15 गे है ना की ऐसा कुछ है तो आपके पास में इनफ वो ये है की पोटेंशियल की मां लीजिए की एक दो दिन आप शिकार करने को गए और कुछ नहीं मिला या तो फिर आप खुद बीमा हो गए शिकार करने को नहीं जा का रहे हैं या तो फिर खेती करने के लिए लेटर ऑन जब फार्मिंग कम्युनिटी हुआ था तो अब यदि खेती करने को नहीं जा का रहा है तो क्या है की आपके घर में जो खाने को है वो एन या फिर ये जो है पशुधन ये है तो इसके लिए ये सिक्योरिटी जो की हमारी धन के प्रति लालसा जो है ये और ये रिप्रोडक्शन के प्रति ये इच्छा हमारे डीएनए में बिल्कुल पहले से ही वो लिख दी गई है तो उसको हम इजीली नहीं निकाल पाएंगे तो किंतु यह पुरी चीज को समझने के लिए ठाकुर अभी इतना लंबा चौड़ा हमको उपदेश नहीं देते सिर्फ दो शब्दों में उनको उन्होंने हमको बता दिया है कामिनी और अच्छा तो यह हम लोग जिसको की ये हिस्ट्री है या तो फिर ये फिलासफी है ना की ये साइकोलॉजी है ना की स्पिरिचुअलिटी है ना की ये वेदांत है ना किया धर्मशास्त्र है जिसमें ये कुछ भी नहीं पड़ा वो भी ये दो शब्दों को सुनकर के इमीडीएटली समझ जाएगा की किस सावधान रहना है और क्यों रहना है ये जो हमारी जो दीप साइकोलॉजिकल जो नीड है ये हमारी प्राणशक्ति जो है यदि इस में चली जाएगी तो फिर हम आध्यात्मिक साधना के लिए क्या देंगे ये जो हमारे सबके भीतर में ओजस शक्ति होती है या तो प्राण शक्ति होती है अभी प्राणशक्ति पहले तो लिमिटेड होता है ये ओजस जो होता है पहले तो वो लिमिटेड होता है उसको आप किसी एक कार्य में उसका आप इसको यूटिलाइज करेंगे उसका इस्तेमाल करेंगे यदि वह कार्य में सफलता प्राप्त करनी है तो आपको जो ओजस्ट जो है वो आपको व्य करना होगा जैसे की आपको लेनी है तो ₹10 लेकर के गए और एक किलो जो है वो आलू खरीद के ले आए तो आपके तो ₹10 गए उसके बदले में आपको 1 किलो आलू मिला तो अभी क्या है की ओजस भी ऐसा एक ई है साइकोलॉजिकल ई साइकोलॉजी मेंटल कॉन्शियस लेवल पर हमको कोई भी कार्य करना है इनफैक्ट किसी भी तरह का कार्य क्यों ना हो हमको जल्दी करना है तो ये ओजस रूपी ई जो है ये ओजस रूपी कैसे जो है उसको हमको देना पड़ेगा उसके बदले में सामने हमको और कोई चीज मिलेगी मुझे स्टडी करना है मेरे में ओजस चाहिए ओजस शक्ति को मैं व्यवहार करके मैं स्टडी करूंगा तो मैंने यदि कुछ शिखा फिजिक्स सीखना केमिस्ट्री शिखा तो सामने उतना ओजस्ट जो है मैंने सामने दिया उसका मैंने खर्च किया तो अभी क्या है की मेरे पास में जो लिमिटेड वजह से सब कुछ दे दिया और मैंने सामने जो चीज ले ली जिससे की मुझे और कुछ नहीं मिलने वाला है मुझे वह जैसे फिजिक्स में जैसे मास्टरी मिली या ऐसा कुछ है तो ठीक है मैंने तो मेरा ओजस गाव दिया अभी ओजस ही है धर्मशक्ति या तो आध्यात्मिक शक्ति या तो फिर जिसको कहते हैं कुंडली तो यदि ओजस शक्ति जो है मेरी पुरी व्य हो गई तो आध्यात्मिक रूप से जो है मेरा ऑलमोस्ट में तमस में चला गया मेरी जो हायर जो फंक्शनैलिटीज है ये जो भाव भक्ति ज्ञान वैराग्य ये जो शरणाघाटी ये जो सब धर्म राज्य के ये जो सब गन है वो सब मेरे चले गए और जिसके चले जान के साथ में तो अभी स्मार्ट चीज क्या है मैंने मेजॉरिटी एक स्मार्ट परसों हूं मैं मेरे में यदि थोड़ा सा बुद्धि है अकाल है तो मुझे क्या करना होगा मैं क्या करूंगा इस ओजस को मैं इस चीज के पीछे खरजंगा और ज्यादा ओजस अपने के लिए जिससे की आप रुपया जो है रुपया से आप कोई चीज खरीद सकते हैं जैसे की मेरे पास में ₹1000 है है तो मैं क्या करूंगा चलो मैं होटल में खाना खाने को जाता हूं मैंने खाना का लिया पेट भर गया बहुत मजा आया ₹1000 का खाना खाया की यह तो एक चीज हो गया जो जो मैंने खाया है वो दूसरे दिन उसका त्याग भी हो जाएगा वो चला भी जाएगा उसमें से जो थोड़ा बहुत मिनरल वगैरा मिलन था विटामिन प्रोटीन वगैरा वो मेरे शरीर में एक या दो दिन रहेंगे और फिर मुझे फिर से रुपए चाहिए दूसरे दिन फिर से खाना खाने के लिए किंतु यदि मैं स्मार्ट हूं तो मैं क्या करूंगा मेरे पास में ₹1000 है तो उसको मैं इन्वेस्ट करूंगा और इस तरह से इन्वेस्ट करूंगा की जिससे की मुझे उसमें से ₹2000 मिल रहा है अभी जो ₹2000 है उसको मैं फिर से इन्वेस्ट करूंगा तो मुझे उसमें से 4000 रुपया मिला तो देखिए रुपए को इन्वेस्ट करने से और ज्यादा रुपया मिलता है किंतु यदि रुपया आपने खर्च कर दिया होटल में जाकर के खाना का लिया सिनेमा देख लिया या तो फिर मैंने कोई है नया अच्छा सा मोबाइल परचेज कर लिया या अभी आजकल इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स तो इतने सारे मैंने वह सब परचेज कर लिए तो मेरा तो रुपया गया अभी वह इलेक्ट्रॉनिक गैजेट कहो ना की वो सब कहो वो जितने दिन चलेंगे उतने दिन चलेंगे वो जब खत्म हो जाएंगे तो मैं दूसरा चीज नया जो खरीदना है मैं कहां से लॉन्ग मेरे पास तो पैसा है नहीं तो बेस्ट चीज है पैसों के साथ में क्या करना चाहिए उसको इन्वेस्ट करना चाहिए और ज्यादा रुपया कामना चाहिए फिर उसमें से थोड़ा-थोड़ा रुपया खर्च करके आप बाकी सब चीज खरीद सकते हैं तो एजर्स में भी ऐसा है ये जो सांसारिक चीजों के पीछे हम अपनी प्राणशक्ति डालते हैं घूमते हैं उससे क्या होता है वो चीज तो शायद हमको मिल जाएगी किंतु हमारी प्राणशक्ति या ओजस खत्म हो जाएगा फिर जो है हम सत्व या रजिस्टर उसे समय होंगे उसमें से तमस में चले जाएंगे बच्चा जब जन्म लेट है तब पूरा ओजस का बना होता है पूरा सात्विक होता है उसका मां उसमें एक दिन का भी उसमें दाग नहीं राहत एकदम वो जस्ट से भारत हुआ छोटा सा एक मतलब वो जैसे बाल गोपाल अगर आप बच्चे का जन्म होता है किंतु जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है तो उसका जो उसको यदि अच्छे से संस्कार मिलते हैं उसकी मां है पिताजी है उसका ठीक से ललन पालनपुर करते हैं तो उसका जो ओजस है वो बढ़ता जाएगा और वो जो है की उसके भीतर में सदगुण जो है वो प्रगति होंगे जैसे की सत्य वचन कहना किसी को हनी नहीं पहुंचाना दूसरे को मदद रूप होना माता-पिता को माता जी और पिताजी को जो है उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित करना बीच-बीच में यदि घर में छोटा सा श्रीं है तो वहां पर पूजा वगैरा करना अपने मित्रों को हेल्प करना यदि खुद को कोई चीज मैथमेटिक्स अच्छे से आता है मेरे मित्र को नहीं आता तो मेरे मित्र को सीखना यह सब चीज जो सदगुण जो है बच्चे को यदि पहले से सिखाए जाए तो यह सदगुण जो है वो जस्ट का इन्वेस्टमेंट है जितने जितना वह सदगुण बढ़ेंगे उतना ही हमारा ओजस बढ़ेगा और फिर जैसे यदि हम ओजस को साधना में लगा दे सदगुण से हम सीमित ना रहे सदगुण यदि ए गए एक बार मेरे में तो फिर मैं यदि साधना में ग जाऊं तो ये ओजस जो है वो तो और भी कहानी उन्हें वो मतलब वो जो है की ज्यादा से ज्यादा बढ़ता जाएगा तो ये हो गया एक आदर्श जीवन किंतु यदि उसके माता-पिता ने ठीक से संस्कार नहीं दिए यह जो कुछ दुर्गुण उसने लगा दिए झूठ बोलना अपने मित्रों के साथ में मारपीट करना फिर बाद में थोड़ा सा बड़ा होता है तो स्मोकिंग और ड्रिंकिंग की उसमें चले जाना ये जो सब दे हैबिट्स उसकी ग गई तो यह जो बचपन में वो जो ओजस को लेकर के उसका जो जन्म हुआ था वह धीरे-धीरे करके खत्म होता जाएगा और बैठा टाइम वो एडल्ट होगा या मिडिल आगे में आएगा पूरा थॉमस में डब जाएगा तो हमको जो है की हमारे में वो स्मार्टनेस हनी चाहिए की मेरे में जो आध्यात्मिक शक्ति प्राण शक्ति या तो कुंडली नहीं या तो ओजस बहुत सारे नाम दिए गए हैं हमारे हिंदू धर्म शास्त्र में इस आध्यात्मिक स्पिरिचुअल एनर्जी को तो उसको समझे उसका प्रॉपर इन्वेस्टमेंट करें ठाकुर जब कहते हैं कामिनी और कंचन से दूर रहना इसका अर्थ है की इन दोनों चीजों में ओजस शक्ति को व्य नहीं करना हां जैसे की धर्म के रास्ते पर चलते हुए धर्म के साथ में अर्थ और कम ये दोनों है उसका अनुष्ठान धर्म के आधार पर आप कर सकते हैं उसमें गलत कुछ नहीं है किंतु अर्थ और कम में डब जाना उसमें अपना पूरा जो है प्राणशक्ति गाव देना ये बड़ा ही डेंजरस है ये जो सीमित रेखा जो है अभी जैसे खुद ही राम है ठाकुर के पिताजी तो अभी ठाकुर के पिता जी ने अभी ऐसा तो नहीं है की वो 100 पूरे ब्रह्मचारी थे ठाकुर को तो जन्म दिया है तो किंतु देखिए की उनमें वो एक सेंस है की कम जो है उसका अनुष्ठान कहां तक किया जाए और अपने मां को कितना शुद्ध रखा है तो यह जो एक बैलेंस लाइन जो है ग्रोफर्स तक के लिए गृहस्थ और सन्यास आयशा सन्यासी को जो है कामिनी और कंचन का संपूर्ण रूप से त्याग करना है और गृहस्ट है जो है उसको ये जो कामिनी और कंचन दोनों का धर्म के आधार पर भोग करना है कहां तक कर सकते हैं वो धर्म आपको बताता है की जैसे की दूसरों को हनी ना हो और आपके जो जितने कर्तव्य है आपकी जो ब्यूटी है उसका आप ठीक-ठीक पालनपुर कर पे इन दोनों को ख्याल में रख करके नजर के सामने रख करके आपको जो है अर्थ और कम ये दोनों का अनुष्ठान करना है ये हमारा धर्म ही बताता है धीरे-धीरे करके एक के बाद एक जन्म जाते जाएंगे आपकी ये जो ओजस शक्ति जो है प्राण शक्ति जो है वो ज्यादा से ज्यादा बढ़नी जाएगी और एक दिन ऐसा आएगा की ओजस जैसे इतना बाढ़ जाएगा की ये कुंडली जो है वो जो हमारी जो फाइनल कोड है उसके वह जो आखिरी वह यह है वह सबसे नीचे में वह एक के बाद एक चक्र का भेद करके जो है सहस्रनर चक्र हमारे मस्तिष्क के ऊपर में है वहां चली जाएगी और हमको जो है ब्रह्मज्ञान या तो ईश्वर दर्शन होंगे ब्रह्मज्ञान प्रताप होगी या तो ईश्वर दर्शन हो गया तो ये है हमारी साधना तो इसीलिए ठाकुर यह पुरी जो साइकोलॉजी है हमारी योग और योग की साइकोलॉजी ये पूरा योग शास्त्र में आता है पूरा जो है योग शास्त्र में बहुत ही अच्छे तरह से समझाया गया है तो योग शास्त्र की ये पुरी साइकोलॉजी ठाकुर हमको सिर्फ दो शब्दों में समझा देते हैं की कामिनी और कंचन से सावधान रहना है और इसका अर्थ हमको क्या समझना है की हमारी जो शक्ति जो है जिसको लेकर के हमारा जन्म हुआ था हम जब शिशु थे तो हम पूरे ओजस से भरे हुए थे हमारा मां सब समय आनंद में राहत था स्वामी जी कहते हैं ना एक जगह है वह एक चोर है किसी के घर में चोरी करने को जाता है वहां पर छोटा एक शिशु बैठा हुआ है तो जो बच्चा है उसको समझ में नहीं आता की ये जो चोर है वो मेरी चीज लेकर के जा रहा है उसको ये चीज मेरी है वो दूसरों को उसको नहीं ले सकते हैं ये उसको सेंसी नहीं है उसको लगता है की पूरा जगत संसार जो है वो अपनी मां का है तो इस तरह से उसका मां किस तरह से खुशी आनंद और प्रसन्नता से भारत राहत है और इसीलिए देखिए की हम जब हमारा मांचड़ी थोड़ा सा निरसा होता है या उदास होता है उसे समय यदि हम छोटे बच्चे को गॉड में लेकर के उसके साथ में थोड़ा सा खेलने हैं तो हमको कितना सुकून मिलता है छोटे बच्चे में वो शक्ति है तो वो शक्ति कहां से आई है की जब हम निरसा भी होते हैं थोड़ा सा हम डिप्रेशन में भी होते हैं तो हम उसके साथ में खेल करके बिल्कुल अपना मां जो है फिर से प्रश्न हो जाए तो वो शक्ति कहां से आई है वो शक्ति आई है बच्चे के ओजस में से वो ओजस शक्ति जिसमें वो ओजस होता है है उसके संपर्क में यदि आप आते हैं तो वह ओजस जैसे की जैसे यह ऑक्सीजन किस से वो सब पूरे वो वायुमंडल में छाया हुआ है और हम ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तो वैसे ही उसका ओजस जो है इस उसके आसपास में वो छ जाता है और वो हम ग्रहण करते हैं उससे हमको भी प्रसन्नता और शांति मिलती है ये जो कोई बड़े ही सीनरी साधु होते हैं कोई बड़े ही अच्छे सड़क होते हैं उनका संघ करने के लिए हमारा मां जो है वो लाल ही क्यों राहत है उनका संघ करने के लिए हमको इतने भीतर से इच्छा क्यों होती है वो इसीलिए होती है की वो ओजस जो है वो ग्रहण करना चाहता है हमारा मां और उनके पास में ओजस है जैसे की वो धनवान जो एक रिलेटिव है एक हमारा एक ऐसा रिलेटिव जिसके पास में बहुत पैसा है तो यदि वो घर में आता है हमको मिलने के लिए तो हम कितने वो इतना प्रेम से और इतना उत्साह से उसका स्वागत करते हैं उसको हनुमान देते हैं उसको खाना वगैरा खिलाने हैं अभी मुंह से तो बोलते नहीं होंगे किंतु मां में मतलब ये सब कॉन्शियसली ये भाव राहत है की यदि वो थोड़ा सा वो थोड़ा पैसा हमको दे दे कभी कहानी फ्यूचर में किसी कम के लिए तो कितना अच्छा हो और यदि कोई गरीब रिलेटिव आता है तो हम उसको वैसे ही जो है वो उसको जो है इग्नोर करते हैं कभी मतलब सभी लोग ऐसा नहीं करते किंतु एक जनरल साइकोलॉजी कहता हूं तो देखिए यहां पे भी ऐसा है जिसमें ओजस नहीं है वो आदमी तमस में चला जाता है अभी ऐसे तामसिक लोगों से हमारा मां जो है ऐसे ऐसे लोगों के संपर्क में आने से ही हमारा मां जो है वो ये मतलब उसमें वो एक प्रगति प्रगति होता है उद्व है या तो फिर क्रोध है ऐसे जो दुर्गुण है ऐसे लोगों के संपर्क में आने से प्रकट होते हैं और फिर यदि भविष्य में हम लोग सावधान हो जाते हैं अरे भाई उसका वो इतना नेगेटिव है उसके भीतर में की उससे दूर ही रहो वो हमको भी डिप्रैस कर देता है मैंने कहा की मैं आरोग्य भवन जो है अपना बेलूर मठ में जहां पर सब रिटायर साधु रहते हैं तो मैं बड़ा ही रेगुलरली जाता था और जैसे देखिए मेरा एक ये भी एक गुड फॉर्चून था की मैंने बेलूर मठ जॉइन किया था तो हमारा जो ट्रेनिंग सेंटर था वो आरोग्य भवन के सामने में ही था तो हमको जो हमारे आचार्य महाराज जो की क्लास लेने को आते थे वे लोग बीच-बीच में कहते थे की देखो तुम्हारा जो है यहां से मॉनेस्टिक लाइफ की शुरुआत होती है यानी की जो हमारा जो ट्रेनिंग सेंटर था वहां पे और यहां पे जो है आरोग्य भवन जो है वहां पे रिटायर हो करके जाते हैं और फिर वहां पे ही सामने में वो समाधि घाट है जहां पे की जिन साधुओं का देहांत होता है तब उनके अमृत डे का वहां पे वो जो है वो अग्नि डा वहां पे किया जाता है गंगा के किनारे वो समाधि घाट है तो वहां सामने ही समाधि घाट है तो सब वो सीनरी आचार्य सीनरी साधु हमको कहां करते थे की यहां पे वो बच्चा मतलब जॉइन करने ले आया जो हमारे ट्रेनिंग सेंटर में रिटायर हो करके वो आरोग्य भवन में गए और फिर जब मृत्यु हुआ तो वही समाधि घाट पर हमारा अग्नि दहा हुआ मैन इतने ही एरिया में वो जो पूरा वो जो जन्म मृत्यु और ये जो जन्म और मृत्यु का वो जो पूरा वो जो ये है सर्किल वो इतने ही एरिया में देखने को मिलेगा तो वो डेट वज ओवर गुड फॉर्चून के बार-बार आरोग्य भवन जाना होता था वहां के सीनरी सड़कों के साथ बात करना होता था बहुत लोगों के साथ मित्रता भी की और वैसे मेरा का मेरा मेरे भीतर में इतना सेवा भाव नहीं है किंतु मेरे और जो कुछ-कुछ ब्रह्मचारी थे मेरे मित्र तो उन लोगों में बड़ा सेवा भाव था तो जाकर के किसी सीनरी साधु को बोलेंगे की महाराज आपके कपड़े धोने हैं या ऐसा कुछ करना है तो बताइए तो वो ऐसा करके हेल्प करते थे तो मेरे में इतना नहीं था किंतु मुझे वो गैप लगाना अच्छा लगता था तो मैं जब भी चाहता था तो दिखता था की ऐसे साधु होते हैं कोई सब समय जो है उनके पास जान से ना किसी ना किसी चीज को लेकर के कंप्लेन करेंगे अभी यदि दूसरे साधुओं के कंप्लेन करने को कुछ नहीं मिलता है तो न्यूज़पेपर खोल करके बैठेंगे उसमें कोई कोई न्यूज़ आइटम देखकर के अरे जैसा हो रहा है वहां ऐसा हो रहा है तो ठीक है अभी ऐसा भी उनका एक है मन सेट और कुछ कुछ साधु है जैसे की मैंने वो काली पड़ा महाराज के बड़े में बात किया था उसे दिन तो उनके साथ में बैठ करके बात करके मां को इतना सुकून मिलता है इतने बूढ़े उठे वो उम्र में वो 90 प्लस उनका आगे था उसे समय वो हमारे उपनिषद गीता ये जो धर्म शास्त्र सब उनको मुख्य स्टार और एक के बाद एक श्लोक बोलते जाएंगे और उसकी व्याख्या करते जाएंगे और हम जा करके मैं हंस करके मैं जाकर के उनके साथ में बात करूंगा तो फिर वो जो सब है वगैरा जो कोई भी उनके बहुत सर उनको फ्रूट आता था वो सीनरी साधु थे और डायट के लिए वो सब चाहिए तो मुझे खिलाने थे तो बड़ा मजा आता था उनके साथ में बैठ करके तो देखिए की यदि किसी के साथ में बैठकर के बात करने का अच्छा लगता है डेट मेंस के उसके भीतर में ओजस है और जो हमारा जो हृदय है सब कॉन्शियस ग्रहण करना इसलिए उसका सॉन्ग करने को हमारा मां जो है सब समय उत्सुक राहत है तो ये सब किंतु कब होगा की जब हम जो दुर्गुण है या तो फिर ये जो ऐसी चीज जिसमें हमारा ओजस्वी कर देंगे और सामने में कुछ नहीं मिलेगा तो फिर क्या है की हमारा वो डेवलपमेंट्स स्पिरिचुअल डेवलपमेंट नहीं होगा किंतु हम अपना ओजस एक किसी चीज में डालें की जिससे की वो मल्टीप्लाई हो करके सामने मिले स्मार्ट इन्वेस्टमेंट जिसको कहते हैं आजकल ऐसी किसी चीज में इन्वेस्ट करें ऐसा किसी कार्य में या ऐसे किसी गन में या ऐसी साधना में अपने ओजस को इन्वेस्ट करें की सामने वो मल्टीप्लाई हो करके हमको रिटर्न मिले तब कहानी जाकर के हमारी आध्यात्मिक साधना जो है वो सुचारू रूप से चलेगी