Transcript
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा मायते अच्छा अभी हम लोग डिस्कस कर रहे थे कि किस तरह से ठाकुर ब्रह्मा और शक्ति यानी कि जो वेदांत है ठाकुर किस तरह से हमको वेदांत समझाते हैं ठाकुर की परिभाषा क्या है ब्रह्म और शक्ति की ठाकुर कहते हैं ब्रह्मा और शक्ति अभेद है जब वह निष्क्रिय रहते हैं चैतन्य रूप रहते हैं तब हम उनको ब्रह्मण कहते हैं और जब वह कार्य करते हैं तब हम उनको शक्ति कहते हैं तो अभी हम लोग डिस्कस कर रहे थे कि वेदांत की दृष्टि से इस पूरी चीज को कैसे देखें और ठाकुर क्या वेदांत से डिफरेंट है या वेदांत के ही शब्दों को दूसरे वाक्यों में दूसरे शब्दों में ढाल कर के कह रहे हैं तो एक्चुअली जब हम यह कॉस्मो मैक्रो कजम और माइक्रो कजम स्टडी कर रहे थे उस समय में एक बात हुई थी कि वेदांत को प्रॉपर्ली स्टडी किया जाए क्योंकि वेदांत का ये जो फ्रेमवर्क है उसी के बेस पर तो आखिर में सब कुछ हमारा रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर उसके ऊपर में ही बेस है यदि हम प्रॉपर वेदांत को समझेंगे तभी हम यह सब सब चीजों को और ज्यादा डिटेल में अच्छे से समझ पाएंगे तो मैंने उस समय ठीक किया था कि वेदांत का जो बेसिक टेक्स्ट है वेदांत सार उसको स्टडी किया जाए किंतु किस तरह से देखिए वेदांत सार हमको ट्रेनिंग सेंटर में सर्वप्रिया नंद जी सिखाते थे सो वी वेर वेरी फॉर्चूनेटली आप सबको पता ही है फिलोसोफी और खास करके ये जो अपने वेदांत के ऊपर में जो शंकर भाष्य है उनका अद्वैत वेदांत प ज्यादा उनका ग्रिप है तो शंकर भाष्य उन्होंने बहुत ही अच्छे से स्टडी किया है तो वही सर्वप्रिया अंद जी हमको टीसी में सिखा रहे थे बाद में एक्चुअली जब मेरा पोस्टिंग हुआ लिमडी में राजकोट में तब मैंने देखा कि उनका भी पोस्टिंग हो गया है वहां पे होलीवुड में पहले तो उनका पोस्टिंग हुआ था हॉलीवुड में और बाद में उनका हुआ था यहां पे न्यूयॉर्क में तो मैंने जब उनके youtube0 के सामने तो क्या है कि एग्जांपल है उपमा है है स्टोरीज है वो सब चीजों प थोड़ा ज्यादा भार दिया जाता है क्योंकि बहुत ज्यादा टेक्निकल ऐसा यदि करेंगे तो लोग फिर जो उ जाएंगे लोग बोर हो जाएंगे तो दैट वे आई वास डिसपे किंतु इवन जो कि लेस टेक्निकल उनके जो लेक्चर है youtube1 बाय टेक्स्ट जैसे कि हमको ट्रेनिंग सेंटर में सिखाया जाता है या तो फिर जिस तरह से ट्रेडिशनल कोई भी वेदांतिका जाती है पहले तो एक एक शब्दों की व्याख्या करेंगे उसके संस्कृत की व्युत्पत्ति क्या है वह देखेंगे अन्वय करेंगे फिर सभी शब्दों का अर्थ देखेंगे आखिर में जद समय रहता है तो लार्जर कांसेप्ट के ऊपर में डिस्कशन होगा तो मैं सोच रहा था कि वह सब कुछ स्किप करके मैं सीधे लार्ज कांसेप्ट के ऊपर में ही चला जाऊंगा और थोड़ी सी मॉडर्न मेथड्स यूज करके तो यहां पर मैं मेरा स्क्रीन शेयर कर रहा हूं देखिए कि किस तरह से मैंने यह स्टडी मटेरियल डेवलप किया था मैं फुल डेवलप नहीं कर पाया क्योंकि बाद में तो फिर मेरा राजकोट से ट्रांसफर हो गया यहां पर देखिए कि वेदांत सार पहले तो यह देख लेते हैं कि वेदांत सार का अर्थ क्या है वेदांत सार एक वेदांत की ऐसी किताब है किंतु खास करके अद्वैत वेदांत को वो ज्यादा उसके बारे में डिस्कशन है अद्वैत वेदांत की लीनियस तरह से दद वेदांत के जितने भी फंडामेंटल कांसेप्ट है उसको बेर आउटलाइन के रूप में रख कर के एक स्टील फ्रेम या तो फिर एक स्केलेटन जिसको कहते हैं वो तैयार करें जिससे कि आप प्रॉपर वेदांत का अंडरस्टैंडिंग हो जाए और उसके बाद में बाकी सब टेक्स्ट पढ़े जैसे कि मेन तीन टेक्स्ट है वेदांत की ब्रह्मसूत्र ट इज न्याय प्रस्थान श्रुति प्रस्थान दैट इज उपनिषद एंड श श्रुति प्रस्थान दैट इज भगवत गीता और इन तीनों के ऊपर में यदि हम अद्वैत लीनिया ज में है तो शंकराचार्य का भाष्य द्वैत लीनिया ज में है तो मधवा चार्य का विशिष्ट अद्वैत स्कूल ऑफ फिलोसोफी स्टडी कर रहे हैं तो रामानुजाचार्य का तो यह तीन प्रस्थान श्रुति स्मृति न्याय और उनके ऊपर में जो मेजर थ्री स्कूल से उनके आचार्यों की आचार्यों का भाष्य यह स्टडी करने से पहले वेदांत का बेसिक आइडियाज क्या है वेदांत के बेसिक फ्रेमवर्क्स क्या है कीवर्ड्स क्या है उसका प्रॉपर डिस्कशन इस वेदांतसार पुस्तक में है और ट्रेनिंग सेंटर में सबसे पहली किताब हमको यही पढ़ाई जाती है जिससे कि यह फंडामेंटल अंडरस्टैंडिंग लेकर के हम बाकी सब भाष्य है व्याख्या है उस सब में प्रवेश करें तो इसका एक आउटलाइन यदि हम समझ लेते हैं वेदांत सार का तो हमारे लिए बहुत अच्छा होगा तो यह पूरा मैंने स्टडी मटेरियल उस समय डेवलप किया था आप देख सकते हैं मैं बाद में आपके साथ में पीडीएफ भी शेयर करूंगा अनफॉर्चूनेटली राजकोट से मेरा पोस्टिंग हो गया तब से लेकर के मैंने इसको ज्यादा डेवलप नहीं कर पाया हूं किंतु जितना भी है उसमें से थोड़ा सा हम आज देख लेते हैं बिकॉज कि हम लोग ऑलरेडी इसके बारे में डिस्कस कर रहे थे इसलिए देखिए कि वेदांत सार यानी कि बेसिकली वेदांत क्या कहता है वेदांत कहता है कि इस जगत में ब्रह्मण ही है कोई भी वेदा स्कूल ऐसा नहीं कहेगी कि ब्रह्मण के अलावा और कुछ है ब्रह्मण के अलावा माया है किंतु फिर ब्रह्मण के साथ में माया का क्या रिलेशन है उसी को देखना है बेसिक जो चैतन्य है चैतन्य से ब्रह्मण के भीतर में ही है ब्रह्मण के ऊपर में अभी मैं अद्वैत वेदांत बिकॉज की यह वेदांत सार अद्वैत वेदांत की लीनियस की है यह किताब अद्वैत वेदांत के बारे में ही बात करेंगे अद्वैत वेदांत कहता है कि माया का ब्रह्मण के ऊपर में अध्यारोपण है कि रास्ते के ऊपर में आप अंधेरे में जाते हैं तो रस्सी पड़ी हुई है अंधेरे में रस्सी की वजह आपको सर्प दिख गया सांप दिख गया तो यह सांप जो है रस्सी की वजह देखना वो रस्सी के ऊपर में अज्ञान का अध्यारोपण रूपी की जगह साफ दिखाई दिया अभी अध्यारोपण का उपाय क्या है वो है अपवाद यानी कि अज्ञान आरोप करते हैं उसका टेक्निकल वर्ड है अथरो और अज्ञान को आप रिमूव करते हैं तो उसका टेक्निकल वर्ड है अपवाद अच्छा इसके बाद में ये जो ब्र यहां जो आपको नंबर दिखाई दे रहे हैं नंबर है सब सूत्र के नंबर है कि 32 नंबर सूत्र में यह अध्यारोपण नंबर सूत्र में अपवाद के बारे में बताया गया है फिर आगे क्या कहते हैं वस्तु ब्रह्मण है और अवस्ता है अज्ञान अज्ञान के वस्तु के ऊपर में ब्रह्मण के ऊपर में अज्ञान का अध्यारोपण सेप्ट यह लोग डिस्कस कर रहे हैं कि अज्ञान दो तरह का है एक तो है समष्टि अज्ञान दूसरा है व्यष्टि अज्ञान जब समष्टि अज्ञान का ब्रह्मण के ऊपर में होता है तो उसमें से जो प्रकट होते हैं वह है ईश्वर और ईश्वर के जितने भी गुण है वो हमको यहां पर बताए गए हैं सर्वज्ञ है सर्वेश्वर है सर्व नियंता है अव्यक्त है अंतर्यामी है जगत कारण है तो यह है ईश्वर तो ईश्वर आए कैसे अद्वैत वेदांत में तो ब्रह्मण के ऊपर में समष्टि अज्ञान का अध्यारोपण कहेंगे अद्वैत वेदांत की दृष्टि से टेक्निकल वर्ड में दीजिए तो ये हो गई टेक्निकल डेफिनेशन यहां है अध्यारोपण के ऊपर में अवस्तर यानी कि अज्ञान का आरोप किंतु अज्ञान के भी दो प्रकार है व्यष्टि और समष्टि तो यह व्यष्टि अज्ञान जब ब्रह्मण के ऊपर में अध्यारोपण अज्ञान यदि तो दो जिस तरह से ये मैक्रो कजम और माइक्रो कजम स्वामी जी ने बताया था मैक्रो कजम अर्थात कि कॉस्मो तो ये कॉस्मिक इग्नोर जब ब्रह्मण के ऊपर में सुपरकॉन्शियस निस के ऊपर में वो उसका एक लेयर बनता है उसका एक आवरण होता है तब कहीं जाकर के ईश्वर प्रकट होते हैं और यह जो व्यष्टि कॉस्मो यानी कि अ कॉस्मो मैक्रो कजम और माइक्रो कजम ये जो माइक्रो कजम अर्थात कि ये व्यष्टि अज्ञान है वो जदी ब्रह्मण के ऊपर में आरोपित होगा तो उसमें से जीव आएगा तो ये हो गया बेसिक विज्ञान इसमें बहुत कुछ है मैंने जैसे कहा कि 38 सूत्र तक ही मैं गया हूं इस फ्रेमवर्क को वहां पे मोर देन 100 सूत्र है 100 से भी ज्यादा है तो वो मैं एक बार ये पूरा फ्रेमवर्क रेडी हो जाएगा हम उसको बड़ा अच्छे से ध्यान से देखेंगे किंतु ये मैंने आज इसीलिए बताया क्योंकि ऑलरेडी हम ठाकुर का वो जो स्टडी कर रहे थे ठाकुर के बारे में हम बात कर रहे थे तो अभी देखिए कि ठाकुर जिस तरह से ब्रह्मण और शक्ति इन दोनों को डिफाइन करते हैं और यहां पे ब्रह्मण और ईश्वर इन दोनों को किस तरह से डिफाइन किया गया है ईश्वर आता है समष्टि अज्ञान का अध्यारोपण से तो प्रश्न होगा कि क्या ईश्वर अज्ञान में से प्रकट होते हैं यह एक इरिटेटिंग क्वेश्चन हो सकता है जो कि ईश्वर में श करते हैं उन लोगों के लिए तो यहां पर किंतु जो है वह अद्वैत वेदांत तो इसी तरह से समझाता है किंतु देखिए कि ठाकुर का किस तरह से डेफिनेशन है ठाकुर अज्ञान शब्द समष्टि अज्ञान शब्द इनको बीच में लाते ही नहीं है अद्वैत विदान में जिसको अज्ञान जो है उसको माया भी कहा गया है तो यह अज्ञान या माया की जगह ठाकुर सीधे ही शक्ति तत्व को लेकर आते हैं और फिर कहते हैं एक एक है कि जब स्थिर अचल होते हैं तब ब्रह्मण कहता हूं कार्यरत होते हैं सृष्टि स्थिति प्रलय करते हैं हमारे हृदय में जब निवास करते हैं तब मैं उनको शक्ति कहता हूं तो यहां पर यह दो मेजर डिफरेंस है ठाकुर सीधे ही ब्रह्मण और शक्ति ये दो एस्पेक्ट के बारे में बात करते हैं जबकि अद्वैत वेदांत कहता है कि ब्रह्मण और अज्ञान दो है फिर अज्ञान के दो प्रकार है एक समष्टि अज्ञान एक व्यष्टि अज्ञान समष्टि अज्ञान जब ब्रह्मण के ऊपर में अध्यारोपण जब अध्यारोपण की हमारे भीतर में जो चैतन्य है वह आता है सो दिस इज अ मेजर डिफरेंस बिटवीन व ठाकुर सेज एंड व्ट अद्वैत वेदांत सेज तो इसको हमने थोड़ा सा देखा अच्छा अभी अद्वैत वेदांत के बारे में किंतु हम ज्यादा डिस्कशन तभी करेंगे जबकि यह मेरा जो फ्रेमवर्क है वो कंप्लीट हो जाए एक बार तो जिससे कि क्या होगा कि हम बड़ा ही सिस्टमिकली इसको स्टडी कर पाए तो फिलहाल हम लोग ठाकुर जो कहते हैं वहां पर लुट जाते हैं मैं इस प्रेजेंटेशन को स्टॉप कर देता हूं अच्छा अभी हम ठाकुर क्या कह रहे थे उसके बारे में बात कर रहे थे तो फिर से एक बार बोल लेता हूं ठाकुर क्या कहते हैं ब्रह्म और शक्ति अभेद एक के मान ले आर एकटी के मानते हुए ब्रह्म और शक्ति अभद है एक को स्वीकार करने से दूसरे को स्वीकार करना ही पड़ेगा जेमन अग्नि आर तार दाही का शक्ति जैसे कि अग्नि है और उसकी दाही का शक्ति है दे देखिए ठाकुर जिस तरह से वेदांत समझाते हैं उसमें अब जैसे कि शंकराचार्य का जो अद्वैत है उसमें जो सबसे फेमस उदाहरण है वो है सर्प और रज्जू का ये साप है एक एक तो रस्सी है और उसके ऊपर में साप का एक आभास होता है और ठाकुर का जो सबसे फेमस उदाहरण है अग्नि और तार दहि का शक्ति यथा नेर दहि का शक्ति ही रामकृष्ण ने स्थिता किया जोक मां शारदा देवी का श्लोक है तो अग्नि जद आप प्रकट करेंगे तो साथ में ही अग्नि का ताप अग्नि की गर्मी या तो अग्नि की एनर्जी वो भी आप अनुभूत करेंगे तो यहां पे ठाकुर ब्रह्मा और शक्ति को इस तरह से समझा रहे हैं शक्ति कोई ब्रह्मण के ऊपर में अज्ञान आरोपित होकर के नहीं बनी है ब्राह्मण का ही एक गुणधर्म है एक क्वालिटी है कोई भी तरह का पदार्थ हो कोई भी चीज हो उन सबके कुछ ना कुछ गुणधर्म होते हैं यह सब हम विज्ञान में पढ़ते थे जब स्कूल में थे तो इसका गुणधर्म क्या है उसका गुणधर्म क्या है वो सब समझाते थे तो यहां पे भी ब्राह्मण का गुणधर्म है शक्ति ब्राह्मण होने से ही शक्ति प्रकट होगी ही होगी तो ये है ठाकुर का एक्सप्लेनेशन अग्नि मानली दहि का शक्ति मानते हुए दाही का शक्ति छाड़ अग्नि भावा जायना अग्नि के बाद दिए दहि का शक्ति भावा जाना अग्नि को स्वीकार करेंगे तो अग्नि की जो ऊर्जा है उसको भी स्वीकार करना पड़ेगा बिना अग्नि के ऊर्जा नहीं है बिना ऊर्जा के अग्नि नहीं है तो यह है ठाकुर का एक्सप्लेनेशन अभी इसके बाद में हम थोड़ा सा आगे बढ़ते हैं अभी ये बैकग्राउंड तो पता है कथामृत में किस तरह से यह प्रसंग चल रहा है केशव सैन ब्राह्मण समाज हों को लेकर के दक्ष दक्षिणेश्वर आए हैं और सब लोग एक नौका में बैठ कर के जहाज में बैठ कर के गंगा पर विचरण कर रहे हैं यह बड़ा ही सुंदर एक क्या कहेंगे कि एक दृश्य हमारे सामने खड़ा होता है और हम सोचते भी है कि यदि हम उस ब्रह्म भक्तों में से एक होते या तो फिर ठाकुर के साथ में जिस तरह से मास्टर महाशय थे उनमें से कोई एक होते तो किस तरह से हमको भी उस जहाज में घूमने को मिलता किंतु चलिए जहाज में यदि नहीं बैठ सके तो एटलीस्ट उसके बारे में बात करके उसके बारे में चर्चा कर अपने मन को सदरा देते हैं तो ठाकुर की बात आगे चल रही है ठाकुर क्या कहते हैं आध्या शक्ति लीलाम आध्या शक्ति है लीलाम सृष्टि स्थिति प्रलय कर छन सृष्टि स्थिति और प्रलय कर रही है तार नाम काली काली ब्रह्म ब्रह्म काली इस आध्या शक्ति का नाम ही काली है काली ही ब्रह्म है और ब्रह्म ही काली है एकही वस्तु जखन एकही वस्तु जखन तिनी निष्क्रिय सृष्टि स्थिति प्रलय कोनो काज करछ ना एक कथा जखन भावी तखन ता के ब्रह्म बोले कोई एक ही चीज है जब वह निष्क्रिय है सृष्टि स्थिति प्रलय कुछ भी नहीं कर रही कुछ भी नहीं हो रहा यह जब मैं सोचता हूं तब मैं उनको ब्रह्म कहता हूं जब जखन तिनी सब कार् कर तखन ता के काली बोली शक्ति बोली जब ये सब कार्य कर रही है तब मैं उनको काली या शक्ति कहूंगा एक ही व्यक्ति नाम रूप भेद एक ही चीज है नाम और रूप का भेद है देखिए कि किस तरह से हम इस पूरी बात को समझ रहे हैं ठाकुर जिस तरह से शक्ति को समझा रहे हैं और वेदांत में किस तरह से माया समझाया है एक सूक्ष्म डिफरेंस हमको दिखता है माया माया के भीतर में फिजिकली अज्ञान है और अज्ञान में से यह माया प्रकट हुई है जबकि यह शक्ति है शक्ति ब्रह्मण का ही दूसरा स्वरूप है या तो फिर ब्रह्मण ही है ब्रह्मण जब स्थिर है तो ब्रह्मण है और कार्यरत है तब वो शक्ति है दिस इज अ वेरी सटल किंतु अ वेरी पावरफुल डिफरेंस काली ही ब्रह्म है ब्रह्म ही काली है एक ही वस्तु ज जब वो निष्क्रिय है सृष्टि स्थिति प्रलय कोई काम नहीं कर रही यह जब सोचता हूं तब मैं उनको ब्रह्मा कहता हूं जब यह सब कार्य करते हैं तब काली कहता हूं शक्ति कहता हूं एक ही व्यक्ति नाम रूप भेद एक ही चीज है सिर्फ नाम और रूप का फर्क है जैसे कि अभी यह पुलिस इंस्पेक्टर है वह जब घर में आ जाएगा वह अपने सामान्य कपड़े पहने का घर के कपड़े तो उसका उसको हम एक सामान्य व्यक्ति कहेंगे अभी वोह नौकरी करने के लिए जाता है पुलिस की वर्दी पहनता है तो व उसको हम पुलिस इंस्पेक्टर कहता है यदि वोह सोल्जर है और यदि वो सोल्जर की वर्ती पहनता है तो हम उनको सैनिक कहते हैं यदि वो टीचर है और टीचर के कपड़े पहन कर के क्लासरूम में जाकर के बच्चों को सिखाते हैं तब हम उनको टीचर कहते हैं यदि वो बिजनेसमैन है वो बिजनेस सूट पहन के वो जो कोई कॉन्फ्रेंस में जाता है अपनी नौकरी करने के लिए जाता है तब हम उनको सीईओ कहेंगे ऐसा कुछ चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वगैरह वगैरह तो व्यक्ति तो एक ही होते हैं अलग-अलग रोल अलग-अलग जब कार्य जब करता है तब अलग-अलग नाम से हम उसको चिन्हित करते हैं यदि ये टीचर है ना कि ये वो सोल्जर है ना कि वो एक एक सीईओ है व्ट एवर व्यक्ति एक ही है वो अपने जीवन में अलग-अलग तरह के कार्य करते हैं बहुत सारे लोग होते हैं उनको एक ही नौकरी करना या एक ही तरह का कार्य करना पसंद नहीं होता है तो वो लोग कुछ ना कुछ डिफरेंट डिफरेंट करते रहते हैं अपने जीवन के डिफरेंट डिफरेंट फेजेस में तो व्यक्ति तो एक ही था किंतु उसने अलग-अलग समय अलग-अलग कार्य किए हैं तो इसीलिए उसका अलग-अलग नाम हुआ है किंतु व्यक्ति है एक ही जमन जल और वाटर पानी जल वाटर और पानी एक पुकुरे तीन घाट एक घाटे हिंदू रा जल खाय तारा बोले जल एक तालाब है तालाब में विभिन्न घाट है घाट अ अर्थात की एक पत्थर के पगथला शय में नीचे उतर करके पानी को स्पर्श कर सकते हैं उसको कहते हैं घाट तो एक घाट में हिंदू लोग पानी पीते हैं और उसको वो कहते हैं जल दूसरे एक घाटे मुसलमान रा जोल खाए तारा बोले पानी दूसरे घाट पे मुसलमान लोग पानी पीते हैं और वो कहते हैं पानी और आर एक घाटे अंग्रेज रा जोल खाए तारा बोले वटर दूसरे एक घाट से अंग्रेज लोग पानी पीते हैं वो कहेंगे वोटर तीन एक केवल नाम तफा ये तीन एक ही है सिर्फ नाम ही अलग-अलग है ताके केव बोल छ अल्ला केव बोर्ड केव बोल ब्रह्मा केव काली के बोलचे राम हरि शिशु दुर्गा उनको कोई कहता है अल्लाह कोई कहता है गड कोई कहता है ब्रह्मण कोई कहता है काली कोई कहता है राम हरि जीसस या दुर्गा केशव सहस्य काली कतो भावे लीला कोर से कथा गुली एक बार बोलू केशव केशव सहस्य हस्य करके कहता है स्मित चेहरे से हस्य वदन कहता है कि काली कितनी तरह से लीला करती है वो बात आप एक बार बताइए अब देखिए किय केशव के शिष्यों का वो जो एक बड़ी कंप्लेन थी कि ठाकुर के पास जाकर के केशो कुछ भी नहीं बोल रहा है यहां पर टाउन हॉल में वक्त होता देता है लेक्चर देता है वहां पर वो सब न्यूजपेपर में आर्टिकल लिखता है किंतु जब ठाकुर सामने आ जाता है चुपचाप सुनता है ऐसा क्यों भाई तो ये ऐसा इसलिए क्योंकि केशव को पता था कि ठाकुर कौन है और वो खुद कौन है तो इतनी सारी पूरी चर्चा विचारणा इतनी आप देखेंगे इस चैप्टर में के केशव के कुछ ही सेंटेंस है ज्यादा नहीं है वो एक बार उसने वो भी प्रश्न करता है कि काली विभिन्न रूप से किस तरह की लीला करती है उसके बारे में बताइए श्री राम कृष्ण साहसी ठाकुर भी सस्त वदन कहते हैं तीनी नाना भावे लीला को छन काली विभिन्न रूप से लीला करती है तीनी महाकाली नित्य काली स्मशान काली रक्खा काली श्यामा काली मां ही है मां काली ही है महा काली नित्य काली स्मशान काली रक्षा काली और श्यामा काली महाकाली नित्य काली कथा तंत्र महाकाली और नित्य काली की बात तंत्र में है जखन सृष्टि होए नाई चंद्र सूरज ग्रहो पृथ्वी लोना नि बड़ो आधार तखन केवल मां निराकारा महाकाली महाकाल संगे विराज को छिले जब सृष्टि थी नहीं चंद्र सूर्य ग्रह पृथ्वी था नहीं जब घनघोर अंधेरा था निवड आधार घनघोर अंधेरा था तखन केवल मां निराकारा महाकाली तब सिर्फ मां निराकारा जिसका कोई आकार नहीं है वह महाकाली महाकाल के साथ में विराजमान थी महाकाल के साथ में वोह रह रही थी श्यामा काली अनेकता कोमल भाव श्यामा काली का थोड़ा सा कोमल भाव है वरा भय दयनी वर और अभय ये दोनों वो प्रदान करती है वर यानी कि आशीर्वाद अभय यानी कि रक्षा वो दोनों हमको देती है गृहस्थ बाड़ी ते तारी पूजा होई गृहस्थ के लोग गृहस्थ के घर में श्यामा काली की ही पूजा होती है जोखन महामारी दुर्भिक्ष होए रखा काली पूजा करते हुए जब महामारी या तो फिर दुर्भिक्ष हो अर्थात कि यह फेमिन अर्थक्वेक या तो फ्लड या तो फिर ये पानी का नहीं आना जिस तरह की ये सब महामारिचयादी है जिसके बार जिसके अगेंस्ट में लड़ने के लिए हमारे पास में कोई भी उपाय नहीं है इवोल्यूशन यदि स्टडी किया होगा तो यह साइंटिस्ट लोग कहते हैं कि ये एक्सटिंक्शन यानी कि मास एक्सटिंक्शन यह बीच-बीच में होता है जब भी कोई भी एक स्पीशीज डोमिनेंट हो जाती है पृथ्वी पर जैसे कि डायनासोर है एक समय था डायनोसोर का पूरा पृथ्वी पर राज था सबसे पावरफुल एनिमल सबसे पावरफुल जीव डायनोसोर ही थे किंतु धीरे-धीरे देखा गया कि डायनोसोर के बियोंड एक बेटर ऑर्गेनिस्ट म इवॉल्व हो रहा है इवोल्यूशन ऑलरेडी वो स्टार्ट हो गया था मैमल्स का मैमल्स और डायनोसोर में डिफरेंस क्या है मैमल्स का खून जो होता है हम लोग मैमल्स है तो हम लोगों का खून होता है वो गर्म होता है यानी कि हमारे भीतर में इनबिल्ट एसी है यदि बाहर का टेंपरेचर ठंडा होगा या गर्म होगा हमारे खून का जो टेंपरेचर है वो एक ही रहेगा मोर और लेस तो इससे कि एक इंटरनल थर्मोस्टेट मेंटेन होता है जबकि डायनोसोर होते हैं उनका खून ठंडा होता है उनके खुद का खून का कोई टेंपरेचर नहीं होता तो जब बाहर में टेंपरेचर बढ़ता है तो उनका भी इंटरनल टेंपरेचर बढ़ता है बाहर का टेंपरेचर कम होता है तो इंटरनल टेंपरेचर कम होता है अभी एक ऑर्गेनिस्ट सम है वो एक स्पेसिफिक टेंपरेचर रेंज में ही कार्य कर सकता है जैसे कि 35 36 डिग्री सेंटीग्रेड जो कि रूम टेंपरेचर जनरली कहा जाता है जिसको 35 है 36 में भूल गया एगजैक्टली कौन सा है तो जो भी है जिसको कि हम जनरली रूम टेंपरेचर कहते हैं वो बेस्ट है हमारे लिए फंक्शन करने के लिए किंतु इससे बहुत बढ़ गया या कम हो गया बहुत यानी इवन तीन च डिग्री भी बढ़ जाता है कम हो जाता है हमको पता है कितनी परेशानी होती है तो डायनोसोर बढ़ गए टेंपरेचर में या कम टेंपरेचर में बिल्कुल ही वे लोग सुश पत हो जाएंगे तो ये तो इवोल्यूशन का रास्ता नहीं है इवोल्यूशन ने ऑलरेडी यहां पे एक इंटरनल थर्मोस्टेट डेवलप कर दिया है तो अभी पुराने ऑर्गेनिस्ट सम है उसको तो खत्म कर देना पड़ेगा तो यह जो डिजास्टर होते हैं बीच-बीच में मास एक्सटिंक्शन तो पृथ्वी पर एक उल्कापात हुआ एक एस्टेरॉइड आ कर के पृथ्वी से टकराई मेटराइड तोय जो टकराई उससे जो भयानक तूफान खड़ा हुआ उसमें जितने भी ये ठंडे खून वाले या तो फिर ये जिसके भीतर में इंटरनल थर्मोस्टेट नहीं था टेंपरेचर का जो भयानक वेरिएशन खड़ा हुआ कहीं पर भयानक ठंडी का भयानक गर्म तो उससे डायनासोर का एक्सटिंक्शन हो गया और जिसके भीतर में इंटरनल थर्मोस्टेट था हम लोग मेमल हम लोग इस भयानक विपद से बच गए मास एक्सटिंक्शन से बच गए किंतु मान लीजिए कि आज कल कहीं जाकर के और हमारे से भी ज्यादा एडवांस ऑर्गेनिस्ट म इवॉल्व होता है तो फिर जब नया डिजास्टर होगा तो उस डिजास्टर में हम लोग एक्सटिंग हो जाएंगे किंतु यह जो नया बेटर डेवलप बेटर इवॉल्वड ऑर्गेनिस्ट म है वो बच जाएगा तो ये इवोल्यूशन की साइकिल तो हमेशा चलती रहती है अभी क्योंकि हम मनुष्य हैं हम लोग आत्मरक्षा करने के लिए बहुत सारे उपाय खोज लेते हैं ये जो फेमिन कहिए ना कि अर्थक्वेक कहिए ना कि ये जितने भी ये नेचुरल डिजास्टर है हम लोग कुछ ना कुछ उसका उपाय करते हैं आज मनुष्य इतना असहाय नहीं है जितना कि कल था ये सुनामी कहो कुछ भी कहो जैसे ही कहां पे एक जगह पे डिजास्टर होता है सब जगह से वो रिलीफ एक्टिविटी स्टार्ट हो जाती है सब तरह की गवर्नमेंट एनजीओ जाकर के हेल्प करता है किंतु कभी-कभी ऐसा एक समय आता है कि ईश्वर के अलावा और कोई उपाय भी नहीं रहता तो उस समय में श्यामा काली की पूजा होती है जो कि हमको इस तरह के प्राकृतिक दुर्घटनाओं से हमारी सहाय करती है हमारी रक्षा करती है उस समय रक्षा काली की पूजा करनी होती है ठाकुर कहते हैं जब प्राकृतिक दुर्घटनाएं आती है तब रक्षा काली की उपासना होती है स्मशान काल संहार मूर्ति स्मशान काली की संहार मूर्ति है शब शिबा डाकिनी जोगिनी मधेश मशाने ऊपर थाके शब और शिवा डाकिनी और योगिनी इनके साथ में स्मशान में रहती है रुधिर धारा गलाए मुंडमाला रुधिर जो रक्त की धारा बह रही है गले में मुंड माला है अर्थात की कटे हुए सरों की माला है कटते नर हस्ते कमरबंध जो कमर होती है उसमें हाथ कटे हुए हाथों की कमरबंध पहने हुए हैं जखन जगत नाश होए महाप्रलय होए तखन मां सृष्टि बीज सकल कुड़िए राखे अच्छा तो ये जो है स्मशान काली अभी यहां पे जिस तरह से वो ईश्वर के विभिन्न विभिन्न रूप किस तरह से होते हैं ठाकुर बताते हैं महा श्यामा काली के किस तरह से श्यामा काली का कोमल भाव है रक्षा काली प्राकृतिक विपद से रक्षा करती है और जो स्मशान काली है स्मशान में रहती है तांत्रिक लोग या अघोरी जो कि स्मशान में जाकर के उपासना करते हैं वो इस तरह से स्मशान काली की उपासना करते हैं जो जैसे कि वो डाका तेर काली वो जो था ना तेलो भेलो माठ में तो तेलो भेलो अर्थात की वो कामर पुकुर और जयराम बाटी और दक्षिणेश्वर आने के रास्ते में एक बड़ा ही वीरान एक मैदान था उस समय वीरान था आज तो वहां पे वो जो काली मंदिर है वो जहां पर ये लोग नरबली देकर के फिर ये डकती करने के लिए जाते थे वहां पर मंदिर भी हो गया है और वो मंदिर के लिए डोनेशन की एक अपील राजकोट में आई थी कि ये डाका तेर काली जहां पे जहां पे वो पूजा करके जो डाकू लोग डके द करते थे और वही में से एक डके जिसको कि जिसकी मुलाकात मां के साथ में हुई थी जब मां अकेली उस तेलो पेलो के मैदान में जा रही थी तो वो मंदिर अभी हमारे हाथ में है हमको उसका हम लोग उसके करता है और उसकी रक्षा मने उसका मेंटेनेंस के लिए उसका डेवलपमेंट के लिए हमको पैसे चाहिए ऐसा करके एक अपील आई थी वो राजकोट में और हमने थोड़े से पैसे भी भेजे थे तो ये ये स्मशान काली जोक भयावह स्वरूप है और जो लोग एक तंत्र साधना करते हैं स्मशान में जाकर के वे लोग स्मशान काली की उपासना करते हैं और स्मशान काली का रूप भी कैसा भयावह है रुधिर की धारा बह रही है गले में कटे हुए नर मुंड अर्थात की मनुष्य के सर का हार है और कमर में एक कटिबंध पहना हुआ है किंतु किस चीज का तो कटे हुए हाथों का बना कर के तो जब भी एक स्मशान में जाकर के उपासना होती है तो स्मशान काली की जखन जगत नाश होए महाप्रलय होए तखन मा सृष्टि बीज सकल कुड़ी खें जब जगत का नाश होता है महाप्रलय होता है तब मां सृष्टि के बीज सब इकट्ठा करके अपने पास में रख देती है गिन्नी काछ जेमन एकटा नता कतार हाड़ी थाके जिस तरह से एक गृहिणी के पास में एक छोटी सी एक हांडी यानी कि छोटा सा एक घट होता है जिसमें वो सब तरह की चीजें उसमें रखती है आर सेही हांडी दे गिन्नी पांच रकम जिली स् तुले राखे और उसी घट के भीतर में हांडी के भीतर में वो गृहिणी पांच तरह की विभिन्न चीजें रखती है केशव और शकर हास्य यह बात सुनकर के केशव और बाकी सबने हास्य किया ठाकुर सहस्य आगे कहते हैं हां गो हां गिन्नी देर ही रकम एक हाडी था के गृहिणी लोगों के पास में इस तरह से एक घट रहता है एक हांडी रहती है भीतर समुद्र फेना नील बड़ी छोटो छोटो पटली बादा शोशा बीची कुमड़ा बीची लाव बीची ईशव राखे दरकार होले बार कोरे जिसके भीतर में य अभी यह सब चीजें क्या है उसका हिंदी मुझे पता नहीं देखना पड़ेगा मैं वैसे ही बोल जाता हूं कि वो छोटी-छोटी चीजें रखती है जिसमें कि ये लवड़ा बीची कुमड़ा बीची लाव बीची मुझे लगता है विभिन्न तरह के सब्जियों के बीज है ऐसा मुझे लग रहा है मैं थोड़ा रेफर करना पड़ेगा यह सब उसमें रखती है दरकार होले बार कोरे जब आवश्यकता होती है तो उसमें से बाहर करती है मा ब्रह्मम सृष्टि नाशर पर ई रकम सब बीज पुड़ राखे मां ब्रह्मम सृष्टि के विनाश के बाद में इसी तरह से सब बीज यानी कि यह सीड है वो इकट्ठा करके कलेट करके रखती है सृष्टि पर आध्या शक्ति जगत भीतर थाके सृष्टि के बाद में आध्या शक्ति जगत के भीतर में ही रहती है जगत प्रसव करेन जगत का प्रसव करती है आबार जगते मध्य थाके और फिर जगत के भीतर में रहती है वेद आछे उना भीर कथा वेद में उर्ण ना भी अर्थात की ये स्पाइडर उसकी बात है माकड़ सा आर तार जाल स्पाइडर और उसकी जाल माकड़ सा भीतर थे के जाल बार कोरे अबार नीचे सी जाले ऊपर थाके स्पाइडर यह जो है वो अपने भीतर में से जाल बनाता है और यह जाल के ऊपर में ही वो रहता है ईश्वर जगत आधार आधे ई ईश्वर जगत के आधार और आधे दोनों है अच्छा यहां पर जो देखा कि ठाकुर कहता है कि मां ब्रह्म मई क्या करती है जब प्रलय होता है तो सृष्टि के बीच है वो कले करके अपने पास में रखती है और जब सृष्टि फिर से नई सृष्टि प्रारंभ होती है सृष्टि स्थिति प्रलय की ये जो साइकल है अपने हिंदू धर्म में काफी यह स्वीकृत है सभी लोग इसको इसके बारे में जानते हैं कि सृष्टि प्रथम होती है फिर उसका पालन होता है फिर उसका संहार भी होता है और जो तीन देवता है हिंदू धर्म के मुख्य देवता जिनको कहा जाता है कि ये जो ब्रह्मा सृष्टि जगत की सृष्टि करते हैं भगवान विष्णु है जगत का पालन करते हैं भगवान शिव है जगत का संहार करते हैं यहां पे किंतु ठाकुर ब्रह्मा विष्णु और महेश की उपमा देने की वजह मां की ही मां काली की उपमा देते हैं कहते हैं कि मां की तरह मां जैसे संतान को जन्म देती है संतान को प्रसव करती है वैसे ही मां काली जगत को प्रसव करती है जगत को जन्म देती है और आखिर में जगत का ही संहार करती है वो जो ठाकुर का एक जो बड़ा ही सुंदर एक सुंदर तो नहीं किंतु एक फेमस एक दर्शन था कि वह गंगा के किनारे के कहीं पर बैठे हुए थे देखा कि एक सुंदर युक्ति गंगा में से बाहर आई और फिर उसने एक बच्चे को जन्म दिया फिर एक भयावह स्वरूप धारण करके इस युवती ने बच्चे का भक्षण कर दिया बच्चे को खा गई तो यह जन्म भी देना सौम्य रूप में और यह विकट रूप में बच्चे का भक्षण भी कर देना जो कि जनरली ये ब्रह्मा विष्णु और महेश तीन देवताओं को तीन तरह के फंक्शन दिए गए हैं यहां पे ठाकुर मां काली को एक ही देवी को तीनों फंक्शन अलॉट करते हैं तीनों गुण धर्म एक ही मां काली को देते हैं कहते हैं वही सृष्टि करती है वही पालन करती है और वही संहार करती तो ये और फिर यहां पर जो यह बीज का जो उदाहरण दिया है कि सृष्टि के प्रलय के समय सब बीज होते हैं मां कलेक्ट करती है और नई सृष्टि जब प्रारंभ होती है तो उसी बीच में से नई सृष्टि को रचित करती है तो यहां पर जो हम स्वामी जी का वोह जो पढ़ रहे थे स्वामी शिष्य संवाद में से स्वामी जी क्या कहते हैं कि पहले तो होता है अनादि नाद ब्रह्मण में से अनादि नाद प्रकट होता है अनादि नाद में से ओमकार प्रकट हो होता है शब्द गर्भ जितने भी शब्द है उन सबका गर्भ रूप गर्भ स्वरूप ओमकार नाथ ओमकार में से सब तरह के शब्द प्रकट होते हैं ये शब्द क्या है कांसेप्ट है ये जगत जिस चीज का बना हुआ है इस जगत के भीतर में जितनी भी चीजें है ये वस्त्र है या देह है ना कि ये पशु है पक्षी है ये पेड़ है पौधे है पूरे जिस चीज का ये जगत बना हुआ है सभी चीजें शब्द रूप में इस ओमकार में से प्रकट होते हैं फिर यही शब्द स्थूल देह धारण करके कोई चीज बनाते हैं जैसे कि गाय शब्द में से स्थूल गाय प्रकट हुई पेड़ शब्द में से स्थूल पेड़ प्रकट हुआ और जब प्रलय होता है तब रिवर्स में प्रलय यानी कि समाधि के बारे में जो स्वामी जी कहते हैं कि स्थूल जगत अदृश्य हो जाएगा फिर वह सूक्ष्म शब्द के भीतर में चला जाएगा शब्द शब्द गर्भ रूप ओमकार में चला जाएगा ओमकार अनादि नाद में मिल हो जाएगा अनादि नाथ ब्रह्मण के भीतर में विलीन हो जाएगा जैसे कि ठाकुर कहते हैं कि संध्या गायत्री में लय होती है गायत्री ओमकार में फिर ओमकार ही ब्रह्मण में लय होता है जब कीर्तन होता है तब पहले तो लोग सब निताई हमार माता हाथी निताई अर माता हाथी इस तरह से कीर्तन करते हैं निताई अर्थात की भगवान नित्यानंद माता हाथी अर्थात की मत हस्ती है पाव में जब आ जाते हैं तो मत हस्ती की तरह वो कीर्तन करते हैं तो निताई अमार माता हाथी फिर जब कीर्तन चलता जाता है चलता जाता है भाव बढ़ता जाता है यानी कि संभाव समाधि की ओर जाते हैं तो सिर्फ निताया मर माता हाथी में से माता हाथी निताया मर माता हाथी बस इतना ही रहेगा फिर माता हाथी में से सिर्फ हा और हा कहके समाधि हो जाएगी तो यह यह सृष्टि स्थिति प्रलय या तो फिर यह समाधि की और यात्रा और फिर समाधि में से वापस आने की यात्रा इन दोनों का कितना सुंदर रूप से ये पैरेलल उदाहरण है क्योंकि हमने वेदांत में देखा कि अज्ञान दो तरह के हैं समष्टि अज्ञान और व्यष्टि अज्ञान समष्टि अज्ञान यानी कि कॉस्मिक इग्नोर और ये इंडिविजुअल इग्नोर कॉस्मिक इग्नोर हैंस जब ब्रह्मण के ऊपर में आरोपित होता है अध्यारोपण की रचना होती है ईश्वर की रचना होती है और जब ये इंडिविजुअल इग्नोर का ब्रह्मण के ऊपर में आरोप होता है तो हम इंडिविजुअल मनुष्यों की रचना होती है जीवात्मा की रचना होती है जीव इस स्थूल देह को चेतन प्रदान करता है यानी कि यह प्रलय जो होगा सृष्टि स्थिति प्रलय कीय जो साइकल है दो लेवल पे होगी एक तो कॉस्मिक सृष्टि स्थिति प्रलय एक एक तो है इंडिविजुअल सृष्टि स्थिति प्रलय कॉस्मिक सृष्टि स्थिति प्रलय कैसे होता है तो यह ठाकुर ने जिस तरह से बताया कि मां काली ही जगत का संहार करती है जगत के बीच अपने पास में एक हांडी में रख देती है फिर नए जगत की रचना होने के समय इसी हांडी में से वो बीज बाहर निकाल कर के एक के बाद एक जगत की रचना करती है इसी बात को स्वामी जी ने थोड़ा सा टेक्निकल करके बताया था कि पूरा जगत जो है शब्द का बना हुआ है शब्द में से सूक्ष्म शब्दों में से स्थूल जगत प्रकट होता है तो प्रलय होने के समय कॉस्मिक अभी ये इंडिविजुअल प्रलय की बात है ये इंडिविजुअल प्रलय जब होता है यानी कि समाधि प्राप्त होती है तो हम देखेंगे कि यह पूरा जगत स्थूल में से सूक्ष्म की ओर सूक्ष्म से यह ओमकार ओमकार से अनादि नाथ अनादि नाथ से ब्रह्मण की ओर जाता है तो ये दोनों पैरेलल लेवल पे सृष्टि स्थिति प्रलय होते हैं सृष्टि प्रलय जिसको हम समाधि कहेंगे और जगत के बारे में वो प्रलय कहा जाएगा हमारे बारे में वो समाधि कहा जाएगा तो ये दोनों एक पैरेलल चलते हैं और दोनों देखिए कि किस तरह से डिफरेंट डिफरेंट विचार देकर के इस बात को समझाते हैं और वेदांत भी है वेदांत भी अपने विचार रखता है तो अभी ये जब मेरा वो सर का वो कंप्लीट हो जाएगा फ्रेमवर्क में ट्राई करूंगा कि थोड़ा सा समय निकाल करके कंप्लीट कर दूं तो उसको भी हम देख लेंगे जिससे कि हमको पता चलेगा कि ठाकुर और स्वामी जी जिस बात को कहते हैं उसको अपना ट्रेडिशनल वेदांत किस तरह से कहता है उसके बाद में जब भी हम डिस्कस करेंगे तीन पैरेलल ट्रैक पर डिस्कशन होगा कि वह वेदांत में इस तरह से है ठाकुर इस तरह से कहते हैं स्वामी जी इस तरह से कहते हैं तो आज यही तक शाति ह तत्स श्री राम कृष्णा अभी जैसे कि द्वैत अद्वैत और विशिष्ट अद्वैत य तीनों में कहा जाता है कि जगत क्या ईश्वर से अलग है जैसे कि जगत को आप प्रसव करके अभी जैसे मां बच्चे को प्रसव करती है तो बच्चा तो एक सेपरेट ही हो जाता है ना मां से मां के साथ में वैसे तो कोई कनेक्शन नहीं रहता है अभी ये हो गया फिर दूसरा की पता है कंजो ट्विंस कंजो चाइल्ड होते हैं बच्चे का जन्म होता है तो दो बच्चे किंतु एक साथ में जुड़े हुए रहते हैं इसे एनमल कहा जाता है और डीएनए में म्यूटेशन हो करके देखा होगा इस तरह के फोटो देखे होंगे दो सर है एक साथ में जुड़े हुए हैं तो ये कंजो ट्विंस इसको कहा जाता है तो ये हो गया विशिष्ट दवे जब मां बच्चे को प्रसव करती है और प्रसव करके बच्चा मां से बिल्कुल अलग हो जाता है ये हो गया धत अब ज कंजो ट्विन जो होते हैं आधे आधे जुड़े हुए हैं वो हो गया विशिष्ट यानी कि ब्रह्मण के भीतर में ही डिवीजन है हालांकि है ब्रह्मण एक ही ऑर्गेनिस्ट म एक ही है किंतु आपको दो सर दिखाई देंगे इस तरह से ब्रह्मण है कि तो भीतर में डिवीजन है और फिर यह जैसे कि रज्जु सर्प है सर्प है ही नहीं रज्जु ही है वो हो गया अद्वैत ये जो आधार और आधे दोनों एक ही है यानी कि अद्वैत टर्मिनोलॉजी है आधार यानी कि जो आधार प्रकट करता है आधे जो आधार जिसके ऊपर में आधार खा जाता है यानी कि जो प्रस्तुत करता है और जिसको प्रसव दिया गया है यह दोनों एक ही है रज्जु सर्प एक ही है तो आधार आधे एक ही है इसका अर्थ है कि रज्जु सर्प एक ही है और यह अद्वैत वेदांत रज्जु है आधार और यह सर्प है आधे या तो फिर मुझे एजेक्ट देखना पड़ेगा कि आधार किसको कहते हैं आधे किसको कहते हैं किंतु बेसिकली एक ही चीज है कि एक चीज जिसके जिस उसके बेस करके दूसरी चीज उसके ऊपर में दिखाई देती है तो दोनों एक ही है उसका अर्थ है अद्वैत ठीक बहुत सारे लोग जो उदाहरण देते हैं ना कि अभी जैसे कि ये दूध में से दही बना तो दूध तो परिणत हो गया पूरा दूध रहा नहीं अभी दही ही रहा है दूध तो अदृश्य हो गया तो इसको लेकर के ये बहुत सारी चर्चा विचारणा चलती है कि ब्रह्मण का स्वरूप क्या है दूध में से दही बनता है कि दूध के ऊपर में आसित हो कर के नहीं दिखता है क्या है काली द मदर मेरा फेवरेट पोयम है और उसके ऊपर में काफी चिंतन भी मैंने किया है यह बात सही है व उस पोयम के ऊपर में क्लास करेंगे फिर व प्रॉब्लम वही होगा कि एक एक लाइन पर एक क्लास हो जाए वही जो ठाकुर का वही उदाहरण जो कि मैंने कहा विजन कि वो एक स्त्री के रूप में सुंदरी स्त्री के सौम्य स्त्री के रूप में बच्चे को प्रसव करती है भयावह स्वरूप धारण के उसी को भक्षण कर लेती है तो अभी ये जो अब्राहम की रिलीजन है और हम में ये कितना बड़ा डिफरेंस है उनकी थिरी के अनुसार एक बार पाप कर लिया तो कर दिया फिर यू विल बी गोइंग टू इटरनल हेल जो एक बार पुण्य कर लिया तो कर लिया फिर यू विल गो इंग टू इटरनल पैराडाइस तो ये इटरनल हेल और इटरनल पैराडाइस अपने यहां पे नहीं है वो तो फिर हमने एक बार गलती कर दिया तो फिर तो हम क्या हमेशा के लिए भुग देंगे ये तो बड़ा बयान है ना कि भाई तो वो अपने यहां पर इसलिए स्वामी जी कहते है अपने यहां प सीन का कांसेप्ट नहीं है अपने यहां पर गलती का कांसेप्ट है वी मेड अ मिस्टेक बट वी हैव टाइम इनफ टू रेक्टिफाई इट परमानेंट हो गया तो सीन हो गया पाप हो गया किंतु जिसको आप रेक्टिफाई करते हैं वो तो एरर हो गई तो ये टर्मिनोलॉजी का भी कितना बड़ा डिफरेंस है यू हैव टाइम टू रेक्टिफाई दैट इज वई इट इज एन एरर देर इज नो टाइम टू रेक्टिफाई एक बार किया सो हो गया बात खत्म हो गई तो ट बिकम सीन एक्चुअली इसको बाद में जब पौराणिक साहित्य जब डेवलप हुआ तब यह सब शब्दों का प्रयोग ज्यादा होने लगा क्योंकि लोगों को थोड़ा सा तो डर दिखाना है कि पाप करेंगे तो नर्क में जाएंगे पुण्य करेंगे तो स्वर्ग में जाएंगे तो वो सब कांसेप्ट है अपने यहां पे किंतु फिर क्या है पता है क्षिणे पुण्य मृत्य लोके विशंपोशी देवताओं को जद मुक्ति चाहिए तो उनको भी मनुष्य योनि धारण करनी पड़ेगी यानी कि ये लोक पुण्य लोक पाप लोक स्वर्ग नर्क अपने यहां पे है किंतु देयर आर इन लिमिटेड सेंस अल्टीमेटली तो मुक्ति ही है ये सब देर आर वे वे स्टेशंस बीच-बीच में स्टेश आते हैं किंतु उसको भी पार तो करना ही है अल्टीमेटली यह जो शब्द जिसको स्वामी जी कहते हैं कि शब्द के रूप में सब कुछ प्रिजर्व होता है शब्द ओमकार में विलीन हो जाता है ओमकार अव्यक्त अनादि नाद में फिर यह पूरा रिवर्स प्रोसेस चलता है अनादि नाद में से ओमकार ओमकार में से शब्द तो ये शब्द को या तो फिर ओमकार को हम बीच के रूप में गिन सकते हैं एक छोटी सी हंडी में रखना है ना सभी शब्द छोटी स हंडी में कहां से आएंगे ओमकार में डाल दिया तो वो जिप फाइल होती है ना आजकल वो वो बड़ी फाइल को छोटी साइज करनी है ट्रांसपोर्ट करने के लिए आप जिप बना देते हैं जिप फाइल तो ऐसा ही ये जिप फाइल बना कर के ओमकार के भीतर में रख दिया तो पॉकेट में भी रख सकते हैं अनजिप करके चला देंगे