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Sri Ramakrishna Lila Prasanga ·

साधक भाव : अवतरणिका || श्रीरामकृष्ण लीलाप्रसंग : स्वामी सारदानन्द रचित || 21 Mar 2025

prayer

ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री श्री राम कृष्ण लीला प्रसंग स्वामी शारदानंद जी महाराज द्वारा लिखित भाग दो साधक भाव उसकी अवतरण का हम देख रहे थे कि किस तरह से स्वामी जी के स्पर्श मात्र से स्वामी जी को स्पर्श करने मात्र से अभेदानंद जी के जीवन में ठाकुर के डायरेक्ट डिसाइल काली महाराज के जीवन में किस तरह का परिवर्तन आया तो उस हम आगे थोड़ा सा पाठ करते हैं हां ऑलरेडी हमने देख लिया कि स्वामी विवेकानंद में घटना यह काशीपुर की है 18864 सर हो चुका था उनके डिवोटा उनके भक्त उनको कोलकाता लेकर आए थे काशीपुर में एक उद्यान बाटी था वहां पर उनको रखा था एक गार्डन हाउस में और डॉक्टर सरकार को बुला कर के उनके माध्यम से ठाकुर के गले के कैंसर की चिकित्सा करवा रहे थे उसी समय किंतु हमने देखा कि वैसे तो ठाकुर का शरीर दिन प्रतिदिन क्षय होता जा रहा है वह स्वामी विवेकानंद को उस सम मय के नरेण को आध्यात्मिक सिद्धि लाभ करवाने के लिए अपना पूरा जी जान जैसे कि डाल दे रहे हैं बड़े ही उत्साह के साथ में नरेण और जो अन्य त्यागी संतान थे ठाकुर के उनके धर्म जीवन का आध्यात्मिक जीवन का साधना का किस तरह से गठन हो किस तरह से वे लोग साधना में आगे बढ़े इसमें ठाकुर ने अपना पूरा जी जान लगा दिया था तो वही बात और इसी साधना के परिणाम से ठाकुर का जो मार्गदर्शन था ठाकुर का आशीर्वाद था इसके परिणाम स्वरूप स्वामी विवेकानंद में हमने देखा कि एक इस तरह की शक्ति जागृत हुई कि वह किसी को भी स्पर्श करके उनके भीतर में आध्यात्मिकता का संचार करवा सकते थे और यही बात ठाकुर ने भी कही थी कि स्वामी जी यह नरेद उसको भविष्य में हजारों हजारों लाखों लोगों को भारत की यह जो सनातन धरोहर है योग वेदांत और साथ में ही यह जो ठाकुर का अपना एक जो संदेश है आधुनिक युग के लिए उसका प्रचार पूरे विश्व में करना है और इसीलिए यह स्पर्श करके आध्यात्मिक शक्ति शक्ति संचार करने की क्षमता स्वामी जी में होनी अति आवश्यक है और कल हमने साथ में यह भी देखा कि यहां पर यदि अभेदानंद जी ने उनको स्पर्श किया या तो उनका जो मत का परिवर्तन हुआ तो क्या इस तरह की शक्ति का प्रयोजन स्वामी जी ने भविष्य में कहीं पर किया है तो उसका भी हमने देखा कि स्वामी जी सबसे पहले तो इस बात में अलर्ट हो गए कि आध्यात्मिक शक्ति यदि प्रदान करनी है तो किसी का भाव भंग नहीं करना है तो यह तो एक बात स्वामी जी अभेदानंद जी वाले इंसिडेंट से सीखे दूसरी एक बात है कि भविष्य में स्वामी जी की शक्तियों का इस तरह से विकास हुआ कि फिर स्वामी जी प्रवचन के माध्यम से ही लोगों के मन में आध्यात्मिक शक्ति संचार कर दे सकते थे उनको फिर प्रति इंडिविजुअल को स्पर्श करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती थी तो यह सब कुछ हमने ऑलरेडी देख लिया है इसके बारे

स्वामी विवेकानन्द हजारो लोगो को प्रणव मंत्र में दीक्षा देते है.

में इंटरेस्टिंग एक ऐसा एनालिसिस है मेरी लुईस करती है न्यू डिस्कवरीज में वो कहती है कि अच्छा स्वामी जी के कितने डिसाइल थे कितने कितने लोगों को स्वामी जी ने दीक्षा दी थी मंत्र दीक्षा दी थी क्योंकि आप प्रवचन तो चाहे हजारों लोगों के सामने करते हो मंत्र दीक्षा जब आप देते हैं तभी आप ट्रेडिशनल गुरु बनते हैं गुरु शिष्य का संबंध मंत्र दीक्षा के माध्यम से ही वो क्रिस्टलाइज होता है वो फॉर्मलाइज होता है तो जैसे कि यहां पे मां है या राजा महाराज है उनके पास में जितने भी भक्त आते थे उसमें से जिनको यह लोग दीक्षा देते थे तो वह तो समझ सकते हैं कि यह ट्रेडिशनल कांसेप्ट जो है अपना फॉर्मली राजा महाराज या मां उनको मंत्र दीक्षा देकर के उनके गुरु हुए तो स्वामी जी ने इस तरह से कितने लोगों को मंत्र दीक्षा दी है तो इसके बारे में स्वामी जी खुद कहते हैं दो इसमें पॉइंट ऑफ व्यू है जो फॉर्मल मंत्र दीक्षा जिस तरह से फॉर्मल सेटिंग में अपने हिंदू धर्म में होता है इस तरह से फॉर्मल सेटिंग में त्र दीक्षा तो स्वामी जी ने बहुत कम लोगों को ही दी है किंतु यह प्लेटफार्म के ऊपर में से स्वामी जी जो प्रवचन करते थे उसमें वह कहते थे कि प्रणव मंत्र का उच्चारण करना चाहिए प्रणव मंत्र का जप करना चाहिए तो यदि इस बात को यदि स्वामी जी की हम ले कि उन्होंने जो प्रवचन के माध्यम से अपने सामने जो ऑडियंस बैठा है उनको प्रणव मंत्र का जप करने के लिए या तो फिर उसका पाठ करने के लिए कहा हो चैटिंग करने के लिए तो इस तरह से देखें तो स्वामी जी खुद कहते हैं कि मैंने हजारों हजारों लोगों को प्रणव मंत्र में दीक्षा दी है तो देखिए कि स्वामी जी की शक्ति इस तरह से वह विकसित हो गई थी भविष्य में कि उनको यदि एक ट्रेडिशनल गुरु शिष्य का जो एक होता है मंत्र दीक्षा देने की विधि उसको भी करने की जरूरत नहीं थी वह अपने प्रवचन के माध्यम से ही जाहिर प्रवचन हो या क्लास जो उनका चल रहा हो उसी में जब वह कहते कि प्रणव मंत्र का जप करो तो उसी के माध्यम से ही वह उनके गुरु हो गए थे यानी कि भविष्य में नरेंद्र की स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक शक्तियों का विकास किस तरह से होने वाला था उसका अंदाज ठाकुर ने उसी समय काशीपुर में ही अपने भक्तों को दे दिया था और इसीलिए यह जो भविष्य में स्वामी जी करने वाले थे उसमें कहीं पर कुछ गड़बड़ ना हो जाए कि अ अन इंटेंशनली किसी का आध्यात्मिक जीवन उनके माध्यम से स्वामी जी की दीक्षा या शिक्षा के माध्यम से उसमें कंफ्यूजन ना आ जाए इसके लिए ऐसे कुछ लेसंस स्वामी जी को सीखने की आवश्यकता थी तो वह लेसन यहां पर हुआ मैं पाठ करता हूं

प्रसंग: स्वामी विवेकानन्द को स्पर्श कर स्वामी अभेदानन्द में बिजली के करंट की तरह शक्ति प्रवाह बहता है

आज फाल्गुनी शिवरात्रि आज फाल्गुनी शिवरात्रि है बालक भक्तो दिगर म तिनी मध्ये तीन चारी जन जीर शहिद स्वेच्छा ब्रतो पवास कररिया छ बालक भक्त ठाकुर के त्यागी संतान थे उसमें से तीन चार भक्तों ने तीन चार संतानों ने स्वामी जी के साथ में ही शिवरात्रि का व्रत और साथ में ही उपवास किया है पूजा और जागरण रात्रि काटा बार ताहा देर अभिलाष पूजा करते-करते और जागरण करते-करते रात बिताने की उनकी इच्छा है आजकल यदि आप देखते होंगे रामकृष्ण मिशन के जितने भी सेंटर हैं सभी सेंटर में तो नहीं किंतु बहुत सारे सेंटर में पूरी रात भर भगवान शिव की पूजा होती है और बीच-बीच में यह जो कुछ-कुछ लोग जो स्टूडेंट्स होते हैं अपने वह शिव नृत्य भी करते हैं वोह एक एक स्टूडेंट होता है वह शिव का साज सजता है बाकी जो होते हैं दो स्टूडेंट नंदी और ब्रंगी का और यदि आपने बिलुर मठ का शिवरात्रि देखा हो यदि वहां पर जाने का मौका ना मिला हो तो बेलूरमठ की youtube1 में रामकृष्ण मिशन में शिवरात्रि का आयोजन होता है शिवरात्रि का उत्त्सव मनाया जाता है गोल माले ठाकुरर पाछ आराम मेर व्याघात होय ई जन्नो बसत बाटी होते किंचित दूर पूर्व अवस्थित रंधन शाला जन्म निर्मित एकटी गृहे पूजा आयोजन होया च अभी हमको पता है कि यदि आप काशीपुर गए होंगे तो ग्राउंड फ्लोर है और एक फर्स्ट फ्लोर है फर्स्ट फ्लोर पर ठाकुर का शयन गृह था बेडरूम था वहां पर ठाकुर रेस्ट लेते थे वहीं पर ठाकुर रहते थे और ग्राउंड फ्लोर पर यह जितने भी त्यागी संतान है ठाकुर के या तो फिर जितने भी डिवटी आते थे वे लोग रहते थे उनका जो क्रिया कार्यकलाप है वह सब करते थे तो किंतु जदिया रात को ग्राउंड फ्लोर प पूजा वगैरह हो तो फिर फर्स्ट फ्लोर पर ठाकुर जो रेस्ट कर रहे थे सो रहे थे उनकी नींद में खले पहुंचे डिस्टरबेंस पहुंचे इसके लिए यदि आपने देखा हो कि जो मेन बिल्डिंग है उसके पास में ही थोड़ा सा दूर एक किचन जैसा है रंधन शाला जैसा है तो उन लोगों ने पूजा का आयोजन वहां पर किया था संधार परे बेश एक पोशला वृष्टि होया गया छ शाम के बाद में एक पूरा एक वहां पर बारिश हो गई है एवं नवीन मेघे समय समय महादेव जटा पटल न्याय विद्युत पुंज बर भाव देखिया भक्तगण आनंदित होया छ और यह जो नवीन मेघ यह जो काले बादल जो है आकाश में उसमें समय-समय पर महादेव की जटा के भीतर में जिस तरह से विद्युत होती है विद्युत का ट ये जो बिजली जो होती है इस तरह से वो काली जटा में जो जैसे कि महादेव की जो जटा है उसके भीतर में आपको चांद भी देखने को मिल जाएगा और यह मां गंगा का अवतर ण भी देखने को मिल जाएगा तो वैसे ही यह आकाश के बादल महादेव की जटा की तरह घनघोर काले बादल में बिजली का जब चमकारा होता है तो महादेव की जटा की तरह उनको देखता है भक्तों को और इसको देख कर के भक्तों के हृदय में आनंद भी बहुत हुआ है नवीन मेघे समय समय महादेव जटा पटले न्याय नवीन काले मेघ के भीतर में समय समय पर महादेव की जटा की तरह विद्युत पुंज आबीर भाव देखिया बिजली का चमकारा देख कर के बिजली का आविर्भाव देख कर के भक्तगण आनंदित तो होया छन भक्त लोग आनंदित हुए हैं द स्टार पर प्रथम प्रहर पूजा जप और ध्यान ंगो करिया स्वामीजी पुजार आसने बसई विश्राम ओ कथ उप कथन करी ते लागी ले 10 बजे के बाद में प्रथम प्रहर की पूजा जप और ध्यान समाप्त करके स्वामी जी पूजा के आसन पर बैठ कर के ही विश्राम और वार्तालाप करने लगे संगी दिगर मध्य एक जन तहर निमित्त तमाकू साजी ते बाहर गमन करी लो एवं अपर एक जन कोनो प्रयोजन सारिया आशीते बसत बाटर दख चलिया गलो उनके साथ में जो भी स थे दूसरे त्यागी संतान थे उसमें से एक उनका मित्र स्वामी जी के लिए तंबाकू सजाने के लिए बाहर गया और एक दूसरा जो त्यागी संतान था ठाकुर का दूसरा शिष्य वह किसी कार्य की वजह से कार्य समाप्त करने के लिए जिस मकान में जिस बिल्ल्डिंग में ठाकुर रह रहे थे उसकी ओर चले गए एमन समय स्वामीजीर भीतर सहसा पर्वत दिव्य भती तीव्र अनुभव उदय होलो उसी समय एकाएक स्वामी जी के भीतर में यह जो दिव्य शक्ति जिसका कि वर्णन ऑलरेडी हो चुका है उस तरह की दिव्य शक्ति की जिसको जिसकी वजह से स्वामी जी को स्पर्श करके ही स्वामी जी हमारे में शक्ति संचार कर सकते हैं उस दिव्य शक्ति का एकाएक स्वामी जी के भीतर में तीव्र अनुभव उदय होलो एकदम तीव्र अनुभव के साथ में उसका उदय हुआ एवं ती नियो उहा अद्य कार्य परिणत करिया उहर फलाफल परीक्षा करिया देखी बार वासना है सन्मुख हो पबो स्वामी अभेदानंद के बोली लेन और जैसे ही इस विभूति का जैसे ही इस आध्यात्मिक शक्ति का उदय हुआ साथ में ही स्वामी जी ने सोचा कि इसकी परीक्षा की जाए इसके पहले हमने देखा था कि स्वामी जी इस तरह की शक्ति का अनुभव करके उसके बारे में भक्तों के साथ में अन्य त्यागी संतानों के साथ में वार्तालाप तो करते हैं वाद विवाद तो करते हैं किंतु इसका एक्चुअल एक्सपेरिमेंटेशन एक्चुअल प्रयोग उन्होंने अभी तक नहीं किया था तो आज एकाएक यह अनुभूति तीव्र रूप से उनके भीतर में उसका उदय हुआ तो स्वामी जी ने सोचा कि चलो इसका एक्सपेरिमेंट किया जाए प्रयोग किया जाए और सामने ही स्वामी अभेदानंद बैठे थे अभी यह स्वामी अभेदानंद तो उस समय काली ही थे काली काली महाराज यानी कि उन्होंने संन्यास तो लिया नहीं था संन्यास तो स्वामी ठाकुर की महासमाधि के बाद में ही लेने वाले थे वरा नगर मठ में किंतु फिर भी शरत महाराज ने उनको अभेदानंद के नाम से यहां पर लिखा है तो सामने जो उपविष्ठा मान स्वामी अभेदानंद थे काली महाराज थे उनको स्वामी जी ने कहा आमा के खाने खण छुए थाक तो मुझे कुछ पल के लिए कुछ क्षण के लिए स्पर्श करो तो इति म तमाकू लैया गृहे पर प्रवेश करिया पूर्वक तो बालक देखी लो स्वामी जी स्थिर भावे ध्यान तो रहिया छ एवम अभेदानंद चखू मुद्रित करिया निज दक्षिण हस्त द्वारा तहर दक्षिण जानु स्पर्श करिया रखिया छ ओ तहर ई होतो घनो घ दोनों कंपी तो होते छ अभी स्वामी जी ने ऐसा कहा जैसे ही अभेदानंद जी को काली महाराज को वैसे ही काली महाराज ने उनको स्पर्श किया अभी उसके बाद में इन दोनों के मन में क्या चल रहा है यह तो हमको पता नहीं किंतु जो एक दूसरा त्यागी संतान था जो कि स्वामी जी के लिए तमाकू सजाने के लिए हुक्का बनाने के लिए हुक्का तैयार करने के लिए जो गया था वह हुक्का वापस ले के जब आया तब उसने देखा कि स्वामी जी आंख बंद करके ध्यान स्थ होकर के बैठे हैं और काली महाराज अपने दक्षिण हस्त के द्वारा स्वामी जी का दक्षिण पैर जो है उसको स्पर्श करके बैठे थे और जिस हाथ से उनको स्पर्श किया था वह हाथ में कंपन हो रहा था हाथ में ध्रु जारी हो रही थी घनो घनो कंपित ईते छे बार-बार तीव्र धजी उसके भीतर में हो रही थी दुई एक मिनट काल ई भाबे अति बाही तो होई बार पर स्वामीजी चखू उन्न कररिया बोली लेन बस होए छ किरू अनुभव कर ली कुछ एक दो मिनट इस तरह से पसार होने के बाद में स्वामी जी ने आंख खोल कर के कहा बस अभी हो गया अभी बताओ तुमने क्या अनुभव किया की रूप अनु कर ली किस तरह का अनुभव किया तो अभेदानंद जी ने उत्तर दिया बैटरी धरले जमन की एकटा भीतरे आस जानते पारा जाए व हाथ कापे ई समय तुमा के छुए श रूप अनुभव होते लागलो इलेक्ट्रिक बैटरी को स्पर्श करके उसके भीतर में कुछ है एक इलेक्ट्रिक करंट है वह समझ सकते हैं और मेरा हाथ और अपना हाथ जिस तरह से कंपन कर है धुज होता है उसी तरह का अनुभव तुमको स्पर्श करके मुझे हुआ अपर व्यक्ति अभेदानंद के जिज्ञासा कोरी लो अभी जो संतान त्यागी संतान हुक्का लेकर के आया था वापस वापस आए थे उन्होंने काली महाराज को पूछा अभेदानंद जी को प्रश्न किया स्वामी जी के स्पर्श को रे तोमार हाथ अपना आपनी ई रूप काप छलो स्वामी जी को स्पर्श करके तुम्हारा हाथ कंपित हो रहा था वह क्या अपने आप हो रहा था अभेदानंद जी ने उत्तर दिया हां स्थिर कोरे रखते चेष्टा कर लेयो रखते पर्छ लमना अभेदानंद जी ने कहा कि हां मेरा हाथ अपने से कंपित हो रहा था अपने से वाइब्रेट हो रहा था मैं उसको स्थिर रखने का प्रयास करने पर भी वह स्थिर नहीं हो पा रहा था ई संबंध है अन्न कोनो कथा वार्ता तो खन आर होई लो ना इस इसके बारे में और कोई वार्तालाप उस समय हुआ नहीं स्वामी जी तमाकू खाई लेन स्वामी जी ने तमाकू का सेवन किया हुक्का का सेवन किया परे सकले दुई प्रहर पूजा और ध्यानेश करी लेन और उसके बाद में सभी ने द्वितीय प्रहर की पूजा और ध्यान था उसमें अपने मन को पोया अभेदानंद ई काले गभीर ध्यान स्थ होलो किंतु जैसे ही दूसरे प्रहर का पूजा और ध्यान चल रहा था उस समय देखा कि अभेदानंद जी महाराज गभीर ध्यान में मग्न हो गए वही रूप गभीर भावे ध्यान कोरीते आमरा ताहा के इति पूर्वे आर कखन देखी नाई इस तरह से गंभीर रूप से ध्यान करते हमने उनको पहले कभी देखा नहीं है ताहर सर्व शरीर आड़ होया ग्रीबा और मस्तको बाकिया गेलो एवं खण जन्नो बहिर जगत संज्ञा एक काले लुप्त होलो उनका समस्त शरीर जैसे की स्थिर हो गया जैसे कि रिजडन जो गर्दन है और मस्तक है वह थोड़ा सा झुक गया और कुछ समय के लिए बाह्य जगत का उनका ज्ञान संपूर्ण रूप से लुप्त हो गया संपूर्ण रूप से शून्य हो गया उपस्थित श कोलेर मने होलो स्वामी जी के इति पूर्वे स्पर्श करार फले तहर एकन रूप गभीर ध्यान उपस्थित होया छे वहां पर जितने भी त्यागी संतान थे उन सभी के मन में यही बात आई कि यह जो काली महाराज ने स्वामी जी को स्पर्श किया था उसी के परिणाम से उनके भीतर में इतना गंभीर ध्यान प्रकट हुआ है इसी की वजह से वह इतने गंभीर ध्यान में प्रवेश हुए हैं स्वामी जी तहर रूप अवस्था लख करिया जनक संगी के इंगी तो करिया उहा दिखाई लेन स्वामी जी ने भी देखा कि अभेदानंद जी इतने गंभीर ध्यान में मग्न है तो उन्होंने बाकी जो त्यागी संतान थे उनको इशारा करके अभेदानंद जी की ओर इशारा करके उनकी स्थिति के बारे में सबका लक्ष्य दोरा सबको इसकी सबको इसके सामने इशारा करके अभेदानंद जी की अवस्था को दिखाया रात्रि चारट समय चतुर्थ प्रहर पूजा शेष होई बार परे स्वामी राम कृष्णानंद पूजा गृहे उपस्थित हुया स्वामी जी के बोली ले ठाकुर डाकी ते छन रात्र रात को 4 बजे के समय चतुर्थ प्रहर की पूजा जब समाप्त हुई उस समय स्वामी राम कृष्णानंद यानी कि शशि महाराज पूजा ग्रह में आकर के उपस्थित होकर के र का मैसेज देते हैं स्वामी जी को कहते हैं ठाकुर डाकी ते चन ठाकुर बुला रहे हैं हाई कोर्ट का समन आया है सुन्या स्वामी जी बसत बाटील तल ग्र है ठाकुरे निकट चलिया गले सुनकर के ही स्वामी जी दो मंजिला मकान था जिसमें ठाकुर रह रहे थे उसमें फर्स्ट फ्लोर पर चले गए ठाकुर के पास ठाकुरे सेवा करि बर जन्नो रामकृष्णा नंदो संगे जाई लेन ठाकुर की सेवा करने केलिए लिए राम कृष्णानंद यानी कि शशि महाराज भी साथ में गए स्वामी जी के देखि ठाकुर बोली लेन की रे एक टू जमते ना जमते खोरोच स्वामी जी को देख कर के ही ठाकुर बोल उठे क्या रे थोड़ा सा इकट्ठा हुआ नहीं हुआ उसी में तुमने खर्च करना शुरू कर दिया आगे निजर भीतर भालो करे जमते दे तखन कोथा की भाब खर्च करते होवे ता बुझते पार भी माई बुझे देवेन पहले तो तुम अपने पास में जमा करके रखो जमा करो कुछ इकट्ठा करो उसके बाद में कहां पर किस तरह से खर्च करना है वह समझ पाओगे मां ही समझा देगी और भीतर तोर भाव ढुके और की अपकार टा कोरली बोल देखी उसके भीतर में तुमने अपना भाव घुसा करके अपना भाव प्रविष्ट करवा करके तुमने उसका क्या अपकार किया उसका क्या अहित किया देखो तो ओ तो दिन एक भाव दिए जा छलो सेटा शोभ नष्ट होए गेलो वो इतने दिन तक एक भाव का आश्रय लेकर के जा रहा था वह सब नष्ट हो गया छय मा शेर गर्भ न छय मा शेर गर्भ जनो नष्ट होलो छ महीने का गर्भ जैसे कि उसका वह नष्ट हो गया उसका गर्भपात हो गया जा होबार होए छ जो होना सा तो हो गया एकन होते होठत मोंटा आर कोशनी अभी से तुम इस तरह से एकाएक इस तरह का कुछ अचानक इस तरह का कुछ मत करना जा हो छोड़ा टार अद भालो भले जो भी है उस लड़के का अदृष्टवांठा को पढ़ने के समय हमको यह एक समझ में आता है कि ठाकुर वो क्रिप्टोग्राफी का बड़ा यूज करते थे बड़े शॉर्ट में वह अपने सेंटेंस बनाते थे तो फिर अभी क्या होता है जिसको कॉन्टेक्स्ट पता है कि किस कॉन्टेक्स्ट में ठाकुर बात कर रहे हैं तो उनको तो ठाकुर की बातें समझ में इजली आ जाती है किंतु यदि कोई नया होता है या तो फिर ठाकुर के इसी टीचिंग को यदि आपको एज ए कोटेशन कहीं पर यूज करना है तो आपको वोह फिर एक पैराग्राफ जितना एक फुट नोट लिखना पड़ेगा कि यहां पर ठाकुर क्या कहना चाहते हैं तो देखिए एक के बाद एक सेंटेंस लेते हैं किरे क्या रे एक टू जमते ना जमते ही खर्च थोड़ा सा जमा नहीं जमा उसी में खर्च कर दिया अर्थात कि आध्यात्मिक साधना करके आध्यात्मिक शक्तियों का संचय तो तुम आगे पहले करो संचय होने से पहले ही तुमने उसका खर्च करना शुरू कर दिया आगे निजर भीतर भलो करे जमते दे खन कोथा की भाब करते होवे ता बुझते पार भी माई बुझे देवे पहले अपने भीतर में अच्छे से जमने दो संचय होने दो उसके बाद में कहां पर किस तरह से खर्च करना है वह समझ पाओगे मां ही समझा देगी देखिए कि यह एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट चीज कांसेप्ट है कि सबसे पहले तो हमको आध्यात्मिकता के रास्ते में आगे बढ़ना होगा कोई ना कोई एक प्लेटो पे कोई ना कोई एक लेवल पर पहुंचना होगा वरना तो फिर जैसे कहते है ना अंधे नव नियमा ना यथा अंधा जो एक अंधा है वह दूसरे अंधे को दोर रहा है उनको गाइड कर रहा है आखिर में क्या होगा दोनों गड्ढे में गिरेंगे अंधा गुरु अंधा शिष्य दोनों गिरेंगे गड्ढे में तो यहां पर भी ठाकुर कहते हैं पहले तो साधना करके एक तरह की सिद्धि प्राप्त कर दो उसके बाद में तुम यह सब जाकर के लोगों को सिखाना कि हां भाई यह आध्यात्मिक जीवन क्या है आध्यात्मिक ता क्या है वरना तो क्या होगा हीते विपरी तो जैसे बांगला ते बोले जो हित है करना है हमको उसकी वजह हम लोगों का अहित कर बैठेंगे और देखिए कि इस बात को हमने बुद्धिज्म का जो पतन हुआ स्वामी जी का जो प्रवचन है माय प्लान ऑफ कैंपेन उसमें बड़ा ही स्पष्ट रूप से देखा है सिर्फ बुद्धिज्म का पतन ही नहीं जैसे कि जो अपनी ओरिजिनल वैदिक सभ्यता थी वैदिक कल्चर था वो ए वैदिक एज थी उसमें भी एक तरह से डिटेरिंग आया था उसका भी डिक्लाइन एंड फॉल हुआ था और इन दोनों के पीछे क्या रीजन था कि बस वही कि जिन लोगों को कुछ आध्यात्मिकता के बारे में समझ नहीं आता ऐसे लोग जब गुरु बन कर के बैठ जाएंगे तब पता चलेगा कि उनको वह खुद तो किसी गड्ढे में जाकर के गिरेंगे और दूसरों को भी गड्ढे में जाकर के ले जाएंगे अभी इसके बारे में प्रश्न होगा कि अभी जो मैं यह सब कुछ सिखा रहा हूं तो मेरा क्या कोई अनुभूति है कि नहीं तो इसके रिलेटेड मैं एक बात बताता हूं हमारे आचार्य हमारे प्रिंसिपल थे ट्रेनिंग सेंटर में देवराजा नंद जी महाराज तो एक बार उनके साथ में वार्तालाप हो रहा था क्लास में वह बात कर रहे थे तो उस समय ट्रेनिंग सेंटर में बेलूरमठ में क्या होता है कि बीच-बीच अभी बेलूरमठ में ट्रेनिंग बेलूरमठ तो अपना हेड क्वार्टर है तो पूरे वर्ल्ड में से अपने जो जितने ने भी सर्वश्रेष्ठ साधु जो है जिनको कि सबसे ज्यादा विद्वान आध्यात्मिक उच्च सत्ता पर स्थित हुए हैं ऐसे साधुओं का आगमन सीनियर साधुओं का आगमन रेगुलरली बेलूर मठ में होता है तो ट्रेनिंग सेंटर में क्या करते हैं इस तरह से कोई भी गेस्ट स्वामी जी आए हैं तो उनका प्रवचन वहां पर अरेंज करेंगे और बीच-बीच में फिर प्रेसिडेंट महाराज के साथ में परम पूजनीय प्रेसिडेंट महाराज के साथ में इंटरेक्शन होगा जनरल सेक्रेटरी महाराज है बाकी जो ट्रस्टी महाराज है उनका उनका भी वहां पर ट्रेनिंग सेंटर में क्लास होगा तो अभी देखिए कि ट्रेनिंग सेंटर में जो क्लास होते थे उसमें दो कैटेगरी थी एक तो इस तरह से जो गेस्ट स्वामी जी आते थे जो कि बड़े ही प्रोमिन है अपने ऑर्डर में बड़े ही सीनियर है बड़े ही आध्यात्मिकता से परिपूर्ण है और दीक्षा गुरु है यदि कोई कोई तो वो एक थे अपने गेस्ट स्वामी जियों का लेक्चर रखते थे और फिर अपने जो एक रेगुलर आचार्य होते हैं एक जो कि ट्रेनिंग सेंटर में ही रहते हैं और जो कोई सब्जेक्ट लेकर के पढ़ाते हैं य अभी यही लीला प्रसंग लीला प्रसंग का एक क्लास होता था और फिर यह स्वामी जी का जो कंप्लीट वर्क्स है उसमें से कर्म योग राज योग भक्ति योग ज्ञान योग लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू ल मोडा स्वामी जी का लाइफ उसके बाद में फिर यह शास्त्र एक के बाद में एक कठोपनिषद है विवेक चूड़ामणि है या तो फिर ये वेदांत सार है वगैरह वगैरह शास्त्रों का फिर इंग्लिश ग्रामर है संस्कृत ग्रामर है भाई वेस्टर्न फिलोसोफी है इस तरह से काफी सब्जेक्ट का सब्जेक्ट को लेकर के पढ़ाने वाले आचार्य थे तो एक बार हमारे प्रिंसिपल महाराज थे आचार्य थे स्वामी देवराजा जी महाराज तो वह कहते थे कि देखो तुम लोग यह अपेक्षा मत करना कि हम जो यहां के जो रेगुलर आचार्य है वह आपको जो सब्जेक्ट लेकर के सिखाते हैं तो आपको कोई ब्रह्मज्ञान हम लोग दे देंगे हम लोग तो सिर्फ आचार्य ही है हम लोग तो सिर्फ एक सब्जेक्ट को ले करके ही पढ़ाते हैं आपको यदि कोई आध्यात्मिक टीचिंग की या तो फिर कोई आध्यात्मिक कोई उपदेश की आशा रखनी है तो यह जो सब सीनियर स्वामी जी आते हैं उनके पास में से रखना तो यह उसी ओकेज प बोल रहे थे उसी समय कोई एक सीनियर स्वामी जी आने वाले थे उनका प्रवचन होने वाला था तो वो जो अनाउंसमेंट होती है तो उसी अनाउंसमेंट के सिलसिले में उन्होंने कहा था तो वो बात सुनकर के हम लोग तो हंस पड़े थे किंतु देखिए कि ऐसा है कि यहां पर भी मैं जो सिखाता हूं मैं तो सिर्फ एक सब्जेक्ट लेकर के सब्जेक्ट के ऊपर में बोलता हूं यह जो अध्यात्मिकता जो देते हैं अपनी वाणी से या तो अपने वर्तन से या तो अपने उपदेशों के द्वारा उन लोगों की कैटेगरी ही अलग होती है रामकृष्ण मिशन में इस तरह के साधुओं का कोई अभाव नहीं है जो कि बड़ी सीनियर पोजीशन पे है या तो आध्यात्मिकता में उन्होंने बहुत प्रगति की है तो उन लोगों के पास में जो अपेक्षा रखते हैं वो इस क्लास में ना रखें यहां पर सिर्फ सब्जेक्ट लेकर के ही सब्जेक्ट बेस टॉपिक पे ही हम डिस्कशन करते हैं तो इसीलिए यहां पर ठाकुर कहते हैं कि जो यह सब सिखाने का कार्य करते हैं पब्लिक में जाकर के उनको सबसे पहले तो अपने भीतर में कुछ जमा करना है तभी तो लोगों को कुछ सिखा पाएंगे और जब तक जमा नहीं करते हैं तब तक आप उसके पहले जो सिखाते हैं वो तो सब्जेक्ट मैटर जैसे कि आप स्कूल कॉलेज में जाते हैं तो आपके जो प्रोफेसर या टीचर होते हैं तो जिस तरह से इकोनॉमिक्स है मैथमेटिक्स है फिजिक्स है केमिस्ट्री है या तो रोबोटिक्स है वह जब जिस तरह से आप उन टीचर से सीखते हैं तो वैसे ही यहां पे यह टेक्निकल डिस्कशन हम लोग ज्यादा करते हैं यह क्यों हमको करना है टेक्निकल डिस्कशन ज्यादा क्योंकि हमारे पास में वह आध्यात्मिक उपलब्धि नहीं है इसके लिए आध्यात्मिक टीचिंग जो प्रॉपर आध्यात्मिक टीचिंग होता है वह तो उस लेवल पर जाने के बाद में ही दे सकते हैं देखिए आजकल आप यदि उसमें वो जो वृंदावन वाले जो हित प्रेमानंद जी महाराज है उनके वीडियो काफी पॉपुलर है बहुत सारे साधु भी रामकृष्ण मिशन के उनको देखते रहते हैं अभी ऐसा नहीं है कि उनके वीडियो में वह कोई बहुत ज्यादा टेक्निकल डिस्कशन करते होंगे शास्त्र को लेकर के शास्त्र का विचार करते होंगे ऐसा कुछ नहीं है एक लाइफ रिलेटेड माने डे टू डे लाइफ रिलेटेड जनरल आध्यात्मिक बातें करते हैं तो उसको उनको सुनने के लिए कितने हजारों लाखों लोग वो सुनते हैं उनको ध्यान से और फिर उससे उनको कोई भीतर में कुछ प्राप्ति भी होती है तो अभी मैं ऐसा नहीं कहूंगा लेट मी नॉट रिकमेंड के आपको उनको सुनना चाहिए या दैट इज योर चॉइस किंतु आध्यात्मिक जो आचार्य होते हैं ना वे लोग सब्जेक्ट के यह जो विषय वस्तु के परे जाकर के बात करते हैं जो लोग उस लेवल पर नहीं पहुंचे हैं उनको यह विषय वस्तु को लेकर के बात करनी होगी टेक्निकल सब्जेक्ट को लेकर के बात करनी होगी जद इस तरह से आध्यात्मिक उपलब्धि नहीं हुई है जनरल स्पिरिचुअल गाइडेंस देना शुरू कर दे कि हां आपको अपने जीवन में इस तरह से जीना है वगैरह वगैरह तो क्या होगा ना वही बात हो जाएगी अंधे नहीं व नियमा ना यथा अंधा अंधा अंधे को दौड़ता है आखिर में दोनों गड्ढे में गिरते हैं तो यह एक बात है जो कि बड़ा स्पष्ट रूप से ठाकुर ने बताया है उसके बाद में ठाकुर एक दूसरी एक बड़ा इंपोर्टेंट टॉपिक बात करते हैं कहते हैं और भीतर तोर ढुके और की उपकार कोरली बोल देखी उसके भीतर में तुमने अपना भाव घुसा करके प्रवेश करवा करके उसका क्या अपकार किया बोलो तो बोलो तो अपकार यानी कि क्या अहित किया और व एतो दिन एक भाव दिए जा छीलो शटा सबब नष्ट होए गलो वो इतने दिन एक भाव लेकर के जो जा रहा था वह सब नष्ट हो गया उसके बाद में ठाकुर जो उदाहरण देते हैं भाव नष्ट होने का यशर भोजन नष्ट होलो जनरली जो गर्भ होने के बाद में जो बच्चा जन्म लेता है नौ महीने के बाद में लेता है जन्म ये जो जो उसकी जो बर्थ साइकल होती है एक फिटस उसको अंग्रेजी में बोलते हैं या तो फिर गर्भ उसकी जो साइकल होती है लाइफ साइकिल नौ महीने की होती है नौ महीने के बाद में जब बच्चा जन्म लेगा तो वो हेल्दी होगा वो एकदम वो सुंदर दिखेगा एकदम छोटा बच्चा जिस तरह से दिखना चाहिए किंतु छ मास पे यदि गर्भपात होता है तो वह बच्चा तो जीवित तो वह जन्म लेगा ही नहीं अभी आजकल की मॉडर्न टेक्नोलॉजी की बातें छोड़ देते हैं अभी आजकल तो आप जो चाहे करवा सकते हैं टेस्ट ट्यूब बेबी भी जन् वो आप कर सकते हैं डीएनए एडिट करके अपनी इच्छा के अनुसार बच्चे में जो जो चाहिए जिस तरह के ट्रेट चाहिए जिस तरह के कैरेक्टरिस्टिक चाहिए वह आप डीएनए को प्रोग्राम करके कर सकते हैं ठाकुर के समय यह सब नहीं था तो एक जनरल उदाहरण वह देते हैं छ मास प जद बच्चा जन्म लेता है तो वह तो एक तर से गर्भपात ही हुआ और उस बच्चे का जन्म जब होगा वह डेड ही वो होगा वह मृत्यु ही पावेगा या तो फिर मृत होकर के ही वह जन्म लेगा तो उसका जो लाइफ साइकल है उसमें किसी ना किसी वजह से कहीं ना कहीं कोई ना कोई विघ्न खड़ा हुआ है तो उसी की वजह से एक सुस्त जो उसको जन्म लेना था नौ महीने के बाद में और एक सुस्त जीवन उसको जीना था वो वहीं पर वो खत्म हो गया अभी देखिए कि हम सबने एक तरह से तो काली महाराज की एक तरह से एक एनालिसिस किया उनके भविष्य का तो वह तो हमने देखा कि ऐसा कोई सीरियस नहीं है मैंने तो मेरा जो पर्सनल स्टडी जाता है रामकृष्ण मिशन के अन्य साधु सन्यासियों के साथ में खास करके अपने गुरु भाइयों के साथ में काली महाराज का जो वर्तन था वह एग्जेंडर था और वह स्वामी जी के इतने अनुग थे कि स्वामी जी ने जब भी यह सबको बुलाना चाहा लंडन में प्रवचन देने के लिए यह अमेरिका में तो वह शशि महाराज का कुछ ना कुछ शशि महाराज का तो आखिर में कैंसल ही हो गया शरत महाराज का बार-बार डिले हो रहा है उस समय काली महाराज ने प्रोमट एक्शन लेकर के वो वहां पर जाकर के उपस्थित हुए थे स्वामी जी जब अमेरिका से वापस आए उस समय और उससे पहले भी जब यह मीटिंग करके स्वामी जी को सपोर्ट करने के लिए जो रेजोल्यूशन भेजना था उसमें भी काली महाराज का एक हाथ था तो फ्यूचर लाइफ हमको तो उनका एग्जांपलर ही दिखता है बस वो एक छोटी सी बात है कि उन्होंने फिर या तो उन्होंने या तो फिर उन्होंने अपने शिष्य को जो भी बताया होगा तो उनका उनकी बातें सुनक के उनके शिष्यों ने रामकृष्ण वेदांत मठ को बेलूर मठ से सेपरेट कर दिया तो भविष्य में अदर देन एक दो ये हालांकि वह सेपरेट हो जाना इ मेजर कहेंगे कि एक इवेंट है बड़ी घटना है किंतु मैं पर्सनली ऐसा नहीं मानता कि आप संघ में रहे ना रहे उससे ज्यादा कोई फर्क पड़ता है देखिए कि बहुत सारे साधु संघ छोड़कर गए हैं और एगम लाइफ उन्होंने लीड किया है और जैसे कि हम जीसस के बारे में कहते हैं ना हमारी ही एक पब्लिश्ड बुक है व्हाई हिंदू एक्सेप्ट जीसस बट रिजेक्ट क्रिश्चियनिटी तो हम हिंदू लोग जीसस को क्यों हम हिंदू लोग जीसस को तो एक्सेप्ट करते हैं किंतु हम लोग क्रिश्चियनिटी को रिजेक्ट करते हैं क्यों क्योंकि जीसस के भीतर में वह जो स्पिरिचुअल उनके जो उपदेश थे सर्मन ऑन द माउंट है वगैरह वगैरह वह अपने वेदांत के बहुत पास में आते हैं तो एज ए अवतार एज ए महापुरुष संत हमारा उनके प्रति ग्रेटेस्ट रिस्पेक्ट है किंतु एक जो ऑर्गेनाइज रिलीजन होता है उसमें और भी बहुत सारी बातें भविष्य में प्रवेश कर जाती है जो कि सभी को पसंद नहीं होती अदर देन दोज कि जो उस ऑर्गेनाइज रिलीजन के पार्ट होते हैं बाहर वालों को इतना सब अच्छा नहीं लगता उनके बारे में उनका वो मोनोपोली वगैरह डोमिनेंस वगैरह वो दूसरों को बुली अर्थात कि दूसरों को डराना धमकाना यह सब यह लोग चालू कर देते हैं तो ऑर्गेनाइज रिलीजन का हमेशा से एक तो यह प्रॉब्लम रहेगा ही रहेगा वो कोई भी ऑर्गेनाइज रिलीजन हो तो वो काली महाराज वो संघ छोड़ कर के काली महाराज नहीं तो उनके डिसाइल चले गए मुझे ऐसा नहीं लगता इस समथिंग सो मेजर रामकृष्ण संघ ऑलरेडी बाय दैट टाइम इतना स्ट्रांग हो चुका था क्योंकि रामकृष्ण संघ में देखिए कि स्वामी जी यदि चले गए हैं ठाकुर चले गए हैं तो दो महास सताए दो स्पिरिचुअल सुपर पावर अभी भी रामकृष्ण संघ में थे वह थे मां शारदा देवी और स्वामी ब्रह्मानंद जी महाराज इन दोनों की जो कंबाइन स्पिरिचुअल पावर था उसके सामने इस विश्व में उस समय एक भी सत्ता ऐसी नहीं थी एक भी शक्ति ऐसी नहीं थी कि जो कि रामकृष्ण संघ का कोई अहित कर पाए इंक्लूडिंग वही ठाकुर के डायरेक्ट डिसाइल इंक्लूडिंग काली महाराज या स्वामी अभेदानंद तो उनका संघ छोड़ के जाना अपने संघ में इतना कोई ट्रबल नहीं खड़ा किया है ना ही उनके लिए ऐसा कोई मेजर कुछ होगा वही है कि उनके जो फॉलोअर्स है वो आज अपनी भावधारानी हो गए हैं तो आई डू नॉट थिंक दिस इज समथिंग दैट बिग तो यहां पे ठाकुर जो एक इतना स्ट्रांग ओपिनियन देते हैं कि अरे छ मास का गर्भ नष्ट हुआ उस उतना भयानक यह कि उस गर्भ के लिए कितनी भयानक घटना है उसका तो फ्यूचर लाइफ साइकल जो था पूरा वहीं का ही 6 महीने के बाद में ब्रेक हो गया अदर वाइज यदि 9 महीने के बाद में जन्म लेता तो अप टू 7080 इयर्स जो आज की इंडिया की एवरेज एज है 73 ईयर है उस समय होगी समथिंग अराउंड 53 इयर्स में कि व्हाट एवर तो उतना तो वो जीते वो इतना नहीं जी करके 50 इयर्स में 70 इयर्स एवरेज एज ले लीजिए वो नहीं जी करके 6 महीने पे ही उनका डेथ हो गया उनकी स्पिरिचुअलिटी का दिस इज अ वेरी बिग स्टेटमेंट दिस इज अ वेरी स्ट्रांग स्टेटमेंट इसको आप किस तरह से समझाएंगे क्योंकि इस स्टेटमेंट को कई कई बार क्या होता है पता है हम जब भी ऐसा लगता है ना कि ये जो घटना जो हुई है भविष्य में उसके साथ में जो ठाकुर या मां या स्वामी जी का जो स्टेटमेंट है उसका कोई मैच नहीं हो रहा है तो फिर हमको ऐसा लगता है कि अच्छा ठीक है वो जो उन्होंने बात-बात में कह दिया होगा या सेंटीमेंटल होकर के कह दिया होगा या तो एक उस समय का एक सामयिक ओपिनियन उन्होंने टेंपररी ओपिनियन दिया होगा तो यहां पर भी यह जो स्वा ठाकुर की छ महीने वाली बात है उसको हम ऐसा टेंपररी ओपिनियन मान कर के छोड़ दें क्या भविष्य में तो काली महाराज के साथ में ऐसा मेजर माने डिसर पशन है उनके जीवन में इस बात से तो कोई मना नहीं कर सकता एक मछली पकड़ने की नहीं ऐसी कुछ बात है कि वो वहां पर बैठे-बैठे मछली पकड़ा करते थे तो ठाकुर ने उनको बुलाया कि अरे देखो मछली पकड़नी है खाने के लिए एज ए स्पोर्ट या तो फिर ये जो मछली पकड़ने का येय फिश जो फिशिंग करने के लिए लोग जाते हैं ना आजकल एज ए स्पोर्ट वो इसको लेते हैं एज ए टाइम पास या एज ए हॉबी लेते हैं तो एज ए टाइम पास या हॉबी तुम मछलियों को मारोगे ये तो ठीक नहीं है तो ऐसी कुछ-कुछ घटनाएं हैं छोटे-मोटे डिसर पशन है वो वो होते रहेंगे स्वामी जी के साथ में काली महाराज आर्गुमेंट किया करते थे वराह नगर मठ में देखेंगे कि लोग उनको काली तपस्वी कहते थे एक कमरे में बैठ कर के ध्यान किया करते थे उस समय एक प्रश्न वहां पर किसी ने इस तरह का एक इशू रेज किया कि देखिए यह नगर मठ में तो हम सिर्फ त्यागी संतान ही ठाकुर के रहते हैं सन्यासी शिष्य ही रहते हैं तो यहां पर तो कोई नौकर चाकर तो है नहीं जो भी काम करना है यहां का हम ही को करना पड़ेगा तो हम लोग सब आपस में काम शेयर करते हैं जो भी काम है अभी टॉयलेट क्लीनिंग का है खाना बनाने का है या तो ठाकुर पूजा है या तो फिर जनरल क्लीनलीनेस हाइजीन एंड सैनिटेशन है वगैरह वगैरह का बाजार में से कुछ परचेस करना है व्हाट एवर आप यदि एक मठ चलाते हैं आपको बहुत सारा काम होगा उसमें भी ठाकुर के इतने सारे सब यंग लड़के जब एक जगह पर रहते हैं तो नेचरली काम होगा वहां पे तो उन्होंने जाकर के स्वामी जी को कंप्लेन किया कि ये काली महाराज जो है वो अपना जो काम है वो नहीं करते हैं उनको यदि कोई ड्यूटी असाइन करते हैं तो अपना ड्यूटी नहीं करते हैं वो अपने कमरे में बैठ कर के जब ध्यान ही करते रहते हैं या स्टडी करते रहते हैं तो स्वामी जी ने कहा कि देखो तुम्हार तुम फिर स्वामी जी ने जो गुरु भाई स्वामी जी के पास में कंप्लेन लेकर के आया था कि काली महाराज काम नहीं कर रहे हैं उनका ड्यूटी नहीं कर रहे स्वामी जी ने उस गु उसी गुरु भाई को डांट करके कहा कि तुम लोगों में से एक भाई है तुम्हारा वह जद जब ध्यान साधन भजन करके रहना चाहता है तो उसको सपोर्ट करने की बजाय तुम लोग उसकी निंदा क्यों करते हो उसका काम मुझे दे दो मैं उसका काम कर लूंगा तो इस तरह से देखिए कि स्वामी जी की दृष्टि में तो स काली महाराज ने ऐसा कुछ नहीं किया जो उनके रहते-रहते जिसकी वजह से उनके ऊपर में स्वामी जी की नाराजगी हो हम ऐसा आर्गुमेंट करने के लिए ऐसा आर्गुमेंट कर सकते हैं कि स्वामी जी के मन में शायद कोई गिल्ट फीलिंग रह गया होगा कि इसका आध्यात्मिक जीवन तो मैंने ही बिगाड़ दिया है तो भले उसके स्वभाव में यदि थोड़ा बहुत यदि डिस्टरबेंस या कंफ्यूजन खड़ा होता है तो वो मुझे संभाल लेना चाहिए ये गिल्ट फीलिंग जैसा स्वामी जी के मन में हो सकता है किंतु यदि घटना वली का अभ्यास करें इतनी सारी बायोग्राफी जो कि अपने संघ में लिखी गई है इतनी सारी किताबें लिखी गई है मैंने तो काली महाराज के जीवन में ऐसा मेजर कुछ नहीं पाया जिसकी वजह से हम कह सके कि अरे उन्होंने ऐसा डायरेक्ट डिसाइल होकर के ऐसा कर दिया स्वामी जी के गुरुबाई होक के ऐसा कर दिया स्वामी जी के सन्यासी शिष्य होकर के ऐसा कर दिया ऐसा तो मैंने कभी कुछ नहीं पाया तो फिर यह ठाकुर का जो इतना इंपॉर्टेंट मने इतना स्ट्रांग स्टेटमेंट है कि छह महीने का गर्भ नष्ट हो गया इस तरह का तुमने उसके साथ में अत्याचार किया है इस तरह का तुमने उसका अहित किया है तो दिस इज अ वेरी स्ट्रांग स्टेटमेंट इतना स्ट्रांग स्टेटमेंट को जस्टिफाई करने वाला मुझे का महाराज के जीवन में ऐसा कुछ नहीं दिखा तो अभी देखिए कि यदि यह सामान्य घटना वली से ऊपर होकर के अभी थोड़ा मेटा फिजिकल विचार करें तो शायद ऐसा कह सकते हैं कि जो ठाकुर के अन्य त्यागी संतानों ने जिस अध्यात्मिक ऊंचाई को प्राप्त किया था या प्राप्त करने की एलिजिबिलिटी एलिजिबिलिटी रखते थे जो कि इवेंचर पहुंचे होंगे वहां तक शायद काली महाराज ना पहुंच पाए क्योंकि क्या है ना कि आध्यात्मिक जी जीवन में तो तारे बाड़ा तारे बाड़ा बांगला देश जीवन बोले इससे भी आगे इससे भी आगे माने आध्यात्मिक जीवन का कहीं पे इति नहीं है अंत नहीं है जो एक जनरल हाइट प पहुंच जाता है तो हम जैसे आम आदमियों को तो वो तो संत महापुरुष ही दिखेंगे यदि आप देख लीजिए कि हम यहां जमीन पर बैठे हैं तो एक आदमी है वो जद एवरेस्ट माउंटेन तक वो सफर करता है ना कि वो स्पेस स्टेशन तक जाता है स्पेस स्टेशन आकाश में 11 किमी ऊपर है और ये यह जो है जदी ये एवरेस्ट व 203 000 मीटर जितना हाई होगा व्हाट एवर एग्जैक्ट फिगर मुझे याद नहीं है किंतु यदि पृथ्वी पर जमीन पर खड़े हैं तो हमको वो एवरेस्ट वाला भी उतना ही दिखेगा अरे इतना दूर है स्पेस स्टेशन में जो है वो भी इतना दूर है किंतु इन दोनों के बीच में जो डिफरेंस है वो आसमान जमीन का डिफरेंस है एवरेस्ट पर चढ़ा हुआ व्यक्ति फिर भी जमीन पर ही है जबकि जो स्पेस स्टेशन में जाता है स्पेस में जाता है उसने पृथ्वी को छोड़ दिया है ली आसमान जमीन का फर्क है इन दोनों के बीच में जो कि हम आम आदमियों को समझ में नहीं आएगा तो क्या उस दृष्टि से काली महाराज को आसमान तक जाना था आसमान तक उनकी जो वह कैपेसिटी थी पहुंचने की वह नहीं पहुंच पाए दैट वी डू नॉट नो अभी तो हमारे लिए वह सब स्पेक्युलेटिव करने के लिए हमारे पास में जो हमारी दृष्टि से कुछ होना चाहिए वो तो मुझे नहीं मिला तो जो भी है तो अभी ठाकुर आखिर में क्या क्या कहते हैं जा होबार होए छे अच्छा जो हो गया सो हो गया एक खन होते हटात अंटा आर कोरिश नहीं अभी से आज से आज के बाद में एकाएक तुम ऐसा कुछ मत कर देना जा हो छोड़ा टार अद भालो अभी ये जो लास्ट स्टेटमेंट है वो अगेन सरप्राइजिंग है कि जो भी हो लड़के का अदृष्टवांठा एक और यदि ठाकुर कहते हैं कि उसका 6 महीने का गर्भ नष्ट होने की तरह उसके आध्यात्मिक जीवन में इतना बड़ा डिस्ट्रक्शन आ गया दूसरी ओर कहते हैं कि जो भी है चलो लड़के का भविष्य लड़के का नसीब अच्छा है तो क्या यहां पे ऐसा हम मान ले कि ठाकुर ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके या तो फिर जो भी है मां काली की कृपा से जो डैमेज हुआ था वह कंटेन हो गया है जो डैमेज हुआ था वह थोड़ा सा रोल बैक हो गया है व से भी करके उन्होंने काली महाराज जो एकदम गहरे गड्ढे में डूबने वाले थे उसमें से उनको बचा करके फिर भी एक लेवल पर लेकर आए हैं क्या ऐसा यह ठाकुर कहना चाहते हैं अदर वाइज तो उसका अ दृष्ट कैसे अच्छा हो सकता है काली अब शशि महाराज का अ दृष्ट अच्छा हो सकता है कि वो उनका व एक नॉर्मल एक डेवलपमेंट हुआ शरत महाराज का अ दृष्ट अच्छा हो सकता है एक नॉर्मल लेवल पर डेवलपमेंट हुआ इतना फास्ट स्वामी जी के जैसा ना हो एटलीस्ट उनके जीवन में डिसर पशन तो नहीं आया तो उनका अ दृष्ट अच्छा है ऐसा बोलेंगे तो समझ सकते हैं काली महाराज का अदृष्टवांठा आप लिखते जाइए क्योंकि महाभारत एक ऐसा चीज है कि वो उसको लिखने वाले भी तो एक आध्यात्मिक शक्ति से पूर्ण होने चाहिए तो गणेश जी ने ऐसा एक सामने कंडीशन रखा कि मैं लिख लिखूंगा आप जो बोलेंगे मैं लिखूंगा उसमें मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है किंतु यदि आप बोलते बोलते रुक जाएंगे तो फिर मैं वहीं से लिखना छोड़ दूंगा तो व्यास मुनि चिंता में पड़ गए आप पूरा महाभारत इतने आजकल के जितने श्लोक है उससे 10 गुना श्लोक शायद ओरिजिनल होंगे वी डू नॉट नो स्पेक्युलेटिंग सतत बोलता जाऊं ऐसा कैसे हो सकता है बीच-बीच में तो शायद मुझे रुकना पड़ेगा तो उन्होंने सामने काउंटर कंडीशन खड़ा किया कि आपको समझ कर के लिखना है बिना समझे आप नहीं लिखेंगे तो फिर वह भगवान गणेश एग्री हो गए अभी यहां पर व्यास मुनि बोलते जा रहे हैं बोलते जा रहे हैं बीच-बीच में उनको कुछ सोचने की जरूरत पड़ी तो उन्होंने कोई कुट श्लोक बीच में लिख दिया वो बोल दिया अभी यह कुट श्लोक इतना कॉम्प्लिकेटेड है कि उसको समझते समझते जो समय गणेश भगवान को लगा उतनी देर में बाकी के जितने भी श्लोक बोलने थे वो व्यास मुनि ने ठीक करके रख दिए तो यहां पे भी वो कुट श्लोक की तरह यह दो स्टेटमेंट है छ मास का गर्भ वाला जो स्ट्रांग स्टेटमेंट है उसका जस्टिफिकेशन हमको अभेदानंद जी के जीवन में एटलीस्ट मुझे नहीं दिखा मेरा पर्सनल स्टडी जहां तक जाता है और दूसरी ही बात यहां पर सामने कहते हैं कि उसका अदृष्टवांठा इस तरह से अदृष्टवांठा जब अभेदानंद जी की कंप्लेन करते हैं तो उस समय स्वामी जी हमेशा उनका पक्ष लेते हैं या तो फिर स्वामी जी ने उनके बारे में उनकी प्रशंसा करते-करते अपने पत्रों में काफी बार कहा है कि हां काली ने किस तरह से मेहनत करके वो मीटिंग करवाया रेजोल्यूशन करवाया उनका स्वागत करवाया वगैरह वगैरह तो वो काली महाराज की प्रशंसा और काली महाराज को सपोर्ट स्वामी जी हमेशा करते रहे हैं तो इस अर्थ में उसका नसीब अच्छा है कि जिस स्वामी जी ने उनका इस तरह से अहित किया वही स्वामी जी भविष्य में उनको कंटीन्यूअसली सपोर्ट करने वाले हैं यहां तक कि वह जो न्यूयॉर्क की फेमस घटना कि स्वामी जी के बाकी जो शिष्य थे वो लोगों वो सभी शिष्य वो मिस्टर एंड मिसेस लगेट जोसेफाइन मैक्लाउड सारा ओली बुल जिसका कि नाम आज रामकृष्ण संघ के सभी भक्तों को पता है इतने फेमस यह सभी शिष्य हैं इन देर ओन राइट यह लोग जब काली महाराज से दूर हो गए तब स्वामी जी ने कहा था कि मैं उसको कुछ भी बोलना नहीं चाहता काली को जिस तरह से न्यूयॉर्क चलाना हो चलाए मैं उसमें अभी मैंने न्यूयॉर्क छोड़ दिया है न्यूयॉर्क का जिम्मा मैंने उसको दिया है तो इवन उनके खुद के डिसाइल स्वामी जी के खुद के डिसाइल गुरु भाई ने कंप्लेन किया तो भी स्वामी जी ने काली महाराज का सपोर्ट किया स्वामी जी के खुद ने डिसाइल ने जब कंप्लेन किया तब काली महाराज के अगेंस्ट में उस समय भी स्वामी जी काली महाराज का सपोर्ट करते हैं सो आर दिस द रीजन कि वो लड़के का अदृष्टवांठा र्पण मस्तु मने आप काली महाराज को तो छोड़ ही

प्रश्न: ठाकुर के शरणागत होने से काली महाराज का अनिष्ट हो ही नहीं सकता

दीजिए ये हाजरा जिसको कि ठाकुर खुद जटिला कुटिला की कैटेगरी में रखते थे उनको वो स्वामी जी ने तार दिया मने ठाकुर ने तारा किंतु स्वामी जी के कहने पर तारा तो उनका जदी वो वो निकल गए भवसागर पार कर दिए और काली महाराज यदि ना पार करे तो तो फिर तो वो बड़ा गड़बड़ मने वो तो बड़ा अन्याय होगा हाजरा जैसा हाजरा यदि ठाकुर की कृपा में तर गया तो फिर यह काली महाराज ने क्या गुनाह किया है क्योंकि घटना वली ऐसी कोई कुछ ब देखिए डिसर पशन हुआ उसमें कोई प्रश्न नहीं है किंतु ठाकुर जो स्ट्रांग स्टेटमेंट देते हैं उसको जस्टिफाई नहीं करता है एक भी डिसर पशन सो वी हैव टू स्पेक्युलेटिंग हम शायद ऐसा कोई कह सकता है फॉर द सेक आर्गुमेंट कि शरद महाराज शशि महाराज हरि महाराज जिस तरह से आगे बढ़े उतना ही आगे नहीं बढ़ पाए होंगे बट फ्रॉम अवर साइड यह तो स्पेक्युलेटिंग ही अपने पास में नहीं है वो तो उस लेवल पर जाकर पता

प्रश्न: रामकृष्ण संघ छोड़ने से कोई बड़ा पाप नहीं हुआ

चलेगा मेरा सिर्फ इतना इसमें एक ही बात ऐड करूंगा कि यदि आपने संघ छोड़ दिया है ना तो संघ के प्रति वेर भाव अपने मन में मत रखिएगा अभी आपने देखिए आपके जो भी इशू होंगे आपने संग छोड़ा यू कंटिन्यू योर साधना कंटिन्यू टू डू व्हाट एवर यू वांट टू डू फुलफिल योर लाइफ अने संग छोड़ा तो कोई इतना बड़ा डिजास्टर नहीं हो गया कि आपके जीवन का अंत आ गया यू कंटिन्यू टू फॉलो पॉजिटिव ट्रेजे क्ट इंस्टेड ऑफ दैट यदि आप एक रिएक्शन में आकर के फिर संघ की निंदा संघ का अहित करने का प्रयास करेंगे तो स्वामी जी ने सिर्फ एक ही जगह पर जो श्राप दिया है कि संघ के विरुद्ध में जो कार्य करेगा उसके सर पर कुल्हाड़ी पड़ेगी तो ये श्राप स्वामी जी ने दिया है सो यू बी केयरफुल ऑफ दैट छोड़ा है तो छोड़ा है अपना काम करो मैं संग के पीछे लगने की क्या जरूरत है देखिए उनके वो अभी भी तो अपने एज

प्रश्न: अभेदानन्दजी के संघ छोड़ने के बारे में

डायरेक्ट डिसाइल में गिने जाते हैं उनकी तिथि पूजा तो अभी हम सेलिब्रेट करते हैं तो वो अधर वाइज तो वो जो अपने सीनियर लोगों ने जो डिसीजन किया है कि टू कीप हिम एज अ पार्ट ऑफ ववर पैंथन तो वो तो बिना सोचे समझे तो नहीं ही किया होगा और बैलून मठ में से भी अभी देखिए कि अभेदानंद जी का एक बड़ा एक यह था उनका कि वह आखिरी तक वह रहे थे मने ही इज द लांगेस्ट लिविंग डायरेक्ट डिसाइल तो अभी ऐसा समय आया कि बाकी सब डायरेक्ट डिसाइल ने समाधि लेना शुरू कर दिया आखिर आखिर में वह तो बस विज्ञान महाराज एक अकेले बचे थे और वह प्रेसिडेंट है और यहां पे ये अभेदानंद जी थे तो बेलूरमठ से कई सीनियर साधु आकर के उनको प्रणाम करने के लिए आते थे वहां पे वेदांत मठ में उनके साथ में बातें करते थे तो यह मैंने एक एक स्मृति कथा पढ़ी है वोय अपने काली काली कृष्ण महाराज स्वामी विरजानंद जी महाराज तो वह जाकर के उनको प्रणाम करते हैं उनके साथ में वार्तालाप करते हैं उसका उन्होंने बड़ा सुंदर एक नोट भी रखा है सो ट की अपने संघ के जो सीनियर मोस्ट साधु थे अदर देन डायरेक्ट डिसाइल दे हैव इक्वल रेवरेंस फॉर काली महाराज अदर वाइज तो ऐसा रिपीटेडली रेगुलरली उनके पास जाकर के आशीर्वाद लेना ऐसा नहीं करते

प्रश्न: जैसा कि आपने कहा, अधिकांश साधु कहते हैं कि वे केवल वेदांत के तकनीकी विषय पढ़ाते हैं, वे प्रत्यक्ष आध्यात्मिक ज्ञान नहीं दे सकते।

हैं ऐसा एक महापुरुष महाराज का स्मृति कथा है उन के एक डिसाइल ने यह लिखी है स्मृति कथा तो महापुरुष महाराज यह सब साधुओं को लेकर के जूनियर साधुओं को लेकर के कहीं पर गए किसी मठ में ना कि कहीं पर नॉर्थ इंडिया में ही शायद व अभी यह कांटेक्ट में भूल गया किंतु इंसिडेंट एकदम पक्का याद है मुझे कि वह इस तरह से किसी मठ में गए वहां पर कोई एक विद्वान साधु बाहर का कोई साधु आकर के महापुरुष अभी वोह जैसे विद्वान है यानी पढ़ाई लिखाई किया शास्त्र को लेकर के तो उनको लगा कि यह तो रामकृष्ण मिशन तो बहुत बड़ा है स्वामी जी विवेकानंद का तो जग जाहिर नाम है अभी यह महापुरुष महाराज उस समय थे प्रेसिडेंट तो रामकृष्ण मिशन का स्वामी प्रेसिडेंट स्वामी विवेकानंद के गुरु भाई यानी कि यह तो कितने विद्वान होंगे तो मैं उनके साथ में वाद विवाद करता हूं यदि जीत जाऊंगा तो मेरा नाम हो जाएगा ऐसा वो होता है ना कि बड़े लोगों को हराओबा करना चाहता है किसी टेक्निकल पॉइंट को लेकर के उस समय महापुरुष महाराज के साथ में जो साधु थे बाकी सब उसमें से एक ने उस बाहर वाले साधु को कहा कि देखो आपको यदि सिद्धांत वाक्य सुनना है तो महापुरुष महाराज से सुनिए और विषय को लेकर के वाद विवाद करना है तो मेरे साथ में [हंसी] कीजिए देखिए मैंने उस समय मैंने सोचा था कि देखिए कितना वो यहां पे डिस्टिंक्शन क्या है सिद्धांत वाक्य यानी कि जगत का कोई भी विषय है आध्यात्मिक विषय उसके बारे में अपनी अनुभूति से बड़े कॉन्फिडेंस के साथ साथ में अथॉरिटी के साथ में बोलना वह हो गया सिद्धांत वाक्य किंतु जो लोग टेक्निकल स्टडी करते हैं अभी मेरा फील्ड है रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर मैं एकदम ओपनली क्लेम कर कह देता हूं कि भाई शास्त्र में कोई मेरा इतना यह नहीं है संस्कृत मुझे नहीं आता है मैं अपने टेक्निकल सब्जेक्ट को लेकर के ही बोलता हूं जो फिजिक्स का टीचर होगा वह यदि ऑनेस्ट होगा तो वो कभी केमिस्ट्री के बारे में नहीं बोलेगा भले ही चाहे उसको लेमन का जितना भी नॉलेज हो आजकल न्यूज़पेपर में हम सभी सब्जेक्ट के बारे में पढ़ते हैं तो बहुत सारे लोग सभी सब्जेक्ट के ऊपर में अपना ओपिनियन भी देते हैं किंतु उस ओपिनियन किसी काम का नहीं होता है जनरली जो एकेडमिक इंटीग्रिटी जिनकी होती है वह अपने सब्जेक्ट लेकर के ही बोलते हैं तो ये तो इसी तरह से जो टेक्निकल टीचर होता है वोह अपने सब्जेक्ट के बारे में बोलेगा अथॉरिटी के साथ में बोलेगा किंतु अपने सब्जेक्ट के बाहर वाले सब्जेक्ट में यदि वह कुछ बोलेगा भी तो डिस्क्लेमर दे देगा कि भाई मेरा इसके बारे में वो लेमन के लेवल का ही नॉलेज है एक्सपर्ट नॉलेज नहीं है किंतु जो अनुभूति जिसको हुई है उसके सामने सभी सब्जेक्ट जैसे कि खुल जाते हैं या तो फिर ठाकुर की तरह सर जिवा पर सरस्वती आकर के बैठती है ठाकुर के पास में आकर के किसी ने कोई भी प्रश्न किया हो ठाकुर ने उत्तर ना दिया हो कि भाई मुझे क्या पता ऐसा हो ही नहीं सकता और इसीलिए यह जो डिस्टिंक्शन है कि टेक्निकल एक्सपर्टाइज्ड तो सामने वाला जद ऐसा सोचता कि अरे वह तो इतने महान है कि इतनी उनकी विनम्रता है किंतु स्वामी जी ने तो ठाकुर को देखा है स्वामी जी से आप छुपा नहीं सकते ठाकुर कोई भी विषय के बारे में जो भी प्रश्न होगा फट कर के वह अथॉरिटी के साथ में उत्तर आएगा क्योंकि जिवा पर सरस्वती है हृदय में नारायण स्वयं बैठे हैं तो उनके लिए कुछ भी मने अनजाना कुछ भी नहीं है सो ट इज अ डिस्टिंक्शन बिटवीन अ टीचर एंड एन आचार्य मने गुरु

प्रश्न: जब हम किसी सच्चे गुरु को सुनते हैं तो हम समझते हैं कि उनका ज्ञान दिव्य चेतना से आता है।

[हंसी] ये जो योग की लैंग्वेज में कहे ना तो पढ़ कर के बोलने वाला सब सबकॉन्शियस में से आता है क्योंकि जो पढ़ा है आपने वह आपके सबकॉन्शियस में स्टोर होगा जब आप बोल रहे हैं तो सबकॉन्शियस में से खींच करके आपको बोलना है और जो अनुभूति वाले हैं उनको सुपरकॉन्शियस में से आता है नॉलेज यानी कि उनके लिए कोई भी बंधन नहीं है कोई भी यह एरिया ऑफ एक्सपर्टाइज्ड विथ एंटायस मोस अभी देखिए कुछ ही दिनों पहले हमने

प्रश्न: ठाकुर को किताबी ज्ञान बहुत कम था

पढ़ा कि स्वामी जी को ठाकुर वो कहते थे कि ये तुम अष्टावक्र संहिता पढ़ो और बाकी जो सब आते थे उनको भगवत गीता या बाकी सब किताबों का पाठ करने को कहते थे अभी बहुत लंबे समय तक बहुत सारे लोग यही एक भ्रम में रहते हैं कि ठाकुर को पढ़ाई लिखाई नहीं आती या ठाकुर किताबें नहीं रखते या उनके कमरे में बस शिव का संसार था यहां तो पढ़ करर के स्पष्ट लगता है कि यहां पर वोह कप बोर्ड में य अष्टावक्र संहिता भी रखी है भगवत गीता भी रखी है तो ये सब रेवलेशन हो रहा है डे बाय डे हु नो उसके एक दिन पता चले संस्कृत के भी पंडित थे स्वामी जी जो प्रचार करते हैं ना आई एम ए डिसाइल ऑफ ए पर्सन हु इज कंप्लीट इलिटरेट ऐसा वो कहीं पे एक दो बार बोल दिए हैं तो मैं मैं इसी भ्रम में था कि ठाकुर इज लिटरली लिटरेट मने उनको सही में लिखना नहीं आता किंतु बाद में ठाकुर के खुद के हाथों से लिखी हुई इतनी सुंदर मैनु स्क्रिप्ट है वो पुंथी वगैरह जो उन्होंने लिखी है तो वो तो कल्चर से पब्लिश हुई है ठाकुर के वो जो सुंदर हैंडराइटिंग के उसमें कितने सारे हैं तो देख कर के हमने को लगेगा कि अरे वो तो मने ही इज नॉट कंपलीटली लिटरेट एटलीस्ट ही कैन राइट सो ब्यूटीफुली सो ऐसे कितने सीक्रेट बाहर आने है हु नोज स्वामी जी ऐसा कहना चाहते हो कि कंपेयर टू मी ही इज इलिटरेट [हंसी] ठाकुर कहते हैं ना कि वह चैतन्य देव की तीन अवस्था होती थी बाह्य दशा अर्ध बाह्य दशा और अंतर दशा तो ठाकुर की भी ऐसी सब अवस्था है अभी इलिटरेट है अभी वह सब पंडित लोगों के मुंह में उंगली डलवा देते हैं ऐसे वह प्रचंड विद्वान हो जाते हैं जैसे वो मां के साथ में हॉटलाइन एस्टेब्लिश हो जाता है वैसे ही सब गुल वेद वेदांत उनके मुंह में से आना शुरू हो जाएगा वो पहले दिन तो मास्टर महाशय को डांट दिया कि क्या तुम्हारी स्त्री अविद्या है तुम ज्ञानी हो दूसरे दिन आक के देखा तो वही ठाकुर वो बच्चों के साथ में हंसी मजाक कर रहे हैं तो मास्टर मसाई लिखते हैं क्या यह वही है जिन्होंने कल मुझे डांटा था कहा था कि तुम क्या मने तुम क्या तुम्हारे में क्या विद्या है या तो फिर वो जो जो काला दूध सफेद दूध काला कैसे हो सकता है तो वो डांट दिया था तो मादर कोली काता दे वही एक मने तुम कोलकाता वालों का वही एक है मैंने लोगों को समझा देना लोगों को कर देना सिखा देना खुद को कौन सिखाए उसका कोई ठीक नहीं तो मास्टर म ये वही है [हंसी]

Question: how to recognize a real guru? I have had an experience of a fake guru.

क्या योर हार्ट विल से बिकॉज मेनी टाइम्स एस वी डिस्कस ट देर इ सबकॉन्शियस देर इ सुपरकॉन्शियस देर इ कॉन्शियस कॉन्शियस लेवल वी स्टडी ए लट ऑफ थिंग्स एंड देन वी गदर देम इन ववर सबकॉन्शियस एटस एटरा एंड देन वी ट्राई टू मेजर इट विथ अवर इंटेलेक्ट बट व्हेन एवर सम क्रुशल डिसीजंस आर टू बी मेड इन अवर लाइफ लाइक हुम टू मेक अवर गुरु दिस वि द अवर हार्ट वी विल हैव टू लेट अवर हार्ट स्पीक टू लेट अवर हार्ट गाइड बिकॉज मेनी टाइम्स इट हैपेंस दैट सम टाइम्स दिस इट इट कम्स फ्रॉम विथ इन अवर सेल्फ दैट यस ही इज राइट फॉर मी फॉर माय ओन एग्जांपल आई नेवर कॉन्शियसली डिसाइडेड दैट श्री राम कृष्णा और स्वामी विवेकानंद आई कैन फॉलो देम और आई कैन डेडिकेट माय लाइफ टू देम और आई विल आई एम गोइंग टू आई हैव नेवर प्लान दैट आई एम गोइंग टू रिनाउंस एवरीथिंग एंड इवेंचर बिकम ए मंक इन राम कृष्णा ऑर्डर दिस ऑल हैपन इंस्टिंक्टिवली दिस ऑल हैपन ऑटोमेटिक नन ऑफ दिस आई हैव एवर प्लान व्हाई बिकॉज़ एट एवरी फुट स्टेप एट एवरी टर्निंग पॉइंट समथिंग फ्रॉम विदन मी हैड टोल्ड मी दैट यस द डिसीजन यू आर गोइंग टू टेक और इट इज राइट और रॉन्ग और रदर और व्हाट एवर यू आर डूइंग राइट नाउ इट इज राइट और रंग इट हैज कम फ्रॉम विदन इट वी कैन गो ऑन थिंकिंग एंड थिंकिंग बट विथ माय ओन एग्जांपल आई कैन से दैट क्रुशल डिसीजंस इन माय लाफ स्पेसिफिकली इन माय स्पिरिचुअल लाइफ दे हैव ऑल बिक ल हैव कम फ्रॉम विद इन मी रदर देन एज अ रिजल्ट ऑफ एनी थिंकिंग प्रोसेस इट दे हैव कम इंस्टिंक्टिवली सो डिफिकल्ट टू अंडरस्टैंड पर हैप्स बट दिस इज माय ओन एक्सपीरियंस दैट दिस सॉर्ट ऑफ डिसीजन हैज टू कम फ्रॉम विदन अस दे हैव टू कम इंस्टिंक्टिवली रदर देन एज अ पार्ट ऑफ एनी थिंकिंग प्रोसेस थिंकिंग विद थिंकिंग यू मे टेक मेनी डिसीजंस विद थिंकिंग यू कैन इवन डिसाइड टू फॉलो समवन बट ट टर्निंग पॉइंट विल कम इन योर लाइफ स्पेसिफिकली इन अवर स्पिरिचुअल लाइफ दैट अवर हार्ट विल से वेदर व्हाट एवर वी आर डूइंग इज राइट र

Question: how will we know what our heart is saying?

नॉट दैट यू विल नो ऑटोमेटिक व्हेन एवर हार्ट स्पीक्स वी नेवर हैव टू ठाकुर ओन एग्जांपल इज दैट द चाइल्ड बिफोर गोइंग टू स्लीप ही आस्क हिज मदर दैट व्हेन ही इज स्लीपिंग एंड सडन ही हैज टू गो टू टॉयलेट देन हि ही टेल्स हिज मदर दैट प्लीज वेक मी अप व्हेन एवर आई वांट टू गो टू टॉयलेट सो हिज मदर सेज इफ यू वांट टू गो टू टॉयलेट यू यू योरसेल्फ विल वेक अप इट दैट दैट इट सेल्फ विल वेक यू अप दैट इंस्टिंक्ट इनसाइड यू दैट इट सेल्फ विल वेक यू अप आई वंट हैव टू वेक यू अप ठाकुर अर्थली एग्जांपल म सम टाइम्स ठाकुर्स एग्जांपल्स आर सो ग्रोस एंड सो अर्थली बट दे आर सो एप्ट सी इट विल कम फ्रॉम विदन यू बिकॉज इट ऑलवेज हैपेंस दैट इंटेलेक्ट इज समथिंग वी कैन नेवर ट्रस्ट स्पेसिफिकली इन द मैटर ऑफ स्पिरिचुअलिटी बिकॉज स्पिरिचुअलिटी सेज ठाकुर हिमसेल्फ सेज दैट एवरीथिंग हैज बिकम अ यू कैन से झूठो होए गछ ठो होए गछ किंतु ब्रह्मज्ञान ठो होई नहीं यानी कि एवरीथिंग हैज बीन स्पोकन थ्रू अवर माउथ ओनली ब्रह्मज्ञान हैज नॉट बीन स्पोकन थ्रू अवर माउथ ब्रह्म ज्ञान इज नॉट बीन एवर सली सो व्हाई बिकॉज़ ब्रह्मज्ञान इज बियोंड अवर इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी टू ग्रस्प सो व्हाट एवर ब्रह्मज्ञान इज दिस आइडिया अबाउट ब्रह्मज्ञान और स्पिरिचुअलिटी और स्पिरिचुअल टर्निंग पॉइंट इट विल हैव टू कम फ्रॉम बियोंड अवर इंटेलेक्चुअल रेंज और बियोंड अवर माइंड एंड व्हेन दिस फ्लेश कम इन अवर लाइफ वी विल इंस्टिंक्टिवली नो दैट यस दिस इज व्हाट माय हार्ट इज सेइंग और दिस ऑर्डर हैज कम फ्रॉम सम वेयर बियोंड माय लिमिटेड इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी इफ इट इफ इट हैज कम फ्रॉम हार्ट देन यू विल फील सेटिस्फेक्शन एंड कंटेंटमेंट अ द टेंशन और स्ट्रेस व्हिच जज लेड टू दैट टर्निंग पॉइंट वंस दैट रेजोल्यूशन कम्स यू विल इमीडिएट फील कंटेंटमेंट सो दैट इज द जस्ट लेट मी गिव यू वन एग्जांपल जस्ट यस्टरडेज एग्जांपल अ हियर आई एम टेकिंग क्लास ऑफ अवर स्टूडेंट्स रेगुलर द स्टूडेंट्स कम्स आई टेक डेली क्लास सो दिस इज द फर्स्ट टाइम आई एम एक्चुअली स्पीकिंग विद स्टूडेंट्स आई हैव इंटरेक्ट विद देम बट टू टेक अ रेगुलर क्लासेस ऑन ए डेली बेसिस सो व्हाट वुड आई टेल देम आई मीन द मॉर्निंग क्लास व्हिच आई एम टेकिंग राइट नाउ इट इज मोर ओरिएंटेड टुवर्ड्स स्पिरिचुअल सीकर्स एंड आई एम टॉकिंग अबाउट सब्जेक्ट्स विद व्हिच आई एम डिपलीट फर्टेर राम कृष्ण विवेकानंद लिटरेचर ओके आई हैव स्टडीड इट एंड आई एम कंफर्टेबल स्पीकिंग विद देम आई डोंट हैव टू वरी टू मच अबाउट इट बट विद स्टूडेंट्स सी फर्स्ट ऑफ ऑल दे आर नॉट रिलीजियस दे हैव कम हियर इन ऑर्डर टू लर्न कंप्यूटर और लैंग्वेजेस एट सेट एसेट और दे आर स्टूडेंट्स ऑफ अवर रीडिंग रूम सो एज सच दे आर नॉट स्पिरिचुअली इंक्लाइंड फर्स्ट एंड सेकंड टॉकिंग अबाउट ठाकुर मा स्वामी जी एटस और रदर एनी पार्टिकुलर रिलीजियस सब्जेक्ट हाउ मच यूजफुल इट विल बी आई डू नॉट नो सो आई हैव बीन एक्सपेरिमेंटिंग विद देम टेलिंग देम डिफरेंट डिफरेंट टाइप ऑफ थिंग्स एंड विथ एन विथ एन एक्सपेक्टेशन दैट सम ऑफ दैट विल स्टिक सम ऑफ दैट विल क्लिक सो सो फार आई हैव बीन एक्सपेरिमेंटिंग एंड आफ्टर अ सिंस लास्ट कपल ऑफ डेज आई हैव बीन टेलिंग देम द स्मॉल स्मॉल स्टोरीज ऑफ मदर दैट मदर इज इन जयराम बाटी वन लेडी डिवोटा कम्स देयर देयर वाज नो प्लेस इन द मदर्स हट टू फॉर हर टू स्टे बट मदर इन स्पाइट ऑफ दैट वेलकम्स हर एंड व्हेन दिस लेडी डिवोटा लीव्स मदर शी फॉरगेट्स हर सारी बिहाइंड शी हैड वॉशड हर सारी एंड केप्ट इट इन सन इन ऑर्डर टू ड्राई नाउ व्हेन शी रिटर्न्स व्हेन शी इज रिटर्निंग सडन मदर रियलाइफ हर सारी हियर मदर एक्चुअली बिकम सो सैड सो सोरोफुल दैट वन मंक टूक द साड़ी एंड गेव इट बैक ही रन ऑन द ओपन ग्राउंड ओपन दिस फॉरेस्ट एंड अ दिस फार्म बिनी द सन ही वेंट एंड गिव हर द सारी व्हेन ही रिटर्न ही रिलाइज ट अनदर क्लॉथ दिस वुमन हैज फॉरगॉटेन दिस टाइम मदर स्टार्टेड क्राइंग दैट माय डॉटर व्हेन शी विल गो टू हर होम शी विल फाइंड शी हैज नो क्लोथ टू वेयर एंड दिस मंक अगेन टूक अनदर क्लॉथ बनीथारो व द ओपन फार्म लेट ही रन फार्मलैंड्स ही रन एंड गेव द अदर क्लोथ टू दिस वमन दिस अ स्मल स्टोरी बट इट इज नॉट फुल ऑफ मिरेकल और एनीथिंग इट जस्ट शोज मदर्स कंपेज फॉर दिस लेडी डिवोटा एंड व्हेन आई वाज टेलिंग दिस स्टोरी इज 10 मिनट स्टोरी आई सो द एक्सप्रेशन ऑन स्टूडेंट्स फेस एंड आई रियलाइफ एंजॉयिंग दस स्टोरी एंड देन आई रिला देन आई क्लिक इन इन माय सेल्फ दैट दिस स्टूडेंट दे लव दिस स्मल स्टोरीज फ्रॉम नाउ ऑन दैट इज व्हाट आई एम गोइंग टू डू सो सी सो आई हैव बीन थिंकिंग थिंकिंग व्हाट टू डू विद द स्टूडेंट्स व्हाट टू टीच देम एंड सडन नाउ इट क्लिक एंड फ्रॉम वयर दिस आइडिया हैड कम इवन आई डू नॉट नो टेलिंग मदर स्टोरीज टू दस स्टूडेंट्स इज कुड नेवर बी माय फर्स्ट चॉइस आई वाज थिंकिंग अबाउट सम कॉर्पोरेट मोटिवेशनल ट्रेनिंग एटस एटस बट नन ऑफ देम वर्क एंड अल्टीमेटली दिस वर्क सो दिस डिसीजन आई टूक दैट दे विल लव मदर स्टोरीज इट वाज इंस्टिंक्टिव एंड द मोमेंट आई सो एक्सप्रेशन ऑन देयर फेस अगेन अनदर इंस्टिंक्टिवली इट क्लिक्ड इनसाइड मी यस व्हाट एवर आई एम डूइंग इज करेक्ट सो टेलिंग मदर स्टोरी इज नॉट एन इंटेलेक्चुअल डिसीजन इट केम फ्रॉम विद इन एंड इट इमीडिएट क्लिक आल्सो सो लाइक दिस व्हेन एवर दिस सॉर्ट ऑफ डिसीजंस कम्स फ्रॉम विद इन यू विल इमीडिएट फील कंटेंटमेंट आफ्टर वर्ड्स व्हेन आई रिटर्न टू माय रूम आई एक्चुअली फेल्ट कंटेंटमेंट लिटरली यस टुडे व्हाट आई हैव डन द 10 15 मिनट क्लास टुडे इट वाज सक्सेसफुल अदर वाइज आई हैव बीन टेकिंग क्लास फॉर सिक्स मंथ्स यस्टरडे वाज द फर्स्ट टाइम आई फेल द फीलिंग ऑफ कंटेंटमेंट