Transcript
ओम स्थापनाय हमने देखा दोनों में से तो एक ही चीज सही हनी चाहिए एक साथ में दो चीज सही दूध यदि वह सफेद है तो वह कल कैसे हो सकता है इस तरह का दुविधा में मास्टर महाशय जो पहले दिन से जो लगे हैं अभी तक उनका यह संदेश चला रहा है हालांकि उन्होंने कहा है की ठाकुर के साथ में उनका वही आखिरी तारक किंतु तारक करना बैंड किया इसका अर्थ हुआ संदेह का समाधान तो अनुभूति होने से ही होता है तो मास्टर महाशय ने फिर से एक बार पूछा था और ठाकुर ने मार्कर भाव अपने ऊपर आप करके हमको 12 कहानी बताई थी ठाकुर ने कहा की मैं सकरवादी के पास में सकरवादी हूं निराकारवादी के पास में निराकारवादी ठाकुर किसी के भाव को आघात नहीं करते थे किसी का यदि कोई एक साधन पाठ लेकर के वो कार्य साधना कर रहा है तो ठाकुर कभी भी उसको यह नहीं कहते थे की भाई तुम जो कर रहे हो वो गलत है तुम ये करो ठाकुर के इतने सर्वप्रथम तो अपनी जो प्रकृति है प्रकृति को समझ करके अपनी साधन पद्धति का चयन करो एक चीज और दूसरा की हमें यदि सकरवादी हूं तो यह नहीं कहना है की मेरा करवा किया तो फिर निराकार पाठ गलत है या तो फिर सरकार के भीतर में ही मैं जी ईश्वर का फॉलो ओवर हूं मैं जी ईश्वर का भक्ति हूं उनको छोड़कर बाकी सब ईश्वर या तो फिर बाकी सब भक्ति उन ईश्वर के भक्ति गलत है ऐसा भी कहना ठीक नहीं है सैनिटाइजिस्म जिसको कहते हैं या तो फिर मतवाला बुद्धि और उसे दिन बात हुई थी ठीक ही है मनुष्य का अर्थ वही होता है की फैंटास्टिसिजम नहीं होना चाहिए एक तरह का धर्म जुनून जिसको कहते हैं वो नहीं होना चाहिए मेरे लिए मैंने जो पांच सिलेक्ट किया है वो शायद सर्वश्रेष्ठ है तो दूसरों के लिए दूसरे जो बात है वो सर्वश्रेष्ठ है अब जी तरह से मैं दूसरों के प्रति निंदा नहीं करूंगा वैसे ही किंतु यहां पे एक बात है देखिए ये प्रश्न मुझे पहले भी किसी ने पूछा था और रिसेंटली भी मेरा किसी के साथ में डिस्कशन हो रहा था कुछ डोमेस्टिक प्रॉब्लम लेकर के की इस तरह से मेरे साथ में व्यवहार होता है तो हम तो धर्म का पालनपुर करते हैं ठाकुरमार स्वामी जी के फॉलोअर है तो हमको तो क्या है की दूसरों को कष्ट नहीं देना चाहिए दूसरों के प्रति सहानुभूति रखती चाहिए तो यदि कोई हमारा अपमान करता है और उससे जब मां में बड़ा कष्ट होता है तो उसका क्या सॉल्यूशन है तो मैंने कहा की यदि कोई अपना अपमान करता है तो उसका दृढ़ता से प्रतिकार करना है स्वामी जी कहते हैं की वोट मैक्स उसे स्ट्रांग इस रिलिजन वोट मैक्स यू वीक इस नोट रिलिजन आईटी इस अधर्म धर्म क्या है जो हमेशा स्ट्रांग बनाता है हमें सशक्त बनाता है और जो हमको वीक बनाता है वो धर्म है अर्थात यदि कोई अपना अपमान करें या तो फिर अपना अधिकार अपने से छन ले तो क्या हम उसकी उसका प्रोटेस्ट नहीं करेंगे उसका प्रतिकार नहीं करेंगे वो ईट का जवाब पत्थर हिंदी में कहावत है एट का जवाब पत्थर से नहीं देंगे अवश्य देंगे ठाकुर ने खुद ने कहा है हालांकि ठाकुर ने जी तरह से कहा है उसको समझना की जरूर है की वह सांप की कहानी है की साहब बड़ा लोगों को दस्त था तो ब्रह्मचारी महाराज ने जाकर के उसको मंत्र दे दिया तो मंत्र देने से सांप बेचारा बड़ा ही शांत हो गया तो अभी गांव वालों ने देखा की आज तक जो सबको कष्ट देता था सबको दस्त था सबका एन जो हत्या करता था वो 7:00 बजे आज इतना शांत हो गया तो चलो जाकर के इसने आज तक जितने गांव वालों की हत्या की है उसका बदला लेते हैं अभी ये मेरे सब्जेक्ट नहीं मैं थोड़ा सा इमेजिनेशन अपनी एड करके का रहा हूं तो वो लोग जल्दी जाकर के सबको मारेंगे जाकर के साथ वो सब बेचारा बड़ा ही घायल हो करके अपने बिल में चला गया जब ब्रह्मचारी महाराज के सारे पूछा क्या रे भाई तुम इतना घायल हो करके इतना दुर्बल हो करके क्यों पड़े हो तो भी उसको याद आया की हां गांव वालों ने मुझे मारा था तो फिर महाराज ने कहा की अरे भाई यदि कोई तुमको करने को आता है तो तुमको सामने भले तुम मैंने कहा था तुम 10 नहीं तुम लोगों की हत्या मत करो क्योंकि फास्ट तो कर सकते थे भाई तो दिखा सकते थे जिससे तुम अपनी रक्षा कर पाव किंतु ऐसा खाने के बाद में ही ठाकुर ने क्या कहा सन्यासियों के लिए ये भी नहीं यदि कोई सन्यासी की हत्या करने को आता है तो सन्यासी अपना सेल्फ डिफेंस भी नहीं कर सकता अभी इसको लोग करके आप बहुत सर कुछ डिबेट कर सकते हैं मधुसूदन सरस्वती की बात है की हिंदू समाज पर जब आ मुसलमान आक्रमण होने के बाद में उनके अत्याचार बढ़ते ही गए तो मधुसूदन सरस्वती राजा अकबर किरसभा में गए और कहा की तुम तो इतने बड़े मतलब लिबरल हो सभी धर्म को तुम सम्मान देते हो और तुम्हारे ही राज्य में जो जितने धर्म गुरु मौलवी है वो हिंदू अप्रत्याचार करते हैं तो क्या तुम इसका कोई सॉल्यूशन नहीं करोगे तो अकबर ने क्या कहा की देखो तुम यदि अपना डिफेंस कर लोग देखो की मेरा राजा तो इन लोगों के ऊपर में खड़ा है मौलवियों के ऊपर में मैं उनको यदि कुछ का दूंगा तो फिर मेरे पे नाराज हो जाएंगे तो किंतु में कम करता हूं तुम यदि अपने को डिफेंड कर सकते हो तो फिर मैं और सामने फिर इन लोगों को बदला लेने नहीं दूंगा वरना ऐसा होता है ना की आप दूसरों के ऊपर में जितना ही चाहे अत्याचार कर ले सामने वाले जब उसका प्रतिकार करेंगे तो हम जाकर के राजा को जाकर के कंप्लेंट करना शुरू कर देंगे अरे वो लोग ऐसा कर रहे हैं तो वो कंप्लेन में ग्रहीय नहीं करूंगा अब अपना का अपना प्रतिकार आप कर लीजिए तो फिर ये जो लोग साधु संप्रदाय है उसकी स्थापना मधुसूदन सरस्वती ने इसीलिए की थी हिंदू धर्म के रक्षा करने के लिए तो अभी वो लोग साधु साधु भी है और वो तलवार लेकर के हिंदू धर्म के रक्षा भी करते हैं तो अभी एक ये बात की ऐसा भी है तो क्या है की मेरा तो नेचर है सर से कांट्रडिक्शन खोजना इसलिए मैं ये कांट्रडिक्शन खोज निकाला है इसका क्या सॉल्यूशन है अभी मेरे पास में नहीं आया है किंतु डर आर कांट्रडिक्शंस किंतु हमारे लिए ठाकुर की बात सर्वश्रेष्ठ है रामकृष्ण संघर्ष के जो साधु है वो अपना प्रतिकार भी नहीं करेंगे हालांकि दूसरी एक बात यह हो गई की अभी आश्रम चालू करके बैठे हैं आश्रम है हमारा यदि कोई अपनी जमीन पे अपना दवा कर ले की ये हमारी जमीन है हमको दे दो और यदि हम उसको डिफेंड नहीं कर पे तो फिर तो ठाकुर की प्रॉपर्टी है ठाकुर का कार्य है उसको नुकसान होगा हम लोग तो सब समय कोर्ट में कैसे भी चलते हैं उसमें हमको जाना पड़ता है प्रॉपर्टी को लेकर के कुछ कहानी एन कहानी कुछ ना कुछ ये छोटा-मोटा चला ही राहत है कोई ना कोई आकर के हमारे विरोध में कंप्लेंट करता भी है यदि हम आ अभी बात ये है की ऐसा तो नहीं है की तुम मेरा मेरी जमीन है मेरा आश्रम है या तो फिर मेरी प्रॉपर्टी है ऐसा तो नहीं है तो ठाकुर का है तो ठाकुर की जो संपत्ति है ठाकुर के कार्य के लिए जो तत्वावधान किया गया है उसको डिफरेंट करना हमारा कर्तव्य है किंतु यह बात होती है की मेरा पर्सनल यहां पर रुकता है और ठाकुर कहां पर आरंभ होता है मेरे अपने रूम में जब जाता हूं तो मेरे रूम में एक बिस्तर और एक टेबल और एक शेल्फ इसके अलावा और कुछ नहीं है पढ़ाई-लिखाई का कुछ समाज है जबकि मैं ऑफिस में आता हूं तो ऑफिस में सब तरह की सुविधा है जो भी मैं चाहूं मैं इमीडीएटली ले सकता हूं रूम में रूम के लिए मुझे कुछ परचेज करना है मुझे 10 बार सोचना होगा की क्या यह जस्टिफाई है ये खर्चा मैं अपने लिए करता हूं यह ठीक है की नहीं है तो ये एक कहां पे हम इसको एक बॉर्डर लाइन एक लक्ष्मण रेखा ड्रॉ करेंगे अपनी पर्सनल लाइफ को कहां तक यह हम अपनी इंस्टीट्यूशन लाइफ से सेपरेट रखेंगे यह देखना बड़ा ही आवश्यक है इसलिए अपने यहां पर ट्रांसफर का सिस्टम है आज मैं इतनी अच्छी ऑफिस में बैठा हूं कल मुझे कहा जाए इसको छोड़ कर के दूसरे सेंटर में चले जो अभी जैसे की यहां पर अहमदाबाद में एक नया सेंटर लिया गया है तो ही वहां के जो बड़े महाराज कई पॉइंट अभी हुआ 1 साल भी शायद नहीं हुआ है सेंटर बिल्कुल नया है और यह अपने सुहित अपने आनंद जी महाराज आए थे जनरल सेक्रेटरी वो जो सब पिछले साल की 5 साल तो हो गए उसे बात को किंतु यह जो जमीन ली गई है वो अभी नहीं है तो नए जो हमारे बड़े महाराज हैं वहां के उन्होंने वो जमीन के फोटोग्राफ्स वीडियो वगैरा भेजें हैं वो पूरा खेत है शहर से ना की 20 किमी दूर है पूरा खेत है और कुछ नहीं है वहां पे एक कंटेनर रखा है कंटेनर में वहां पर जाकर के रहना है और खाना बनाने के लिए वो जो एक जो एकदम प्रिमिटिव तू जो होता है उसे तरह का है और वो खेत में कमर घुटन तक पानी भर जाता है बारिश के समय में तो उसको तो सबसे पहले उसको बाउंड्री वॉल करना है फिर कंस्ट्रक्शन स्टार्ट होगा तो अभी यहां पर मेरे पास में सब फैसिलिटी है और कहानी सुद्दनली जाकर बोल दिया की इस तरह के सेंटर में चले जो की जहां पर खुला खेत के अलावा कुछ नहीं है ना ही कोई मनी फल म्युनिसिपालिटी सर्विस है ना ही कुछ वहां पे कंटेनर में रहना है गर्मी के दोनों में क्या होगा वो तो वो भी ठाकुर ही जान यहां पे टेंपरेचर पूरा 45 होने के साइड चला जाता है 45 डिग्री तो वो सब छोड़ कर के चले जाना पड़ेगा तो ये है की ठाकुर जब कहते हैं की किसको डिफेंड करना है किसको डिफेंड नहीं करना है साधु को संपूर्ण रूप से निर्मित रहना है तो निर्लिप्त तथा हम लोगों के जीवन में हम कहां तक कल्टीवेट कर पाते हैं वो हमको देखना है किंतु गुरुखात के लिए अपना सेल्फ डिफेंस करना सीखना अनिवार्य है यदि आप कहते हैं अभी किसी ने मुझे कहा कुछ दोनों पहले के उसका वो एक बहन है उसका एक छोटा लड़का है तो वो लड़के को स्कूल में जाता है तो किसी ने उसको कोई दूसरा जो लड़का होगा उसे लड़के ने उसको छोटे लड़के को मारा तो वह घर आकर के अपनी मां को कंप्लेन कर रहा है अब यह जो बहन है उनको की वो लड़के ने मुझे मारा तो उसके जो पिताजी है वो बोलते हैं अच्छा एक कम करो लड़के को दूसरे दिन स्कूल मत भेजो वो दूसरे लड़के उसको हरस करते हैं तो उसको स्कूल मत भेजो तो ये बहन जो है वो उन्होंने ठीक कहा की अरे तुम मार का कर के वापस ए गए घर में पड़े रहोगे तो तुम बड़े होकर के क्या करोगे तुम जो जाकर के लड़का यदि तुमको मारता है तो सामने एक झापड़ मार के वापस आओ तो वैसे ही रोते-रोते वापस मत आओ जल्दी तुम अपने को इतनी छोटी उम्र से ही डिफरेंट करना नहीं सिख पाओगे तो बड़े होकर के क्या करोगे स्कूल में ये जो रैगिंग वगैरा होता है वो तो कुछ नहीं है बड़े होकर के आपको जो संसार में फेस करना पड़ता है जब करने के लिए जाएंगे यह रिलेशनशिप है फ्रेंड सर्किल है वह चारों और से प्रेशर तो आपके ऊपर आएगा ही आएगा अपने को नहीं डिपेंड कर पाओगे तो रहोगे कैसे इस संसार में और बोलोगे साधु हो जाऊंगा थिंकिंग दत साधु कौन होता है जो संसार में सक्सेसफुल नहीं होता या नहीं हो पता या नहीं हो सकता है वो भाग करके साधु बन जाएगा इसे वेरी रंग वे ऑफ थिंकिंग धर्म के बड़े में सन्यासियों के बड़े में साधन भजन के बड़े में ये बहुत ही गलत धरना डेवलप करना ये हो जाएगा धर्म का पालनपुर कौन करेगा तो भगवान कृष्णा करेंगे ये अर्जुन करेगा अर्जुन युद्ध क्षेत्र पे बैठा है बोल रहा है की मैं अपने परिवारजनों का वध नहीं कर पाऊंगा तो भगवान कृष्णा क्या कहते हैं निमित्त मंत्र भाव सचिन इनका वाद्यातों में कर रहा हूं तुमको तो सिर्फ निमित्त होना है एक हिंदू धर्म एकमात्र ऐसा धर्म है क्योंकि युद्ध क्षेत्र पे वो इस धर्म का प्रादुर्भाव हुआ है विद्युत क्षेत्र पर इसकी महिमा का गण हुआ है तो यदि युद्ध छोड़ कर के जो भाग जाता है उसके लिए तो हिंदू धर्म है ही नहीं उसने हिंदू धर्म को समझा ही नहीं है वो धर्म की यह धर्म की और जा रहा है तो यह तो है डिफरेंट पॉइंट हो गया यहां पर जो ठाकुर कहते हैं मास्टर महाशय की जो दूरी धरती सरकार और निराकार क्या दोनों एक साथ में र सकते हैं दोनों एक साथ में र सकते हैं क्योंकि ईश्वर है जिसके अनंत भाव है आज हमको सरकार के रूप में दिखाई देंगे कल मेरा करके रूप में दिखाई देंगे परसों दिन विष्णु के रूप में दिखाई देंगे और नसों दिन वो भगवान कृष्णा के रूप में तो कभी भगवान शिवा के रूप में तो कभी मां काली के रूप में तो कभी जीसस के रूप में कभी बुद्ध के रूप में यह जो 1000 फेसेटेड डायमंड जो होता है इस तरह का डायमंड इस तरह का इराक जिसके पैसे उसको इंग्लिश में पैसे देते हैं पता नहीं हिंदी शब्द क्या है तो उसके 1000 फेस सेट से प्रत्येक फेस सेपरेट डिफरेंट कलर तो वैसे ही ईश्वर अनंत है उनके रूप भी अनंत है उनकी साधन पद्धतियां उनको प्राप्त करने के लिए वो भी अनंत है हम जी पद्धति का हम फॉलो करें जी पद्धति के रास्ते पे चले हमको एक चीज याद रखना है की दूसरों को कष्ट नहीं देना की ये नहीं कहना की दूसरे लोग गलत है और साथ में ये भी ख्याल रखना है की यदि दूसरे लोग आकर के हमको कहे की मैं जो कहता हूं वो सही है तुम जो कहते हो गलत है तुम अपने पुरखा की ये हजारों सालों से बनी हुई तुम्हारी संस्कृति को छोड़ दो हमारी संस्कृति को अपना लो तो तुम्हारा कल्याण होगा तुम्हारे परिवार तुम्हारे देश का कल्याण होगा तब जल्दी कोई दूसरा ऐसा आकर के कहता है तो दत करके उसका प्रतिकार करना है हमारे हिंदू धर्म में यह जो वर्ण व्यवस्था थी एक ब्राह्मण है जो की विद्या विद्या का विद्या अध्ययन करता है और विद्या दूसरों को पड़ता है अध्ययन और अध्यापन दोनों करता है ब्राह्मण है और ब्राह्मण की जो रक्षा करता है वह क्षत्रिय यह समाज सब छोड़ कर के जो मोक्ष के रास्ते पे चला है वो सन्यासी है तो यह हमारी एक बहुत ही सुंदर वैदिक व्यवस्था थी तो कालक्रम कल का चक्र तो किस तरह से चला है हमको पता ही है कालका चक्र फिर इस व्यवस्था में पता नहीं कहां से करप्शन ए गया बुद्धिस्म का अपराधुर्भाव होगा आगमन हुआ और उन्होंने पुरी समाज व्यवस्था को फ्लैट कर दिया की क्षत्रिय हो ना की ब्राह्मण हो ना की और कोई भी हो आप इस समाज में आप सबके लिए श्रेष्ठ रास्ता है सन्यास का सबको सन्यासी हो जाना चाहिए सबको मोक्ष मार्ग फॉलो करना चाहिए तो अभी ऐसा करने से क्या होगा की जब आक्रमण आरंभ होता है तो सन्यासी को डिफेंड करने के लिए क्षत्रिय नहीं है और यदि अभी तो ऐसा है की सन्यासी तो कहानी घर-घर जाकर के बच्चों को बताने वाले नहीं तो वेद का अध्ययन और अध्यापन वेद को सीखने वाले लोग ब्राह्मण के साथ में ही लुप्त हो गए तो जो पुरी विद्या थी विद्या विलुप्त हो गई बच्चों को सीखने वाले टीचर भी नहीं रहे और सन्यासियों को या तो फिर गृहस्ती को डिफाइन करने वाले क्षत्रिय भी नहीं रहे तो बोल करके जब आक्रमण शुरू हुए भारत देश भारत का समाज एक बहुत ही वल्नरेबल कंडीशन में आ ए गया था और उनको डिफीट आफ्टर डिफीट पराजय के बाद पराजय का सामना करना पड़ा ठाकुर ए करके स्वामी जी ठाकुर मां आकर के यह जो पुरातन वैदिक संस्कृति है उसका पुनरुत्थर किया है हम लोग कभी यह नहीं कहते की मोक्ष मार्ग सबके लिए है जो क्षत्रिय है उसको प्रजा का डिफरेंस करना ही चाहिए उसके लिए रास्ता है की भले चाहे जैसे ठाकुर कहते हैं की तुम जी रास्ते पे चलो वो रास्ता तुम्हारे लिए ठीक है जाकर के दूसरों को परेशान मत करो किंतु दूसरे रास्ते पर चलने वाले जल्दी तुम्हारे पास आकर के कहते हैं की तुम अपना रास्ता छोड़ दो तो कभी उसकी बात स्वीकार मत करो और यदि वह अत्याचार करने का आरंभ करता है तो उसका दृढ़ता पूर्वक प्रतिकार करो यह है हमारा हिंदू धर्म अभी सरकार और निराकार के बड़े में तो कल बात हुई मनी मास्टर महाशय अच्छा ठाकुर जो कहते हैं एक बार पढ़ लेट हूं कबीर दसों अर्थात कबीर दास का निराकार के ऊपर में बड़ा ही निष्ठा था बड़ा ही प्रेम था कृष्णा और कथाएं कबीर दास बोल तो कृष्णा की बातें कबीर दास कहते हैं ओके की उनकी आराधना क्यों करूं उनकी आराधना करने से क्या लाभ है गोपी राहत ताली दी तो हर उन्हीं बैनर नाचना गोपी हाथ ताली बजती गोपिया हटली बजती और कृष्णा बंदर की तरह नाचते अभी निराकार वाले जो होते हैं दूसरों का इस तरह से अपमान करते हैं भले करले अभी ही सागर वाले भी नीरा कर वालों का कम अपमान नहीं करते हैं तो जो भी है अपमान कर लिया शायद उनके मुंह पर नहीं करना ही ठीक है मेरे साथ में सरकार हूं निराकरवादियों के साथ में निराकार तो मास्टर महाशय मनी हंसकर कहते हैं सहसीय जर कथा हो छह-तिनi अपनी अनंत जिनकी बात हो रही है अर्थात की ईश्वर की वो भी अनंत है और साथ-साथ में जो ईश्वर की बात करने वाले हैं आप करने कर रहे हैं वो आप आप भी अनंत है अपना और चीन आपका अंत पन कठिन है आपका अंत नहीं मिलता है अभी वो कहानी है ना की भगवान विष्णु की नाही में से एक कमल का उद्धव हुआ तो ब्रह्मा का आरंभ कहां पर है वह देखने के लिए जो कहां तक उसका अंत आता है वो देखने के लिए ऊपर ऊपर जा रहा है किंतु कमल की जो डाली है उसकी जो स्टेम है वो इतनी लंबी है की उसका अंतिम नहीं आता है तो उसका प्रारंभ कहां पर है वो खोजना के लिए ब्रह्मा पर्यटन करते हैं तो वो भी नहीं मिलता है तो जी तरह से ईश्वर अनंत है ईश्वर की नाही में से निकाला हुआ वो कमल जिसका ना ही अंत है ना ही प्रारंभ है वैसे ही मास्टर महाशय कहते हैं की ईश्वर वो अनंत है और आप आप भी अनंत है आपका अंत नहीं मिल रहा है अर्थात की ठाकुर के जो भाव है ठाकुर जो ईश्वरीय बातें करते हैं वो उनके पास में इतना बड़ा साधन भजन अनुभूति का खजाना है की उनके पास में जो कोई भी आए जी तरह के संदेह संचय लेकर के आए उसका समाधान ठाकुर कर दे सकते हैं अनुभूति के बाद अनुभूति वो एक छोटा सा प्रसंग है की एक बार उधर ठाकुर को बोलना था की आपको जी तरह से अनुभूति होती है मुझे भी कुछ करवा दीजिए तो ठाकुर ने कहानी उसको ऊ लिया तो वह एकदम ठाकुर ने ऐसा कुछ किया की उसको भाव हो गया भाव अर्थात की कोई उच्च आ कॉन्शसनेस के कोई हायर लेवल पे चला गया तो जैसे ही वो वहां पे चला गया एकदम खुश हो करके चिल्लाने लगा अरे रामकृष्ण चलो चलो हम गांव चलते हैं लोगों में भगवान का नाम मिलने हैं भगवान का नाम का वितरण करते हैं लोगों को मोक्ष दिलवाते हैं लोगों को आशीर्वाद देते हैं उपदेश देते हैं तो ठाकुर क्या कहते हैं अरे साले इस तरह के अनुभव तो मुझे दिन में कितनी बार होते हैं तुमको एक बार हो रहा है ऐसा चिल्ला रहे हो शांत हो जो फिर ऐसा करके उसकी छाती पे हाथ रख कर क्या बोले छोड़ दे इसको साले को जड़ बना दो तो फिर उसका भाव का अपमान हुआ तो वो बेचारा बड़ा ही दुखी हो गया बोला की मामा भांजा था उनका ठाकुर का की आपने ऐसा क्यों कहा मुझे जड़ बना देने के लिए तो ठाकुर नेता नहीं नहीं तुम्हारा भाव का उपशम हो इसलिए मैंने ऐसा कहा था भाव में रहकर के तो क्या-क्या अब्दुल टेबुल बाकर रहे हो तो थोड़ा सा मेच्योरिटी तो हो भाव धरण करने की तब तो भाव होगा तो हमारे जैसे गृहस्थ गृहस्ट होना के साधु को एवं हम भी एक बार भाव होने से हमारे साथ में हम लोग अपने को क्या एक बड़ा समझना लगता हैं अरे मुझे एक तरह का अनुभव हुआ अरे मेरे साथ में ऐसा हुआ हम दूसरों को उपदेश देने को आतुर हो जाते हैं मुझे ऐसा इतना नरेंद्र काशीपुर में साधना कर रहा था एक एक दिन वो काली महाराज को बोला की अरे मुझे ऊ के देखो क्या होता है तो काली महाराज ने जैसे नरेंद्र को छुआ एकदम करंट लगा तो वो अभी ठाकुर ऊपर में बैठे थे फर्स्ट फ्लोर पे उन्होंने नरेंद्र को बुलाया वो समझ गई इम्मीडिएटली की ग्राउंड फ्लोर पर क्या हो रहा है नरेंद्र को बुलाया अरे तुमने कलेक्ट करने से पहले ही तो डिस्ट्रीब्यूशन करने का आरंभ कर दिया डिस्ट्रीब्यूशन करना शुरू कर दिया पहले तो शक्ति तुम यह करो और वह करो फिर शक्ति का वितरण करो अभी तो तुम्हारा शक्ति तो तुम्हारी संग्रह हुई नहीं है और शक्ति एक बार संग्रह होगी तो हमारी मेच्योरिटी आएगी की शक्ति का वितरण किस तरह से करना है अभी उनको नरेन स्वामीजी उसे समय थोड़े से उनको कंट्रोल नहीं होगा शक्ति के ऊपर में काली महारत्न को ऊ दिया तो क्या हुआ भक्ति के रास्ते से चल रहे थे सुद्दनली निराकार के रास्ते पे ए गए और फिर उनके बिहेवियर में कुछ कुछ अपूर्ण आता है देखनी स्वरूप हो गई थी तो ठाकुर ने स्वामी जी लीला प्रश्न में शरद महाराज लिखने हैं की नरेंद्र को इस तरह से छुआ नरेंद्र स्वामी जी उसे समय निराकार के भाव में थे उनको ऊ लिया तो जबरदस्ती उसका मां सरकार की और से निराकार की और ए गया इसलिए ऐसा हुआ तो इसलिए ठाकुर है हमारे साथ में एवं स्वामी जी के साथ में एक बार भाव हुआ एक बार कोई अनुभव हुआ तो कितना कठिन हो जाता है उसको कंटेंट करना उसको संभालना ठाकुर को भाव के बाद भाव होते ही चाहते हैं दर्शन के बाद दर्शन होते ही जाते हैं एक के बाद एक अनुभूति होती ही जाति है किंतु वो सब उनके भीतर में इतना सुंदर रूप से सजा करके राखी गई है जैसे की किसी भी तरह की अपर्णता किसी भी तरह का चंचल्या किसी भी तरह एक छिछोरे भाव उनमें कभी नहीं दिखता अभी कोई तो होता है ना की खासकर के मैंने दूसरी जगह पे ऐसे साधुओं को देखें हैं वो आपका वो पर्सनालिटी डेवलपमेंट का क्लास लेंगे और आपको मैनेजमेंट सिखाएंगे क्या-क्या सबसे खाएंगे और बातें भी किस तरह की वो करेंगे वो थोड़ा सा भी इसमें दम ना हो मैं अभी कुछ दोनों पहले वो जो एक कंट्रोवर्सी हुआ था किसी ने स्वामी जी के बड़े में कुछ का दिया उसको लेकर के फिर कितने लोगों ने इसका विरोध किया तब कहानी जाकर के उसका मां बैंड हुआ वरना वो बोलते ही जा रहा था बोलते ही जा रहा था तो सामान्य आदमी के साथ में थोड़ा सा भी भाव सामने से उसका छिछोरापन भीतर का फटकार के बाहर ए जाता है वो उसको छुपा नहीं पता जबकि ठाकुर के साथ में भाव के बाद भाव दर्शन के बाद दर्शन होते ही जाते हैं और फिर भी वो इतने सुंदर अवस्था में रहते हैं की उनके प्रति हमको श्रद्धा भक्ति ही प्रकट हो इसीलिए मास्टर महाशय कहते हैं की ईश्वर के जी तरह से अनंत भाव है वैसे ईश्वर की बातें करने वाले आपकी भी भाव अनंत है आपका भी अंत नहीं है श्री राम कृष्णा सहस्य तुम ही मुझे फैलेचो ठाकुर ने हंसकर के कहा हां अभी तुम ठीक-ठीक समझ गए हो की जानो शब्द धर्म एक बार परिणीति हुए क्या पता है सब धर्म एक बार कर लेने चाहिए शॉप पोट दिए कोल अस्ते हुए सब रास्ते से चले जाना पड़ता है ईश्वर के पास खोल खेल और घटी शॉप घर ना पर होने की चिक उठे अभी ये किसी गेम के बड़े में बोल रहे हैं और उसकी वह जो यह है मेरे पास ट्रांसलेट करने के लिए किंतु वह जो गेम की वह जो यह रहते हैं पीस जिसको बोलते हैं वह सब घर अर्थात की सब जगह नहीं जाएंगे तो उसका अंत कहां आएगा ऐसा कुछ बोल रहे हैं बंगाली में तो समझ में ए रहा है किंतु हिंदी में कैसे समझे नहीं पता उसका ट्रांसलेशन मुझे देखना पड़ेगा किंतु यह है की किसी गेम का पर क्लिक कर रहे हैं जिसमें जितने भी वह बॉक्स है उसे सब में से जाकर के उसके गेम पीसीएस को जाना होगा तब कहानी जाकर के उसका अल्टीमेट डेस्टिनेशन तक जाएगा ये जब आखिरी उसका वो जो अंतिम उसका मुकाम है वो प्राप्त कर लेने से उसको कोई ऊ नहीं पता जो भी है इसका मुझे एक बार देखना पड़ेगा कौन सी गेम के बड़े में बात कर रहा है मनी आगे हां मनी अर्थात माशा महाशय कहते हैं जी हां राम श्री रामकृष्ण के अभी ये जो कहा है की सब रास्तों से चले जाना पड़ता है तब कहानी जाकर के आप अभी देखिए ठाकुर क्या कहते हैं यहां पे ऐसा क्यों कहा की सब रास्तों से जाकर के अनुभूति साधना करनी पड़ती है अभी हमको रामकृष्ण मिशन में ठाकुर ने किसी को यह नहीं कहा की तुम मधुर भाव के साधना करो या तो फिर तुम शक्तिशाद ना करो सबको करना है ऐसा कभी नहीं कहा ठाकुर ने कहा है जिसका जो भाव है उसके अनुसार वो वो साधना करेगा है जैसे की नरेंद्र को बोला था की तुम अष्टावक्र संहिता पढ़ो तो नरेंद्र स्वामी जी ने जब पढ़ने की शुरुआत की तो बेचारे परेशान हो गई यहां पर तो एकदम एकदम चांग का अद्वैत भाव है में ही ईश्वर हूं या तो फिर मेरे भीतर में जो आत्मा है वही ब्राह्मण है वो इस तरह से जो बातें कर रहे हैं तो इसको सुनकर के पढ़ा करके नरेंद्र बेचारा थोड़ा सा डर गया बोला ये जो बार-बार बोलते जा रहे हैं की नहीं आसमान हूं मैं ही ब्राह्मण हूं मैं ही ईश्वर हूं ये तो बड़ा ही गलत है यह जो कम कंचन में बंदर जो शरीर पांच महाभूत के पिंजरे में फंसा हुआ ये ब्राह्मण कहां से हो सकता है तो अभी ऑफ कोर्स वेदांत ठीक से हमको समझता है की यह शरीर नहीं ये मां बुद्धि चित अहंकार नहीं किंतु इनके भीतर में जो आगमन है वो ब्राह्मण है उसको हमको त्याग करके एक के बाद एक विष्णु का त्याग करना होगा इंद्रियों के ऊपर में विजय प्राप्त करनी होगी तब कहानी जाकर के हमको अपने सही स्वरूप का अनुभूति होगी किंतु जब कोई नया नया वेदन पढ़ने की शुरुआत करता है वह थोड़ा सा ये सब बटन वो पढ़कर डर जाता है तो नरेंद्र ठाकुर को कहा की मैं यह सब नहीं पढ़ने वाला हूं तो ठाकुर ने कहा अच्छा ठीक है तुम अपने लिए मत पढ़ो तुम मुझे सुनाओ मैं सुनूंगा तो अभी ठाकुर को सुनने के लिए पढ़ने हैं तो वो तो पढ़ना तो हो ही गया तो नरेंद्र के लिए वो भाव है तो काली महाराज के लिए था की वो भक्ति मार्ग उनके लिए श्रेष्ठ था जिनको जिसका जो भावना ही है जबरदस्ती दूसरे भाव में दाल दिए तो फिर काली महाराज के साथ में जी तरह से प्रॉब्लम होना शुरू हुए थे इस तरह से होना शुरू हो जाएंगे कोई कोई अखंड का कोई कोई सरकार के साथ ना करेगा कोई कोई निराकार की करेगा सरकार में भी कोई काली का वक्त है कोई कृष्णा का भक्ति है कोई सेवा भक्ति है तो उसके अनुसार उनकी साधना हनी चाहिए तो ठाकुर जिसको जी तरह का भाव है वो साधना करवाते थे तो यहां पे ऐसा क्यों कहा की सब तरह के रास्ते से जा करके एक बार साधन भजन कर लेना चाहिए तो यहां पर उन्होंने अपने बड़े में कहा है जो आचार्य है उसको बहुत सर कुछ ज्ञात होने की जरूर है तभी तो वो कोशिशें को उपदेश दे पाएंगे जैसे ठाकुर कहते हैं ना की अपने को करने के लिए सी काफी है तलवार तो चाहिए जब दूसरों की हत्या करनी हो तो ये बहुत सारे रास्तों से बहुत साड़ी अनुभूतियां से ईश्वर का दर्शन करना ईश्वर साक्षात्कार करना बहुत तरक्की फिलासफी दर्शन शास्त्र का अध्ययन करना वो तो कब है जब हम किसी को समाज हम लोग जब ठाकुर्मा स्वामी जी के उपदेश लोगों को बताने के लिए जाते हैं तब कहानी जाकर के हमको ये सब चीजों की जरूर है किंतु जब जहां तक मेरा खुद का प्रश्न है वो सी मार्केट भी मैं सुसाइड कर सकता हूं अर्थात मेरी प्रकृति के अनुसार जो साधन पद्धति है उसका उसको अनुष्ठान करने से ही उसको फॉलो करने से ही मुझे अनुभूति होना शुरू हो जाएगा मेरी आध्यात्मिक जर्नी आरंभ हो जाएगी और मेरी आध्यात्मिक जननी का अल्टीमेट डेस्टिनेशन है वहां तक में जा पाऊंगा वह मेरी प्रकृति के अनुसार साधना करने का कुर्मा स्वामी जी की बात करते हैं तब हम कुछ जाकर के विभिन्न तरीके साधन पद्धति और दर्शन शास्त्र सीखने की आवश्यकता है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलता है ओम शांति शांति