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जय मां जय ठाकुर उसे दिन हमने देखा की किस तरह से ठाकुर कहते हैं की कामिनी और कंचन ही जो है वो योग में व्याघात पहुंचने हैं जो हमारी योग साधना में हमारी ईश्वर प्रताप की जो साधना है उसमें वो है जो बड़ा स्वरूप है और हमने ये भी देखा की किस तरह से हमारे शरीर में एक प्राण शक्ति होती है एक ओजस होता है अभी ये ओजस क्या है जैसे बच्चा जब जन्म लेट है तब पहले से ही उसके शरीर में उसके मां में उसके हृदय में ये ओजस शक्ति रहती ही है सिर्फ वही बात है की ये जो शक है जैसे-जैसे दिन चलते जाते हैं वैसे-वैसे यदि इस ओजस शक्ति को कहानी अच्छे से इस्तेमाल ना किया गया इसका यदि इन्वेस्टमेंट ना किया गया तो क्या होगा की यदि इसका जो है अपव्यय हो जाएगा और जो है हमारे में से धीरे-धीरे करके ओजस चला जाएगा तो ओजस चले जान से या जस्ट कम हो जान से क्या हम लोग जो है तमस में चले जाते हैं हमारा जो नेचर है वो क्रोधी हो जाता है ईर्ष्यालु हो जाता है दूसरों के प्रति हम लोग जो है विद्वेष भाव जो है वो प्रकट करते हैं किंतु जैसे यदि हम इस ओजस को जैसे कोई उसे स्मार्ट इन्वेस्टर होता है ना वो उसको पता है किस स्टॉक में पैसा डालने से उसको जो है उसका रिटर्न ज्यादा मिलेगा या तो फिर पैसा है तो उसको एक अच्छे से बिजनेस में लगाएं और हार्ड क करें बड़ा ही मेहनत करें तो उसका जो बिजनेस है वो और भी ज्यादा वो डेवलप हो और भी ज्यादा एक्सपेंड हो और उसने जो इनिशियल इन्वेस्टमेंट किया था उसके ऊपर में उसको रेगुलर प्रॉफिट मिलन शुरू हो जाए तो ऐसे लोग होते हैं इस जगत में स्मार्ट इन्वेस्टर बोलो ना की स्मार्ट बिजनेसमैन बोलो तो हमको भी इस तरह से एक स्मार्ट इन्वेस्टर या तो फिर स्मार्ट सड़क होना है हमारे भीतर में जीवन से ही जो ओजस था उसको इस तरह से सदुपयोग करें उसका सात कार्य में लगाएं या तो फिर उसको इस तरह से कार्य में इसको इन्वेस्ट करें की वो कार्य करने से हमको और कहानी ज्यादा उसका ओजस में रिटर्न मिलन शुरू हो जाए अभी जैसे देखिए मैं पढ़ाई-लिखाई करने के लिए ऊपर में यदि ओजस शक्ति को व्यायाम करता हूं तो क्या है मुझे हो सकता है की फिजिक्स या मैथमेटिक्स या तो फिर सोशल साइंस या तो लैंग्वेज जो कुछ भी मैंने पढ़ना चाहा वो सब्जेक्ट जो है वो शायद मैंने का लिया वह सब्जेक्ट जो है शायद उसमें मेरी मास्टरी ए गई एक्सपर्टीज ए गई किंतु मैंने जो ओजस गवाया वो सीखने के लिए वो तो चला ही गया उसका तो मुझे कोई रिटर्न नहीं मिला इसीलिए हम कभी-कभी देखते हैं ना वो स्टोरी में देखते हैं की वह मेड साइंटिस्ट एक ऐसा साइंटिस्ट के जिसके पास में बहुत नॉलेज है और उसने एक ऐसा डेंजरस वेपन बनाया है जिससे की हजार लॉक खोलो मा जाए और ऐसे मेड साइंटिस्ट या तो पागल साइंटिस्ट से और कहानी भारी हुई है क्यों ऐसा साइंटिस्ट हमको कभी लगेगा की ये ऐसा नहीं होता है की कोई एकाग्र करता है मां को तो एकाग्र करने से तो क्या है की उसकी वो जो संकल्प शक्ति बढ़नी है और संकल्प शक्ति बढ़ाने से जो है ईश्वर के रास्ते में ईश्वर प्रताप के रास्ते में यदि चाहे हम ईश्वर में विश्वास करें ना करें ईश्वर प्रताप के रास्ते में हम आगे बढ़ेंगे ऐसा एक जनरल आम सेंस कोई कोई लोग सोचते हैं की आप चाहे वो ईश्वर के ऊपर में अपने मां को एकाग्र करें ना की आप जो है किसी साइंस के ऊपर में किसी लर्निंग के ऊपर में मां को एकाग्र करें मां को एकाग्र करना तो से ही हुआ किंतु देखिए से किस तरह से नहीं है जैसे कोई भी मटेरियल साइंस से कोई भी बाहर का जो एक्सटर्नल साइंस या तो एक्सटर्नल कोई भी सब्जेक्ट है उसके ऊपर मां को एकाग्र करने से हमारा ओजस जो है वो खर्च होता है वो व्य होता है किंतु उसके सामने उसका रिटर्न नहीं मिलता मुझे चाहिए मुझे आज जैसे की मुझे स्विमिंग सीखना है तो मैंने ओजस मेरे भीतर में जो ओजस शक्ति है वो व्य करके मैंने स्विमिंग शिखा किंतु फिर वो स्विमिंग सीखने के बाद में मैंने जस डाला था वो वापस नहीं आया स्विमिंग सीखने में चला गया मैंने ओजस खर्च किया और स्विमिंग शिखा किंतु बस वहीं तक मैंने स्विमिंग ही शिखा मैंने जो गवाया हुआ ओजस वो तो वापस नहीं आया जबकि ऐसे कोई भी कार्य जो की हम निष्काम भाव से करते हैं जो की हम करुणा से वाष्प हो करके करते हैं दूसरों की भलाई के लिए करते हैं या तो ईश्वर प्रताप के लिए करते हैं ऐसे कोई भी कार्य में ओजस को यदि हम इन्वेस्ट करते हैं और जिसको यदि हम व्य करते हैं और जस्ट यदि खर्च करते हैं तो जब हमको वो कार्य तो संपन्न होगा ही होगा किंतु सामने में ओजस जो है वो जस्ट हमको रिटर्न हो करके मिलेगा जो इन्वेस्टमेंट हमने किया है वह इन्वेस्टमेंट के ऊपर में हमको पॉजिटिव रिटर्न भी मिलेगा तो दो तरह और संकल्प शक्ति यह दोनों तो आपको सभी कार्य करने में चाहिए ही चाहिए किंतु यदि फिर भी हम एकाग्रता और संकल्प शक्ति का इस्तेमाल करके सब तरह के कार्य करते हैं जो की निष्काम भाव से सेवा भी करना करुणा से प्रवश हो करके करुणा के भाव से हम दूसरों की भलाई के लिए जगत के हिट के लिए कोई कार्य करना आत्मा के मोक्ष के लिए कोई कार्य करना हमारा जो रामकृष्ण मिशन का वो मोटो है जगत हटाया दो तरह के कार्य ऐसे हैं जो की आप जो है एक शुभ कार्य का सकते हैं और फिर दूसरे कार्य अशोक तो नहीं है जैसे परीक्षा में पास होना या नो जब करना या तो बिजनेस करना या तो घर संभालना है तो बच्चों की जो है परवरिश करना या तो फिर है माता-पिता का जो है वह ध्यान रखना जो भी कार्य है अभी कार्य इत्सेल्फ हम कौन सा करते हैं वो बात नहीं है कार्य किस भाव से करते हैं इस भाव के पीछे यदि हम किसी की सेल कोई भी कार्य करते हैं इसके पीछे हम यदि ये भाव रखते हैं की हां इससे किसी का भला हो जगत कल्याण हो या तो फिर किसी को इससे फायदा हो जो की मुझे मुझे अपना फायदा इतना नहीं देखना जितना मुझे दूसरों का देखना है तो वो सात्विक कार्य है और सात्विक कार्य में खर्च किया गया ओजस हमको रिटर्न में मिलता है साधना की तो कोई बात ही नहीं है यदि ईश्वर प्रताप के लिए कोई भी कार्य किया जाए तो उसमें जो ओजस डालते हैं वो तो हजारों गुना जो है वो मल्टीप्लाई हो करके हमको वापस मिलता है तो किंतु जो मटेरियल अपने कंफर्ट के लिए जो कार्य करते हैं इंद्रिय सुख के लिए जो कार्य करते हैं अपने खुद के भोगविलास के लिए कार्य करते हैं स्वार्थ से प्रेरित होकर के जो करते हैं वह सब चीजों में हम ओजस को डालेंगे किंतु फिर सामने कुछ ओजस नहीं मिलेगा शायद हो सकता है उसे कार्य में सिद्धि प्राप्त हो अभी जैसे ओजस खर्च होता ही गया होता ही गया तो आखिर में क्या होगा हम लोग जो है तमस में डब जाएंगे और यदि हम ऐसा कोई जो है की साधना या तो जगत कल्याण के लिए कार्य करते हैं तो ओजस बढ़ता ही जाएगा बढ़ता ही जाएगा हम सत्व में चले जाएंगे तो ये पूरा मेकैनिज्म है ये पूरा साइकोलॉजी है और अशोक कार्य के बड़े में तो कहना ही क्या मैन किसी की बुराई करने के लिए कोई कार्य करते हैं जैसे क्रिमिनल एक्टिविटी है माफिया है या तो फिर यह जो क क्रिमिनल्स है या तो फिर ये जो मर्डर से ये लोग तो जो भी अशोक कार्य करते हैं उसमें उनका जो पूरा ओझा से एक ही बार में पूरा खत्म हो जाता है और वो सीधे जाकर के तमस में गिर जाते हैं और जितने एक के बाद एक अशोक कार्य करते जाएंगे उतना ही वे लोग जो है और तमस में जो है वे लोग डूबते जाएंगे तो उन लोगों की तो बात ही अलग है हम जैसे सामान्य लोगों के बड़े में ऐसा है की हम लोग जो है ओजस शक्ति क्या है या प्राणशक्ति क्या है वह किस तरह से कम करती है वो हमको समझ में नहीं आता इसलिए हम अपनी एक्टिविटीज जो है क्या कार्य करना है उसको हम ठीक से कभी कभी मैनेज नहीं कर पाते किंतु हमको पता चल जाए की ओजस किस तरह से कार्य करता है वो यस ओजस का लॉजिक क्या है तो हम अपनी एक्टिविटीज अपने कार्य को इस तरह से प्लेन कर पाएंगे की मुझे देखिए जगत संसार का कार्य तो मुझे करना ही है उसमें तो अभी मैं कहां से मुझे अपनी ड्यूटी में से छुट्टी मिलेगी किंतु साथ-साथ में ऐसा भी कार्य करते जो सुबह शाम एक टाइम रख करके की जिससे की मेरा ओजस मल्टीप्लाई हो तो एक तरह का कार्य करने से ओजस जो है व्य होगा और जस्ट जो है वो एक्सपेंड होगा तो दूसरा कार्य करना है जिससे की ओजस मल्टीप्लायड हो तो इस तरह से यदि हम बैलेंस रख कर के कार्य करेंगे तो धीरे-धीरे जो है हम सत्व की और बढ़ते जाएंगे ओजस का जो बैंक बैलेंस है वो बढ़ता जाएगा हम सत्य की और बढ़ते जाएंगे तो ये हो गया ओजस का साइंस इसलिए ठाकुर यहां पर कहते हैं जब ठाकुर कहते हैं की कामिनी और कंचन का त्याग करना है इसका अर्थ क्या है की ये दोनों एक इस तरह के कार्य है जो की हमारे ओजस को संपूर्ण रूप से का जाता है तो जो हमारे ओजस को संपूर्ण रूप से वो खत्म कर देते हैं इसीलिए इन दोनों से दूर रहना है और यदि संसारी है ऐसा नहीं है की संपूर्ण त्याग करो तो संभव ही नहीं है किंतु संसारी है तो धर्म के आधार पर अर्थ और कम इन दोनों का अनुष्ठान करना है जिससे की हमारी जो आध्यात्मिक प्रगति है या तो हमारी जो ओजस की वो संपत्ति है उसको हनी ना पहुंचे तो यह सब तो हमने ऑलरेडी देखा था थोड़ा सा रिपीट कर दिया अभी पढ़ भी लेट हूं फिर से एक बार ठाकुर कहते हैं किसी किसी में योगिया के लक्षण दिखते हैं परंतु उन लोगों को भी सावधानी से रहना चाहिए कामिनी और कंचन ही योग में इतना डालते हैं योग भ्रष्ट होकर सड़क फिर संसार में आता है भोग की कुछ इच्छा रही होगी इच्छा पुरी होने पर वह फिर ईश्वर की और जाएगा फिर वही योग्य की अवस्था होगी अभी देख लीजिए सर आ जैसे इस जन्म में जो है मैंने योग मैंने कोई भी प्रकार की साधना करने की शुरुआत की तो हो सकता है की साधना में बीच में कहानी पे ऐसा कोई वाइन ए गया की मेरी साधना अधूरी र गई तो उससे कोई टेंशन लेने की जरूर नहीं है नए जनों में हम जहां से हमने छोड़ है वहीं से वो साधना फिर से आरंभ करेंगे देखिए बहुत सारे लोग सोचते हैं की मुझे कोई खास करके जैसे की पढ़ाई-लिखाई करनी है या तो फिर कोई पता है बहुत सारे लोग आजकल तो अमेरिका की ये जो वेस्टर्न कलर है ना उसका अनुकरण करके न्यू एयर रेजोल्यूशन होता है उनका वो जो फर्स्ट जनवरी आता है ना तो न्यू एयर उनका तो वो लोग कोई न्यू एयर रेजोल्यूशन लेते हैं कोई अच्छा सा वो संकल्प लेंगे की हां इस साल में मैं जो है की वो जो तेल और वो जो हाय वो जो जिसमें ये राहत है कार्बोहाइड्रेट उसे तरह के जो खुराक है जो जंक फूड जिसको कहते हैं जंक फूड में नहीं खाऊंगा अमेरिका में जंक फूड बहुत चला है तो न्यू एयर रेजोल्यूशन लेंगे की इस साल में मैं जंक फूड जो है उसको खाने में थोड़ा सा कम ही करूंगा या तो फिर मैं खाना बैंड कर दूंगा अभी ये न्यू एयर रेजोल्यूशन ज्यादा लोगों ज्यादा या तो फिर कोई बोलेगा मैं स्मोकिंग छोड़ दूंगा या तो कोई बोलेगा मैं ड्रिंकिंग छोड़ दूंगा ये ड्रिंकिंग स्मोकिंग इन जंक फूड जो है वो अमेरिका में सबसे ज्यादा चला है तो कोई कोई लोग खास करके स्टूडेंट है वो न्यू एयर की पार्टी में रहते हैं फिर इतना वह भोग विलास करते हैं की आखिर में वो बीमा हो जाते हैं फिर यह शरीर में कोई एसुस्ती ए जाएगी फिर वो फर्स्ट जनवरी को ये रेजोल्यूशन लगा की न्यू एयर रेजोल्यूशन में ड्रिंकिंग बैंड कर दूंगा स्मोकिंग बैंड कर दूंगा जंक फूड बैंड कर दूंगा तो ये रेजोल्यूशन कितने दिन चलेगा जब ये सप्ताह भी चल जाए तो बहुत बड़ी बात है तो फिर कोई-कोई लोग ऐसा भी सोचता है अरे भाई वो लास्ट एयर तो मैंने न्यू एयर रेजोल्यूशन लिया था तो एक सप्ताह में दो सप्ताह चला तो फिर अभी इस साल मुझे कुछ लेना ही नहीं है जान दो अननेसेसरी रेजोल्यूशन लोड करके फिर मैं आधा करूंगा आधा छोड़ दूंगा इससे क्या लाभ है तो अभी वो तो न्यू हेयर का रेजोल्यूशन उसे जगह पे है किंतु आध्यात्मिक जगत में क्या होता है की यदि हमने ऐसा ठीक किया की मैं रोज सुबह को 6:00 बजे 7:00 बजे जितना भी हमसे संभव हो अर्ली मॉर्निंग उठ करके आधा घंटा में जाप करूंगा अभी जी दिन हमने ठीक किया मैंने गुरु महाराज से मैंने दीक्षा प्राप्त की है वो बहुत सारे इतने तेज चल थी बैठे हैं सामने वह वाइस प्रेसिडेंट महाराज प्रेसिडेंट महाराज उन्होंने खुद बैठकर के हमको उपदेश दिया है फिर जब वह प्रेसिडेंट महाराज को चरण स्पर्श करते हैं गुरु प्रणाम करते हैं तो वह जो ठाकुर के जो अस्थि है हमारे सर पे महाराज जी स्पर्श करवाते हैं तो इससे हमारा वो एक बहुत ही हम उत्साह में ए जाते हैं और फिर हम सोचते हैं की चलो आज से महाराज ने तो कहा है की 108 एन की 1008 जब जो है उन नित्य नियमित करना ही है तो मैं भी वो कल से चालू होकर के सुबह को 6:00 बजे 7:00 बजे जितना भी मेरे से संभव है मैं जाप करना शुरू करता हूं तो अभी ये वो दीक्षा का उत्साह और यह जो सब गुरु महाराज वो आशीर्वाद ठाकुर का वो जो अस्थि का स्पर्श वो कितने दिन तक रहेगा एक महीना दो महीना तीन महीना उसके बाद में जो है वो धीरे-धीरे करके हम लोग एक्सक्यूज बनाना शुरू कर देंगे की अरे भाई कल तो मैं रात को बहुत डेरी से सोया था या मुझे बहुत बीजी हूं या तो फिर आज मुझे यह बड़ा इंपॉर्टेंट कम है या फिर यह कोई स्पेशल तो आज छोड़ देते हैं ऐसा करके फिर वह शुरू हो जाएगा और फिर एक दिन ऐसा आएगा की हम यह पर्यटन करना ही छोड़ देंगे पहले बार जब छुट्टी लगती है जब ध्यान नहीं हुआ मैं ठीक से तो बड़ा ही मां में ये हो जाता है मैंने कष्ट पहुंचता है अरे गुरु महाराज ने कहा है मेरे सभी तो गुरु भाई जितने भी हैं वो सब लोग तो मुंह से तो बोलते हैं की हम लोग प्रतिदिन जाप करते हैं आज मेरे से नहीं हुआ क्या होगा क्या नहीं होगा कल तुम्हें ठीक देखा हूं फिर कल जो है मैं डबल कर दूंगा वो दूसरे दिन डबल किया भी होंगे किसको पता किंतु फिर अभी एक सप्ताह के बाद में दूसरी छुट्टी पड़ती है किंतु जो सेकंड टाइम जब छुट्टी लगती है तब वो मां में इतना कष्ट नहीं होता क्योंकि ये जो मां जो है अपना वो शैतान का घर है एक तरह से यदि कहा जाए तो उसको एक्सक्यूज बनाना बहुत अच्छे से आता है तो अभी पहले बार छुट्टी लगा दिया जब मैं तो वो उसने बहुत कष्ट पाया तो अभी वो उसका मां में वो जो शैतान बैठा है वो अभी सोचना शुरू करेगा की दूसरी बार इतना कष्ट एन हो इसके लिए बड़ा अच्छा सा एक्सक्यूज है सब कॉन्शियस में अभी से मैं निकाल कर के ठीक करके रखना हूं तो नेक्स्ट टाइम जब छुट्टी लगा तो एक सप्ताह के बाद में तो वो बढ़िया सा एक एक्सक्यूज हमारे सामने रख दिया की मैं तो जो भी कार्य करता हूं ठाकुर का नाम लेकर के ही करता हूं तो एक तरह से कर्मयोग ही हो गया तो मैं जब करूं ना ना करूं मैं करूं या तो करता ही हूं तो साधना का तो दूसरा प्रकार ही तो हुआ कर्म योग तो मैं वहां पे बैठ करके जाप करता हूं इसकी वजह में चलो यहां पे बाहर ए करके मैं ठाकुर का कम करता हूं ऐसा एक बढ़िया सा एक्सक्यूज उसने खोज निकाला तो अब ये सुनकर के हम भी बड़े खुश हो जाते हैं दिस इस डायनेमिक मेडिटेशन फिर मेडिटेशन इन मोशन ऐसे वो हमको भूलने वाले लोग बैठे भी हैं बाहर में वो मोटिवेशनल स्पीकर और अच्छे-अच्छे शब्द खोज लेते हैं और हमको वो जो है पूरा वो जो भ्रमित कर देते हैं की जो भी कर्म करते हो वैसा वो ठाकुर का नाम लेकर करो डेट बिल विकम मेडिटेशन इन मोशन इन मोशन वो अपने दिमाग से उसे निकाल आए डर इस नो सच ए थिंक इस मेडिटेशन इन मोशन वह जो जाप करना है बैठ करके उसका कोई अल्टरनेट नहीं है वो करना ही करना है किंतु जो भी है अभी जब हम धीरे-धीरे करके एक्सक्यूज बनाते जाएंगे मां को सम जैसा भ्रमित करते जाएंगे फिर एक दिन ऐसा आएगा 5-6 महीने के बाद में की हमने पर्यटन करना ही छोड़ दिया है की अरे भाई छोड़ो अभी वो तो महाराष्ट्र बोलते रहते हैं क्या उसे दिन तो क्या था बहुत अच्छा एक बैठे थे सब के साथ में तो मैं भी थोड़ा सा वो भाव में जो है की वो चला गया था तो सोच लिया था की प्रतिदिन होगा तो कहां होने वाला है संसार की जवाबदारी यह जब है ये बिजनेस है ये पैसों का टेंशन है ये फिर ये सोशल रिस्पांसिबिलिटी होती है किसी के वहां शादी है नहीं जाएंगे तो उसको बड़ा ग जाएगा किसी के वहां प्रसंग है उसने बुलाया है नहीं जाएंगे तो फिर मैं जब मेरे घर प्रश्न होगा तो कोई नहीं आएगा इससे वो सोशल ऑब्लिगेशन रहते हैं तो चलो ये सब छोड़ो और जो है की मैं जो दिन में एक बार उठ करके खड़े हो करके वो नींद से एक बार ठाकुर का नाम ले लूंगा और सत्ता में एक बार जाकर के वो आश्रम में जाकर के आरती वगैरा कर लेंगे ठाकुर का दर्शन कर लेंगे और थोड़ा बहुत दान दक्षिण दे देंगे इससे की अपने मां को सुकून पहुंचे की चलो जब छोड़ दिया तो छोड़ दिया तो किंतु देखिए की यदि आपने ऐसा सोच लिया की भविष्य में तो मेरे से यह चीज अच्छा चीज होने ही नहीं वाला है क्योंकि मैं बहुत बीजी रहने वाला हूं या वॅटीवर जो भी है की मैंने जो अच्छा संकल्प लिया शुभ संकल्प लिया वो शायद कंप्लीट नहीं होगा तो मैं शुभ संकल्प लो ही क्यों नहीं लेट हूं बिना मतलब संकल्प लेना ठाकुर के नाम पे या ईश्वर के नाम पे भगवान शिवा के नाम पे राम के नाम पे जिसके भी नाम पे हमने लिया हो अभी मैंने छोड़ दिया तो वे लोग नाराज हो जाएंगे तो और भी बड़ा तकलीफ मुसीबत होगा तो ये सब छोड़ दो ऐसा कुछ नहीं करना है किंतु देखिए यहां पे ठाकुर क्या कहता है की किसी भी वजह से योग के मार्ग में योग के रास्ते में हम हो जाए योग के रास्ते से जड़ी हम भ्रमित हो जाए तो अगले जनों में हमने जहां पर छोड़ है वहां से फिर से स्टार्ट होगा कुछ भी किया हुआ कार्य शुभ कार्य जो है वो व्य नहीं जाता कोई भी अच्छा कार्य हमने किया है वो जो है उसका वो अनार निरर्थक नहीं जाता उसका इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में वो हमारा बैंक बैलेंस के रूप में वो दिखाएगा ही दिखाएगा इसलिए वो जो है न्यूयाॅर रेजोल्यूशन को हो एन की ये जब ध्यान करने का हमारा संकल्प कहो वो लेते रहिए भले ही चाहे बीच-बीच में छठ जाए किंतु याद रखिए की जी दिन हमको हमने नींद में से जग गए जी दिन ये जो माया रूपी ये जो खेल है उसको खेलने बैंड कर दिया जी दिन हम जो बच्चे में से बड़े हो गए उसे दिन जो है हमने वो अल्प मंत्र भी जो किया होगा स्वल्पाम यूपीएससी धर्मशालते महत्वपूर्ण गीता में कहा है भगवान कृष्णा ने की अल्प मंत्र में किया हुआ अनुष्ठिप्त किया हुआ धर्म भी जो है हमको महत्व बहुत बड़ी दुर्घटना या बहुत बड़ी जो है वो कोई भी दुष्पर्म हो उससे हमको बच्चा सकता है कृष्णा का वचन है ठाकुर ने भी कहा है तो संकल्प लेते रहिए यदि टूट जाता है या हम नहीं कर पाते हैं किसी तरह तो ऐसा की नहीं कर पाएंगे बोलकर संकल्प ही नहीं लेना है ऐसा कभी मत कीजिए श्री ठाकुर ए गया कहते हैं सटका कल जानते हो तो मास्टर कहते हैं जी नहीं श्री रामकृष्ण कहते हैं उसे देश में है बस को झुका देते हैं उसमें बंसी और डोर लगी रहती है कांटे में मछलियों के खाने का चार बीच दिया जाता है जो ही मछली उसे निगल जाति है क्योंकि वह बस झटका के साथ ऊपर उठ जाता है जी प्रकार उसका सर ऊंचा था वैसा ही हो जाता है अभी मैंने देखिए अभी ठाकुर इसका उदाहरण तो देते हैं किंतु यह एक्चुअली देखिए करने वाली बात है वह एक्चुअली आप यदि दाल फेक करके या तो मछली को पकाने के लिए चार वो जो एक वो लकड़ी आई है ना लकड़ी में वो जो हक रखा राहत है वह डोरी के साथ में वह फेक करके आप अपेक्षा करते हैं की जब मछली खागा तब जब हम जो है वो मछली को निकाल लेंगे ऐसा नहीं बस को ऐसा उल्टा करके रखा है की जिससे की जैसे मछली को खागा तो खींचेगी तो जहां पर वह जो रस्सी भारी होगी वो लगाया होगा उन्हें रिलीज हो जाएगा और मास्क सीधा हो जाएगा और मछली जो है पानी के बाहर ए जाएगी एक्चुअली आगे देने की बात है किंतु ठाकुर एक्चुअली उसको क्या कहते हैं देखिए आगे मैं किस तरह से उसको समझते हैं तराजू में किसी और कुछ रख देने से नीचे की सी और ऊपर की सी दोनों बराबर नहीं रहती नीचे की सी मां है और ऊपर की सी ईश्वर नीचे की सी का ऊपर की सी से एक कोना ही योग है अर्थात की यहां पे देखिए ये जो योग में भ्रष्ट होना या तो फिर जी तरह से कहते हैं की योग साधना वो किसको कहते हैं की यदि ये कामिनी कंचन यदि ये जो है वो आपका वो जो भारत हुआ है वो सटका कल बांग्ला में जिसको कहते हैं यदि उसको उन्होंने का लिया तो करके जो है वो आपको वो अपने वो जो उसके प्रलोभन में ए गए की हां वो मैं थोड़ा बहुत इसका भोग कर लेट हूं तो इसके पीछे में किंतु एक बहुत बड़ा हक लगा राहत है तो जैसे ही हमने ये भोग करने के लिए कुछ खाया मछली ने उसको वो जो कीड़ा लगा राहत है तो कीड़ा जैसे उसने खाया तो फैट करके मछली जो है वो गले से पकड़ करके पानी के बाहर ए जाति है उसकी मृत्यु होती है तो फिर यह भी इस तरह के प्रलोबिन है हमको लगता है थोड़ा बहुत भूख कर दिया तो क्या होगा किंतु वो फिर नेगेटिव बैलेंस जो है थोड़ा भूख करने से भी वो इतना भयानक राहत है हमारे लिए हमारा बहुत सर जो ओजस है वो का लेट है वो तो एक उदाहरण हुआ फिर दूसरा उदाहरण है जैसे तराजू है तराजू में यदि पुराना वाला तराजू जारी देखा होगा तो बीच में इस तरह से कांटा राहत है तो जी और में तरह जो झुकता है उसे और में ये कांटा झुकता है अभी दोनों पल्ली जो है वो समाज हो गए तो तराजू जो है एक सीधा हो जाता है तो ठाकुर कहते हैं की इसको जो है वो ईश्वर प्रताप की स्थिति कहती है नीचे की सी है मां और ऊपर की सी है ईश्वर यानी की यह दो पल्ली है एक है अपना मां एक है ईश्वर यदि ईश्वर और मां एक समाज लेवल पे ए जाए तो है योग में सिद्धि की स्थिति प्राप्त होती है मां के स्थिर बिना हुए योग नहीं होता संसार की हवा मां रूपी दीपसी का को सदा ही चंचल किया करती है वह शिखा जगदी जरा भी ना हिले तो योग की अवस्था हो जाति है जैसे योग शास्त्र में यह उद्धरण बार-बार दिए जाते हैं जैसे प्रदीप है प्रदीप को यदि जहां पे वो बहुत ही ज्यादा पवन आरा हवा ए रही है वहां पे रखेंगे तो प्रदीप की शिखा जो है सतत अस्थिर रहेगी किंतु एक ऐसी जगह पे प्रदीप को रखा जाए जहां पे हवा थोड़ी सी भी नहीं बाटी जैसे बैंड कमरे में तो प्रदीप की शिखा जो है वो एकदम स्थिर हो जाति है तो ये जो है योग की स्थिति दर्शी गई है ये जो हवा का आना सतत हवा का चलते रहना जो प्रदीप की जो शिखा है वो योग साधना में मगन हमारा मां है उसको डिस्टर्ब कौन करता है उसको सतत जो है वो ये डिस्टरबेंस करते राहत है तो यह जो कामिनी कंचन जो हवा जो बा रही है सतत जो है उसको इस शिखा को प्रदीप की शिखा को हमारी योग साधना को डिस्टर्ब करते रहती है और जी क्षण हमारी जो कम कंचन के प्रति हमारी वो जो आसक्ति है वो कम हो गई या तो खत्म हो गई या तो फिर बहुत ही डाइल्यूट हो गए तो ये जो प्रदीप की शिखा है वो मोर और ली एकदम स्थिर हो जाएगी तो वो हो गई योग की स्थिति अर्थात की किसी भी तरह का देखिए हम लोग संसार में रहते हैं कर्म करते हैं आश्रम में भी हमको इतना सर कर्म सब समय करते रहना पड़ता है फिर 10 लोगों के साथ में रहते हैं 10 लोगों के 10 तरह की मेंटालिटी होती है किसी का कोई इस तरह का मन सेट है किसी का इस तरह का मन सेट है तो क्या फिर इसको लेकर के हमको ये सोचना है की मैं सब सबसे पूरे जगत से अलग चला जाऊंगा तब कहानी जाकर के मेरे मां को शांति होगी ऐसा कभी नहीं होने वाला है संसार में भी इस तरह से वह जो है वो मतलब वो दो बर्तन साथ में रखते हैं तो कैसा वो रहते हैं और आवाज आई है तो संसार में भी है आश्रम में भी है आश्रम में भी कर्म करते करते 10 लोगों के साथ में वो बात करते रहना पड़ता है किसी के साथ में हमारी बात की हुई ना हुई उसका डिस्टरबेंस तो लगा ही राहत है तो वो जैसे वो कहते हैं ना की मैं पानी में कब जाऊंगा जब मैं तैरना सीखूंगा अभी तैरना सीखना ही है पानी में जान के बाद में जो आदमी ऐसा कहता है की मैं पहले तैरना सीखूंगा बाद में पानी में जाऊंगा इसका अर्थ है ना ही वो तैरना सीखेगा नहीं वो पानी में जाएगा तो कोई ऐसा रहेगा की मैं ऐसी कोई एकदम एकांत जगह पे चला जाऊं जहां पे मुझे डिस्टर्ब करने वाला कुछ ना हो वहां पे जाकर के मैं योग करूंगा तो ये बात कभी संभव नहीं है क्रिश्चियनिटी के एक बहुत अच्छे संत हैं सेंट उनका नाम था सेंट मैं भूल गया उनका नाम बहुत ही फेमस संत है तो उन्होंने क्या किया एक बार उन्होंने सोचा की मैं इजिप्ट के रन में चला वो डेजर्ट है ना वो बहुत बड़ा चिप में रिजल्ट है तो एक बार उन्होंने ठीक कर लिया की मैं जो है मैं इस बड़े सिकंदर या बहुत बड़ा एक सिटी था वहां पे कहानी पे वो शायद रहते होंगे तो वहां पर तो अभी उन्होंने नया नया क्रिश्चियनिटी उसे समय चल रहा था आज से 2000 साल पहले की बात है दो 1500 2000 साल पहले की बात है क्रिश्चियनिटी नया नया आया था और जो भी मैंने उसमें उसे दम था उसे समय उसे रिलिजन में एक सात्विक शक्ति थी और जो लोग क्रिश्चियनिटी को एक्सेप्ट करते थे और पहले तो पागल रिलिजन होता था ना बगान रिलिजन अर्थात की वो जो है वो मतलब वो पुराने देवी देवताओं की पूजा करना और यहां सेंट एंटोनी सेंट एंटोनी ना अच्छा तो उन्होंने एक बार ठीक किया की मैं जो है एक डेजर्ट में चला जाता हूं डेजर्ट में जाकर के मैं जब ध्यान साधना करूंगा तो अभी वो डेजर्ट में चले गए कुछ समय के बाद में उनके मां ने उनको विभीषिकाएं दिखाना शुरू कर दिया मैंने किसी के प्रलोभन वाली कोई चीज दिखा देगा या तो कोई विब सुंदर दृश्य दिखाई देगा ना की इसे दृश्य एक के बाद उनको एक दिखाई देने लगे की उनको लगा की वो शायद पागल हो गए हैं ना की क्या हो गए हैं अभी देखिए वो हमने वो बेलतला में वो जो लातूर महाराज बैठ करके जब ध्यान कर रहे थे वो बात भी हमको पता है की इस पृथ्वी पर शक्ति स्थान जो है शक्ति पीठ जो है वो इसलिए स्थापित किया गए हैं की सड़क जो है वहां जाकर के अपने मां को संपूर्ण रूप से साधना में नियोजित कर सके और साधना कर सके और साधना में सिद्धि प्राप्त करेगा उसका भी कल्याण होगा जगत का भी कल्याण होगा किंतु कोई पागल जैसा मनुष्य या तो फिर कामवासना है जिसके मां में है ऐसा कोई व्यक्ति साधना करके फटाफट से दिल आप कर ले और फिर रावण की तरह शिवा से कोई वरदान मांग ले तो भगवान शिवा भी बेचारे परेशानी में ए जाएंगे क्या अरे वो वरदान मांगा है तो देना ही पड़ेगा क्या करें रक्षा है फिर भी देना पड़ेगा वरदान तो ऐसा ना हो जाए इसके लिए वहां पर भैरव रहते हैं और जो भी कोई भी वहां पर साधन करने की वजन करने की शुरुआत करता है भैरव आकर के विभीषिकाएं दिखता है फिर यदि वह सच्चा सड़क है तो भैरव की विभीषिखाओं से वो डरेगा नहीं वह दत करके वहीं पर बैठकर साधना करेगा और कुछ समय के बाद में भैरव भी समझ जाएगा की मां की उसके ऊपर में कृपा है तो चलो उसको परेशान मत करो ऊपर से उसको जो है उन्होंने वो सहाय रूप होना शुरू हो जाएगा वो मदद रूप सो होना शुरू हो जाएगा किंतु जो जिसके मां में तमाम से वो वो जो है भैरव एक बार बीबीसी का ही दिखाना शुरू करता है तो ऐसा डर जाएगा की वहां से या तो वो भाग जाएगा या तो भैरव के डर की वजह से वो पागल हो जाएगा या तो मृत्यु भी वो है मतलब वो मा भी जाएगा ऐसा यहां तक हो सकता है तो ये जो अपना मां जो है देखिए की हम लोग सोचते हैं की संसार में रहकर के मुझे साधना नहीं हो पाएगी चलो मैं किसी अकेले जगह पे चला जाऊंगा एक्चुअली प्रॉब्लम तो हमारा मां है संसार नहीं यदि हमारा मां जो है वो सात्विक है हमारा मां जो है वो है तो हम संसार में र करके भी साधना कर सकते हैं उसमें वह संसार में कोई जैसे वह कोई पुरुष है तो कोई स्त्री को देखा है तो उसका मां जो है वो मां है वो ये हो गया चंचल हो गया तो उसे तरीका दोष नहीं है वो तो उसके मां का दोष स्त्रियों को खुद क्यों दोष दे रहे हो या तो फिर से थिंक स्त्रियों के साथ में क्योंकि वो पुरुष को देख करके यदि उसका मां चंचल है दोस्तों जो है मां में है नहीं की सामने वाले में तो हम यदि ये दोषी मां लेकर के यदि हम डेजर्ट में भी चले जाए सेंट एंटोनी की तरह ना की वो जिसके भी वो हम एकांत में भी चले जाएंगे तो हमारा मां जो है हमको विभीषिकाएं दिखाना शुरू करेगा तो इसके लिए मां के ऊपर में जो है हमको कंट्रोल पन है ये जो आध्यात्मिक साधना जो है ये जो शिखा जो है शिखा को स्थिर करना अर्थात की अपने मां को स्थिर करना ये जो कम कंचन रूपी पवन जो है वो तो बहता ही रहेगा उसको हम कुछ नहीं कर सकते हमको जो करना है मां को यदि इतना मजबूत सशक्त और स्ट्रांग कर दे की फिर नजर के सामने जितने भी प्रलोभन आए हैं आते जाएंगे उससे हमको कोई हनी नहीं पहुंचेगी हम जो है एकाग्र मां से साधना में लगे रहेंगे अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं अभी अच्छा कल संडे है कल छुट्टी मंडे को मिलेंगे