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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

श्रीरामकृष्ण कथामृत || 27 Oct 1882 - केशव सेन के साथ ठाकुर का नौका विहार || 15 Jan 2025

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः श्री राम कृष्ण देव का कथामृत चैप्टर का नाम है श्री जुक्तो केशव चंद्र सेनेर शहीद श्री राम कृष्णेर नौका बिहार आनंद और कथ उप कथन अष्टम परिच्छेद डेट है 8 82 27 अक्टूबर हमने देखा कि किस तरह से केशव सेन ठाकुर को नौका विहार के लिए लेकर गया है और फिर पहले तो ठाकुर ने आध्यात्मिक बहुत सारी बातें की जो प्रश्न था एक ब्राह्मण भक्त का कि संसार में ईश्वर लाभ हो सकता है कि नहीं इसके बारे में ठाकुर ने विस्तृत डिस्कशन किया अच्छे से हमको समझाया और किंतु फिर बाद में एक दूसरा टॉपिक स्टार्ट हो होता है केशव सेन और विजय कृष्ण गोस्वामी के बीच में जो झगड़ा चल रहा था उसको लेकर के तो यह हमारा टॉपिक चल रहा है ठाकुर ने पहले तो केशव को बताया कि देखो तुम देख कर के लोगों का चरित्र देख कर के शिष्य नहीं बनाते हो इसलिए ऐसा होता है तो हमारा प्रश्न था कल कि क्या ठाकुर चरित्र देख कर के शिष्य बनाते थे और जिसका चरित्र अच्छा है उन्हीं को रखते थे जिसका नहीं है उनको क्या भगा देते थे ऐसे कुछ उदाहरण भी है जैसे कि एक बार सब त्यागी लड़कों ने मिलकर के ठाकुर के त्यागी संतानों ने मिलकर के एक पिकनिक का आयोजन किया था पंचवटी के नीचे में और व कुछ खाना वगैरह वहीं पर बनाया गया था नरेंद्र की आगे वानी में और फिर ठाकुर को बुलाया गया था कि आप भी आइए हम लड़कों के साथ में खाइए तो उस समय एक आदमी एक दूसरा साधक ही था वह आकर के इन सबके साथ में ये त्यागी लड़कों के साथ में बैठने लगा तो इमीडिएट ठाकुर ने कह दिया कि अभी नहीं इन सबके साथ में बैठो इनके साथ में मतलब क्या है कि उस आदमी का चरित्र अच्छा नहीं होगा शायद इसलिए ठाकुर ने उसको ऐसा कहा होगा फिर ठाकुर ने थोड़ा सा दया दिखा कर के कहा अच्छा ठीक है पहले इन लोगों का हो जाने दो फिर यदि बाद में बचता है तो तब तुम खाना तो अभी ऐसा नहीं है कि देखिए ठाकुर ने पहले तो ऐसा कहा कि इन लोगों के साथ में मत बैठो जो त्यागी संतान है जिनके कि संस्कार बड़े ही शुद्ध है और जद किसी अशुद्ध व्यक्ति के साथ में बैठ कर के खाना खाएंगे तो उसके संसार भी संस्कार भी इनको लग जाएंगे यह तो एक पॉइंट है किंतु साथ-साथ में ही बाद में ठाकुर ने कह दिया कि यदि बाद में बचता है तो फिर अलग से तुमको खाने को देंगे यानी कि उसको बिल्कुल भगा नहीं दिया है बाद में एक अलग से कटेर घरी बना कर के उसको खाने के लिए दिया है तो ये थे ठाकुर अ जैसे कि वो एक कहानी है कि वो हमने पहले भी इसको डिस्कस किया था ये किसी के घर में जाते हैं ठाकुर तो किसी भक्त ने बुलाया है फिर वहां पर ठाकुर को प्यास लगती है तो फिर यह जो भक्त गृह स्वामी जि जिन्होंने की ठाकुर को आमंत्रण देकर के बुलाया था उनके बड़े भाई ठाकुर के लिए पानी का गिलास लेकर के आते हैं धर्मा लिंग धारी यह जो व्यक्ति के बारे में जो शरत महाराज ने विवरण दिया है तो लिखा है कि जो गृह स्वामी था उसका बड़ा भाई था वह धर्मा लिंग धारी अर्थात कि धर्म के जो लिंग है वो सब उसने धारण किए हुए थे धर्म के दिखाने वाले लिंग कौन से होते हैं तो सर के ऊपर में तिलक लगाया है गले में माला पहनी हुई है वो पीतांबरी शरीर पर लगाई हुई है वो कुछ भभूत भस्म भी लगाया होगा तो ऐसे बाहर से बड़ा धर्म का दिखावा करने वाला एक व्यक्ति ठाकुर के लिए पानी का गिलास लेकर के आया तो ठाकुर ने पीने के लिए अपने मुंह तक लाए किंतु फिर पी नहीं पाए तो उसको वापस दे दिया तो नरेंद वहां पर पास में ही बैठा था दूसरे लोगों ने अनुमान लगा दिया कि शायद पानी में कुछ गिरा होगा अशुद्धि इसलिए ठाकुर पी नहीं पाए फिर और कोई लेकर आया तो ठाकुर ने पी लिया नरेंद्र पास में ही बैठा था उसने सोचा इसको इन्वेस्टिगेट किया जाना चाहिए फिर उसने गृह स्वामी को जाकर के पूछा कि अच्छा आपके बड़े भाई है उसके चरित्र के बारे में कुछ बताइए तो फिर तो छोटा भाई तो बड़ बोलेगा नहीं किंतु उस घर के जो दूसरे लोग थे वहां से पता चल गया नरेंद्र को कि वह जो बड़ा भाई था यह सब धर्मा लिंग धारी उसका चरित्र अच्छा नहीं था तो अभी देखिए कि बात ऐसी नहीं है कि ठाकुर ने उसको अपनी नजर के सामने से भगा दिया या फिर यह जो सबको धर्म उपदेश दे रहे थे तो उस व्यक्ति को देना नहीं चाहते थे ऐसा नहीं है सबके साथ में बैठे सबके वो ठाकुर सबके साथ में जो बात कर रहे हैं सुने किंतु उसका चरित्र के अनुसार उसका एक पथ है और यह जो नरेण है राजा महाराज है लाटू महाराज है उनके चरित्र के अनुसार उनका एक रास्ता है मास्टर महाशय बलराम बाबू या तो फिर यह रामचंद्र दत्त उनके चरित्र के अनुसार उनका एक रास्ता है तो ठाकुर कहते हैं कि जिसका जो चरित्र है उसके अनुसार उसको रास्ता दिखाना चाहिए एक स्टैंडर्ड उपदेश सबको दे देना वह ठीक नहीं है और फिर ऐसा नहीं है कि फिर यह जो सब दूसरी दूसरी संस्थाएं होती है वहां पर कैटेगरी इजेशन नहीं होता है कैटेगरी इजेशन होता है किंतु वहां पर इस तरह से होता है कि संस्था का जो वो लीडर है उसका फेवरेट कौन है और फेवरेट कौन नहीं है इस तरह से वहां पर होता है ग्रुपिज्म वहां पर कैटेगरी होती है और अपने यहां पे एटलीस्ट ठाकुर के पास में ऐसा था चरित्र देख कर के अधिकारत्ती थी तो यह सब कुछ हमने कल देखा अभी आज का जो टॉपिक है वो भी एक बड़ा ही इंपोर्टेंट टॉपिक है पहले तो हम मास्टर महाशय क्या लिखते हैं ठाकुर की की बात उसको पढ़ लेते हैं फिर उसका विषद रूप से चिंतन करेंगे ठाकुर क्या कहते हैं आगे पहले तो कल का जो लास्ट लाइन था पढ़ लेता हूं गुरु एक सच्चिदानंद गुरु है सिर्फ एक सच्चिदानंद ही गुरु है तीनी शिखा दिवेन वही शिक्षा देते हैं वही उपदेश या तो फिर हमको मार्गदर्शन देते हैं आर संतान भाव मेरा संतान भाव है मानुष गुरु मेले लाख लाख मनुष्य गुरु आपको लाखों मिल जाएंगे सकले गुरु होते चाहे सब लोग गुरु होना चाहते हैं शिष्य के होते चाहे शिष्य कौन होना चाहता है और कल हमने देखा भी सही कि देखिए कि एक मन के भीतर में एक अभी देखिए कि यह जो रिफॉर्म सोसाइटी थी य ब्रह्म समाज वगैरह या तो फिर इस तरह के जितने भी शशर पंडित वगैरा थे जो कि चाहते थे कि हम समाज में कुछ बदला लाए तो एक तो दया का भाव तो था ही इन सबके भीतर में यह पंडित ठाकुर को पूछता भी है कि मैंने अध्यवसाय के साथ में जो व्रत ग्रहण किया है अपने शास्त्रों की बातों को कलकत्ता के जन समाज में फैलाने का यह जो मैंने व्रत लिया है वह मैं क्या अध्यवसाय के साथ में पूर्ण करूं कि नहीं ठाकुर की परमिशन लेना चाहता है ठाकुर तो कहते हैं कि सर्वप्रथम ईश्वर प्राप्ति करो बाद में यह सब उपदेश वगैरह दान देना फिर ठाकुर उद इस तरह से उपमा भी देते हैं कि काली मंदिर में गए काली घाट कलकत्ता का मां काली का दर्शन करने के लिए तो क्या आप वह जो रास्ते प जो भिखारी बैठे हैं उनको दक्षिणा देने में ही समय बिता देंगे नकी के पहले धक्का मुखी करके जैसे भी करके हो मां काली का दर्शन कर लो बाद में फिर बाहर आकर के जितने कंगाली है जितने कंगाल है दरिद्र है उनको फिर पैसा देते रहो तो यह ठाकुर का था फिर ये जब पंडित पूछता है तो ठाकुर ने जैसे कि बड़े ही उपरो दे है पड़े बांगला लेखा है यानी कि अभी वो किसी को कोई प्रेस करता है प्रेशर करता है तो फिर क्या वो थोड़ा नाराजगी के साथ में प्रेशर में आकर के फिर वो ऐसा कुछ बोल देते हैं कोई लोग तो ठाकुर ने भी ऐसा प्रेशर में आकर केय पंडित बार-बार पूछ रहा है कि मैं चाहता हूं कि शास्त्रों का प्रचार करूं शास्त्रों का प्रचार करूं तो मैं करूं कि नहीं करूं कि नहीं तो फिर ठाकुर ने तो प्रेशर में आकर के अच्छा बड़े ही अनिच्छा के साथ में बता दिया अच्छा ठीक है करो अभी तुम्हारे मन की इतनी इच्छा है और तुम मेरे मुंह से बुला ही लेना चाहते हो ठीक है करो और तो फिर किसी का क्या चरित्र है संपूर्ण रूप से तो बदल नहीं सकते हैं तो देखिए कि ठाकुर समझते थे कि यहां पे एक चीज हमको देखनी है यह को पंडित है ना कि ये रिफॉर्म सोसाइटीज है समाज का कुछ अच्छा करना चाहते हैं तो ऐसा नहीं है कि यह लोग अपना बेनिफिट सोचते हैं सही सही जेनुइन कंपेज होता है इन लोगों के भीतर में रास्ते पर जाते-जाते भिखारी को देख कर के यदि मन में दया ना आए तो फिर तो मनुष्य नहीं वो मनुष्य नहीं है वह पत्थर ही है या तो पशु ही है व दया का भाव तो सहज है हमारे लिए दया होनी ही चाहिए यदि दया नहीं है तो मनुष्य एकदम पशुव्रूला है तब तक क्या हम पशु वत आचरण करेंगे ऐसा तो नहीं है मन में दया है किसी को हेल्प कर दी सामने कोई आता है तो यह तो मनुष्य सहज है किंतु यहां पर जो ठाकुर कहना चाहते हैं कि सभी लोग गुरु होते हैं क्यों होते हैं एक बार तो दया से चालू कर दिया कार्य कि ना मुझे कुछ करना चाहिए यदि मैंने शास्त्रों का अभ्यास किया है और यदि मैं देख रहा हूं कि स्ट्रेस जो है आज के समय में सबसे बड़ा किलर है व जैसे आज भी था उस समय भी था इकोनॉमिक सिचुएशन जब भी विपरीत होती है तो सबसे पहले टेंशन आकर के मन के ऊपर में सवार हो जाता है इकोनॉमिकल हार्डशिप से ज्यादा यह मानसिक तणाव ही हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा हो जाता है तो इस समय लोगों के पास में यदि शास्त्र का थोड़ा सा भी ज्ञान है तो वह उनको बड़ी ही अपने मन को माइंड मैनेजमेंट ना कि इमोशनल मैनेजमेंट में बड़ा हेल्प करेगा क्योंकि श्रद्धा भक्ति निष्ठा शरणागति यह सब ऐसे गुण है क्योंकि जीव सभी के जीव जीवन में बड़े ही आवश्यक है तो चलो मैं शास्त्र में मैंने जो पढ़ा है मैं दूसरों को सिखाता हूं ऐसा एक जेनुइन एक कंपेज से कि जेनुइनली अ मोटिवेटेड बाय सेंस ऑफ मिशन हम लोग कार्य तो शायद चालू करते हैं रिफॉर्म सोसाइटी बनाते भी है एनजीओ का गठन करेंगे भी सही जैसे कि आजकल यह सब नॉन गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन होते हैं वे लोग क्या करते हैं अब यह रिफॉर्म का सोशल रिफॉर्म की बातें आजकल के जमाने में कोई नहीं करता उस समय काफी लोग करते थे आजकल इतनी ज्यादा बातें सोशल रिफॉर्म की नहीं होती आजकल क्या बातें होती है पॉवर्टी एलेविएशन एक के बाद एक गवर्नमेंट से पैसा लेकर के प्रोजेक्ट चलाइए गांव में या तो फिर ये स्लम एरिया में लोगों को हेल्प कीजिए गवर्नमेंट की योजना इंप्लीमेंट करने में गवर्नमेंट के सहायक होई है और फिर लोगों के पास में प्रोस्पेरिटी कैसे भी करके पहुंचे इसका ख्याल रखिए तो एक जेनुइन सेंस से यह सब चालू तो होता है किंतु ठाकुर यहां पे क्या कहते हैं कि कुछ ही समय जैसे जाएगा अपने मन के भीतर में एक तरह से घमंड घर करने लगेगा एक तरह से इगो इज्म अपने मन में बैठ जाएगा फिर यह इगो इज्म हमको क्या समझाएगा पता है कि देखो मैं कितना बड़ा दानवीर हूं मैं कितना बड़ा लोगों का हेल्प करता हूं मेरे में कितनी कंपेज है फिर ऐसे लोग क्या करेंगे कि अपना खुद का प्रचार करना चालू कर देंगे फिर यह पॉडकास्ट आजकल जैसे से चलते हैं youtube0 कर रहा हूं मैं वह कर रहा हूं मैं मैं इतने सारे लोगों को हेल्प कर रहा हूं फिर यह ब्रोशर प्रिंट करके सब जगह पर भेजेंगे अननेसेसरी नहीं भेजने की जरूरत है फिर भी बेचते रहेंगे अभी यह सब चीजों में देखिए यदि संसार के ही लेवल पे देखा जाए तो बुरा नहीं है जहां पे वे लोग आधे लोग बिल्कुल करप्ट होकर के बैठे हैं और फिर पैसा अपने पॉकेट में डाल रहे हैं दूसरों का अहित करके उससे तो यह आदमी कहां बेटर है भले घमंड दिखा रहा है किंतु जो भी हो सके लोगों को हेल्प तो करता है ही इज फार बेटर देन एनी वन एल्स इन दिस वर्ल्ड लोगों को तो अपने खुद के पेट के आगे दिखता ही कहां कुछ है ठाकुर कहते हैं मैं कलकाता जाया जाता हूं तो देखता हूं सभी निम्न दृष्टि सभी की दृष्टि नीची है सभी की दृष्टि अपने पेट के ऊपर में है एक दो लोगों को कभी-कभी देखता हूं कि उर्ध्व दृष्टि है तो ये उर्ध्व दृष्टि वाले लोग अपने समाज में कितने मिलेंगे तो उससे तो यह मच मच बेटर है कि यह आदमी भले ही घमंड हो इसके भीतर में किंतु लोगों का कल्याण करता है किंतु साथ-साथ में ही देखिए कि जो स्केल यदि चेंज कर दिया जाए सांसारिक स्केल से सांसारिक दृष्टि से देखा जाए तो वो आदमी ज्यादातर लोगों से बेटर है किंतु यदि स्पिरिचुअल स्केल से देखा जाए स्पिरिचुअलिटी के चश्मे पहन कर के देखा जाए तो पता चलेगा कि इसके भीतर में जो घमंड है वह उसके आध्यात्मिक रास्ते में एक बहुत बड़ी बाधा की सृष्टि कर रहा है बहुत बड़े विघ्न को जन्म दे रहा है जब तक वह अपने घमंड को पार नहीं कर लेगा तब तक वह मनुष्य जन्म की सर्वोच्च प्राप्ति है जिससे जिसको कि पा कर के ईश्वर दर्शन आत्म साक्षात्कार इसको पाकर के सिर्फ मनुष्य खुद धन्य नहीं हो जा जाता अपनी सात पीढ़ियों को आगे आने वाली पिछली गई हुई सात सात पीढ़ियों को वह धन्य कर देता है समाज को देश को राष्ट्र को धन्य कर देता है वह एक प्राप्त व्य है मनुष्य जन्म का सर्वोच्च प्राप्त व्य उस रास्ते में फिर यह घमंड बाधा की सृष्टि करेगा तो यदि हम सिर्फ सांसारिक दृष्टि से ही देखते हैं तो रिफॉर्म सोसाइटी या तो फिर यह जो समाज का सु धार करने वाले समाज को हेल्प करने वाले आज की लैंग्वेज में कहे तो यह एनजीओस नॉन गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशंस इन लोगों का बड़ा अवदान है यह तो हमको स्वीकार करना ही होगा किंतु साथ-साथ में यदि अपना दृष्टिकोण चेंज कर दे यदि देखें कि आध्यात्मिक दृष्टि से ऐसे लोग जो कि वैसे बहुत बड़े गिने जाते हैं वह आध्यात्मिक पथ में कहां पर है तो पता चलेगा वह कहीं पीछे पड़े हुए हैं तो ठाकुर का जो स्केल था आध्यात्मिक स्केल इस दृष्टि से ठाकुर यहां पर कहते हैं कि सभी लोग गुरु होना चाहते हैं शिष्य कौन होना चाहता है और फिर हमने जैसे कल गिरीश घोष की वह जो बात याद की थी कि गिरीश ने कहा था ठाकुर ने प्रणाम अस्त्र से जगत को जय किया है पहले तुम शिष्य हो फिर तो तुम गुरु होगे देखिए इंटरेस्टिंग इसमें है कि जनरली क्या होता है खास करके अपने जो वगैरह में क्या होता है कि एक बहुत बड़ी कंपनी है उस कंपनी का एक मालिक है तो फिर जबी उसका लड़का बड़ा हो जाएगा कंपनी जवाइन करने के लिए आएगा तो मालिक जो है उसके पिता जो है उसको सीधा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में उसको घुसा देंगे कि हां यह मेरा लड़का है अभी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में है बाद में जब मैं जाऊंगा तो फिर यह मैनेजिंग डायरेक्टर ना कि सीईओ बन जाएगा इस कंपनी का तो यह अपना एक है जनरली होता है सब ऐसा नहीं करते किंतु काफी ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जबकि जापान में ऐसा है कि कंपनी का जो मालिक है उसके लड़के को यदि कंपनी जवाइन करनी है तो एकदम जो लोएस्ट रैंक है वहां से उसको स्टार्ट करना है सभी काम सीख कर के सीख करके धीरे-धीरे करके उसको यह जो कॉरपोरेट लेडर है उसको क्लाइम करना है आखिर में जब उसके फादर रिटायर हो जाएंगे ऐसा कुछ होगा तब वो उस चेयर पे बैठेगा ऐसा नहीं है कि उसको चेयर पे नहीं बैठने देंगे किंतु उसको फ्रॉम बॉटम अप स्टार्ट करना पड़ेगा अमेरिका की बात तो बिल्कुल अलग है प्रॉफिट माइंडेड इतना शार्प है उनका कि सीईओ का लड़का सीईओ हो लोग सपने में भी नहीं सोच सकते तो वहां की बात अलग है किंतु यह अनी एशियन दृष्टि से कहे तो यह एक दो इंटरेस्टिंग कंट्रास्ट है अपने यहां पे मालिक है उसका लड़का सीधा मालिक का असिस्टेंट होक के ही स्टार्ट करेगा तो देखिए कि बड़ा ही जैसे आपको सबको मालिक होना है सबको ऐसा गु होना है किंतु जब यह बॉटम रंग से स्टार्ट करेंगे सीखना और फिर जब आप मैनेजिंग डायरेक्टर या सीईओ होंगे तब आपका बेनिफिट क्या होगा कि कंपनी का कंप्लीट इंफॉर्मेशन आपके पास में है जब क्रिटिकल टाइम में जद डिसीजन मेकिंग लेने को आता है समय तो यह बड़ा इफॉर्म डिसीजन ले पाएगा क्योंकि बॉटम अप उसको पता है कि कंपनी में क्या हो रहा है जबकि जिस लड़के ने सीधा वो डायरेक्टर होकर के स्टार्ट किया है काम वो कभी-कभी ना बेफलमेंट कभी कभी वोह कंफ्यूज हो जाएगा कि मैं अपनी कंपनी से मैं अपने एंप्लॉई से यह काम चाहता हूं वे लोग यह काम क्यों नहीं कर पा रहे हैं कंपनी की एंप्लॉयज की सिस्टम की क्या रिस्ट्रिक्शंस है उसके क्या प्लस पॉइंट है क्या माइनस पॉइंट है उसको समझ में ही नहीं आएंगे तो डायरेक्ट टॉप से स्टार्ट करना थोड़ा सांसारिक दृष्टि से भी गलत है यानी कि उसका ज्यादा एडवांटेज नहीं है आध्यात्मिक जगत में तो छोड़ ही दीजिए तो यहां पे कह शिष्य को कौन शिष्य होना चाहता है यानी कि यहां पर दूसरी भी एक बात याद रखनी है कि अपने ईगो को ना कभी भी अपने काम में आने मत दीजिए अपने काम में बाधा की सृष्टि मत करने दीजिए बहुत बार ऐसा होता है कि आप ऑर्गेनाइजेशन में काम करते हैं तो बेस्ट कहेंगे कि मैनेजर कौन है जो कि अपने ईगो को कंट्रोल में रख कर के टैलेंट को प्रमोट कर सकता है आप एक कंपनी में टीम लीडर है या डिपार्टमेंट के इंचार्ज है या सीईओ है आप देखते हैं कि आपके सामने टैलेंट है और टैलेंट फिर जिसमें टैलेंट होगी ना ऐसे लोग ऐसे एंप्लॉई जो होते हैं बड़े ही अग्रेसिव भी होते हैं तो उनका अग्रेशन जो है सहन करके अपने ईगो पे ना लेकर के उसको खुला दौर दे देना जिससे कि ये कंटीन्यूअस नया रिसर्च एंड डेवलपमेंट चलता रहे कंपनी कंटीन्यूअसली नई ब्रेक थ्रू प्रोडक्ट्स प्रोड्यूस करती रहे और कंटीन्यूअसली इनोवेशन के क्षेत्र में नंबर वन रहे तभी तो आज के हाइपर कंपटिंग एज में ही हम लोग कंपीट कर पाएंगे वरना फिर जिसके पास टैलेंट है उसने आकर के हमको कुछ बोल दिया तो मुझे ईगो पे ऐसा लग गया कि बस अभी तो इसको मैं यहां से फायर करवा के ही छोडूंगा ऐसा करने से टैलेंट जब चला जाएगा सब मीडियो करर यस मैन कुछ रह जाएंगे और यह फिर तब तो आपको अच्छा तो बड़ा लगेगा कि जितने भी एंप्लॉयज है सब मेरे कंट्रोल में है किंतु यह कंट्रोल में रहने वाले एंप्लॉयज आर एनडी या तो इनोवेशन के क्षेत्र में कुछ भी अचीव नहीं करने वाले जैसे ही दूसरी कंपटीशन के पास में अच्छा नया प्रोडक्ट आया अपना कंपनी खत्म हो गया तो ये जो है कि शिष्य होना अर्थात कि अपने ईगो को कंट्रोल में रखना नॉट लिटरली शिष्य होना या लिटरली गुरु होना यहां पे जो ठाकुर उसके पीछे का जो साइंस समझा रहे हैं अपने ईगो को कंट्रोल में रख कर के हमको इस जगत में रहना है यदि चाहे कॉर्पोरेट वर्ल्ड में हो यदि चाहे इस संसार में हो ना कि चाहे जदी हम आध्यात्मिक जीवन में हो जहां पर भी जैसे ही हमने अपने ईगो को दिखाया वैसे ही हम पिछड़े जाएंगे ठाकुर आगे कहते हैं लोको शिक्षा देवा बड़ो कठिन लो शिक्षा देना बड़ा ही कठिन है जदी तिनी साक्षात्कार होन आ आदेश देन ता होले होते पारे यदि ईश्वर का साक्षात्कार होता है और ईश्वर आदेश देते हैं तब आप लोक शिक्षा दे सकते हैं नारद सुखदेवानंद और सुखदेव वग को ईश्वर का आदेश प्राप्त हुआ था शंकरे आदेश होए झीलो भगवान शंकराचार्य को भी आदेश प्राप्त हुआ था कि हां अद्वैत वेदांत को भारत में पुनः प्रचार करो तो शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया था आदेश ना होले के तोमार कथा सुन बे आदेश यदि ईश्वरीय आदेश प्राप्त नहीं होता तो कौन तुम्हारी बात सुनेगा कोलकाता और हुजू तो जानो कलकाता के लोगों का यह माइंड सेट तो पता है हुजू यानी कि एक ट्रेंड आज की लैंग्वेज में कहेंगे ट्रेंड जो ट्रेंड चल रहा है जिस चीज का उस ट्रेंड के पीछे सभी लोग दौड़ेंगे फिर जैसे ही वो ट्रेंड खत्म हो गया लोग उसको छोड़ भी देंगे आज आपका ट्रेंड चल रहा है तो लोग आ रहे हैं कल दूसरे का ट्रेंड चालू हो गयास लोगों ने आपको पटक दिया तो ये हुजुर तो जानो कोलकाता के लोगों का ज तो खण काठे ज्वाल दूध फोंस करे फोले जब दूध को गर्म करने के लिए रखा है नीचे में लकड़ी में अग्नि जल रहा है जब तक अग्नि जल रहा है तब तक दूध उबल रहा है काठ टेने नीले को थाव किछु नाई जैसे ही लकड़ी को आपने खींच लिया नीचे का अग्नि है उसको हटा दिया वैसे ही दूध ठंडा हो गया शेखाने पाथर होलो तो छेड़े दिले काठ टेने कोलकाता लोग हुजू के कोलकाता के लोग है ही ऐसे वो ऐसा वो ऐसा इसमें आकर के वो दौड़ते हैं फिर वह जब जैसे ही खत्म हो गया ट्रेंड उसको छोड़ देंगे ही एंटाई कुआ अभी यहां पर कुआ खोदना शुरू किया है पानी निकालने के लिए बोले जोल चाई कहते हैं पानी चाहिए शेखा ने पाथर होलो तो छेड़े दिले अभी कुआ खोदते खोदते पत्थर मिल रहा है तो छोड़ दिया आबार एक जगाए खते आरंभ कोरले और एक जगह पर खोदना शुरू किया शेखाने बाली मिले गलो छेड़ दिले वहां पर जद रेती मिल गया तो छोड़ दिया आर एक जायगा खते आरंभ होलो रकम और एक जगह पर कुआ खोदना शुरू किया इस तरह से यदि पानी निकालने के लिए कुआ खोद रहे हैं तो पत्थर मिले ना कि रेती मिले ना कि जो भी मिले हमको खोदते ही जाना होगा जब तक कि वहां पर पानी ना मिल जाए तो यह एक डेडिकेशन नहीं रहेगा तो स्पिरिचुअल लाइफ में डेवलपमेंट कैसे होगा अच्छा अभी यह देखिए यह जो पूरा पैराग्राफ है ठाकुर क्या कहना चाहते हैं जो लोग सही सही गुरु है इस जगत में इस जगत में जो लोग सही सही टीचर का कार्य करते हैं उन लोगों को साधन भजन करके एक आध्यात्मिक उपलब्धि कर लेनी चाहिए जब यह उपलब्धि होगी तब यह उपलब्धि के माध्यम से या तो फिर अंतरात्मा की पुकार आपको सुनाई देगी कि ना अभी मुझे जगत कल्याण के लिए जो करना है वो उसको मैं प्रारंभ करूं या तो फिर ईश्वर सत्य सत्य आकर के आपकी नजर के सामने आकर के आपको साक्षात्कार होकर के कहेंगे कि नहीं लोक कल्याण के लिए कार्य करो जैसे कि ठाकुर जब निर्विकल्प समाधि में मग्न हो रहे थे उसी समय मां जगदंबा का आदेश प्राप्त हुआ था तोय भाव मुखे था अर्थात की कॉन्शियस सुपर कॉन्शियस की बाउंड्री है बॉर्डर लाइन वहां पर रहो भक्ति भक्तो निय थाका भक्ति और भक्त को लेकर के रहना तो इसीलिए ठाकुर अच्छा लगता है ठाकुर को जब भक्त उनके पास में आएंगे जब जब ईश्वर की बातें उनके साथ में करेंगे ठाकुर क्या कहते हैं चीनी होते चाइना मा अमी चीनी खेते भलो बासी मैं चीनी होना नहीं चाहता शुगर होना नहीं चाहता शुगर में हो गया तो अर्थात कि ईश्वर के साथ में एकाकार हो गया तो फिर तो मैं बेहोश होकर पड़ा रहूंगा चीनी खेते भालोबाशी अर्थात कि शुगर खाना चाहता हूं अब आप खुद शुगर बन गए अर्थात कि आप अद्वैत में ईश्वर के साथ में एकाकार हो गए तो फिर तो आप और ईश्वर एक ही हो गए किंतु जब तक आप भक्त है ईश्वर अलग है यानी कि शुगर अलग है आप अलग है तब तक आप शुगर खा सकते हैं ईश्वर के साथ में ईश्वर की आराधना करके ईश्वर की भक्ति करके आप बड़े आनंद में रह सकते हैं तो यह जो भक्ति भक्त को लेकर के रहने की वासना थी ठाकुर के मन में यह भी तो जगन माता ने ही उनको देकर रखी थी और जैसे हमने कल भी डिस्कस किया था वैसे तो ठाकुर की स्ट्रेटेजी लोगों को कैसे भी करके करने की लोगों के मन को प्रलोभन करने की वैसे स्ट्रेटेजी बड़ी शार्प थी जितने भी अच्छे-अच्छे साधक है कोलकात्ता के उनके पास जाकर के उनके साथ में मुलाकात करनी है फिर वही साधक उनसे प्रभावित होकर के अपना जो खुद का एक जो एक ग्रुप होता है सभी के आसपास में जेनुइन साधक होंगे तो कुछ ना कुछ तो लोग उनके साथ में आके मिलेंगे ही फिर अपने ग्रुप में इस बात को फैलाए वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी कहते हैं ना आजकल की लैंग्वेज में तो ऐसा वर्ड ऑफ माउथ प् प सिटी स्टार्ट होगा केशव सेन इतना प्रभावित हो गया था कि ब्रह्मो समाज में उसने प्रचार करना शुरू कर दिया तो बहुत सारे ब्रह्म डिवटी ठाकुर के पास में आए तो यह ठाकुर की वैसे बड़ी स्मार्ट स्ट्रेटेजी थी वर्ड ऑफ माउथ प्रचार करने की किंतु ठाकुर ये सब कॉन्शियसली तो करते नहीं थे तो जगन माता उनके पास में से करवाती थी तो यदि सही सही टीचर होना है तो ऊपर से यदि आदेश ना हो तब तक हम लोग यह कार्य ठीक-ठीक नहीं कर पाएंगे अच्छा अभी जैसे ही हमने इस बात को पढ़ा साथ-साथ में ही प्रश्न होता है कि रामकृष्ण मिशन में स्वामी जी ने जो सेवा का कार्य प्रारंभ करवाया है वह किस कैटेगरी में आता है अच्छा जब तक आप स्कूल और हॉस्पिटल चला रहे हैं तब तक तो फिर भी तो ठीक है कि आप नर रूपी नारायण की सेवा कर रहे हैं यह थिरी आप अप्लाई कर पाएंगे किंतु आजकल का जैसे ट्रेंड है आजकल का जैसे हु जुग है कि एक कल्चरल एक्टिविटी पे ज्यादा भार देना है कल्चरल एक्टिविटी ज्यादा होनी चाहिए यूथ में जाकर के ठाकुर मा स्वामी जी का प्रचार करना है ठाकुर और मां का तो शायद नहीं होगा यूथ में किंतु एटलीस्ट स्वामी जी का प्रचार करना है तो यह जो हम लोग रामकृष्ण संघ के साधु लोग यह जो प्रवचन देते हैं य क्लासेस कंडक्ट करते हैं वो किस कैटेगरी में आएगा हमको तो कोई आदेश नहीं हुआ है ठाकुर का या मां का या तो फिर मां जगदंबा का एटलीस्ट मुझे तो नहीं हुआ है मैं तो वैसे ही यह सब कर रहा हूं तो हम लोग जो यह कल्चरल या तो फिर यह प्रीचिंग एक्टिविटीज कर रहे हैं यह किस कैटेगरी में आती है स्वामी जी ने जब अपने गुरु भाइयों को हरि महाराज का उदाहरण हमने देखा था उस दिन वो एकदम परफेक्ट कंट्रास्ट करता है कहां हरि महाराज का इंट्रोवर्ट नेचर ठाकुर ने खुद हरि महाराज को कहा है कि ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या वही तो लिखा है ना तुम्हारी वेदांत की किताबों में अभी इतना क्या पढ़ते हो अभी तुम प्रैक्टिस करना शुरू कर दो तो हरि महाराज ने वेदांत की सभी किताबें स्वामी तुर्या अंद जी महाराज ने सब किताबें लेकर के गंगा में डाल दी और फिर उस दिन से तपस्या करना शुरू कर दिया तो ठाकुर के खुद के पास से उन्होंने यह आदेश लिया है कि ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या करके साधन भजन में डूब जाओ फिर जब यही स्वामी जी आकर के उनको कहते हैं कि अमेरिका जाकर के वेदांत का प्रचार करना होगा तो तुर्या अंद जी तो इमीडिएट यह सब ठाकुर की बातें याद करेंगे ना कि ईश्वर आकर के आपको आदेश देंगे कि प्रचार करो फिर प्रचार करके फिर आदेश प्राप्त करके प्रचार कर ना है तो रयान जी तो कहेंगे हरि महाराज कहेंगे कि मुझे कहां ऐसा कोई आदेश प्राप्त हुआ है कि मैं अमेरिका जाकर के तुम्हारी तरह प्लेटफॉर्म पर खड़े रह कर के लेक्चर दूं तब स्वामी जी ने तुर्या अंद जी को क्या कहा कि प्रचार करने की जरूरत नहीं है जस्ट लीड होली लाइफ एक पवित्र तपस्या मय जीवन जियो यह जीवन तुम्हारा देख कर के ही लोग वेदांत और योग की भावधारानी ने क्या कहा था अपने अमे अमेरिकन डिसाइल को कि मेरे भीतर में तुम लोगों ने क्षत्रिय पावर का दर्शन किया है अभी मैं आपके पास में एक ऐसा साधु भेज रहा हूं जिसके भीतर में आपको ब्राह्मण पावर का ब्राह्मण पावर का दर्शन होगा तो ऐसा करके स्वामी जी ने तुर्या अंद जी को वहां पर भेजा था अभी यह प्रश्न होता है चलो इवन तुर्या जी भी ही वाज वन ऑफ द ग्रेटेस्ट सोल इन अवर ऑर्डर उनको भी तो ब्रह्मज्ञान हुआ था हम जैसे लोगों का क्या हम लोग जो आजकल यह सब क्लासेस लेते हैं या वगैरह जो भी इवन एक्टिविटीज भी चलती है ठाकुर ने खुद ने कहा है ना कि यह दान दक्षिणा ईश्वर का दर्शन होगे होगा तो तुम क्या मांगोगे कि मैं मुझे कुछ हॉस्पिटल कुछ ये स्कूल बना दो यह मांगोगे ना कि पहले ईश्वर के पास में से ईश्वर के आशीर्वाद मांग लोगे बाकी बाकी बाद में तुम को जितना स्कूल हॉस्पिटल च चलाना है चलाते रहो ऐसा तो स्पष्ट कहा गया है कथामृत में तो फिर हमारी जितनी भी प्रवृत्तियां है वो किस कैटेगरी में आती है यहां पर दिस इज वेरी इंटरेस्टिंग देखिए ठाकुर का जो पूरा आप एटीट्यूड देखेंगे ठाकुर का एटीट्यूड दो पथ है माने एक ही पथ है इस एक ही पथ के दो फेजस है एक तो है नेति नेती फेज अर्थात कि मनुष्य जीवन में जद साधना करनी है तो अपना घमंड है अपनी वासना एं हैं कामनाएं हैं सबको संपूर्ण रूप से तिलांजलि दे देनी होगी संपूर्ण रूप से उसको तज देना होगा ये हो गया नेति नेति का रास्ता इस के बाद में ईश्वर दर्शन आत्मसाक्षात्कार या तो फिर आध्यात्मिक अनुभूति के बाद में सेकंड फेज स्टार्ट होता है वो है इति इति अर्थात कि यह जगत जीव जगत मनुष्य पशु पक्षी उसी चीज के बने हुए हैं जिस चीज का यह ब्रह्मण है यानी कि ब्रह्मण से ही सब कुछ बना हुआ है जगत को पूरे को एक्सेप्ट करके सहज रूप से जगत कल्याण में लग जाना है फिर वो सेंस नहीं रहता कि मैं लोगों का कल्याण कर रहा हूं जैसे हरि महाराज को स्वामी जी ने कहा ना जस्ट लीड होली लाइफ ठाकुर का खुद का जैसे था कि वो साधकों का दर्शन करना चाहते थे साधकों के साथ में ईश्वरीय वार्तालाप करना चाहते थे ईश्वरीय भक्ति ईश्वर के गुणगान करना चाहते थे ये उनके मन की वासना थी यह नहीं है कॉन्शियसली ये नहीं सोचते कि ऐसा करने से जगत का कल्याण होता है ऐसे महापुरुष ठाकुर या हरि महाराज जहां पे भी रहेंगे जो भी करेंगे एवरीथिंग विल बी सफ्यूज्ड विथ डीप स्पिरिचुअलिटी सभी चीजों के भीतर में आध्यात्मिकता की एक सुवास एक खुशबू उसमें प्रसारित होना शुरू हो जाएगी उनको कोई कॉन्शियसली ऐसा नहीं करना है कि मैं जगत का कल्याण कर रहा हूं जैसे ही आपने कॉन्शियसली करना शुरू किया वैसे ही तो घमंड आ जाता है तो देखिए दो फेज है ठाकुर के उपदेश के एक तो नेती नेती के समय घमंड है कामनाएं हैं वासना एं है सब कुछ तिलांजलि देना है और इती इती फेज में जगत को जैसे कि अपना बोल कर के स्वीकार करना है तो अभी आज का जो रास्ता है स्वामी जी का स्वामी जी ने बड़ा ही क्लेवर किया क्या है बेस्ट एलिमेंट ऑफ बोथ फेजस ले लिए हैं नेती नेती फेज में से कामना वासना ईगो घमंड का त्याग यह बेस्ट एलिमेंट ले लिया है और इति इती फेज में से जगत को जैसे अपने हृदय को विस्तृत करना पूरा जगत जैसे कि मेरा है और फिर मैं इस जगत वासियों का कल्याण नहीं कर रहा हूं या तो फिर मैं शिव ज्ञान से उनकी पूजा कर रहा हूं यदि मैं ध्व वादी हूं और यदि मैं अद्वैतवाद हूं तो मैं अपनी ही अपनी ही सहाय कर रहा हूं क्योंकि तो उसके भीतर में वही ब्रह्मण है चंडाल नारायण के भीतर में दरिद्र नारायण के भीतर में जो ब्रह्मण मेरे में है तो अद्वैत वादी हूं तो मैं अपनी ही सहाय कर रहा हूं द्वैतवाद हूं तो उनको शिव मान कर के शिव समझ कर के पूजा कर रहा हूं सो द बोस्ट एलिमेंट ऑफ दिस इति इति फेस एंड नेति नेती फेस स्वामी जी हैज कंबाइंड इन वन फिलोसोफी शिव ज्ञाने जीव सेवा आत्मनों मोक्षार्थम जगत हिताय ज अर्थात की अभी फिर से देखते हैं ठाकुर की दृष्टि से ठाकुर उस समय के समाज में क्या देखते थे उस समय के समाज में ठाकुर ने देखा जो लोग जीव कल्याण जगत कल्याण की बातें करते हैं वे लोग आम लोगों से तो कहीं ऊपर है य शश दर पंडित विद्यासागर केशव चंद्र सेन विजय कृष्ण गोस्वामी शिवनाथ शास्त्री देवेंद्रनाथ टैगोर यह लोग आम जनता से तो कहीं ऊपर है प्रश्न ही नहीं है किंतु यदि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखना शुरू करें तो उनको जो सर्वोच्च की प्राप्ति है उस सर्वोच्च की प्राप्ति में उनका यह जो इगो इजम आ जाता है भीतर से कि हां मैं इतना अच्छा कार्य कर रहा हूं वो एक बाधा की सृष्टि करता है तो ठाकुर ने उन लोगों के लिए कहा था कि पहले तो यह जगत कल्याण का मामला ही छोड़ दो कैसे भी करके ईगो से मुक्त हो जाओ कुछ ना कुछ आध्यात्मिक प्राप्ति कर लो फिर जितना तुमको रिफॉर्म सोसाइटीज ब्रह्म समाज चलाना है चलाते रहना तो यह उस समय की कंडीशन के अनुसार ठाकुर ने देखा था अभी स्वामी जी ने देखा पूरा भारत का भ्रमण करके कि यह सन्यासी लोग जद सिर्फ अपना ही सोचते रहेंगे ठाकुर की बात को यदि लिटरली ले लेंगे तो प्रॉब्लम क्या होगा पता है जैसे यह केशव सेन ठाकुर की बात को ना लेकर के घमंड का शिकार हो गया था हम लोग यदि ठाकुर की बात को सीरियसली ले लेंगे कि पहले कैसे भी करके ईश्वर दर्शन करना है बाकी सब बात तो फिर हम लोग तमस में डूब जाएंगे जो कि वो भारत के साथ में बेचारे के साथ में हो ही रहा है या तो एक घमंडी हो जाओ या तो तामसिक हो जाओ ये दो एक्सट्रीम में हम लोग झोला खा रहे थे तो स्वामी जी ने भारत की परिस्थिति देख कर के ये सोल्यूशन निकाला कि ठाकुर के पास से यह ले लिया जाए त्याग तपस्या फिर शरणागति वो वाला नेति नेति फेज वाला यह एसेंशियल पॉइंट ले लिया जाए और फिर इति इति फेज वाला जगत कल्याण वाला जो पॉइंट है जगत कल्याण नहीं शिव ज्ञान जीव सेवा या तो आत्म स्वरूप में आत्म की सहाय तो यह दोनों फेस बेस्ट एलिमेंट फ्रॉम बोथ फेज इकट्ठा करके एक थिरी बनाया जाए आत्मा न मोक्षार्थम जगत ताय च तो दिस इज द थिरी दैट वी आर फॉलोइंग टुडे जद ठाकुर की बात को एकदम लिटरली ले ले कि नर्मदा किनारे जाकर के बैठ जाए साधन भजन करना शुरू कर दे सब कुछ भूल कर के आज हमारे में वह अधिकारत्ती डूब जाएंगे तो बेटर है कि कर्म तो करें तो फिर कर्म करना ही है तो कौन सा करें ऐसा कुछ कर्म करें जिससे कि जगत में एक आशा का संचार होता है सो उस समय यदि ऐसा कहा जाए कि ठाकुर का उपदेश जो प्योर नेति नेती फेस प्योर इति इति फेस किसके लिए है तो सात्विक अधिकारी के लिए है और यह जो स्वामी जी का यह बेस्ट एलिमेंट कंबाइन करके दोनों फेस के यह जो मिडल पाथ हमारे लिए बनाया है वो किसके लिए है तो मंद अधिकारी के लिए है राजसिक जिनका स्वभाव है या तामसिक स्वभाव है उनके लिए है सो दिस इज हाउ वी हैव टू रिकन साइल डिफरेंसेस बिटवीन ठाकुर एंड स्वामी जी अच्छा फिर ठाकुर आगे कहते हैं आबार मने मने आदेश होले होए ना अभी अभी देखिए ठाकुर की खुद की ये जो फिलोसोफी चल रही है उसके अनुसार ईश्वर का आदेश होगा तभी जगत कल्याण करना है या तो फिर तभी शिव ज्ञान जीव सेवा करनी है किंतु यह आदेश जो है मैंने मान लिया मेरे मन में ही मन में कि हां अभी मुझे करना है मुझे ऐसा लग रहा है तो यह मन में ही मन में आदेश होने से चलेगा नहीं तीनी सत सत साक्षात्कार होन ईश्वर सही सही में आपको सामने साक्षात्कार होंगे आर कथा कन सही सही में आपके सामने आकर के आपके साथ में बात करेंगे तखन आदेश होते पारे तब तो कहीं जाकर के वो आदेश होगा ठाकुर के दर्शनों की बात तो जगत विख्यात है एक के बाद एक दर्शन होते थे मां काली आकर के सब कहती थी वो ऐसा अपनी आंखों से देखेंगे आंखों से बात सुनेंगे तब तो कहीं जाकर के वो बात बनेगी जब स्वामी जी ने ठाकुर को पूछा नरेंद्र ने ठाकुर को क्या आपने ईश्वर को देखा है तो ठाकुर ने क्या उत्तर दिया था हां मैं जैसे तुमको देख रहा हूं वैसे ही अपनी आंखों से मैंने ईश्वर को देखा है ईश्वर के साथ में वार्तालाप किया है तो सत्य सत्य ईश्वर नजर के सामने आक के आपको आदेश देंगे या तो फिर आपको गाइड करेंगे तब कहीं जाकर के बात बनेगी शे कथ जोर कतो और जब ईश्वर खुद आपको आदेश करेंगे तो उस बात में जोर कितना रहेगा पर्वत टोले जाए माने पहाड़ जद टल जाएंगे इस तरह से आदेश प्राप्त जदी आचार्य अद्वैत वेदांत ना कि ठाकुर की वाणी का प्रचार करेंगे तो पहाड़ खुद उसके सामने ढल जाएंगे और वह यह यह कौन सा उदाहरण है अपनी नजर के सामने तो स्वामी विवेकानंद स्वयं यह जो लिखा है ना पहाड़ टले जाए पर्वत टले जाए अर्थात कि ये पहाड़ खुद उनके सामने वो यदि बाधा के रूप में खड़े हो तो उसके टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे या तो फिर यह रास्ता दे देगा इनके लिए यह स्वामी जी के बारे में देखिए स्वामी जी को ऑलरेडी अद्वैत ज्ञान प्राप्त हो चुका था काशीपुर में फिर जब उन्होंने ठाकुर की वाणी का प्रचार शुरू किया योग वेदांत का प्रचार अमेरिका में जाकर के शुरू किया तो कितनी भयानक बाधा विपत्ति का सामना करना पड़ा था जितने भी क्रिश्चन मिशन ये जो अपना वो प्लान ऑफ कैंपेन है उसमें हम पढ़ेंगे धीरे-धीरे माय प्ला कैंपेन में स्वामी जी का जो हम पढ़ रहे हैं क्रिश्चन मिशनरी है फिर यह ब्राह्मण समाज का यह मजूमदार है फिर यह थियोसोफिकल सोसाइटी वाले हैं यह सब मिलकर के स्वामी जी के पीछे पड़े थे जब स्वामी जी ने वहां से पत्र लिखा आला सिंगा को मद्रास के डिसाइल्स को कि मेरे पास में खाने के लिए और कपड़े पहनने के लिए ग गर्म गर्म देश में तो स्वामी जी बड़े हुए हैं वहां पर ठंड इतनी पड़ रही है कि यह जो पतले कपड़े हैं यहां पर काम नहीं कर करेंगे तो फिर लोगों ने सोच लिया अभी मैं यदि इस तरह से ज्यादा रहूंगा तो जीवन टका मुश्किल हो जाएगा तो यह पत्र जब थियोसोफिकल सोसाइटी के कुछ लोगों के हाथ में आ गया तो बड़े ही खुश हो गए नाउ द डेविल इज गोइंग टू डाई अभी यह शैतान है वो मरने वाला है अभी हम बच जाएंगे तो देखिए कि इतने सारे लोग स्वामी जी के पीछे पड़े थे उस समय हमने यह भी देखा था कि वैसे ये जो नरसिम्हाचार्य है ना कि फिर वो जो ऐसे वो कई लोग भरत से गए थे उनके पीछे नहीं पड़े पता है कि ये लोग हजार जाकर के प्रवचन दे दे प्रचार कर ले कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है किंतु स्वामी जी की प्रतिभा देखी थी उनको पता था कि स्वामी जी की कैटेगरी का एक आदमी स्वामी जी के कैलिबर का कोई आदमी अमेरिका जाकर के हिंदुइज्म का प्रचार करेगा तो उसका बड़ा ही गहरा प्रभाव होने वाला है तो ये देख कर के ही वे लोग स्वामी जी के पीछे पड़े थे तो जिसको फिर ईश्वर के पास में से आदेश प्राप्त है वे लोग प्रचार करेंगे तो क्या होगा पहाड़ भी जैसे कि उनके सामने झुक जाए शुद्धू लेक्चर सिर्फ लेक्चर देना दिन कतक लो के सुन बे तार पर भुले जावे सिर्फ बातें ही बातें जद करते रहेंगे तो स्वामी जी को खुद को जैसे कि एक अनुभव हो गया था ये जो लेक्चर ब्यूरो के उसमें वह गए थे लेक्चर ब्यूरो को उन्होंने एंगेज किया था और गांव-गांव शहर शहर जाकर के प्रवचन देते थे किंतु स्वामी जी ने देखा कि लोगों को क्या ना एक ट्रेंड कि हां एक भारत से एक आदमी आया है सुनो चलो उसकी बात जाक के एक न्यू वरायटी है नोवेल्टी है वो सुन लिया फिर जैसे ही कुछ दिन हुए सब लोग स्वामी जी को भूल भी गए तो यह स्वामी जी को बड़ा ही दुख हुआ था इस बात से कि लोग शुरू शुरू में अमेरिका का ऐसा पूरा नेचर ही है ब क्या ट्रेंड चल रहा है क्या वायरल हो रहा है जो वायरल हो रहा है उसके पीछे दौड़ो जो वायरल होता है क्षण भर में वायरल हुआ क्षण भर में वह चला भी गया लोग उसको भूल भी जाएंगे यहां पर ठाकुर कहते हैं कुछ दिनों तक लोग आपकी बात सुनेंगे बाद में भूल जाएंगे कथा अनुसार काज कर बेना जैसा आपने कहा उसके अनुसार वह कार्य नहीं करेंगे तो देखिए स्वामी जी ने वो मिड ईस्ट वगैरह मिड वेस्टर्न जगह पे सब जाकर के वो जो लेक्चर दिए थे पता चला कि लोग इस तरह से सुनते हैं भूल जाते हैं फिर स्वामी जी ने आखिर में ठीक किया था कि मैं न्यूयॉर्क में जाकर के सेटल होऊंगा कुछ चुनिंदा डिसाइल है उन्हीं को मैं सिखाऊंगा किंतु जो मैं सिखाता हूं उनको चुनिंदा डिसाइल्स को एकदम पक्का मैं उनको ठीक-ठाक सिखाऊंगा तो फिर वह कुछ डिसाइल स्वामी जी के साथ में न्यूयॉर्क वेदांत बाद में जिसको न्यूयॉर्क वेदांत सोसाइटी नाम दिया किंतु उस समय न्यूयॉर्क में स्वामी जी के पास में ऐसे कुछ चुनिंदा शिष्य इकट्ठा हुए थे फिर उनको लेकर के स्वामी जी थाउज आइलैंड पार्क गए थे फिर वहां पे उन्होंने संन्यास भी दिया था लियोन लैंडसबर्ग और मेरी लुईस को तो वहां पे सन्यास की सेरिमनी विदेश की धरती पे यह अपना विरजा होम सनातन धर्म का झंडा गाड़ कर के स्वामी जी भारत में आए थे किंतु उस लेवल पे स्वामी जी के साथ में कितने लोग पहुंच पाए थे तो 12 ही लोग थे कुछ जो कि स्वामी जी के साथ में 1000 आइलैंड पार्क गए थे जो 4 साल तीन साल जो स्वामी जी ने प्रचार किया 93 के आखिर में जो प्रचार प्रारंभ किया और 96 के मिडल तक जो चला उसका परिणाम में 12 लोग ही थे जो कि स्वामी जी के साथ में थाउ आइलैंड पार्क गए थे और दो ही लोगों ने सन्यास लिया था किंतु यह 12 यह दो उसमें उसके भीतर में भी स्वामी जी ने कितना गहराई से वेदांत डाला था हमको यह भी पता है कि यह जो दो जिन्होंने सन्यास लिया उसमें से लियोन लैंडसबर्ग तो स्वामी जी का विरोधी ही हो गया था और जो मेरी लुईस थी स्वामी अभयानंद उसने फिर स्वामी जी के ऐसा तो नहीं कि आउटरा इट विरोध करती थी किंतु स्वामी जी के साथ में उसका भी थोड़ा ये डिफरेंस ऑफ ओपिनियन चालू हो गया था तो यह कितना कठिन है कि कुछ लोगों को पकड़ कर के अपनी बात मनाए ये जो ठाकुर ने कहा ना कि लोग कितना सुनेंगे सुन कर के भूल जाएंगे और भूल तो जाएंगे ही और यह तो सोचो ही मत कि लोग हमारे कहे अनुसार कार्य करेंगे यह जो स्वामी जी अपने एक लेक्चर में कहते हैं कि यह जो अमेरिका में ऐसा एक ट्रेंड वायरल की तरह चलता है उनके घर में ये जो बड़े घर की ये जो होती है भद्रलोक उनके घर में जो स्त्रियां होती है वे लोगों के सब कुछ एक फैशन के अनुसार सब कुछ चाहिए अभी फैशन चल रही है जापानीज वास की तो फिर उसके घर में उसके ड्राइंग रूम में एक जापानीज वाज होना चाहिए वाज यानी कि वो पोट पेंटिंग किया हुआ सिरामिक का सुंदर पेंटिंग किया हुआ तो जापानीज एक वाज आजकल उसका फैशन चला है वो मेरे घर में भी चाहिए आजकल फैशन चला है रिलीजन का तो मुझे थोड़ा सा रिलीजन भी करना है आजकल फैशन चला है यह इंडिया से आए हुए लोग हमको उपदेश देते हैं उसका तो यह इंडिया से आए हुए लोग उसका भी मुझे एक चाहिए एक बड़ा ही फनी इंसिडेंट है स्वामी जी जब कैलिफोर्निया में थे तो अभी पहले तो क्या था स्वामी जी जब पहली पहली बार आए थे और वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में लेक्चर दिया था एकदम वायरल हो गए थे तो अभी एक हो गया एक बन गया कि एक पॉपुलर कल्चर में कि इस तरह से इंडिया से आए हुए लोग उस तरह से जो पगड़ी पहने हुए ये ओवरकोट पहने हुए योगा का उपदेश देते हैं ऐसे लोगों को बड़ा फैशन है ऐसा करके एक पॉपुलर कल्चर में बैठ गया तो सेकंड टाइम जब स्वामी जी अमेरिका गए थे कैलिफोर्निया में उस समय एक नाटक बड़ा ही प्रसिद्ध हो गया था नाटक का नाम था माय फ्रेंड फ्रॉम इंडिया भारत से आया हुआ मेरा मित्र अभी क्या था कि नाटक का प्लॉट कैसा है कि एक धनी आदमी था जिसने कि इधर-उधर से गड़बड़ करके पैसा बना लिया था कि तो प्रॉब्लम यह है कि आपको यदि भद्र समाज या तो यह जेंटलमैन ये जो कल्चर होता है उसमें एंटर एंटर होना है तो सिर्फ पैसा होने से नहीं चलेगा आपके पास में कल्चर भी होना चाहिए तो अभी ऐसा तो क्या है जिसको लेकर के यह भद्र समाज में एंट्री कर पाए सिर्फ पैसों से तो काम नहीं चलने वाला है तो फिर वोह सोच रहा है सोच रहा है ऐसा तो क्या है जिसकी लेकर के जिसके आधार पर मैं ये जो पूरा ये जो हाई सोसाइटी जिसको कहते हैं हाई सोसाइटी में मैं एंट्री लगाऊं ऐसा तो क्या है फिर एकाएक पता चला कि उसका जो लड़का है उसका एक मित्र था वह बार्बर यानी कि बाल काटने वाला उसको बार्बर को अपने घर में बुला कर के यसे इंडिया से आया हुआ एक योगी के रूप में उसको पगड़ी वगैरह पहना कर के उसको सजा दिया तो बस वो मजाक वगैरह ऐसा कुछ था ये इसको कि देखो यह मेरा मित्र आया है है तो बारब किंतु इस इस तरह से दिखा रहा है कि मेरा मित्र आया है भारत से और योगी है तो अभी यह जो धनी व्यक्ति था उसने जैसे ही बार को यह पगड़ी पहने हुए योगी का कपड़ा पहने हुए देखा उसने सोचा कि यह एक बड़ा अच्छा मौका है इस बार्बर को मैं इंडिया से आए हुए योगी का नाम देकर के यह जो हाई सोसाइटी है उसमें मैं चलाता हूं और फिर उसको तो एंट्री मिल जाएगी क्योंकि आजकल फैशन है इंडिया से आए हुए योगियों की पगड़ी पहने हुए तो इसके साथ-साथ में मैं भी हाई सोसाइटी में एंटर हो जाऊंगा ऐसा करके फिर उसको ये बार्बर को ये बाल काटने वाले को फेंटा वगैरह पहना करके पगड़ी पहना कर करके हाई सोसाइटी में चलाया गया इंडिया से आया हुआ योगी है बोल कर के और सब हाई सोसाइटी वाले एकदम उसके पीछे पागल हो गए अरे अच्छा इंडिया से आया हुआ योगी है अब ये फैशन चल रहा है ना अभी बड़ा हस्य रम जीी वाला ये एक्सट्रीमली ह्यूमरस यह नाटक था अभी स्वामी जी उस समय कैलिफोर्निया में थे और यह नाटक वहां पर चल रहा था तो स्वामी जी के कुछ डिसाइल ने कहा स्वामी जी आपके ऊपर में नाटक बनाए चलिए देखने को जाते हैं तो स्वामी जी कहते हैं अच्छा देखना पड़ेगा माय फ्रेंड फ्रॉम इंडिया क्या क्या है इसमें और स्वामी जी गए देखने के लिए और स्वामी जी इतना हंस रहे हैं इतना हंस रहे हैं वो जो बारबर है उसको तो योग वगैरह के बारे में कुछ पता नहीं कोई प्रश्न करेगा तो उल्टा पुल्टा उत्तर देगा वो भयानक ह्यूमरस भयानक फनी और स्वामी जी की जो हंसते हंसते पेट में दर्द हो गया तो यह देखिए कि अब जैसे ही वो क्रेज खत्म हो गया जैसे ही ये फैशन खत्म हो गई वो पगड़ी वाले योगी को भी लोग भूल गए दूसरा फैशन चालू हो गया तो दूसरे में चले गए तो लोगों का क्या है फैशन के अनुसार उसके अनुसार वह उत्साह में आकर के चालू तो करेंगे कितने लोग टिक पाएंगे और बात आपकी सुने आपके कहे अनुसार अपना जीवन परिवर्तित करें यह तो भूल ही जाइए ठाकुर ने कितने लोगों का जीवन परिवर्तित कर पाए थे अवतार वरिष्ठा स्वयं पृथ्वी पर जब आए थे तो जैसे कल हमारी बात हो रही थी यह 18 16 डायरेक्ट डिसाइल त्यागी संतान और कुछ 253 लोग होंगे गृहस्थ संतान जो कि जिन्होंने ठाकुर की बात सुनकर के अपने जीवन को परिवर्तित किया था सस लाइफ ट्रांसफॉर्मेशन तभी होता है जबकि आपका मन संपूर्ण रूप से उनके प्रति निष्ठा भक्ति से आकृष्ट होता है तो ठाकुर जैसे ठाकुर ऐसा ज्यादा से ज्यादा 50 100 लोगों का जीवन परिवर्तित कर पाए थे अपने रहते-रहते तो हम लोग किस खेत की मूली है तो इसीलिए ठाकुर कहते हैं कि तुम्हारी बात सुनेगा कौन यदि तुम बात करने को भी जाओगे तो तुम्हारी बात सुनेगा कौन तो ये ठाकुर की थिरी थी है और यहां पे स्वामी जी की थिरी है कि यदि आपको साधना करनी है और यदि आप यह सोचेंगे कि ट्रेडिशनल साधना ही मैं करता रहूंगा और कुछ नहीं करूंगा जब ध्यान ही करूंगा साधन भजन ही करूंगा स्वाध्याय तीर्थ यात्रा ही करूंगा और कुछ नहीं करूंगा हम उस उस साधना के लिए एलिजिबल नहीं है उसके अधिकारी नहीं है हमको करना क्या पड़ेगा साधना के साथ-साथ में ही कर्म योग को भी लेना पड़ेगा बेस्ट एलिमेंट ऑफ इति इति एंड बेस्ट एलिमेंट ऑफ ने नेति दोनों को कंबाइन कीजिए नेति नेति पाथ में से संपूर्ण शरणागति कामना वासनाओं का त्याग कामिनी कांचन का त्याग वो ले लीजिए इति इति पाथ में से जैसे कि पूरा जगत ब्रह्मण का बना हुआ है जगत कल्याण के लिए नहीं ईश्वर की पूजा के लिए मैं कुछ कर रहा हूं वो भाव ले लीजिए कंबाइन देम बोथ फॉर अवर साधना सो यह जो पूरा एक चक्र है अपनी फिलोसोफी का इसका एक डिस्कशन अच्छा इसके बाद में भी काफी कुछ है हम उसको कल देखते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णर्पण मस्तु मायर खूब मां की बड़ी सुंदर कहानी है व फिर वह नलिनी दीदी और राधू और राधू की मां पागली मामी सो सब समय झगड़ा लगा रहता है अभी नलिनी दीदी के ससुराल में यदि कुछ भेजना है तो पागली मामी कहेगी इतना सब कुछ भेज दिया और फिर यह राधू के ससुराल में कुछ भेजना है तो फिर यह नलिनी दीदी गुस्सा हो जाएगी इतना सब कुछ उसको दे रहा है तो फिर मां क्या करेगी पहले तो नलिनी दीदी को ही बोलेगी यह राधू के ससुराल में जो भेजना है तो कितना भेजू इतना थोड़ा सा भेजने से चल जाएगा तो फिर नलिनी दीदी कहे अरे नहीं नहीं इतना कम भेजने से कैसे चलेगा वो राधू तो पागल है किंतु आपका तो एक स्टेटस है आपके स्टेटस के अनुसार ज्यादा ज्यादा करके भेजिए मां कहती है यदि उसको बिना पूछे भेजती तो दोनों के बीच में झगड़ा लग जाता किंतु नलिनी को पूछा कि राधू के ससुराल में क्या भेजना है तो नलिनी कहेगी कि ज्यादा करके भेजिए यह जो आज की यह जो सोशियो इकोनॉमिक सिचुएशन है ना बड़ी कॉम्प्लिकेटेड है हम लोग मैं जब बेलूर मठ में था तो उस समय हमारे इंचार्ज थे एक अमेरिकन स्वामी उनका नाम था अपना नाम चेंज करके उन्होंने वेदांतिका था तो अभी क्या था वह तो बड़े ही उन्होंने देखिए उनका लाइफ स्टोरी बड़ा जबरदस्त है 19 साल की उम्र में उन्होंने जॉइन किया था और बड़ा ही ऑस्टर और फिर अपने को पूरा हिंदू बना दिया था मोर हिंदू देन अस हिंदू संस्कृत इतना अच्छा बोलते हमारे से बेटर संस्कृत बोलते हैं इतना मतलब शास्त्र वगैरह पढ़ाई किया फ हृदय बड़ा ही उदार बड़े ही सरल अभी भारत में आए हैं बेलूर मठ में रह रहे हैं स्वामी जी का कंप्लीट वर्स एडिट कर र है अभी बेलूरमठ के बाहर में थोड़ा ही जाएंगे जिसने भी गए देखेंगे पूरा लाइन लगा रहता है पैसा मांगने वालों का छोटे-छोटे बच्चों का अभी यह महाराज का हृदय ऐसा उदार है सब समय पॉकेट में चॉकलेट ये वो कुछ ना कुछ रख के जाएंगे जैसे ही और लड़कों को भी पता चल गया एक विदेशी गोरा है इसको पकड़ो तो जैसे ही महाराज जाएंगे सब उनको घिर लेंगे और फिर महाराज को चॉकलेट देंगे यह देंगे वो देंगे फिर यहां तक कि ऐसा हो गया कि कुछ काम है तो ऑफिस में आना शुरू कर दिया लड़कों ने अभी महाराज का क्या है जब तक वो है तब तक तो लड़कों को अपने से अटेंड करेंगे नहीं है तो मुझे बोलेंगे अच्छा तुम जाकर के ये थोड़ा सा हेल्प कर दो वो कर दो शुरू शुरू में तो मैं करता था किंतु फिर मैं एक बार फेड अप हो गया मैंने कहा महाराज आपको पता है ये सब लोग एक्चुअली बैगर्स नहीं है यहां पे पूरा एक नेटवर्क होता है इन लोगों का ये नेटवर्क में ऐसा होता है कि ये जो जितने भी बैगर्स होते हैं उन लोगों को एक एक पूरा ये होता है कि यह तुम्हारा एरिया है तुम्हारा एरिया है तुमको इस एरिया में भीख मांगनी है इस एरिया में और फिर जो मिलता है उसमें से इतना परसेंटेज आपको उसको देना है पूरा ना एक एक ये है पूरा आपको एक ऑर्गेनाइज्ड सिस्टमिक वे में यह सब होता है आप ये मत सोचिए कि ये लोगों के पास में अपॉर्चुनिटी नहीं है या ऐसा कुछ ये जस्ट इ वे ऑफ लाइफ एक इकोनॉमिक सोल्यूशन उन्होंने खोज निकाला है इकोनॉमिक सिचुएशन इज वेरी बैड कोई प्रश्न ही नहीं है आजकल अन एंप्लॉयमेंट का जो परसेंटेज है हिडन अनइंप्लॉयमेंट है पॉवर्टी है उस कोई प्रश्न ही नहीं है कौन जिसका आत्म सन्मान होगा कौन भिक्षा मांगेगा तो फिर किंतु साथ-साथ में ही जो अपॉर्चुनिटी अवेलेबल कराई कराई जा रही है इसका बेनिफिट नहीं लेकर के इजी वे आउट कुछ लोग खोजते हैं पूरी गैंग होती है बैगर्स की उसके रिंग लीडर्स होते हैं पॉइंट असाइन किए होते हैं वहां से वह आपको इतना कमा करके इतना भिक्षा लेकर के उसको इतना रुपया देना है डोंट फॉल इन टू देर ट्रैप अभी मैं जब यह अमेरिकन स्वामी को कहता था तो वो बोलते हैं तो मतलब मुंह से तो नहीं बोलते थे किंतु मन में मन में यही सोचते थे कि इंडियन लोग जो है ना बड़े ही निष्ठुर हृदय के हैं इसीलिए भारत में इतनी पोव है इसलिए भारत में इतना बैगिंग है मन में मन में वह सोच रहे हैं मैं समझ पा रहा हूं राइट अभी देखिए कि हम लोगों की क्या परिस्थिति हो जाती है स्वामी जी को पढ़ कर कर के जगत कल्याण के लिए घर छोड़ा है मैं तो रांची में गया था गांव में काम करने के लिए जेनुइन एक वर्क होना चाहिए ग्राउंड लेवल पे और यहां पर मैं ही कह रहा हूं कि डोंट हेल्प दिस बैगर्स मने ये इतने ऐ मेरे कितने सारे अनुभव है कि वहां पर में हमने यह एक कॉलोनी बनाई थी बैगर्स कॉलोनी एसा वो करके जाती है उन लोगों के लिए अभी एक कॉलोनी बनाई है अच्छे-अच्छे घर बना करके उनको दे दिए हैं कुछ समय के बाद में देखा तो इन लोगों ने क्या किया हमारी हुई कॉलोनी के बनाई हुई कॉलोनी के घर बेच दिए हैं और खुद वहीं फिर से रास्ते पर आ गए हैं वो ट्रिक वो जो होते हैं ना वो एक्रोबैटिक ट्रिक वो दिखा दिखा करके फिर से वही जीवन जी रहा है वो कॉलोनी का कोई अर्थ ही नहीं हुआ तो ट वी नो इंडिया की सिचुएशन इज वेरी कॉम्प्लिकेटेड कि पॉवर्टी ऑन वन हैंड इज देयर इट इज वेरी डिस्पेरटनेस मान खा जाती है उसके बाद में आत्म सन्मान चला जाता है एक बार फिर हम लोग इजी वे आउट खोजते हैं कि चलो कैसे भी करके भिक्षा माग करके मिल जाता है तो फिर यह कौन गवर्नमेंट की स्कीम है ये एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम है एजुकेशन गारंटी स्कीम है या तो फिर ये एनजीओस द्वारा जो प्रकल्प चलते हैं उसमें जाकर के मेहनत करके कौन कमाए हम लोग रांची में काम करते थे अ सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए थे सेल्फ हेल्प ग्रुप में एक ग्रुप में 10 महिलाएं 20 महिलाएं रहेगी प्रति महीने ₹ ₹10 करके सेविंग्स करेगी उस सेविंग्स की जो मुड़ी इकट्ठा होगी उसमें से यह लोग लोन लेकर के अपना एक कॉटेज इंडस्ट्री स्टार्ट करेगी हम लोग उनको ट्रेन करेंगे गमछा बनाना है अगरबत्ती बनाना है आचार बनाना है पापड़ बनाना है फिर ये लोग जब बनाना शुरू करेंगे अपनी कॉटेज इंडस्ट्री में हम लोगों ने पूरा एक सेल्स नेटवर्क बनाया था जिस उसके थ्रू ये लोग सेल्स कर पाए यह पल्ली मंगल क्या है अपना बेलूर मठ का यही एक पूरा प्रकल्प है कि गांव में जाकर के गांव का इन लोगों को अपने पग भर करना है उनको एंप्लॉयमेंट की अपॉर्चुनिटी देनी है खाना नहीं खिला देना है आज खाना खाएंगे शाम को फिर से भूखे हो जाएंगे गिव देम एंप्लॉयमेंट तो इस तरह की एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम्स आर देयर रामकृष्ण मिशन की भी है गवर्नमेंट की भी है बहुत सारी स्कीम्स है यू कैन टेक बेनिफिट ऑफ दैट किंतु वही बात है कि ये जो जनरेशन पॉवर्टी जो होती है जनरेशन आफ्टर जनरेशन पोवली में रहते-रहते इन लोगों का आत्मसम्मान चला जाता है भिक्षा मांगना उन लोगों के लिए कोई ऐसा हम लोग सपने में भी नहीं सोचेंगे कि किसी के पास जाकर के हाथ लंबा है यदि भूखा रहना है तो भूखा रहेंगे किंतु पैसा नहीं मांगेंगे ऐसा बहुत सारे लोगों का एक आत्म सन्मान रहता है किंतु ये जनरेशन पॉवर्टी है जनरेशन आफ्टर जनरेशन ऐसी ही परिस्थिति में लोग बड़े हुए हैं उनके साथ में यह हो जाता है कि आत्मसम्मान खो बैठते हैं फिर ये लोग इस तरह की गैंग के शिकार हो जाते हैं यह गैंग वाले फिर सब पूरा एक नेटवर्क बनाएंगे बैगर्स का इधर भेजो इसको उसको इधर भेजो बोल कर के पैसा इकट्ठा करेंगे सो सोल्यूशन इज नॉट इजी आपको अपने से इंडिविजुअल सोचना है कि हाउ मच डू यू वांट टू हेल्प देम जेनन यदि हम सही में उनको हेल्प करना चाहते हैं ना तो इस तरह की जो एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम होती है या कॉटेज इंडस्ट्री होती है वहां पर जाकर के ना हम थोड़ा सा एक कंट्रीब्यूट करें दैट वे अपना कॉन्शियस शांत रहेगा बैगर्स को नहीं देना है मत दीजिए मैंने अपनी पूरी लाइफ में एक भी बैगर्स को एक भी रुपया नहीं दिया बहुत रेयरली मैंने दिया है सो दैट वे मेरा एकदम पक्का पॉलिसी है कि भिखारी को तो कुछ नहीं देना किंतु एट द सेम टाइम मैंने अपने जीवन के बेस्ट यर्स एक गांव में जाकर के ये कॉटेज इंडस्ट्री सेल्फ हेल्प ग्रुप वगैरह चलाने में मैंने अपना पूरा एक कंट्रीब्यूशन किया है दैट वे माय कॉन्शियस इज क्लियर मेरे तो ऐसे कितने अनुभव है हम लोग विंटर रिलीफ के लिए रात को ब्लैंकेट लेकर जाते हैं तो अभी जो रास्ते पर फुट पाट पर सो रहे हैं सबको वो ब्लैंकेट लगा देते हैं उनके शरीर पर और फिर चले आते हैं फिर फिर दूसरे दिन जाते हैं देखा वे लोग वैसे ही बिना ब्लैंकेट के वही लोग सोए हुए तो पूछेंगे ब्लैंकेट का क्या हुआ तो बेच दिया बोला ठंडी नहीं लग रही है तो शराब बरा पी लिया ठंडी नहीं लगती है जब हम भोग देते हैं यह तो पूरा एक अपना भाव का विषय है राइट अ ठाकुर की कहानी एक बड़ी सुंदर है पहले वो बता देता हूं य जो एक लड़के को बताया गया उसके पिताजी बाहर चले गए बोला कि आज तुम भोग दे देना ब्राह्मण घर का ब्राह्मण परिवार है लड़के को तो पहले से ही ट्रेन करना होगा ये लड़का भोग दे रहा है और फिर हुआ क्या कि देखा है कि वो भगवान आके खा नहीं रहा है अभी हमारा तो थिरी है कि वो तो दृष्टि भोग या वो ऐसा कुछ हो जाएगा बात खत्म हो जाएगा हम बाहर लेकर उसका प्रसाद बना लेंगे लड़का सोच रहा है कि जेनुइनली भगवान आ कर के खाएंगे लिटरली खाएंगे और खा नहीं रहा है तो रो रो करके पुकार रहा है अभी ये जो पवित्र मन है जिसका वो इस तरह से रो रोते होते पुकारेगा तो भगवान ने सोचा भगवान रह नहीं पाए सही सही में लिटरली मूर्ति में से आकर के प्रकट हुए भोग जो है उन्होंने खा कर के फिर चले गए अभी यह समय पूरा हो गया है लड़के की मां पूछती है अच्छा प्रसाद कहां है तुमने जो नैवेद्य ऑफर किया तो प्रसाद तो बचा होगा ना तो बच्चा बोलता है जो भगवान भी ऐसे हैं सब खा लिए हमारे लिए कुछ नहीं छोड़ा मां जा कर के देखती है सही सही सब कुछ ईश्वर ने खा लिया है सो देखिए कि देर इज अ पूरा स्पेक्ट्रम है अपने ऑर्डर में तो आपको पता ही है कि वह भोग देते हैं नैवेद्य देते हैं कोई भगवान आके खाता है मैंने तो आज की पूरी 100 साल की हिस्ट्री में कभी नहीं सुना है एट द सेम टाइम वी नो द आइडियल इज द हाईएस्ट कि ईश्वर जदी आप जननली पुकारेंगे ईश्वर आके खाएंगे ठाकुर की बात है हम इसको अस्वीकार नहीं कर सकते किंतु फिर भी आज ना हम लोग कोई भी अपेक्षा नहीं रखता कोई भी अपेक्षा नहीं रखेगा मैंने वो पूजा मैंने भी की है मैं सपने में भी नहीं सोचता कि ठाकुर खुद आके खाएंगे राइट क्योंकि हमको पता है कि अपनी औकात कितनी है वो लड़का था उसकी एक कैपेसिटी थी हम है अपनी एक कैपेसिटी है तो क्या है कि देखिए कि थोड़ा सा रियलिस्टिक होना है स्पिरिचुअल लाइफ में हाईएस्ट आइडियल हम सबको पता है कि ये हाईएस्ट आइडियल है किंतु फिर ये भी देखें कि हम लोग कहां पे खड़े हैं एक दोनों चीजें हैं अननेसेसरी एक्सपेक्टेशन नहीं रखनी है कि ऐसा ही होना चाहिए दूसरा है कि पूरे हीन भावना का शिकार नहीं हो जाना है कि अरे मैं तो इतना गया गुजरा हूं मेरा ये क्या कैपेसिटी है ये तमस आ जाता है ना वो ठाकुर खुद कहते हैं कहानी दूसरी कहते हैं कि गुरु ने अपने चेले को कहा कि तो मेरे लिए वो तमाकू हुक्का जो है सजा करके ले आओ तो शिष्य तामसिक था वो क्या बोलता है कि मैं क्या आपका हुक्का सजाने के लिए लायक हूं क्या मैं इतना अधम हूं मैं कैसे आपका हुक्का सजाओ तो ये क्या है कि मन जो है इन दोनों बातों के बीच में झूला खाता है मैं इतना अधम हूं मेरे से क्या होगा दूसरा है कि हाईएस्ट आइडियल ये है तो मेरे से वो हाईएस्ट आइडियल क्यों नहीं फॉलो हो रहा है बी रियलिस्टिक मिडल पाथ का अवलंबन करना है मुझे पता है मेरा कैपेसिटी कहां तक है उस कैपेसिटी के अनुसार जितना मैं कर सकता हूं उससे हमको सेटिस्फाई होना है और कीप ऑन कंटिन्यूइंग ऐसा तो एक समय आएगा यह युग युगांतर की अपनी यात्रा है ऐसा तो समय आएगा कि जब भोग देंगे तो ठाकुर खुद आकर उसको खाएंगे नहीं आएगा ऐसा तो प्रश्न ही नहीं है ठाकुर ने खुद ने बोल दिया है बट हैव पेशेंस एंड कंटिन्यू डूइंग साधना यह जो ठाकुर ने पहले ही कहा ना कि केशव को कहते हैं कि तुम देख कर के शिष्य नहीं बनाते इसलिए लोग चले जाते हैं तो हमने जो डिस्कस किया कि ठाकुर का ऐसा नहीं है कि जो अधिकारी नहीं है उसको भगा देते हैं रहेंगे सब किंतु जिसका जो अधिकारत्ती होगा और जैसे यह आदमी जिसने ठाकुर के लिए पानी लाया ऐसा तो जैसे हमने देखा कि ठाकुर उसको भगा नहीं देते हैं ठाकुर ऐसा नहीं कहते कि तुम यहां पर मत बैठो मेरी बात मत सुनो बैठो बात सुनो पानी लाए सब कुछ अच्छा किया किंतु उसका एक रास्ता है नरेन का एक रास्ता है सो कंफ्यूजन वेयर इज द प्रॉब्लम ब्रह्म समाज जैसी संस्थाओं में कि नरन भी एक ही लेवल प है यह धर्मा लिंग धारी या हजरा यह सब एक ही लेवल प है या फेवरेट है फेवरेट नहीं है वो एक डिस्टिंक्शन हो सकता है दैट इज द मेजर थिंग ठाकुर यहां पे कहना चाहते हैं दूसरा कि आपने जैसा कहा बिल्कुल ही ठीक कहा कि उसने तो अपना जीवन तो धन्य बना दिया ना ठाकुर को पानी देक के अब जब तक कथामृत प बढ़ जाएगा तब तक यह धर्मलिंगा आदमी का नाम चलता रहेगा उसका बड़ा भाई जो कि सही सही में जेनुइन डिवटी था उसने ठाकुर को बुलाया ठाकुर की सेवा की उसका नाम किसी को नहीं पता है या उसके बारे में कोई डिस्कस नहीं करेगा इसको सब डिस्कस करेंगे वो तो अमर हो गया ना ठाकुर को पानी पिलाकर के ठाकुर कहते हैं कि काली बाड़ी ते के अभु तो थाक बेना होई तो सकाले के पछ के बिकेले पे मने काली मंदिर में कोई भूखा नहीं रहेगा किसी को सुबह-सुबह मिल जाता है किसी को शाम तक इंतजार करना पड़ता है सो यू आर राइट कि एट द एंड ऑफ द साइकल हमको ईश्वर के पास जाना ही जाना है वही बात है कि यदि थोड़ा सा तपस्या करें तो एक्सलरेट हो जाएगा जैसे स्वामी जी ज्ञान योग में कहते हैं कि यह जनरेशन इवोल्यूशन तो होता ही रहेगा किंतु इसी लाइफ में जद आपको ईश्वर प्राप्ति करनी है या तो विदन अ फ्यू लाइफ टाइम ईश्वर प्राप्ति करनी है तो तपस्या करके अपना जीवन धन्य कर दो मैं पहली बार बेलूरमठ गया था पीपीटीसी जवाइन किया था तो दुर्गा पूजा में बहुत सारी साड़ी आती है मां दुर्गा को पहनाने के लिए तो यदि आपने बेलूरमठ दुर्गा पूजा देखी होगी मां के दोनों साइड में मां दुर्गा की प्रतिमा के दोनों साइड में साड़ी का बड़ा ढग रहता है छछ फुट ऊंचा ढग रहता है तो सभी भक्तों की साड़ी को खोल करके वहां पर रख दिया जाता है मां को ऑफर कर दिया जाता है अभी बेलूरमठ में मां शारदा को पहनाने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा 15-20 साड़ी चाहिए उससे जो कहां ज्यादा फिर बहुत सारी साड़ियों को वो आसपास के जितने गरीब लोग हैं उनको बेच उनको डिस्ट्रीब्यूटर दिया जाता है किंतु ये पूरा सिस्टम है पीपीटीसी ब्रह्मचार्य का उसमें पूरा कंट्रीब्यूशन रहता है वो जो रिलीफ हमारे वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से यह सब होता है तो हमारे उस समय जो वेलफेयर डिपार्टमेंट इंचार्ज महाराज थे हम ब्रह्मचार्य की टीम बना दी थी तीन-चार साधु थे सभी वो ब्रह्मचारी साधुओं की चार-पांच टीम बना कर के पूरे गरीब एरिया में चले गए फिर घर-घर जाकर के लिटरली मैंने यह किया है जैसा आपने कहा घर-घर जाकर के देखा परिस्थिति क्या है फिर उनको टिकट दिया फिर जिस दिन वो कह दिया कि तो आपको यह टिकट में डेट लिखा है टाइम लिखा सब कुछ लिखा है डेट टाइम सब लिखा है इस डेट को इस टाइम पर आपको आ जाना है तो उस समय हम लोग वहां पर वो बेंच के ऊपर में साड़ी रख के खड़े रहे जो भी आएगा टिकट लिया साड़ी दिया टिकट लिया साड़ी दिया मैंने कहा देखो इसको बोलते हैं परफेक्ट बिल्कुल नया नया आया था तो आई वाज वेरी सरप्राइज कि कितना एफिशिएंटली सिस्टम काम करता है अदर वाइज आप गाड़ी लेकर जाएंगे साड़ी डिस्ट्रीब्यूटर के लिए मारामारी हो जाएगी लिटरली ठीक ही बोलन मैंने वो मेरी लड़की की शादी है बोलकर के साड़ी ले ली फिर साड़ी जाकर के बेच दी जैसे मैंने कहा देखिए कि यह जनरेशन पॉवर्टी है ना बड़ा डेंजरस चीज है आज हमको गुस्सा आता है ऐसे लोगों के ऊपर में कि क्यों झूठ बोल करके पैसा लेते हैं भीख मागते हैं क्या कुछ अपने से नहीं कर पाते किंतु दिस पीपल आर जननली नीडी आत्म सन्मान जितने होता है व क्या ऐसा करके कुछ किसी से मांगेगा सो कंपेन इज नेसेसरी अ लिटल कॉमन सेंस इज आल्सो नेसेसरी और जैसे कॉन्शियस अपना है कि ना मुझे कुछ करना है तो ऑलवेज बेटर के कोई एक जेनन एनजीओ में जाके थोड़ा सा कंट्रीब्यूशन करें दैट वे अपना कॉन्शियस क्लियर रहेगा भाई मैं जो मेरे से जो हो सकता है मैंने किया है पूरे जगत का तो भर मैंने अपने सर पे नहीं लिया वो तो होना भी नहीं है तो बेटर कि अपना कॉन्शियस सेटिस्फाई कर दे एक अच्छी जगह पे एज अ वॉलंटिज्म करके और फिर ऐसे लोगों को इग्नोर करें जैसे कि मैंने अपने पूरा लाइफ किया है सेजन ना इसीलिए मैंने किसको क्या हेल्प करना है हम आप इंडिविजुअल तो नहीं समझ पाएंगे अच्छी संस्था के साथ में जुड़कर संस्था के साथ में कार्य करना है संस्था वाले देख लेंगे ऐसा ट इज द बेस्ट ऑप्शन देखिए ऐसा गिल्ट फीलिंग रखने से ना जगत में कभी काम नहीं होगा ऑलवेज एक अब अब जैसे हम लोग भी तो यहां पर काम करते हैं ना अब जैसे कब वाइस प्रेसिडेंट महाराज आए थे तो उनकी सेवा का काम मुझे दिया गया था अभी वाइस प्रेसिडेंट महाराज की सेवा एकदम परफेक्टली होनी चाहिए प्रेसिडेंट मोस्ट रिव प्रेसिडेंट महाराज की वाइस प्रेसिडेंट महाराज की तो सेवा प्रात तो होता ही रहता है बोलकर के क्या हम यह सेवा करना छोड़ देंगे ऐसा भी नहीं है जैसे वो ठाकुर की कहानी है ना दो बच्चे हैं एक बच्चा बाबा करके पुकारता है दूसरा छोटा है उसको पता नहीं कैसे पुकारना तो बा करके पुकारता है तो पिताजी क्या यह सोचेंगे कि उसका बड़े बच्चा वो ज्यादा बेटर है छोटे बच्चे से ईश्वर को तो पता है कि किसकी क्या कैपेसिटी है तो ऐसा ज्यादा नहीं सोच करके जो हो सके कर ले फिर तो धीरे-धीरे करके जितनी सेवा करते जाएंगे चित्त शुद्धि होती जाएगी उतना ही नेक्स्ट टाइम नेक्स्ट टाइम बेटर से बेटर होता जाएगा जो अपने हाथ में नहीं है उसका तो स्पेक्युलेटिव पर भरोसा करके दे देना है फिर क्या होता है वह देखना नहीं है वह एक ऑप्शन है दूसरा एक कॉमन सेंस रखना है कि जिसको दे रहे हैं उसका प्रॉपर यूटिलाइजेशन होता है कि नहीं तो आप देखिए कि इसका सॉल्यूशन तो आपको रामकृष्ण मिशन की गति विधि को देख कर के मिल जाएगा हम लोग ईश्वर पर भरोसा करके देते हैं हम लोग प्रचार नहीं करते हैं किंतु साथ में ही यह कॉमन सेंस बड़ा ही क्लियर है अपना कि जो भी देते हैं जेनुइन पर्सन को मिलना चाहिए इसीलिए इतना मेहनत करके टिकट डिस्ट्रीब्यूटर के फिर हम लोग उनको देते हैं सो बोथ थिंग्स आर ट्रू एट द सेम टाइम कि प्रचार भी नहीं करना है क्या होता है देने के बाद में हमको कोई फल मिलता है कि नहीं वह भी चिंता नहीं करनी है एट द सेम टाइम जेनन पर्सन को मिले उसका थोड़ा सा ख्याल रखना है बोथ थिंग्स आर ट्रू एट द सेम टाइम