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ओम स्थापा का यह धर्म स्वरूप ने अवतार वरिष्ठय रामकृष्ण यतिन नमो अच्छा ताहुले श्री राम कृष्णा कथा अमृत कल हमने देखा की किस तरह से ठाकुर उनके जो भक्ति हैं मनमोहन उनको कहते हैं की आज पहले अगस्त है तो आज यात्रा करने से क्या होगा ऐसा करके एक संदेह व्यक्ति करते हैं और इस संदेह के ऊपर में हमने ये चर्चा की क्या आज के मॉडर्न युग में आधुनिक युग में इस तरह की मान्यता रखना की हमारे कर्मों के अलावा भी ऐसी कोई शक्ति है ग्रह नक्षत्र वगैरा और या फिर इस तरह की कोई मान्यता की कोई अमल सूचक यदि हम कार्य करते हैं तो हमारे साथ में मंगल होगा क्या ऐसा संभव है इस तरह से हम आज के युग में मानेंगे की नहीं विश्वास करेंगे की नहीं तो इसके ऊपर में हमने डिस्कस किया और हमारा करण था की एक ऐसा जगत है जिसके बड़े में अभी हमारी इंद्रिय या तो फिर हमारी यह जो साइंस और टेक्नोलॉजी जो है है वो वहां पर पहुंच नहीं पाती और इस जगत के जो नियम है इस जगत के जो कानून है वह हम यदि आध्यात्मिक राज्य की समाधि की कक्षा में पहुंचेंगे तभी हमको समझ में आएंगे जैसे की फिजिक्स में कहा जाता है घेरार हायर डाइमेंशंस तो जैसे फोर डाइमेंशंस पेस्ट और टाइम की है किंतु कांटेक्ट डायनामिक में जाएंगे तो 10 डाइमेंशंस 11 डाइमेंशंस ऐसा सब कुछ मैथमेटिक्स चला है तो इससे यहां पे भी देवर इसे एन हायर स्पिरिचुअल डाइमेंशन देवर इस एन हायर स्पिरिचुअल वर्ल्ड इन विच रूल्स आर कंपलीटली डिफरेंस फ्रॉम अवर फिजिकल वर्ल्ड तो इस जगत के बड़े में उसके ऊपर विश्वास करना नहीं करना ये अपना व्यक्तिगत एक ये है प्रेफरेंस है और कभी ऐसा नहीं सोचना चाहिए की यदि मैंने कोई विधि कर दी या किसी को मंदिर में पैसा दे दिया या तो ऐसा कुछ भी कर दिया जिससे की मैं अपने कुकर्म या तो दुष्कर्म को कैट दूंगा या दो दूंगा अपने पाप रही अपने मां में जो पाप है उसको मैं बिना किसी तपस्या किया में उसको दो दूंगा तो ऐसा कभी नहीं होने वाला है शायद ऐसी कहानी हमने सनी है की बिना कोई कर्म किया तपस्या की ये साधना की यह किसी को कोई फल प्रताप हो गई हो किंतु हमने देखा है हमारे शास्त्र ही बताते हैं की उसे जनों के मैं नहीं तो पिछले जनों में या तो अगले जन्म में उससे साधना करवा ली गई थी तो बिना साधना के बिना कर्म के कुछ भी प्राप्त नहीं होता तो यह हमारा यह नॉर्मल लेवल जो वर्ल्ड है पर डाइमेंशनल वर्ल्ड यह उसका नियम है और इस नियम का अन्यथा नहीं होने वाला है हायर वर्ल्ड में हीरे डाइमेंशनल वर्ल्ड में वहां पर एक्स्ट्रा कुछ नियम होंगे किंतु इस जगत के नियम का भांग वहां पर नहीं होने वाला है तो आगे बढ़ते हैं नरेंद्र और तहर बंडूरा स्नान कोरिया अश्लिन नरेन और उसके मित्र स्नान करके वापस आए हमने देखा था की नरेंद्र शाम को गया था ठाकुर को मिलने के लिए अपने मित्रों के साथ में और और रात को वहीं पर रुक गए थे कीर्तन वगैरा बहुत कुछ हुआ था ठाकुर महा आनंद में थे की आज नरेंद्र आया है रात को वे लोग गुरु के हमने देखा की रात का वर्णन मास्टर महाशय ने ही देते हैं यदि देते तो बहुत अच्छा होता किंतु खेर अभी उनकी इच्छा जो भी है सुबह हो गई है और नरेंद्र और उनके मित्र सब स्नान करके आए हैं ठाकुर व्यग्र हुई या नरेंद्र के बोली लेने जो बोट तलाई ध्यान करोगे एक्शन देवों ठाकुर ने व्यग्र हो करके नरेंद्र को कहा जो बट ताला अर्थात की वटवृक्ष का वटवृक्ष के नीचे में तले में जाकर के ध्यान करो क्या मैं संधू अभी वटवृक्ष कहां था पंचवटी में जहां पर ठाकुर ने खुद साधना की थी वेदांत उसके नीचे में ही एक कुटिया है और वहां पे ठाकुर ने वेदांत साधना में अंतिम सिद्धि जो है सर्वोच्च सिद्धि जो है निर्विकल्प समाधि वो प्राप्त की थी आज एन पिछली बार में बेलूर मठ में था तो वहां पर जाकर देखा तो पीयरलेस वालों ने उसे जगह को पूरा घर लिया है और ठाकुर की कुटिया को पूरा नए तरीके से सजय है और वहां भीतर में किसी को जान नहीं देते एक पूरा एक म्यूजियम जैसा करके रखा है पहले ऐसा होता था की जितने भक्ति सड़क साधु और यात्री जो भी जाते थे सब लोग उसे जगह पर जा सकते थे किंतु खेर अभी क्या करें नरेंद्र और तार कैटी ब्राह्मण बंधु पंचवटी मूल ध्यान करेट छे नरेन और उनके कुछ ब्राह्मण मित्र पंचवटी के तले में ध्यान कर रहे हैं मेला प्राय सादे दुष्ट समय 10:30 का हुआ ठाकुर श्री राम कृष्णा कट खंड पैर शेखन उपस्थित हो ठाकुर श्री राम कृष्णा कुछ समय के बाद में वहां पर उपस्थित हुए मास्टर और मास्टर भी आए हैं ठाकुर कथा कहानी अप नदी में यदि आप रतन खोजना के लिए जाते हैं तो क्या ऊपर में तैरने से रतन मिलते हैं ऐसा ऊपर-ऊपर तैरने से रतन कभी नहीं मिलेंगे जैसे वह आ रतन खोजना वाले यह इंडोनेशिया फिर मलेशिया वगैरा मैंने कुछ डिस्कवरी चैनल पे कुछ वीडियो देखें थे उन लोगों को सांस रोकने की बड़ी अच्छी स्पीड होती है तो क्या करेंगे की ना वो नौका लेकर के जाएंगे और फिर जंप लगाएंगे भीतर में और पूरा 1 मिनट तक नहीं 2 मिनट तक नहीं ऐसा वह लोग सांस रॉक सकते हैं और पूरा भीतर में जाएंगे और वो जितने भी के वगैरा है वो कलेक्ट करके ऊपर आएंगे तो यह भी एक तपस्या है देखिए प्राणायाम किया बिना इस तरह से मैन यह भी एक तरह का प्राणायाम ही है एक तरह का कुंभक ही है तो देखिए की रतन अपने के लिए यह रतन खोजना वाले कुंभक कर सकते हैं तो ईश्वर के अपने ईश्वर को अपने के लिए हमको क्या से क्या नहीं करना पड़ेगा आपको यदि पता है तो पानी में यदि हम दो 5 मिनट 2 मिनट से ज्यादा रहेंगे तो हमारे भीतर में ऑक्सीजन का कमी हो जाता है और फिर इमीडियाटली वह बहुत सारे मेडिकल उसके वो मैंने जब ये सब एक बार पढ़ रहा था आ दीप सी डाइविंग उसे समय मैंने पढ़ा था की तुम्हें भूल गया की किस तरह से ऑक्सीजन की जगह नाइट्रोजन फेल जाता है अपने वो सब वाइंस में वो और फिर क्या उससे वो कॉम्प्लिकेशंस होते हैं वो सब मेडिकल टर्मिनोलॉजी वगैरा पढ़ा था अभी तो मैं भूल गया किंतु उसे समय आश्चर्य होता था की देखिए की वहां का जो कलर है छोटे बच्चे भी हैं वो छोटे बच्चे भी वह बचपन से ही इस तरह से वो नदी में जंप लगा करके ये चिप निकालना वे लोग सीखने हैं सांस को रोकना सीखने हैं अभी तो खैर यह सुंदर कल वगैरा यह जो मॉडर्न इक्विपमेंट है की वह पानी के भीतर में भी सांस ले सके इसके लिए ऑक्सीजन टैंक आता है और उसके द्वारा सांस ले सकते हैं वगैरा वगैरा मॉडर्न इन्वेंशन आज का है किंतु यह लोग क्या करते थे जैसे एक बस होता है तो बस को ऐसा वो लगा देते हैं जिसमें से वो हवा आएगी फिर बस का एक टुकड़ा अपने मुंह में रखेंगे एक पानी के ऊपर में रहेगा तो ऐसा करके वह लोग पानी में तैरते थे वह दीप सी डाइविंग दीप सी तो नहीं कहेंगे किंतु सेलो डाइविंग आईटी ये लोग करते थे तो ये लोग इस तरह की तपस्या कर सकते हैं इस तरह का एक डिसिप्लिन होता है इनके जीवन में तो हम लोग जो की ईश्वर प्रताप करना चाहते हैं हम लोगों के जीवन में तो क्या क्या डिसिप्लिन नहीं होना चाहिए मेरा एक मित्र था और 10थ 11थ में और 12th स्टैंडर्ड में तो वह हमारी वैसे मेरी स्कूल में नहीं पढ़ना था उसकी स्कूल डिफरेंट थी किंतु उसका घर मेरी स्कूल के सामने था तो जब भी मैं स्कूल में जाता था तो उसके घर के सामने में देखा था वह फर्स्ट फ्लोर पे खिड़की के सामने बैठ करके स्टडी करता था और उसका जो मतलब नीचे में तो कुछ समझ सकते हैं की स्कूल है मैन हजारों स्टूडेंट टीचर्स पेरेंट्स कितने वो मतलब कितना मैच बाजार की तरह वहां पे हल्ला गला होता है नीचे में किंतु वो उसको मैं नियमित रूप से देखा था की जो किताब लेकर के पढ़ रहा है तो पढ़ ही रहा है इधर उधर कहानी ध्यान नहीं और वो अभी तो आजकल ये रैंकिंग सिस्टम शायद चली गई है वरना पहले डिक्लेअर होता था की फर्स्ट बोर्ड की एग्जामिनेशन में फर्स्ट रन सेकंड रैंक थर्ड रैंक ऐसा करके तो वो 10th में और 12th में दोनों बार टॉप टेन में उसका नंबर आया था तो वो ये पढ़ाई करने के लिए आपको हजारों स्टूडेंट को स्टूडेंट जो परीक्षा देते हैं उसमें टॉप 10 में आना स्टेट लेवल पे यानी की आपको किस तरह का मेंटल डिसिप्लिन चाहिए किस तरह का मेमोरी कैपेसिटी चाहिए की किस तरह से वह जो पड़ेगा वो याद कर लगा स्वामी जी का है ना की वह एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिया का उनके रूम में बहुत सारे वॉल्यूम्स थे तो वह शरद चंद्र चक्रवर्ती उनका डिसीप्ल वह जाकर के स्वामी जी को पूछता है की महाशय क्या आपने यह सब पढ़ लिया है या तो पढ़ रहा है तो स्वामी जी ने कहा की हां तुम कोई भी पेज खुलकर के मुझे प्रश्न करो तो जब वो सही है उसने जब वो एक के बाद एक एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिया का इतना बड़ा वॉल्यूम और कितने वॉल्यूम है तो जैसे कोई भी रेंडम वॉल्यूम लेकर के रेंडम पेज खुलेगा स्वामी जी को पूछेगा स्वामी जी इमीडियाटली उसका उत्तर दे देंगे एस आईटी इस तो वह जो फोटोग्राफिक मेमोरी है या तो फिर उसको कहेंगे ईडियटिक मेमोरी तो ये आईडेंटिटी मेमोरी जो होती है जो की आप एक बार जो पढ़ लेते हैं वो आपको हमेशा के लिए याद र जाता है तो वो डिटेक्ट तब पावर ऑफ कंसंट्रेशन तो ये कंसंट्रेशन सीखना जीवन में सफल होने की सबसे बड़ी चाबी है तो इसीलिए ठाकुर यहां पे एक सेंट छोटे से सेंटेंस में किंतु हमको ध्यान के बड़े में कितना एक अच्छा सा एक अच्छी सी बात बताते हैं की जैसे वो जो रतन अपने के लिए जो गहन जल में वो डुबकी देते हैं उसे तरह से हमको गहराई में डूबना चाहिए ऊपर ऊपर से तैरने से क्या होने वाला है जैसे परीक्षा देनी है तो मैंने थोड़ा बहुत 10 15 मिनट पढ़ लिया फिर मोबाइल खोल करके देखने लगा मेरे टाइम में तो अच्छा था मोबाइल नहीं था हम लोग बैक आजकल के लड़कों को जो मोबाइल का रोग जो लगा है कुछ भी होने से फैट करके मोबाइल खोलेंगे दिन का कितना समय वह मोबाइल पर बिताते हैं उसका कुछ ठीक नहीं है अभी आजकल तो ऐसी अप आई है की स्क्रीन टाइम मॉनिटर करेगी अब कितनी बार स्क्रीन ऑन रखते हैं फिर वो स्टैटिसटिक्स दिखाएंगे की आपने आज दो घंटा मोबाइल के सामने देखा 4 घंटा देखा 6 घंटा देखा और फिर आजकल तो इस तरह की अप भी आई है की मैंडेटरी यदि आपने ऐसा ठीक किया है की 2 घंटे से ज्यादा मोबाइल नहीं देखना तो 2 घंटा उसका स्क्रीन टाइम वो देखेगा उसके बाद में उसको शटडाउन कर देगा उसको ओपन लॉक कर देगा उसको ओपन नहीं करने देगा वह मैंने सोशल मीडिया वगैरा मोबाइल पे बात कर सकता है और अमेरिका में तो आज तक आजकल ये डिटॉक्सिफिकेशन डिटॉक्स कहते हैं ना ऐसे रिट्वीट होती है की वी-फी फ्रिजोन वहां पर आप जाएंगे रिट्वीट में वहां पर आपको वी-फी नहीं मिलेगा मैंने आप मोबाइल के सामने देखते रहिए जितना भी चाहे वी-फी नहीं है तो वो तो आपके जितने वह जो एडिक्टिव एप्स जो है उससे आप दूर रहेंगे दो तरह के अप होती है जिससे ये आपको मोबाइल में कितना भी पढ़ने हैं अच्छी बात है ऊक रीडर वगैरा होते हैं कुछ कुछ एडिक्टिव अप होती है जैसे की सोशल मीडिया एप्स जो की आप देखते ही चाहिए देखते ही चाहिए उसका और नहीं आएगा या तो फिर ये ऑनलाइन गेमिंग वगैरा जो आजकल चला है तो ये सब के वजह से हमारा मां इतना चंचल हो गया है इतना वो मतलब वो रिस्टलेस हो गया है की कोई भी किताब को हम 10 मिनट से 5 मिनट से ज्यादा नहीं पढ़ पाते पढ़ने पढ़ने से ही फिर मां में ऐसा एक होता है की चलो अभी उसको बाजू पे रख करके थोड़ा सा मैं यह सब यह राजस्व कुछ कम कर लेट हूं राजसी खुराक प्राप्त कर लेट हूं ऐसा मां में ऐसा होता है तो ठाकुर की कृपा से मैं स्टूडेंट है तब मोबाइल नहीं था और ठाकुर जब थे तब तो कुछ भी नहीं था इस तरह का एडिक्टिव तो किंतु फिर भी जैसे ठाकुर ने कहा नेकी केशव सिंह के वहां पर गया था उसके एक संबंधी को देखा वो ताश खेल रहा था उसे समय ताश उसे समय का एडिक्टिव वो सब था सोशल मीडिया की तरह है वो चार-पांच लोग बैठे हैं ताश खेल रहे हैं वो उसे समय का सोशल मीडिया तो वो कहता है की वो केशव सेन का संबंधी की क्या करूं मैं बिना किसी कम के नहीं बैठ सकता तो मैं ताश खेलते हूं तो ठाकुर कहते हैं अरे क्या बुढ़ापे में भगवान का नाम लगा ना की यह सब करेगा तो हमारा मां जो है सब समय राजस्व कार्य करने को लालायित राहत है राजसी कोरा ग्रहण करने को वो उत्सुक राहत है खुराक आहार में भी ऐसा होता है जैसे बाहर से खाना आता है कभी-कभी ये गुजरात में तो नॉनवेज नहीं चला है पाव भाजी है वगैरा वह जो बहुत सर मसाला डाला हुआ खाना तेल और मसाला डाला हुआ यह बहुत सारे लोग खाता हैं तो हमारे यहां पर जन्माष्टमी का मेला होता है तो मैं जब पहले बार यहां पर आया था 2012-13 की बात कर रहा हूं हम लोग जन्माष्टमी के मिले में सब समय बुक स्टोर लगाते थे तो बुक स्टोर लगाने से हम लोगों का मैं खुद तो गया नहीं हूं कभी किंतु जो लोग जाते हैं उनसे मैंने सुना है की इतना भीड़ हो जाता है अपने बुक स्टॉल के पास में और इतने सारे लोग इतने सारे किताब खरीदने हैं जो कर पांच दिन का वो जो मेला राहत है प्रतिदिन आश्रम से वो पूरा एक गाड़ी भर-भर करके किताब जाता था की अगले दिन ये किताब खत्म हो गया दूसरा लेकर के आओ दूसरे दिन वो किताब खत्म हो गई जो आश्रम से उसको स्टॉक नया स्टॉक लेकर के आओ तो तीन कर दोनों में हमारा लाखों रुपयो का सेल होता था और उसने यह नहीं है की कितने रुपयो का सेल होता है प्रश्न यह है की एक धार्मिक उछांग धार्मिक साहित्य हम लोग लोगों को एक सहज लब्ज बना रहे हैं हमारे वॉलिंटियर्स हमारे साधु इसके लिए बड़ी उसके कठिनाई से कोई मेहनत करके यह सब करते थे किंतु आजकल जो हमें देख रहा हूं पिछले साल का यह मेला और उसके पहले साल का मेला मैं देख रहा हूं की हम लोग देख रहे हैं की वह सेल ही नहीं होता ना ही कोई किताब खरीदने को आता है वो भीड़ कहां पे होगी जहां पर खाली खाने पीने वालों का स्टॉल लगा है वह भयानक भीड़ मैन लोग खाने के लिए लाल ही थे जैसे की पागल है जैसे की कभी खाना खाना नहीं खाया है जीवन में इस तरह से ये जितने खाने पीने वाले के स्टॉल है दुकान है अच्छी-अच्छी चीज वहां पे बिकती है पूरा भीड़ रहेगा किंतु यह जैसे की गोरखपुर का गीता प्रेस का स्टॉल है वहां पर तो फिर भी चलो थोड़ी बहुत भीड़ होती थी गीता प्रेस के स्टॉल में किंतु हमारे यहां पर सेल और उन लोगों का आना बिल्कुल कम हो गया है तो अभी हम क्या कहेंगे इसके बड़े में क्या ऐसा है की राजकोट में जिसको धर्म या आध्यात्मिकता से उनको जन की सीखने की इच्छा थी उन्होंने किताब ले ली अभी नहीं जरूर है ऐसा तो नहीं है सतत एन एक आध्यात्मिक चिंतन जो जिज्ञासु है वो मोक्ष है उसके मां में सतत आध्यात्मिक चिंतन चला राहत है उसको एक सात्विक कोरा चाहिए ही चाहिए और ये सब किताबें की तरह वो स्वत ही आकर्षित होगा किंतु आजकल का जो ट्रेड है की यह अब सोमनाथ में हमको एक स्टॉल मिला है सोमनाथ यानी की भगवान शिवा का एक बहुत ही सुंदर एक प्रख्यात मंदिर तो हमने आशा राखी थी की वहां पे भी बहुत सेल होगा बहुत भीड़ होगी वहां पे हजारों लाखों यात्री आते हैं पूरे देश विदेश में से तो वहां पर तो अच्छा सेल एटलिस्ट सेल की दृष्टि से नहीं तो लोगों के पास में ठाकुरमार स्वामी जी का यह आनंद वर्धन यह अमृत मे उपदेश पहुंचे यह तो हम आशा रख सकते हैं किंतु वहां पर भी देखा है की इस तरह का रिस्पांस नहीं है पहले पहले हम सीनरी वॉलिंटियर से सुनते थे की वह कहानी किसी स्कूल में गए किसी मिले में गए किसी चौराहे पर खड़े हो गए अरे खड़ा करके भीड़ ग जाति है लोग उनको हृदय से आशीर्वाद देते हैं की अरे भाई आप इतना कष्ट करके गाड़ी लेक यहां पे आए इस किताबें को लेकर के हमको ठाकुर मां स्वामी जी के बड़े में पढ़ने का मौका मिला तो भगवान आपका भला करें भगवान आपको आशीर्वाद दे ऐसा कितने वो पहले के वाचन पहले के लोग हमारे वॉलिंटियर्स को कहते थे किंतु आज का पूरा ट्रेड इस तरह का है की अब किताब लेकर के भी जाएंगे तो लोगों का वहां पर आना किताब खरीदना उसका उसके बड़े में चर्चा करना वो कम होता जा रहा है पूरा तो चला नहीं जाएगा भारत तो धर्म की भूमि है और यहां पर तो कितने ही विदेशी आक्रमण हुए हैं और होते रहेंगे पहले वह घोड़े पर बैठकर आते थे अभी वो मोबाइल पे बैठ आते आते हैं चीज वही है हर बार भारत ने पुनर्जीवन धरण किया है हर बार भारत के भाग्य विधाता ने ये मैटेरियलिज्म ये भोगवाद का ये जो पूर्व है यह जो आक्रमण है उससे भारत को बार-बार बचाया है तो इस बार भी बचाएगा उसमें कोई प्रश्न नहीं है ये अप और डॉ थोड़ा बहुत चला राहत है किंतु यह सब हमारे ऑब्जरवेशन रिसेंटली है तो इसीलिए ठाकुर कहते हैं की ध्यान करने के समय पूरा मगन होना है और आजकल का समय यदि हमको डूबने ना दे आध्यात्मिक साधना में तो ठाकुर क्या कहते हैं मैन वैन और पुणे मां में अर्थात की अपने को अपने मां को वो बखिए सब जो कार्यकाल है जो लोगों के वहां पर बैठने के लिए मिलने के लिए जाना है मित्रों के साथ गैप लगाना है कोई सोशल ऑकेजंस और इवेंट से वह सबसे धीरे-धीरे करके यह जो जो अनुप्रस्थ आश्रम है सड़क पर्पेटुली वानप्रस्थ आश्रम और या तो फिर सन्यास आश्रम में राहत है भले ही चाहे या बृहस्थ भी क्यों ना हो मां ऐसा रखना है की आप वानप्रस्थी हो चुके हैं आपका मां सतत भीतर की और ठाकुर की और आकर्षित होता है यह सोशल जितने भी आपके कन्वेंशन है ऑक्शन से ये जितने भी प्रसंग है उससे जितना आप अवॉइड कर सके उतना करना चाहिए हमारे एक वॉलिंटियर हमको बताते थे की एक वॉलिंटियर ऐसे थे की एक शहर में उन्होंने ठाकुर के नाम पे एक छोटा सा केंद्र स्थापित किया यह तकरीबन स्थापित तो पहले हो चुका था किंतु वो जब उसमें जॉइन की है यह आज से तकरीबन 30-40 साल पहले की बात है अभी तो उसे शहर में अपना आश्रम हो गया है रामकृष्ण मिशन का सेंटर हो गया है किंतु वह जो पहले बार केंद्र की स्थापना हुई थी तो उसे समय नए-नए ये लोग ए रहे थे स्टूडेंट हिट है तो वह केंद्र में जाकर के रामकृष्ण विवेकानंद केंद्र उसका नाम दिया था और केंद्र में जाकर के कम करने का भीतर से इतना एक क्या कहेंगे उत्कंठा रहती थी इतना एक आकर्षण राहत था की घर में यदि कोई उनकी वाइफ चूड़ी रहेगी यंत्र किंतु शादी हुई थी उसे समय तो उनकी वाइफ यदि रहेगी अरे चलो उनके वहां पे शादी है जाना पड़ेगा या तो फिर उनके वहां पे कोई प्रसंग है तो वो भाई कहते थे की अपनी पत्नी को की तुम चली जो तुम व्यवहार करो मैं केंद्र में जा रहा हूं पूरा दिन भर नौकरी करते थे शाम को सीधा केंद्र पे जाकर के केंद्र की गतिविधियां वो बुक सेल उसे समय जो होता था उसका अकाउंट रखना कोई सीनरी साधु वहां पर विजिट के लिए आया है तो उनके लिए प्रवचन वगैरा का व्यवस्था करना महाराज की सेवा करना या तो फिर फिर जो भक्ति लोग वहां पर आते थे उनके साथ में ठाकुरमार स्वामी जी के बड़े में बात करना और सप्ताह में एक बार खानदान भवन आरती होती थी तो वहां पर एक वॉलिंटियर दूसरे थे तो वह हारमोनियम लेकर के आरती करते थे तो उसमें सब व्यवस्था करना तो दिन भर जब और शाम पूरा केंद्र में इस तरह का एक क्या कहेंगे की मोहिनी माय आकर्षण उनको केंद्र की और था की पूरा संसार भूल गए थे तो कहते हैं की वो मुझे कहते थे मैं की अभी तो वो रिटायर हो गए हैं वृद्ध हो गए हैं तो कहते हैं की हम लोग राम कृष्णा मैं हो गए हमारे जीवन में रामकृष्ण के छोड़कर के और कुछ है ही नहीं हमारे संबंधी अभी हमारे साथ बात नहीं करते बोलते ये लोग निकम्मी है किसी कम के नहीं है उनको किसी प्रसंग में बुलाएंगे तो भी नहीं आएंगे अभी उनकी पत्नी जा रही है ऑफ कोर्स वो तो संबंध व्यवहार करेगी किंतु भाई के बड़े में बोलते हैं की किसी कम के नहीं है बुलाने से भी नहीं आएंगे कम बोलने से भी नहीं करेंगे केंद्र का कम करते रहेंगे किंतु अपने संबंधियों का नहीं करेंगे ऐसा हमारा दूर नाम हो गया है तो वो कहते हैं की दूर ना हुआ तो हुआ ठाकुर के श्री चरणों में हम पड़े हैं तो वैसे ही नदी के भीतर में समुद्र के भीतर में अपने हृदय में डूबना चाहिए तब कहानी जाकर के भीतर में से रतन मिलते हैं तो एक वन में फिर एक मां में फर्न में अर्थात कॉर्नर में अपने घर में ठाकुर कहते हैं ना की वो मॉस्किटो नेट दाल करके ध्यान कर रहा है लोग सोचते हैं सो गए हैं तो अपने घर में इस तरह से एक श्री होना चाहिए एक एकांत में हम बैठ सके सबसे दूर जाकर के ऐसी जगह हनी चाहिए और वन अर्थात किसी अच्छी जगह पे बीच-बीच में रिट्वीट के लिए जा सके ऐसा होना चाहिए हमारे बहुत सारे सेंटर में इस तरह से अभी राजकोट में ही पिछले सप्ताह ध्यान शिविर था तो पूरा दिन भर ध्यान शिविर चला था सभी भक्ति लोग आए थे सभी साधु ब्रा साधुओं ने प्रवचन भी दिए थे बड़ा अच्छा हुआ था ध्यान शिविर तो ऐसे कहां-कहां पर रिट्वीट वगैरा है दिन भर का एक-दो दिन का शिविर वहां पर अटेंड करना चाहिए यही बोलियां ठाकुर मधुर स्वारेगंगा हाइट लागिलान यह कहकर ठाकुर मधुर स्वर से गण गाने लगे रत्नाकर नए शून्य को खोल दी कर दुबे धन्ना पहले मां काली बोल कर के अगाध समुद्र में डब दो हृदय कौन सा घर समुद्र है रवि रत्नाकर रत्नाकर अर्थात की जो रतन को धरण करता है अर्थात समुद्र और रीति रत्नाकर अर्थात की हृदय रूपी समुद्र में रत्नाकर नए शून्य को रत्नाकर अर्थात समुद्र में रतन एन हो ऐसा कभी हो ही नहीं सकता शून्य कबीर हो ही नहीं सकता विचार उलकुंडली नीरकुले यदि तुम तीन दो तीन डब दो के और तभी तुमको रतन नहीं मिलता है तो तुम दम समर्थ पूरा एक गहरी सांस लो और एक गहरी डुबकी लगाओ कलर कुंडली नीर पहले इस किनारे जो की कल कुंडली का किनारा है हमारे हृदय के भीतर में हमको पता है की कुंडली ने जब जागृत होती है तो धीरे-धीरे करके वो हृदय की और कंठ की और अपने भूमध्य और फिर सहस्त्र चक्र अपने मस्तिष्क के ऊपर में ये उसकी पुरी एक जर्नी रहती है तो यह कल कुंडली हृदय रूपी ये जो समुद्र है उसमें दो ज्ञान समुद्र मजहरे मौन शांति रूप मुक्त फल तुमि भक्ति कोर कुडे पाव शुभेच्छुक्ति मथाई कुंभीर कच्चे आहार लोधेश्वर नाथ तार गंदो पहले अर्थात की यदि यह कम क्रोध रूपी ये जो छह रितु है छह रितु एक मगरमच्छ के रूप में यदि हम समुद्र में डुबकी लगाने से हमको का जान के लिए आते हैं तो विवेक वैराग्य रूपी हल्दी अपने शरीर पर हल्दी मखालो अपने शरीर पर हल्दी लगा दो तो वह ऐसा कहा जाता है की अपने शरीर पर हल्दी लगाने से मगरमच्छ खाने को नहीं आता तो छह रितु यानी की कम क्रोध मतलब लगा देने से वे लोग भाग जाएंगे तुम ही विवेक हल्दी गे में खिंचाव चौबे ना तार गंदो पहले रतन माणिक्य को तो पड़े अच्छे श्री जेल राम प्रसाद बोले झुमको दिल मिलने रतन खेल फल वहां इतने सारे रतन वो माणिक्य वगैरा पड़े हैं की डुबकी देने से रामप्रसाद कहता है निश्चय रतन झुड़ी-झुड़ी भर करके रतन मिलते ही रहेंगे तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति