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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

Sri Ramakrishna Kathamrita 20 July 2023 नरेंद्र आदि के साथ कीर्तनानंद - नरेंद्र से प्रेमालिंगन

Transcript

श्री रामकृष्ण कथामृत हम ऑलरेडी इसमें से पढ़ रहे हैं देखा की ठाकुर आज मा आनंद में है क्यों क्योंकि नरेंद्र आया है दक्षिणेश्वर में ठाकुर के ठाकुर के साथ में बात करने के लिए ठाकुर को मिलने के लिए और कल हमने देखा की किस तरह से मां जब पहले बार नरेंद्र आया था तो माननीय नरेंद्र के लिए पतली दाल और पतली रोटी बनाई थी तो मां तो ठाकुर के लिए खाना बनती थी तो मां को तो ऐसा ही एक है की वो कोलकाता में रहने वाले लोगों का पता नहीं डाइजेशन कितना होगा तो फिर जब ठाकुर ने नरेंद्र को पूछा की क्या रे कैसा खाया तूने तो नरेंद्र ने क्या कहा की जैसे की रोगी का खाना हो ऐसा मैंने खाया तो फिर ठाकुर ने जाकर के मां को कहा की जब नरेंद्र आता है तब उसको मोती रोटी और यह गाड़ी दाल उसके लिए चोला की बना देना ऐसा जाकर के ठाकुर ने मां को कहा था और उसके अनुसार जब भी नरेंद्र आता था मां इस तरह से खाना बना देती थी है और हमने यह भी देखा की सुरेश मित्र किस तरह से ठाकुर के पास में इस तरह से भक्ति आते थे तो बीच-बीच में पैसा देता था जिससे की भक्तों के लिए खाना हो वगैरा जो छोटा मोटा कुछ हो वो जो खर्च होता है वो निकाल जाए सुरेश मित्र के इंटरेस्टिंग स्टोरी भी है की जब राजा महाराज ठाकुर के साथ में नियमित रूप से र रहे थे तब किसी ने जाकर के सुरेश को कंप्लेन किया की देखो वो तो तुम तो जो पैसा देते हो वो तो ठाकुर की सेवा के लिए और यह हमारी तरह गृहस्ती भक्ति बीच-बीच में जाते हैं तो हमारी सेवा के लिए वह पैसा वह तुम देते हो किंतु राखल जो है वो तो जमींदार का लड़का है उसका तो कोलकाता में उसके अच्छा घर में शादी भी हुई है तो वह सब छोड़ कर के वह ठाकुर के पास में पड़ा राहत है और पैसा उसके पीछे में खर्च हो जाता है यह किस तरह की यह विडंबना है ऐसा बोलकर के किसी ने सुरेश एन सुरेश मित्र को कहा होगा की नहीं कहा होगा पता नहीं सुरेश ने सामने कुछ बोला की नहीं बोला पता नहीं किंतु ठाकुर के कानों में ऐसी बात आई की सुरेश ऐसा का रहा है की वो जो पैसा वगैरा देता है वो राखल वहां पर राहत है तो क्या ये उचित है तो ये बात सुनकर के ठाकुर बड़े ही नाराज हो गए की सुरेश मित्रों कौन है यह खाने वाला की मेरे यहां पे कौन रहेगा कोई कौन नहीं रहेगा फिर ठाकुर क्या कहते हैं सुरेश कौन जिसका की मालिश और यह जो यहां पे राहत है वो सुरेश फेक दो ये बालेश्वर गहरा उसका फोटो वगैरा सब फेक दो एक्चुअली क्या था सुरेश जब सुरेश मित्र जब करता था नौकरी करता था तो फिर आकर के शाम को ठाकुर के पास में आकर के राहत था दक्षिणेश्वर में घर जान से पहले उसके घर के परिवार वालों ने कहा था सुरेश को एक बार वो दक्षिणेश्वर में शायद सोया होगा ठाकुर के साथ में रुक होगा तो घर वालों ने का दिया दिन भर यहां पर भी जाना है जो किंतु रात में तो घर लोट कर के वापस आना ही पड़ेगा तो सुरेश ने क्या किया था वो बालेश्वर वहां पे रख दिया था चटाई और कुछ कोर्ट वगैरा पहने के कपड़े क्योंकि वो तो ब्रिटिश लोगों के कोर्ट पेंट पहन के वो नौकरी करता था तो वो वापस आकर के धोती वगैरा पहन लेट होगा तो उसके कुछ वस्त्र और कुछ बलिराम करने के लिए वो दक्षिणी ईश्वर में वो ठाकुर के घर के बाहर में शायद उसने रख लिया होगा की मैं जब नौकरी से जग छूटूंगा तो मैं ठाकुर के पास जाऊंगा थोड़ी डर बात करूंगा फिर दिन भर कम करके थक हूं इसलिए थोड़ा सा विश्राम करूंगा फिर मैं घर जाऊंगा ऐसा वो करता था वह सोचता था तो ठाकुर जब नाराज हो गए ये सुनकर के सुरेश ने शायद ऐसा बोल दिया है की रखा वहां पर राहत है ठाकुर के पास में तो बहुत सर पैसा मेरा उसमें चला जाता है तो ठाकुर ने नाराज होकर के कहा की ये मालिश उसका जो है वस्त्र जो है फेक दो यहां से वह कौन है मुझे बोलने वाला थोड़ा सा रुपया क्या देता है यहां पर पैसा थोड़ा सा क्या देता है वो मुझे बोलने लगेगा की यहां पे कौन रहेगा कौन नहीं रहेगा तो ठाकुर की यह बात जब सुरेश के कानों में गई वो दौड़ा आकर के ठाकुर के पर में गिर गया और रोते-रोते खाने लगा की महाशय मैंने तो ऐसा कभी कहा ही नहीं है की रखी यहां पे राहत है तो मेरा ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है ये लोग दूसरे लोग मेरे नाम से ऐसी सब बातें चलते हैं तो यह बात सुनकर के ठाकुर ठंडा हो गए थे अच्छा ठीक है वो शांत हो करके सुरेश को क्षमा कर देती तो यहां पे कल हमने देखा की भक्ति लोग कुछ कुछ जहां पर दक्षिणेश्वर में रहते हैं रात ठाकुर के साथ में और मां उनके लिए खाना वगैरा बनती है जो थोड़ा बहुत खर्च होगा उसका पैसा सुरेश देता था सुरेंद्र बीच-बीच में रहते हैं सुरेश महीने महीने कुछ कुछ पैसा देता है खर्च का आहार प्रस्तुतों ठाकुर हो गया ठाकुर के घर के दक्षिण पूर्व का जो वरांडा है वहां पर बैठ खाने के लिए बैठने की जगह हो रही है इसी बीच में क्या हो रहा है मास्टर महाशय लिखने हैं घर के पूर्व पास का जो दरवाजा है वहां पर नरेंद्र वगैरा खड़े खड़े गैप लगा रहा है नरेंद्र आजकल छोकरारा की रकम देखें नरेंद्र पूछता है की आजकल के जो लड़के हैं उनके बड़े में आपका क्या ख्याल है किस तरह के लड़के आप देखते हैं तो मास्टर कहते हैं वो वैसे इतने बुरे तो लड़के नहीं है किंतु उनको धर्म उपदेश धार्मिक उपदेश या तो फिर धर्म के रास्ते पर चलने की कोई इच्छा उनके जीवन में नहीं दिखे रही है मैं खुद जो देख रहा हूं उससे मुझे ऐसा ग रहा है की सब अतः पाटन की और जा रहा है स्कूल पालनपुर सर्वदा देखा जाए और मैन गैप लगाना फंकी देना अपना होमवर्क नहीं करना स्कूल छोड़कर के भाग जाना ऐसे लोगों के साथ में बात करना जिसका चरित्र अच्छा नहीं है यह मैं नियमित रूप से देखा हूं आजकल के लड़कों में हो जाए यहां तक की मैंने यह देखा है नरेंद्र कहता है मैंने यहां तक देखा है की ऐसी जगह जाति है जो की अपवित्र है मैंने जहां पर मालिन चरित्र की महिलाएं जहां पर रहती है वहां की बात स्वामी जी का रहे हैं मास्टर जखन पड़ा सोना करतम अमर तो ए रूप अच्छी नहीं सनी नहीं मास्टर महाशय कहते हैं मैं जब पढ़ाई लिखी कर रहा था तब तो मैंने इस तरह से लड़कों का चरित्र खराब होते हुए नहीं देखा था नरेंद्र अपनी दिशा हुए तत्व मिलते हैं की ग रहा है की आप लोगों के साथ में ज्यादा मिक्स नहीं होते थे वरना जो ये कुचरित्र वाले लड़के जो आज है वो आपके समय में भी थे खराब लोग नाम धोरे डेक को खून आलाप करें मैंने यहां नरेंद्र कहता है की मैंने यहां तक देखा है की कुछ खराब लोग है वह इस लड़कों को नाम देकर के पुकारते हैं अभी पता नहीं इन लड़कों का यह खराब लोगों के साथ में कब वार्तालाप हुआ होगा कब पहचान हुई होगी मास्टर की आश्चर्य है नरेंद्र ई जानी अनेकेरे चरित्र खराब हो गए थे स्कूल डर अभी पावागढ़ एक विषय देखें तो भला हो नरेंद्र कहता है मुझे पता है की बहुत सारे लड़कों के चरित्र खराब हो गए हैं स्कूल के वो जो शिक्षा पृष्टि पाल वगैरा है और बच्चों के वो जो वाली है माता-पिता है वो ये सब चीजों के बड़े में थोड़ा सा सावधानी बरते तो अच्छा रहेगा देखिए यह जो पूरा डायलॉग है वो अभी से हम अनुमान करके का सकते हैं की जो भक्ति लोग दक्षिणेश्वर में आते होंगे वे लोग कितने तरह की चर्चा करते होंगे हमको एक उदाहरण पता है की यह जो राखल के पिता जी वो तो जमीन डर थे तो वो ठाकुर के पास इसलिए आते थे की पहले तो वो नाराज थे बड़े की राखल क्यों ठाकुर के पास आता है वह तो जमींदारी वो संभालेगा उसकी तो नई-नई शादी है तो बीबी के साथ वो समय व्यतीत करेगा वो जमींदारी का कुछ सीखेगा ना की ठाकुर के पास में दक्षिणेश्वर में पड़ा राहत है ऐसा सोच करके वो राखल के पिता जी जो जमींदार थे बड़े नाराज रहते थे किंतु बात बाद में वो ठाकुर के पास आना शुरू हुए तो देखा की ठाकुर बड़े ही उनको आदरपूर्वक उनका अभ्यर्थना करता है बड़े ही सत्कारपूर्वक बिठाते हैं महाकाली का प्रसाद देते हैं उनको बड़ा ही स्नेहपूर्वक उनके बड़े में पूछते हैं तो उनको अच्छा लगता है की चलो ठाकुर इस तरह से हमको और सलमान देते हैं किंतु साथ-साथ में ही देखा है की वह जो डिप्टी मजिस्ट्रेट वगैरा जो अदर सेन वगैरा जो बड़े-बड़े लोग थे कोलकाता के वे लोग ठाकुर के पास आकर के ठाकुर का उपदेश सुन रहे हैं तो वो देखकर के राखल के पिता जी को लगा ठाकुर खुद कहता है की के रखले और आप ऐसे ही लो राखल के पिता जी आए थे आप शब्द उसे किया है तो वो यहां पे आए थे तो देखा की ये सब जज और डिप्टी मैन वो वहां के ब्रिटिश कंपनी में कम करने वाले बड़े-बड़े लोग यहां पे आते हैं तो देख कर के वो बड़ा ही प्रभावित हो गया और सोचा की हां रख हाल कोई ऐसी भी ऐसी जगह पे तो नहीं जा रहा है फिर ठाकुर खुद कहते हैं उन्होंने देखिए की ये ठाकुर तो कुछ प्लेन करके तो कुछ करते नहीं थे वह तो ठाकुर तो संपूर्ण रूप से अपना मां जो है मां काली के चरणों में समर्पित कर दिया था किंतु फिर तो हमको ऐसा कहना होगा की ठाकुर की चालक ही नहीं मांगी चालक की मैन उनसे उनके मुंह से क्या बुलवाया ठाकुर के वो दखल के पिता जी बैठे हैं और ठाकुर किसी को बोल रहा है अरे देखो मां काली का संदेश वगैरा है की नहीं मिश्री वगैरा है की नहीं कहां रखा है तो ये सुनकर के वो राखल के पिताजी सोचते अच्छा यहां पे मिश्री संदेश वो सब कुछ सरकार मिश्री अर्थात सागर तो सागर संदेश वगैरा संदेश यानी की वो बंगाली मिठाई वो सब कुछ यहां पर राहत है अच्छा ये तो अच्छी बात है अर्थात की कोई बहुत खराब जगह पर ऐसा कोई फकीर साधु बाबा के पास नहीं ए गया है की जिसको वो बाबा जी फिर को पता करके मेरी संपत्ति हड़प कर लेंगे ऐसा तो नहीं है यह तो खुद अपने से बड़े आदमी है जिसके पास में ये डिप्टी मजिस्ट्रेट वगैरा आते हैं जिसके पास खाने पीने की कोई मतलब एन यह नहीं कमी नहीं है तो देखिए की ठाकुर खुद ऐसा कहते हैं की आ वो देखकर ये सब देखकर के बड़े ही इंप्रेस हो गए अभी ठाकुर ने प्लेन करके कहा होगा की देखो यह सरकार वगैरा कहां पे है या तो फिर मांगने उनके मुंह से बुलाया होगा ठाकुर थे बड़े ही प्रैक्टिकल मास्टर महाशय को कहते हैं ना की तुम लोग संसारी संसारी लोग हो फिर भी वो छाता भूल करके ए गए छतरी भूल करके ए गए मैं मेरे वास शरीर पे वस्त्र नहीं रहते हैं फिर भी मैं छाता वगैरा भूल के नहीं आता ओ ठाकुर ये सब चीजों में भी बड़े ही प्रैक्टिकल थे की किस तरह से कैसे किसको इंप्रेस किया जाए तो हम लोग अनुमान पूर्वक का सकते हैं की ऐसे कितने ही लोग आते होंगे जो की इसलिए नहीं आते ठाकुर के पास की उनको धर्म या तो आध्यात्मिक जीवन के बड़े में कुछ सीखने की अभिलाषा है या तो उनका कोई मोक्षत्व है किंतु इसीलिए शायद आते होंगे या तो फिर यह जो कल हमने की नरेन अपने ब्राह्मण बंधु प्रिया को साथ में लेकर आया है नरेंद्र समाज में जाता है वहां पर प्रिया नाम का एक लड़का वो नरेन का वहां पे मित्र था तो नरेंद्र उसको लेक आया तो अभी ये प्रिया का ठाकुर के ऊपर कितना श्रद्धा भक्ति है पता नहीं किंतु नरेंद्र के साथ में नरेन की मित्रता से वो बैंड करके आया है ये राखल के पिता जी का ठाकुर के ऊपर में आखिर में कितना श्रद्धा भक्ति हुआ होगा पता नहीं है किंतु राखल जाता है तो वो वहां पे आते हैं तो ऐसे तो कितने ही लोग ठाकुर के पास आते होंगे और क्या दुनिया भर की बातें करते होंगे मास्टर महाशय वो सब सुनते भी होंगे किंतु उसमें से किसी भी चीज का उल्लेख उन्होंने कथामृत में नहीं किया है क्योंकि ठाकुर खुद कहते हैं इस घटना के बाद ठाकुर खुद आएंगे कहेंगे की अरे तुम लोग यह सब यहां पर खड़े र करके ये सब बेटू की बातें क्या करते हो यहां पर तो सिर्फ ईश्वर की ही बातें करनी चाहिए तो यह ठाकुर की शिक्षा मास्टर ने ग्रहण की थी हंड्रेड परसेंट इसीलिए कथामृत में ईश्वर की बातें छोड़कर के और किसी भी बात का उल्लेख नहीं है किंतु फिर भी मास्टर महाशय ने अपने ही नियम को तोड़कर के ये छोटा सा कन्वर्सेशन दिया है नरेंद्र और मास्टर महाशय वहां पर खड़े खड़े बात कर रहे हैं नरेंद्र पूछता है मास्टर महाशय को की आप आजकल के लड़के को किस तरह से देखते हैं लड़कों को क्योंकि मास्टर तो स्कूल में पढ़ते थे तो मास्टर ने कहा की लड़के लोग बुरे नहीं है बस उनकी धर्म धार्मिक शिक्षा नहीं होती है तो नरेंद्र कहा की अरे वो सिर्फ धर्म के बड़े में नहीं जानते धार्मिक शिक्षा नहीं प्राप्त करके सिर्फ इतना ही नहीं मैं तो देखा हूं की बहुत सारे लड़कों का चरित्र खराब हो गया है उसे स्कूल में से वो फकी मार्कर के चले जाते हैं स्कूल में से भाग करके कोई खराब जगह हो पर जाते हैं कोई खराब लोगों के साथ में बात करते हैं ऐसा सब में बहुत कुछ देख रहा हूं आज करके लड़कों का चा तत्व तो बहुत ही बिगड़ने को बैठा है तो मास्टर महाशय कहते हैं यह तो कौन सी बात हुई यह तो आजकल ऐसा सब चला होगा मैं जब पढ़ाई लिखी करता था मैं यह सब नहीं देता था तो नरेंद्र इमीडीएटली कहां की आप हो सकता है लोगों के साथ में ज्यादा वो मिक्स नहीं होते होंगे इसलिए आपको ये सब नहीं दिखता है नरेंद्र क्या कहना चाहता है की वो पहले भी खराब चरित्र के लड़के थे अभी भी है मैन ऐसा नहीं सोचना है की पहले सब कुछ ठीक था आज सब कुछ सही है नरेंद्र ने कुछ स्वामी जी ने बाद में अमेरिका जाकर के अपने प्रवचनों में कहा है की गुड और इविल डी परसेंटेज ऑफ गुड और इवॉल्व रिमांड से इन डी सोसाइटी यदि इस समाज में सही और गलत शप और अशुभ यह दोनों का जो स्टार है वो समाज राहत है 50-50% शुभ है 50% अशुभ है क्योंकि यह माया का जगत है 100% अशुभ भी नहीं हो सकता 100% शुभ भी नहीं हो सकता ठाकुर जब थे तो फिर वह सामने में ब्रिटिश साम्राज्य था हम लोग गुलाम थे अवतार वरिष्ठ है जब आए थे तो वो शुभ था 50% और ब्रिटिश अंपायर जो था वो 50% अशुभ था अभी आज हमको इंडिपेंडेंस मिल गया है 50% ये शुभ हुआ है तो हमारी आध्यात्मिक जीवन की स्थिति ऐसी है की जैसे मैंने कल कहा था मैं रूम में जाकर के बैठता हूं आरती सुनता हूं फिर ऐसा सोच के रखना हूं की बस आज कुछ नहीं करना आंख बैंड करके चुपचाप बैठना है फिर वह लड़का वह 7:30 के आसपास आएगा बोलेगा महाराज चाय आया है तो अभी मैं मां में मां में उसको गली देता हूं अरे इस समय मुझे डिस्टर्ब क्यों कर रहे हो एक्चुअली घर से तो लड़के का नहीं है मैंने उसको कहा है इस समय चाय लेकर आना तो क्या है की वह जो आध्यात्मिक जीवन में पूर्णत्व प्राप्त करने की मानसा जो थी जो मोक्ष वी था ठाकुर का और ठाकुर के डिसीप्ल का उसका वन परसेंटेज भी हमने नहीं र गया ठाकुर जब दिवस अस्त होता था तब ठाकुर रोटी थे की और एक दिन चला गया मुझे मां का दर्शन नहीं हुआ और हम लोग दिन जब समाप्त होता है तो घर में जाकर के जाते-जाते ये सोचते रहते हैं आज मैंने इतना कम किया है कल के लिए वह कम करना है रात को मैं सोया हुआ हूं तो सडनली मुझे ऐसा लगा की एक नया वेबसाइट बना रहे हैं वहां पे इस तरह का इमेज देना है इस तरह का डिजाइन करना है तो रात को सोते-सोते भी ये सब बेचारा आता है तो हां वो ठाकुर के समय का वो जो मुमुक्षु तो और मैंने वो आध्यात्मिक पूर्ण को प्राप्त करने की प्रचंड इच्छा और आज कहां हम लोग वैसे आश्रम में भी रहते हैं भक्ति लोग जो होंगे यहां पे आते भी होंगे आश्रम में नियमित किंतु वह इच्छा वह धड़ संकल्प वो बिल पावर यह इच्छा शक्ति की जो हमको हमारा कान पड़कर के 1 घंटा सुबह 1 घंटा शाम को मिनिमम बिठा ऐसा संकल्प शक्ति हमें कहां आया आज तो जल्दी हम इंडिपेंडेंस हो गए हैं तो साथ में ये मोक्ष पर चला गया है है उसे समय ठाकुर थे मुमुक्कुटवा था तो हम लोग गुलाम थे तो यह 50% अशोक और 50% शुभ इस समय इस संसार में हमेशा राहत ही है क्योंकि ये माया का संसार है 100% शुभ हो तो हमारा आध्यात्मिक विकास रुद्रा जाएगा और यदि 100% शुभ हो जाएगा तो कोई अपनी संकल्प शक्ति को डेवलप नहीं करेगा जब अपने आप सब कुछ ऑटोमेटिक होता है तो मेक योर संकल्प शक्ति को अपने मां को एकाग्र करके तब जब ध्यान संयम तपस्या करके मैं ठाकुर को पुकार हूं मैं क्यों ये सब करूंगा मैं क्यों साधना करूंगा ऑटोमेटिक यदि ईश्वर मिल जाते हैं तो इसीलिए 100% शुभ भी नहीं होगा 100% अशुभ भी नहीं होगा तो इसीलिए स्वामी जी देखिए की ठाकुर मास्टर महाशय ये जो छोटा सा डायलॉग जो यहां पर रखें हैं नरेंद्र के बड़े में पहले भी जो बता रहे हैं पहले नरेंद्र के बड़े में इस तरह का एक वार्तालाप था की ठाकुर नरेंद्र को पूछते हैं की अरे तुम जब तुम्हारे बड़े में लोग निंदा करते हैं तो तुम क्या करोगे तो नरेंद्र क्या कहता है की मैं सोचूंगा की कुत्ते भोक रहे हैं तो ठाकुर कहते हैं की अरे नहीं नहीं दूसरों के बड़े में इतना हैं ओपिनियन भी नहीं रखना है तो ये जो सब ईश्वर प्रताप के अलावा जो छोटे-छोटे घटनाएं मास्टर महाशय ने जो लिखी है उसका पीछे के जीवन में बाद के जीवन में बहुत ही बड़ा एक उसका एक साइनिफिकेंस है एक बहुत बड़ा इंपॉर्टेंट है स्वामी जी जब अमेरिका गए थे तो कितने ही पादरियों ने कितने ही क्रिश्चियन मिशनर्ययों ने उनकी निंदा की थी और क्रिश्चियन मिशनरी ही नहीं हमारे भारतीय लोग ही यह जो मजूमदार था ब्राह्मी समाज का वगैरा वो वहां पर गए थे पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन में देखा की पहले वो एक बार गया था तो उसको बड़ा ही सम्मान मिला था तो वह सोचता है मैं जब भी जाऊंगा अमेरिका मुझे इतना सम्मान मिलता ही रहेगा किंतु जब स्वामी जी प्रख्यात हो गए सिस्टर और ब्रदर्स ऑफ अमेरिका कहकर तब मजूमदार की मजूमदार को पत्ता देने वाला ही कोई नहीं रहा तो वो बड़ा ही नाराज हो गया फिर भारत आकर के क्या बोलना है सबको की नरेंद्र जो है वो अभी हिंदू धर्म उसने छोड़ दिया है वो गौ मांस खाता है फिर वो वहां की औरतें के साथ में वो व्यभिचार करता है ऐसा क्या-क्या सब उलट-पुलट स्वामी जी के बड़े में वो कोलकाता में फैलाना शुरू कर दिया तो ये सुनकर के स्वामी जी के कानों में ये सब बातें गई तो स्वामी जी ने पत्र में लिखा है की अरे वो मूर्ख को इतना भी नहीं समझ में आता की वह मेरे चरित्र के वो मेरे कार्य के बड़े में यदि वो निंदा करता है की मैं जी तरह से वेदांत सीखना हूं वो ठीक नहीं है या तो फिर मैं जी तरह से यहां पे सन्यासी हो करके आ वेदांत प्रचार कर रहा हूं वो ठीक नहीं है सन्यासी ट्रेडिशनल सन्यासी तो जब ध्यान करना चाहिए ईश्वर प्रताप के साथ ना करनी चाहिए कहां वो विदेश में जाकर के प्रचार प्रसार करेगा स्वामी जी के खुद के गुरु भाई इसके बड़े में दुविधा में थे की नरेंद्र यह सब क्या कर रहा है तो चलो यह साड़ी चीजों की निंदा करेगा या तो फिर यह सब चीजों को क्रिटिसाइज करेगा तो ठीक मेरे चरित्र के बड़े में ऐसा जो का रहा है तो उसे मेरी बुद्धि मां ये सब सुनेगी तो उसको कितना कष्ट होगा की वो ये तो माया मिली ना राम एक स्थिति हो गई वो बेचारी खाने को कुछ नहीं है घर में छोटे भाई बहन है मां को रहने के लिए मकान नहीं है घर नहीं है तो फिर भी चलो छाती पे पत्थर रखकर के मैन अपने बच्चे को ठाकुर को दिया मैन अपने बच्चे को ईश्वर को समर्पित किया और वीरेश्वर शिवा को दिया अंजलि स्वरूप सामने में किंतु चाहे स्वामी जी कुछ ठीक साधु होंगे तो फिर उनका सैक्रिफिस है वह चलो भाई हम मेरी सेवा नहीं हो पी मैं गरीबी में रहती हूं तो चलो मेरा लड़ता तो एटलिस्ट एक बहुत ही अच्छा साधु बना है वह मुझे आशीर्वाद देगा तो कहानी इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में कुछ कल्याण होगा तो वह नहीं और मतलब घर के भाई बहन माता पिता मां की सेवा नहीं की तो वो तो चल गया ठीक ठीक साधु भी नहीं हो पाया वह यह कितना कष्ट होगा मेरी मां को यह सुनकर के ऐसा स्वामी जी लिखने हैं पत्र में तो ये जो ठाकुर ने नरेन को पूछा था की जब कोई तुम्हारी निंदा करेगा तो तुम क्या करोगे तो नरेंद्र यदि उसे ऐसा कहता है की मैं सोचूंगा कुत्ते भोक रहे हैं अभी टच करना उनको वो तो फिर भी ठीक है किंतु यदि स्वामी जी नाराज होकर के शराब दे देंगे तो क्या होगा नहीं तो बड़ा ही भयानक हो जाएगा ना मजूमदार मजूमदार उनका कोई इतना स्टेटस नहीं है की स्वामी जी अपने ओजस को अपनी तप की शक्ति को उसको श्राप देने में व्य कर दें क्योंकि वह भी तो एक खर्च ही होता है ना जैसे काशीपुर में हुआ था काली महाराज ने उनको स्पष्ट कर दिया तो नरेंद्र की शक्ति उनमें चली गई भक्ति मार्ग में से ज्ञान मार्ग में नीरा कर साधना में चले गए तो ठाकुर ने स्वामी जी को बुलाकर के क्या कहा था अरे तुमने कुछ संचय करने से पहले ही खर्च करना शुरू कर दिया है तो वैसे ही आध्यात्मिक शक्ति ओजस स्वामी जी ने जो संचित किया था उसको करना है उसको खर्च करना है जगत कल्याण के लिए भारत के कल्याण के लिए आत्मनानुक्षार्थम जगत हटा याचका उपदेश वेदांत प्रचार करने के लिए और ऐवेंंचुअली अल्टीमेटली रामकृष्ण मिशन की स्थापना करने के लिए नहीं की यह सब पागल छल लोगों को शराब देने में वो सब शक्ति गण दे तो वो बाद में क्या होने वाला था वो मास्टर महाशय को पता था मास्टर महाशय वह सब विटनेस तू एवरीथिंग उन्होंने अपनी आंखों से यह सब देखा था की किस तरह से मजूमदार भारत आकर के स्वामी जी का प्रचार कर रहा है किंतु किस तरह से स्वामी जी ने उसको कोई श्राप नहीं दिया यह सब मास्टर ने अपनी नजरों से देखा है इसलिए जो नरेंद्र युवान था दक्षिणेश्वर में सब साथ में मिलते थे ठाकुर के साथ में तो यह छोटी-छोटी घटनाएं जो होती थी जिसका की बाद में कितना बड़ा साइनिफिकेंस होने वाला था यह सब मास्टर महाशय ने यहां पर लिख करके रखा है और यह डिसाइफर करने का कम अपना है की क्यों मास्टर मैंने ऐसा लिखा ऐसा नहीं लिखने के बाद में उन्होंने अपना कोई कमेंट नहीं दिया हो मास्टर अब नहीं करता है एक घटना का उल्लेख करके छोड़ दिया फिर ऐसा नहीं लिखने हैं वो अपना बड़ा सा दो पेज का कंट्री दे दिया की बाद में स्वामी जी अमेरिका जान वाले थे उनकी निंदा होने वाली थी तो निंदा से वो ट्रस्ट हो करके शराब ना दे दे ऐसी शिक्षा ठाकुर ने नरेंद्र को दी थी ऐसा वो कंट्री कंट्री वो नहीं लिखने हैं उन्होंने हमारे ऊपर में छोड़ दिया है की हम क्या कथामृत को कितना दीप में पढ़ने हैं किस तरह से एनालाइज करते हैं और यह तो हमको आज पढ़कर के एक ही बात पता चला एनालाइज करके हम यदि हमारे से ज्यादा जिन लोगों की आध्यात्मिक बुद्धि सूक्ष्म बुद्धि ज्यादा होती है वे लोग तो इसमें से कितने सारे अर्थ घटन निकलेंगे हमको क्या पता है तो यह जो छोटा सा पैसेज है उसमें भी यह चीज है की स्वामी जी बाद में एक पहले बात तो है की एजुकेशन के बड़े में बच्चों के डेवलपमेंट के बड़े में स्वामी जी की किस तरह से दृष्टि है की लड़के लोग कैसे पढ़ाई लिखी करते हैं वो क्या सीखने हैं कैसे सीखने हैं स्वामी जी जब अमेरिका भी गए थे तो वो जिनके घर पे देवोते के घर पे है तो जिनके घर पर रहते थे उनके घर पे यदि छोटे-छोटे बच्चे हैं होंगे तो स्वामी जी ऑब्जर्व करते थे की वे लोग क्या सीखने हैं उनको स्कूल में क्या सिखाया जाता है उन लोगों का यह जो एजुकेशन थ्योरी क्या है अमेरिका और ब्रिटेन का निवेदिता तो वो एजुकेशनिस्ट थी तो एजुकेशन थ्योरी क्या है वो निवेदन सा के साथ में डिस्कस करते थे निवेदन इस से तो प्रभावित होकर के उसने ठीक किया की वह भारत आकर के भारत की लड़कियों के लिए स्कूल स्टार्ट करेगी तो यह एजुकेशन के ऊपर में स्वामी जी का एक पहले से ही एक भालोबासा एक प्रेम था उनके ऊपर में पहले से यह प्रेफरेंस था की भारत का उन्नति विकासद्धि होना है तो एजुकेशन के थ्रू ही होगा स्वामी जी ने क्या कहा है की पहले तो हम किस तरह के दान होते हैं तो जीवन दान होता है अंडा दान होता है विद्या दान होता है और ज्ञान दान होता है कर तरह के दान के बड़े में स्वामी जी ने हमको बताया है जीवन दान अर्थात की ये जो वैद्य हमारी ये जो डिस्पेंसरी वगैरा है जहां पे रोगियों की चिकित्सा की जाति है वो जीवन दान हो गया अन्नदान अर्थात की हमारी ये रिलीफ और वेलफेयर स्कीम्स है जिसके थ्रू हम लोग बहुत साड़ी चीज हम गरीब लोगों को देते हैं जैसे की कलकत्ता में बेलूर मठ में था तो दुर्गा पूजा के समय बहुत साड़ी साड़ियां मां दुर्गा को ऑफर करने के लिए आई थी तो दुर्गा पूजा के बाद में हम लोग पीटीसी में हम लोग जॉइन किया थे तो नए-नए ब्रह्मचारी है तो वहां के हमारे वो जो रिलीफ इंचार्ज महाराज थे हमको लेकर के वह सर्वे करने के लिए जाते थे सब करीब विस्तरों में हम घर-घर जाकर के देखते थे जब सबसे गरीब घर कौन सा है वो टिकट देते थे उसमें लिखा राहत था इस तारीख को आकर के आपको साड़ी ले जानी है फिर हम लोग वहां पर उसे दिन सब बेंच वगैरा एक लाइन में रख कर के उसे सदियों का वो ठग रखकर के खड़े हो जाते थे और टिकट के अनुसार वो समय के अनुसार वो दरवाजा खुलेगा सब बहाने गरीब बहाने आएंगे हम उनको साड़ी देंगे और वो चली जाएगी वो मुझे पहले पहले बार में बेलूर मठ में गया था मुझे इतना खुशी हुआ था हम लोगों का एक राहत है ना की ये बड़े-बड़े मठ थे बड़े-बड़े मंदिर है तो वहां पे क्या पूजा पाठ वगैरा चला होगा और ज्यादा से ज्यादा अध्ययन चला होगा किंतु इस तरह से गरीब लोगों की ये जो सेवा हो रही है वो देख कर के मुझे बड़ा ही आनंद हुआ था और स्पेसिफिकली बिकॉज़ आई वास पार्ट ऑफ डेट मैं भी उसका एक छोटा सा हिस्सा था इसलिए तो ये अंडा दान का एक मध्य है जीवन दान फिर विद्या दान विद्या दान अर्थात एजुकेशन और अल्टीमेटली अर्थात की आध्यात्मिक तत्वों के बड़े में उपदेश देना बिना शिक्षा देना जैसे की हमारे प्रेसिडेंट महाराज वाइस प्रेसिडेंट महाराज और दीक्षा देते हैं फिर दीक्षा देने के बाद में उपदेश देते हैं फिर सीनरी साधु लोग आश्रम में आते हैं और उन लोगों का यह सब सेमिनार वगैरा वो राहत है प्रवचन राहत है यह सब हो गया ज्ञान दान का पार्ट तो स्वामी जी ने पहले से अभी ज्ञान दान तो क्या है की वो तो चला ही राहत है की विद्या दान जो है एजुकेशन डेट वो स्वामी जी ने उसके ऊपर में बहुत सर एंपहसिस दिया था बार-बार कहता है एजुकेशन एजुकेशन भारत का कल्याण होगा भारत की उन्नति होगी और आज देखिए की इसरो और चंद पर रॉकेट भेज रहा है चंद पे लैंडर भेज रहा है यदि हम सक्सेस हो गए तो वे बिल बी डी फोर्थ कंट्री चौथ देश होंगे पूरे विश्व में जो की चंद के ऊपर में एक लैंडर हम लोग भेज सकें तो आज हमारे जो ग्रेजुएट है यह आईआईटी फिर यह जो सब बड़े वर्ल्ड रिनाउंड एजुकेशन इंस्टिट्यूट है जो की इंडिपेंडेंस के बाद में इम्मीडिएटली स्टार्ट किया गए थे इसके पीछे में स्वामी जी की प्रेरणा थी की एजुकेशन सबको देना है तो ये छोटा सा एक इंसिडेंट है उसमें हमको स्वामी जी के भविष्य के कितने सारे विचारों को उनके सी फॉर्म में बी स्वरूप में देखने को मिलते हैं की एजुकेशन को किस तरह से वो स्वामी जी किस तरह से सबको ऑब्जर्व कर रहे हैं की एजुकेशन के फील्ड में क्या चल रहा है किस तरह से स्वामी जी अपनी फिलासफी डेवलप करते हैं की शुभ और अशोक दोनों की मंत्र जगत में समाज होती है ना ही शुभ कबीर ज्यादा बढ़ता है नए भी कभी अशुभ ज्यादा बढ़ता है तो ये सब चीज हमको छोटे से डायलॉग में देखने को मिलती है किंतु जब यह बात चल रही थी तब बाद में क्या हुआ श्री रामकृष्ण घर भीतर हुए हशीते हशीते बोलते चल यह सब बातचीत रही थी उसे समय ठाकुर अपने से अपने कमरे में से बाहर आए और हंसते हंसते पूछने लगे की वो तुम डर की कथा अच्छे प्यार तुम लोगों की क्या बात हो रही है नरेंद्र कथा मारता हो नरेंद्र ने कहा इनके साथ में अर्थात मास्टर महाशय के साथ में स्कूल की बातचीत हो रही थी केले डर चरित्र भालू थके ना लड़कों का चरित्र अच्छा नहीं राहत है नरेन का पहले से ही किसका चरित्र कैसा है इस समाज की क्या आधार पाटन हुआ है और ठाकुर के उपदेशों से समाज का फिर से पुनरुत्थान होगा नव अभ्युदय होगा 9 जागरण होगा रेनेसा यह नरेंद्र के मन में पहले से ही था हमको लगता है की ठाकुर के देहांत के बाद में ठाकुर की महासमाधि के बाद में और स्वामी जी अल्मोड़ा में अपनी गुफा और गुफा में बैठकर के ध्यान कर रहे थे समाधि प्राप्त करने का पर्यटन कर रहे थे उसे समय उनकी बहन का सुसाइड का समाचार उनको मिला और फिर वह समाचार सुनकर के स्वामी जी का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने सोचा की ये मेरी बहन के साथ में ही ऐसा हो रहा है अत्याचार और उसको सुसाइड करने की आवश्यकता पड़ी तो भारत की यह करोड़ करोड़ बहनों की क्या स्थिति होगी मुझे तो उनका कल्याण के लिए उनके अच्छे के लिए मुझे तो खुश करना पड़ेगा ये सोच करके स्वामी जी वो अल्मोड़ा में से हिमालय में से नीचे आए फिर उन्होंने भारत का भ्रमण किया दिल्ली राजपूताना फिर गुजरात महाराष्ट्र वगैरा सब जगह पे जाकर के फिर आखिर में अमेरिका गए वापस आए और फिर वो आत्मारामुक्क्षत हम जगत हटा है चक उपदेश दिया रामकृष्ण मिशन की स्थापना करके ये सब सेवा का रिश्ता की ऐसा एक हमारे मन में है की वह अल्मोड़ा में जो घटना हुई थी तब से स्वामी जी का हृदय परिवर्तन हुआ है किंतु यह सब छोटी-छोटी घटनाओं से पता चला है की स्वामी जी पहले से ही ये हिस्टोरिकल सेंस था एक सिविलाइजेशन अंडरस्टैंडिंग था डेट पर्सनल साल्वेशन मुझे मेरी मुक्ति चाहिए इसके लिए मैं ठाकुर के पास आता हूं सिर्फ इतना नहीं जगत के साथ में क्या हो रहा है और यदि लोगों का मैं दुख कष्ट देखा हूं तो मेरे हृदय में एक अनुकंपा करुणा प्रस्तुति होती है ये स्वामी जी के हृदय में पहले से ही था इसीलिए जब ठाकुर उनको पूछते हैं की अरे तुम क्या करना चाहते हो तो नरेंद्र कहता है की मैं चाहता हूं की मैं समाधि में जाकर के रहूंगा और बीच-बीच में आहार करने के लिए वो वापस आऊंगा तब आ ठाकुर नाराज हो गए बोला की यह कैसी हैं बुद्धि की बात है मैं तो सोचा था की तुम बड़े वाटर वृक्ष होंगे जिसकी छाया में करोड़ लोग शीतल होंगे तो भले ही चाहे नरेंद्र ऐसा उसे समय बोल दिया हो किंतु यह जो बी स्वरूप में सी फॉर्म में यह सब सिविलाइजेशन और डेवलपमेंट इवोल्यूशनरी इतिहास उनके मन में पहले से ही थे तो इसीलिए वह नरेंद्र कहता है की इनके साथ में स्कूलों के बड़े में बात चल रही थी लड़कों का चरित्र अच्छा नहीं राहत ठाकुर एक तू ओशोपोल कोठा शून्य मास्टर के गंभीर भावे बोली टेकेन ठाकुर ने यह सब थोड़ी डर सुना फिर गंभीर स्वर में मास्टर महाशय को कहते हैं ईशॉप कथा वार्ता भालोनें ईश्वर कथा बाई आर एनोंकथा भालू ने यह सब बात अच्छी नहीं है ईश्वर को छोड़ के और किसी भी तरह की बातचीत ठीक नहीं है तुम इधर से भविष्य को था तुलसी देव उचित शीलो ना तुम यह सब लोगों से बुद्धि में बड़े हो उम्र में भी बड़े हो तुमको ये सब बात निकालना जल्दी निकलते भी है तो उसको ढाबा देना तुम्हारे लिए उचित था नरेंद्र बायस टेकन 1920 मास्टर 27 18 मास्टर महाशय की थी 27 28 मास्टर अप्रस्तु तो नरेंद्र आदि भक्तगण छिपकरिया रही लेने मास्टर अप्रस्तुत हो गए ठाकुर की दांत सुनकर के वो बेचारे थोड़े से डर गए और यहां पे नरेंद्र वगैरा जो बाकी जो जिन्होंने स्टार्ट किया था ये सब बात करना वो चुपचाप खड़े हो गए वो किसी ने ठाकुर की बात का विरोध नहीं किया ये देखिए ये मैंने पहले बार पढ़ा था मुझे थोड़ा ऐसा लगा था की नरेंद्र ने क्यों मास्टर को नहीं बचाया मास्टर ठाकुर ए करके सीधा नरेन को ही दांत दिए क्लियर है नरेंद्र बात निकाल थी मास्टर महाशय ने तो यह बात निकाल नहीं थी स्कूलों के बड़े में लड़कों के चरित्र के बड़े में तो दांत मस्त महाशय को सनी पड़ी तो नरेंद्र ने जाकर के क्यों नहीं ऐसा कहा की अरे महाशय मैंने ही तो यह सब बातें निकाल थी अब उन मास्टर महाशय को नहीं चाहिए जैंटलमेंस एग्रीमेंट स्वामी जी ने खुद कहा है की साधु बने से पहले जेंटलमैन बना फर्स्ट विकम ए जेंटलमैन दें विकम ए मोंक ऐसा स्वामी जी ने खुद ने कहा है तो क्यों स्वामी जी ने अपने से आकर के मास्टर महाशय को डिफेंड नहीं किया एक मुझे लगा था वो दूसरा लगा था की ठाकुर ने खुद ठाकुर को पता है की किसका क्या बुद्धि है किसका क्या साइकोलॉजी है किसका क्या मन सेट है ठाकुर को पता ही होगा की ये सब बातें नरेंद्र ही निकालिए किंतु फिर उन्होंने मास्टर महाशय को क्यों दांत तो यदि ठाकुर की खुद की भाषा में यदि उसका सॉल्यूशन लाना है तो ठाकुर ने कहा था की स जैसे अपनी लड़की को डांटती है बहू को सुनने के लिए बहू को नहीं तेजी बहू तो पराई घर की है वो नई-नई आई है उसको डांटना से वो बड़ा मां लगी जबकि लड़की जो है वो तो अपनी खुद की है अपने खुद ने जन्म दिया है उसको तो उसको डांटना का तो एक राइट होता है मां का तो मां अपनी लड़की को तेजी बहू को सुनने के लिए बहुत ज्यादा आते में वह बहुत ज्यादा गी दाल रही है सब्जी में बहुत ज्यादा तेल दाल रही है तो उसको यह कहना की अरे तुम इतना तेल क्यों डालते हो वो अपनी लड़की को बोलेगी स की अरे तुम सब्जी में इतना तेल मत डालो अभी लड़की को सुना रही है बहुत सुन रही है और बहू ये सुनकर के समझ जाति है की स की इच्छा नहीं है और मदर इन डॉ की इच्छा नहीं है की मैं सब्जी में इतना ज्यादा तेल दाल डालो तो ये मास्टर ठाकुर का खुद का है की वो वो बहू को सुनने के लिए लड़की को दांत किंतु अभी प्रश्न ये होता है की यदि ऐसा है तो मास्टर महाशय अपने हुए मास्टर महाशय को दांत है नरेंद्र को सुनने के लिए तो मास्टर महाशय नरेंद्र से भी ज्यादा अपने हुए चाय आ ऐसा अनुमान हम कर सकते हैं क्या ऐसा एनालिसिस कर सकते हैं जो की गलत होगा गलत होगा की नहीं क्या पता जैसे को चांटा मारा था नरेंद्र को कभी जाता नहीं मारा यदि शिक्षक होगा उत्तम वैद्य होगा उत्तम आचार्य होगा उत्तम गुरु होगा तो वह अपने शिष्यों को मार करके फिर उसको ज्ञान दिलवाएगा तो नरेन को क्यों कभी नहीं मारा एटलिस्ट रिपोर्टेड नहीं है वो मारा होगा और कहानी पर रिपोर्ट नहीं है तो ऐसा हो सकता है की रिकॉर्ड नहीं है ठाकुर ने खुद कभी नहीं कहा स्वामी जी ने खुद कभी नहीं कहा की ठाकुर ने इस तरह से मुझे मारा था करके तो ये सब मेरा ऐसा नेचर है की पढ़ने पढ़ने में ये सब कांट्रडिक्शंस खोजो तो ये भी एक कांट्रडिक्शन है ठाकुर के आ कथा अमृत में की क्या इसका हम सॉल्यूशन ले इसका क्या एनालिसिस करें इसका किस तरह से इंटरप्रिटेशन करें तो यह इंटरप्रिटेशन करते-करते ही मुझे लगता है की हमको एक पजल है ना ये पजल के बड़े में सोचते सोचते ही जैसे वो बुद्धिस्म में कौन दिया जाता है कौन अर्थात की गुरु अपने शिष्य को एक फसल देता है जैसे की एक छोटा सा पजल है गुरु अपने शिष्यों को कहता है की साउंड ऑफ वन हैंड क्लिपिंग एक हाथ से जो तालीम मारते हैं उसकी आवाज कैसी होती है तो शिष्य बेचारा सोचता है की अरे एक हाथ से ताली करने से आवाज कैसे होगी किस तरह की होगी तो इंपॉसिबल पजल है किंतु इसके बड़े में सोचते सोचते उसको इनलाइटनमेंट मिल जाता है तो वैसे ही यह कथामृत में ऐसे सब पजल है जिसके बड़े में सोचते सोचते हमको सॉल्यूशन मिले ना मिले हमको ठाकुर के दर्शन ठाकुर की आशीर्वाद अवश्य प्राप्त हो जाएंगे तो आज यही पर कल फिर से मिलते हैं हर ही ओम तत्सत श्री राम कृष्णा