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Sri Ramakrishna Kathamrita ·

Sri Ramakrishna Kathamrita 4 Aug 2023 प्रवचन और समाज संस्कार। पहले ईश्वरलाभ बाद मे समाज शिक्षा

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ओम स्थापतये धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप ने अवतार वरिष्ठ आया रामकृष्ण यत नमः कल हमने देखा की किस तरह से ठाकुर गहराई में डब लगाने के बड़े में बता रहे हैं और साथ में ही उन्होंने कहा की यदि हम डब लगाने से यह मगर वगैरा हमको खाने के लिए ए जाते हैं तो उसका एक उपाय है की विवेक वैराग्य रूप हल्दी लगा कर के डब लगाना जिससे की वे लोग हम जैसे यहां पर वो मॉस्किटो नेट जैसा होता है ना वो पहले वो एक मॉस्किटो पेस्ट आता था वो शरीर पर लगाने के लिए जहां पर बहुत सारे मच्छर हो जाते थे अभी तो आजकल ऐसा पेस्ट वगैरा कोई नहीं लगता पहले लगाते थे आजकल वो आता है अभी वो इलेक्ट्रॉनिक सब आता है तो वैसे ही यह मुझे पता नहीं है की कितना सरकारक है ठाकुर बोले हैं तो वह प्रथम होगी ही होगी बंगाल में की हल्दी लगाने से मगर दूर राहत है तो जो भी है ठाकुर कहते हैं ताकि हृदय मंदिर प्रतिष्ठा करो अर्थात की हृदय के मंदिर में पहले ईश्वर को प्रतिष्ठा करो वकृत लेक्चर तार पर इच्छा हुई तो करो और उसके बाद में वकृत और लेक्चर जितना था के तू तो फकाशंकर ध्वनि वह तो वहां का शंकर बनी यदि मुंह से हम ब्रह्मा बोलते रहेंगे किंतु हृदय के भीतर में विवेक वेरिया एन हो तो क्या होने वाला है अर्थात कल भी हमने देखा था की जैसे रामकृष्ण मिशन में तो यह सब सर्विस एक्टिविटी होती है कल्चरल एक्टिविटीज होती है मंदिर में सब उत्सव का आयोजन होता है मेरे जैसे काफी साधु लोग इस तरह से प्रवचन में तो ज्यादा पब्लिक प्रवचन नहीं देता मैं कभी बाहर नहीं जाता प्रवचन देने के लिए यह वह इतिहास जो है अपना रेगुलर वही और यहां पर अपना एक कल्चरल सेंटर है तो उसमें यदि वह लोग कुछ बोलने को बोले बीच-बीच में एक दो मिनट तो वही मेरा तो इतना ही है किंतु आ ये जो लोगों को ठाकुरमार स्वामी जी के बड़े में बताना तो ये हम क्यों करते हैं इस हम इस भाव से नहीं करते की चलो लोगों का कल्याण हो अच्छा लोगों का तो कल्याण होने ही वाला है ठाकुरमार स्वामी जी के बड़े में सुनेंगे वेदांत के बड़े में सुनेंगे तो किंतु सबसे पहले भाव यह है की ठाकुर मां स्वामी जी की यह धर्म की हिंदू धर्म की आध्यात्मिकता की यह बातें करने से पहले तो हमारा हमारी वाणी शुद्ध होती है हमारा हृदय शुद्ध होता है हमारे जीवन में जो इंप्रूवमेंट आए हम लोग सत्तार ठाकुर के नाम जाप को लेकर के र सके इस हाथों से ठाकुर का कार्य करें इस मुंह से ठाकुर की बातें कर रहे इस आंखों दूसरे ठाकुर की मूर्ति का दर्शन करें और इस कानों से ठाकुर की बटन का सत्संग का श्रवण करें इसके लिए यह सब किया जा रहा है जैसे की ये जो एमरसन आजकल का यह जो नया एक शब्द है टोटल इमोशन यह जो वर्चुअल रियलिटी जो होती है ना वर्चुअल रियलिटी गल्स पहनेगी तो आपको जैसे लगेगा की वो जंगल में जैसे पर एग्जांपल तो आप जंगल में जा रहे हैं जी और देखेंगे यहां पे देखेंगे तो वहां पे जंगल दिखेगा वहां पे देखेंगे तो पहाड़ देखेगा वो आगे देखेंगे तो नदी दिखेगी फिर वो एक का एक जंगल में डायनासोर डायनासोर के दिखेगा हम को लगेगा अरे ये तो पूरा रियल है तो वर्चुअल रियलिटी यानी टोटल इमोशन ऑफ जो ओवर सेंसेज इन ए डिफरेंट किड ऑफ वर्ल्ड तो यह भी एक इस तरह का पर्यटन है की ये जो हम जगत संसार में र रहे हैं तो जन्म मृत्यु जरा व्याधि इसी से भारत हुआ है यदि कर्म है तो उसका एक टेंशन राहत है परिवार के जनों का एक हमारा रिस्पांसिबिलिटी राहत है तो हम अपना है की कभी-कभी हम इस सब चीजों में इस प्रवाह में दुबे चले जा रहे हैं हम इस प्रवाह में तने हुए चले जा रहे हैं ये प्रवाह हमको तन करके कहां वो फेक देगा पता नहीं तो इस तरह से हम एक अपने लिए एक अलग आध्यात्मिक जगत की रचना करते हैं जिसमें की हम अपनी सभी इंद्रियों को इसके भीतर में डूबा देते हैं इस ठाकुर रूपी ये वर्चुअल रियलिटी अभी ये यहां पे कल दो लड़के आए थे तो इंजीनियर है और यह फेसबुक का एक मेटावरस बोल करके एक है मैन एक पूरा एक वर्चुअल डिजिटल वर्ल्ड जिसमें आप गॉगल्स पहनकर 3035000 की ₹40000 के वो गल्स आते हैं तो वह पहन के आप वो चारों और उसमें घूम सकते हैं कहानी पर टूर के लिए जा सकते हैं आपका वो मित्र कहानी अमेरिका में अब होगा तो इसमें लगेगा जैसे आपके सामने ही बैठा है और आप दोनों एक साथ में कुछ एक्टिविटी कर रहे हैं मीटिंग कर रहे हैं ऐसा लगेगा वर्चुअल वर्ल्ड में आप सब साथ-साथ में तो यहां पे भी हम ठाकुर रूपी जगत की रचना करते हैं जिसमें की हम अपने आपको पूरे पूरा डूबो देते हैं किंतु उसे वर्चुअल वर्ल्ड में उसे मेटाबॉलिज्म में और ठाकुर के इस बैकुंठ लोक में या तो फिर दक्षिणेश्वर मां लीजिए की हमने अपने मां में एक दक्षिणी ईश्वर की रचना की तो उसमें और इसमें फर्क क्या है वो तो अभी जैसे की यह जो जगत है जिसको की मैं स्पर्श कर सकता हूं जिसको कीपिंग में अनुभव कर सकता हूं इसको यदि हम जगत मां लेने तो वह तो ऑलरेडी वर्चुअल है मेतवरस बोलो ना की वर्चुअल रियलिटी को ऑलरेडी वह वर्चुअल है किंतु यह बैकुंठ लोक है ठाकुर लोग जो है जिसकी हम अपने मां में रचना कर रहे हैं वह तो इस जगत से भी इंद्रिय ग्रहीय जगत से भी कहानी ज्यादा सत्य है ये इंद्रिय गम्य जगत आज है और कल नहीं है आज मेरा मां आज मैं यंग हूं मेरा शरीर स्वस्थ है मैं कॉन्सेप्ट ठीक से सुन का रहा हूं आपको से देख का रहा हूं मेरे पास में इतनी साड़ी रिस्पांसिबिलिटी है कल कहानी जाकर के कुछ हो गया वृद्धावस्था तो है ही है साथ में ये बीमारी वगैरा सब तो चला ही राहत है तो यह कुछ ग गया उम्र हो गई की बस आंखों से दिखाना बैंड हो गया कानों से सुना बैंड हो गया हाथों से चीज पकाने स्पर्श नहीं गए वो लोग वो उन्हें उठाना भी मुश्किल यह रिस्पांसिबिलिटी भी मेरे पास से ले लेंगे मुझे कहेंगे की अभी हमारा जो रिटायरमेंट होम है बेलूर मठ में आरोग्य भवन वहां पर जाकर के आप बैठिए वहां पे सेवक है वह आपके लिए खाना वगैरा ला देंगे आपके रूम में वह खाई और शांति से ठाकुर का नाम लीजिए ऐसा मुझे बोल देंगे और वहां जाकर के मुझे रहना है तो ये जो जगत की जिसको की मुझे एकदम अच्छा दिखे रहा है एकदम रियल दिखे रहा है वो भी तो चंद दोनों के लिए है वो भी तो आज एक कल नहीं है किंतु यह जो ठाकुर लोग हैं ये जो बैकुंठ है लोक है वो तो हमेशा के लिए सत्य है एक्चुअली हमेशा शब्द भी इसके लिए नहीं उसे कर सकते समय और कल के पैर है मैन जैसे हमने देखा था की मॉडर्न फिजिक्स या तो मॉडर्न मैथमेटिक्स कहता है की यह सिर्फ कर डाइमेंशन नहीं इससे भी हायर डर 10 डाइमेंशंस 11 डाइमेंशंस ऐसा कहते रहते हैं और यह मैथमेटिक्स 11 डाइमेंशन में वर्कआउट भी होता है तो यहां पर हमारी इंद्रियों की यह जो डाइमेंशंस जो हम महसूस कर सकते हैं समय और कल इससे भी बड़े अति चेतन अवस्था में एक हम स्पिरिचुअल एंबीशन को देखेंगे हायर स्पिरिचुअल डाइमेंशन का अनुभूति करेंगे और वहां पर सही सही ठाकुर के पास में जैसे मैं बहुत समय ऐसा होता है मुझे रात को नींद नहीं आता मैं बैठा राहत हूं अपने तो मैं फिर इमेजिन करता हूं की चलो मैं भी दक्षिणी ईश्वर में चला गया हूं वहां पे ठाकुर रात का समय है कालीबाड़ी वैसे तो बैंड है किंतु मां तो सदा जागृत है ठाकुर अपने रूम में बैठकर के अपने कमरे में बैठ करके ध्यान समाधि मांगना है मां भी साथ में बैठी है और फिर ये नरेन राखल बाबू राम योगेंद्र यह सब वो यंग लड़के सब भीतर में हृदय के भीतर में सन्यास और त्याग की ज्वाला भक्ति है जिनके साइन में ऐसे सब लड़के उनके सामने बैठकर के समाधि मांगना है और मैं भी वहां पर जाकर के उनके साथ में बैठा हूं और मेरी फेवरेट स्पोर्ट भी मैंने ठीक करके रखा है वो जो गंगा की और जान वाला जो दरवाजा है जब आपने यदि दक्षिणेश्वर में ठाकुर के कमरे की मुलाकात ली होगी दर्शन किया होगा तो आपको पता होगा की एक दरवाजा जो की काली मंदिर की और ले जाता है कमरे में से दूसरा दरवाजा जो है यहां पे पीछे में नौबत वगैरा है वहां की और जाता है और तीसरा दरवाजा है वो गंगा किनारे की और खुलना है तो एक्जेक्टली वो मेरा फेवरेट स्पोर्ट है वहां पे मैं बैठता हूं और आपने यदि वो कैमरा देखा होगा तो आपको पता होगा की वही सामने ही ठाकुर का वो खाट है जहां पे वो जनरली बैठने थे तो वहां सामने ही ठाकुर बैठे हैं बड़े खाट पे छोटे-छोटे खाट पे मां-बेटी है और मेरे इस साइड में यह सब नरेंद्र वगैरा सब लड़के लोग बैठे हैं और मैं भी उनके साथ में ही उन्हें की उम्र का एक लड़का हो करके वहां पर बैठा हूं और ठाकुर के सामने देख करके एकदम शांत भाव से उनका स्मरण मनन कर रहा हूं तो यह जो जगत की मैं कल्पना करता हूं ये वर्चुअल जगत नहीं है ये मेरे साथ में हमेशा रहने वाला है भले ही मेरी चाहे मेरी आंखें चाहे देखना बैंड कर दे मेरे कान यदि सुना बैंड कर दे मैं अतिवृद्ध होकर के आरोग्य भवन में बैठा हूं बेलूर मठ में खड़े होने की भी ताकत नहीं है खाना भी उन लोगों को मेरे रूम में ले आना पद रहा है तो इतना वृद्ध होने के बाद में भी रोग और उससे मेरा शरीर जार्जारित होने के बावजूद भी यह जो दक्षिणेश्वर है वह हमेशा वैसे ही मेरे हृदय मां में बना रहेगा तो ये कल्पना सिर्फ कल्पना नहीं है दिस इस एंटरिंग हायर डाइमेंशन हम एक अति चेतन जी प्रदेश में एक अति चेतन विश्वकर्मा में प्रवेश करते हैं और वहां पर यह जो एजर्स का यह जो प्रकाश है वहां पर यह सूरज का प्रकाश नहीं होता ओजस का प्रकाश जिससे की सब कुछ ये दर्शित होता है सब कुछ प्रकाश प्रकाशमान होता है तो ये जगत वो एक्चुअली रियल जगत है और ये इंद्रिय ग्रहीय जगत तो वर्चुअल जगत का ही एक पार्ट है जैसे वो वर्चुअल रियलिटी है या तो वो मेटावरस है वो जितना वर्चुअल है उससे एक लेवल थोड़ा कम वर्चुअल है किंतु बस इतना ही असली जगत है अपना वही ठाकुर के साथ में दक्षिणेश्वर ठाकुर कहते हैं वह तो फला शंकर ध्वनि अर्थात की जड़ी भीतर में कुछ अनुभूति नहीं हुई और हम यदि जगत को उपदेश देने को जाएंगे वो तो बिना मतलब का शंकर ध्वनि करने जैसा हो गया आज हम पेपर में देखते हैं वो न्यूज़ में देखते हैं की इस तरह के वो लोग जो धर्मगुरु बैंक बैठे हैं मोटिवेशनल स्पीकर हो करके बैठे हैं उनको खुद को कुछ अनुभूति नहीं है किंतु पैसा कमाने के लिए इस तरह की जादू चमक मैन मां को लुभाने वाली आजकल उनको पता है की जादू चमत्कार इतना नहीं चला तो यह लोग मां को लुभाने वाली बात करते हैं और इस तरह से करते हैं की जो सुनकर के हम लोगों का मां मोहित हो जाए हमको लगे अरे हां यही लोग तो सही का रहे हैं और उन्हें को फॉलो करना चाहिए और फॉलो करने से इतना कुछ गलत भी नहीं है और कोई तो मोटिवेशन देने को होना चाहिए विदेश में यदि हमारा मां उदास हो जाता है या तो हम डिप्रेशन में चले जाते हैं तो हम यह साइको के पास जाते हैं यह साइकैटरिस्ट के पास जाता है वह हमारे मां का विश्लेषण करके या तो फिर वह एक सिंपाठी जताएगा और उससे हमको थोड़ा साहस मिलेगा भरोसा मिलेगा या तो फिर यह साइकोसोमेटिक ड्रग्स देगा उसकी वजह से वह दवाई का करके अपना मां आर्टिफिशियल थोड़ा सा चंगा हो जाएगा ये वो हारमोंस ऐसा वो रिलीज करेगा की वो हार्मोनल इफेक्ट उनको आनंद के रूप में दिखाई देगी किंतु यह जैसे ही दवाई लेना बैंड कर दिया तो वैसे ही अपना मां इतना ही डिपर डिप्रेशन में और भी ज्यादा गहरी डिप्रेशन में चला जाएगा तो ये तो फिर एडिक्शन वाली बात है तो उससे तो बटर है की भारत में हम लोग ये मोटिवेशनल स्पीकर को सुनते हैं और उनकी बात सुनकर के मां को थोड़ा सा वहां बैठ चलो ठीक है इतना भी कुछ बड़ा नहीं है थोड़ा सा अच्छा हो जाएगा आज नहीं तो कल तो भारत में यह लोग मोटिवेशनल स्पीकर है तो वे लोग भी कोई बड़ा कम तो करते नहीं है अच्छा ही करते हैं लोगों के लिए अच्छा ही कम करते हैं किंतु यदि हम जो लोग सही सही सड़क है तो हम यदि बिना कोई अनुभूति किया या तो फिर अपने मां को यह नहीं समझ में आता है की साधन और शरणाघाटी का भाव लिए बिना हम बात करते हैं तो उससे हम साधना के क्षेत्र में आगे नहीं बाढ़ पाएंगे हम लोग जो बोलते हैं हमारे हृदय में शरणागति का भाव रहना चाहिए हमारे मुंह में जो वाणी उत्पन्न होती है वो वाणी का प्रकाश जो होता है वो ठाकुर के श्री चरणों में एक अंजलि के समाज है जैसे मंदिर में देखेंगे सुबह सुबह हुए पुजारी महाराज है फिर ये ब्रह्मचारी महाराज जो उनके असिस्टेंट होते हैं वह एकदम वह एकदम फ्रेश जो फूल ताजा फूल होते हैं वो पेड़ के ऊपर में से पौधे के ऊपर में से उसका चयन करके वह करो उसमें ले जाकर के ठाकुर बोलते हैं ना हमारे पांच फूलों का वो बास्केट वो बास्केट में भरकर के क्राइम में ले जाएंगे घर पर रूम में ले जाएंगे और ठाकुर के मूर्ति है जहां पे वो मूर्ति के सामने और जहां पे छवि है वहां छवि के सामने वो अर्पण करेंगे तो वो जो पुष्पांजलि देते हैं पुष्पा जो अर्पण करता है तो ये से ये वाणी भी ये हमारी ठाकुर के श्री चरणों में पुष्पांजलि के समाज है ये भाव नहीं रहने से ठाकुर कहते हैं बिना मतलब के शंकर बजाने जैसा हुआ अब ये शंकर बिना मतलब बजाने का क्या अर्थ है आपको रे कहानी से बताते हैं 1 ग्राम में पद्मलोचन बोले एकटी छोकरा छेलो एक गांव में पद्मलोचन बोल के एक लड़का था लॉकेट के पौधों पौधों बोले डाक तो लोग उसको पौधों पौधों बाल के बुलेट थे अभी ये भी मैन उसका बुद्धि को इतना ज्यादा तीव्र नहीं होगा की उसको उसके नाम का इस तरह से करते हैं नाम सुनकर के भी हंसी आई है खास करके यह जो गुजरात साइड में जो लोग रहेंगे उन लोगों को ग्राम में एक पुराना जड़ित मंदिर था भीतर ठाकुर विग्रह नहीं भीतर में भगवान की प्रतिष्ठा हुई नहीं थी मंदिर गे अश्वत्थला हुए थे मंदिर की दीवारों के ऊपर में यह वेल है पेड़ों की जेड है ये सब उसके ऊपर में निकाला हुआ है मंदिर का बादशाह कोरेची मंदिर के भीतर में ये चमगादड़ र रहे हैं मजे ते धुला और चमचिकर बिष्ट जमीन के फर्श के ऊपर में मिट्टी पड़ी हुई है और यह चमगादड़ की विष्ठा गिरी हुई है मंदिर लोग जनर आर जाता जाट नहीं मंदिर में कोई दर्शन के लिए नहीं आता अभी यह मंदिर का वर्णन सुनकर के किंतु मुझे बहुत अच्छा लगता है मैं जब भी अभी तो मैं 5 साल हो गया आश्रम के बाहर ही नहीं निकाला मैं 5 साल पहले आई थिंक 2018 में यहां पर आया था उसके बाद से मैं आश्रम के दरवाजे से बाहर ही नहीं निकाला एक दो बार वो शायद जाना हुआ था तो किंतु मैं कहानी पर ट्रैवल नहीं किया पहले मैं थोड़ा ट्रैवल करता था और काफी करता था तो उसे समय मेरा मुझे इस तरह से पुराने मंदिर है जहां पर भी वो मतलब कोई नहीं आता है सुनसान जगह पे होते हैं हैं इस तरह के मंदिर में जाना मुझे बहुत अच्छा लगता था क्योंकि इस तरह के मंदिरों में एक इस तरह का अभी जैसे जहां पे बहुत भीड़ होता है जहां की बहुत पॉपुलर होती है वो जगह चारों और फिर वहां पर देखा है ना की वो वो सब चीज बेचे वाले लोग खड़े रहते हैं मंदिर अब बैलून मठ में जाएंगे बाहर में आ जहां पे गंगा का किनारा है कितने लोग दुकान अलग के वो सड़क के ऊपर में बैठे हैं कम करने के लिए तो जहां पे ये बहुत भीड़ बाढ़ होता है वहां पे मुझे इतना अच्छा नहीं लगता मैं हमेशा मेरी तीर्थ क्षेत्र पे जाता हूं तो मैं ऐसा खुश्ता राहत हूं की ऐसी जगह जाऊं की जहां पे कोई ना हो एक पुराना मंदिर हो भले धूल मिट्टी गिरी हो एक पेड़ के पेट गियर हो वो ठाकुर की ईश्वर की जो मूर्ति है उसको ठीक से सजय ना गया हो और कोई ना हो सुनसान वीरान जगह हो तो वहां पर जाकर के बैठे रहना मुझे बहुत अच्छा लगता है मैं पहले में नियमित रूप से कनखल हमारा परिश्रम है वहां पर मैं जाता था तो कनखल यानी की हरिद्वार बहुत ही सुंदर जगह है और वहां पर मैंने कुछ जगह ठीक करके देख ली थी वहां पे पॉपुलर जगह देखा जाए तो वहां पे गंगा आरती होती है शायद अपने देखा होगा इतनी भी इतनी भीड़ मी गुडनेस वहां पे पर रखना मुश्किल है किंतु मैं वहां पे जाके नियमित दर्शन करता था गंगा आरती का क्यों साथ में वो किंतु शाम के समय दिन के समय वहां पर एक नील गंगा बोलकर के जगह है पूरा गंगा का वीरान तट है जब इतनी मतलब जहां पे भी नजर जाएगी वीरान जगह कोई नहीं रहेगा और गंगा का पानी जो है इतना स्वच्छ दिखेगा इतना निर्मल दिखेगा नीचे मैं आप नजर करेंगे तो वो मिट्टी रेट वो सीधा वो पानी के नीचे तलवे में वो दिखाई देगा और इतना स्वच्छ पानी और उसका ताल जो है नदी का वो इतना स्पष्ट दिखाई देता है की पहले बार लिटरेचर गया था मुझे लगा की अरे तो मैं ज्यादा तो दीप नहीं है पानी ज्यादा गहरा नहीं है चलो मैं थोड़ा भीतर में जाता हूं और जैसे ही दो-तीन कम बढ़ाई सीधा मेरे गले तक पानी ए गया तब मुझे पता चला की अरे भाई नदी तो बहुत ही गहरी है किंतु पानी इतना स्वच्छ निर्मल है बोलकर के उसे तक ताला इतना स्पष्ट दिखता है वो मैंने कैसे भी करके मैं वापस ए गया वरना और दो-तीन कम बढ़ता तो एकदम जोर से पानी आता है तो दूध से क्योंकि वो तो हिमालय से ऊपर से नीचे गिरता हुआ पानी आता है हालांकि वहां पर जमीन है किंतु फिर भी पानी का प्रवाह बहुत ही मेगवान है और थोड़े कम बढ़ता तो मैं सीधा जाता पानी के प्रवाह में तो अन्य उसे दिन तो बैक गया किंतु वह इतना सुंदर जगह फिर उसके किनारे इस तरह से कुछ कुछ मंदिर मैंने देख करके रखें थे जहां पर कोई नहीं आता और वहां पर चाय वाले कुछ खड़े रहते हैं मुझे पता नहीं वहां पर क्यों खड़े रहते हैं शायद ट्रक वगैरा निकाल होगा और ट्रक वाले वहां पर चाय पीते होंगे जो भी है मुझे तो इतना अच्छा लगा मैं वहां से चाय का एक दो तीन ग्लास उसको बोल के रखा था मैं वहां पे जा रहा हूं अभी एक जिला साथ में लेक जा रहा हूं बाद में आधे घंटे के बाद में और लेक आना है दूसरा ग्लास और आधे घंटे के बाद में और तीसरा लेक आना मैं पैसा उसको दे देता था पहले से ही तो एक चाय का गिलास लेकर के जाकर के बैठता था वो साथ में वो कुछ किताब वगैरा राहत था तो एक यहां पे पुराना मंदिर है यहां पे गंगा का तट है और कोई नहीं है जहां तक नजर जाएगी शाम को कुछ-कुछ लोग टहलने के लिए वो आते थे दिन के समय तो कोई नहीं दिखेगा और ठंडी का समय था बोल करके धूप वगैरा भी ज्यादा नहीं था बीच-बीच में बादल ए जाते थे तो इस तरह की सुनसान वीरान जगह हो पुराना मंदिर हो वहां पर सही सही और ये पुराने मंदिर में भी तो मंदिर एक क्यों की वहां पर कितने सड़क साधु संत लोगों ने तपस्या की है बोलकर के वो मंदिर हुआ है और यह जो तीर्थ स्थान तो पूरे वह आध्यात्मिक वाइब्रेशन से वह एकदम भरे हुए हैं जैसे आज हम मोबाइल निकलेंगे ना पॉकेट में से सीधा वो 4g 5g पकड़ता है हमको दिखता है क्या रे टावर वगैरा तो कहानी पे दिखे नहीं रहा है कहां से ये सिग्नल पकड़ता है किंतु वो सिग्नल हवा में तैरते रहते हैं तो वैसे ही भारत की भूमि में और खासकर के ये पूनिया तीर्थ क्षेत्र में ये वो 4g अपना वो 10g बोलो ना की 20 जी बोलो ये सब ठाकुर के सिग्नल तैरते रहते हैं जैसे ही हमने आंख बैंड करके विचारों को शांत करके वो सिग्नल को पकाने का पर्यटन किया सीधा वो मूवी अपने मन में चालू हो जाएगा दक्षिणेश्वर का मूवी कमरपुकुर का जय राम बेट में मां है बेलूर मठ में राजा महाराजा का वो फोटो शायद देखा होगा फोटोग्राफ एक लंबी सी चेयर है जिसमें बैठकर के राजा महाराजा हुक्का पी रहा है और वह फोटो देखकर के मुझे इतना अच्छा लगता था फिर मेरा बेलूर मठ में ट्रेनिंग सेंटर में हमको ड्यूटी दी जाति है तो राजा महाराज के समाधि मंदिर में मेरा ड्यूटी लगा तो हमको पहले तीन दिन तक हमारे जो सीनरी महाराज होते हैं वो समझा देते हैं की किस तरह से क्या क्लीनिंग करना है क्या करना है तो क्लीनिंग के भी जैसे दरवाजा क्लीन करना है तो उसका अलग से कपड़ा फिर वो खिड़की क्लीन करना है अलग से कपड़ा वह मंदिर बेदी की सफाई करनी है तो उसके लिए अलग से कपड़ा वो एकदम सभी चीजों के लिए अलग-अलग वस्त्र रहते हैं और इस जी सीक्वेंस में हमारे सीनरी हमको बताते हैं इस सीक्वेंस में उसको क्लीन करना है और मां में जब चलते रहना चाहिए तो नीचे ग्राउंड फ्लोर पे तो सब कुछ मुझे बताया वो आपने देखा होगा शायद की राजा महाराज की वो आर एस मार्बल की वो मूर्ति है फिर वो बाहर में वो वरांडा जैसा है फिर मुझे वह ऊपर ले गए महाराज जो मेरे सीनरी तो वहां पर राजा महाराज का शयन गुरु है और वहां पर यह कुर्सी जी कुर्सी पर महाराज बैठ करके हुक्का पी रहा है वो कुर्सी वहां पे पड़ी है तो वो देखकर के मुझे इतना आनंद हुआ अरे आप रे यह तो वही कुर्सी है जिसका फोटो में इतना बार-बार देखा रहा हूं फिर वो उसको भी तो क्लीन करना है ऑफ कोर्स सब कुछ क्लीन करना है तो उसके लिए तीन कर वो वस्त्र अलग से रखें हैं एक वस्त्र रहे जिसको की पहले हाथ जो हाथ रे जिसको बोलते हैं ना तो आम रेस्ट उससे क्लीन करना है वो फिर उसके जो पर होते हैं कुर्सी के वो पर इस वस्त्र से क्लीन करना है और जी ऑर्डर में वो बताया है इस ऑर्डर में इस सीक्वेंस में उसको क्लीन करना है और उसको इतना ही समय लगा चाहिए क्लीन करने में ज्यादा भी नहीं कम भी नहीं तो ठाकुर की कृपा से दो महीना मेरी ड्यूटी थी प्रतिदिन उसे कुर्सी को मैं क्लीन करता था और मैं सोचता राहत था की मां लीजिए की यदि राजा हमारा होते वहां पर तो कैसे उनको हमने बैठे हैं मैं उनके सामने बैठा हूं कितना वो सुंदर वो ऐसी स्मृति कथाएं हैं बाद में हम यदि समय मिलेगा वो कुछ स्मृति कथ्यम देखेंगे की राजा महाराजा सबको आरती सुबह को मंगल आरती के बाद में सभी साधु ब्रह्मचारी जब ध्यान करने के बाद में राजा महाराज के कमरे में इकट्ठा होते थे और फिर वहां पे बैठ करके वह घंटे भर तक गैप लगा राहत था फिर बाबू राम महाराज बड़े नाराज हो जाते थे और नीचे से चिल्लाते थे यह कहां की बात है यदि आपने बेलूर मठ में गए होंगे तो देखा होगा की जो पुराना श्रेयान जिसको हम आज कहते हैं उसे समय तो ठाकुर का नया मंदिर नहीं बना था तो जो पुराना मंदिर ही तो एक मंदिर था जहां पर ठाकुर के फोटोग्राफ की स्थापना हुई थी जी मंदिर में बैठकर के स्वामी जी ने स्वयं जब ध्यान किया था ठाकुर की पूजा की होगी तो मंदिर अभी आज का पूरा नाच लाइन ओल्ड लाइन उसके सामने ही एक पैसे जैसा है से और टेरेस में से आप वह पुराना मठ बड़ी जिसको बोलते हैं जहां पर आज मैनेजर महाराज जिसकी ऑफिस है उसको ग्राउंड फ्लोर पर मैनेजर महाराज है और फर्स्ट फ्लोर पे आप देखेंगे स्वामी जी का बेडरूम है तो स्वामी जी के बेडरूम के सामने की और जो कैमरा है वहां पर राजा महाराजा रहते थे तो उसे कमरे में सभी साधु ब्रह्मचारी इकट्ठा होंगे सुबह को आप मंगल आरती के बाद में जब ध्यान के बाद में और राजा महाराजा गैप लगाते गैप मैन तो हात्मिक साबुन है वो बातें करते ही जाएंगे बातें करते ही जाएंगे सब लोग सुनते ही जाएंगे फिर नीचे में से वो जो कोर्टयार्ड है वो आम का पेड़ है वहां से वो सीडी जहां से ऊपर जाति है ओल्ड श्री में जान के लिए वहां से बाबूराम महाराज चिल्ला चिल्ला करके बोलेंगे अरे बेटा कुछ आया चीज है रे कांच के कोरब अरे कहां पे हो तुम लोग नीचे आओ कम कौन करेगा किचन में कम है मंदिर में कम है ऑफिस में कम है कितना सब कुछ वो बाबू राम महाराज जी तो वहां के मैनेजर थे तो फिर राजा महाराज कमरे से बाहर आकर के बोलते थे की बाबू रामदास यह डर के मुक्ति दिए दिल ही हुए क्लास तासीर दूर का अर्थ देना अर्थात की बाबूराम डा इन लोगों को आप मुक्ति दे दीजिए इससे की ये लोग पूरा दिन कम ही करते रहे और उनको फिर क्लास वगैरा सत्संग करने की कोई जरूर ना हो तो अभी हम इस तरह के तीर्थ क्षेत्र में जाकर के अपने विचारों को थोड़ा सा बैंड करके ये जो ठाकुर के सिग्नल जो है उसको पकाने का पर्यटन करेंगे तो इम्मीडिएटली ये जो मोबाइल पर यह युटुब में जो सब दिखता है मूवी वगैरा वो वैसे ही मूवीज वो हमको दक्षिणेश्वर की बेलूर मठ की कमपुकुर की जय अंबाती की वह देखनी शुरू हो जाएगी तो इसीलिए वो मुझे पुरानी जगह पुराने मंदिर बहुत पसंद है एक दिन शानदार किछु पैर ग्रामर लॉकर शंकर ध्वनि सुनते पहले एक दिन संध्या के बाद में गांव के लोग उनको शंकर ध्वनि सुने दिया मोदी ने दिखे बम बम करें मंदिर की और से शंकर ध्वनि सुने देती है भून करके ग्रामीण लखेरा म्यूनिख ठाकुर प्रतिष्ठा के ऊपर आरती हो जय गांव में लोग सोने लगे अरे वहां पर किसी ने ठाकुर की प्रतिष्ठा की है संध्या के बाद में आरती हो रही है चले बडो पुरुष में शकलें दौड़े दौड़े मंदिर समिक किया उपस्थित बच्चे बूढ़े पुरुष स्त्री सब लोग दौड़ करके जाकर के मंदिर के भीतर में उपस्थित हो गए मंदिर के सामने जाकर के उपस्थित हो गए ठाकुर दर्शन कर बी ठाकुर के दर्शन करेंगे प्रतिमा का ईश्वर की प्रतिमा की जो स्थापना हुई है तो उन्होंने सोचा उसका दर्शन करेंगे और आरती का दर्शन आरती का भी आरती को भी देखेंगे आरती देखेंगे तादिर मध्य एक जॉन मंदिर द्वारा अस्त्र अष्ट खुला देखें उसके जो इकट्ठा हुए उसमें से एक गांव वाले ने मंदिर का दरवाजा धीरे-धीरे खोल और देखा क्या देखा पदमालोचन एक पैसे धरिए भू-भू शंकर बजाते है पदमालोचन ये जो पगले जैसा लड़का एक कोनी में खड़ा हुआ करके शंकर बजा रहा है ठाकुर प्रतिष्ठा हुए नहीं मंदिर अर्जुन हुए नहीं चमचिकर विस्तार हो छे ठाकुर की ईश्वर की प्रतिमा की प्रतिष्ठा भी नहीं हुई मंदिर का साफ सफाई भी नहीं हुआ जमीन के ऊपर में जो पेट चमगादड़ की विस्ता सब कुछ पैसे का वैसा ही पड़ा है तब जी आदमी ने दरवाजा खोल था वह चिल्ला करके बोल उठा मंदिर तुम्हारे मंदिर में माधव अर्थात ईश्वर तो है नहीं वह दो शंकर उनके अभी ठाकुर इसकी पुरी व्याख्या करते हैं की यह जो तीन सेंटेंस का यह जो छोटी सी कविता इसका क्या फिलोसॉफिकल अर्थ है जो की हम कल देखेंगे ओम शांति शांति राम कृष्णा